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छिंदवाड़ा में एनआईसीयू में आग लगने से एक नवजात की मौत, दो झुलसे; एक ही वॉर्मर पर 2-3 बच्चे रखे थे
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित सरकारी जिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में आग लगने से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित एक नवजात बच्ची की मौत हो गई और दो अन्य शिशु झुलस गए.
मेहुल मालपानी के मुताबिक, एनआईसीयू की रेडियंट वार्मर मशीन की फिलामेंट कॉइल में शॉर्ट सर्किट हुआ. इससे निकली चिंगारी पास से गुजर रही ऑक्सीजन ट्यूबिंग पर जा गिरी, जिससे फोम के गद्दे में आग फैल गई.
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लोक व्यवस्था से ऊपर नहीं है ‘धर्म’: पटना हाईकोर्ट ने 300 श्रद्धालुओं के जुलूस की याचिका खारिज की
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सीवान जिले (हथौड़ा गांव) के ‘अखाड़ा नंबर-1’ के एक श्रद्धालु द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है. याचिका में वार्षिक ‘महावीरी जुलूस’ में कम से कम 300 श्रद्धालुओं के शामिल होने और पारंपरिक मार्ग से जुलूस निकालने की अनुमति मांगी गई थी.
सौम्या पंवार की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति आलोक कुमार की पीठ ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) (बी) और 25 के तहत धार्मिक आचरण व जुलूस निकालने की स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है. संवैधानिक संरक्षण केवल धार्मिक प्रथाओं के "आवश्यक और अभिन्न" हिस्सों को मिलता है, न कि उसे निभाने के हर तरीके या माध्यम को.
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26 शहरों में 1100 किलोमीटर: क्यों भारत के मेट्रो बूम को यात्री मिलने में संघर्ष करना पड़ रहा है
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में ऋषिका सिंह और देवांश मित्तल ने देश के 26 शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क की ताज़ा स्थिति पर लंबी रिपोर्ट लिखी है. उनका विश्लेषण बताता है कि ज्यादातर शहरों में मेट्रो को यात्री नहीं मिल रहे हैं. सिर्फ दिल्ली और कोलकाता में ही स्थिति संतोषप्रद मानी जा सकती है. रिपोर्ट कहती है कि मेट्रो को शहरी परिवहन की 'एकमात्र' या 'जादुई' दवा के रूप में देखना बंद करना होगा। मेट्रो केवल एक बड़ी पहेली का एक हिस्सा है. शहरों को केवल मेट्रो पर निर्भर रहने के बजाय इसे बसों, ई-रिक्शा, समर्पित साइकिल ट्रैक और पैदल चलने योग्य फुटपाथों के साथ भौतिक व डिजिटल रूप से एकीकृत करना होगा. तभी भारत के शहर वित्तीय रूप से टिकाऊ और वास्तव में गतिमान बन सकेंगे.
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जॉन कुरियन | भारत की इथेनॉल नीति की सबसे बड़ी कीमत गरीब चुकाएंगे
भारत में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और कच्चे तेल के आयात को कम करने वाली नीति के रूप में पेश किया जा रहा है. लेकिन इस नीति का असली बोझ कौन उठा रहा है, यह सवाल अधिक महत्वपूर्ण है.
राजनीतिक पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ जोआन मार्टिनेज अलियर के साथ बातचीत के दौरान मुझे पहली बार समझ आया कि इथेनॉल केवल ईंधन का मुद्दा नहीं है. यह भोजन, पानी, जमीन और श्रम से जुड़ा सवाल भी है. ब्राजील के इथेनॉल कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए अलियर ने बताया था कि इससे कार रखने वाले अपेक्षाकृत समृद्ध लोगों को लाभ मिला, जबकि पानी, जमीन और गन्ना मजदूरों की कीमत पर इसकी लागत चुकाई गई.
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अंजलि भारद्वाज | क्यों जरूरत है सरकार को पीएम केयर्स ट्रस्ट को ये सब छुपाने की
हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी की अंजलि भारद्वाज के साथ बातचीत पीएम केयर्स फंड को लेकर उठे गंभीर सवालों पर है. करीब 8,450 करोड़ रुपये के फंड में 2024-25 के दौरान सिर्फ करीब 88 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे समय में जब असम समेत देश के कई हिस्से बाढ़ और दूसरी आपदाओं से जूझ रहे हैं, सवाल है कि आपदा के लिए बनाए गए इस फंड का इस्तेमाल आखिर क्यों नहीं हो रहा.
पीएम केयर्स फंड 27 मार्च 2020 को कोविड और दूसरी आपात स्थितियों में लोगों की मदद के लिए बनाया गया था. शुरुआत में इसे केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया फंड बताया गया और इसमें कंपनियों के सीएसआर फंड समेत दूसरे स्रोतों से पैसा आया.
