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श्रवण गर्ग | राहुल ग़ुस्से में हैं ! क्या करेंगे ? तीसरी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा ?
मान लिया जाना चाहिए कि अमित शाह मानसून सत्र के बचे दो दिनों में भी लोकसभा का रुख़ नहीं करेंगे ! हक़ीक़त में तो उनके सदन में आने की कोई ज़रूरत भी नहीं बची है. उनके द्वारा पेश किए जाने वाले विधेयक जूनियर मंत्रियों द्वारा प्रस्तुत करवाए जा चुके हैं. गृहमंत्री अगर सदन में आ जाते तब भी अपनी सफ़ाई या दावों में इससे ज़्यादा क्या कुछ नया बोलते जो उनके एक मंत्री जितेंद्र सिंह सदन के भीतर और दूसरे मंत्री जे पी नड्डा बाहर बोल चुके हैं ? नड्डा के कहे हुए को गृहमंत्री का आधिकारिक स्टेटमेंट भी माना जा सकता है.
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ओडिशा में बॉक्साइट की लूट, भंडारों के ‘दोहन’ पर जताई चिंता
सत्यसुंदर बारीक की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में बॉक्साइट खदानों की अंधाधुंध नीलामी को लेकर पर्यावरण और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. उनका आरोप है कि राज्य में बॉक्साइट का उत्पादन देश की वास्तविक आवश्यकताओं से कहीं अधिक हो रहा है, जिससे पूर्वी घाट की अत्यंत संवेदनशील पर्वत श्रृंखलाएं नष्ट हो रही हैं. देश का 55 प्रतिशत से अधिक बॉक्साइट भंडार ओडिशा के पांच दक्षिण-पश्चिमी जिलों—बरगढ़, बलांगीर, कालाहांडी, रायगड़ा और कोरापुट में गंधमार्दन, नियमगिरी, कर्लापाट, सिजीमाली और देवमाली जैसी प्रमुख पहाड़ियों में केंद्रित है.
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‘भगवा पारिस्थितिकी तंत्र’: अब मिज़ाज बदल गया है…
भारत के सत्ताधारी शासन के दो दिग्गजों और छात्रों के बीच हुई दो हालिया बातचीत काफी आंखें खोलने वाली थीं. पहले मामले में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में एक सम्मेलन में छात्रों के साथ बातचीत करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि विरोध प्रदर्शन — संभवतः कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाला वह विरोध प्रदर्शन भी जिसने धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने पर मजबूर किया — संवाद का एक वैध रूप है. उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक असंतोष से प्रेरित पीड़ित युवा “देशद्रोही” नहीं थे — यह वह विशेषण है जिसका उपयोग ‘भगवा पारिस्थितिकी तंत्र’ असंतुष्टों को बदनाम करने के लिए करता है.
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क्या नेपाल की तरह भारत को भी जातिगत अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए?
'स्क्रॉल' के मुताबिक, नेपाल द्वारा दलितों के खिलाफ सदियों से चले आ रहे जातिगत अन्याय के लिए औपचारिक माफी मांगने के फैसले के बाद भारत में भी ऐसी माफी की मांग उठी है. सवाल यह है कि क्या भारत को भी जातिगत अन्याय के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगनी चाहिए या केवल माफी के बजाय ऐतिहासिक नुकसान की भरपाई के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.
भारत में जातिगत हिंसा, भेदभाव और आरक्षण पर बहस के दौरान अक्सर सवर्ण समुदायों की ओर से यह सवाल उठाया जाता है कि "मेरे पूर्वजों ने जो किया, उसकी कीमत मुझे क्यों चुकानी चाहिए?"
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फुकेट-दिल्ली उड़ान : एयर इंडिया के कैप्टन ने गांजे का सेवन किया था, ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया
एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान के कैप्टन, जिसने पिछले सप्ताह अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी, को दूसरे डोप टेस्ट में भी गांजा के लिए पॉजिटिव पाया गया है. यानी कैप्टन ने गांजा का सेवन किया था. 4 अगस्त को यह फ्लाइट 300 फुट नीचे आ गई थी.
‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरबस ए320नियो विमान से जुड़ी इस घटना को लेकर एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन को तलब किया था. विल्सन ने समाचार चैनलों को बताया कि एयरलाइन ने घटना की जांच की स्थिति के बारे में मंत्रालय को जानकारी दे दी है.
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रघुराम राजन | युवाओं ने अपना काम कर दिया, अब विपक्ष को आगे आना होगा
'इंडियन एक्सप्रेस' में रघुराम राजन लिखते हैं कि युवाओं में वर्षों से परीक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर जमा असंतोष अब खुले विरोध में बदल चुका है. परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलनों में युवाओं ने पुलिस की लाठियां, आंसू गैस और मुकदमों का सामना किया. इसके बाद सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की. हालांकि, युवाओं की बेचैनी को केवल परीक्षा सुधार तक सीमित करके देखना उनके व्यापक असंतोष को नजरअंदाज करना होगा.
