एनसीएल के खदान विस्तार में शहरी-ग्रामीण इलाक़े प्रभावित, कम मुआवज़े पर लोगों की ज़मीन ली जा रही
आर्टिकल 14 की रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के सिंगरौली शहर में बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ रहे हैं. शहर का लगभग एक चौथाई हिस्सा कोयला खदान बढ़ाने के लिए खाली कराया जा रहा है. यह खदान नॉर्थेर्न कोलफ़ील्ड्स (एनसीएल) चलती है, जो कोल इंडिया लिमिटेड की कंपनी है. यह विस्तार जयंती और दुधिचुआ ओपनकास्ट खदानों के लिए किया जा रहा है, जबकि जयंती खदान 2034 तक खत्म होने वाली है, यानी आठ साल से भी कम समय में. इसके बावजूद, हज़ारों लोगों को हटाया जा रहा है. वार्ड 3 से 10 तक के लगभग 50,000 निवासी और 22,000 से अधिक घरों व व्यावसायिक ढांचों को हटाने की योजना है.
होर्मुज़ में बारूदी सुरंगें बिछाने वालों को देखते ही गोली मारने का ट्रम्प का आदेश
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को अमेरिकी नौसेना को सख़्त आदेश दिया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली किसी भी नाव को देखते ही गोली मार दी जाए. यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब पेंटागन ने घोषणा की है कि अमेरिकी बलों ने ईरान से तेल ले जा रहे एक और प्रतिबंधित टैंकर को अपने कब्ज़े में ले लिया है.
‘तृणमूल के गुंडों’ पर सीआरपीएफ की कार्रवाई? बांग्लादेश का पुराना वीडियो गलत दावे के साथ वायरल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से जोड़कर सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. इसमें मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति नीचे उतरकर एक दरवाज़े पर कुल्हाड़ी से हमला करते नज़र आ रहे हैं. थोड़ी ही देर बाद सुरक्षाकर्मी द्वारा इन्हें हिरासत में ले लिया जाता है. यूज़र्स इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे है कि टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के दो गुंडे बाइक पर सवार होकर मतदाताओं को डराने आए थे, जिन्हें चुनाव के दौरान तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने रोक दिया और तुरंत गिरफ़्तार कर लिया.
बंगाल चुनाव: भाजपा ने राहुल गांधी के वीडियो क्लिप का इस्तेमाल कर उन्हें धन्यवाद दिया!
भाजपा की पश्चिम बंगाल ईकाई ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक 13 सेकंड का वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें वे बंगाल के मतदाताओं को संदेश दे रहे हैं. भाजपा ने इस क्लिप को साझा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया.
‘द टेलीग्राफ’ ब्यूरो के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी क्लिप में यह कहते सुनाई दे रहे हैं: “अगर ममता जी ने एक साफ-सुथरी सरकार चलाई होती, अगर उन्होंने राज्य का इस हद तक ध्रुवीकरण नहीं किया होता, तो भाजपा के लिए रास्ता साफ नहीं होता.”
शमशेरगंज एक सैंपल: मतदान से पहले ही ‘एसआईआर’ ने बदला चुनावी समीकरण, भाजपा को वोटिंग से पूर्व लाभ
अपर्णा भट्टाचार्य की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्यतः मतदाता सूची से नाम ‘एएसडीडी’ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, विस्थापित या मृत) श्रेणी के तहत हटाए जाते हैं. शमशेरगंज में इस प्रक्रिया से केवल 16,836 नाम हटाए गए. विलोपन का सबसे बड़ा कारण ‘विचाराधीन’ (अंडर एडजुडिकेशन) प्रक्रिया रही. इस प्रक्रिया के तहत 1,08,400 मतदाताओं को चिन्हित किया गया, जिनमें से लगभग 68.98% (74,775 लोग) के नाम अंततः काट दिए गए.
