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श्रवण गर्ग | शिकंजा ज्ञानेश कुमार पर नहीं, सरकार पर कस रहा है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधीश त्यागी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा कर रहे हैं. बातचीत में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद, सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी और विपक्ष के आंदोलन के व्यापक प्रभाव पर चर्चा हुई.
श्रवण गर्ग का कहना है कि मौजूदा दबाव को केवल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई या उन्हें हटाने की मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, असली राजनीतिक दबाव सरकार पर है और ज्ञानेश कुमार इस पूरे विवाद में एक प्रतीक मात्र हैं. उन्होंने ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की और उनकी तुलना “मर्सिनरी” से की. यह उनका आरोप और राजनीतिक आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि बातचीत में नहीं की गई है.
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह घटा, सितंबर के उच्चतम स्तर से 50 अरब डॉलर कम हुआ
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह घटकर 734.6 अरब डॉलर पर आ गया है. ‘रॉयटर्स’ के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को अपने हालिया उच्चतम स्तर 785.71 अरब डॉलर पर था, जिसमें एक महीने से भी कम समय में लगभग 50 अरब डॉलर की गिरावट आई है.
यह कमी रुपये की गिरावट को थामने के लिए स्पॉट मार्केट (हाज़िर बाज़ार) में आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री और अतिरिक्त तरलता (सरप्लस लिक्विडिटी) को सोखने के उद्देश्य से किए गए सेल/बाय एफएक्स स्वैप (मुद्रा विनिमय) के कारण हुई है.
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‘सुप्रीम कोर्ट जज ने यह क्यों नहीं बताया कि उनका बेटा चुनाव आयोग का स्थायी वकील है’
‘द हिंदू’ ब्यूरो के मुताबिक, भारत के उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाले मामले में 23 सितंबर को सुनाए गए विभाजित फैसले (स्प्लिट वर्डिक्ट) को वापस लेने की मांग वाली याचिका पर विचार करने और सुनवाई का निर्णय लेने पर बुधवार (7 अक्टूबर, 2026) को सहमति व्यक्त की.
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष मौखिक रूप से प्रस्तुत की गई इस याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि शीर्ष अदालत की पीठ के न्यायाधीशों में से एक, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने अदालती कार्यवाही के दौरान यह खुलासा क्यों नहीं किया कि उनका बेटा भारत निर्वाचन आयोग का स्टैंडिंग काउंसल (स्थायी वकील) था.
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पश्चिम बंगाल ट्रिब्यूनल के जजों ने चुनाव आयोग को महीनों पहले ही पोर्टल की कमियों के बारे में चेताया था
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अपीलों की समीक्षा के लिए गठित ट्रिब्यूनल का नेतृत्व कर रहे 19 जजों में से कम से कम 12 ने अगस्त में ईसीआईनेट (ECINET) पोर्टल के बारे में शिकायत की थी, और कहा था कि यह उम्मीद के मुताबिक काम करने में विफल रहा. ट्रिब्यूनल को एसआईआर के दौरान अपीलों की सुनवाई करनी होती है, जिनमें वे मामले भी शामिल हैं जो प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं से संबंधित हैं. यह पोर्टल इस काम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
‘द वायर’ के अनुसार, राज्य में जहां 27 लाख मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके, वहीं 22 लाख लोगों ने ट्रिब्यूनल का रुख किया. जजों ने इस बात को रेखांकित किया है कि पोर्टल की समस्याओं को ठीक करने के उनके अनुरोधों को भी अनसुना कर दिया गया.
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एसआईआर: तेलंगाना में थोक में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने पर भाजपा बूथ एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना पुलिस ने मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 30 से अधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा करने के आरोप में भाजपा के बूथ-लेवल एजेंट एस. बालचंदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन आवेदनों में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए थे, वे सभी मुस्लिम हैं. इनमें कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंट शफीउद्दीन और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं.
एफआईआर मुशीराबाद के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत पर चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. बालचंदर पर भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है.
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पश्चिम बंगाल एसआईआर: 18.78 लाख अपीलें लंबित, मुर्शिदाबाद में 3.72 लाख मामलों पर सिर्फ 275 फैसले
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की 18.78 लाख से अधिक अपीलों पर 28 सितंबर तक फैसला लंबित था. सिविक रिसर्च ग्रुप (सीआरजी) की रिपोर्ट के अनुसार, 23 जिलों की सभी 294 विधानसभा सीटों से हटाए गए मतदाताओं की 19,15,941 अपीलें दर्ज की गई थीं. इनमें सिर्फ 37,272 मामलों में न्यायाधिकरण का फैसला दर्ज हुआ, जबकि 18,78,669 अपीलें यानी 98.05 प्रतिशत मामले लंबित थे.
