• वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया कि देश के 1,688 सबसे अमीर व्यक्तियों पर प्रगतिशील वेल्थ टैक्स लगाकर ₹10 लाख करोड़ से अधिक की राशि कल्याणकारी योजनाओं के लिए जुटाई जा सकती है.

  • स्वयंभू बाबा और फर्जी ज्योतिषी अशोक खरात के कई फोन से प्राप्त कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से यह खुलासा हुआ है कि वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर और कई अन्य राजनेताओं के संपर्क में था.

  • पश्चिम बंगाल की 2025-26 मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिस पर ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने डेटा को पारदर्शी बनाने के बजाय स्कैन की गई पीडीएफ़ के रूप में जारी किया, जिससे उसका विश्लेषण लगभग असंभव हो गया. साथ ही ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ के नए नियम के तहत मामूली नाम अंतर के आधार पर करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में डाल दिया गया, जिससे वे मतदान से वंचित हो सकते हैं. जांच में यह भी सामने आया कि इस श्रेणी में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी अनुपात से कहीं अधिक है. यह पूरा मामला पारदर्शिता, डेटा उपयोग और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है.

  • असम के विवादित राजनीतिक परिदृश्य में, बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ अल्पसंख्यक वोटों पर अपनी पकड़ के कारण एक प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ी रही है. हालांकि, आगामी विधानसभा चुनावों में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि बंगाली भाषी मुसलमानों से जुड़ी यह पार्टी कैसा प्रदर्शन करती है. यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का पतन देखने को मिला था, जिसमें अजमल खुद धुबरी सीट पर कांग्रेस के रकीबुल हसन से 10 लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से हार गए थे.

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