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मोहन भागवत मैडिसन स्क्वायर गार्डन में: नफरत की राजनीति और समावेशिता का मुखौटा
डॉ. राम पुनियानी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में तीन देशों की विदेश यात्रा शुरू की. इस यात्रा की पहली कड़ी अमेरिका थी, जहां अन्य कार्यक्रमों के अलावा न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका प्रमुख संबोधन हुआ. इस कार्यक्रम में 5,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी. यात्रा का घोषित उद्देश्य आरएसएस को लेकर मौजूद गलत धारणाओं को दूर करना, संवाद स्थापित करना और सार्वभौमिक एकता का संदेश फैलाना था.
लेकिन प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. करीब 61 मानवाधिकार संगठनों ने इसमें हिस्सा लेते हुए आरएसएस और संघ परिवार की नफरत की राजनीति को लेकर सवाल उठाए. प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस से जुड़े साहित्य और उन लेखों का हवाला दिया
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ज्यादा भारतीय छात्र उच्च शिक्षा छोड़ रहे हैं, क्योंकि अब डिग्री लागत के लायक नहीं लगती
‘स्क्रोल’ में मिलिंद मुरुगकर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में उच्च शिक्षा की डिग्री का मूल्य लगातार घट रहा है और इसी वजह से छात्रों और अभिभावकों के लिए डिग्री हासिल करने में लगने वाला समय और पैसा अब पहले जैसा उचित निवेश नहीं लगता.
जुलाई के पहले सप्ताह में जब युवा जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में दाखिले से जुड़े 2022-23 और 2023-24 के अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण यानी एआईएसएचई के आंकड़े जारी किए. आंकड़ों के अनुसार, 2011 के बाद पहली बार भारत में स्नातक स्तर पर छात्रों की संख्या में गिरावट आई है.
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झारखंड में मतदाता नाम हटाने वाले फॉर्म की जांच के आदेश
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के बाद झारखंड के गोड्डा जिले में चुनाव अधिकारियों ने महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर-9 पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जमा किए गए फॉर्म-7 की जांच शुरू कर दी है. बसंतराय के प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी श्रीमन मरांडी ने बताया कि जिला उप निर्वाचन अधिकारी ने मामले में रिपोर्ट मांगी है और जांच के लिए प्रखंड पंचायती राज अधिकारी को महेशटिकरी भेजा गया है.
मरांडी ने बताया कि प्रखंड पंचायती राज अधिकारी ने गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों से बात की और जांच के निष्कर्ष प्रखंड स्तर के अधिकारी को सौंपे जाएंगे.
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राज्यपाल ने कर्नल सोफिया का अपमान करने वाले भाजपा मंत्री पर मुकदमा न चलाने के सरकार के फैसले को दी मंजूरी
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राज्य के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न देने के भारतीय जनता पार्टी सरकार के फैसले को अपनी स्वीकृति दे दी है. मंत्री विजय शाह पर पिछले साल कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों का आरोप था.
एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस के अनुसार, प्रेस यह फैसला कथित तौर पर सोमवार (31 अगस्त) की रात को लिया गया. इससे ठीक कुछ घंटे पहले राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि मंत्री विजय शाह पर मुकदमा चलाने का अंतिम निर्णय राज्यपाल के पास लंबित है.
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पूर्व वित्त सचिव गर्ग ने जीडीपी की गणना पर उठाए सवाल, दावा- यह 7.8% के बजाय 2.6% थी, पक्ष-विपक्ष में तकरार
भारत सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 7 प्रतिशत के सतर्क अनुमान से भी ज्यादा है. लेकिन 7.8 प्रतिशत की इस जीडीपी पर भारत के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उनका दावा है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2.6 प्रतिशत थी, ना कि 7.8 प्रतिशत. गर्ग ने एनडीटीवी से बातचीत में यह दावा किया और समर्थन में तर्क दिए. इसके बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस जहां सरकार पर हमलावर हो गई, वहीं सरकार की तरफ से जीडीपी की वृद्धि दर की आलोचना करने वालों को बेरोजगार करार दिया गया.
