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इम्फाल वेस्ट में नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन हिंसक, 7 घायल
एक नए घटनाक्रम में, इम्फाल वेस्ट जिले में नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शन के हिंसक हो जाने से गुरुवार को कम से कम 7 लोग घायल हो गए. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले और मॉक बम का सहारा लेना पड़ा. नागा और मैतेई समुदायों के सैकड़ों प्रदर्शनकारी नमडिलोंग क्षेत्र और कांगलातोंगबी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर एकत्र हुए. एक समूह ने नमडिलोंग नागा गांव में धरना दिया, जबकि यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के तहत एक अन्य समूह ने कांगलातोंगबी बाजार से गांव की ओर मार्च किया, नारेबाजी की और मौतों के लिए जवाबदेही की मांग की.
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जातिगत भेदभाव पर यूजीसी के नियम: भाजपा सरकार अपने रुख पर ‘पुनर्विचार’ क्यों कर रही है
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में विकास पाठक की रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के ‘समानता विनियमन 2026’ को लेकर केंद्र सरकार के बदले रुख, अदालती कार्यवाही और इसके राजनीतिक-सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करती है.
जनवरी 2026 में लागू यूजीसी के नए नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित रखा गया था.
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‘क्या आप हिंदू संस्कृति नहीं जानते?’: पुणे के किले में शॉर्ट्स पहनने पर पर्यटकों को थप्पड़ मारे, 8 पर मामला
पुणे ग्रामीण पुलिस ने मंगलवार को बताया कि पुणे के पास ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले में रविवार दोपहर एक दक्षिणपंथी संगठन के सदस्यों द्वारा शॉर्ट्स और स्लीवलेस कपड़े पहनने पर कम से कम चार पर्यटकों (जिनमें एक महिला भी शामिल है) के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। पुलिस ने मारपीट और दंगा करने के आरोप में ‘समस्त हिंदू बांधव सेना’ नाम के संगठन के आठ सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
‘एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस’ के अनुसार, हमलों की यह श्रृंखला रविवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आगंतुकों के चार अलग-अलग समूहों के साथ हुई.
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जुलाई 2026 में औद्योगिक क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 5.4% रही
गुरुवार (20 अगस्त, 2026) को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों (कोर सेक्टर) की आर्थिक गतिविधियों की वृद्धि दर जून के 6% से घटकर जुलाई 2026 में 5.4% पर आ गई. यह मुख्य रूप से उर्वरक, लौह अयस्क और इस्पात (स्टील) क्षेत्रों में आई महत्वपूर्ण सुस्ती के कारण हुआ, जिसके साथ ही प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल क्षेत्रों में लगातार गिरावट जारी रही.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ‘इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज’ (आईसीई) के आंकड़ों से हालांकि यह भी पता चला कि जुलाई की वृद्धि दर अभी भी पिछले सात महीनों में दूसरी सबसे तेज़ वृद्धि दर थी.
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राहुल देव | राम मंदिर कभी भी अपनी संदिग्धता से बाहर नहीं जा पाएगा
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर गठित एसआईटी की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल खड़ा हो गया है. ‘हरकारा डीप डाइव’ में वरिष्ठ पत्रकार और संपादक राहुल देव के साथ निधीश त्यागी ने इसी मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की.
राहुल देव के मुताबिक, राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा और आरएसएस के लिए एक बड़ा राजनीतिक प्रोजेक्ट भी रहा है.
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‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से ‘दिमागी नक्सल’ तक: जब जवाबों की जगह लेबल ले लेते हैं
‘काउंटरकरंट्स’ में मोहम्मद ज़ियाउल्लाह खान लिखते हैं, जब छात्रों ने विरोध किया तो उन्हें “टुकड़े-टुकड़े गैंग” कहा गया. सरकार की आलोचना करने वाले बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं में से कुछ को “अर्बन नक्सल” बताया गया. पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों और कलाकारों को “अवार्ड वापसी गैंग”, किसानों को “खालिस्तानी”, “माओवादी” और “राष्ट्रविरोधी” कहा गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदर्शनकारियों के लिए “आंदोलनजीवी” शब्द का इस्तेमाल किया. अब “दिमागी नक्सल” शब्द सामने आया है.
