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शायद ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई घातक अचानक बाढ़, भूकंप भी कारण हो सकता है, सैकड़ों हताहत और लापता
विशेषज्ञों ने 'प्लैनेट लैब्स' के उपग्रह चित्रों (सैटेलाइट इमेजरी) का हवाला देते हुए कहा है कि बुधवार को तिब्बत के साथ नेपाल की सीमा के पास आई घातक अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) शायद तब आई, जब ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूट गया और सैकड़ों मीटर नीचे घाटी के फर्श पर गिर गया. यह स्पष्ट नहीं है कि ग्लेशियर के टूटने का कारण क्या था, लेकिन नेपाली अधिकारियों ने कुछ मिनट पहले इस क्षेत्र में आए भूकंप को एक संभावना के रूप में दर्शाया है.
दोनों पक्षों के अधिकारियों को डर है कि हताहतों (मृतकों) की कुल संख्या अब तक बरामद किए गए लगभग 100 शवों से कहीं अधिक होगी. नेपाल सरकार ने कहा है कि 300 से अधिक यात्री लापता हैं.
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नेपाल में ‘फ्लैश फ्लड’ के बाद बिहार और यूपी हाई अलर्ट पर, कितना गंभीर है बाढ़ का खतरा?
‘फर्स्ट पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज जलप्रवाह ने नेपाल में भारी तबाही मचाई, जिसके बाद त्रिशूली और आगे गंडक नदी प्रणाली से भारत के इलाकों पर संभावित असर को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फ्लैश फ्लड स्थानीय बारिश से नहीं, बल्कि ऊपरी हिमालयी क्षेत्र या तिब्बती इलाके में हुई भारी बारिश अथवा अचानक जलराशि के प्रवाह से जुड़ी हो सकती है. नेपाल में इस आपदा के कारण कई लोगों के मारे जाने और लापता होने की खबरें हैं.
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हॉर्मुज संकट के छह महीनों में जीवाश्म ईंधन आयात बिल 330 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ा: रिपोर्ट
'डाउन टू अर्थ' में प्रकाशित पूजा दास की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्मुज संकट शुरू होने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल ने जीवाश्म ईंधन आयात करने वाले देशों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की नई रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए संकट के बाद छह महीनों में आयातक देशों को जीवाश्म ईंधन के लिए 330 अरब डॉलर से अधिक अतिरिक्त खर्च करना पड़ा.
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से अगस्त 2026 के बीच देशों ने औसतन हर महीने करीब 55 अरब डॉलर अतिरिक्त चुकाए. सीआरईए ने इसे 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद तेल और गैस की कीमतों में आया सबसे बड़ा और लंबे समय तक जारी रहने वाला झटका बताया है.
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फातिमा अल्ताफ | कुछ भारतीय महिलाओं के लिए नौकरी करना क्यों होता जा रहा है महंगा
23 वर्षीय आयशा ने सामाजिक विज्ञान में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2024 में दिल्ली में एक कॉर्पोरेट नौकरी हासिल की. लेकिन 40 हजार रुपये की शुरुआती मासिक सैलरी के साथ एक साल के भीतर ही उसके लिए शहर में टिके रहना मुश्किल होने लगा. सुरक्षित इलाके में पीजी, खाना, यात्रा, राशन और घर पैसे भेजने के बाद उसके पास मुश्किल से एक हजार रुपये की बचत रह जाती थी.
भारत में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी बढ़ी है. 2025 के वार्षिक पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार यह 40 प्रतिशत तक पहुंच गई. लेकिन इस आंकड़े के पीछे एक अलग सच्चाई भी छिपी है. बड़ी संख्या में पहली पीढ़ी की दलित और मुस्लिम महिलाएं परिवार और सामाजिक बाधाओं को पार कर शहरों में नौकरी तक तो पहुंच जाती हैं, लेकिन नौकरी पर बने रहने के लिए उन्हें अतिरिक्त आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है.