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राजीव कुमार | उलटा सदन
कई बार संसद ऐसी संस्था कम दिखाई देती है जो कार्यपालिका से जवाब मांगती है और धृतराष्ट्र जैसी अधिक, जो मोहवश अपने पुत्रों की हर मांग को आंख मूंदकर स्वीकार करती है.
टेलीविजन पर संसद की कार्यवाही देखना और संसद के भीतर बैठकर उसे देखना दो बिल्कुल अलग अनुभव हैं. भीतर से देखने पर तस्वीर कहीं अधिक जटिल और कई बार काफी दिलचस्प भी दिखाई देती है. 36 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहने के बाद जब संसद में पहुंचा, तो मेरा पहला संसदीय सत्र एक अलग तरह की सीख लेकर आया.
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वी-डेम के लोकतंत्र सूचकांक में भारत की स्थिति 1975 के बाद सबसे निचले स्तर पर
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति यानी यूएन सीईआरडी की ओर से भारत में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर जताई गई चिंता, यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग स्थित वैरायटीज ऑफ डेमोक्रेसी यानी वी-डेम संस्थान की ताजा रिपोर्ट से मेल खाती है. वी-डेम ने भारत को उन देशों में शामिल किया है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था धीरे-धीरे निरंकुशता की ओर बढ़ रही है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं.
यूएन सीईआरडी ने 2007 के बाद भारत की पहली समीक्षा में कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर कथित उल्लंघनों पर "गंभीर चिंता" जताई. समिति ने विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों, खासकर मुस्लिम मतदाताओं, के नाम बाहर किए जाने को लेकर भी चिंता व्यक्त की.
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दिवालियापन और ठगों की दुनिया: कैसे दिवालियापन कानून अमीरों को फायदा और जनता को सजा देते हैं
राजनीतिक टिप्पणीकार भवानी शंकर नायक के इस लेख का केंद्रीय तर्क है कि पूंजीवादी व्यवस्था में दिवालियापन और ऋण चुकाने में असमर्थता से जुड़े कानून आम लोगों और बड़े कारोबारियों के साथ समान व्यवहार नहीं करते. आम व्यक्ति छोटे कर्ज की अदायगी में असफल होता है तो उसे वित्तीय संस्थाओं की कानूनी कार्रवाई, दबाव और सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ता है, जबकि बड़े कारोबारी और कंपनियां दिवालियापन की कानूनी प्रक्रिया के जरिए भारी कर्ज से राहत पाने में सफल हो जाती हैं.
लेख में 2008 के अमेरिकी वित्तीय संकट में लेहमैन ब्रदर्स से लेकर भारत में 2026 में सुभाष चंद्र से जुड़े मामले तक उदाहरण दिए गए हैं. लेख के मुताबिक, सुभाष चंद्र पर करीब 22,006 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे हाल की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया में घटाकर केवल 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान तक सीमित कर दिया गया.
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7.8% की वृद्धि, लेकिन विदेश यात्रा और सोना न खरीदने की अपील, मोदी की ‘हार्दिक बधाई’ पर उठे सवाल
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश पर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने देश की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पर बधाई देने के साथ ही भारतीयों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा, विदेश में शादियां और जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील की. रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ सरकार मजबूत आर्थिक वृद्धि को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों से खर्च सीमित करने की अपील ने राजनीतिक और सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है.
1 सितंबर को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में मोदी ने कहा कि भारतीयों को केवल घूमने-फिरने के लिए विदेश यात्रा नहीं करनी चाहिए, विदेश में शादियां नहीं करनी चाहिए और जब तक जरूरी न हो, सोना भी नहीं खरीदना चाहिए. इसके कुछ ही क्षण पहले उन्होंने 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को देश की उपलब्धि बताते हुए बधाई दी.
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श्रवण गर्ग | अमेरिका के हिंदू जो सुनना चाहते थे, वह भागवत ने नहीं कहा
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के मेडिसिन स्क्वायर गार्डन में दिए भाषण के उन पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं, जिन पर सार्वजनिक बहस अपेक्षाकृत कम हुई. भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं हो सकता. लेकिन श्रवण गर्ग का सवाल है कि इस बयान में नया क्या है, क्योंकि 2018 में दिल्ली में भी भागवत इसी तरह की बात कह चुके हैं. फिर 2018 और 2026 के बीच भारत में मुसलमानों की स्थिति में क्या बदलाव आया, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों नहीं बनता.
