-
भारतीय वैज्ञानिक ने विकसित किया बिना इंसुलिन या दवाओं के ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाला इम्प्लांट
‘टेलीग्राफ’ में जी. एस. मुदुर के रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में एक भारतीय वैज्ञानिक ने एक छोटा वायरलेस इम्प्लांट विकसित करने में योगदान दिया है, जो बाहरी इंसुलिन या दवाओं के इस्तेमाल के बिना रक्त से अतिरिक्त ग्लूकोज हटाने में सक्षम है. स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ज्यूरिख (ईटीएच ज्यूरिख) के शोधकर्ताओं के अनुसार, मधुमेह से पीड़ित चूहों पर किए गए प्रयोगों में इस उपकरण ने 90 मिनट के भीतर ब्लड शुगर के स्तर को कम किया. छह सप्ताह तक चले परीक्षण के दौरान चूहों के शरीर का वजन और ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी घटा. शोधकर्ताओं ने इस अवधि में कोई स्पष्ट प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया.
-
मोहम्मद अयूब | भूगोल से बंधे, राजनीति से बंटे
इस अटकलबाजी के बीच कि बांग्लादेश के हाल ही में चुने गए प्रधानमंत्री तारिक रहमान (जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी-बीएनपी) के अध्यक्ष भी हैं) नवंबर या दिसंबर में नई दिल्ली का दौरा करेंगे, यह आकलन करने का समय आ गया है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की स्थिति क्या है और दोनों देशों के बीच समस्याओं की जड़ें कहाँ निहित हैं.
-
विचारों पर व्यंग्य | भारत में प्रदर्शनकारियों के लिए जरूरी दस्तावेज: कृपया जन्म प्रमाणपत्र साथ रखना न भूलें!
'साऊथ फर्स्ट' में पीवी कोंडल राव लिखते हैं कि जेन जी से भारत को भविष्य की ओर ले जाने की उम्मीद की जाती है. लेकिन जब वह अपने देश में सत्ता से सवाल करती है, तो उसे पता चल सकता है कि स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए भी दस्तावेजों के विभाग से पहले अनुमति लेनी पड़ती है.
एक समय था, जब विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाला युवा अपने साथ एक पोस्टर, पानी की बोतल और शायद बैग में रखी कोई क्रांतिकारी कविता लेकर चलता था. उसके पास सत्ता को चुनौती देने का साहस होता था.
-
विकास पराश्रम मेश्राम | विकास की चमक के बीच भूख का अंधेरा
विकास और आर्थिक प्रगति के दावों के बीच भारत में भूख और कुपोषण की समस्या गंभीर बनी हुई है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर रहा है. भारत का स्कोर 24.1 है, जो उसे भूख की गंभीर स्थिति वाली श्रेणी में रखता है. पिछले वर्ष भारत 123 देशों में 102वें स्थान पर था. रैंकिंग में मामूली सुधार के बावजूद देश में कुपोषण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
-
क्या जनता को जनता से भिड़ाकर देश को गृहयुद्ध की ओर धकेला जा रहा है?
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ देश में जारी राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों, चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), सत्तारूढ़ दल की रणनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति पर चर्चा की.
श्रवण गर्ग के आकलन में, जून से जारी राजनीतिक गतिविधियां अब एक निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही हैं. ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, मतदाता सूची में बदलाव, कथित वोट चोरी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जैसे मुद्दों को लेकर जारी विरोध अब व्यापक राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिख रहा है.
-
अमिताभ श्रीवास्तव | परकला प्रभाकर की स्वतंत्र पहचान और सत्ता की नीतियों से असहमति
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव के साथ इस सवाल पर चर्चा की कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके काम और विचारों से होनी चाहिए या सत्ता में बैठे लोगों से उसके पारिवारिक संबंधों के आधार पर तय की जानी चाहिए. बातचीत का केंद्र परकला प्रभाकर रहे, जो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और सरकार की नीतियों के आलोचक के रूप में भी जाने जाते हैं.
-
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार (22 अक्टूबर, 2026) को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राजनीतिक स्वायत्तता और संवैधानिक सुरक्षा उपाय देने के अपने पिछले आश्वासनों से पीछे हटने के लिए गृह मंत्रालय की आलोचना की. वांगचुक ने कहा कि केंद्र ने पिछली बातचीत में कभी भी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से इनकार नहीं किया था. दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया, "उन्होंने (केंद्र) कहा था कि वे आखिरकार इसे दे देंगे."
