-
एनसीपीआई के तीन सांसदों ने एनडीए बैठक से बनाई दूरी, गठबंधन या बीजेपी में शामिल होने से इनकार
‘द हिंदू’ में शिव सहाय सिंह की रिपोर्ट है कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के तीन सांसद, जो पहले तृणमूल कांग्रेस के सदस्य थे, ने मंगलवार (4 अगस्त 2026) को दिल्ली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक से दूरी बना ली. उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वे भाजपा या भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल नहीं होंगे.
मुरशिदाबाद जिले के इन तीन लोकसभा सांसदों — अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और युसूफ पठान — द्वारा पिछले कुछ दिनों में एनडीए की बैठक से दूरी बनाने का यह दूसरा मामला है. संसद में आयोजित इस बैठक में, जिससे इन सांसदों ने किनारा किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे.
-
भारत में अब मुफ़्त यूपीआई नहीं? सरकार 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगाने पर कर रही विचार
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, मंगलवार को संसद में देश के भुगतान कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए जाने के साथ ही भारत अपने लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए गए लेन-देन पर मर्चेंट शुल्क को फिर से लागू करने के एक कदम और करीब पहुंच गया है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में से एक यूपीआई ने जुलाई में 29.9 ट्रिलियन रुपये ($313.5 बिलियन) मूल्य के 23.6 बिलियन लेन-देन संसाधित किए. वॉलमार्ट का फोनपे और अल्फाबेट का गूगल पे यूपीआई के माध्यम से होने वाले भुगतान में अपना दबदबा बनाए हुए हैं.
-
मोदी सरकार का दावा- उसकी नीतियों से खेलों को मिला बढ़ावा, लेकिन आंकड़े बयां करते हैं उलट कहानी
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्र सरकार का दावा है कि 2014 के बाद अपनाई गई नई खेल नीतियों के कारण भारत ने ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) खेलों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के आंकड़ों और बजटीय आवंटन का गहराई से विश्लेषण करने पर एक भिन्न और जटिल तस्वीर सामने आती है.
सौर्ज्य भौमिक की रिपोर्ट के अनुसार, रियो ओलंपिक 2016 (2 पदक, 67वां स्थान) से सुधार करते हुए टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 7 पदकों के साथ 48वां स्थान हासिल किया, जो भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था.
-
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कनाडा से खालिस्तान समर्थक सिख कार्यकर्ता की जीवन रक्षा का आग्रह किया
‘द गार्डियन’ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कनाडा से सिख कार्यकर्ता मनिंदर सिंह की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय करने का आग्रह किया है. कनाडाई अधिकारियों ने मनिंदर सिंह को उनके जीवन पर मंडराते खतरों के बारे में बार-बार चेतावनी दी है. संयुक्त राष्ट्र के पांच विशेषज्ञों ने कनाडाई सरकार को लिखे एक पत्र में, कनाडाई नागरिक सिंह के खिलाफ "विदेशी धमकी और प्रतिशोध के चिंताजनक आरोपों" का मुद्दा उठाया.
पत्र में याद दिलाया गया कि 2022 से, सिंह को कनाडाई अधिकारियों से उनके जीवन पर विश्वसनीय और आसन्न खतरों के बारे में चार "चेतावनी देने का कर्तव्य" नोटिस प्राप्त हुए हैं.
-
कांवड़ियों ने दो कांस्टेबलों पर किया हमला: दो गुटों में झड़प के बाद पुलिस जीप से बाहर घसीटा
‘भास्कर इंग्लिश’ के अनुसार, मेरठ में कांवड़ियों के दो गुटों के बीच हाथापाई हो गई. सड़क के आरक्षित (रिजर्व) क्षेत्र में कुछ कांवड़िए अपनी कांवड़ लेकर बैठे थे. इसी दौरान हरिद्वार से जल लेने जा रहे सोनू और उसके साथी की बाइक कांवड़ से टकरा गई. इससे कांवड़ टूट गई. जब पुलिस आरोपी सोनू और उसके साथी को जीप में बैठाकर ले जाने लगी, तो कांवड़ियों ने उन पर हमला कर दिया. उन्होंने उन्हें गाड़ी से बाहर खींच लिया और उनकी पिटाई करने लगे. बीच-बचाव के दौरान एक हेड कांस्टेबल के हाथों, कंधों और चेहरे पर चोटें आईं.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की ख़बर है कि कांवड़ियों के एक समूह द्वारा कथित तौर पर हमला किए जाने से उत्तर प्रदेश पुलिस का एक कांस्टेबल घायल हो गया. इस झड़प में कुछ कांवड़ियों को मामूली चोटें आईं और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.