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“अगर ये होटल बन गए, तो काजीरंगा तबाह हो जाएगा” असम में ज़मीन के लिए एक समुदाय की लड़ाई
असम में प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के किनारे स्थित 'इनले पथर' ज़मीन को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय और राज्य सरकार के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. यह पूरा मामला पर्यावरण संरक्षण, कॉरपोरेट विकास और स्थानीय मूल निवासियों के भूमि अधिकारों के बीच टकराव का प्रतीक बन चुका है.
‘द टेलीग्राफ’ में अरिजित सेन की रिपोर्ट के अनुसार, विवाद की मुख्य जड़ काजीरंगा के कोहोरा रेंज के पास स्थित 10 एकड़ ज़मीन ('इनले पथर') है. जून 2024 में, असम पर्यटन विकास निगम (एटीडीसी) ने इस ज़मीन को अधिग्रहित किया.
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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी घुसपैठ की आशंकाओं पर अरुणाचल के भाजपा सांसद ने जनता की चिंता जताई
अरुणाचल प्रदेश से भाजपा के सांसद तापीर गाओ ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कथित घुसपैठ को लेकर जनता की चिंता इस बात की याद दिलाती है कि स्थानीय समुदायों और जन प्रतिनिधियों की चेतावनियों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए.
‘पीटीआई’ के अनुसार, उनकी यह टिप्पणी ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग सेक्टर में चीनी गतिविधियों की खबरों से उठे हालिया विवाद के बीच आई है. इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत चीन से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों के मामलों को "अत्यंत गंभीर" मानता है और एलएसी पर शांति व स्थिरता बनाए रखना “सर्वोच्च प्राथमिकता” है.
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हरीश दामोदरन | चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल जिम्मेदार क्यों नहीं
दशहरा 20 अक्टूबर और दिवाली 8 नवंबर को है, लेकिन त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही चीनी की कीमतों ने कड़वाहट बढ़ा दी है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, शुक्रवार को देशभर में चीनी की सबसे अधिक प्रचलित खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम थी. 21 जुलाई को यह कीमत 45 रुपये और 31 जुलाई तक 50 रुपये थी. यानी केवल एक महीने में चीनी की खुदरा कीमत 20 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई.
चीनी की कीमतों में यह तेजी केवल खुदरा बाजार तक सीमित नहीं है. 20 अगस्त को उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से निकलने वाली कीमत 57-60 रुपये, महाराष्ट्र में 62.5-64 रुपये और कर्नाटक में 63-64 रुपये प्रति किलोग्राम थी.
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चंपत राय के लेख में अयोध्या मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सवाल, विवाद
‘द हिन्दू’ के मुताबिक, पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और वरिष्ठ विश्व हिंदू परिषद नेता चंपत राय ने 18 अगस्त को जारी अपने नौ पन्नों के हिंदी लेख में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं. लेख में चंपत राय ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण फैसलों पर नृपेंद्र मिश्रा का नियंत्रण था और वह खुद को सभी निर्णयों का मुख्य प्राधिकारी मानते थे.
विश्व हिंदू परिषद के मीडिया समूह में साझा किए गए लेख के अनुसार, नृपेंद्र मिश्रा की मंजूरी के बिना मंदिर निर्माण का कोई काम नहीं किया जाता था.
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पब्लिक का पैसा है, मगर चुनाव आयोग का ज्ञानेश कुमार की आधिकारिक यात्राओं पर हुए खर्च का विवरण देने से इनकार
चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई आधिकारिक यात्राओं और सार्वजनिक धन से उन पर हुए खर्च का विवरण सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत देने से इनकार कर दिया है, और कारण यह बताया है कि "व्यक्तिगत जानकारी" नहीं दी जा सकती.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने 18 जून को दायर एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से ज्ञानेश कुमार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने (19 फरवरी 2025) के बाद से उनकी सभी आधिकारिक यात्राओं का विवरण और सार्वजनिक धन से हुए खर्च की जानकारी मांगी थी.
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‘तुम्हें मारते हैं और शिकायत भी नहीं करने देते’: केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ लड़ाई पर गांधीवादी कार्यकर्ता अमित भटनागर
‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित रिजवान रहमान की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों के उन 21 गांवों की लड़ाई को सामने लाया गया है, जो केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कारण विस्थापन के खतरे का सामना कर रहे हैं. इस बातचीत में गांधीवादी कार्यकर्ता और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल अमित भटनागर ने गिरफ्तारियों, मकान गिराए जाने, पुलिस कार्रवाई और मुआवजे से आगे जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई पर विस्तार से बात की है.
केन-बेतवा परियोजना को भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. वर्ष 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूर इस परियोजना के तहत सरकार के अनुसार केन नदी के अतिरिक्त पानी को 221 किलोमीटर लंबी नहर और दो सुरंगों के जरिए बेतवा नदी तक पहुंचाया जाना है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'मकतूब मीडिया' की रिपोर्ट: बेंगलुरु में बंगाली भाषी प्रवासियों के खिलाफ पुलिस की छापेमारी पर सिविल राइट्स ग्रुप्स ने उठाए गंभीर सवाल, संयुक्त जांच रिपोर्ट जारी.
