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गिरफ्तारी के दो महीने बाद, टीसीएस मामले की निदा खान को नासिक कोर्ट से मिली जमानत
उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक में सॉफ्टवेयर कंपनी के यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक धर्मांतरण के मामलों में से एक में स्थानीय अदालत ने सोमवार को टीसीएस कर्मचारी निदा खान को उनकी गिरफ्तारी के दो महीने बाद जमानत दे दी.
‘पीटीआई’ के अनुसार, खान को जमानत देने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (नासिक रोड कोर्ट) के. जी. जोशी ने, हालांकि, उनके सह-आरोपी दानिश शेख को ऐसी राहत देने से इनकार कर दिया. निदा खान ने मुख्य रूप से गर्भवती होने के आधार पर जमानत मांगी थी.
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महिला मतदाता का बढ़ता असर: चुनावी राजनीति की धुरी बनीं महिलाएं, लेकिन आर्थिक बराबरी अब भी दूर
इस वर्ष हुए चार प्रमुख विधानसभा चुनावों केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार केरल में महिलाओं का मतदान 80.86% रहा, जबकि पुरुषों का 75.01% था. असम में महिलाओं का मतदान 85.96% और पुरुषों का 84.80% दर्ज किया गया. तमिलनाडु में महिलाओं ने 85.76% मतदान किया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 83.57% रहा. पश्चिम बंगाल में महिलाओं की मतदान भागीदारी 93.24% रही, जबकि पुरुषों की 91.74% थी.
‘आर्टिकल 14’ के मुताबिक, ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब देशभर में राजनीतिक दल अपनी कल्याणकारी योजनाओं और चुनावी वादों का केंद्र महिलाओं को बना रहे हैं.
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नवल शुक्ल | तीजन बाई अंत तक अपने ही लोगों के बीच रहीं. इतना सम्मान और प्रसिद्धि मिलने के बाद भी उनकी सहजता कभी नहीं बदली.
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने हिंदी और आदिवासी लोककलाओं के विशेषज्ञ नवल शुक्ल के साथ पंडवानी की महान कलाकार तीजन बाई के जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से बातचीत की. रायपुर के एम्स में लंबी बीमारी के बाद तीजन बाई के निधन के साथ भारतीय लोककला ने एक ऐसे स्वर को खो दिया है, जिसने महाभारत की कथा को छत्तीसगढ़ की मिट्टी, बोली और अभिनय के जरिए विश्व मंच तक पहुंचाया.
नवल शुक्ल ने बताया कि वर्ष 1982-83 में, जब छत्तीसगढ़ अविभाजित मध्य प्रदेश का हिस्सा था, तब पंडवानी को व्यवस्थित रूप से खोजने और उसे बड़े मंच तक पहुंचाने की शुरुआत हुई. उन्होंने याद किया कि गांव-गांव खोजबीन के दौरान एक छोटे से गांव में पहली बार तीजन बाई से मुलाकात हुई.
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‘राम मंदिर का पास जारी करने वाले बिचौलिए लखपति बन गए’: चढ़ावा चोरी पर करपात्री महाराज
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े और दिसंबर 1992 की कारसेवा में भाग लेने वाले अयोध्या के एक प्रमुख संत, करपात्री महाराज ने अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों, विशेष रूप से चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ आवाज उठाई है.
कारसेवक वे हिंदू स्वयंसेवक थे जिन्हें विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैसे संगठनों द्वारा लामबंद किया गया था, जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 को 16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था.
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मध्य प्रदेश: कानून में संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड में पहली बार हिंदू सदस्य शामिल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है, जिसमें दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत गठित यह नया बोर्ड, हिंदू सदस्यों वाला देश का पहला राज्य स्तरीय वक्फ बोर्ड है. इस संबंध में रविवार को एक राजपत्र अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) जारी की गई, जिसके तहत सनवर पटेल को 10 सदस्यीय मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को बोर्ड में हिंदू सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है.
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नाटो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर ट्रंप ने इटली की मेलोनी को फिर उकसाया
पिछले महीने मेलोनी ने ट्रंप पर उनके बारे में एक मनगढ़ंत कहानी बनाने का आरोप लगाया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इतालवी टीवी चैनल को बताया था कि मेलोनी ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए उनसे "भीख मांगी" थी.
‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, इस सप्ताह तुर्की में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं के शामिल होने की संभावना के बीच, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मेलोनी की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह ट्रंप की तरफ ऊपर देख रही हैं. इस तस्वीर के साथ ट्रंप ने कैप्शन लिखा, "निरोधक आदेश की ज़रूरत है" (यानी मेलोनी को उनसे दूर रहने के कानूनी आदेश की ज़रूरत है).