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‘वह खाना खरीदने के लिए बाहर निकली थी’: मुंबई से एक और बंगाली महिला को जबरन बांग्लादेश भेजा गया
‘स्क्रॉल’ के मुताबिक, नवी मुंबई की रहने वाली 38 वर्षीय साहिदा फकीर को पुलिस ने "अवैध प्रवासी होने के संदेह" में हिरासत में लेने के बाद कथित तौर पर बांग्लादेश भेज दिया. उनके पति जुम्मन फकीर का कहना है कि साहिदा भारतीय नागरिक हैं और परिवार ने पुलिस को उनका जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रमाणपत्र, मतदाता पहचान पत्र और जमीन के दस्तावेज समेत कई प्रमाण दिए थे. इसके बावजूद उन्हें "बांग्लादेशी" बताकर बिना किसी नोटिस, जांच या अदालत के आदेश के सीमा पार भेज दिया गया.
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पूर्व आरएसएस कार्यकर्ता ने आरएसएस, विहिप और बजरंग दल को 'आतंकवादी संगठन' घोषित करने की मांग की
'द वायर' के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ता यशवंत सहदेव शिंदे ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को "आतंकवादी संगठन" घोषित करने की मांग की है. शिंदे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संघ नेता इंद्रेश कुमार और विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर जांच करने की भी मांग की है. उन्होंने इन लोगों पर 2000 के दशक में देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए बम धमाकों से कथित संबंध होने के आरोप लगाए हैं.
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https://www.harkaraonline.com/latest-articles/r9zcjw6ndbd25lsyp4bhfbgtsaf3dg
कर्नाटक में मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट या अन्य (एएसडीडीओ) श्रेणियों में वर्गीकृत किए जाने की कई शिकायतों के बीच, अभिनेता प्रकाश राज ने मंगलवार को कहा कि उनका नाम भी इस सूची में है.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अकरम एम की रिपोर्ट के अनुसार, अपने सोशल मीडिया चैनलों पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, राज ने कहा कि वह राज्य के उन 65 लाख मतदाताओं में शामिल हैं, जिन्हें कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय द्वारा "स्थायी रूप से स्थानांतरित" के रूप में वर्गीकृत किया गया है. उन्होंने कहा, "मैं आपके साथ एक चुटकुला साझा करना चाहता हूँ. मैं उन 65 लाख मतदाताओं में से एक हूँ जिनके मताधिकार एसआईआर के बाद समाप्त कर दिए गए हैं."
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आकार पटेल | विरोध-प्रदर्शन की रक्षा करें.
इस हफ़्ते दिल्ली हाई कोर्ट में एक उल्लेखनीय बातचीत हुई. सरकार से पूछा गया कि वह जंतर-मंतर इलाक़े को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है.
अदालत ने पूछा, "आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? मेरे अनुसार, शहर में ये चीज़ें नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह सरकार का फ़ैसला है. शहर को बेवजह बंधक क्यों बनाया जाना चाहिए?" अदालत 'ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमिटी' द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति माँगने वाली उनकी याचिका पर फ़ैसला करने का निर्देश देने की माँग की गई थी.
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अमेरिकी अदालत ने अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया, लेकिन आलोचना के साथ
एक अमेरिकी न्यायाधीश ने सोमवार को भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया, लेकिन कहा कि धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के मामले को बंद करने का न्याय विभाग का फैसला चिंताजनक है.
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस द्वारा मामले को रद्दी की टोकरी में डालने की संघीय अभियोजकों की दुर्लभ याचिका को स्वीकार करने का यह फैसला उनके कारणों की जांच करने के बाद आया, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या नवंबर 2024 में अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का अडानी का वादा आरोपों को वापस लेने के फैसले का एक कारक था.
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नरेंद्र मोदी का आर्थिक मॉडल भारत के युवाओं को परिणाम देने में विफल
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने पर गर्व करता है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक इसे एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन वह वादा लाखों युवा भारतीयों द्वारा महसूस नहीं किया जा रहा है, जो दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में अवसरों की कमी से निराश होकर पिछले महीने सड़कों पर उतर आए.
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ में माइकल स्टॉट की रिपोर्ट है कि ‘जेन ज़ी’ के प्रदर्शन, जो परीक्षा प्रश्नपत्र लीक घोटाले के आक्रोश से शुरू हुए थे, कुछ ही हफ्तों में युवाओं के असंतोष की एक व्यापक अभिव्यक्ति में बदल गए. युवाओं को लगता है कि देश का राजनीतिक नेतृत्व उनकी उपेक्षा कर रहा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द हिंदू' रिपोर्ट: जस्टिस यशवंत वर्मा पर कैश कांड के सभी आरोप साबित, संसद में पेश हुई 3-सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट.
'पीटीआई' रिपोर्ट: संसद में सरकार का खुलासा; महाराष्ट्र में पिछले 5 सालों में 36,000 से अधिक निजी कंपनियां बंद, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल.
