छत्तीसगढ़ में पेसा कानून का ग़लत इस्तेमाल: आदिवासियों को सशक्त करने वाला कानून बना ईसाइयों के ख़िलाफ़ हथियार
बस्तर के कांकेर जिले के डोमपदर गांव के सरपंच देवलाल वट्टी का मामला इस बढ़ते तनाव को दिखाता है. वट्टी ने एक बार अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए धर्म की स्वतंत्रता की बात लिखी थी. इसके कुछ ही समय बाद उन्हें गांव की बैठक में बुलाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया. वट्टी, जो खुद आदिवासी पारंपरिक धर्म कोया पुनेम के अनुयायी हैं, का कहना है कि बस्तर में कई धर्म आए हैं और सभी ने स्थानीय संस्कृति को प्रभावित किया है, लेकिन निशाना केवल ईसाइयों को बनाया जा रहा है.
असम सीएम की पत्नी पर टिप्पणी मामला: पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के संबंध में अग्रिम जमानत की मांग की है.यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है. न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल चांदुरकर की पीठ ने पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई की, जो गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद दायर की गई थी.
पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92% मतदान, लेकिन वजह बनी घटती मतदाता संख्या
चुनाव से पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के कारण मतदाता सूची में बड़ी कटौती हुई. इस प्रक्रिया में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 11% घटकर 7.66 करोड़ से 6.26 करोड़ रह गई. यह प्रक्रिया काफी विवादित रही है. इसी तरह 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां 7.34 करोड़ मतदाता थे, वहीं हालिया चुनाव में यह संख्या घटकर 6.82 करोड़ रह गई, यानी करीब 7% की कमी आई है.हालांकि मतदाताओं की संख्या कम हुई, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या में केवल 3.6% की ही बढ़ोतरी हुई, जो पिछले दस विधानसभा चुनावों में सबसे कम वृद्धि मानी जा रही है.
“लग रहा है कि घर में बेघर हो गए हम”: मतदान के लिए व्हीलचेयर तैयार रखी थी, लेकिन सूची से नाम ही हटा दिया
परवेज़ ने आँखों में आँसू भरकर कहा, “लग रहा है कि घर में बेघर हो गए हम. मतदान का दिन एक उत्सव होता है—लोकतंत्र का उत्सव. हम एक परिवार के रूप में इसमें भाग लेते थे. इस बार हम सिर्फ गवाह हैं. और कुछ नहीं कर सकते हम. यह दर्द देता है.”
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.34 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा
पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू इक्विटी में बिकवाली और वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते, रुपया गुरुवार (30 अप्रैल 2026) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.34 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके बाद मिड-सेशन सौदों में यह 95.25 पर कारोबार कर रहा था.इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया डॉलर के मुकाबले 95.01 पर खुला और फिर 46 पैसे टूटकर 95.34 के रिकॉर्ड इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गया. दोपहर के सत्र में, घरेलू मुद्रा 37 पैसे की गिरावट के साथ 95.25 पर कारोबार कर रही थी.
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत छह स्थान फिसला, पाकिस्तान पांच पायदान ऊपर चढ़ा
भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) द्वारा प्रकाशित विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर खिसक गया है. पिछले साल वैश्विक मीडिया स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 151वें स्थान पर था. भारत का परमाणु-संपन्न पड़ोसी देश पाकिस्तान 153वें स्थान पर है, जो पिछले साल के 158वें स्थान से बेहतर हुआ है.
योगेंद्र यादव: पश्चिम बंगाल चुनाव में अल्पसंख्यकों को बाहर करने की साज़िश
इंडियन एक्सप्रेस के ओपिनियन कॉलम में स्वराज इंडिया के सदस्य और भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव लिखते हैं कि पिछले 10 महीनों में पश्चिम बंगाल में ‘स्पेशल इम्पेडिमेंट रिमूवल’ (एसआईआर) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना एक सामान्य बात बन गई है. बंगाल का यह मामला मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का एक असाधारण उदाहरण है.
ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- परमाणु समझौता होने तक जारी रहेगी नौसैनिक नाकेबंदी
अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस के रिपोर्टर बराक राविड की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है जिसमें पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने, और फिर परमाणु वार्ता को बाद के चरण तक टालने की बात कही गई थी. ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि जब तक ईरानी शासन अमेरिका की चिंताओं को दूर करने वाले परमाणु समझौते पर सहमत नहीं हो जाता, तब तक वह ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेंगे.
