01/04/2026: मनरेगा अधर में | ओरेकल में छंटनी | एलपीजी महंगा | हॉर्मुज़ संकट गहराया | जनगणना | 'एक्स' बनाम सरकार | यूरिया पर असर | ईरान में फंसे मछुआरे | विज्ञापन खर्च खुलासा | चीन की एंट्री
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फलक अफ़शां, विश्वजीत कुमार
आज की सुर्खियां
केरल में भारी विरोध के कारण लोकसभा में पारित होने के लिए सूचीबद्ध एफसीआरए विधेयक टला
ग्रामीण रोजगार योजना पर संशय: पुराने और नए कानूनों के बीच झूलती ‘मनरेगा’, तरसते श्रमिकों का भाग्य अधर में
एलआईसी की शिकायत पर सीबीआई ने आरकॉम और अनिल अंबानी के खिलाफ नया मामला दर्ज किया
ओरेकल ने भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की: ‘एआई’ की ओर बढ़ते बड़े बदलाव का संकेत
ईरान युद्ध: भारत में यूरिया उत्पादन 24 लाख से घटकर 18 लाख टन हुआ, राज्यों को बिक्री पर नजर रखने के लिए कहा
12 अकाउंट्स पर बैन: ‘एक्स’ ने हाईकोर्ट से कहा- सरकार का ब्लॉकिंग आदेश असंगत, समीक्षा हो
“मैं बेशर्त क्षमा चाहता हूँ” : बीजू पटनायक पर टिप्पणी के बाद बैकफुट पर निशिकांत दुबे
बंगाल एसआईआर विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कहा 47 लाख मामले निपटे, 7 अप्रैल तक पूरी होगी प्रक्रिया
मोदी सरकार ने 11 सालों में विज्ञापन पर खर्च किए 5987 करोड़
हॉर्मुज़ संकट: खाद से खाने की थाली तक फैलता खतरा
भारत में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना
कमर्शियल एलपीजी हुआ महंगा, हवाई ईंधन के भी दाम बढ़े
ईरान में फंसे करीब 600 भारतीय मछुआरे, परिवार परेशान और मदद का इंतज़ार
बिहार: पति की लिंचिंग के बाद सदमे में मुस्लिम महिला ने बच्चों के साथ ज़हर खाया
POSH कानून कागज़ों तक सीमित: घरेलू कामगारों को अब भी नहीं मिल पा रहा न्याय
एफएसएसएआई की नाकामी से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट: चेतावनियों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं
ईरान-अमेरिका जंग का 33वां दिन: चीन-पाकिस्तान की एंट्री, क्या रुकेगी जंग?
टॉकिंग न्यूज़
ईरान-अमेरिका जंग का 33वां दिन: चीन-पाकिस्तान की एंट्री, क्या रुकेगी जंग?
टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश में आज ईरान-अमेरिका जंग के 33वें दिन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह जंग अगले 2–3 हफ्तों में खत्म हो सकती है, लेकिन यह कैसे खत्म होगी और इसके बाद हालात क्या होंगे, इस पर अभी भी असमंजस बना हुआ है.
इस युद्ध में अमेरिका कुछ हद तक अलग-थलग पड़ता दिख रहा है. यूरोप के कई देशों ने खुलकर समर्थन देने से इनकार किया है, जबकि स्पेन और फ्रांस जैसे देशों ने अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति भी नहीं दी. नाटो के भीतर भी मतभेद सामने आ रहे हैं, जिससे अमेरिका की स्थिति और कमजोर होती दिख रही है. इसी बीच चीन और पाकिस्तान ने मिलकर एक शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें युद्ध विराम, बातचीत की शुरुआत और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को फिर से खोलने की बात शामिल है. पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन इस मौके पर अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है.
हमने यह भी बात की, कि तेल आपूर्ति को लेकर भी संकट गहराता दिख रहा है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. इस बीच अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हमले जारी हैं और संघर्ष का दायरा धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैलता नज़र आ रहा है.
अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर विरोध बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में लोग इसके खिलाफ हैं और सैनिकों की तैनाती को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है. कुल मिलाकर, 33 दिनों बाद भी यह युद्ध किसी स्पष्ट नतीजे तक नहीं पहुंचा है और दुनिया की नज़र अब इसके अगले कदम पर टिकी हुई है.
नाटो से बाहर निकलने की धमकी और वैश्विक तेल संकट
ब्रिटेन के ‘द टेलीग्राफ़’ अखबार को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने नाटो को ‘कागज़ी शेर’ करार देते हुए कहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी इस बात को जानते हैं. ट्रंप इस बात से नाराज़ हैं कि यूरोपीय देशों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के उनके आह्वान में साथ नहीं दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अमेरिका भी उनकी मदद के लिए नहीं आएगा. वहीं ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज़ का रास्ता अमेरिका के लिए नहीं खुलेगा.
इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को बुरी तरह प्रभावित किया है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि अप्रैल में तेल की आपूर्ति में होने वाली कमी मार्च के मुकाबले दोगुनी हो सकती है. विशेष रूप से एशिया और यूरोप में जेट ईंधन और डीज़ल की भारी किल्लत होने की आशंका है. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप की घरेलू लोकप्रियता में भी गिरावट आई है. एक नए सर्वे के अनुसार, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 31% रह गई है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा नियंत्रण है और वे बी-52 बमवर्षक विमान सीधे ईरानी क्षेत्र के ऊपर उड़ा रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि ईरान अब भी मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार करने की क्षमता रखता है.