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार (22 अक्टूबर, 2026) को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राजनीतिक स्वायत्तता और संवैधानिक सुरक्षा उपाय देने के अपने पिछले आश्वासनों से पीछे हटने के लिए गृह मंत्रालय की आलोचना की.
वांगचुक ने कहा कि केंद्र ने पिछली बातचीत में कभी भी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से इनकार नहीं किया था. दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया, "उन्होंने (केंद्र) कहा था कि वे आखिरकार इसे दे देंगे."
-
दिल्ली में हटाए गए मतदाताओं से कहा जा रहा है: खुद को नया मतदाता घोषित करें, फिर 2002 की सूची से जोड़ें
‘आर्टिकल-14’ में फातिमा खान की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद दिल्ली में लाखों लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना पड़ रहा है. यह फॉर्म पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए है, जिसमें आवेदक को घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है. दशकों से मतदान करते आए लोगों को ऐसी घोषणा करने के लिए मजबूर होना कानूनी जोखिम और प्रशासनिक अनिश्चितता पैदा कर रहा है. इसके अलावा, उन्हें अपना या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम 2002 की मतदाता सूची से जोड़ने के लिए दस्तावेज भी जुटाने पड़ रहे हैं.
-
बंगाल: तीन ईसाई परिवारों ने मारपीट, धर्म छोड़ने की धमकी और जबरन अनुष्ठान कराने का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में कुछ लोगों के एक समूह ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें अपना धर्म छोड़ने की धमकी दी. इसके साथ ही उन पर जबरन धार्मिक अनुष्ठान कराने का भी आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को ‘पीटीआई’ को बताया कि पीड़ित परिवार पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और करीब 18 महीने पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने पुलिस से यह भी शिकायत की है कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है.
-
इंडिपेंडेंट | ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए सरकार इतनी प्रतिबद्ध क्यों है
भारत में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का एक नया और आक्रामक दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि यह पूरी कवायद केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है.
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर विशाल प्रदर्शन देखने को मिले हैं.
-
क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी
अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.
-
रॉयटर्स | मोदी का धर्मसंकट: असंतोष बढ़ते ही भारत की सड़कों पर उतरा ‘जेन जी’, यूपी चुनाव में परीक्षा
उन्हें रोकने के लिए तैनात हजारों सुरक्षाकर्मियों के बावजूद, भारत में युवा प्रदर्शनकारियों ने पिछले हफ्ते बैरिकेड्स लांघे, सरकार विरोधी नारे लगाए और उन्हें खींचकर दूर ले जाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से झड़प की.
एक युवक ने पुलिस द्वारा बस में बैठाए जाने से पहले चिल्लाकर कहा, "इंकलाब जिंदाबाद."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
जी.एस. मुदुर की 'द टेलीग्राफ' रिपोर्ट: स्विस ईटीएच ज्यूरिख में भारतीय वैज्ञानिक देबासिस मैती द्वारा मधुमेह के इलाज के लिए दवा-मुक्त वायरलेस इम्प्लांट का विकास।
मोहम्मद अयूब का विश्लेषण: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा, 1971 मुक्ति संग्राम के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव, अवामी लीग, बीएनपी और रणनीतिक चुनौतियों की पड़ताल।
पीवी कोंडल राव का 'साऊथ फर्स्ट' लेख: जेन जी प्रदर्शनकारियों, नागरिकता व शैक्षणिक दस्तावेजों की मांग, राजनीतिक दोहरे मापदंड और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कटाक्ष।
विकास पराश्रम मेश्राम का 'काउन्टरकरंट्स' लेख: ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत की स्थिति, 19% चाइल्ड वेस्टिंग और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का विश्लेषण।
कविता अय्यर की 'आर्टिकल 14' रिपोर्ट: मुंबई के मालवणी और अंबुजवाड़ी में SIR के बाद प्रारूप मतदाता सूची से मुस्लिम निवासियों के नाम हटने पर विवाद और नागरिकता से जुड़ी चिंताएं।
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और अमिताभ श्रीवास्तव की चर्चा: परकला प्रभाकर की बौद्धिक पहचान, निर्मला सीतारमण से संबंध और नीतिगत आलोचना।
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की चर्चा: राजनीतिक प्रदर्शन, चुनाव आयोग, SIR विवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति का विश्लेषण.
विजेता सिंह की रिपोर्ट: अरुणाचल सीमा पर ताकसिंग/असाफिला में भारत-चीन सैनिकों में तकरार; आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर का बयान और जयराम रमेश की टिप्पणी.
वीडियो
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.

