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एस.वाई. कुरैशी | निर्वाचन आयोग के नाम पर लिए गए फैसले वास्तव में आयोग के अपने फैसले थे भी या नहीं?
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, हालिया खुलासे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से आगे बढ़कर निर्वाचन आयोग की संस्थागत अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) द्वारा 10 महीनों में 14 बार दर्ज कराई गई आपत्तियों से स्पष्ट है कि आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार किया गया.
2023 के अधिनियम के अनुसार चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए, न कि मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा. डिजिटल नियंत्रण और अनधिकृत अपीलों से जुड़ी ये अनियमितताएं चुनाव आयोग के भीतर एकतरफा फैसलों को उजागर करती हैं. लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आयोग को अपने सभी निर्णयों, आवंटनों और रिकॉर्डों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही साबित करनी होगी.
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यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण के बरी होने के खिलाफ दिल्ली अदालत पहुंचीं महिला पहलवान
चार महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
इशिता मिश्रा के अनुसार, ट्रायल कोर्ट के 3 अगस्त 2026 के फैसले के खिलाफ इस अपील पर शनिवार (26 सितंबर 2026) को राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डिग विनय सिंह द्वारा सुनवाई किए जाने की संभावना है.
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जेन जी के मतदान अधिकार अटके, जनवरी 2024 से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ठप
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ चुनाव आयोग को लेकर सामने आए विवाद, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बदलते घटनाक्रम पर चर्चा की. बातचीत में यह सवाल केंद्र में रहा कि चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति के पीछे आखिर क्या है और आने वाले दिनों में इसका क्या असर हो सकता है.
श्रवण गर्ग ने शुरुआत में 48 घंटे के इस्तीफे के अल्टीमेटम को ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि चर्चा का केंद्र तीन घटनाएं होनी चाहिए—रितिका चोपड़ा की इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट, सरकार की प्रतिक्रिया और राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस. उनके मुताबिक, राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े अपने पुराने आरोपों को फिर दोहराया और कहा कि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं.
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अमिताव घोष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की सीजेपी की मांग का समर्थन किया
ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त लेखक-साहित्यकार अमिताव घोष ने शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान देशभर की मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नामों को हटाए जाने की ओर इशारा किया.
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, अमिताव घोष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "इस समय भारत में जो कुछ हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया को ध्यान देना चाहिए. मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं को व्यवस्थित तरीके से हटाने के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन भारत की जेन-जी इसे समझ चुकी है और अब माहौल बदल रहा है.
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मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में एएफएसपीए छह महीने के लिए बढ़ा
‘पीटीआई’ के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम यानी एएफएसपीए को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. यह फैसला इन इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है.
मणिपुर में 13 थाना क्षेत्र एएफएसपीए से बाहर
मणिपुर में 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक पूरे राज्य को ‘अशांत क्षेत्र’ माना जाएगा. हालांकि, पांच घाटी जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है. इनमें इम्फाल, लांफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगांग, इरिलबुंग, थौबल, बिष्णुपुर, नंबोल और काकचिंग शामिल हैं.
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भाजपा के सत्ता में आने के बाद बंगाल में ईसाइयों पर 60 हमले, प्रार्थना सभाओं पर छापे और महिलाओं से मारपीट: रिपोर्ट
‘इंडिया हेट लैब’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मई से 20 सितंबर 2026 के बीच पश्चिम बंगाल के 13 जिलों में ईसाइयों को निशाना बनाकर कम से कम 60 घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के राज्य में सत्ता में आने के बाद इन घटनाओं में बढ़ोतरी हुई और कुछ मामलों में हमलावरों ने सत्ता परिवर्तन का सीधे तौर पर उल्लेख भी किया.