'मेहुल मालपानी' की रिपोर्ट: छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एनआईसीयू में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, एक नवजात बच्ची की मौत और दो गंभीर रूप से घायल.
'सौम्या पंवार' की रिपोर्ट: पटना हाईकोर्ट ने सीवान के महावीरी जुलूस पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता निरपेक्ष नहीं है, लोक शांति सर्वोपरि.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की ऋषिका सिंह और देवांश मित्तल की विस्तृत रिपोर्ट: देश के 26 शहरों में मेट्रो की घटती सवारी और अर्बन ट्रांसपोर्ट की जमीनी सच्चाई.
'जॉन कुरियन' का विस्तृत विश्लेषण: भारत में इथेनॉल नीति का गरीब परिवारों, जल संसाधनों, दोपहिया वाहन चालकों और पर्यावरण पर पड़ता गहरा प्रभाव.
'हरकारा डीप डाइव' में अंजलि भारद्वाज का विश्लेषण: PM CARES फंड में जमा 8,450 करोड़ रुपये के बावजूद आपदाओं में कम खर्च और अपारदर्शिता पर खड़े बड़े सवाल.
'द टेलीग्राफ' की अरिजित सेन की रिपोर्ट: काजीरंगा के इनले पथर में 5-सितारा होटल परियोजना के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों का विरोध, इको-सेंसिटिव जोन और भूमि अधिकारों पर विवाद.
'पीटीआई' रिपोर्ट: अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ की खबरों के बीच भाजपा सांसद तापीर गाओ का बयान, सीमावर्ती इलाकों की चेतावनियों को नजरअंदाज न करने की बात कही.
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दिल्ली में राहुल गांधी के धरने से सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद मार्ग स्थित डीसीपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए. मामला 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन से घायल हुए युवक साहिल लोहबच से जुड़ा है. राहुल गांधी की मांग है कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाए. उनके साथ पैलेट गन से घायल छात्र साहिल लोहबच, कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा और अन्य नेता भी मौजूद रहे. राहुल गांधी का आरोप है कि अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि शिकायत ले ली गई है, लेकिन राहुल गांधी इस मामले में शिकायतकर्ता नहीं हैं. तो क्या यह सिर्फ एफआईआर का मामला है या सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव की शुरुआत? राहुल गांधी के धरने से क्या सरकार पर दबाव बढ़ेगा? और पैलेट गन मामले की राजनीतिक लड़ाई अब किस दिशा में जाएगी? वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग एवं निधीश त्यागी के साथ देखिए हरकारा डीप डाइव लाइव, जहां होगी इस पूरे घटनाक्रम और इसके राजनीतिक मायनों पर विस्तृत चर्चा. #HarkaraDeepDive #RahulGandhi #RahulGandhiDharna #DelhiPolice #Congress #IndianPolitics
कड़वी कॉफी के इस एपिसोड में पंकज कुमार के साथ प्रोफेसर अपूर्वानंद और पत्रकार-संपादक निधीश त्यागी ने युवाओं के हालिया जनउभार पर विस्तार से चर्चा की है. यह चर्चा सिर्फ नीट या प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सत्ता, मीडिया और नई पीढ़ी के बदलते राजनीतिक तेवरों तक जाती है. जंतर-मंतर पर युवाओं की नई भाषा, मीम और व्यंग्य से लेकर उनके पोस्टर्स, नारों और सरकार के प्रति बढ़ते आक्रोश तक, इस पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की गई है. चर्चा में 1974 के छात्र आंदोलन, अन्ना आंदोलन, किसान आंदोलन और शाहीन बाग जैसे आंदोलनों के अनुभवों के साथ मौजूदा जनउभार की तुलना भी की गई है. सवाल यह भी है कि क्या आज की युवा पीढ़ी के सामने शिक्षा और रोजगार के रास्ते लगातार संकरे होते जा रहे हैं? क्या प्रतियोगी परीक्षाओं की समस्या वास्तव में शिक्षा और अर्थव्यवस्था के बड़े संकट का हिस्सा है? पिछले 12 वर्षों में सत्ता के प्रति प्रेम से संदेह, भय और फिर आक्रोश तक का सफर कैसे हुआ? और क्या जंतर-मंतर ने अलग-अलग धर्म, वर्ग और पीढ़ियों को एक साझा मुद्दे पर फिर से जोड़ा है? चर्चा के एक अहम हिस्से में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं. पारंपरिक मीडिया से बढ़ते अविश्वास और मोबाइल, सोशल मीडिया तथा छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सामने आती वैकल्पिक आवाजों पर भी बात हुई है.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ ने जाति, छुआछूत और हिंदुत्व की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इस पूरे मामले की पड़ताल की. भंवर मेघवंशी की प्रमुख किताबें: https://www.amazon.com/s?k=Bhanwar+Meghwanshi&i=digital-text&crid=1IRSVBLX03E2Z&sprefix=bhanwar+meghwanshi%2Cdigital-text%2C279&ref=nb_sb_noss हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.