दर्ज फैसलों में 30,828 अपीलों को मंजूरी मिली और 6,444 खारिज हुईं. मंजूर अपीलों की हिस्सेदारी 82.71 प्रतिशत रही. हालांकि, सीआरजी ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में फैसला दर्ज हुआ, वे कुल अपीलों की तुलना में बहुत कम और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान रूप से वितरित हैं. इसलिए इन फैसलों के आधार पर लंबित अपीलों के संभावित परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता.
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पराली जलाने का मौसम शुरू, मध्य प्रदेश पहले, पंजाब दूसरे और उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर
‘डाउन टू अर्थ’ में भागीरथ लिखते हैं कि देश में धान की पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अंतरिक्ष से कृषि-पारिस्थितिकी निगरानी एवं मॉडलिंग अनुसंधान संघ की 6 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच इन सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज की गईं.
इनमें मध्य प्रदेश में 118, पंजाब में 88, उत्तर प्रदेश में 65, राजस्थान में 10, हरियाणा में 4, दिल्ली में 1 और उत्तराखंड में 1 घटना दर्ज की गई. हालांकि, पूर्व-दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बादल तथा उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में घने बादलों के कारण कुछ घटनाओं का पता नहीं लगाया जा सका. पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी उपग्रहों के जरिए की जाती है.
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जगजीत सिंह | जब उम्मीद भी कीमत मांगने लगे
‘काउंटरकरंट्स’ में जगजीत सिंह लिखते हैं कि कभी उम्मीद को सबसे बड़ा बराबरी का माध्यम माना जाता था. गरीब परिवार का बच्चा डॉक्टर बनने का सपना देख सकता था, सामान्य परिवार अपना घर बनाने की उम्मीद कर सकता था और युवा यह भरोसा रख सकता था कि शिक्षा उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलेगी. सपना आज भी वही है, लेकिन उसे हासिल करने की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है.
आधुनिक भारत में अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षित घर, कानूनी सहायता और रोजगार की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए आर्थिक संसाधन जरूरी होते जा रहे हैं. यह केवल गरीबी की कहानी नहीं है, बल्कि अवसरों के बढ़ते व्यावसायीकरण की कहानी भी है.
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कॉकरोच जनता पार्टी पर सवाल: आंदोलन से चुनाव तक पहुंची राजनीति की जवाबदेही क्या है?
'हरकारा रोज़ाना' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं कॉकरोच जनता पार्टी के उभार, उसकी राजनीति, उसके संगठनात्मक ढांचे और उससे जुड़े कई गंभीर सवालों पर. परीक्षा और छात्रों के भविष्य से शुरू हुआ यह आंदोलन अब चुनाव, मताधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुका है. ऐसे में सवाल यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी आखिर किसकी नुमाइंदगी कर रही है और उसकी राजनीतिक जवाबदेही किसके प्रति है.
कॉकरोच जनता पार्टी का उभार ऑनलाइन माध्यम से हुआ और कुछ ही समय में उसके सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर समर्थक जुड़ गए. इसके बाद आंदोलन जंतर-मंतर तक पहुंचा और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, आंसू गैस और एफआईआर जैसे मामले सामने आए. 25 जुलाई के समझौते और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी पुलिस को निर्देश: यदि ध्वनि मानकों का पालन हो तो मस्जिद में अज़ान के अधिकार में ‘हस्तक्षेप न करें’
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित ध्वनि सीमाओं और लाउडस्पीकर के उपयोग पर अदालत के 2020 के निर्णय का पालन करते हैं, तो सहारनपुर की एक मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान देने के उनके अधिकार में हस्तक्षेप न किया जाए.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के अनुसार, न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शाहनवाज़ खान और पांच अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया. याचिकाकर्ताओं ने आयशा मस्जिद में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी, और आरोप लगाया था कि ध्वनि-प्रवर्धक यंत्रों (साउंड एम्पलीफायरों) के उपयोग को नियंत्रित करने वाले न्यायिक नज़ीरों के बावजूद स्थानीय अधिकारी उनके काम में बाधा डाल रहे हैं.
