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यूएन समिति ने एससी, एसटी, रोहिंग्या शरणार्थियों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों पर ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की
नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र समिति (यूएनसीईआरडी) ने कहा है कि वह भारत में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, दलितों और रोहिंग्या शरणार्थियों सहित एक बड़े वर्ग के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टों को लेकर "गंभीर रूप से चिंतित" है.
समिति ने कहा, "समिति कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा जातीय और एथनो-धार्मिक समूहों, स्वदेशी और जनजातीय लोगों, जिनमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, विशेष रूप से दलित और गैर-नागरिक शामिल हैं, के खिलाफ किए गए बड़े पैमाने पर उल्लंघनों की रिपोर्टों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है."
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वांगचुक : इस समय किसी भी चीज़ पर भरोसा नहीं है—न चुनावों पर, न परीक्षाओं पर और न ही लोक सेवकों पर
सोनम वांगचुक ने घोषणा की थी कि वे तब तक अपनी हड़ताल खत्म नहीं करेंगे जब तक सरकार भारत के प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों को नहीं सुन लेती. वह दिल्ली के दिल में कॉकरोच विरोध स्थल पर दिन-रात खुले में लेटे रहे, और बारिश, कष्टदायक गर्मी तथा मच्छरों को सहन करते रहे. पहले से ही एक दुबले-पतले शरीर वाले वांगचुक ने 26 दिनों में 11 किलो वजन कम कर लिया.
उन्होंने ‘द गार्डियन’ को बताया, "मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं बंद हूँ, फँस गया हूँ... एक जेल की तरह." "गर्मी और उमस भयानक थी."
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पांच दिन में निर्वासन, एक साल बाद वापसी: छह बंगाली अब नागरिकता साबित करने की नई लड़ाई में
‘आर्टिकल 14’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पाइकड़ गांव में 8 जुलाई 2026 की रात असाधारण थी. रात करीब 10.30 बजे जब स्वीटी बीबी अपने दो बेटों के साथ घर लौटीं तो रिश्तेदार और पड़ोसी टॉर्च लेकर उनका इंतजार कर रहे थे. कुछ दूरी पर दानिश शेख के घर के बाहर भी ऐसा ही दृश्य था. यह सिर्फ घर वापसी नहीं थी, बल्कि भारत से कथित तौर पर गलत तरीके से बांग्लादेश भेजे गए छह लोगों की लगभग एक साल बाद वापसी थी.
स्वीटी बीबी, उनके बेटे कुर्बान और इमाम, दानिश शेख और उनकी पत्नी सुनाली खातून तथा बेटा साबिर जून 2025 में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद बांग्लादेश भेज दिए गए थे. पुलिस ने उन्हें कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासी मानते हुए हिरासत में लिया था.
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एक महीने में 30% महंगी हुई चीनी, मौसम के झटकों से खाद्य महंगाई का बढ़ा खतरा
‘डाउन टू अर्थ’ के मुताबिक, देश में चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 30 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को चीनी का औसत खुदरा मूल्य 48.73 रुपये प्रति किलो था, जो 24 अगस्त तक बढ़कर 63.05 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. यह तेजी ऐसे समय आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक लगातार चेतावनी देता रहा है कि बार-बार आने वाले और अधिक तीव्र मौसम संबंधी झटके खाद्य महंगाई को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं.
केंद्र सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अत्यधिक बारिश, जलभराव और गन्ने की फसल में फैली बीमारियों को प्रमुख कारण बताया है. रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश ने गन्ने के उत्पादन को प्रभावित किया है.