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"तुम बैरवा हो, नीचे बैठो": राजस्थान में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में दलितों को कुर्सियों से उठाने पर प्राथमिकी
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के भाकलिया गांव में स्वतंत्रता दिवस के एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान दो दलित पुरुषों को कथित तौर पर कुर्सियों से उठाकर जमीन पर बैठाने का मामला सामने आया है. घटना के बाद पुलिस ने जातिगत भेदभाव और धमकी के आरोपों में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
शिकायत रामेश्वरलाल बैरवा(उम्र 35 वर्ष) और गोपी लाल बैरवा(उम्र 37 वर्ष) ने दर्ज कराई. दोनों का आरोप है कि वे भाकलिया गांव के एक सरकारी स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे और कार्यक्रम के लिए लगाई गई कुर्सियों पर बैठे थे.
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जेन अल्फा के विरोध प्रदर्शन दिखाते हैं कि भारत का आधिकारिक स्कूल डेटा कितना अविश्वसनीय है
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, हाल के हफ्तों में देश के अलग-अलग राज्यों में स्कूली छात्रों ने अपने स्कूलों की बदहाल स्थिति के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए हैं. इन प्रदर्शनों को हाल में दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में हुए जेन जेड प्रदर्शनों की तर्ज पर "जेन अल्फा" प्रदर्शन कहा जा रहा है. छात्रों ने स्कूलों के मुख्य द्वार और सड़कों पर धरना दिया, कर्मचारियों को अंदर बंद किया और स्थानीय अधिकारियों के कार्यालयों तक मार्च कर अपनी मांगें रखीं. इन प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने "स्कूल ठीक करो" अभियान शुरू किया है.
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मनोज कुमार झा | दबी हुई आवाज़ें
‘द टेलीग्राफ’ में मनोज कुमार झा का यह लेख भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति और नागरिक 'आवाज़' के धीरे-धीरे कमज़ोर होने का एक गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन है. इसमें विभिन्न दार्शनिकों, अर्थशास्त्रियों और सामाजिक सिद्धांतकारों के विचारों के आलोक में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार भारतीय लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभ—समाचार, सोशल मीडिया और कला/मनोरंजन—एक अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रहे हैं.
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बेहतर वेतन के लिए प्रदर्शन करने वाले नोएडा के श्रमिक हफ्तों जेल में रहे, अदालतों ने बचाया
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की पड़ताल के अनुसार, अप्रैल 2026 में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से अधिकांश को औसतन 53 दिन हिरासत में रहना पड़ा, लेकिन बाद में अदालतों ने पुलिस के आरोपों में व्यक्तिगत भूमिका और ठोस साक्ष्यों की कमी को देखते हुए बड़ी संख्या में जमानत दी.
अप्रैल 2026 में नोएडा के निजी कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने, काम के घंटे कम करने, बोनस और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर करीब एक सप्ताह तक प्रदर्शन किया था. 10 अप्रैल से शुरू हुए आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई में करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया
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फरहान सिद्दीकी | आधुनिक भारत में दलित महिलाओं के जीवन में जाति, वर्ग और पितृसत्ता
‘काउंटरकरंट्स’ में प्रकाशित फरहान सिद्दीकी के लेख के मुताबिक, भारत में लैंगिक न्याय की चर्चा केवल एक अमूर्त ‘महिला’ की अवधारणा के आधार पर नहीं की जा सकती. महिलाओं का वास्तविक जीवन श्रम, संपत्ति, जाति, वर्ग और लैंगिक संबंधों से प्रभावित होता है. दलित महिलाओं के मामले में इन सभी स्तरों को अलग-अलग करके देखना संभव नहीं है, क्योंकि उनका शोषण एक साथ जाति, वर्ग और पितृसत्ता से जुड़ा है. यही वजह है कि दलित नारीवाद मुख्यधारा के उस नजरिए को चुनौती देता है, जिसमें जाति को महिलाओं के सवाल से अलग या गौण मुद्दा माना जाता है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'पीटीआई' रिपोर्ट: अमेरिकी आयोग (USCIRF) के अधिकारियों की मांग, संघ प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले RSS पर लक्षित प्रतिबंध लगाने का आग्रह.
