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तेल की कीमतों में उछाल के झटके से रुपये में नौ हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट, 96.28/ प्रति डॉलर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मर्चेंट डॉलर की मजबूत मांग के कारण भारतीय रुपये के भविष्य को लेकर चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं. इसके चलते शुक्रवार को सुस्त कारोबार के साथ समाप्त हुए सप्ताह में रुपये ने मई के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की.
‘रॉयटर्स’ में जसप्रीत कालरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी सेना के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति एक बार फिर बाधित हो गई है. इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में 13% की भारी तेजी आई, जिसने रुपये को तगड़ा झटका दिया. रुपया साप्ताहिक आधार पर लगभग 1% गिरकर 96.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.
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उमर खालिद पर ‘मनगढ़ंत आतंकवाद’ के आरोप वैसे ही, जैसे मंडेला ने झेले थे: ममदानी
न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी, जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के समर्थन में सामने आए हैं, जो 2020 के दिल्ली दंगों के संबंध में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे हैं. न्यूयॉर्क शहर के 'द टाउन हॉल' में नेल्सन मंडेला फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'नेल्सन मंडेला ग्लोबल लीडरशिप फोरम' के उद्घाटन मंच से, डेमोक्रेटिक मेयर ने खालिद के लिए अपना समर्थन दोहराया और दावा किया कि खालिद के खिलाफ लगाए गए "मनगढ़ंत आतंकवाद" के आरोप काफी हद तक वैसे ही हैं जैसे मंडेला ने अपने समय में झेले थे.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ के अनुसार, अपने पूरे भाषण में मंडेला को 'मदीबा' (दक्षिण अफ्रीकी नेता को सम्मान देने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित पारिवारिक नाम) कहकर संबोधित करते हुए ममदानी ने कहा कि "अपने लिए और हममें से प्रत्येक से एकजुटता की मांग में, मदीबा एक साधारण इंसान या किसी मसीहा से कहीं बढ़कर बन जाते हैं." मंडेला पर लगे आरोपों की तुलना आज उमर खालिद द्वारा झेले जा रहे आरोपों से करते हुए मामदानी ने पूछा कि हर कोई आखिर क्यों इंतजार कर रहा है,
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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड एक रबर स्टैंप: भारत के वन्यजीव प्रहरी को आज़ादी की आवश्यकता क्यों है
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की परिकल्पना वर्ष 2003 में वन्यजीव संरक्षण और जंगलों की सुरक्षा के लिए भारत के शीर्ष वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी. हालाँकि, आज ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक स्वतंत्र पर्यावरण प्रहरी के रूप में काम करने के बजाय विकास परियोजनाओं को मंज़ूरी देने वाले एक कुशल और सुगम तंत्र के रूप में अधिक काम कर रहा है.
‘द टेलीग्राफ’ ने अपनी संपादकीय में लिखा है कि वन्यजीव मंज़ूरी की आवश्यकता वाली परियोजनाओं के मूल्यांकन का जिम्मा संभालने वाली एनबीडब्ल्यूएल की स्थायी समिति ने पिछले दशक में संरक्षित वन भूमि पर जाँचे गए औद्योगिक और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) प्रस्तावों में से 96.5% को मंज़ूरी दे दी. इसकी बैठकों के मिनट्स (कार्यवृत्त) से पता चलता है कि 2016 से हुई 52 चर्चाओं में समिति ने 2,448 विकास प्रस्तावों पर विचार किया. इनमें से 572 को स्थगित कर दिया गया, जबकि 1,876 पर निर्णय लिया गया; जिनमें से 1,810 को मंज़ूरी दी गई और केवल 66 प्रस्तावों को खारिज किया गया.
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पुलिस मुठभेड़ में व्यक्ति की मौत के बाद जम्मू के डोडा में तनाव, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद
जम्मू के डोडा जिले में शुक्रवार को एक स्थानीय व्यक्ति की पुलिस के साथ कथित झड़प के दौरान मौत के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके बाद जिला प्रशासन को क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करनी पड़ीं. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अरुण शर्मा की रिपोर्ट है कि जहाँ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि वह एक निर्दोष ऑटो चालक था, वहीं पुलिस अधिकारियों का आरोप है कि उसे संदिग्ध मवेशी तस्करी को रोकने के लिए एक चेकपोस्ट पर रोका गया था.
मृतक की पहचान भद्रवाह उपमंडल के चीका गांव के रहने वाले 30 वर्षीय आरिफ हुसैन के रूप में हुई है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गुरुवार रात भद्रवाह के पास एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल 'जय' में कहासुनी के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) के जवानों ने उसे गोली मार दी. स्थानीय लोगों का दावा है कि उसके एक परिचित ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो एसओजी के जवानों ने उसकी भी पिटाई कर दी.