चर्चा में श्रवण गर्ग इस बात पर जोर देते हैं कि भागवत के भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति, विविधता और आरएसएस के सेवा कार्यों का उल्लेख तो हुआ, लेकिन आधुनिक भारत की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर लगभग कोई बात नहीं हुई.
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'कॉकरोच' पलटकर लड़ रहे हैं: बॉस्टन के एक कमरे से दिल्ली की सड़कों तक
तीस साल के अभिजीत दीपके बॉस्टन में रहने वाले एक ताज़ा पोस्ट-ग्रैजुएट हैं. उनकी योजना भारत में कोई युवा आंदोलन खड़ा करने की कभी नहीं थी. न्यूयॉर्क टाइम्स के ओपिनियन वीडियो में वे ख़ुद बताते हैं कि वे बॉस्टन के अपने कमरे में बैठे रहने वाले एक अंतर्मुखी आदमी थे और दिमाग़ में बस दो चीज़ें थीं. नौकरी और एजुकेशन लोन की अदायगी.
मोड़ तब आया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोज़गार नौजवानों के एक हिस्से को 'कॉकरोच' कहा — ऐसे नौजवान जिन्हें रोज़गार नहीं मिलता और जिनके लिए किसी पेशे में कोई जगह नहीं. दीपके ने एक्स पर लिखा कि क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएँ. पोस्ट वायरल हो गई. पाँच दिन के भीतर उनके साथ एक करोड़ लोग जुड़ चुके थे.
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"मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी". 15 साल की लड़की ने कहा, "मैं पीछे नहीं हटूंगी"
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, नोएडा की 15 वर्षीय रुचिका सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न, धमकियों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. अब मकतूब मीडिया से बातचीत में रुचिका ने कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी जिंदगी "नरक" बना दी है और वह अपने चेहरे को छिपाकर रहने के लिए मजबूर हैं.
रुचिका ने कहा, "मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी है." उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल की लड़की को इस तरह परेशान किया गया कि वह कहीं स्वतंत्र रूप से जा या रह नहीं सकती. उनके मुताबिक, उन्हें हर जगह अपना चेहरा छिपाना पड़ता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "कायर" भी कहा और साफ किया कि वह पीछे नहीं हटेंगी.
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सोनिया गांधी की किताब: पेंगुइन इंडिया के वकीलों ने 'कई अध्यायों' में बदलाव और कटौती माँगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग' को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) के वकीलों ने कई अध्यायों में बदलाव और कटौती की माँग की थी. पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इकाई अल्फ़्रेड ए नॉफ़ इस किताब की वैश्विक प्रकाशक है, जबकि भारत में इसे छापने और बाँटने की ज़िम्मेदारी पीआरएचआई के पास थी. किताब 10 नवंबर को आनी थी. इसकी घोषणा सबसे पहले नॉफ़ ने की थी और यह भी बताया था कि पहली छपाई एक लाख प्रतियों की होगी.
इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार जिन हिस्सों पर आपत्ति उठाई गई, उनमें थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके 12 साल के शासन से जुड़े संदर्भ, आरएसएस की भूमिका, साम्प्रदायिक विभाजन और दंगों की घटनाओं का ज़िक्र, और अल्पसंख्यकों की दुर्दशा.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
डॉ. राम पुनियानी का विश्लेषण: मोहन भागवत का अमेरिका दौरा, मैडिसन स्क्वायर पर भाषण, यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की सिफारिशें और आरएसएस की अंतरराष्ट्रीय छवि का पूरा जायजा.
'द टेलीग्राफ' में अर्नब चटर्जी की रिपोर्ट: 7.8% जीडीपी वृद्धि दर, गिरती क्रय शक्ति, मैन्युफैक्चरिंग PMI में गिरावट और असंगठित क्षेत्र की उपेक्षा पर विस्तृत विश्लेषण.
'पीटीआई' की रिपोर्ट: मणिपुर में जनगणना टालने के केंद्र के फैसले पर कुकी-ज़ो काउंसिल (KZC) ने उठाए सवाल, राष्ट्रपति शासन दोबारा लागू करने की मांग.
