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दिल्ली एसआईआर : ‘तार्किक विसंगतियों’ के नाम पर मुस्लिम मतदाताओं को अधिक निशाना बनाया
‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत जारी दिल्ली की प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची के एक विस्तृत विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत निर्वाचन आयोग के केंद्रीकृत 'ERONET' सॉफ्टवेयर द्वारा रिकॉर्ड में "तार्किक विसंगतियों" की जाँच के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को अनुपातहीन रूप से अधिक निशाना (फ्लैग) बनाया गया है.
दिलचस्प बात यह है कि किन्हें चिन्हित किया जाएगा, इसका फैसला वैधानिक संरक्षक माने जाने वाले मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने नहीं, बल्कि केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर ने लिया है.
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2026 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार पहुँचा
अनंत कृष्णन की रिपोर्ट है कि चालू वर्ष के पहले तीन तिमाहियों में चीन को भारत का निर्यात 40% बढ़कर लगभग 20 अरब डॉलर हो गया है, और चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ता हुआ इस साल 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है.
चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (जीएसी) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25.4% बढ़कर 144.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि चीन से भारत का आयात 23.3% बढ़कर 125.19 अरब डॉलर पर पहुँच गया. चीन को होने वाला भारतीय निर्यात, हालांकि बहुत छोटे आधार (बेस) से था, लेकिन शुरुआती तीन तिमाहियों के बाद 40.7% की मजबूत वृद्धि के साथ 19.26 अरब डॉलर पर पहुँच गया और इसने पिछले साल के कुल आंकड़े को अभी से पार कर लिया है.
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सीजेआई सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को ‘ना’ क्यों कहा
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्ष के नेताओं के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आचरण, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और दिल्ली की नाकेबंदी पर चर्चा के लिए समय मांगा गया था. लेकिन सीजेआई ने ‘ना’ क्यों कहा? ‘द हिंदू’ में कृष्णादास राजगोपाल ने अपनी रिपोर्ट में इसी बात को समझाया है. रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई का यह फैसला राजनीति से तटस्थ दूरी बनाए रखने और संवैधानिक सीमाओं की रक्षा करने के सिद्धांत पर आधारित है.
10 अक्टूबर को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीजेआई को एक संयुक्त पत्र लिखा. यह एक दुर्लभ अवसर था जब विपक्ष ने दूसरे संवैधानिक प्राधिकरण (सीईसी) की शिकायत के लिए सीधे देश के शीर्ष न्यायिक पद का रुख किया.
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सितंबर में भारत की थोक मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक तेज़ी से बढ़कर 11.4% पर पहुँची
ऊर्जा आपूर्ति में लगातार आ रही बाधाओं के बीच तेल की कीमतों में आए उछाल के चलते, भारत की वार्षिक थोक मुद्रास्फीति सितंबर में उम्मीद से अधिक तेज़ी से बढ़कर 11.39% हो गई. ‘रॉयटर्स’ में शिवांगी आचार्य की रिपोर्ट है कि भारत में थोक कीमतें खुदरा कीमतों की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं ने बढ़ी हुई ऊर्जा लागत का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही उपभोक्ताओं पर डाला है. इसके अलावा, खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी है और सितंबर में केंद्रीय बैंक के सहनशीलता दायरे (टॉलरेंस बैंड) के ऊपरी छोर के करीब पहुँच गई है.
खुदरा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने वाले भारतीय रिजर्व बैंक ने मूल्य के बढ़ते दबावों का हवाला देते हुए, पिछले सप्ताह लगभग चार वर्षों में पहली बार बेंचमार्क रेपो रेट बढ़ाने के मामले में अपने वैश्विक समकक्षों का अनुसरण किया.
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मतपत्र और राजनीतिक सत्ता के बीच: क्या लोकतंत्र अपनी आवाज खो रहा है?
'काउंटरकरंट्स' में एडवोकेट सुधाकर शनमुगम ने लिखा है कि भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हुए प्रदर्शनों ने संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक सत्ता और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं. विपक्षी दलों, छात्रों और नागरिक समाज संगठनों ने मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंका जताते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है. इस बीच, प्रदर्शनों पर पुलिस की पाबंदियों और गिरफ्तारियों ने शांतिपूर्ण सभा तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है. हालांकि, आलोचकों को आशंका है कि इससे पात्र नागरिक लोकतांत्रिक भागीदारी से वंचित हो सकते हैं. इस विवाद का समाधान राजनीतिक टकराव के बजाय पारदर्शी जांच और संस्थागत जवाबदेही के जरिए होना चाहिए.