'मनोज आनंद' की रिपोर्ट: मणिपुर के इम्फाल वेस्ट में नागा नागरिकों की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सुरक्षा बलों से झड़प में 7 लोग घायल.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की विकास पाठक की रिपोर्ट: यूजीसी के 'समानता विनियमन 2026' पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, सामान्य वर्ग के विरोध और आगामी यूपी चुनावों के बीच भाजपा के रणनीतिक संकट की पड़ताल.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल: नोएडा में अप्रैल 2026 के श्रमिक आंदोलन के दौरान 106 गिरफ्तारियों पर अदालतों का कड़ा रुख, बिना ठोस सबूत सामूहिक कार्रवाई पर खड़े हुए सवाल.
'एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस' रिपोर्ट: पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले में शॉर्ट्स और स्लीवलेस कपड़े पहनने पर पर्यटकों के साथ मारपीट, 'समस्त हिंदू बांधव सेना' के 8 सदस्यों पर FIR दर्ज.
'द हिंदू' रिपोर्ट: जुलाई 2026 में भारत के 8 प्रमुख कोर सेक्टर की विकास दर घटकर 5.4% पर पहुंची, फर्टिलाइजर, स्टील और कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट.
'हरकारा डीप डाइव' में राहुल देव का विश्लेषण: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की SIT रिपोर्ट, प्रशासनिक जवाबदेही और 2027 यूपी चुनाव पर पड़ने वाले असर की पड़ताल.
'काउंटरकरंट्स' में मोहम्मद ज़ियाउल्लाह खान का विश्लेषण: 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे लेबल पर नई पीढ़ी के सवाल, असहमति और लोकतंत्र पर बड़ा विमर्श.
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सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा Belonging: A Journey of Love में उनके इटली के बचपन, राजीव गांधी से प्रेम, गांधी परिवार की त्रासदियों और भारतीय राजनीति से जुड़े कई अनछुए पहलुओं के सामने आने की चर्चा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोनिया गांधी ने 2004 में कांग्रेस की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद क्यों ठुकराया था? क्या उनकी आत्मकथा इस फैसले के पीछे की असली वजह पर से पर्दा उठाएगी? राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्रेम से लेकर संजय गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को खोने तक की त्रासदियों ने सोनिया गांधी को किस तरह बदला? हरकारा डीप डाइव लाइव में श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी इन तमाम सवालों पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं. गेस्ट श्रवण गर्ग बताएंगे कि सोनिया गांधी की आत्मकथा से भारतीय राजनीति में क्या नए सवाल और संभावित भूचाल सामने आ सकते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया.आखिर इस शब्द का मतलब क्या है और इसके पीछे की राजनीतिक सोच क्या है? हरकारा डीप डाइव के इस खास एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ ‘दिमागी नक्सल’ की राजनीति, शिक्षा, असहमति, सवाल पूछने की संस्कृति और मोदी सरकार की बदलती राजनीतिक भाषा पर विस्तार से बातचीत की. क्या ‘दिमागी नक्सल’ महज एक नया राजनीतिक जुमला है या आने वाले समय में इसका इस्तेमाल असहमति और सवाल पूछने वालों को परिभाषित करने के लिए किया जाएगा? इस पूरी बहस को राकेश कायस्थ अपने व्यंग्यात्मक और विश्लेषणात्मक अंदाज में समझाते हैं.
हम हरकारा.
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हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर गठित एसआईटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या जांच ने पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की या जिम्मेदारी तय किए बिना मामला खत्म कर दिया गया? Harkara Deep Dive में वरिष्ठ पत्रकार और संपादक राहुल देव के साथ निधीश त्यागी ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, एसआईटी जांच, जवाबदेही और पारदर्शिता पर विस्तार से चर्चा की. राहुल देव सवाल उठाते हैं कि अगर जांच निष्पक्ष होती तो चेन ऑफ कमांड, चेन ऑफ रिपोर्टिंग, सीसीटीवी फुटेज, ट्रस्ट की नियुक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पूरी पड़ताल क्यों नहीं हुई? क्या छोटे आरोपियों पर कार्रवाई के बाद बड़ी मछलियां बच गईं? बातचीत में यह भी चर्चा हुई कि राम मंदिर का मुद्दा 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कितना महत्वपूर्ण होगा और चढ़ावे की चोरी से श्रद्धालुओं की आस्था को पहुंची चोट का राजनीतिक असर क्या हो सकता है. निधीश त्यागी के साथ राहुल देव की खास बातचीत.