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यूपी पुलिस ने कहा, पूर्व मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ और बेटे के खिलाफ गवाहों को धमकाने का कोई सबूत नहीं मिला
उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उन्हें 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के एक गवाह को कथित रूप से डराने-धमकाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' और उनके बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है.
उमर राशिद की रिपोर्ट के अनुसार, पिता-पुत्र की इस जोड़ी के साथ-साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमनदीप सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में बलजिंदर सिंह को कथित रूप से धमकाने का मामला दर्ज किया गया था, ताकि उन्हें अपनी गवाही दर्ज कराने से रोका जा सके. बलजिंदर सिंह 2021 के हिंसा मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी हैं, जिसमें आशीष मिश्रा उर्फ 'मोनू' मुख्य आरोपी है.
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‘हमारा संघर्ष एक जैसा है’: केन-बेतवा को लेकर 16 दिनों से अनशन पर बैठे कार्यकर्ता ने वांगचुक को दिया समर्थन
परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने अनशन के बीसवें दिन पर बैठे सोनम वांगचुक को 640 किलोमीटर दूर से समर्थन मिला है, जहाँ एक अन्य कार्यकर्ता अपने अनशन के 16वें दिन पर हैं.
मध्य प्रदेश के छतरपुर में अमित भटनागर का प्रदर्शन केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित लोगों की मांगों के समर्थन में है. भटनागर ने शुक्रवार को भारत के एकमात्र अखिल महिला और दलित नेतृत्व वाले समाचार नेटवर्क 'खबर लहरिया' से कहा, "हमारा संघर्ष एक जैसा है, और हम पूरी तरह से उनके साथ खड़े हैं."
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‘भारतीय पक्ष की घोर लापरवाही...’: जापान के पूर्व मंत्री ने बुलेट ट्रेन में देरी के लिए नई दिल्ली को ठहराया जिम्मेदार
जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना यानी बुलेट ट्रेन परियोजना में लंबे समय से हो रही देरी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत और नीतिगत फैसलों में नई दिल्ली के ढुलमुल रवैये ने जापान की 'शिनकान्सेन' तकनीक पर आधारित मूल योजना को पटरी से उतार दिया, जिसके कारण इस महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से प्रमुख जापानी प्रणालियों को बाहर कर दिया गया.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के सदस्य माकिहारा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस परियोजना से जुड़े थे. उन्होंने बातचीत के दौरान भारत के दृष्टिकोण की आलोचना की और दावा किया कि देश यूरोपीय तकनीक और स्वदेशी ट्रेन विकास के पक्ष में धीरे-धीरे जापानी रोलिंग स्टॉक (ट्रेन के डिब्बे) और सिग्नलिंग सिस्टम से दूर हो गया.
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आकर पटेल | धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था का समाधान नहीं, लेकिन जवाबदेही का प्रतीक जरूर होगा.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में हरकारा के संपादक निधीश त्यागी ने लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के साथ जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच पार्टी के आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही के सवाल पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत का केंद्र यह रहा कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध अब भी सत्ता को जवाब देने के लिए मजबूर कर सकता है.
चर्चा की शुरुआत जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन से होती है, जहां छात्र और युवा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. आकार पटेल का कहना है कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं. नीट परीक्षा दोबारा कराना, प्रश्नपत्रों को एयरफोर्स के माध्यम से भेजना और सुरक्षा व्यवस्था बदलना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में समस्या थी. लेकिन इसके बावजूद किसी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई. उनके अनुसार असली सवाल केवल परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं, बल्कि यह है कि गलती स्वीकार करने के बाद भी जिम्मेदारी कौन लेगा.
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‘नियति का एक सच्चा चमत्कार’- मेसी और लामिन यमाल की पहली मुलाकात; “मेरा दिल दो टुकड़ों में टूट रहा है”
‘बीबीसी’ में डैनियल ऑस्टिन की यह रिपोर्ट फुटबॉल इतिहास की सबसे दिलचस्प और जादुई कहानियों में से एक को उजागर करती है. एक तरफ सर्वकालिक महानतम फुटबॉलर लियोनेल मेसी (39 वर्ष) हैं और दूसरी तरफ बार्सिलोना के राइट विंग पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे 19 वर्षीय असाधारण प्रतिभा लामिन यमाल हैं. रविवार को होने वाले विश्व कप फाइनल में जब अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें आमने-सामने होंगी, तब फुटबॉल जगत पहली बार इन दोनों खिलाड़ियों को एक-दूसरे के खिलाफ मैदान पर प्रतिस्पर्धा करते देखेगा. मेसी का इस उम्र में भी शीर्ष स्तर पर बने रहना और यमाल का इतनी कम उम्र में विश्व स्तर पर चमकना, दोनों खिलाड़ियों की असाधारण क्षमता को दर्शाता है.