ट्रंप की ‘ताक़त ही सच है’ की नीति और चीन की सधी हुई चाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन वे इसकी भारी कीमत दुनिया पर छोड़ सकते हैं. सीएनएन में स्टीफन कॉलिन्सन के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति सहयोगियों के लिए मुसीबत बन गई है. अगर अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य का नियंत्रण ईरान के हाथ में छोड़कर युद्ध ख़त्म करता है, तो यह ईरान की रणनीतिक जीत होगी. ट्रंप ने ईरान के बिजली घरों और पानी के प्लांटों को तबाह करने की धमकी भी दी है. जानकारों का कहना है कि नागरिक सुविधाओं, विशेषकर पीने के पानी के ठिकानों पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन दबाव बनाने के लिए इसे एक विकल्प मान रहा है.
दूसरी ओर, चीन ने इस पूरे संकट में बहुत ही सधी हुई और व्यावहारिक भूमिका अपनाई है. चीन ने अमेरिका और इज़रायल के हमलों की निंदा तो की है, लेकिन वह सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं हुआ है. चीन का ध्यान अपने तेल हितों को सुरक्षित रखने पर है. वह पाकिस्तान के साथ मिलकर एक शांति योजना पेश कर रहा है ताकि खुद को एक शांतिदूत के रूप में पेश कर सके. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस युद्ध को अमेरिका के लिए एक भटकाव के रूप में देख रहा है, जिससे ताइवान जैसे मुद्दों पर अमेरिका का ध्यान कम होगा. युद्ध ख़त्म होने के बाद चीन ईरान के पुनर्निर्माण में एक बड़ी भूमिका निभाकर वहां अपना प्रभाव और मज़बूत कर सकता है.
ईरान युद्ध पर ट्रंप के बदलते सुर: कहा- ‘अब मुझे यूरेनियम की परवाह नहीं, वो ज़मीन के काफी नीचे दबा हुआ है’
वाशिंगटन में ईरान युद्ध पर राष्ट्र को संबोधित करने से कुछ ही घंटे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने विरोधाभासी संकेत दिए हैं. रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अब उन्हें ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार की चिंता नहीं है, क्योंकि वह ज़मीन के काफी नीचे दबा हुआ है. ट्रंप ने कहा, “वह इतनी गहराई में है कि मुझे उसकी परवाह नहीं है.” उनका यह बयान उनके उस पुराने तर्क के बिल्कुल उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना है. युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में है, लेकिन इसे ख़त्म करने की शर्तों को लेकर राष्ट्रपति की ओर से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है. बुधवार सुबह उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि जब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खुल जाता, तब तक वह युद्धविराम पर विचार नहीं करेंगे.
इसी बीच, तेहरान में बुधवार तड़के भीषण बमबारी हुई. लड़ाकू विमानों ने राजधानी पर शक्तिशाली बम गिराए, जिससे इमारतें हिल गईं और खिड़कियों के कांच टूट गए. स्थानीय निवासियों द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में तेहरान के आसमान में धुएं के गुबार देखे गए. जवाब में ईरान ने भी इज़रायल पर मिसाइलें दागीं, जिसे ईरानी मीडिया ने अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया है. इज़रायल के मध्य शहरों में भारी नुक़सान की ख़बर है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रंप बुधवार रात 9 बजे (ईस्टर्न टाइम) राष्ट्र को संबोधित करेंगे. ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने का लक्ष्य पा लिया है, हालांकि इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं कि अमेरिका या इज़रायल ने ईरान के परमाणु ईंधन भंडार को पूरी तरह नष्ट कर दिया है.
युद्धविराम की चर्चा और नागरिक तबाही का खौफ़नाक मंज़र
अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के साथ एक संभावित समझौते पर चर्चा कर रहे हैं. एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के ज़रिए बातचीत चल रही है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के बदले युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस संबंध में मध्यस्थों से संपर्क में हैं. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के ‘नए शासन’ के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने युद्धविराम की मांग की है. ट्रंप ने ट्वीट किया, “ईरान के नए राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में अधिक बुद्धिमान हैं, उन्होंने युद्धविराम मांगा है. हम इस पर तभी विचार करेंगे जब होर्मुज़ का रास्ता पूरी तरह साफ़ और खुला होगा.” हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को निराधार बताया है.
इस कूटनीति के बीच मानवीय संकट गहराता जा रहा है. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में 244 बच्चों सहित कम से कम 1,598 नागरिक मारे गए हैं. अल जज़ीरा की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के बुनियादी ढांचे, जैसे कि फार्मास्युटिकल कंपनियों और स्टील प्लांटों को निशाना बनाया है. तेहरान में एक दवा कारखाने पर हमले से देश की चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला को भारी नुक़सान पहुंचा है. लेबनान में भी इज़रायली हमलों ने तबाही मचाई है, जहां अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इज़रायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर इस युद्ध में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.
केरल में भारी विरोध के कारण लोकसभा में पारित होने के लिए सूचीबद्ध एफसीआरए विधेयक टला
केंद्र सरकार ने लोकसभा में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित करने की प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है. बुधवार को संसद के भीतर और बाहर भारी हंगामे और “एनजीओ को निशाना बनाना बंद करो” जैसे नारों के बीच, सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़ गए. यह मुद्दा अब केरल में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है, जहाँ धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व एकजुट होकर संपत्ति अधिग्रहण के प्रावधानों को वापस लेने की मांग कर रहा है.