-
आकार पटेल | वैश्विक सपनों को बेचना
'मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र की जननी) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अस्थायी निर्वाचित सीट के लिए खड़ी हो रही है. अस्थायी इसलिए क्योंकि यह दो साल का कार्यकाल है और निर्वाचित इसलिए क्योंकि पाँच स्थायी सदस्यों के साथ बैठने की इच्छा रखने वाले 188 सदस्य देशों के बीच 10 सीटें साझा की जाती हैं. इन 10 सीटों के पास कोई वीटो पावर नहीं होती है, इसलिए यदि चीन, अमेरिका, फ़्रांस, रूस या यूके में से कोई भी किसी चीज़ को नहीं चाहता है, तो उसे ख़ारिज कर दिया जाता है, चाहे बाक़ी 14 सदस्य कैसे भी वोट दें.
'मदर' पहले भी आठ बार चुनी जा चुकी है और पिछली बार हाल ही में 2021-22 में चुनी गई थी. मुझे याद नहीं है कि तब हमने क्या हासिल किया था और मैं अनिश्चित हूँ कि हम फिर से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं, लेकिन तारीख़ में एक सुराग़ मौजूद है.
-
प्रधान का इस्तीफा, लेकिन नाकामियों के बावजूद एनटीए प्रमुख और भाजपा से जुड़े पी.के. जोशी का कद बढ़ता रहा
'द वायर' के लिए कुणाल पुरोहित की इस खोजी रिपोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी (पी.के. जोशी) के दो दशकों से अधिक लंबे करियर, उनके राजनीतिक संपर्कों, उनके नेतृत्व वाले विभिन्न राज्य और केंद्रीय निकायों में हुई अनियमितताओं तथा संस्थागत विफलताओं का गहन विश्लेषण किया गया है. यह रिपोर्ट उजागर करती है कि कैसे मजबूत राजनीतिक संरक्षण और आरएसएस-भाजपा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ाव के कारण पी.के. जोशी का प्रशासनिक कद दो दशकों में लगातार बढ़ता रहा. उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों और एनटीए में पेपर लीक, धांधली, देरी और अपारदर्शिता के दर्जनों मामले सामने आने के बावजूद उन्हें जवाबदेह ठहराने के बजाय लगातार उच्च संवैधानिक और प्रशासनिक पद सौंपे गए, जिसका खामियाजा देश के लाखों युवाओं को भुगतना पड़ रहा है. यहां पेश है पुरोहित की रिपोर्ट का हिंदी में अनुदित सारांश:
-
आकार पटेल | 2014 के बाद भारत-इज़राइल संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक निकटता भी बढ़ी
'हरकारा डीप डाइव' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ लेखक, टिप्पणीकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल बातचीत करते हैं. चर्चा का केंद्र एमनेस्टी इंटरनेशनल की 30 जुलाई को जारी वह रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच भारत से इज़राइल को 2,596 सैन्य शिपमेंट भेजे गए. रिपोर्ट के अनुसार इनमें हथियारों और सैन्य उपकरणों के ऐसे पुर्जे भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल गाज़ा में हो रहे सैन्य अभियान में किया जा सकता है.
आकार पटेल का कहना है कि भारत केवल व्यापार नहीं कर रहा, बल्कि ऐसे समय में सैन्य सामग्री भेज रहा है जब इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में गंभीर आरोपों की सुनवाई चल रही है. उनके अनुसार भारत सरकार को इन परिस्थितियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद शिपमेंट जारी रहे. बातचीत में यह भी आरोप लगाया गया कि रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने के बाद सार्वजनिक कस्टम डेटा तक सीमित कर दिया गया, जिससे इन शिपमेंट्स की निगरानी कठिन हो गई.
-
निहार नलिनी सारंगी | हंकार का गणित: दो उपचुनाव, भाजपा के लिए एक चेतावनी
करीब एक हजार किलोमीटर की दूरी पर हुए दो उपचुनावों ने एक जैसा संदेश दिया है. यह संदेश विचारधारा का नहीं, बल्कि उस राजनीति का है जो चुनाव लड़ने के बजाय अपनी जीत को तय मान लेती है.
3 अगस्त को पटना के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया से आए नतीजों ने भाजपा के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए. बांकीपुर में भाजपा के नितिन नवीन, जिन्होंने पिछले 15 वर्षों से सीट पर कब्जा बनाए रखा था और आठ महीने पहले 62.66 प्रतिशत वोटों के साथ जीते थे, उन्हें पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर ने 18,953 वोटों से हरा दिया. वहीं दतिया में भाजपा ने पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी, लेकिन कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से जीत दर्ज कर ली. दोनों राज्यों के मुद्दे अलग थे, लेकिन दोनों नतीजों ने भाजपा की चुनावी रणनीति में एक जैसी कमजोरी की ओर इशारा किया.
-
फैसल सी.के. | सिर्फ जज बढ़ाने से नहीं सुधरेगी न्याय व्यवस्था
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संसद ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का फैसला किया है. लेकिन विधि विशेषज्ञ और लेखक फैसल सी.के. का तर्क है कि यह कदम समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. उनके अनुसार न्यायपालिका का संकट केवल न्यायाधीशों की कमी का नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक संरचना का संकट है.
-
सुदीप ठाकुर | बगल के कमरे में कोई पिट रहा है!