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मोहम्मद जियाउल्लाह खान | जब मनुस्मृति का बचाव पितृसत्ता में महिलाओं की समानता पर हमला बन जाए
महाराष्ट्र में 22 अगस्त 2026 को छात्राओं से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने "मनुस्मृति की मानसिकता" के खिलाफ बोलते हुए पितृसत्ता को चुनौती देने और महिलाओं की स्वतंत्रता की बात की. इसके बाद मनुस्मृति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई. सवाल केवल एक प्राचीन ग्रंथ का नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच का है जिसमें महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और निर्णय लेने के अधिकार को सीमित किया गया.
मनुस्मृति का सबसे बड़ा विवाद इसके कुछ ऐसे विचारों को लेकर रहा है, जिनमें महिलाओं को पुरुष संरक्षक के अधीन रखने की बात कही गई है. अक्सर उद्धृत किए जाने वाले श्लोक 5.148 में कहा गया है कि बचपन में महिला पिता के संरक्षण में, युवावस्था में पति के और वृद्धावस्था में पुत्रों के संरक्षण में रहे तथा स्वतंत्र न रहे.
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विस्तृत अध्ययन पूरा होने तक ग्रेट निकोबार परियोजनाओं को स्थगित करें: यूएन समिति की अनुशंसा
संयुक्त राष्ट्र की 'नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति' (सीईआरडी) ने भारत सरकार को ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित ₹92,000 करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तुरंत स्थगित करने की सिफारिश की है. समिति का सुझाव है कि जब तक स्वतंत्र और विस्तृत पर्यावरण, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक प्रभाव अध्ययन पूरे नहीं हो जाते, तब तक निर्माण कार्य रोक दिया जाए.
प्रस्तावित परियोजनाओं (ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, हवाई अड्डा, पावर प्लांट आदि) के कारण लगभग 130 वर्ग किलोमीटर वर्षावन नष्ट हो जाएंगे. इससे द्वीप के स्वदेशी 'शोम्पेन' और 'निकोबारी' जनजातियों का अस्तित्व और अधिकार गंभीर खतरे में हैं. समिति ने चिंता व्यक्त की है कि इन समुदायों से उनकी "स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति" नहीं ली गई.
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न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया
न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने कहा है कि वह अपने शहर में होने जा रहे उस आगामी कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं जिसमें भारत की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक पैतृक संगठन के नेता शामिल हो रहे हैं.
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), एक शक्तिशाली हिंदू संगठन है जिससे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी निकली है. आरएसएस ने मई में कहा था कि उसने अमेरिका सहित विदेशी यात्राओं का आयोजन इस धारणा का मुकाबला करने के लिए किया है कि वह अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल एक अर्धसैनिक संगठन है.
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एसआईआर के बाद कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 1.08 करोड़ नामों को हटाया, हर पाँच में एक वोटर बाहर
सोमवार (24 अगस्त, 2026) को कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के गणना चरण के पूरा होने के बाद जारी की गई प्रारूप मतदाता सूची में चिंताजनक स्तर पर नाम हटाए जाने का खुलासा हुआ है. गणना चरण के दौरान भारी संख्या में नाम हटाने वाले अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में यह अभूतपूर्व है.
सूची से 1.08 करोड़ नामों को हटाए जाने के बाद, 224 विधानसभा क्षेत्रों वाले इस राज्य की मतदाता सूची 19.5% घटकर 5.54 करोड़ से 4.46 करोड़ रह गई है — जिसका अर्थ है एसआईआर से पहले सूची में शामिल लगभग हर पांच में से एक मतदाता को हटा दिया गया है.
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बंगाल एसआईआर: ट्रिब्यूनल ने अब तक सिर्फ 2.17% अपीलों का निपटारा किया; 37 लाख से अधिक अभी भी अधर में
पश्चिम बंगाल के राज्य अपीलीय न्यायाधिकरण को एसआईआर से संबंधित 38,10,620 अपीलें प्राप्त हुई थीं. 7 अगस्त 2026 तक इनमें से केवल 82,782 (मात्र 2.17%) अपीलों का ही निपटारा हो सका है. इसके परिणामस्वरूप विधानसभा चुनाव समाप्त होने के महीनों बाद भी लगभग 37.27 लाख अपीलें अधर में लटकी हुई हैं.