‘द वायर’ के मुताबिक, सरकार को यह निर्णय केरल में होने वाले आगामी चुनावों और वहां के ईसाई समुदाय व विपक्षी दलों (एलडीएफ और यूडीएफ) के कड़े विरोध के बाद लेना पड़ा. ईसाई संस्थाओं (केसीबीसी और सीबीसीआई) और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की थी.
केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक है. उन्होंने विपक्ष पर चुनावी लाभ के लिए जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और स्पष्ट किया कि यह किसी धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है.
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे “असंवैधानिक” और “लोकतंत्र विरोधी” करार दिया है. उनका तर्क है कि सरकार इस कानून के जरिए गैर सरकारी संगठनों और स्वतंत्र संस्थाओं को नष्ट करना चाहती है और उन्हें अत्यधिक सरकारी नियंत्रण में लाना चाहती है.
एलआईसी की शिकायत पर सीबीआई ने आरकॉम और अनिल अंबानी के खिलाफ नया मामला दर्ज किया
‘द हिंदू ब्यूरो’ की ख़बर है कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार (1 अप्रैल, 2026) को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), व्यवसायी अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को कथित तौर पर ₹3,750 करोड़ का गलत तरीके से नुकसान पहुँचाने के लिए एक नया मामला दर्ज किया है.
आरोप है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन द्वारा कंपनी की वित्तीय स्थिति और एनसीडी (नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर) खरीदते समय एलआईसी को दी गई सुरक्षा एवं संपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए गए, जिसके आधार पर एलआईसी को ₹4,500 करोड़ के डिबेंचर खरीदने के लिए धोखाधड़ी से प्रेरित किया गया था.
ओरेकल ने भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की: ‘एआई’ की ओर बढ़ते बड़े बदलाव का संकेत
ओरेकल कॉर्पोरेशन में हाल ही में हुई छंटनी ने वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग में चल रहे एक बड़े बदलाव को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है: और वह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर झुकाव. अमेरिका स्थित इस एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर दिग्गज ने भारत में लगभग 11,000-12,000 नौकरियों में कटौती की है—जो देश में इसके कुल कार्यबल का लगभग आधा हिस्सा है. यह वैश्विक पुनर्गठन अभ्यास का हिस्सा है, भले ही कंपनी एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग निवेश में अरबों डॉलर खर्च कर रही है.
“द इंडियन एक्सप्रेस” में सौम्यरेंद्र बारीक की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेकल की यह छंटनी वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के उस व्यापक पैटर्न को दर्शाती है, जहाँ कंपनियाँ पारंपरिक भूमिकाओं में कटौती कर रही हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश कर रही हैं. उद्योग के अनुमान बताते हैं कि इस साल तकनीकी कंपनियों में हजारों नौकरियों की कटौती की गई है, क्योंकि फर्में खुद को एआई-संचालित विकास के इर्द-गिर्द पुनर्गठित कर रही हैं.
भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक बड़ा तकनीकी विकास केंद्र है, इसलिए इस तरह के पुनर्गठन का यहाँ बड़ा प्रभाव पड़ता है. हालाँकि भारत एक प्रमुख इंजीनियरिंग और सेवा केंद्र बना हुआ है, लेकिन ऑटोमेशन और एआई की ओर झुकाव से भर्ती के तरीकों में बदलाव आ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को ईमेल के जरिए सूचित किया गया कि संगठनात्मक बदलाव के कारण उनकी भूमिकाएं समाप्त कर दी गई हैं. रिपोर्टों के अनुसार, यह सूचना बहुत कम पूर्व चेतावनी के साथ दी गई. छंटनी का शिकार होने वालों में वरिष्ठ इंजीनियर, आर्किटेक्ट, ऑपरेशंस लीडर, प्रोग्राम मैनेजर और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी अपने संसाधनों को पारंपरिक एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और आंतरिक कार्यों से हटाकर एआई-रेडी डेटा सेंटर बनाने और अपनी क्लाउड सेवाओं के विस्तार में लगा रही है. ओरेकल अमेज़न और गूगल जैसे दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ा रहा है. इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण प्रयासों में से एक “स्टारगेट” एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. यह एआई वर्कलोड के लिए अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर विकसित करने का एक विशाल प्रयास है, जिसमें आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर का निवेश शामिल होगा.
कंपनी ने पिछले कुछ महीनों में अपने कई उत्पादों और क्लाउड सेवाओं में ‘जेनरेटिव एआई’ क्षमताओं को जोड़ा है, ताकि वह खुद को एआई अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता के रूप में स्थापित कर सके. बहरहाल, ओरेकल में हुई यह छंटनी एआई विकास के लिए आवश्यक भारी पूंजी और उस मानव श्रम के बीच के तनाव को दर्शाती है, जिसने पहले सॉफ्टवेयर उद्योग को संचालित किया था. यह परिवर्तन अब वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के अगले चरण को परिभाषित कर रहा है.