‘हम बनाम वे’ की मानसिकता से पैदा होती है हेट स्पीच; कानूनों का खराब प्रवर्तन ‘हेट क्राइम्स’ की वजह: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को कहा कि नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) और अफवाह फैलाना “हम बनाम वे” की मानसिकता से उपजा है और यह एक विविध समाज में भाईचारे की भावना को दूषित करने का काम करता है. हालांकि, अदालत ने नफरत भरे भाषणों और अपराधों के खिलाफ विशिष्ट कानून बनाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया, इसके बजाय इस अपराध को कवर करने वाले मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने का आव्हान किया.
दाभोलकर हत्याकांड: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी शरद कलस्कर को दी जमानत, रोक लगाने की याचिका खारिज
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस ने की थी और बाद में उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर 2014 में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था.
‘एनएचआरसी’ मुसलमानों पर हो रहे हमलों की अनदेखी कर रहा है और उन मामलों में दखल दे रहा है जो उससे संबंधित नहीं हैं: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के गंभीर मामलों की अनदेखी कर रहा है, जबकि उन मामलों में लगा हुआ है “जो प्रथम दृष्टया उसके कार्यक्षेत्र से संबंधित नहीं हैं.”
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कार्ति चिदंबरम के मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग, शराब कंपनी से कथित रिश्वत का आरोप
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने सीबीआई द्वारा दर्ज कथित भ्रष्टाचार मामले को रद्द करने की मांग की थी. यह मामला कथित ‘डियाजियो स्कॉटलैंड रिश्वत प्रकरण’ से जुड़ा है. सीबीआई का आरोप है कि वर्ष 2005 में, जब पी. चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे, तब कार्ति चिदंबरम ने शराब कंपनी डियाजियो स्कॉटलैंड को उसकी व्हिस्की की ड्यूटी-फ्री बिक्री पर लगे प्रतिबंध से राहत दिलाने में भूमिका निभाई थी.
हरकारा डीप डाइव | सुमित झा| क्या गरीबी का संबंध जाति से है? तेलंगाना सर्वे ने दिया जवाब!
तेलंगाना का ताज़ा जाति सर्वे इस सोच को खारिज करता है कि अगर समाज से जाति खत्म करनी है तो जाति जनगणना की जरूरत नहीं है. आंकड़े साफ दिखाते हैं कि जाति आज भी हर जगह मौजूद है, चाहे गांव में पानी पीने की व्यवस्था हो या शहर में रहने की स्थिति. अनुसूचित जाति के परिवार सामान्य वर्ग की तुलना में लगभग चार गुना ज़्यादा मेडिकल लोन लेते हैं. इसका कारण यह है कि इन समुदायों के लोग अधिकतर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जहां नौकरी की सुरक्षा या स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं नहीं होतीं. बीमारी की स्थिति में इन्हें पहले झोला-छाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, और जब हालत बिगड़ती है तो महंगे निजी अस्पतालों में क़र्ज़ लेकर इलाज कराना पड़ता है. यह क़र्ज़ भी अक्सर बैंक से नहीं बल्कि निजी मनीलेंडर्स से लिया जाता है, जिसे चुकाने के लिए कई बार मज़दूरी तक करनी पड़ती है.
भारत की ‘गोल्डीलॉक्स’ अर्थव्यवस्था का मिथक; जीडीपी के मामले में भारत से आगे निकले जापान और ब्रिटेन
इंडियन एक्सप्रेस में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘ग्राफ्स, डेटा, पर्सपेक्टिव्स’ में वरिष्ठ लेखक उदित मिश्रा लिखते हैं कि फरवरी के बजट के समय आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को “दुर्लभ गोल्डीलॉक्स काल” बताया था — यानी वह स्थिति जहां विकास दर ऊंची हो, महंगाई कम हो और बेरोज़गारी भी कम हो. लेकिन ईरान युद्ध और रुपये की गिरावट के बाद जापान और ब्रिटेन दोनों जीडीपी के मामले में भारत से आगे निकल गए हैं. भारत छठे स्थान पर आ गया है.