श्रवण गर्ग का विश्लेषण: संसद सत्र, जंतर मंतर हिंसा विवाद और अमित शाह की चुप्पी के बीच समझें राहुल गांधी का रुख और 15 अगस्त पर लाल किले की भावी सियासत.
'द हिंदू' में सत्यसुंदर बारीक की रिपोर्ट: ओडिशा में बॉक्साइट खदानों की अंधाधुंध नीलामी से पूर्वी घाट की पर्यावरण श्रृंखला और जल स्रोतों पर बढ़ा खतरा.
'द टेलीग्राफ' संपादकीय: सीजेपी छात्र आंदोलन पर मोहन भागवत और पीएम मोदी के बयानों का विश्लेषण; असंतोष, परीक्षा सुधार और चुनावी राजनीति पर विशेष रिपोर्ट.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान के कैप्टन डोप टेस्ट में गांजा के लिए पॉजिटिव पाए गए. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सीईओ कैंपबेल विल्सन को किया तलब.
'इंडियन एक्सप्रेस' में रघुराम राजन का लेख: युवा असंतोष, परीक्षा सुधार टास्क फोर्स, बेरोजगारी और 2029 चुनाव से पहले विपक्ष के लिए वैकल्पिक नीतियों का विस्तृत विश्लेषण.
'स्क्रॉल' में बोधि रामटेके का विश्लेषण: नेपाल की तरह क्या भारत को भी दलितों से मांगनी चाहिए माफी? जानें पुनरुत्थानात्मक न्याय और आरक्षण पर बेबाक राय.
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हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग की खास बातचीत. क्या अमित शाह की रणनीति विपक्षी एकता को कमजोर करने की कोशिश है? क्या राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच मतभेद पैदा कर बीजेपी विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती को कमजोर कर सकती है? उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-कांग्रेस के रिश्ते और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों का क्या असर होगा? इस लाइव हरकारा डीप डाइव में इन्हीं सवालों पर श्रवण गर्ग के साथ विस्तार से चर्चा. #HarkaraDeepDive #NidheeshTyagi #ShravanGarg #AmitShah #RahulGandhi #AkhileshYadav #UPPolitics #BJP #SP #Congress
मोहन भागवत का Gen Z से संवाद: https://www.youtube.com/watch?v=So_LMdZmNvg मुंबई में IIMUN के मंच से RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z को अपनी पीढ़ी से अधिक ईमानदार और देशभक्त बताया. उन्होंने कहा कि अगर युवाओं से समय रहते संवाद हुआ होता, तो जंतर-मंतर जैसा आंदोलन नहीं होता. साथ ही उन्होंने आंदोलन को लोकतंत्र में संवाद का माध्यम बताया और प्रदर्शन करने वाले युवाओं को एंटी-नेशनल कहने का विरोध किया. भागवत ने शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, सोशल मीडिया, AI, चीन-पाकिस्तान से संबंध, LGBTQ, महिलाओं की भागीदारी और पर्यावरण जैसे कई अहम मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह मोहन भागवत का वैचारिक बदलाव है, या फिर युवाओं के बीच बढ़ती नाराज़गी और बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए RSS की नई रणनीति? हरकारा Deep Dive LIVE में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग इसी सवाल पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं. आइए समझते हैं कि भागवत के इन बयानों के राजनीतिक, वैचारिक और चुनावी मायने क्या हैं, और क्या ये संघ की सोच में बदलाव का संकेत हैं या केवल बदलते समय के अनुरूप नई रणनीति.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वॉशिंगटन डीसी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक अजित साही ने जेन जी के उभार, युवाओं के आंदोलन और मोदी सरकार के सामने खड़ी राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की. जंतर-मंतर के आंदोलन के बाद क्या युवाओं की ऊर्जा खत्म होने के बजाय और बढ़ रही है? राहुल गांधी के इलाहाबाद कार्यक्रम और मोहन भागवत के जेन जी से संवाद से क्या संकेत मिल रहे हैं? क्या सत्ता पहली बार युवाओं के सवालों के सामने असहज दिखाई दे रही है? बातचीत में मीडिया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता, पत्रकारिता की स्वतंत्रता, जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता, अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्यमिता जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. अजित साही ने कहा, “वो फ्रीज हो गए हैं. इस समय आरएसएस, बीजेपी, मोहन भागवत और मोदी सारे फ्रीज हो गए हैं.” अर्थव्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा, “इकोनॉमिक्स वही है जो आपके खाने की मेज पर रोटी, दाल, सब्जी रख सके. इकोनॉमिक्स वही है जो आपको नौकरी दे सके.” इसके अलावा परिसीमन, उत्तर प्रदेश चुनाव, राम मंदिर, इथेनॉल और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. देखिए पूरा Harkara Deep Dive और बताइए, क्या जेन जी का उभार भारतीय राजनीति की दिशा बदल रहा है? #Harkara #HarkaraDeepDive #GenZ #AjitSahi #NidishTyagi #ModiGovernment #RahulGandhi #IndianPolitics #YouthPolitics #Judiciary #Media #Economy #Delimitation