“द हिंदू” में ‘पीटीआई के हवाले से खबर है कि वैश्विक स्तर पर, कंपनी ने लगभग 30,000 कर्मचारियों को निकाला है. छंटनी से प्रभावित दो व्यक्तियों ने, जिनमें से एक कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग से है, बताया, “भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई है. कंपनी एक महीने के भीतर एक और बड़ी छंटनी की योजना बना रही है.” भारत में कंपनी के लगभग 30,000 कर्मचारी हैं, जिनमें छंटनी से प्रभावित कर्मचारी भी शामिल हैं. ओरेकल ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
ओरेकल ने कर्मचारियों को भेजे एक ईमेल में कहा कि उन्हें कुछ संगठनात्मक परिवर्तनों के बारे में सूचित किया गया था और “इन परिवर्तनों के कारण, संचालन को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है, और परिणामस्वरूप, दुर्भाग्य से, वर्तमान में आपके पास जो पद है वह अतिरिक्त हो जाएगा.” कंपनी ने एक विदाई पैकेज भी दिया है, लेकिन केवल उन लोगों के लिए जो स्वेच्छा से और सौहार्दपूर्ण ढंग से कंपनी से इस्तीफा देते हैं.
ओरेकल के एक पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर ने कहा कि उन्हें सितंबर में भारत में कंपनी की 16 घंटे की शिफ्ट का विरोध करने के कारण निकाल दिया गया था. श्रीधर ने कहा, “मैंने अपने दोस्तों और मानव संसाधन विभाग के लोगों से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका में कंपनी के साथ काम करने वाले अधिकांश भारतीय प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वहां अपने नागरिकों की छंटनी को लेकर स्थानीय कानून बहुत सख्त हैं.”
ईरान युद्ध: भारत में यूरिया उत्पादन 24 लाख से घटकर 18 लाख टन हुआ, राज्यों को बिक्री पर नजर रखने के लिए कहा
दीपक के. दाश की रिपोर्ट है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू यूरिया निर्माण प्रभावित हुआ है, जिससे इस महीने उत्पादन पिछले औसत 24 लाख टन से गिरकर 18 लाख टन रह गया है. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि हर पखवाड़े “स्पॉट बाइंग” (तत्काल खरीद) के माध्यम से एलएनजी की अधिक उपलब्धता के साथ उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक है और आपूर्ति बढ़ाने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है. साथ ही, जिन यूरिया इकाइयों ने इस महीने वार्षिक रखरखाव के लिए उत्पादन बंद किया था, उन्होंने फिर से उत्पादन शुरू कर दिया है. केंद्र ने राज्यों से “लीन सीजन” (कम मांग वाले समय) के दौरान उर्वरकों की बिक्री में किसी भी असामान्य उछाल की निगरानी करने को कहा है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके.
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने बताया कि वर्तमान में मिट्टी के पोषक तत्वों का स्टॉक 180 लाख टन है, जो पिछले साल के स्तर से 22% अधिक है. स्रोतों के विविधीकरण पर उन्होंने कहा कि 13.1 लाख टन यूरिया के लिए एक वैश्विक निविदा जारी की गई है और सऊदी अरब एवं ओमान जैसे देशों के साथ दीर्घकालिक व्यवस्था की गई है. इसके अतिरिक्त, रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी खरीद का विस्तार किया जा रहा है.
शर्मा ने बताया कि भारत के यूरिया आयात का 20-30%, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का 30% और एलएनजी की 50% जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र जिम्मेदार है. इस संकट ने एलएनजी, अमोनिया और सल्फर जैसे इनपुट्स की लागत बढ़ा दी है, साथ ही माल ढुलाई के खर्च में भी वृद्धि हुई है.
उन्होंने आगे बताया कि गैस आपूर्ति आवंटन से संबंधित सूचनाओं ने घरेलू यूरिया उत्पादन को प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक उत्पादन में 30,000-35,000 टन की अस्थायी कमी आई है. शर्मा ने कहा कि वर्तमान में 27 यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति मिल रही है और जो इकाइयाँ रखरखाव के अधीन थीं, वे अब परिचालन फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं. “स्पॉट गैस” खरीदी की वजह से एलएनजी की उपलब्धता अब 75-80 प्रतिशत तक पहुँच गई है. उर्वरक संयंत्रों की प्रतिदिन 52 मिलियन मानक घन मीटर गैस की आवश्यकता में से लगभग 15 मिलियन मानक घन मीटर स्पॉट मार्केट से प्राप्त की जा रही थी.
अधिकारियों के अनुसार, युद्ध-पूर्व की अवधि में जहाँ स्पॉट खरीद की दर $11-12 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट थी, वहीं अब यह $19.5-19.6 पर की गई है. अधिकारियों ने कहा कि इन सभी कारकों के कारण सब्सिडी का बोझ काफी बढ़ जाएगा.
हॉर्मुज़ संकट: खाने की थाली तक फैलता खतरा
इधर, डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इज़राइल और ईरान में चल रहे संघर्ष संघर्षों के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग लगभग ठप होने से वैश्विक खाद्य व्यवस्था पर नया दबाव बन गया है. संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संघ (अंकटाड) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग 95 फीसदी तक कम हो गयी है. जिससे ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि बढ़ते संघर्ष वैश्विक खाद्य प्रणाली पर अभूतपूर्व दबाव डाल रही है.जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो रही है.
खाड़ी क्षेत्र सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि वैश्विक उर्वरक आपूर्ति का भी अहम केंद्र है. यहीं से नाइट्रोजन और फॉस्फेट जैसे प्रमुख पोषक तत्व दुनिया भर में पहुँचते हैं. जब ऊर्जा महंगी होती है, तो उर्वरक बनाना भी महंगा हो जाता है. अब वही महंगाई खेत तक पहुँच रही है.
