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रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की बदहाली, 90% स्टेशनों में कमी और कई जगह दूषित पानी: कैग
‘डाउन टू अर्थ’ के मुताबिक, भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. 12 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए करीब 90 फीसदी रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए निर्धारित न्यूनतम जरूरी सुविधाओं में से एक या उससे अधिक की कमी पाई गई. कई स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली.
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मणिपुर: हिंसक घटनाएँ और चर्च-मकानों में आगजनी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-“लड़ते-लड़ते थक गए होगे”
मणिपुर के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे. बीते मंगलवार को कुकी आबादी वाले कांगपोकपी जिले के तोकपा नागा गांव में हथियारबंद लोगों ने गोलियां चलाईं, और इसके बाद उन्होंने लगभग दस घरों, एक चर्च और अन्य संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया. ‘द प्रिंट’ में समृद्धि तिवारी याद दिलाती हैं कि कुछ दिन पहले ही एक कुकी समूह ने आरोप लगाया था कि हथियारबंद लोगों ने — जिन्हें उन्होंने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) से जुड़ा बताया था — कांगपोकपी के ही कैलेनजांग गांव में भी घरों को जला दिया था.
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सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ नफरती भाषण का मामला खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त, 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर पर दिए गए कथित नफरती भाषण (हेट स्पीच) के मामले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की वैधानिक अनुमति देने में विफल रही.
कृष्णदास राजगोपाल के मुताबिक, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 के अनुसार, राज्य के खिलाफ नफरत या वैमनस्य फैलाने जैसे मामलों में अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है. पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस दीपांकर दत्ता ने स्पष्ट किया कि बिना सरकारी अनुमति के कानूनन कोई मामला नहीं बनता.
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अंडमान-निकोबार के मुख्य सचिव ने कहा था कि शोम्पेन जनजाति को ‘आधुनिक जीवनशैली अपनानी होगी’: जनजातीय परिषद का आरोप
ग्रेट और लिटिल निकोबार की जनजातीय परिषद ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप प्रशासन पर ₹91,000 करोड़ की 'ग्रेट निकोबार द्वीप' (जीएनआई) विकास परियोजना के ज़रिए स्थानीय जनजातियों की जीवनशैली और अधिकारों को अनदेखा करने का गंभीर आरोप लगाया है. उनमें चिंता इस बात की है कि जब ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट स्थायी रूप से शुरू हो जाएगा, तब बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहने वाले शोम्पेन आदिवासियों की जीवनशैली का क्या होगा?
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जापान आमों को वापस लौटा रहा, चीन की चावल पर रोक और यूरोपीय निरीक्षक मसालों पर सवाल उठा रहे हैं, क्यों?
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक होने के बावजूद, वैश्विक कृषि-निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.4 प्रतिशत है. हाल के दिनों में जापान, चीन, हांगकांग और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों ने भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, कीटनाशक अवशेषों और प्रमाणन प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए सख्त कदम उठाए हैं.
‘अलजज़ीरा’ में कामरान यूसुफ की रिपोर्ट है कि मार्च 2026 में लखनऊ स्थित 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (वीएचटी) सुविधा के निरीक्षण के बाद जापानी निरीक्षकों ने मानक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए और 25 मार्च के बाद के सभी भारतीय आम शिपमेंट पर रोक लगा दी.
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राकेश कायस्थ | मैं 12 साल से कह रहा हूं, प्रधानमंत्री लाल किले से भारत के प्रधानमंत्री की तरह कब बोलेंगे?
5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे. लेकिन इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि प्रधानमंत्री क्या बोलेंगे, बल्कि यह भी है कि किन मुद्दों पर चुप रहेंगे. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने लेखक और व्यंग्यकार राकेश कायस्थ के साथ इसी सवाल पर चर्चा की.
राकेश कायस्थ ने पिछले प्रधानमंत्रियों के स्वतंत्रता दिवस भाषणों को याद करते हुए कहा कि उनके भाषणों में देश के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों और भविष्य की दिशा की स्पष्ट तस्वीर दिखाई देती थी
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जनगणना 2027 में जाति की गिनती, 40 सवालों में कोविड टीकाकरण से बैंक खातों तक
‘स्क्रोल’ के मुताबिक,केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया है. इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी. स्वतंत्र भारत में यह पहली बार होगा जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा देश के सभी समुदायों की जातियों की भी गणना की जाएगी.
अब तक स्वतंत्र भारत में होने वाली दशकीय जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी से जुड़ा जातिगत आंकड़ा दर्ज किया जाता था. अन्य जातियों की संख्या के लिए कोई व्यापक आधिकारिक जनगणना नहीं हुई है. भारत में सभी जातियों की आखिरी व्यापक गणना 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी.
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‘भगवान ने आदेश दिया’: सुखबीर बादल पर तलवार से हमला करने वाले निहंग का पुलिस को बयान
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला करने वाले निहंग सिख जसपाल सिंह ने पुलिस पूछताछ में दावा किया है कि उसे यह हमला करने का ‘आदेश’ वाहेगुरु से मिला था. जसपाल के मुताबिक, उसे यह आदेश नांदेड़ के गुरुद्वारे में प्रार्थना के दौरान मिला.
घटना गुरुवार को नांदेड़ के गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी, मुगत में हुई. सुखबीर बादल गुरुद्वारे की सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे, तभी वहां तीन अन्य लोगों के साथ खड़े जसपाल सिंह ने उन पर कृपाण से हमला करने की कोशिश की. इस हमले में बादल के हाथ में चोट आई.
