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जेल में बंद 25 लोग भी सीजेपी प्रदर्शन में ‘दिखे’, चेहरे की पहचान प्रणाली पर उठे सवाल
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शनों से जुड़ी सभी प्राथमिकी रद्द कर दीं. हालांकि, उसने दिल्ली पुलिस को उन 2,873 लोगों के खिलाफ आगे बढ़ने की अनुमति दी, जिनके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि उनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं और 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर हुए मुख्य प्रदर्शन स्थल पर चेहरे की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर के जरिये उनकी पहचान की गई.
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल चेहरे की पहचान के आधार पर कार्रवाई नहीं होगी. किसी भी कार्रवाई से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा.
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आईडीबीआई में केंद्र और एलआईसी की हिस्सेदारी औने-पौने दाम पर बेचने से जनहित को नुकसान और गंभीर कानूनी सवाल
पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. सरमा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी फेयरफैक्स को बेचने की प्रस्तावित योजना पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं. उनका आरोप है कि निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी डीआईपीएएम बैंक की हिस्सेदारी उसकी वास्तविक क्षमता और संपत्तियों के मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए सौदे को रोकने की मांग की है.
सरमा के अनुसार, आईडीबीआई के पास देश के कई बड़े शहरों में बेहद मूल्यवान जमीन और भवन हैं. इनमें से कई संपत्तियां भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत "सार्वजनिक उद्देश्य" के लिए अधिग्रहित की गई थीं. उस समय सरकारी नियंत्रण वाली कंपनी के लिए किया गया अधिग्रहण निजी स्वामित्व में हस्तांतरण की स्थिति में कानूनी सवाल खड़े करता है.
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एम. ए. बेबी | आत्मनिर्भर लूट और तबाही
सुभाष चंद्रा पर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के आदेश का सार यह है कि उन्हें हर 100 रुपये के कर्ज के बदले सिर्फ तीन पैसे चुकाने होंगे. 25 अगस्त 2026 को न्यायाधिकरण ने ऐसी योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत एस्सेल समूह और जी के संस्थापक सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के निपटारे के लिए केवल 6.25 करोड़ रुपये देने होंगे. यानी 99.97 प्रतिशत की कटौती. उनके कर्जदाता निजी सट्टेबाज नहीं, बल्कि आम भारतीयों की बचत से जुड़े संस्थान हैं. इनमें एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं. एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का 1,322 करोड़ रुपये का दावा घटकर सिर्फ 38 लाख रुपये रह गया.
2017-18 में चंद्रा की संपत्ति का अनुमान 40,000 से 46,000 करोड़ रुपये के बीच था. लेकिन दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने तक यह कथित तौर पर घटकर 31.79 करोड़ रुपये रह गई. न्यायाधिकरण के सामने संपत्तियों का एक-एक करके कोई स्पष्ट हिसाब भी नहीं रखा गया.
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सुरभि गुप्ता | मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से क्या हासिल हुआ, और क्या उल्टा पड़ गया?
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने न्यूयॉर्क से न्यू लाइंस मैगजीन की साउथ एशिया एडिटर सुरभि गुप्ता के साथ मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और उसके बाद पैदा हुए विवादों पर चर्चा की. बातचीत का केंद्र मेडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित वह सम्मेलन रहा, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विश्व बंधुत्व, शांति, प्रेम और वसुधैव कुटुंबकम की बातें कीं. उन्होंने यह भी कहा कि जो हिंदू मुसलमानों को भारत से बाहर करना चाहता है, वह हिंदू नहीं है.
हालांकि, इस आयोजन का घोषित उद्देश्य आरएसएस की छवि को एक समावेशी और शांतिप्रिय संगठन के रूप में प्रस्तुत करना था, लेकिन इसके बाद कई सवाल खड़े हो गए. सम्मेलन में शामिल कुछ बहुधार्मिक नेताओं ने बाद में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कार्यक्रम आरएसएस से जुड़ा हुआ है. उनका कहना था कि यदि उन्हें पहले से इसकी जानकारी होती, तो वे इसमें शामिल नहीं होते. इससे आयोजन की पारदर्शिता और उसकी वास्तविक मंशा पर सवाल उठे.
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पर्वतारोहियों के पेशाब से पिघल रहा है एवरेस्ट का ग्लेशियर: नए अध्ययन की चेतावनी
एक नए शोध के अनुसार, एवरेस्ट बेस कैंप में जलाए जाने वाले ईंधन से उत्पन्न गर्मी और सीधे ग्लेशियर पर विसर्जित किया जाने वाला पेशाब हर साल 2,500 टन बर्फ और हिम को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है.
एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एवरेस्ट के नेपाली ओर स्थित बेस कैंप के स्थान—खुंबू ग्लेशियर—का अध्ययन किया और अपने निष्कर्षों को जर्नल ‘रीजनल एनवायरनमेंटल चेंज ’ में प्रकाशित किया. इस बारे में स्तुति मिश्रा ने ‘द इंडिपेंडेंट’ में रिपोर्ट की है.
अध्ययन से पता चला है कि 2023 में 50 दिनों के वसंत ऋतु के दौरान कैंप के लगभग 1,600 तंबुओं को चलाने के लिए खाना पकाने, हीटिंग और बिजली के लिए तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के 824 कैनिस्टर, 18,935 लीटर केरोसिन और 5,130 लीटर पेट्रोल की खपत हुई.
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भारत से जुड़े गोला-बारूद सौदे के कारण एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा
हथियारों के कारोबार में बिना किसी पूर्व अनुभव वाली भारत-नियंत्रित कंपनी के साथ 7 करोड़ यूरो का तोपखाने गोला-बारूद का सौदा एक बड़े घोटाले में बदलने के बाद एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है.
परन बालाकृष्णन की रिपोर्ट के अनुसार, एस्टोनिया के सार्वजनिक प्रसारक की अंग्रेजी भाषा सेवा 'ईआरआर' ने रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर को पद छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने के बाद इसे "रक्षा खरीद घोटाला" करार दिया. हालांकि, पेवकुर ने जोर देकर कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस सौदे के लिए दोषी नहीं थे.
इस विवाद के केंद्र में 'डेटासेल' है, जो भारत के नेको ग्रुप के स्वामित्व वाली एक छोटी इतालवी कंपनी है. नेको ग्रुप का नियंत्रण नागपुर स्थित जायसवाल परिवार के पास है. एस्टोनिया का कहना है कि डेटासेल समय पर अधिकांश गोला-बारूद की आपूर्ति करने में विफल रही. इसका यह भी दावा है कि जो कुछ गोला-बारूद पहुंचा, उनमें से कुछ आवश्यक मानकों पर खरे नहीं उतरे.
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सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा— जंतर-मंतर पर पुलिसकर्मियों को हमला करते देखना ‘बेहद व्यथित’ करने वाला था
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भूयान ने शुक्रवार को कहा कि जुलाई में जंतर-मंतर पर पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखना "व्यथित करने वाला" और "गंभीर चिंता का विषय" था. उनकी यह टिप्पणी उनके उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अलग राय व्यक्त करने या सवाल पूछने पर छात्रों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए.
जस्टिस भूयान ने पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की किताब "पुलिसिंग द रिपब्लिक" के विमोचन के अवसर पर यह टिप्पणी की. समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ के अनुसार, उन्होंने कहा, "जब हम भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जाकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखते हैं, तो हम सभी हताश हो जाते हैं. इसे देखना बहुत, बहुत व्यथित करने वाला है."
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जीडीपी आंकड़ों की समीक्षा करने वाले पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग कौन हैं?
इस सप्ताह के शुरू में (31 अगस्त) भारत की पहली तिमाही (क्वार्टर-1) के जीडीपी वृद्धि आंकड़े जारी होने के बाद, पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सुभाष चंद्र गर्ग खुद को इन आंकड़ों को लेकर छिड़ी एक जोरदार बहस के केंद्र में पा रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक टीवी चैनल (एनडीटीवी) को दिए गए एक साक्षात्कार में, जो काफी वायरल हुआ है, वित्त मंत्रालय के इस पूर्व शीर्ष नौकरशाह ने भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर पर सवाल उठाए हैं, जिसने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया था.
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श्रवण गर्ग | जीडीपी की खुशी सिर्फ प्रधानमंत्री के चेहरे पर है, देश के चेहरे पर नहीं है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर को लेकर उठे सवालों पर विस्तार से चर्चा की. सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत बताई है, लेकिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने इस आंकड़े पर सवाल उठाते हुए वास्तविक वृद्धि दर करीब 2.6 प्रतिशत होने का दावा किया है.
विवाद की मुख्य वजह जीडीपी की गणना के लिए इस्तेमाल किए गए आधार वर्ष और पुराने आंकड़ों में किया गया संशोधन है. सुभाष गर्ग का कहना है कि पिछले वर्ष की जीडीपी के आंकड़े को 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया. इसके बाद मौजूदा वर्ष के आंकड़े से तुलना करने पर वृद्धि दर काफी अधिक दिखाई देने लगी. उनका सवाल है कि यदि पिछले वर्ष का आंकड़ा नहीं बदला जाता, तो वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के बजाय लगभग 2.6 प्रतिशत होती.
