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डेटा लीक में भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र 'कुडनकुलम' से जुड़ी फाइलें उजागर
रैनसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' द्वारा डार्क वेब पर भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कुडनकुलम (केकेएनपीपी) से संबंधित संवेदनशील फाइलों को सार्वजनिक करने का मामला सामने आया है. यह डेटा कथित तौर पर संयंत्र के प्रमुख ठेकेदारों में से एक, अनिल अंबानी के स्वामित्व वाले रिलायंस समूह (रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर) से चोरी किया गया है. रिलायंस का यह डेटा तीसरे पक्ष के डेटा सेंटर प्रदाता 'योट्टा' के सर्वर पर होस्ट किया गया था.
स्वतंत्र साइबर सुरक्षा शोधकर्ता राकेश कृष्णन के अनुसार, डार्क वेब पर “केकेएनपीपी” नाम से लगभग 19,000 फाइलें (कुल 14.3 जीबी) लीक की गई हैं, जो जून से ऑनलाइन उपलब्ध हैं. रिलायंस की कुल लीक हुई फाइलों में से ये सबसे संवेदनशील फाइलें हैं. इन फाइलों में ये विवरण शामिल हैं: निर्माणाधीन यूनिट 3 और यूनिट 4 की वेंटिलेशन और कूलिंग प्रणालियों के कथित नक्शे. एक "सामान्य नियंत्रण कक्ष" (कॉमन कंट्रोल रूम) का पूरा फ्लोर लेआउट. स्वीकृत सप्लायर्स की सूची, वेंडर प्रस्ताव, उपकरण समीक्षा और निरीक्षण बैठक (2024) के रिकॉर्ड. बीमा पॉलिसी: एक दस्तावेज के अनुसार, रिलायंस और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ने आतंकवाद के जोखिम के लिए 11.2 करोड़ डॉलर की बीमा पॉलिसी ले रखी थी.
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बैंक ने उसकी जीवन भर की जमा पूंजी – मात्र 8,000 रुपये – देने से इनकार कर दिया– वह इंतज़ार करते-करते मर गया
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में शुभम तिग्गा की रिपोर्ट बताती है कि सुरक्षा के लिए बनाए गए जटिल नियम कैसे गरीब, अनपढ़ और लाचार लोगों के लिए अपनी ही जमा-पूंजी तक पहुँचने में एक बड़ी बाधा बन जाते हैं.
लगभग एक साल तक, गिरिडीह के बड़गढ़ गाँव की फुलमनी लकड़ा और उनके आदिवासी परिवार ने स्थानीय झारखंड ग्रामीण बैंक में घंटों बिताए. वे लंबी लाइनों में खड़े रहे, एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक दौड़ते रहे और कथित तौर पर बैंक कर्मचारियों के हाथों अपमान भी झेला, यह सब सिर्फ एक काम के लिए था — अपने ससुर के खाते का ई-केवाईसी करवाना ताकि वे उसमें जमा मात्र 8,000 रुपये निकाल सकें और उनके तपेदिक (टीबी) के इलाज का खर्च उठा सकें.
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राजस्थान के सरकारी स्कूलों से दो वर्षों में 8 लाख से अधिक छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी
शिक्षा विशेषज्ञों ने नवीनतम यूडीआईएसई+ 2025-26 के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा है कि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों में राजस्थान में 8 लाख से अधिक स्कूली छात्रों की कमी होना न केवल बदलती जनसांख्यिकी को दर्शाता है, बल्कि यह छात्रों को रोककर रखने में सरकारी स्कूलों के सामने बढ़ती चुनौती की ओर भी इशारा करता है.
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल स्कूली नामांकन 2023-24 में 1.67 करोड़ से
घटकर 2025-26 में 1.59 करोड़ हो गया. इस गिरावट में लगभग पूरी हिस्सेदारी सरकारी स्कूलों की रही, जिनमें 9.3 लाख से अधिक छात्रों की कमी आई, जबकि
निजी (प्राइवेट) स्कूलों ने बड़े पैमाने पर अपने नामांकन को बनाए रखा. यह गिरावट तब आई जब इसी अवधि के दौरान शिक्षकों की संख्या 7.75 लाख से बढ़कर 7.93 लाख हो गई.