निपटाए गए मामलों में से 75,443 (91.13%) अपीलों में मतदाताओं के नाम पुनः सूची में शामिल किए गए, जबकि केवल 7,339 मामलों में निष्कासन को सही ठहराया गया. 91% से अधिक की यह पुनर्बहाली दर दर्शाती है कि न्यायाधिकरण द्वारा समीक्षा किए गए मामलों में अधिकांश नाम गलत तरीके से हटाए गए थे. पूर्व सैनिक मो. दुआल अली, सेवानिवृत्त विंग कमांडर मो. शमीम अख्तर, घरेलू सहायिका फिरोजा बीबी और लेखाकार मो. निहाल उद्दीन अनवर के मामले यह स्पष्ट करते हैं कि बिना किसी पूर्व सूचना, सुनवाई के अवसर के बिना या 2008 के परिसीमन से पहले के रिकॉर्ड्स के मिलान में आई तकनीकी/लिपिकीय त्रुटियों के कारण वैध नागरिकों के नाम काट दिए गए.
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सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तबादले की मांग की, पूछा कि पक्षपात के स्पष्ट सबूतों के बावजूद सीजेआई ने अपीलों को ‘अनदेखा’ क्यों किया
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को अगस्त में लिखे गए तीन पत्रों में सवाल उठाया गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) संजीव प्रकाश शर्मा के पक्षपात के "स्पष्ट सबूतों" के बावजूद, उनके तबादले की "पुरजोर अपीलों" को "अनदेखा" क्यों किया गया है.
2 अगस्त को लिखे अपने पहले पत्र में, जस्टिस मेहता ने सीजेआई को अपने गृह हाईकोर्ट (राजस्थान) की "गंभीर और परेशान करने वाली स्थिति" के बारे में लिखा. इस पत्र में जस्टिस मेहता ने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश — जो 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं — में नेतृत्व के गुणों की पूरी तरह से कमी देखी गई है और उन्होंने एक से अधिक अवसरों पर संस्थान के शीर्ष पद के अनुचित व्यवहार का प्रदर्शन किया है.
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आकार पटेल : धर्मांतरण की उलझन
इस हफ़्ते की हेडलाइन: "पुणे पुलिस ने 2 मामलों से धर्मांतरण क़ानून के प्रावधान वापस लिए, अधिकारियों को पता चला कि अधिनियम अभी लागू नहीं हुआ है." हमारे हमेशा सतर्क रहने वाले क़ानून लागू करने वालों ने न केवल पिछले क़ानूनों की समस्याओं को सुलझा लिया है बल्कि भविष्य के क़ानूनों की भी. जिस नए क़ानून का ज़िक्र किया गया है वह अब लागू हो चुका है और यह उन तोहफ़ों में से एक है जो बीजेपी ने 2018 से भारत को दिए हैं, जब ऐसा पहला क़ानून उत्तराखंड में लागू हुआ था. धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता भारत में एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 25) होने के साथ-साथ एक आपराधिक कृत्य भी है. इससे कुछ लोग उलझन में पड़ सकते हैं कि हम असल में
क्या करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र की माँ समझदार है और जानती है कि अपने बच्चों को नियंत्रण में कैसे रखना है. मैं पहले भी इन क़ानूनों की विशिष्ट समस्याओं के बारे में यहाँ लिख चुका हूँ, और मैं उन्हें दोहराऊँगा नहीं. लेकिन हमें इस बात पर नज़र डालनी चाहिए कि असल में वह कौन सी समस्या है जिसे ये क़ानून हल करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत में धर्मांतरण कितना बड़ा मुद्दा है?