अपनी हालिया किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ (Mother Mary Comes To Me) को लेकर खासी चर्चा में रहने वाली अरुंधति रॉय की धमक हिंदी में भी कम नहीं है. अब इस किताब का तर्जुमा 'मेरी मां, मेरी गैंगस्टर' के रूप में राजकमल प्रकाशन समूह से आया है और सोमवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में खचाखच भरे हाल में हुए कार्यक्रम में भी अरुंधति की धमक दिखाई दी.
यों तो ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ (The God of Small Things) में अरुंधति रॉय के निजी जीवन के अक्स नजर आते हैं, लेकिन मेरी मां, मेरी गैंगस्टर अरुंधति और उनकी मां के रिश्ते को जिस तरह खोलती है
-
'अगर शिक्षक ही कक्षा में नहीं होंगे तो बच्चों का भविष्य क्या होगा?' मुंबई के स्कूलों पर एसआईआर का असर
महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर ) अभियान का असर अब सिर्फ चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है. इसका सीधा प्रभाव स्कूलों और बच्चों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है. सरकारी और अनुदानित निजी स्कूलों के हजारों शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) बनाकर चुनावी काम में लगा दिया गया है, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है और पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, मुंबई के सायन स्थित डीएस हाई स्कूल की 37 वर्षीय शिक्षिका श्वेता पाटिल इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. वे पिछले 15 वर्षों से दूसरी कक्षा को पढ़ा रही हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द हिंदू' की रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल के एनसीपीआई सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और युसूफ पठान ने एनडीए बैठक से बनाई दूरी; भाजपा में शामिल होने से किया इनकार.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: संसद में भुगतान संशोधन विधेयक पेश होने के साथ भारत UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के एक कदम और करीब.
'स्क्रोल' की रिपोर्ट: महाराष्ट्र में SIR अभियान के चलते हजारों शिक्षक बीएलओ ड्यूटी पर तैनात; स्कूलों में पढ़ाई ठप, दो-दो कक्षाएं मिलाकर पढ़ाने को मजबूर.
सौर्ज्य भौमिक की रिपोर्ट: 2014 के बाद खेल नीति में सुधार के सरकारी दावों के बावजूद एलीट एथलीटों की फंडिंग में भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के आंकड़ों का विश्लेषण.
'द गार्डियन' रिपोर्ट: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कनाडा से सिख कार्यकर्ता मनिंदर सिंह की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लक्षित खतरों से बचाने का आग्रह किया.
'भास्कर इंग्लिश' व 'हिंदुस्तान टाइम्स' रिपोर्ट: मेरठ में कांवड़ टकराने पर कांवड़ियों के दो गुटों में मारपीट, पुलिस जीप से खींचकर पिटाई; हेड कांस्टेबल घायल.
'आकार पटेल का विशेष लेख': भारत के UN Security Council 2028-29 चुनाव, SHANTI-MANAV एजेंडे, इजराइल-गाजा नीति और विदेश नीति के विरोधाभासों पर तीखा प्रहार.
'द वायर' की खोजी रिपोर्ट: एनटीए प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी के 20 साल के करियर, राजनीतिक संरक्षण, और नीट-यूजीसी नेट सहित दर्जनों पेपर लीक-धांधलियों का पूरा कच्चाचिट्ठा.
वीडियो
गाज़ा युद्ध में भारत की भूमिका क्या सिर्फ एक दर्शक की है, या भारत की ओर से इज़राइल को भेजे जा रहे सैन्य शिपमेंट इस संघर्ष में उसकी भूमिका को नया अर्थ देते हैं? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ लेखक, टिप्पणीकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
गाज़ा युद्ध में भारत की भूमिका क्या सिर्फ एक दर्शक की है, या भारत की ओर से इज़राइल को भेजे जा रहे सैन्य शिपमेंट इस संघर्ष में उसकी भूमिका को नया अर्थ देते हैं? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ लेखक, टिप्पणीकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करते हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच भारत से इज़राइल को 2,596 सैन्य शिपमेंट भेजे गए. बातचीत में इन्हीं दावों, भारत-इज़राइल संबंधों, गाज़ा युद्ध, मानवाधिकार, भारत की विदेश नीति और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े अहम सवालों पर चर्चा की गई है. इस वीडियो में जानिए. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है? भारत से इज़राइल को किस तरह की सैन्य सामग्री भेजे जाने की बात कही गई है? क्या इससे भारत की वैश्विक छवि और कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है? वर्ष 2014 के बाद भारत-इज़राइल संबंधों में क्या बदलाव आया? निगरानी, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर क्या सवाल उठ रहे हैं? क्या भारत की विदेश नीति और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बना हुआ है? अगर आपको यह विश्लेषण महत्वपूर्ण लगे तो वीडियो को साझा करें, अपनी राय टिप्पणी में लिखें और हरकारा से जुड़ने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट: https://www.amnesty.org/en/documents/asa20/1327/2026/en/
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.