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वायु प्रदूषण बीमारी के पता चलने से वर्षों पहले किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है: अध्ययन
दिल्ली और चेन्नई में 9,600 वयस्कों पर किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि किडनी की बीमारी का पता चलने से दशकों पहले ही वायु प्रदूषण किडनी की कार्यप्रणाली (किडनी फंक्शन) को कम करना शुरू कर सकता है. यह अध्ययन प्रदूषण से जुड़े किडनी के जोखिम के वैश्विक साक्ष्यों को अपेक्षाकृत युवा भारतीय वयस्कों तक विस्तारित करता है.
‘द टेलीग्राफ’ में जी.एस. मुदुर की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले अमेरिका, चीन और अन्य जगहों पर हुए शोधों में 2.5 माइक्रोन से छोटे बारीक कणों (PM2.5) के संपर्क में आने और किडनी की बीमारी के बीच संबंध स्थापित किया गया था, लेकिन वे मुख्य रूप से कम प्रदूषण स्तर का सामना करने वाले बुजुर्गों पर केंद्रित थे. इस अध्ययन में दिल्ली और चेन्नई के 32 से 53 वर्ष की आयु के लोगों पर छह वर्षों तक नज़र रखी गई. इसमें पाया गया कि वार्षिक औसत PM2.5 स्तरों में प्रति घन मीटर 5 माइक्रोग्राम की वृद्धि, 'अनुमानित ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर' (ईजीएफआर) में गिरावट से जुड़ी थी. ईजीएफआर इस बात का माप है कि किडनी रक्त को कितनी प्रभावी ढंग से छानती है.
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ओमान तट के पास जहाज पर हुए हमले के बाद लापता भारतीय की मौत, परिवार ने की पुष्टि
ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज 'जीएफएस गैलेक्सी' पर हुए हमले के बाद लापता हुए एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है. उनके ससुर और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने बुधवार को यह जानकारी दी. 30 वर्षीय हेरंब करमरकर साइप्रस के ध्वज वाले इस कंटेनर जहाज पर मरीन इंजीनियर थे, जिस पर रविवार को ओमान के तट के पास हमला किया गया था.
साइप्रस के अधिकारियों ने बताया था कि इस जहाज पर, जिसके 24 सदस्यीय चालक दल (क्रू) में 11 भारतीय शामिल थे, एक "अज्ञात प्रक्षेपास्त्र" से हमला किया गया था.
ईरान ने कहा कि उसने जहाज पर तब हमला किया जब उसने मार्ग को सही करने की चेतावनियों के बावजूद एक अनधिकृत मार्ग से गुजरने का प्रयास किया.
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एस. वाई. कुरैशी | चुनाव आयोग के ‘निष्कासन’ केंद्रित एसआईआर ने ‘लोकतंत्र को तहस-नहस कर दिया’
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने मौजूदा एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कवायद को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया "निष्कासन" (वोटर लिस्ट से नाम हटाने) पर अधिक केंद्रित है और इसने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को प्रभावित करके "लोकतंत्र को तहस-नहस कर दिया है."
अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में कुरैशी ने कहा कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कितने लोगों को बाहर किया जाए, मानो चुनाव आयोग को अधिक से अधिक लोगों को "बाहर फेंकने" के लिए अच्छे अंक मिलेंगे. हैचेट इंडिया द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक कुरैशी के जीवन के 100 प्रसंगों पर प्रकाश डालती है.
कुरैशी ने कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकृत होना एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है जैसे कि यह चुनाव आयोग द्वारा लोगों पर किया गया कोई अहसान हो.
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सरकार के खिलाफ नारेबाजी देशद्रोह का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं: हाई कोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक निर्वाचित लोकतंत्र में सरकार या शासन के किसी भी अंग के खिलाफ नारेबाजी करना नागरिकों पर देशद्रोह (राजद्रोह) का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं होगा.
‘पीटीआई’ के अनुसार, हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार के खिलाफ नारा लगाना केवल असहमति व्यक्त करने का एक माध्यम है, न कि घृणा, अवमानना या दुर्भावना का प्रदर्शन. अदालत ने यह टिप्पणी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 2017 में हुई एक घटना के संबंध में कैथल के चार निवासियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए की.