एक अलग आवाज़: बंगाल बोल रहा है, भारत को सुनना चाहिए
‘द टेलीग्राफ’ में मनोज झा ने अंग्रेजी में लिखा है कि, 2026 की शुरुआत तक, भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर 15 भारतीय राज्यों में शासन कर रही है, जबकि उसका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 28 में से 19 राज्यों की सरकारों को नियंत्रित करता है और लोकसभा की 293 सीटों पर काबिज है, जो सदन का 54% है. स्वतंत्रता के शुरुआती दशकों में कांग्रेस के प्रभुत्व के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने भारत के संघीय परिदृश्य के इतने बड़े हिस्से पर एक साथ नियंत्रण नहीं किया है. अपने मूल में, बंगाल इस बात की परीक्षा ले रहा है कि क्या एक मजबूत क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाला गर्वित प्रगतिशील राज्य भाजपा के निरंतर विस्तार का सामना कर सकता है, और क्या भारत के संघीय लोकतंत्र में अब भी कोई सार्थक बहुलता बची है.
परिसीमन की राजनीति:उत्तर-दक्षिण असंतुलन और कंपनसेशन पॉलिटिक्स
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में अर्थशास्त्री रथिन रॉय से परिसीमन, उत्तर बनाम दक्षिण का संतुलन, और बदलती राजनीति पर गहन चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर भारत में “वन पर्सन, वन वोट” का सिद्धांत व्यवहार में क्यों लागू नहीं है.1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का जो फिक्सेशन हुआ, उसने आज एक ऐसी स्थिति बना दी है जहां जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के बीच असंतुलन स्पष्ट दिखता है.
‘लाखों मतदाताओं का छूटना हमारे लोकतंत्र पर कलंक है’: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने चुनाव आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ‘द वायर’ के एमके वेणु को दिए इंटरव्यू में रावत ने कहा कि जिस बड़े पैमाने पर लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब पाए जा रहे हैं, वह "हमारे लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक" है. उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और वह वोट दे सके. यदि लाखों लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह जाते हैं, तो यह चुनाव की शुचिता पर सवाल खड़ा करता है.
ऑनलाइन गेमिंग पर सरकार का ‘कंट्रोल मोड’: नए नियम लागू, पैसे वाले गेम्स पर सख्ती
भारत सरकार ने देश के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग बाजार को विनियमित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. करोड़ों उपयोगकर्ताओं और बढ़ते वित्तीय लेनदेन को देखते हुए, केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग का प्रचार और विनियमन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है. ये नए नियम आगामी 1 मई से प्रभावी होने जा रहे हैं.
क्या गरीबी सच में ‘जातिहीन’ है? तेलंगाना सर्वे ने ‘समान हालात’ की सदियों पुरानी दलील तोड़ी
सामान्य वर्ग के लोग पढ़ाई के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में जाते हैं, जबकि एससी-एसटी समुदाय मुख्य तौर पर पश्चिम एशिया में मज़दूरी के लिए जाते हैं. वहीं, राज्य की 30% कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अपेक्षाकृत कम पिछड़े वर्गों को मिल रहा है. हालांकि आरक्षण से एससी, एसटी और बीसी को सरकारी नौकरियों में कुछ मदद मिली है, लेकिन ग्रुप 1 सेवाओं में उनकी भागीदारी अभी भी कम है.
और तो और ये साहब भी यथावत हैं, बल्कि जज साहब का तबादला हो गया!
ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान देश का प्रतिनिधित्व करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक और अदालत द्वारा “गटरनुमा” कही गई टिप्पणी के बावजूद उनका पद पर बने रहना कई सवाल खड़े करता है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए महज़ चार घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था और पुलिस को फटकार भी लगाई थी. बावजूद इसके, मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, मंत्री माफी भी मांग चुके हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है.
पहलगाम: एक साल बाद भी, मोदी सरकार ने उन ‘चूक’ पर स्थिति स्पष्ट नहीं की जिनके कारण हमला हुआ
पहलगाम एक अत्यधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है, जहाँ अमरनाथ यात्रा के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहते हैं. बैसरन के 10 किमी के भीतर सेना का कैंप और 5 किमी पर सीआरपीएफ की चौकी होने के बावजूद, पर्यटकों के रास्ते पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था. चौंकाने वाली बात यह है कि बैसरन के लिए निर्धारित सीआरपीएफ की दो कंपनियों में से एक को हमले से ठीक पहले कहीं और तैनात कर दिया गया था. इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा जारी किए गए हमलावरों के स्केच भी बाद में एनआईए द्वारा गलत पाए गए, जो जांच और जमीनी स्तर के समन्वय की कमजोरी को उजागर करता है.
ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.
जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.