रिपोर्ट में दर्ज 60 घटनाओं में 52 निजी प्रार्थना सभाओं, घरों, चर्चों और अन्य ईसाई धार्मिक आयोजनों पर छापे शामिल थे. इसके अलावा शारीरिक हमले, भीड़ की हिंसा और तोड़फोड़ की आठ घटनाएं दर्ज की गईं. इसी अवधि में ईसाइयों को निशाना बनाकर पांच सार्वजनिक घृणा भाषण और कथित धार्मिक धर्मांतरण के विरोध में तीन प्रदर्शन भी दर्ज किए गए.
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डॉ. रवि चतुर्वेदी | सार्वजनिक जगहें अब भी महिलाओं के लिए सुरक्षित क्यों नहीं हैं
‘काउंटरकरंट्स’ में डॉ. रवि चतुर्वेदी ने लिखा है कि जब कोई किशोरी घर से बाहर निकलती है तो समाज की जिम्मेदारी केवल यह सुनिश्चित करना नहीं होनी चाहिए कि अपराध होने के बाद पुलिस कार्रवाई करे. सवाल यह है कि क्या सुरक्षा अपराध होने से पहले शुरू नहीं होनी चाहिए और क्या सार्वजनिक स्थानों की संरचना तथा संस्थागत व्यवस्था को इस तरह तैयार नहीं किया जाना चाहिए कि जोखिम को पहले ही कम किया जा सके.
बिहार और दिल्ली में किशोरियों से जुड़ी हाल की घटनाएं इस सवाल को गंभीर बनाती हैं. जमुई में कोचिंग से लौट रही दो किशोरियों को कथित तौर पर एक समूह ने रोका और उनके साथ मारपीट की. एक लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ. समस्तीपुर में भी एक किशोरी के साथ दिनदहाड़े सड़क पर कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना सामने आई. दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में पुलिस के अनुसार, तीन लोगों ने पुलिसकर्मी बनकर 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित यौन हिंसा की.
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मणिपुर के कामजोंग में म्यांमार सीमा के पास उग्रवादियों ने चार नागा नागरिकों की हत्या की, बंद का आह्वान
पुलिस ने बताया कि मणिपुर के कामजोंग जिले के एक गांव में संदिग्ध म्यांमार आधारित कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (केएनए-बी) के उग्रवादियों के हमले में एक पिता और पुत्र सहित चार तांगखुल नागा नागरिकों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई.
‘एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस’ के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम को तब हुई जब अत्याधुनिक हथियारों से लैस संदिग्ध केएनए-बी उग्रवादी पिलोंग नागा गांव में घुस आए और ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. पिलोंग नागा गांव भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है, जो कामजोंग जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर है. इस ताजा घटना के साथ ही, नागा और कुकी-जो समुदायों के सदस्यों से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में पिछले लगभग दो हफ्तों में कम से कम आठ लोग मारे जा चुके हैं.
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चिराग पासवान समेत भाजपा के अन्य सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से माँगा ‘स्पष्टीकरण’
भाजपा के सहयोगी दलों ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को "लोगों के मन से आशंकाओं को दूर करना चाहिए" और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों पर स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के रिपोर्टर्स के अनुसार, तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के ये बयान तब आए हैं, जब विपक्ष चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद को लेकर जवाब माँग रहा है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 23 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार बिना उनकी जानकारी के लिए गए निर्णय और प्रक्रियाओं में गंभीर कमियों पर ऑन-रिकॉर्ड आपत्ति दर्ज कराई थी.
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बंगाल फिर सुर्खियों में: मुस्लिम व्यक्ति और तीन बेटों को घर से उठाया गया, पुलिस का कहना है कि उन्हें ‘निर्वासित’ कर दिया गया
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक बंगाली मुस्लिम परिवार के चार सदस्य करीब 40 दिनों से लापता हैं. परिवार के अनुसार, पुलिस ने उन्हें उनके घर से उठाया था और उन पर बिना दस्तावेज के बांग्लादेशी प्रवासी होने का आरोप लगाया गया था. पुलिस ने ‘स्क्रोल’ को बताया कि चारों को सीमा सुरक्षा बल को सौंप दिया गया और उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया है. हालांकि, ‘स्क्रोल’ स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सका कि चारों को वास्तव में बांग्लादेश भेजा गया था.