हाई कोर्ट ने कहा कि एक हिंसक विरोध प्रदर्शन दंगे की श्रेणी में आ सकता है, लेकिन हिंसा के ऐसे कृत्यों को सरकार के प्रति घृणा या अवमानना पैदा करने वाले कृत्य के रूप में नहीं देखा जाएगा.
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यूरोप में प्रतिबंधित, भारत में निगरानी का हथियार. कैसे हजारों कैमरों से चेहरों की पहचान कर रही है स्पेन की कंपनी
सिटी" प्रोजेक्ट और रेलवे स्टेशन आधुनिकीकरण परियोजनाओं में भी किया जा रहा है. हालांकि संबंधित सरकारी एजेंसियों ने इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी.
कंपनी ने भारत में अपनी तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि की है, लेकिन यह कहकर ग्राहकों की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया कि यह गोपनीय है. कंपनी का कहना है कि उसके उत्पाद यूरोपीय डेटा सुरक्षा सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किए जाते हैं, लेकिन सार्वजनिक संस्थाएं उनका उपयोग कैसे करती हैं, इस पर उसका नियंत्रण नहीं होता.
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि जिन दो परियोजनाओं में इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. पूर्वी रेलवे की निगरानी व्यवस्था और अहमदाबाद का सेफ सिटी प्रोजेक्ट उन्हें यूरोपीय संघ में लागू करना संभवतः गैरकानूनी माना जाता.
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आनंद तेलतुंबड़े | भारत की नागरिकता की पहेली ऐसे दस्तावेज़ मांगती है, जो कुछ भी साबित नहीं करते
विदेश मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया कि “पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि केवल एक यात्रा दस्तावेज़ है.” इस बयान ने एक पुराने लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सवाल को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया कि आखिर भारत में ऐसा कौन-सा दस्तावेज़ है जो किसी व्यक्ति की नागरिकता को अंतिम रूप से साबित करता हो. सरकार ने इसे कोई नया नियम मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पहले से चली आ रही कानूनी व्यवस्था का ही दोहराव है. लेकिन इस बहस ने भारत की नागरिकता व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर कर दिया.
भारत में जन्म से नागरिक बने अधिकांश लोगों के पास ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं है जिसे कानून नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानता हो. न पासपोर्ट, न आधार कार्ड, न वोटर आईडी, न राशन कार्ड और न ही पैन कार्ड नागरिकता का निर्णायक प्रमाण हैं. संसद में भी केंद्र सरकार पहले स्पष्ट कर चुकी है कि जन्म से भारतीय नागरिकों के लिए कोई अलग नागरिकता प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता. केवल वे लोग, जिन्होंने प्राकृतिककरण या पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त की है, उन्हें औपचारिक नागरिकता प्रमाणपत्र मिलता है.
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अध्ययन: बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान जांच के दायरे में आए 27 लाख मतदाताओं में 70% मुसलमान
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जांच (एडजुडिकेशन) के दायरे में आए 27 लाख से अधिक मतदाताओं में करीब 70 प्रतिशत मुसलमान थे. यह दावा कोलकाता स्थित शोध संस्थान ‘सबर इंस्टीट्यूट’ के एक विश्लेषण में किया गया है.
संस्थान ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विश्लेषण में कहा कि इस श्रेणी में शामिल मतदाताओं में 51 प्रतिशत महिलाएं थीं.
सबर इंस्टीट्यूट के अनुसार, इन अधिकांश मतदाताओं को पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कथित "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर जांच के दायरे में रखा गया.
मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" से आशय माता-पिता के नाम में असंगति, माता-पिता और संतान के बीच कम आयु अंतर, या किसी परिवार में छह से अधिक बच्चों का दर्ज होना जैसी विसंगतियों से है.
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पश्चिम बंगाल सरकार ने 77 मुस्लिम समुदायों को ओबीसी सूची से हटाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील वापस ली
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील वापस ले ली, जिसमें 77 मुस्लिम समुदायों को राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची से हटाए जाने का आदेश दिया गया था.
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, यह अपील पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने मई में विधानसभा चुनाव हारने से पहले दायर की थी.
पश्चिम बंगाल राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी इस मामले में दायर अपनी अलग अपील वापस ले ली.
मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य की ओबीसी सूची में शामिल 113 समुदायों को लेकर फैसला सुनाया था. इनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय शामिल थे. अदालत ने कहा था कि 77 मुस्लिम समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया वैध नहीं थी और उनका शामिल किया जाना निरस्त कर दिया.oes here
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
‘रॉयटर्स’ में मुंसिफ वेंगाटिल और आदित्य कालरा की रिपोर्ट. रैनसमवेयर समूह 'वर्ल्ड लीक्स' द्वारा कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) से जुड़ी 19,000 संवेदनशील फाइलें डार्क वेब पर लीक; राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेष विश्लेषण.
‘पीटीआई’ की रिपोर्ट. राजस्थान के स्कूलों में यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2025-26 के आंकड़ों में 8 लाख से अधिक छात्रों की कमी; सरकारी स्कूलों में नामांकन घटने और जनसांख्यिकीय बदलावों पर शिक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण.
‘द टेलीग्राफ’ में जी.एस. मुदुर की रिपोर्ट. दिल्ली और चेन्नई में 9,600 वयस्कों पर हुए अध्ययन में खुलासा; लंबे समय तक वायु प्रदूषण (PM2.5) के संपर्क में रहने से युवा भारतीयों में किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का खतरा.
ओमान के तट के पास साइप्रस के कंटेनर जहाज 'जीएफएस गैलेक्सी' पर हुए हमले में भारतीय मरीन इंजीनियर हेरंब करमरकर की मौत. ईरान द्वारा किए गए इस हमले और सुरक्षा संकट पर ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी का पीटीआई (PTI) को दिया इंटरव्यू; चुनाव आयोग की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की तीखी आलोचना और मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर लोकतंत्र पर बड़ा बयान.
‘पीटीआई’ की रिपोर्ट. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना देशद्रोह (राजद्रोह) नहीं, बल्कि असहमति का माध्यम; राम रहीम मामले में 2017 की कैथल हिंसा के आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में शुभम तिग्गा की रिपोर्ट. झारखंड के गिरिडीह में बैंक की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया में उलझे बुजुर्ग रतन लकड़ा की इलाज के अभाव में मौत; जटिल बैंकिंग नियमों और व्यवस्था की बेरुखी पर विशेष विश्लेषण.
भारत में फेशियल रिकग्निशन तकनीक (FRT) के बढ़ते इस्तेमाल और यूरोपीय संघ (EU) के कड़े एआई नियमों के बीच दोहरे मापदंडों पर विशेष रिपोर्ट; सुरक्षा के नाम पर निगरानी, निर्भया फंड के उपयोग और निजता के अधिकार पर बड़ा विश्लेषण.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार मिल रहे विदेशी सम्मान क्या भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं, या इनके पीछे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की कोई अलग कहानी छिपी है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी चर्चा करते हैं कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं, विदेशी पुरस्कारों, इंडियन डायस्पोरा की राजनीति और भारत के भीतर मौजूद चुनौतियों को किस नज़र से देखा जाना चाहिए. इस बातचीत में चर्चा के प्रमुख मुद्दे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहे विदेशी सम्मान. विदेशी पुरस्कारों पर उठे सवाल और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट. इंडियन डायस्पोरा की भूमिका और विदेश यात्राओं की राजनीति. भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और घरेलू चुनौतियां. विदेश नीति, कूटनीति और रणनीतिक हित. क्या विदेशी सम्मान घरेलू राजनीति को प्रभावित करते हैं? अगर आपको यह विश्लेषण महत्वपूर्ण लगा हो तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
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राम मंदिर ट्रस्ट में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी का मामला है, या इससे राम मंदिर आंदोलन, न्यायिक प्रक्रिया, राजनीतिक परियोजना और संस्थागत जवाबदेही पर भी बहस जुड़ती है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने प्रोफेसर अपूर्वानंद से इन्हीं सवालों पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में राम जन्मभूमि आंदोलन की राजनीतिक पृष्ठभूमि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले, राम मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही, जांच एजेंसियों पर भरोसा, आरएसएस की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर प्रो. अपूर्वानंद ने अपने विचार रखे. यह बातचीत समकालीन राजनीति, इतिहास और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाती है. अगर वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, शेयर करें और हरकारा को सब्सक्राइब करना न भूलें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. #RamMandir #Ayodhya #Harkara #DeepDive #Apoorvanand #NidheeshTyagi #Politics #SupremeCourt #RSS #BJP #IndianPolitics #HindiNews #CurrentAffairs