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बंगाल उपचुनाव: मुस्लिम मतदाताओं को रोका गया, विपक्षी कार्यकर्ता गिरफ्तार, पत्रकारों पर भी शिकंजा
‘स्क्रोल’ में अनंत गुप्ता और रोकिबुज जमान की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने, विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और स्थानीय पत्रकारों के सोशल मीडिया खातों को प्रतिबंधित करने के आरोप सामने आए हैं. विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया है.
रेजीनगर के नजीरपुर गांव स्थित तेघारी प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर रिपोर्टर ने देखा कि कई मुस्लिम महिलाएं मतदान के लिए कतार में थीं, लेकिन नए मतदाता कतार में शामिल नहीं हो रहे थे. मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर मुस्लिम पुरुषों को कथित तौर पर वापस भेजा जा रहा था. वहां मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने हस्तक्षेप नहीं किया. एक ग्रामीण ने बताया कि कैमरे पर बात करने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर था.
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आरक्षण का विरोध करने वालों के लिए सैलूनों से एक सबक, जहाँ दलित युवाओं ने जातिगत बाधाओं को दी चुनौती
मई में, पुरी जिले की सौरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत जोराकानी भोई सही के दृढ-संकल्पित दलित युवाओं के एक समूह ने उन सैलूनों में बाल कटवाने की मांग करके अपनी बात रखने का फैसला किया, जो पारंपरिक रूप से केवल उच्च जातियों की सेवा करते आए थे.
युवाओं का यह प्रयास विफल रहा और इसने छुआछूत की इस प्रथा के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई को जन्म दे दिया—एक ऐसी प्रथा जो भारत द्वारा सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देने वाले संविधान को अपनाने के 76 साल बाद भी जारी है.
बसंत कुमार मोहंती के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संपन्न वर्गों ने जाति-आधारित आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने की मांग को लेकर एक अभियान चला रखा है.
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आरबीआई सर्वे: खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों से भारत में घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एक सर्वेक्षण से बुधवार को यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय परिवारों को महंगाई और बढ़ने की आशंका है. यह इस बात का संकेत है कि भोजन और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति से आगे भी दिखाई देने लगा है.
‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय केंद्रीय बैंक ने बुधवार को लगभग चार वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर बारीक नज़र रखी जाती है क्योंकि यह लोगों के खर्च करने के तौर-तरीकों और वेतन वृद्धि की मांगों को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सर्वेक्षण जनभावना को दर्शाते हैं और ये वास्तविक मुद्रास्फीति का सीधा पूर्वानुमान नहीं हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'हरकारा डीप डाइव': निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की चर्चा; ज्ञानेश कुमार विवाद, पीएम मोदी की राजनीतिक जिम्मेदारी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर विश्लेषण.
'मकतूब मीडिया' व सीआरजी रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल एसआईआर में 18.78 लाख से अधिक अपीलें लंबित; मुर्शिदाबाद में 3.72 लाख अपीलों में से सिर्फ 275 पर फैसला.
'डाउन टू अर्थ' रिपोर्ट: भागीरथ का विश्लेषण; मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं 73% पहुंचीं, पंजाब-हरियाणा में भारी गिरावट; जलवायु संकट और धान खेती का असर.
'काउंटरकरंट्स' निबंध: जगजीत सिंह का विश्लेषण; भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य व अवसरों के बढ़ते व्यावसायीकरण से 'उम्मीद की कीमत' और आर्थिक असमानता पर उठे सवाल.
'हरकारा रोज़ाना' चर्चा: निधीश त्यागी का कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर विश्लेषण; आंदोलन की पारदर्शिता, वित्तीय स्रोत, 25 जुलाई समझौता और 10 अक्टूबर रणनीति पर सवाल.
'स्क्रोल' ग्राउंड रिपोर्ट: रेजीनगर उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को रोकने, पत्रकारों के सोशल मीडिया ब्लॉक और विपक्षी नेताओं की हिरासत पर उठे गंभीर सवाल.
'बसंत कुमार मोहंती' रिपोर्ट: ओडिशा के पुरी में दलित युवाओं की सैलून प्रवेश की मांग पर सवर्णों का बहिष्कार; छुआछूत के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज.
'हिंदुस्तान टाइम्स' रिपोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश; सहारनपुर मस्जिद में ध्वनि सीमाओं व 2020 के फैसले के तहत लाउडस्पीकर से अज़ान का अधिकार बरकरार.
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