'स्क्रोल' में मिलिंद मुरुगकर की रिपोर्ट: AISHE आंकड़ों में स्नातक दाखिलों में गिरावट; डिग्री के घटते महत्व, शिक्षा की गुणवत्ता और आर्थिक वजहों का विस्तृत विश्लेषण.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का असर: झारखंड के गोड्डा में बीएलए द्वारा फॉर्म-7 से 25 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश पर जांच शुरू; बीडीओ का बड़ा खुलासा.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल: झारखंड के गोड्डा में SIR प्रक्रिया के दौरान बीजेपी BLA द्वारा फॉर्म-7 से अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने के पैटर्न पर विस्तृत रिपोर्ट.
'लाइव लॉ' की रिपोर्ट: वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने न्यायपालिका में महिला जजों के यौन उत्पीड़न को "गंदा राज" बताया; पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर के बयानों और संस्थागत पदानुक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट.
'सबर इंस्टीट्यूट' की रिपोर्ट: हैदराबाद की 15 विधानसभा सीटों पर SIR के तहत 19.4 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का दावा; 40% से अधिक मुस्लिम मतदाताओं और डेटा विसंगतियों का पूरा विश्लेषण.
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सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज और इनसॉल्वेंसी मामले ने भारत की कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. करीब 226.57 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये में मामला निपटाने की प्रक्रिया से "हेयरकट" को लेकर बहस तेज हुई है. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने आर्थिक मामलों के पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ विस्तार से समझा कि हेयरकट क्या होता है, एनसीएलटी और आईबीसी की प्रक्रिया कैसे काम करती है और बड़े कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आखिर कितना पैसा वसूल हो पाता है. बातचीत में पिछले एक दशक में करीब 16 से 17 लाख करोड़ रुपये की रिकवर न हो सकने वाली रकम, वीडियोकॉन जैसे बड़े कॉरपोरेट मामलों, विजय माल्या, किसानों की कर्जमाफी और आम आदमी बनाम बड़े कॉरपोरेट्स के लिए कर्ज की अलग-अलग लागत पर भी चर्चा हुई. क्या कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग मापदंड लागू होते हैं? बैंकों में जमा आम लोगों के पैसे पर बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट का क्या असर पड़ता है? और क्या सरकार इस पूरे सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित कर पा रही है? देखिए पूरी बातचीत और समझिए भारत की कॉरपोरेट कर्ज व्यवस्था के पीछे का पूरा गणित. #HarkaraDeepDive #RakeshKayastha #NidheeshTyagi #SubhashChandra #CorporateDebt #NCLT #IBC #Banking #CorporateGovernance #IndianEconomy
हरकारा डीप डाइव लाइव में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्री श्रवण गर्ग करेंगे देश और दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा. न्यूयॉर्क में मोहन भागवत की भूमिका और उनके संदेशों तक, इस चर्चा में समझने की कोशिश होगी कि इन घटनाओं और संकेतों के भारत के लिए क्या मायने हैं. क्या न्यूयॉर्क में बदलती परिस्थितियां भारत को प्रभावित कर सकती हैं? मोहन भागवत के विचारों और भूमिका को मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक संदर्भ में कैसे देखा जाए? देखिए हरकारा डीप डाइव लाइव.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा और उनके हालिया बयान पर खास चर्चा. न्यूयॉर्क में श्री मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है. उन्होंने हिंदुत्व, धार्मिक विविधता, सभी धर्मों के सम्मान और “यूनिटी इन डायवर्सिटी” की बात भी की. लेकिन सवाल यह है कि भागवत ने वास्तव में क्या कहा और उस बयान का पूरा संदर्भ क्या है? जिस बात पर इतना हल्ला मचा, क्या बहस उसी बात पर हो रही है जो उन्होंने कही? RSS, हिंदुत्व और हिंदू समाज को लेकर भागवत का संदेश क्या है? और न्यूयॉर्क से दिया गया यह संदेश भारत के लिए क्या मायने रखता है? हरकारा डीप डाइव LIVE में इन्हीं सवालों की पड़ताल. देखिए और जुड़िए चर्चा में.