हालांकि मैदान पर यह उनकी पहली भिड़ंत होगी, लेकिन असल जिंदगी में उनके रास्ते आज से लगभग दो दशक पहले 2007 में ही टकरा चुके थे. उस समय लियोनेल मेसी महज 20 वर्ष के थे और बार्सिलोना की मुख्य टीम में अपनी जगह पक्की कर रहे थे, जबकि लामिन यमाल केवल पांच महीने के एक नवजात शिशु थे.
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पाकिस्तान के सिंध में बच्चों में एचआईवी संक्रमण का बड़ा प्रकोप क्यों फैल रहा है?
'अल जज़ीरा' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची के एक सरकारी अस्पताल से जुड़े एचआईवी संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अब तक कम से कम 130 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे हैं. अधिकारियों का कहना है कि हाल के हफ्तों में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ी है.
सिंध के श्रम मंत्री सईद गनी के अनुसार, कुलसुम बाई वालिका (केबीवी) अस्पताल और उसके आसपास 10,500 से अधिक लोगों की जांच की गई, जिनमें 120 लोग संक्रमित मिले. कराची के लांधी इलाके में स्थित एक अन्य अस्पताल में हुई जांच के दौरान 10 और मामले सामने आए. केबीवी अस्पताल सिंध एम्प्लॉइज सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन (सेसी) के अधीन संचालित होता है, जो औद्योगिक और व्यावसायिक कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है.
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एसआईआर: मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब नागरिकता खोना नहीं, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से दोहराया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से बाहर किए जाने का यह अर्थ नहीं है कि उसने अपनी भारतीय नागरिकता भी खो दी है.
‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, अदालत ने कहा कि वह पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कर रहे निर्वाचन आयोग के पास किसी व्यक्ति की नागरिकता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरणों की सुनवाई प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
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"कोई शर्त नहीं": नारीवादी कार्यकर्ताओं ने जनगणना और परिसीमन से अलग तत्काल महिला आरक्षण लागू करने की मांग की
'द मूकनायक' की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के नारीवादी संगठनों और महिला नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए. उनका कहना है कि संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए न तो जनगणना का इंतजार जरूरी है और न ही परिसीमन की प्रक्रिया का. मौजूदा संसद और विधानसभाओं की संरचना में भी यह आरक्षण लागू किया जा सकता है.
राष्ट्रीय महिला आरक्षण गठबंधन (नेशनल कोएलिशन फॉर वीमेंस रिजर्वेशन) की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन और सीटों के विस्तार से जोड़ने की कोशिश करती है, तो देश की प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष ताकतें इसका संयुक्त रूप से विरोध करेंगी.
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अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए बदले वीज़ा नियम. पहले से रह रहे भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर?
'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, अमेरिका ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए लागू एक महत्वपूर्ण वीज़ा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (डी/एस)" व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है. इसके साथ ही अब विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि अनिश्चितकालीन न होकर निश्चित समय के लिए तय होगी. नए नियम 15 सितंबर से लागू होंगे और इनका सबसे अधिक असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो पहले से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं.
क्या थी "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस" व्यवस्था?
अमेरिका में पढ़ने जाने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्र एफ-1 (शैक्षणिक) वीज़ा पर जाते हैं, जबकि शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोग जे-1 वीज़ा का इस्तेमाल करते हैं. अब तक इन दोनों श्रेणियों के वीज़ाधारकों को "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस" यानी डी/एस के तहत प्रवेश दिया जाता था. इसका अर्थ था कि उनके रहने की कोई निश्चित अंतिम तारीख तय नहीं होती थी.
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प्रेस की स्वतंत्रता गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता की ढाल नहीं बन सकती: दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रेस की स्वतंत्रता का इस्तेमाल गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता, लोगों को डराने-धमकाने या ऐसी सामग्री फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता जो सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डाले. अदालत ने यह टिप्पणी दो आरोपियों को जमानत देते हुए की, जिन पर दो फ्रीलांस यूट्यूबर पत्रकारों के साथ मारपीट करने का आरोप है.
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, यह मामला 4 जुलाई 2025 का है. दिल्ली के सीमापुरी इलाके की एक अनधिकृत कॉलोनी में दो लोग, जो खुद को मीडिया से जुड़ा बता रहे थे, वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे. आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उनकी मोटरसाइकिल को नुकसान पहुंचाया और मोबाइल फोन सहित अन्य सामान छीन लिया. इस घटना के अगले दिन शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
‘द टेलीग्राफ’ के संपादकीय पर आधारित रिपोर्ट. राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति ने पिछले दशक में 96.5% विकास परियोजनाओं को मंज़ूरी दी; पर्यावरण संरक्षण बनाम औद्योगिक विकास पर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका.