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रूस के युद्ध में फंसे भारतीयों के परिवारों का लंबा और बेबस इंतजार
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, राजस्थान के जयपुर निवासी 33 वर्षीय कैब चालक मनोज सिंह शेखावत ने 15 अक्टूबर को रूस-यूक्रेन सीमा के मोर्चे से अपने परिवार को सिर्फ 21 सेकंड का एक ऑडियो संदेश भेजा था. उन्होंने कहा था, "अगर तीन दिन तक मेरी कोई खबर नहीं मिले तो समझ लेना कि मैं अब नहीं रहा." उस संदेश के करीब दस महीने बाद भी परिवार को मनोज के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उम्मीद अब भी बाकी है कि शायद वह किसी ऐसी जगह जिंदा हों, जहां इंटरनेट या संपर्क की सुविधा नहीं है.
मनोज का परिवार उन 26 भारतीय परिवारों में शामिल है जिन्होंने मार्च में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी मांग है कि केंद्र सरकार रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में फंसे या लापता भारतीयों का पता लगाए और उन्हें भारत वापस लाने की कोशिश करे.
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असली जैसी दिखने वाली नकली दवाएं: सर्वे में हर तीन में एक उपभोक्ता को मिला नकली हेल्थकेयर उत्पाद
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नकली दवा या हेल्थकेयर उत्पाद पहली नजर में असली जैसा दिख सकता है. पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजाइन की नकल इतनी बेहतर हो सकती है कि उपभोक्ता को फर्क पता ही न चले. एएसपीए-क्रिसिल की “स्टेट ऑफ काउंटरफिटिंग इन इंडिया 2025” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वे किए गए हर तीन में लगभग एक उपभोक्ता ने पिछले एक साल के दौरान किसी नकली हेल्थकेयर उत्पाद का सामना किया. इसके बावजूद केवल 52 प्रतिशत उपभोक्ता ही खरीदने से पहले यह जांचते हैं कि हेल्थकेयर उत्पाद असली है या नहीं.
रिपोर्ट के लिए नौ शहरों में 1,639 उपभोक्ताओं का ऑनलाइन सर्वे किया गया. सर्वे में उपभोक्ताओं ने हेल्थकेयर क्षेत्र में नकली उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत आंकी, जो 2022 में 20 प्रतिशत थी. करीब 80 प्रतिशत लोगों ने माना कि पिछले 12 महीनों में हेल्थकेयर उत्पादों की नकली बिक्री बढ़ी है.
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बीजेपी आईटी सेल; बड़ा पद पाने में बाधा नहीं बनीं विवादित और सांप्रदायिक पोस्टें, 60,000 से ज्यादा पोस्ट हटाईं
‘ऑल्ट न्यूज़’ में अभिषेक कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी द्वारा 17 अगस्त को अपने सोशल मीडिया सेल में नए बदलावों की घोषणा की गई, जिसके तहत दीपक म्हस्के को अमित मालवीय की जगह आईटी सेल प्रमुख बनाया गया. इस नई टीम में अरुण यादव को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह-संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले वे हरियाणा बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख रह चुके थे.
राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति मिलते ही अरुण यादव के पुराने सोशल मीडिया रिकॉर्ड की ओर लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित हुआ. इसके तुरंत बाद यादव ने अपने ‘एक्स’ हैंडल (@BeingArun28) को प्राइवेट (लॉक) कर दिया. उस समय उनके अकाउंट पर लगभग 65,500 पोस्ट दिखाई दे रही थीं.
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अजित साही | अमेरिका में हिंदू होना और हिंदुत्व की राजनीति करना, दोनों अलग है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधिश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजीत साही के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका और कनाडा दौरे पर विस्तार से चर्चा की. आरएसएस अपने 100वें वर्ष में इस दौरे को दुनिया तक "वसुधैव कुटुम्बकम" का संदेश पहुंचाने की कोशिश बता रहा है. लेकिन अमेरिका में इस दौरे को लेकर सवाल भी हैं और विरोध भी. आखिर मोहन भागवत के इस दौरे का मकसद क्या है और अमेरिका में आरएसएस से जुड़े संगठन किस तरह काम करते हैं?