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अडानी के स्वामित्व में भारत के सबसे पुराने सीमेंट संयंत्रों में से एक बंद, हजारों लोगों की आजीविका पर संकट
‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित मयंक आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित झिंकपानी का चाईबासा सीमेंट वर्क्स बंद हो गया है. अडानी समूह के स्वामित्व वाली एसीसी सीमेंट इकाई के बंद होने से हजारों लोगों की आजीविका संकट में पड़ गई है. यह संयंत्र क्षेत्र के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक था और दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा छोटे कारोबार का प्रमुख आधार बना हुआ था.
16 अगस्त को बंद हुआ संयंत्र
चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया. कंपनी ने इसके पीछे मुख्य कारण चूना पत्थर के भंडार का समाप्त होना बताया है. संयंत्र के लिए जरूरी चूना पत्थर की आपूर्ति अब पहले की तरह स्थानीय खदानों से नहीं हो पा रही थी.
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एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम उन राज्यों में हटे, जहां पिछले तीन वर्षों में चुनाव हुए
‘द वायर’ में प्रकाशित श्रावस्ती दासगुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली और आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इन सभी राज्यों में पिछले तीन वर्षों के दौरान विधानसभा चुनाव हुए हैं. बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि यदि इतने मतदाता अपात्र थे, तो उन्हें हाल के चुनावों में मतदान करने की अनुमति कैसे मिली.
17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 6.15 करोड़ नाम हटे
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तीसरे चरण में जारी मसौदा मतदाता सूचियों से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 6,15,07,245 नाम हटाए गए हैं. अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक यह आंकड़ा बदल सकता है, क्योंकि दावे और आपत्तियों के बाद कई नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं.
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"मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी". 15 साल की लड़की ने कहा, "मैं पीछे नहीं हटूंगी"
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, नोएडा की 15 वर्षीय रुचिका सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न, धमकियों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. अब मकतूब मीडिया से बातचीत में रुचिका ने कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी जिंदगी "नरक" बना दी है और वह अपने चेहरे को छिपाकर रहने के लिए मजबूर हैं.
रुचिका ने कहा, "मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी है." उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल की लड़की को इस तरह परेशान किया गया कि वह कहीं स्वतंत्र रूप से जा या रह नहीं सकती. उनके मुताबिक, उन्हें हर जगह अपना चेहरा छिपाना पड़ता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "कायर" भी कहा और साफ किया कि वह पीछे नहीं हटेंगी.
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सोनिया गांधी की किताब: पेंगुइन इंडिया के वकीलों ने 'कई अध्यायों' में बदलाव और कटौती माँगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग' को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) के वकीलों ने कई अध्यायों में बदलाव और कटौती की माँग की थी. पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इकाई अल्फ़्रेड ए नॉफ़ इस किताब की वैश्विक प्रकाशक है, जबकि भारत में इसे छापने और बाँटने की ज़िम्मेदारी पीआरएचआई के पास थी. किताब 10 नवंबर को आनी थी. इसकी घोषणा सबसे पहले नॉफ़ ने की थी और यह भी बताया था कि पहली छपाई एक लाख प्रतियों की होगी.
इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार जिन हिस्सों पर आपत्ति उठाई गई, उनमें थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके 12 साल के शासन से जुड़े संदर्भ, आरएसएस की भूमिका, साम्प्रदायिक विभाजन और दंगों की घटनाओं का ज़िक्र, और अल्पसंख्यकों की दुर्दशा.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'इंडियन एक्सप्रेस' की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: जंतर-मंतर प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस के फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर (FRS) का बड़ा झोल; जेल में बंद 25 कैदियों को बताया प्रदर्शन स्थल पर मौजूद.
पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. सरमा का वित्त मंत्री को पत्र: आईडीबीआई बैंक की फेयरफैक्स को बिक्री, संपत्ति के कम मूल्यांकन और 51% हिस्सेदारी के वादे के उल्लंघन पर जताई गंभीर आपत्ति.
एम. ए. बेबी का विश्लेषण: सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ कर्ज पर NCLT के फैसले, कॉरपोरेट टैक्स छूट, ग्रामीण रोजगार संकट और मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला.