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एआई की ओर झुकाव और कमजोर मांग के कारण भारतीय आईटी कंपनियों की पहली तिमाही सुस्त रहने के आसार
‘एआई’ आधारित प्राइसिंग के दबाव, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (विशेषकर मध्य पूर्व का संकट) और ग्राहकों द्वारा कम खर्च किए जाने के कारण भारत के 315 बिलियन डॉलर के आईटी क्षेत्र की पहली तिमाही काफी सुस्त रहने की उम्मीद है. ‘रॉयटर्स’ के लिए हरिप्रिया सुरेश और भरत राजेश्वरन की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर मजबूत मानी जाने वाली इस तिमाही (अप्रैल-जून) के धीमे रहने से बाजार में सुधार (रिकवरी) की उम्मीदों को झटका लगा है.
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एसआईआर: चार राज्यों की मतदाता सूची से 22 लाख से अधिक नाम हटाए गए
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने रविवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की प्रारूप मतदाता सूचियां जारी कर दीं. इन चारों राज्यों में कुल 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. यह संख्या इन राज्यों की पहले की मतदाता सूची का करीब 6.1 प्रतिशत है.
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, ये चारों राज्य एसआईआर के तीसरे चरण का हिस्सा हैं. निर्वाचन आयोग देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है.
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आधिकारिक दस्तावेजों से परे, नागरिक होने और इस देश से जुड़ाव का अधिकार
24 जून 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के एक अधिकारी ने एक ऐसा बयान दिया जिसने नागरिकता को लेकर नई बहस छेड़ दी. अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट "यात्रा का दस्तावेज" है, "नागरिकता का दस्तावेज" नहीं. इसके बाद सवाल उठा कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर कौन-सा दस्तावेज है? लेकिन असली मुद्दा केवल पासपोर्ट नहीं, बल्कि यह है कि भारत में नागरिक होने का अर्थ क्या है और नागरिकता तय करने का आधार क्या होना चाहिए.
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श्रवण गर्ग | जब हुकूमत ही अपनी जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है, तो फिर जवाबदेही की उम्मीद किससे की जाए?
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर उठे विवाद पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत निधीश त्यागी ने देश के प्रमुख मंदिरों के उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों की तुलना से की. उन्होंने राम मंदिर, माता वैष्णो देवी, तिरुमला वेंकटेश्वर, शिरडी साईं बाबा और सांवलिया सेठ मंदिर में प्रति श्रद्धालु दान और चढ़ावे के अनुमानित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग सार्वजनिक स्रोतों से जुटाए गए इन आंकड़ों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि का दावा नहीं किया जा रहा है.
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नितिन नवीन की सीट से चुनावी पदार्पण की तैयारी में प्रशांत किशोर, क्यों यह जन सुराज के लिए 'मेक ऑर ब्रेक' साबित हो सकता है?
बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी (जेएसपी) का खाता नहीं खुलने के आठ महीने बाद पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अपना पहला चुनाव लड़ सकते हैं. संभावना है कि वह 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे.
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परकला प्रभाकर | एसआईआर ‘चंद लोगों के लोकतंत्र’ का मार्ग प्रशस्त कर सकता है
मतदाता सूची का "विशेष गहन पुनरीक्षण” (एसआईआर) नागरिकों के दो वर्ग तैयार कर देगा—एक वे जो वोट दे सकते हैं और दूसरे वे जो वोट नहीं दे सकते. मौजूदा गति को देखते हुए, अनुमानतः 16 करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है. एसआईआर वास्तव में देश के कुछ हिस्सों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर कर रहा है," अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषक परकला प्रभाकर ने हैदराबाद के डॉ. बी.आर. अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय में पी.वी. नरसिम्हा राव मेमोरियल व्याख्यान देते हुए यह बात कही.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'आर्टिकल 14' की रिपोर्ट. केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों में महिलाओं की रिकॉर्ड वोटिंग; राजनीति की धुरी बनने और कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद महिला श्रम बल और आर्थिक बराबरी में भारत अभी भी काफी पीछे.
'पीटीआई' की रिपोर्ट. नासिक की सॉफ्टवेयर कंपनी में यौन उत्पीड़न और धार्मिक धर्मांतरण मामले में टीसीएस कर्मचारी निदा खान को दो महीने बाद कोर्ट से मिली जमानत; सह-आरोपी दानिश शेख की याचिका खारिज.