भारत जैसे बड़े कृषि देश के लिए यह एक सीधा झटका है. भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों और उर्वरक उपभोक्ताओं में से एक है. साथ ही, यह उर्वरकों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश भी है. इस वजह से खाड़ी क्षेत्र में किसी भी आपूर्ति के झटके का उस पर गहरा असर पड़ता है.
भारत में घरेलू उत्पादन और मांग के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. 2024-25 में कुल उर्वरक उत्पादन करीब 465.45 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि कुल आवश्यकता लगभग 649.43 लाख मीट्रिक टन थी. इस कमी को आयात से पूरा किया गया, जो 2024-25 में 160.29 लाख मीट्रिक टन रहा यह भारत की वैश्विक बाजारों पर निर्भरता को साफ दर्शाता है.
भारत में यूरिया का लगभग 70 प्रतिशत खाड़ी देशों ओमान, सऊदी अरब, कतर और यूएई से आता है. वहीं, डीएपी आयत का 42 प्रतिशत सऊदी अरब से और 15 प्रतिशत एनपीके उर्वरक भी वहीं से आते हैं.
12 अकाउंट्स पर बैन: ‘एक्स’ ने हाईकोर्ट से कहा- सरकार का ब्लॉकिंग आदेश असंगत, समीक्षा हो
अमिया कुमार कुशवाह की रिपोर्ट है कि एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने एक अकाउंट को ब्लॉक किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में सूचित किया है कि यह कार्रवाई सरकार के उस निर्देश के बाद की गई थी, जिसमें यूजर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने अदालत को यह भी बताया कि उसने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर 12 अकाउंट्स को ब्लॉक करने के उसके “असंगत” आदेश की समीक्षा करने का अनुरोध किया है. ‘एक्स’ के हलफनामे के अनुसार, सरकार ने 18 मार्च को उससे 12 अकाउंट्स को ब्लॉक करने के लिए कहा था, जिनमें पैरोडी अकाउंट @DrNimoYadav, @Nehr_who, @indian_armada और व्यंग्यात्मक हैंडल जैसे @mrjethwani_ और @Doc_RGM शामिल थे. टिप्पणीकार और कार्यकर्ता संदीप सिंह का अकाउंट भी रोक दिया गया था.
@DrNimoYadav हैंडल चलाने वाले प्रतीक शर्मा ने अपना अकाउंट रोके जाने के पीछे का कारण जानने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. मस्क के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म ने कहा कि केंद्र का आदेश धारा 69A लागू करने के लिए आवश्यक मानकों को भी पूरा नहीं करता है। ‘एक्स’ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित अकाउंट्स द्वारा पोस्ट की गई अधिकांश सामग्री धारा 69A के दायरे में नहीं आती है.
‘एक्स’ ने कहा, “इस प्रकार, पोस्ट-लेवल ब्लॉकिंग के बजाय अकाउंट-लेवल ब्लॉकिंग असंगत है और यह कानून के तहत अनिवार्य सबसे कम दखल देने वाला उपाय नहीं है.”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि प्रभावित यूजर्स को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और सरकार से “निर्णय की समीक्षा करने” का अनुरोध किया. उच्च न्यायालय अगले सप्ताह इस मामले की फिर से सुनवाई करेगा.
“मैं बेशर्त क्षमा चाहता हूँ” : बीजू पटनायक पर टिप्पणी के बाद बैकफुट पर निशिकांत दुबे
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर दिए बयान को लेकर बेशर्त माफी मांगी है. दुबे की यह माफी ऐसे समय में आई है जब बीजेडी के सांसद सस्मित पात्रा ने उस कमेटी से इस्तीफा दे दिया, जिसके अध्यक्ष बीजेपी सांसद हैं. इतना ही नहीं ओडिशा में बीजेपी के वरिष्ठ नेता बैजयंत पांडा ने भी दुबे के बयान का विरोध किया था.
स्क्रोल के अनुसार, निशिकांत दुबे ने अपने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि “पिछले हफ्ते मीडिया से बात करते हुए मैने नेहरु गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय श्री बीजू पटनायक जी के संदर्भ में मेरी बातों से ग़लत अर्थ निकाला गया. पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है. नेहरु जी के उपर मेरे विचार को बीजू बाबू के उपर समझा गया. बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा ऊँचे क़द के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे. मेरे वक्तव्य से यदि भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बेशर्त क्षमा चाहता हूँ.”
दरअसल, 27 मार्च को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में दुबे ने आरोप लगाया था कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1962 का चीन युद्ध अमेरिकी पैसे और सीआईए एजेंटों की मदद से लड़ा गया. दुबे ने अपने एक्स पर नेहरू के दो पत्र जारी किए थे जिनमें अधिकारियों, खासतौर पर अमेरिकी राजदूत को निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने आगे कहा- 1963-64 में अमेरिका के कहने पर नंदा देवी पर एक न्यूक्लियर डिवाइस लगाया गया, जो आज तक नहीं मिला है. भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि ओडिशा का चारबतिया एयरबेस, जिसमें बीजू पटनायक की भूमिका थी, यू-2 जासूसी विमानों के लिए बनाया गया था और 1963 से 1979 तक अमेरिका ने इसका इस्तेमाल किया.
दुबे की टिप्पणियों की निंदा करते हुए, बीजेडी अध्यक्ष और बीजू पटनायक के पुत्र नवीन पटनायक ने कहा, ‘मुझे लगता है कि बीजेपी सांसद को इस तरह की अपमानजनक बातें कहने के लिए किसी मानसिक चिकित्सक की आवश्यकता है.’