अजित साही ने बातचीत में कहा कि अमेरिका में हिंदू स्वयंसेवक संघ यानी एचएसएस, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका और कई दूसरे संगठन लंबे समय से सक्रिय हैं.
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महबूबा मुफ़्ती | जेल में इमरान नहीं, पाकिस्तान की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था कैद है
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती का ‘द टेलीग्राफ’ में प्रकाशित यह लेख पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, लोकतंत्र के क्षरण और वहाँ की सेना (एस्टैब्लिशमेंट) के हस्तक्षेप का एक गहरा और विश्लेषणात्मक अवलोकन प्रस्तुत करता है. लेख का मुख्य बिंदु यह है कि पाकिस्तान की असली समस्या कोई एक नेता या राजनीतिक दल नहीं, बल्कि वह संपूर्ण तंत्र है जो पीढ़ियों से एक ही दुष्चक्र में फंसा हुआ है.
महबूबा मुफ़्ती लिखती हैं कि पाकिस्तान को अपनी कप्तानी में क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले इमरान खान आज अदियाला जेल की सलाखों के पीछे हैं. हाल ही में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने 2023 से बंद इमरान खान को इलाज के लिए शिफा अस्पताल भेजने का स्पष्ट आदेश दिया था
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अपूर्वानंद | दिमागी गुंडागर्दी
राजस्थान के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में गुंडों ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया. उन्होंने उन पर पथराव किया, मारपीट की और उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए.
राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने इस हिंसा का बचाव करते हुए कहा कि गुंडे सीजेपी कार्यकर्ताओं से इसलिए नाराज थे, क्योंकि स्कूल का निरीक्षण करने के नाम पर वे बच्चों की पढ़ाई में बाधा डाल रहे थे. वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने गुंडों को बधाई तक दे डाली. स्थानीय विधायक ने इस बात से इनकार किया कि गुंडों का बीजेपी से कोई संबंध था. लेकिन जब वे यह कह रहे थे, तब एक गुंडा उनके ठीक पीछे खड़ा था.
पश्चिम बंगाल में, पिछले सप्ताह लगातार तीन दिनों तक गुंडों ने जादवपुर विश्वविद्यालय पर हमला किया. एक आरोप यह है कि वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े थे.
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आकार पटेल : धर्मांतरण की उलझन
इस हफ़्ते की हेडलाइन: "पुणे पुलिस ने 2 मामलों से धर्मांतरण क़ानून के प्रावधान वापस लिए, अधिकारियों को पता चला कि अधिनियम अभी लागू नहीं हुआ है." हमारे हमेशा सतर्क रहने वाले क़ानून लागू करने वालों ने न केवल पिछले क़ानूनों की समस्याओं को सुलझा लिया है बल्कि भविष्य के क़ानूनों की भी. जिस नए क़ानून का ज़िक्र किया गया है वह अब लागू हो चुका है और यह उन तोहफ़ों में से एक है जो बीजेपी ने 2018 से भारत को दिए हैं, जब ऐसा पहला क़ानून उत्तराखंड में लागू हुआ था. धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता भारत में एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 25) होने के साथ-साथ एक आपराधिक कृत्य भी है. इससे कुछ लोग उलझन में पड़ सकते हैं कि हम असल में
क्या करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र की माँ समझदार है और जानती है कि अपने बच्चों को नियंत्रण में कैसे रखना है. मैं पहले भी इन क़ानूनों की विशिष्ट समस्याओं के बारे में यहाँ लिख चुका हूँ, और मैं उन्हें दोहराऊँगा नहीं. लेकिन हमें इस बात पर नज़र डालनी चाहिए कि असल में वह कौन सी समस्या है जिसे ये क़ानून हल करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत में धर्मांतरण कितना बड़ा मुद्दा है?
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'कल्लोल भट्टाचार्जी' की रिपोर्ट: यूएनसीईआरडी (UNCERD) ने भारत में दलितों, आदिवासियों और रोहिंग्या शरणार्थियों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों पर जताई गंभीर चिंता.