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रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों तक दिव्यांगता सहायता अब भी क्यों नहीं पहुंच पाती
‘स्क्रोल’ की लेखिका नोलिना मिंज ने झारखंड में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया से जूझ रहे परिवारों की स्थिति पर रिपोर्ट की है. भारत में इन बीमारियों को दिव्यांगता के रूप में मान्यता मिलने के बावजूद, जांच, इलाज और सरकारी सहायता तक पहुंच की कमी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है.
सूर्योदय कुम्हार की बीमारी का पता संयोग से चला. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के धाटकीडी गांव में रहने वाले छह वर्षीय सूर्योदय कुम्हार को अक्सर जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द और अत्यधिक थकान होती थी.
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ई20 ईंधन को लेकर मारुति, टाटा और महिंद्रा ने भी उठाए थे सवाल, ई-मेल से चिंताओं का खुलासा
जब से देशभर में 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई20) को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है, तब से वाहनों में खराबी आने के मामले सामने आ रहे हैं. विशेषकर सोशल मीडिया में ई20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान की व्यापक चर्चा है. अब पता चला है कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रमुख संस्था ‘एसआईएएम’ (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने भी 28 जुलाई को सरकार को एक शिकायत पत्र भेजकर ई20 ईंधन में संदूषण (मिलावट और अशुद्धि) की बात उठाई थी. लेकिन केंद्र सरकार ने जैसे हि ई20 ईंधन के सुरक्षित होने का आश्वासन दिया, इसके तुरंत बाद एसआईएएम ने अपना पत्र वापस ले लिया और कहा कि डेटा को और अधिक "प्रमाणीकरण" और जांच की आवश्यकता है.
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जले हुए नोटों का मामला: न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप ‘साबित’
‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम’ के तहत गठित और उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने पाया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ सभी आरोप "साबित" हो गए हैं.
लोकसभा समिति ने पाया कि न्यायमूर्ति वर्मा का स्पष्टीकरण "टालमटोल वाला और असंतोषजनक" रहा और वे "अपने आवास के स्टोर रूम में पाई गई नकदी की मौजूदगी और उसके स्वामित्व पर संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'डाउन टू अर्थ' रिपोर्ट: भारतीय रेलवे के 89% गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की कमी और पीने के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने का कैग (CAG) रिपोर्ट में खुलासा.
'द प्रिंट' में समृद्धि तिवारी की रिपोर्ट: मणिपुर के कांगपोकपी में ताज़ा हिंसा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर नाकाबंदी, सुप्रीम कोर्ट की शांति अपील और असम-अरुणाचल सीमा विवाद.
कृष्णदास राजगोपाल की रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर हेट स्पीच मामला रद्द किया; उत्तर प्रदेश सरकार वैधानिक अनुमति देने में रही विफल.
अभिनय लक्ष्मण और अमृत ढिल्लों की रिपोर्ट: ₹91,000 करोड़ की 'ग्रेट निकोबार' परियोजना से शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व और अधिकारों पर मंडराया संकट.
'अलजज़ीरा' में कामरान यूसुफ की रिपोर्ट: भारतीय कृषि निर्यात पर जापान, चीन और ईयू के कड़े प्रतिबंध; आम, चावल और मसालों की गुणवत्ता पर उठे सवाल.
'हरकारा डीप डाइव': 15 अगस्त को लाल किले से पीएम मोदी के संबोधन पर निधीश त्यागी और राकेश कायस्थ का विश्लेषण; जानें भाषण के मुख्य बिंदु और देश के सवाल.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 40 सवाल अधिसूचित किए, 1931 के बाद पहली बार होगी सभी समुदायों की व्यापक जातिगत जनगणना.
'इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह ने पूछताछ में वाहेगुरु के आदेश का दावा किया.
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15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे. लेकिन इस बार बड़ा सवाल यह है कि मोदी क्या बोलेंगे और किन ज्वलंत मुद्दों पर चुप रहेंगे? रोजगार, शिक्षा, युवाओं का आंदोलन, संसद में जवाबदेही, राम मंदिर से जुड़े सवाल, किसानों, अल्पसंख्यकों और विदेश नीति के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से देश जवाब की उम्मीद करता है. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने लेखक और व्यंग्यकार राकेश कायस्थ के साथ चर्चा की कि क्या इस बार प्रधानमंत्री का भाषण देश के असली सवालों का सामना करेगा या फिर एक बार फिर चुनावी तेवर और राजनीतिक दावों तक सीमित रहेगा. राकेश कायस्थ कहते हैं, "मैं इस हेडलाइन का इंतजार कर रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से भारत के प्रधानमंत्री की तरह कब बोलेंगे? यह इंतजार मैं 12 साल से कर रहा हूं." क्या इस बार लाल किले से देश के सवालों के जवाब मिलेंगे? देखिए पूरी बातचीत.
Harkara Live में निधीश त्यागी के साथ चर्चा — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण की बदलती भूमिका और उसकी घटती राजनीतिक अहमियत पर. इस बार के भाषण में किन प्रमुख मसलों पर बात होगी? किन मुद्दों पर प्रधान चुप्पी साध सकते हैं? और क्या लाल किले से होने वाला भाषण अब जनता की उम्मीदों और वास्तविक सवालों से दूर होता जा रहा है? प्रमुख मसले, प्रधान चुप्पी और 15 अगस्त के भाषण की राजनीतिक प्रासंगिकता पर खास चर्चा.
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हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


15 अगस्त के लाल क़िले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है. स्वतंत्रता दिवस के मंच से मोदी क्या संदेश देंगे? वंदे मातरम् को लेकर जारी बहस के पीछे की राजनीति और इसके व्यापक मायने क्या हैं? इन्हीं सवालों पर हरकारा लाइव में प्रो. अपूर्वानंद के साथ चर्चा कर रहे हैं.