बंगाल एसआईआर विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कहा 47 लाख मामले निपटे, 7 अप्रैल तक पूरी होगी प्रक्रिया
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रगति पर संतोष जताया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि “हम आंकड़ों से संतुष्ट और आशान्वित हैं. कल तक 47 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है. रोजाना करीब 1.75 से 2 लाख मामलों पर काम हो रहा है. हमें बताया गया है कि 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा हो जाएगा.”
यह सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल पंचोली के साथ हुई. अदालत ने निर्देश दिया है कि पूरक मतदाता सूची नामांकन की अंतिम तारीख तक प्रकाशित हो. पहले चरण (152 सीटें) के लिए नामांकन 6 अप्रैल तक और दूसरे चरण (144 सीटें) के लिए 9 अप्रैल तक होगा. मतदान 23 और 29 अप्रैल को प्रस्तावित है.
रिपोर्ट के मुताबिक, “विचाराधीन” मतदाताओं में से लगभग 44% नाम सूची से हटाए गए हैं. इस पर राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकीलों कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने बड़ी संख्या में नए मतदाता फॉर्म (फॉर्म 6) जमा होने का मुद्दा उठाते हुए आपत्ति जताई है. जिस पर सीजेआई ने उन्हें अपीलीय ट्रिब्यूनलों का रुख करने को कहा है.
चुनाव आयोग की ओर से वकील दामा सेशाद्री नायडू ने बताया कि हटाए गए मतदाताओं की अपील सुनने के लिए बनाए गए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण बुधवार से शुरू होगा. हटाए गए मतदाता ईसी आई नेट या स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के जरिए अपील कर सकेंगे.
मोदी सरकार ने 11 सालों में विज्ञापन पर खर्च किए 5987 करोड़
न्यूज़ लॉन्ड्री की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बीते 11 साल में विज्ञापनों पर 5,987 करोड़ 46 लाख रुपये खर्च किया है. यानि औसतन हर दिन करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए. बीते 3 सालों में ही मोदी सरकार ने गूगल और यूट्यूब पर अपने विज्ञापन केलिए 120 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किये हैं.
जबकि मेटा ( फेसबुक और इंस्ट्रग्राम) को इस दौरान करीब 24 करोड़ 45 लाख रुपये दिए गए. यह दर्शाता है कि सरकार का विज्ञापन फोकस अब पारंपरिक माध्यमों के अलावा डिजिटल माध्यमों की ओर भी तेजी से शिफ्ट हो रहा है. यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सपा सांसद इकरा हसन समेत अन्य सांसदों के एक सवाल के जवाब में दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में जहां विज्ञापन पर खर्च 765.83 करोड़ रुपये था, वहीं 2015-16 में यह बढ़कर 879.80 करोड़ और 2017-18 में 889.34 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बाद खर्च में गिरावट भी देखी गई, 2020-21 में यह 281.71 करोड़ और 2021-22 में 214.94 करोड़ रुपये तक आ गया. हालांकि, 2023-24 में फिर यह बढ़कर 353.98 करोड़ रुपये हो गया.
भारत में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया शुरू कर दी है. पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें आबादी 1.21 अरब थी, जबकि अब यह 1.4 अरब से ज्यादा मानी जा रही है. 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 और अन्य कारणों से टाल दी गई थी. जनगणना का पहला चरण बुधवार से शुरू हुआ है और सितंबर तक चलेगा. इसमें घरों, सुविधाओं और रहने की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी. यह प्रक्रिया घर-घर सर्वे और मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल तरीके से भी होगी, जिसमें सैटेलाइट मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. दूसरा चरण सितंबर से अगले साल 1 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें लोगों की सामाजिक और आर्थिक जानकारी, जैसे धर्म और जाति दर्ज की जाएगी. इस पूरे काम में 30 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी लगाए जाएंगे.
कमर्शियल एलपीजी हुआ महंगा, हवाई ईंधन के भी दाम बढ़े
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को देश के बड़े शहरों में 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 10% से ज़्यादा बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में जहाँ इसकी क़ीमत 1,883 थी अब वह 2,078 में मिलेगा. इसी तरह मुंबई में इसकी क़ीमत में 196 रुपये, चेन्नई में रुपये और कोलकाता में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं घरेलू 14 किलो एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया.
हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली और मुंबई में इसकी क़ीमत करीब 8.6% बढ़कर 1,04,927 प्रति किलोलीटर हो गई है. वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत रिकॉर्ड 2.07 लाख प्रति किलोलीटर पहुंच गई, यानी दाम दोगुने से ज़्यादा हो गए हैं. हालांकि घरेलू उड़ानों के लिए बढ़ोतरी सीमित रखते हुए सिर्फ 25% ही बढ़ोतरी लागू की है
सरकार के अनुसार तेल कंपनियों को इस समय हर एलपीजी सिलेंडर पर करीब 380 का नुकसान हो रहा है और मई तक यह नुकसान 40,484 करोड़ तक पहुंच सकता है. पहले भी यह नुकसान 60,000 करोड़ तक पहुंचा था, जिसमें सरकार ने 30,000 करोड़ की मदद दी थी.