'हरकारा डीप डाइव' की रिपोर्ट. निधीश त्यागी और लोककला विशेषज्ञ नवल शुक्ल के बीच पंडवानी की महान कलाकार पद्मविभूषण तीजन बाई के जीवन और सांस्कृतिक विरासत पर विशेष चर्चा; रायपुर एम्स में निधन के बाद लोककला के एक बड़े युग का अंत.
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट. AI आधारित प्राइसिंग, मिडिल ईस्ट संकट और क्लाइंट्स द्वारा कम खर्च करने से भारत के 315 बिलियन डॉलर के आईटी सेक्टर की पहली तिमाही सुस्त रहने का अनुमान; साल 2026 में निफ्टी आईटी इंडेक्स 28% तक टूटा.
'द वायर' और 'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट. अयोध्या के प्रमुख संत करपात्री महाराज का राम मंदिर ट्रस्ट पर बड़ा हमला; चंपत राय के इस्तीफे, भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई (CBI) जांच और वीआईपी पास के नाम पर दलाली का सनसनीखेज खुलासा.
'पीटीआई' की रिपोर्ट. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देश में पहली बार राज्य वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों (मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव) को शामिल कर बोर्ड का पुनर्गठन किया; वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत बड़ी कार्रवाई.
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीर पोस्ट कर फिर उकसाया; रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने संबंधों को अहम बताया, विपक्ष ने ट्रंप को 'बुली' कहा.
'स्क्रोल' की रिपोर्ट. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण में ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम से 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे; विपक्ष ने लगाया चुनावी प्रक्रिया पर सवाल.
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‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर उठे विवाद पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत निधीश त्यागी ने देश के प्रमुख मंदिरों के उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों की तुलना से की. उन्होंने राम मंदिर, माता वैष्णो देवी, तिरुमला वेंकटेश्वर, शिरडी साईं बाबा और सांवलिया सेठ मंदिर में प्रति श्रद्धालु दान और चढ़ावे के अनुमानित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग सार्वजनिक स्रोतों से जुटाए गए इन आंकड़ों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि का दावा नहीं किया जा रहा है. इसी संदर्भ में श्रवण गर्ग ने कहा कि असली सवाल केवल चढ़ावे की राशि का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास का है. उन्होंने पूछा कि यदि राम मंदिर में करोड़ों लोग दर्शन के लिए पहुंचे हैं, तो प्रति श्रद्धालु औसत चढ़ावा अन्य प्रमुख मंदिरों की तुलना में इतना कम क्यों दिखाई देता है. उनके अनुसार यदि दान और चढ़ावे को लेकर किसी तरह की अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे. श्रवण गर्ग ने कहा कि इस पूरे विवाद को केवल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने बद्रीनाथ-केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, तिरुपति, सबरीमाला और अन्य बड़े धार्मिक संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कहीं भी दान, प्रबंधन या पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं, तो वहां भी समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए. उनके अनुसार यह बहस किसी एक मंदिर की नहीं, बल्कि देशभर के धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जनता के विश्वास की है. चर्चा के दौरान श्रवण गर्ग ने राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर और धार्मिक आस्था लंबे समय तक राजनीति के प्रमुख विषय रहे हैं, तो ऐसे मामलों में केवल ट्रस्ट या स्थानीय प्रबंधन ही नहीं, बल्कि सत्ता से भी जवाबदेही पूछी जानी चाहिए. उनका कहना था कि लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार और सार्वजनिक संस्थाओं दोनों से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा रखने का अधिकार है. एपिसोड के अंत में श्रवण गर्ग ने कहा कि मूल प्रश्न केवल यह नहीं है कि कितना चढ़ावा आया, बल्कि यह भी है कि श्रद्धालुओं के दान का उपयोग किस प्रकार हुआ और उसकी जवाबदेही किसके पास है. स्रोत: https://www.tirumala.org https://www.sai.org.in https://www.maavaishnodevi.org https://www.etvbharat.com https://newsarenaindia.com/states/shirdi-sai-sansthan-gets-rs-660-cr-donations-in-2025-26/80238 https://www.businesstoday.in/india/story/27-kg-gold-3424-kg-silver-massive-jump-in-pilgrim-donations-for-mata-vaishno-devi-shrine-in-5-yrs-468067-2025-03-16 https://theprint.in/india/j-k-mata-vaishno-devi-shrine-records-massive-increase-in-pilgrim-donations-in-5-years/2549894/ https://newsarenaindia.com/states/ayodhya-ram-mandir-draws-15-cr-devotees-donations-cross-500-cr/79470 https://www.ndtv.com/india-news/pm-worried-about-broken-system-ex-ias-nripendra-mishra-on-ram-temple-row-11656117 https://www.ndtv.com/india-news/1-kg-gold-biscuit-rs-23-crore-cash-rajasthans-chittorgarh-sanwaliya-seth-temple-gets-record-donations-7186219 https://navbharattimes.indiatimes.com/state/rajasthan/chittorgarh/shri-sanwaliya-seth-temple-mandafiya-record-cash-donation-51-crore/articleshow/125640640.cms
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में है — लेकिन जश्न कहीं दिखाई नहीं दे रहा. हरकारा डीपडाइव की इस कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से निधीश त्यागी की बातचीत उन सवालों पर, जो इस समय संघ को घेरे हुए हैं. इस बातचीत में: - आम नागरिक से नागरिकता के 11-12 कागज़ मांगे जाते हैं, तो 100 साल पुराने संगठन से रजिस्ट्रेशन और बैलेंस शीट क्यों नहीं? - कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे के सवाल और उन पर हुआ पलटवार - राम जन्मभूमि ट्रस्ट घोटाले पर एक महीने बाद आया दत्तात्रेय होसबाले का बयान — "एंटी-हिंदू, एंटी-नेशनल कॉन्सपिरेसी" कहने के मायने क्या हैं? - 10 से 12 जुलाई तक बेलगावी में होने वाली संघ की प्रांत प्रचारक बैठक का एजेंडा - बीजेपी के 3 करोड़ से 14-18 करोड़ सदस्य कैसे हो गए, जबकि संघ की सदस्य संख्या 2013 से वहीं की वहीं है? - क्या यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी और संघ के बीच सुप्रीमेसी के संघर्ष की अभिव्यक्ति है? श्रवण गर्ग का कहना है — संघ अपने संकट को देश का संकट, हिंदू समाज का संकट बनाना चाहता है. निष्कर्ष हम नहीं देंगे. तथ्य आपके सामने हैं — फ़ैसला आप कीजिए. हरकारा — शोर कम, रोशनी ज़्यादा. 🔔 चैनल सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं 🌐 वेबसाइट: harkaraonline.com 📩 सहयोग और सुझाव के लिए हमसे जुड़ें चैप्टर्स: 00:00 परिचय — संघ, संविधान और खड़गे के सवाल 02:00 संघ के 100 साल और संकटों की फ़ेहरिस्त 05:45 प्रियांक खड़गे: रजिस्ट्रेशन और चंदे का हिसाब 06:53 राम जन्मभूमि घोटाला — एफ़आईआर से होसबाले के बयान तक 11:00 बीजेपी बनाम संघ: सुप्रीमेसी की लड़ाई 12:06 बेलगावी बैठक: 10-12 जुलाई का एजेंडा 16:54 आंकड़ों की पड़ताल: संघ, बीजेपी और कांग्रेस की सदस्यता 21:04 दो आरएसएस — एक सत्ता में, एक बाहर 26:02 "एंटी-हिंदू कॉन्सपिरेसी" कौन करेगा? 33:08 क्या संघ को भंग कर देना चाहिए? 34:09 समापन — ज़िम्मेदारी किसकी?
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


हरकारा डीप डाइव के इस विशेष एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ हिंदी और आदिवासी लोककलाओं के विशेषज्ञ नवल शुक्ल, पंडवानी की महान कलाकार तीजन बाई के जीवन, संघर्ष, कला और विरासत पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं. इस बातचीत में नवल शुक्ल बताते हैं कि वर्ष 1982-83 में पहली बार तीजन बाई से उनकी मुलाकात कैसे हुई, किस तरह उन्हें गांव से निकालकर भारत भवन, भोपाल के मंच तक लाया गया और कैसे पंडवानी को राष्ट्रीय पहचान मिली. वे पंडवानी की परंपरा, उसकी वेदमती और कापालिक शैली, महाभारत की लोक परंपरा तथा तीजन बाई की अद्भुत मंचीय प्रस्तुति पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हैं. एपिसोड में हबीब तनवीर, भारत भवन, अशोक वाजपेयी और छत्तीसगढ़ की लोककलाओं के विकास में उनकी भूमिका पर भी चर्चा होती है. साथ ही यह भी समझने की कोशिश की गई है कि तीजन बाई के बाद पंडवानी की परंपरा किस दिशा में बढ़ रही है और इस विरासत को संरक्षित करने के लिए डिजिटल दस्तावेजीकरण कितना जरूरी है.