‘रॉयटर्स’ में जसप्रीत कालरा की रिपोर्ट. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूत मांग से भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट; RBI के हस्तक्षेप और विनिमय दर पर विशेष आर्थिक रिपोर्ट.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अरुण शर्मा की रिपोर्ट. जम्मू के डोडा जिले में पुलिस झड़प के दौरान ऑटो चालक की मौत के बाद भद्रवाह में विरोध प्रदर्शन और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ की रिपोर्ट. न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के समर्थन में आवाज़ उठाई; दिल्ली दंगों और यूएपीए (UAPA) मामले के आरोपों की तुलना नेल्सन मंडेला के संघर्ष से की.
उमर राशिद की रिपोर्ट. उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के गवाह बलजिंदर सिंह को धमकाने के मामले में अजय मिश्रा टेनी और आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ की रिपोर्ट. जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन को मिला केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ अनशन कर रहे अमित भटनागर और 'चिता आंदोलन' का समर्थन.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ की रिपोर्ट. जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी और जापानी प्रणालियों को बाहर किए जाने के लिए भारत के ढुलमुल रवैये को जिम्मेदार ठहराया.
‘हरकारा डीप डाइव’ की विशेष चर्चा. संपादक निधीश त्यागी और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के बीच परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सोनम वांगचुक के आंदोलन पर गंभीर विश्लेषण.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार मिल रहे विदेशी सम्मान क्या भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं, या इनके पीछे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की कोई अलग कहानी छिपी है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी चर्चा करते हैं कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं, विदेशी पुरस्कारों, इंडियन डायस्पोरा की राजनीति और भारत के भीतर मौजूद चुनौतियों को किस नज़र से देखा जाना चाहिए. इस बातचीत में चर्चा के प्रमुख मुद्दे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहे विदेशी सम्मान. विदेशी पुरस्कारों पर उठे सवाल और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट. इंडियन डायस्पोरा की भूमिका और विदेश यात्राओं की राजनीति. भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और घरेलू चुनौतियां. विदेश नीति, कूटनीति और रणनीतिक हित. क्या विदेशी सम्मान घरेलू राजनीति को प्रभावित करते हैं? अगर आपको यह विश्लेषण महत्वपूर्ण लगा हो तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने पत्रकार शोभन सक्सेना से फ़ीफ़ा विश्व कप, ब्राज़ील की फुटबॉल संस्कृति, अर्जेंटीना से जुड़े विवाद, वीएआर, फ़ीफ़ा के बढ़ते व्यावसायीकरण और भारत में फुटबॉल की स्थिति पर विस्तार से बातचीत की. इस एपिसोड में जानिए. ब्राज़ील में फुटबॉल धर्म की तरह क्यों माना जाता है? आधुनिक फुटबॉल को दक्षिण अमेरिका ने कैसे बदला? अर्जेंटीना और वीएआर विवाद पर क्या हैं सवाल? क्या फ़ीफ़ामें राजनीति और कारोबार का असर बढ़ गया है? भारत और चीन फुटबॉल में पीछे क्यों रह गए? क्या फुटबॉल आज भी दुनिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा खेल है? अगर आपको यह विश्लेषण पसंद आए तो वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हरकारा को सब्सक्राइब करना न भूलें. #FIFAWorldCup #Football #Brazil #Argentina #Messi #VAR #FIFA #SportsPolitics #WorldCup #Harkara #HindiPodcast #NidheeshTyagi #ShobhanSaxena
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राम मंदिर ट्रस्ट में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी का मामला है, या इससे राम मंदिर आंदोलन, न्यायिक प्रक्रिया, राजनीतिक परियोजना और संस्थागत जवाबदेही पर भी बहस जुड़ती है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने प्रोफेसर अपूर्वानंद से इन्हीं सवालों पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में राम जन्मभूमि आंदोलन की राजनीतिक पृष्ठभूमि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले, राम मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही, जांच एजेंसियों पर भरोसा, आरएसएस की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर प्रो. अपूर्वानंद ने अपने विचार रखे. यह बातचीत समकालीन राजनीति, इतिहास और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाती है. अगर वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, शेयर करें और हरकारा को सब्सक्राइब करना न भूलें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. #RamMandir #Ayodhya #Harkara #DeepDive #Apoorvanand #NidheeshTyagi #Politics #SupremeCourt #RSS #BJP #IndianPolitics #HindiNews #CurrentAffairs