भारतीय मेडिकल छात्र ने एआई से बनाई ‘मागा गर्ल’, अमेरिकी मर्दों को ठगकर कमाए हज़ारों डॉलर
ऑर्थोपेडिक सर्जन बनने की चाहत रखने वाले इस छात्र ने ‘जेनरेटिव एआई’ टूल्स का इस्तेमाल कर ‘एमिली हार्ट’ नाम की एक फर्जी गोरी और खूबसूरत अमेरिकी महिला बनाई. सैम का उद्देश्य अमेरिका जाने के लिए अपनी लाइसेंसिंग परीक्षाओं और खर्चों के लिए फंड जुटाना था. उसने इंस्टाग्राम पर एमिली को एक रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) नर्स के रूप में पेश किया, जो डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक (मागा- मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) है और बंदूकें रखने व ईसाई धर्म का कट्टर पालन करने की बातें करती है.
2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप रद्द किए
इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में उस विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है , जिसमें चार आरोपियों , मनोहर नरवरिया, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और लोकेश शर्मा के ख़िलाफ़ आरोप तय करने को कहा गया था.
मोदी के भाषण और आचार संहिता पर विवाद, 700 नागरिकों की चिट्ठी से बढ़ी बहस, “टॉकिंग न्यूज़” में विस्तृत चर्चा
700 से अधिक नागरिकों, सेवानिवृत्त नौकरशाहों और एक्टिविस्टों ने इलेक्शन कमीशन को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई. पत्र में कहा गया कि जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, तब सरकारी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों पर हमला करना आचार संहिता का उल्लंघन है. साथ ही यह मांग भी की गई कि चुनाव आयोग इस मामले में कार्रवाई करे, विपक्षी दलों को भी सरकारी मीडिया पर समान अवसर मिले और चुनाव खत्म होने तक ऐसे डिजिटल कंटेंट को हटाया जाए. हालांकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि इसमें कोई गलत काम नहीं किया गया.
लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए यह हार ज़रूरी थी. इसे न केवल सरकार की हार, बल्कि विपक्ष की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए. इसने विपक्ष में आत्मविश्वास बहाल किया है. जनता के बीच भी अब विपक्ष के नज़रिए को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है. नागरिकों ने इस बार संसदीय बहसों को बहुत ध्यान से देखा और सुना. वे यह समझने के लिए "मुख्यधारा" के मीडिया से इतर देख रहे हैं कि सरकार कहाँ और कैसे धोखे का सहारा लेती है. ऐसा प्रतीत होता है कि जनता सरकार के इस दावे को स्वीकार करने वाली नहीं है कि वह केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए कानून ला रही थी और उसे एक "स्त्री-द्वेषी" विपक्ष ने रोक दिया.
अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
आरएसएस नेतृत्व महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को संभालने के तरीके को लेकर मोदी और शाह से नाराज़ है. उन्होंने यह उम्मीद नहीं की थी कि एक सावधानीपूर्वक नियोजित रणनीति को इस जोड़ी द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा. बंगाल में मोदी द्वारा लगभग पूरे भाजपा नेतृत्व और मंत्री सहयोगियों की तैनाती का उल्टा असर हुआ है, क्योंकि कई बंगाली उनके प्रचार के अंदाज़ को बंगाली संस्कृति और सामाजिक मानदंडों को नज़रअंदाज़ करने वाला मान रहे हैं. परिसीमन विधेयक का उपयोग उस तरह से नहीं किया गया जैसा कि आरएसएस ने मूल रूप से सोचा था.
“अब नहीं आऊंगा दोस्त…”: सूरत से पलायन की पीड़ा के बीच नोएडा से तमिलनाडु तक मज़दूर असंतोष
सूरत से एक प्रवासी मज़दूर का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह यह कहते सुनाई दे रहे हैं, “अब नहीं आऊंगा दोस्त, बता देना”. यह वाक्य लाखों मज़दूरों कीसामूहिक पीड़ा और टूटन का प्रतीक बन गया है. ये वही लोग हैं जो छोटे कस्बों और गांवों से बड़े शहरों में रोज़गार की तलाश में आए थे, लेकिन अब परिस्थितियां उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर रही हैं. नोएडा में यह असंतोष खुले विरोध के रूप में सामने आया. हज़ारों फैक्ट्री मजदूर सड़कों पर उतर आए और ऊंचे वेतन तथा बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग करने लगे