मुर्शिदाबाद के बालियाघाटी गांव में रहने वाले 60 वर्षीय डाबलू शेख और उनके तीन बेटे- 29 वर्षीय कायम शेख, 20 वर्षीय रजाउल शेख और 16 वर्षीय असमाउल शेख को 13 या 14 अगस्त की रात सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उनके घर से उठाया था. मानवाधिकार संगठन बांग्लार मानवाधिकार सुरक्षा मंच के अनुसार, डाबलू शेख की पत्नी जहांआरा बीबी को घटना की सटीक तारीख याद नहीं थी.
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मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों की मदद से प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संयुक्त विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपा जाएगा.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, यह घटनाक्रम उसकी इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर आंतरिक रूप से लिखित आपत्तियां जताई थीं. त्रि-सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त 'बराबर वालों में प्रथम' होते हैं और नियमतः फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए.
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अनंत अंबानी की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर संरक्षणवादियों का विरोध
‘द गार्जियन’ में रेचल हॉल और पैट्रिक ग्रीनफील्ड ने लिखा है कि न्यूकैसल विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय तेल और गैस कारोबारी परिवार के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी को स्थिरता के क्षेत्र में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त किए जाने के बाद संरक्षणवादियों, पर्यावरणविदों और विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं.
विश्वविद्यालय ने कहा कि यह नियुक्ति अंबानी के संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा, पशु कल्याण और पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में काम तथा “अधिक टिकाऊ भविष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान” को मान्यता देती है.
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चुनाव आयोग में अभूतपूर्व दरार: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने ईसी के कदमों पर दर्ज कराई आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है. हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष जांच ने इस प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर पनप रहे अभूतपूर्व असंतोष और प्रशासनिक दरार को उजागर कर दिया है.
रीतिका चोपड़ा की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम—जो कि मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है—अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन चुका है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. बड़े पैमाने पर की गई इस कटौती ने पूरे देश में इस बात पर बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का निर्धारण आखिर किस प्रक्रिया के तहत हो रहा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: 'स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2026' में खुलासा; 72% डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी पीड़ितों को नहीं मिला पैसा वापस, गरीब पीड़ितों पर पड़ा अधिक असर.
'इंडिया हेट लैब' रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल में मई-सितंबर 2026 के बीच ईसाइयों पर 60 हिंसक घटनाएं; प्रार्थना सभाओं पर छापे, आधार कार्ड मांगने और धर्मांतरण आरोपों पर रिपोर्ट.
'हरकारा डीप डाइव' चर्चा: पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी का विश्लेषण; चुनाव आयोग की अंदरूनी असहमति, रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट और राहुल गांधी के दावों पर मंथन.
'पीटीआई' रिपोर्ट: पूर्वोत्तर सुरक्षा समीक्षा; गृह मंत्रालय ने मणिपुर (13 थाने छोड़कर), नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में एएफएसपीए (AFSPA) की अवधि 6 महीने के लिए बढ़ाई.
'एस.वाई. कुरैशी' विशेष लेख: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग (ECI) की संस्थागत अखंडता, 14 आपत्तियों, सर्वसम्मति के सिद्धांत और 'टी.एन. शेषन' फैसले पर बड़े सवाल उठाए.
'द हिंदू' रिपोर्ट: इशिता मिश्रा का खुलासा; महिला पहलवानों ने पूर्व WFI प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने के फैसले को राऊज एवेन्यू कोर्ट में दी चुनौती.
'टेलीग्राफ' रिपोर्ट: अमिताव घोष ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया; महुआ मोइत्रा ने दर्ज कराई शिकायत.