‘मेड इन इंडिया’ संकट: बंगाल चुनाव में ‘एसआईआर’ ने महानगरों में बढ़ाई घरेलू सहायकों की किल्लत
पश्चिम बंगाल में आज मंगलवार (29 अप्रैल 2026) को दूसरे चरण की 142 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए. इसके पहले 23 अप्रैल को पहले दौर में 152 सीटों के लिए मतदान हुआ था. लेकिन, इस बार राज्य के चुनाव के दौरान एक सवाल पैदा हुआ कि क्या यह हाल के समय में शहरी भारतीय घरों पर आया सबसे बड़ा संकट है? या यह केवल उन परेशान घर-मालिकों को ऐसा महसूस हो रहा है, जिन्हें अब समझ आ रहा है कि वे सहायकों की उस विशाल फौज पर कितने निर्भर हैं जो उनके घरों और शहरों की रफ्तार बनाए रखते हैं, और जो अचानक गायब हो गए हैं?
भारत में हर 8 मिनट में एक परिवार हार्ट फेलियर के इलाज के लिए बेच रहा है अपनी संपत्ति
भारत में हर 8 मिनट में एक परिवार को हार्ट फेलियर के इलाज का खर्च उठाने के लिए अपनी संपत्ति बेचनी पड़ती है. यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि मार्च 2026 में ‘ग्लोबल हार्ट’ में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन की हकीकत है. श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन ने देश के 21 अस्पतालों के 1,859 मरीजों के आर्थिक हालातों का जायजा लिया. भारत में एक हार्ट फेलियर मरीज का औसत वार्षिक खर्च ₹1,06,566 है. इसके विपरीत, बीमारी के बाद इन मरीजों की औसत व्यक्तिगत वार्षिक आय केवल ₹94,392 रह जाती है. यानी इलाज का बिल मरीज की कुल कमाई से भी ज्यादा है.
ईरान संघर्ष: नए शीत युद्ध की आहट, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी
‘एक्सिओस’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ अमेरिकी टकराव अब शीत युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गया है — वित्तीय प्रतिबंध, समुद्री नाकाबंदी और बातचीत के प्रयासों के बीच. कई अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सिस को बताया कि उन्हें डर है कि अमेरिका एक ऐसे “जमे हुए संघर्ष” में फंस सकता है जहां न युद्ध हो न कोई समझौता.
डिजिटल अरेस्ट घोटाला: व्हाट्सएप ने 9,400 खाते बंद किए, सुप्रीम कोर्ट को बताया — पूरे नेटवर्क को किया ध्वस्त
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ है कि व्हाट्सप ने गृह मंत्रालय को बताया कि उसने स्वतंत्र जांच के बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘कानून प्रवर्तन के प्रतिरूपण’ से जुड़े 9,400 खाते बंद किए. कंपनी ने कहा कि उसने महज एक-एक खाता बंद करने के बजाय पूरे ठग नेटवर्क को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो मुख्यतः कंबोडिया में सक्रिय था.
औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर मार्च में 5 महीने के निचले स्तर 4.1% पर पहुँची; पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहला महीना
‘द हिंदू’ में टी.सी.ए. शरद राघवन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर मार्च 2026 में गिरकर पांच महीने के निचले स्तर 4.1% पर आ गई है. पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद यह आंकड़ों का पहला महीना है. निर्माण क्षेत्र (कन्स्ट्रक्शन सेक्टर) की विकास दर में लगभग 50% की गिरावट और उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों में सुस्त वृद्धि ने इस आंकड़े को नीचे पहुँचाया है.
“वोट देने के लिए भरोसा नहीं, लेकिन चुनाव कराने के लिए उन पर पूरा भरोसा है” : बंगाल के चुनाव अधिकारी जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए
जो सरकारी कर्मचारी दशकों से चुनाव ड्यूटी में तैनात होकर लोकतंत्र के इस महापर्व को संपन्न कराने में अपना योगदान देते रहे हैं, “एसआईआर” के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया है. दुखद यह है कि कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अत्री मित्रा की यह रिपोर्ट मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाती है. यह दिखाती है कि कैसे सिस्टम की खामियों के कारण स्वयं 'सिस्टम के रक्षक' (चुनाव अधिकारी) ही 2026 के विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रह गए हैं.