सोनम वांगचुक का विशेष साक्षात्कार: 26 दिनों के अनशन के बाद कॉकरोच आंदोलन, युवाओं की ताकत और भारत में दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के उनके आह्वान पर पूरी रिपोर्ट.
'डाउन टू अर्थ' की विस्तृत रिपोर्ट: बारिश और बीमारियों से गन्ने की फसल को नुकसान के कारण चीनी की कीमतों में 30% का उछाल, खाद्य महंगाई पर RBI की चेतावनी और सरकारी कदम.
'आर्टिकल 14' की रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल के बीरभूम के 6 निवासियों को गलत तरीके से बांग्लादेश डिपोर्ट करने, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और एक साल बाद उनकी वापसी का पूरा विवरण.
'स्क्रोल' की विशेष रिपोर्ट: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे लापता भारतीयों, भर्ती एजेंटों के जाल और सुप्रीम कोर्ट में चल रही परिवारों की कानूनी लड़ाई पर पूरा विश्लेषण.
'साउथ फर्स्ट' की विस्तृत रिपोर्ट: एएसपीए-क्रिसिल की "स्टेट ऑफ काउंटरफिटिंग इन इंडिया 2025" के अनुसार देश में नकली दवाओं का बढ़ता बाजार और घटती सुरक्षा जांच पर विश्लेषण.
'हरकारा डीप डाइव' में अजीत साही का विश्लेषण: आरएसएस शताब्दी वर्ष पर मोहन भागवत का अमेरिका-कनाडा दौरा और एचएसएस नेटवर्क की जमीनी हकीकत.
'ऑल्ट न्यूज़' की रिपोर्ट: भाजपा आईटी सेल में अरुण यादव की पदोन्नति के बाद एक्स अकाउंट से 60,000 से अधिक पोस्ट डिलीट, विवादित ट्रैक रिकॉर्ड पर उठे सवाल.
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PM CARES Fund में करीब ₹8,450 करोड़ जमा हैं, लेकिन 2024-25 में सिर्फ करीब ₹88 लाख खर्च किए गए. आखिर आपदा के लिए बनाए गए इस फंड का पैसा खर्च क्यों नहीं हो रहा? हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ RTI और Transparency Activist अंजलि भारद्वाज ने PM CARES Fund, पारदर्शिता, जवाबदेही और फंड के इस्तेमाल से जुड़े अहम सवालों पर बात की. हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ ने जाति, छुआछूत और हिंदुत्व की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इस पूरे मामले की पड़ताल की. भंवर मेघवंशी की प्रमुख किताबें: https://www.amazon.com/s?k=Bhanwar+Meghwanshi&i=digital-text&crid=1IRSVBLX03E2Z&sprefix=bhanwar+meghwanshi%2Cdigital-text%2C279&ref=nb_sb_noss हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं. संघ इस दौरे को "वसुधैव कुटुम्बकम" के संदेश से जोड़ रहा है, लेकिन इस दौरे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ विस्तार से चर्चा की कि अमेरिका में आरएसएस और उससे जुड़े संगठन किस तरह काम करते हैं. हिंदू स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका, हिंदू पहचान की राजनीति, हिंदूफोबिया, जाति भेदभाव और अमेरिकी राजनीति में भारतीय संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दों पर इस बातचीत में गंभीर चर्चा हुई. क्या मोहन भागवत का यह दौरा सिर्फ प्रवासी भारतीयों और हिंदू समुदाय से संवाद का कार्यक्रम है? या फिर इसके पीछे अमेरिका में आरएसएस के सामाजिक और वैचारिक नेटवर्क को मजबूत करने की बड़ी रणनीति है? देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और अजित साही की पूरी बातचीत. #MohanBhagwat #RSS #America #HarkaraDeepDive #NidheeshTyagi #AjitSahi #IndianDiaspora #HinduPolitics #Hindutva #IndianPolitics