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पिछले दो वर्षों में एनसीईआरटी द्वारा जारी की गई अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों में ऐसी कई कविताएँ, नाटक और कहानियाँ शामिल हैं, जो परिषद की पाठ्यपुस्तक टीम के सदस्यों द्वारा ही लिखी गई हैं. ये रचनाएँ 'सैन्यवादी देशभक्ति' का महिमामंडन करती हैं. इस रुझान ने विशेषज्ञों को यह सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है कि अंग्रेजी सिखाने के लिए प्रामाणिक साहित्य के बजाय इस तरह की बनावटी सामग्रियों का उपयोग क्यों किया जा रहा है?
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के ठप पड़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है. इसने भारत और चीन को सीधे टकराव की स्थिति में ला खड़ा किया है. यह टकराव सीमाओं पर नहीं, बल्कि रूसी कच्चे तेल के लिए बाजार में हो रही प्रतिस्पर्धा में दिख रहा है. रूस, जो पहले कम किमतों पर तेल बेच रहा था, अब इस संकट के घड़ी में सबसे अहम आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. भारत और चीन दोनों अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल पर निर्भर होते जा रहे हैं.
केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में तैनात करने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शनिवार (2 मई 2026) को पार्टी की याचिका का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में अब किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि 13 अप्रैल के चुनाव आयोग के सर्कुलर को पूरी तरह (अक्षरशः) लागू किया जाए.
कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘स्टार’ सिस्टम उन पुरुषों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें चिकित्सा जगत ने ‘एज़ोस्पर्मिक’ घोषित कर दिया था, यानी वे पुरुष जिनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या शून्य मानी गई थी. विश्व स्तर पर बांझपन एक गंभीर समस्या है, जो प्रजनन आयु के हर छह में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है. इसमें ‘पुरुष बांझपन’ का योगदान लगभग 50% मामलों में होता है. विशेष रूप से 1% पुरुष एज़ोस्पर्मिया से पीड़ित होते हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मतगणना से पहले स्ट्रॉन्ग रूम में रखी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है. बुधवार को मतदान समाप्त होने के बाद गुरुवार रात ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 4 मई को होने वाली मतगणना तक ईवीएम सुरक्षित नहीं हैं. इस आशंका के बीच वह कोलकाता के एक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर देर रात तक मौजूद रहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कथित नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) के लिए भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. जहाँ भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, वहीं वर्मा दिल्ली सरकार में मंत्री हैं.
स्पेसएक्स ने अपनी अगली पीढ़ी के स्टारशिप रॉकेट को विकसित करने में 15 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए हैं. यह राशि उसके भरोसेमंद 'फाल्कन' रॉकेट की लागत को भी बौना बना देती है. एलोन मस्क की यह कंपनी पिछले लगभग एक दशक से पूरी तरह से 'रीयूजेबल' (पुन: इस्तेमाल योग्य) लॉन्च सिस्टम को सटीक बनाने की कोशिश कर रही है.
पश्चिम बंगाल चुनाव के माहौल और एग्जिट पोल बताते हैं कि ममता बनर्जी और टीएमसी के सामने इस बार कड़ी चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए अवसर बन सकता है. हालांकि, बंगाल में एग्जिट पोल के बार-बार गलत साबित होने का इतिहास भी है. इसके साथ ही हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव, मतदाता सूची, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
हरकारा डीप डाइव के एक ऑडियो संस्करण में वरिष्ठ विश्लेषक श्रवण गर्ग के साथ भारत-अमेरिका संबंधों पर विस्तृत बातचीत की गई. इस चर्चा में मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी और भारत सरकार की प्रतिक्रिया या कहें, चुप्पी, पर सवाल उठाए गए. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माइकल सैवेज की एक टिप्पणी साझा की, जिसमें भारत को “नर्क” कहा गया और भारतीयों को “गैंगस्टर्स विद लैपटॉप्स” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया.
पश्चिम बंगाल का 2026 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक राज्य की सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक ‘कुरुक्षेत्र’ बन चुका है. ‘हरकारा डीप डाइव’ पर ऑडियो पॉडकास्ट में, वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव के उन अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली, जो इसे आज़ाद भारत के सबसे जटिल और अभूतपूर्व चुनावों में से एक बनाते हैं. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग इस चुनाव की तुलना ‘प्लासी के युद्ध’ से करते हैं. उनका मानना है कि बंगाल में जिस तरह से ‘मीर जाफरों’ और ‘जगत सेठों’ की तलाश की गई है, वह अभूतपूर्व है. ममता बनर्जी के खिलाफ इस बार भयंकर सत्ता विरोधी लहर है. 2021 के मुकाबले इस बार भाजपा ने हिंदू वोटों की नाराज़गी को और गहरा किया है, वहीं 30% वाले मुस्लिम वोट बैंक में भी दरार डालने की कोशिश की है.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में हमने पत्रकार सुमित झा से गहन बातचीत की, जिन्होंने तेलंगाना के जातिगत सर्वे से उजागर हुई असमानताओं पर साउथ फर्स्ट में विस्तृत लेखों की श्रृंखला लिखी है. तेलंगाना का 2024 का जाति सर्वे, एक ऐसा सर्वे जो सिर्फ आंकड़े नहीं देता, बल्कि समाज की छुपी परतों को उधेड़ कर सामने रखता है. बातचीत में यह समझने की कोशिश की गई कि क्या सच में हम जाति से आगे बढ़ चुके हैं, या जाति आज भी हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी को चुपचाप नियंत्रित कर रही है.
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय आर्थिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के स्तर पर अब भी पीछे हैं. इलाज के लिए क़र्ज़ लेना, असंगठित काम में फंसा रहना, और बुनियादी सुविधाओं की कमी, ये सब सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि जीवन की कठोर सच्चाइयां हैं. वहीं दूसरी तरफ, सरकारी योजनाओं का बड़ा हिस्सा उन वर्गों तक पहुंच रहा है जो पहले से ही अपेक्षाकृत मज़बूत हैं.