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‘पिंजरे में कैद पंछी’ की तरह: मतदाता सूची से नाम कटने के बाद बंगाली मुस्लिम मजदूर छत्तीसगढ़ में हफ्तों तक अवैध रूप से हिरासत में रहे
आर्टिकल-14 में संहति बनर्जी ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाताओं के नाम हटने का असर अब मतदान के अधिकार से आगे बढ़ गया है. मुर्शिदाबाद के 23 बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासी मजदूरों को छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया गया. परिजनों ने उन्हें पर्याप्त कानूनी सहायता नहीं मिलने और लंबे समय तक उनसे संपर्क न हो पाने की शिकायत की. इस मामले ने नागरिकता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
4 सितंबर 2026 को रायपुर पुलिस ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में काम करने वाले इन 23 मजदूरों को पूछताछ के लिए बुलाया. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में पश्चिम बंगाल में हुए एसआईआर के दौरान इन सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. पुलिस के संदेह का आधार यही बताया गया. 18 सितंबर को 19 मजदूरों को रिहा कर दिया गया.
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सरकार के कोयला आयात आदेश से अडानी को कैसे हुआ मुनाफा, जबकि पूरे भारत में बिजली की कीमतें बढ़ीं
'स्क्रोल' में श्रीगिरीश जलीहल लिखा है कि सरकार के दस्तावेजों से पता चलता है कि 2022 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा अनिवार्य किए गए कोयला आयात से अडानी समूह को भारी मुनाफा हुआ, जबकि बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो गई.
अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2022-23 में अपने मुनाफे में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. कंपनी के कुल कारोबार का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उसके कोयला आयात कारोबार से आया. कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि विभिन्न राज्य और केंद्र सरकार के बिजली उत्पादन उपक्रमों को की गई आपूर्ति की मात्रा में असाधारण वृद्धि हुई.
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जंतर-मंतर पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने के आरोप में ‘कॉकरोच पार्टी’ के दो नेता तिहाड़ भेजे गए, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
‘द गार्डियन’ की ही रिपोर्ट है कि मध्य दिल्ली के एक प्रदर्शन स्थल पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने के आरोप में भारत के युवाओं के नेतृत्व वाले ‘कॉकरोच आंदोलन’ के दो नेताओं को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.
एक अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के नेताओं, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स लांघने, नारेबाजी करने और भारतीय राष्ट्रध्वज फहराने के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में पांच दिन बिताने का आदेश दिया.
सीजेपी के नेताओं ने कहा कि यह कदम सप्ताहांत (वीकेंड) पर दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों पर की गई बर्बर कार्रवाई और दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर—जो मध्य दिल्ली में एक वेधशाला के आसपास की सड़क का हिस्सा है और 30 से अधिक वर्षों से राजधानी का निर्धारित प्रदर्शन स्थल रहा है—को विरोध स्थल के रूप में बंद करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उठाया गया था.
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सुरभि गुप्ता | एलन मस्क को मोदी और अंबानी के खिलाफ देखकर अपना हीरो बनाने से पहले सतर्क रहना चाहिए
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने न्यूयॉर्क स्थित न्यू लाइंस मैगजीन की दक्षिण एशिया संपादक सुरभि गुप्ता के साथ एलन मस्क, रिलायंस प्रमुख मुकेश अंबानी और भारत सरकार के बीच उभरे विवाद पर चर्चा की. बातचीत में यह सवाल प्रमुखता से उठा कि मस्क की टिप्पणियां केवल भारत में अपने कारोबार के विस्तार से जुड़ी हैं या इनके पीछे भारत-अमेरिका संबंधों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत भी छिपे हैं.
एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को भारत में प्रवेश करने से रोक रहे हैं. उन्होंने मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए सवाल किया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं. इसके अगले दिन उन्होंने ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ लिखकर भी तंज कसा. भारत सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया. इस घटनाक्रम ने कारोबारी प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक रसूख और सरकारी फैसलों पर बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है.
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जिन मांगों का हवाला देकर चुनाव आयोग ने बदले थे सीसीटीवी फुटेज संबंधी नियम, नहीं दिया उनका रिकॉर्ड
‘द वायर’ में अंकित राज की यह विस्तृत रिपोर्ट भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चुनावी पारदर्शिता और सीसीटीवी फुटेज तक सार्वजनिक पहुँच को सीमित करने के विवादास्पद फैसलों पर प्रकाश डालती है. अगस्त 2025 में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में अनियमित्ताओं के आरोपों के बाद, ईसीआई ने गोपनीयता का हवाला देकर सीसीटीवी फुटेज को नष्ट करने की नीति का बचाव किया था.
निर्वाचन आयोग का कहना था कि कोई भी परेशान उम्मीदवार 45 दिनों के अंदर अपने चुनाव को चुनौती देने के लिए संबंधित हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन फाइल कर सकता है. अगर यह याचिका फाइल की जाती है, तो सीसीटीवी फुटेज रख ली जाती है; नहीं तो, इसका कोई मकसद नहीं है- जब तक कि आपका इरादा कोई वोटर की निजता भंग करने का न हो.
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मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में छह महीने में कम से कम 80 नवजातों की मौत
मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में छह महीने के दौरान कम से कम 80 नवजातों की मौत हुई है. इन मौतों के बाद जांच की मांग उठी है. परिजनों ने उचित इलाज नहीं मिलने की शिकायत की है, जबकि स्थानीय भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने रात के समय डॉक्टरों की अनुपलब्धता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.
विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां जिला और उप-जिला अस्पतालों में नवजात मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से स्थापित की जाती हैं. अस्पताल प्रशासन ने मौतों के लिए समय से पहले जन्म, कम वजन और गंभीर बीमारियों को जिम्मेदार बताया है. विधायक ने कहा कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.
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आरएसएस के आर्थिक संगठन ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर केंद्र से कहा, स्टारलिंक को लाइसेंस न दें
‘द हिंदू’ में श्रीपर्णा चक्रवर्ती की रिपोर्ट है कि 2010 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) नियुक्त किया गया है. वह संजय कुमार के समय से पहले अपने मूल काडर में वापस लौटने से खाली हुए पद को भरेंगे, जो मतदाता सूची और आईटी प्रभाग के प्रभारी थे.
इस नई नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग में कार्यों का आवंटन कैसा होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संजय कुमार अगस्त 2024 से इस साल अगस्त तक उप चुनाव आयुक्त रहे थे और चुनाव आयोग के मतदाता सूची व आईटी प्रभागों के लिए जिम्मेदार थे. उन्होंने देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने वाले चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे.
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द गार्डियन | ‘13 करोड़ नामों की बेदखली का हिसाब कौन देगा?’: भारत के मतदाता सड़कों पर क्यों हैं
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में जन्मी शाहिदा फ़कीर ने जीवन भर अपने वोट देने के अधिकार को एक अटूट सच्चाई माना था. लेकिन एक दिन अचानक उनसे यह बुनियादी अधिकार छीन लिया गया. अधिकारियों के सामने उन्होंने अपना भारतीय जन्म प्रमाण पत्र और वर्ष 1962 तक के पारिवारिक ज़मीन के दस्तावेज़ पेश किए. उनके माता-पिता दोनों दशकों से मतदाता सूची का हिस्सा रहे थे, जिसका प्रमाण भी उन्होंने प्रस्तुत किया. इसके बावजूद, जब अप्रैल में अंतिम संशोधित मतदाता सूची जारी हुई, तो शाहिदा का नाम उसमें से नदारद था.
‘द गार्डियन’ में हन्ना एलिस-पीटरसन और शेख अज़ीज़ुर्रहमान की रिपोर्ट के अनुसार, एक गरीब मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली 38 वर्षीय यह प्रवासी मज़दूर इस पीड़ा को सहने वाली अकेली नागरिक नहीं हैं. पिछले एक साल के भीतर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) नामक प्रक्रिया के ज़रिए भारत की मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ (130 मिलियन) नाम हटा दिए गए हैं—यह संख्या जापान की कुल आबादी से भी अधिक है. भारत की स्वतंत्रता के आठ दशकों के इतिहास में इतने कम समय में मतदाता सूचियों में इतनी भारी कटौती कभी नहीं देखी गई.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द इंडियन एक्सप्रेस' सुजीत बिसोई की रिपोर्ट: ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रज मोहन राम की राजनीतिक टिप्पणियों पर विवाद; बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने संवैधानिक निष्पक्षता पर उठाए सवाल.
'द हिंदू' की विशेष रिपोर्ट: दिल्ली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के विश्लेषण से खुलासा; 'ERONET' सॉफ्टवेयर की 'तार्किक विसंगतियों' में मुस्लिम मतदाताओं को 60% अधिक चिन्हित करने का मामला.
'द हिंदू' अनंत कृष्णन की रिपोर्ट: चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा $100 अरब के पार; 2026 की पहली तीन तिमाहियों में निर्यात में 40% की वृद्धि का खुलासा.
'द हिंदू' कृष्णादास राजगोपाल की रिपोर्ट: सीजेआई सूर्यकांत ने एसआईआर और सीईसी विवाद पर विपक्ष के मुलाकात अनुरोध को ठुकराया; शक्तियों का पृथक्करण और 'बेंगलुरु सिद्धांतों' का दिया हवाला.
'हरकारा डीप डाइव' श्रवण गर्ग का विश्लेषण: लोकतंत्र पर 'फ्रैक्चर' की उपमा, राहुल गांधी का राजनीतिक संघर्ष, संस्थागत स्वायत्तता और संघ (RSS) का प्रभाव.
'रॉयटर्स' शिवांगी आचार्य की रिपोर्ट: ऊर्जा संकट के चलते भारत की थोक मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 11.39% हुई, RBI ने रेपो रेट बढ़ाया.
'काउंटरकरंट्स' एडवोकेट सुधाकर शनमुगम का लेख: 'जंतर-मंतर 2.0' और एसआईआर विवाद पर संवैधानिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिकता का विश्लेषण.
'आर्टिकल-14' संहति बनर्जी की रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल एसआईआर के बाद छत्तीसगढ़ में हिरासत में लिए गए मुर्शिदाबाद के 23 बंगाली मुस्लिम प्रवासी मजदूर, हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी.
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