ईरान में फंसे करीब 600 भारतीय मछुआरे, परिवार परेशान और मदद का इंतज़ार
स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में चल रहे युद्ध के बीच करीब 600 भारतीय मछुआरे फंसे हुए हैं, जिनमें ज़्यादातर तमिलनाडु के कन्याकुमारी और आसपास के जिलों से ताल्लुक़ रखते हैं. कई मछुआरे नावों पर फंसे हैं, जहां उन्हें सुरक्षा, खाना और दवाइयों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक मछुआरों को अपने परिवारों से बात करने में भी दिक्कत हो रही है. कई लोग एक ही सिम कार्ड से बारी-बारी से कॉल करते हैं क्योंकि इंटरनेट और नेटवर्क सही नहीं है. उनके पास पैसे की कमी भी है, जिससे फोन रिचार्ज करना मुश्किल हो रहा है. परिवारों का कहना है कि सरकार ने अब तक छात्रों को तो वापस लाया है, लेकिन मछुआरों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
बताया गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद हालात और खराब हो गए हैं। कई मछुआरे समुद्र में या किराए के कमरों में फंसे हैं और उनके पास सुरक्षित जगह नहीं है. कुछ लोग खाने और दवा की कमी से जूझ रहे हैं, क्योंकि उन्हें राशन तभी मिलता है जब वे मछली पकड़ने जाते हैं. कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों को वापस लाने के लिए कर्ज लेकर पैसे जुटा रहे हैं. कुछ मछुआरे महंगे रास्तों से दूसरे देशों के जरिए भारत लौटने की कोशिश कर रहे हैं.
हेट क्राइम
बिहार: पति की लिंचिंग के बाद सदमे में मुस्लिम महिला ने बच्चों के साथ ज़हर खाया
मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के रोहतास जिले में एक मुस्लिम महिला ने कथित तौर पर अपने दो छोटे बच्चों के साथ ज़हर खा कर ख़ुदकुशी कर ली. वह अपने पति की हाल ही में हुई लिंचिंग और आरोपियों से मिल रही धमकियों के कारण मानसिक तनाव में थी. मृतका की पहचान रेश्मा खातून के रूप में हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार देर रात रेशमा ने अपने घर पर अपनी चार साल की बेटी तैयबा और डेढ़ साल के बेटे हमज़ाद के साथ ज़हर खा लिया.
जहां इलाज के दौरान रेशमा की मौत हो गई, वहीं दोनों बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है. रोहतास के एसपी रोशन कुमार ने महिला की मौत की पुष्टि की है.
24 मार्च को रेशमा के शौहर हसन रज़ा खान (32) को राज्य हाईवे पर भीड़ ने जमीन विवाद के कारण पीट-पीटकर मार डाला था. इस मामले में अब तक 8 आरोपियों में से 4 को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी आरोपी फरार हैं. परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं और वे डर के माहौल में जी रहे थे.डॉक्टरों के अनुसार तीनों ने कीटनाशक खाया था.
POSH कानून कागज़ों तक सीमित: घरेलू कामगारों को अब भी नहीं मिल पा रहा न्याय
भारत में POSH कानून (2013) कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने के लिए बना है, लेकिन घरेलू कामगारों के लिए यह कानून ज़्यादातर कागज़ों तक ही सीमित रह जाता है. कई महिलाएं उत्पीड़न झेलती हैं, लेकिन जानकारी की कमी, डर और सिस्टम तक पहुंच न होने के कारण शिकायत नहीं कर पातीं.
आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में दलित घरेलू कामगार सुमन कांबले को उनके नियोक्ता आशीष मेश्राम द्वारा कई बार यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से सुमन को परेशान कर रहा था. सुमन ने नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन भरोसा दिलाकर उन्हें वापस बुलाया गया और 25 मार्च 2026 को उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में पहले कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी.
कानून के तहत घरेलू कामगार जिला स्तर की समितियों या शी-बॉक्स पोर्टल के जरिए शिकायत कर सकती हैं, लेकिन रिपोर्ट में पाया गया कि थाने जिले में 2025 में एक भी घरेलू कामगार की शिकायत दर्ज नहीं हुई. इसका मतलब यह नहीं कि उत्पीड़न नहीं होता, बल्कि महिलाएं शिकायत नहीं कर पातीं. विशेषज्ञों के अनुसार कई घरेलू कामगारों को इन व्यवस्थाओं की जानकारी ही नहीं होती. वेबसाइट और पोर्टल अंग्रेजी में हैं, शिकायत करने के लिए इंटरनेट और लॉगिन की ज़रुरत होती है, जो कई गरीब महिलाओं के लिए मुश्किल है. साथ ही पुलिस थानों में डर, नौकरी छूटने का खतरा और बदनामी का डर भी उन्हें चुप रहने पर मजबूर करता है.
हेल्थ :
एफएसएसएआई की नाकामी से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट: चेतावनियों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं
द प्रिंट में प्रकाशित लेख में अश्विनी महाजन, जो स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक और दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर हैं, लिखते हैं कि भारत में बढ़ती मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों की समस्या अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है, लेकिन इसे रोकने में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) नाकाम रहा है.
लेख के अनुसार भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और 13.6 करोड़ प्री-डायबिटिक हैं. इसकी बड़ी वजह ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले पैकेज्ड फूड का बढ़ता इस्तेमाल है, जिसकी बिक्री पिछले 15 साल में करीब 40 गुना बढ़ी है. कंपनियां जानबूझकर इन चीज़ों को ज़्यादा डालकर लोगों में लत पैदा करती हैं. विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट दोनों फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल की ज़रुरत बता चुके हैं, लेकिन एफएसएसएआई इस पर ठोस कदम उठाने के बजाय उद्योग के दबाव में ‘स्टार रेटिंग’ जैसे कमजोर विकल्प पर विचार कर रहा है. लेख में कहा गया है कि यह रवैया सीधे तौर पर जनहित के खिलाफ है और इससे लोग सही और गलत खाने में फर्क नहीं कर पाएंगे.