'काउंटरकरंट्स' रिपोर्ट: डॉ. रवि चतुर्वेदी का विश्लेषण; बिहार व दिल्ली में किशोरियों के खिलाफ अपराधों के बीच सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, सेफ सिटी प्रोजेक्ट और कैमरों पर रिपोर्ट.
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आकार पटेल को एसआईआर का नोटिस व्हाट्सएप पर मिला. उन्होंने पहले तय किया कि नहीं जाएँगे — "भाड़ में जाए वोट". फिर पत्नी लौटकर बोलीं कि खिड़की के उस पार बैठा आदमी दुखी था कि आपने जवाब तक नहीं दिया. आकार काग़ज़ों की फ़ाइल लेकर पहुँचे. जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल सर्टिफ़िकेट 2006 की सूरत बाढ़ में बह चुके हैं, पासपोर्ट अदालत के पास ज़ब्त है. इस बातचीत में लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल बताते हैं कि एसआईआर की गड़बड़ी सिर्फ़ प्रक्रिया की नहीं, बुनियाद की है: सबूत का बोझ नागरिक पर डाल दिया गया है. सरकार को साबित करना चाहिए कि कोई नाम संदिग्ध है, न कि हर नागरिक को कि वह मौजूद है. दो चरणों के बाद 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुद्ध रूप से करीब 5.84 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं. तीसरा चरण 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में जारी है. हरकारा स्वतंत्र हिंदी पत्रकारिता का मंच है. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. हमारा साथ दें, सब्सक्राइब करें और घंटी दबाएँ. आकार पटेल का लेख: https://www.harkaraonline.com/latest-articles/ep2y76ft64pbdlpb22mfea94hfshfe चुनाव आयोग में 14 आपत्तियां! क्या ज्ञानेश कुमार ने अनसुनी की सहयोगियों की बात? | श्रवण गर्ग #harkara https://youtu.be/LvkuPUKKokQ वेबसाइट: harkaraonline.com
चुनाव आयोग के भीतर क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? इंडियन एक्सप्रेस की रतिका चोपड़ा की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित असहमति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस रिपोर्ट, एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की. इस बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्तियां दर्ज किए जाने का क्या मामला है? क्या मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व मिला? मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण को लेकर क्या सवाल उठ रहे हैं? चुनाव आयोग की स्वायत्तता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका हो सकती है? * इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और सरकार से किन सवालों के जवाब अपेक्षित हैं? श्रवण गर्ग ने इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग के भीतर मतभेद से आगे बढ़कर संस्थागत स्वायत्तता का सवाल बताया. उन्होंने खोजी पत्रकारिता की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर भी अपनी बात रखी. देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की पूरी बातचीत. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #ElectionCommission #GyaneshKumar #SIR #IndianExpress #IndianDemocracy
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हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


चुनाव आयोग को लेकर सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और उसके बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर बहस तेज कर दी है. इस Harkara Deep Dive में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इसी पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित असहमति, 10 महीनों में दर्ज किए गए डिसेंट नोट्स, मतदाता सूची से जुड़े सवाल और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टिंग के आधार पर सामने आए मुद्दों पर बात हुई. साथ ही राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए वोट चोरी और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा हुई. क्या राहुल गांधी के आरोप और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट एक ही मुद्दे की ओर इशारा करते हैं या दोनों को अलग-अलग समझने की जरूरत है? रिपोर्ट को लेकर उठे पत्रकारिता और स्रोतों से जुड़े सवाल क्या हैं? और क्या चुनाव आयोग के भीतर चल रही कथित असहमति का आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक या संस्थागत असर दिखाई देगा? श्रवण गर्ग ने खोजी पत्रकारिता की प्रक्रिया, डिसेंट नोट्स के सामने आने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवालों पर अपनी बात रखी. देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की पूरी बातचीत. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #ElectionCommission #GyaneshKumar #RahulGandhi #IndianExpress #SIR #IndianPolitics