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'रॉयटर्स' की विशेष रिपोर्ट: तिब्बत-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर टूटने से आई भीषण फ्लैश फ्लड, सैटेलाइट तस्वीरों से 300 से अधिक लोगों के लापता होने और तबाही का खुलासा.
'फर्स्ट पोस्ट' की रिपोर्ट: नेपाल के रसुवा में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंडक-कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा, अलर्ट पर प्रशासन.
'डाउन टू अर्थ' में पूजा दास की रिपोर्ट: हॉर्मुज संकट के कारण भारत पर 22.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त जीवाश्म ईंधन आयात बोझ, वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा के फायदों पर विस्तृत विश्लेषण.
'फातिमा अल्ताफ' का विश्लेषणात्मक लेख: दलित और मुस्लिम महिलाओं को मिलने वाले 'इंटरसेक्शनल टैक्स', सुरक्षित आवास, परिवहन और कार्यबल में टिके रहने की आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों पर पूरी रिपोर्ट.
'मोहम्मद जियाउल्लाह खान' का विश्लेषणात्मक लेख: महाराष्ट्र में राहुल गांधी के बयान के बाद मनुस्मृति, पितृसत्ता, महिलाओं के अधिकार और भारतीय संविधान पर छिड़ी नई राजनीतिक बहस.
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट: न्यू यॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने मैनहट्टन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का समर्थन करने से इनकार किया, बहुलवाद और मानवाधिकारों पर दिया बड़ा बयान.
'आतिरा पेरिनचेरी' की रिपोर्ट: संयुक्त राष्ट्र की 'नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति' (CERD) ने ग्रेट निकोबार द्वीप की 92,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने और जनजातीय अधिकारों की रक्षा की सिफारिश की.
'द टेलीग्राफ' में सुशांत सिंह का लेख: नई दिल्ली में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, भारत की 'बहु-संरेखण' नीति, चीन-रूस का प्रभाव और मोदी सरकार की रणनीतिक चुनौतियों पर विश्लेषण.
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PM CARES Fund में करीब ₹8,450 करोड़ जमा हैं, लेकिन 2024-25 में सिर्फ करीब ₹88 लाख खर्च किए गए. आखिर आपदा के लिए बनाए गए इस फंड का पैसा खर्च क्यों नहीं हो रहा? हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ RTI और Transparency Activist अंजलि भारद्वाज ने PM CARES Fund, पारदर्शिता, जवाबदेही और फंड के इस्तेमाल से जुड़े अहम सवालों पर बात की. हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ ने जाति, छुआछूत और हिंदुत्व की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इस पूरे मामले की पड़ताल की. भंवर मेघवंशी की प्रमुख किताबें: https://www.amazon.com/s?k=Bhanwar+Meghwanshi&i=digital-text&crid=1IRSVBLX03E2Z&sprefix=bhanwar+meghwanshi%2Cdigital-text%2C279&ref=nb_sb_noss हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
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हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं. संघ इस दौरे को "वसुधैव कुटुम्बकम" के संदेश से जोड़ रहा है, लेकिन इस दौरे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ विस्तार से चर्चा की कि अमेरिका में आरएसएस और उससे जुड़े संगठन किस तरह काम करते हैं. हिंदू स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका, हिंदू पहचान की राजनीति, हिंदूफोबिया, जाति भेदभाव और अमेरिकी राजनीति में भारतीय संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दों पर इस बातचीत में गंभीर चर्चा हुई. क्या मोहन भागवत का यह दौरा सिर्फ प्रवासी भारतीयों और हिंदू समुदाय से संवाद का कार्यक्रम है? या फिर इसके पीछे अमेरिका में आरएसएस के सामाजिक और वैचारिक नेटवर्क को मजबूत करने की बड़ी रणनीति है? देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और अजित साही की पूरी बातचीत. #MohanBhagwat #RSS #America #HarkaraDeepDive #NidheeshTyagi #AjitSahi #IndianDiaspora #HinduPolitics #Hindutva #IndianPolitics