ग्रामीण रोजगार योजना पर संशय: पुराने और नए कानूनों के बीच झूलती ‘मनरेगा’, तरसते श्रमिकों का भाग्य अधर में
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत नामांकित लाखों श्रमिक एक अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहे हैं, क्योंकि सरकार के तहत 2026-27 के लिए मजदूरी दर को संशोधित करने या नया वैकल्पिक कानून कब लागू होगा, इस पर स्पष्टता देने में विफल रही है.
‘द टेलीग्राफ’ के लिए बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थापित परंपरा से हटते हुए, केंद्र ने 2026-27 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मजदूरी दरों में संशोधन नहीं किया है. इससे ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) के लागू होने तक 100 दिवसीय ग्रामीण रोजगार योजना के जारी रहने पर चिंता बढ़ गई है. पिछले साल दिसंबर में संसद द्वारा पारित वीबी-जी राम जी विधेयक, मनरेगा का स्थान लेने के लिए लाया गया है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं और शोधकर्ताओं का कहना है कि यह योजना व्यावहारिक रूप से अधर में है. मनरेगा के तहत संशोधित मजदूरी दरों की अधिसूचना आमतौर पर मार्च में जारी की जाती है. 2024 और 2025 में ये अधिसूचनाएं 27 मार्च को जारी की गई थीं. सरकार ने 2023 में 24 मार्च, 2022 में 28 मार्च, 2021 में 15 मार्च और 2020 में 24 मार्च को संशोधित दरें अधिसूचित की थीं.
2 अगस्त 2024 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा था: “संशोधित मजदूरी दर प्रत्येक वित्तीय वर्ष की 1 अप्रैल से लागू की जाती है.”
मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरी दर कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी से कम है. उन्होंने कहा कि बढ़ोतरी न मिलने से स्थिति और खराब हो गई है. डे ने कहा, “यह मनरेगा के तहत गरीब श्रमिकों पर हमला है. सरकार ने खुद कहा है कि हर साल मजदूरी दरों में संशोधन करना होगा. इस साल, वह अपने ही नियमों का उल्लंघन कर रही है.”
वकील और कार्यकर्ता पुरबयान चक्रवर्ती ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले चार वर्षों से बंगाल में मनरेगा के कार्यान्वयन को निलंबित कर रखा है. अब पूरा देश वैसी ही स्थिति का सामना कर रहा है, क्योंकि वीबी-जी राम जी अधर में है और मनरेगा फंड की कमी से जूझ रहा है. बजट में 2026-27 के लिए मनरेगा हेतु ₹30,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं.
चक्रवर्ती ने कहा, “2025-26 के लिए मनरेगा के तहत लंबित देनदारी लगभग ₹10,000 करोड़ है. हर साल अप्रैल, मई और जून में काम की भारी मांग रहती है. देनदारी के भुगतान के बाद शेष राशि गर्मियों के महीनों के लिए काम देने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है. इसका मतलब है कि पूरे देश के लिए मनरेगा को व्यावहारिक रूप से रोक दिया गया है.”
कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर काम करने वाले लिबटेक इंडिया के वरिष्ठ शोधकर्ता चक्रधर बुद्धा ने कहा कि 2026-27 में वीबी-जी राम जी के लागू होने की उम्मीद थी, क्योंकि केंद्रीय बजट ने इसके लिए ₹95,000 करोड़ आवंटित किए हैं. हालाँकि, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अभी तक इसके प्रवर्तन के लिए आवश्यक न्यूनतम औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं.
बुद्धा ने कहा, “मनरेगा से वीबी-जी राम जी में बदलाव अभी तक नहीं हुआ है. मंत्रालय को राज्यों के लिए मानक आवंटन निर्धारित करना आवश्यक है, जिसके बाद ही कानून को क्रियान्वित किया जा सकता है. पर्याप्त समय होने के बावजूद ऐसा नहीं किया गया है. राज्यों ने भी अभी तक वीबी-जी राम जी ढांचे के अनुरूप अपनी योजनाओं को अंतिम रूप नहीं दिया है.”
बुद्धा ने कहा कि तकनीकी रूप से मनरेगा अभी भी लागू है, लेकिन मंदी के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि राज्य आवश्यक पैमाने पर परियोजनाओं को शुरू या निष्पादित नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मनरेगा के लिए वर्तमान में लगभग ₹30,000 करोड़ का आवंटन बेहद अपर्याप्त है, और यह सीधे तौर पर काम की उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है. नए कानून की अनुपस्थिति में, मनरेगा ही शासी ढांचा बना हुआ है, और मजदूरी का वार्षिक संशोधन होना ही चाहिए. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संशोधित मजदूरी दरें अभी तक अधिसूचित नहीं की गई हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय ने किसी भी समय प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम 20 परियोजनाओं जैसी पाबंदियां लगा दी हैं. हम देख सकते हैं कि मनरेगा के तहत रोजगार सृजन में काफी कमी आई है. यह मार्च में हो रहा है, जो आमतौर पर मनरेगा के लिए काफी व्यस्त समय होता है.
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.