'हरकारा डीप डाइव': निधीश त्यागी और सुरभि गुप्ता की चर्चा; मोहन भागवत के मैडिसन स्क्वायर भाषण, आरएसएस की अमेरिकी लॉबिंग और विदेशी मीडिया में उठे विवादों का विश्लेषण.
आर्यन मुद्गल की रिपोर्ट: मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा का 20 नागरिक समाज समूहों और जेरेमी कॉर्बिन द्वारा विरोध; सादिक खान से बहिष्कार की अपील.
'द इंडिपेंडेंट' में स्तुति मिश्रा की रिपोर्ट: एवरेस्ट बेस कैंप में ईंधन और पेशाब की गर्मी से हर साल पिघल रही 2,500 टन बर्फ, शोधकर्ताओं की चेतावनी.
परन बालाकृष्णन की रिपोर्ट: एस्टोनिया में भारत-नियंत्रित कंपनी 'डेटासेल' के ₹700 करोड़ गोला-बारूद सौदे में गड़बड़ी; रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर को देना पड़ा इस्तीफा.
जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भूयान की सख्त टिप्पणी: "पुलिसिंग द रिपब्लिक" किताब विमोचन पर निष्पक्षता और पुलिस सुधारों पर दिया बड़ा बयान.
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हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा और उनके हालिया बयान पर खास चर्चा. न्यूयॉर्क में श्री मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है. उन्होंने हिंदुत्व, धार्मिक विविधता, सभी धर्मों के सम्मान और “यूनिटी इन डायवर्सिटी” की बात भी की. लेकिन सवाल यह है कि भागवत ने वास्तव में क्या कहा और उस बयान का पूरा संदर्भ क्या है? जिस बात पर इतना हल्ला मचा, क्या बहस उसी बात पर हो रही है जो उन्होंने कही? RSS, हिंदुत्व और हिंदू समाज को लेकर भागवत का संदेश क्या है? और न्यूयॉर्क से दिया गया यह संदेश भारत के लिए क्या मायने रखता है? हरकारा डीप डाइव LIVE में इन्हीं सवालों की पड़ताल. देखिए और जुड़िए चर्चा में.
सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज और इनसॉल्वेंसी मामले ने भारत की कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. करीब 226.57 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये में मामला निपटाने की प्रक्रिया से "हेयरकट" को लेकर बहस तेज हुई है. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने आर्थिक मामलों के पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ विस्तार से समझा कि हेयरकट क्या होता है, एनसीएलटी और आईबीसी की प्रक्रिया कैसे काम करती है और बड़े कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आखिर कितना पैसा वसूल हो पाता है. बातचीत में पिछले एक दशक में करीब 16 से 17 लाख करोड़ रुपये की रिकवर न हो सकने वाली रकम, वीडियोकॉन जैसे बड़े कॉरपोरेट मामलों, विजय माल्या, किसानों की कर्जमाफी और आम आदमी बनाम बड़े कॉरपोरेट्स के लिए कर्ज की अलग-अलग लागत पर भी चर्चा हुई. क्या कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग मापदंड लागू होते हैं? बैंकों में जमा आम लोगों के पैसे पर बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट का क्या असर पड़ता है? और क्या सरकार इस पूरे सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित कर पा रही है? देखिए पूरी बातचीत और समझिए भारत की कॉरपोरेट कर्ज व्यवस्था के पीछे का पूरा गणित. #HarkaraDeepDive #RakeshKayastha #NidheeshTyagi #SubhashChandra #CorporateDebt #NCLT #IBC #Banking #CorporateGovernance #IndianEconomy
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने की अपील की. लेकिन सवाल यह है कि GDP के आंकड़े तय कौन करता है? और अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो आम जनता की जिंदगी में इसका असर कितना दिखाई दे रहा है? हरकारा डीप डाइव लाइव में निधीश त्यागी एवं श्रवण गर्ग के साथ इसी सवाल पर चर्चा. क्या GDP ग्रोथ और आम आदमी की आर्थिक स्थिति एक ही कहानी बताते हैं? क्या विकास के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस में असली सवाल पीछे छूट जाता है? और प्रधानमंत्री की स्वदेशी वाली अपील का अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है? इस एपिसोड में चर्चा होगी: 7.8% GDP ग्रोथ का मतलब और इसके पीछे के आंकड़े. GDP तय करने वाली संस्थाओं और सरकार की भूमिका. आर्थिक विकास और आम जनता के अनुभव के बीच का अंतर. स्वदेशी, विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद पर प्रधानमंत्री की अपील.