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टी. एम. कृष्णा | इसीलिए अंबेडकर ने ‘मनुस्मृति’ को जला दिया था
‘द टेलीग्राफ’ में प्रकाशित टी.एम. कृष्णा के इस लेख में भारतीय समाज में मनुस्मृति की ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है.
लेख के अनुसार, मनुस्मृति हिंदू धर्मशास्त्रों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है, जो मुख्य रूप से सामाजिक-संरचनात्मक, कानूनी और नैतिक मानदंडों की व्याख्या करता है. धर्मशास्त्रों की पूरी श्रृंखला में मनुस्मृति को इसलिए सबसे प्रमुख स्थान मिला, क्योंकि मध्यकालीन भारत से लेकर बाद के ऐतिहासिक लेखनों में इसका सबसे अधिक संदर्भ दिया गया और इस पर सर्वाधिक टीकाएं (व्याख्याएं) लिखी गईं.
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अहमदाबाद में एनी फ्रैंक और मलाला की किताबें पढ़ रहे पाठकों से कहा गया: ‘साबित करो कि तुम मुस्लिम नहीं हो’
अहमदाबाद पुलिस एक मामले में तीन लोगों से पूछताछ कर रही है. मामला यह है कि गुरुवार को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कथित समर्थकों की भीड़ ने एक पार्क में होलोकॉस्ट (नरसंहार) की पीड़िता एनी फ्रैंक की 'द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' और पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई की 'आई एम मलाला' पढ़ रहे किताब प्रेमियों के एक समूह से बदसलूकी और मारपीट की थी.
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, शहर के एक निजी स्कूल की रीडिंग लिस्ट (पठन सूची) से इन दोनों किताबों को जबरन हटाए जाने के विरोध में पुस्तक प्रेमी वस्त्रापुर गार्डन में मौन वाचन (रीडिंग) प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे.
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बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज में एक दिन में 10 नवजातों की मौत, तीन हफ्तों में 60 की जान गई
भारत में युवाओं द्वारा किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन केवल परीक्षाओं में धांधली या पेपर लीक के खिलाफ आक्रोश मात्र नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था में गहराई से बैठी एक बड़ी संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करते हैं. 15 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के लगभग 40% स्नातकों का बेरोजगार होना एक बेहद चिंताजनक स्थिति है. हालाँकि, इस बेरोजगारी के आंकड़ों के पीछे एक अदृश्य और कम चर्चित आर्थिक लागत छिपी हुई है—युवाओं का अपने जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों को परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन करने और परिणाम का इंतजार करने में बिता देना. अर्थशास्त्र की भाषा में इस स्थिति को ‘इंतज़ार की स्थिति’ कहा जाता है.
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एस. वाई. कुरैशी | लोकसभा की संख्या 543 ही क्यों रहनी चाहिए
13 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के कई दिन बाद भी मानसून सत्र को औपचारिक रूप से सत्रावसान नहीं किया गया है. इससे अटकलें तेज हैं कि संसद को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन पर फिर से बुलाया जा सकता है. चाहे ऐसा हो या नहीं, एक महत्वपूर्ण सवाल अब सामने है: क्या परिसीमन का मतलब अनिवार्य रूप से लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाना है?
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बदमाशों ने मणिपुर में भाजपा विधायक के आवास पर बम विस्फोट किया
मणिपुर के इम्फाल वेस्ट जिले में अज्ञात बदमाशों ने शुक्रवार (28 अगस्त 2026) तड़के भारतीय जनता पार्टी के विधायक सपम रंजन सिंह के आवासीय परिसर में बम विस्फोट किया.
‘पीटीआई’ के अनुसार, इस विस्फोट में कोई घायल नहीं हुआ, जिससे जमीन पर एक छोटा सा गड्ढा बन गया और परिसर की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा. सिंह ने पत्रकारों से कहा, "आज तड़के लगभग 1.30 बजे मेरे आवास के पिछले हिस्से में एक ज़ोरदार विस्फोट की आवाज सुनाई दी, जिससे पूरा घर कांप गया. पुलिस को सूचित किया गया और उन्होंने मेरे स्थान पर आकर निरीक्षण किया."
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महाराष्ट्र में मवेशी ले जा रहे दलित व्यक्ति को ‘गौ रक्षकों’ ने जबरन गोबर खिलाया; अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं
महाराष्ट्र के जालना जिले से खरीदे गए एक बैल को बेचने की कोशिश करने का आरोप लगाकर एक दलित व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और उसे जबरन मवेशी का गोबर खिलाने के आरोप में संदिग्ध छह 'गौ रक्षकों' पर मामला दर्ज किया गया है. ये सभी बजरंग दल के सदस्य बताए जाते हैं. पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि इन गौ रक्षकों ने उसके साथ यात्रा कर रहे उसके 11 वर्षीय बेटे को भी अपमानित करने की धमकी दी.
अधिकारियों ने बताया कि हालांकि यह घटना मई 2026 में हुई थी, लेकिन पीड़ित ने गुरुवार (27 अगस्त 2026) को तब प्राथमिकी दर्ज कराई, जब कथित हमले का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया. छह आरोपियों की पहचान वेंकटेश भगत, अर्जुन सिंह, शिवराज पिछाड़े, सोमेश पाटिल, यश सरकारते और रितेश देशमुख के रूप में की गई है.
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कंधा पकड़ना यौन उत्पीड़न नहीं है: बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी महिला का कंधा पकड़ना, उसे दबाना और उसे पीछे धकेलना, भले ही इससे उसे लज्जा महसूस हुई हो, आईपीसी की धारा 354ए के तहत यौन उत्पीड़न के दायरे में नहीं आता है, क्योंकि इस कृत्य में यौन मंशा (सेक्शुअल इंटेंट) या प्रस्ताव का अभाव था.
चिन्मय गायकवाड़ के अनुसार, न्यायमूर्ति अभय मंत्री की एकल पीठ ने गिरीश नगोंडा पाटिल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को आंशिक रूप से रद्द कर दिया. यह प्राथमिकी एक ग्राम पंचायत कार्यालय में कार्यरत महिला खंड विकास अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई थी. शिकायतकर्ता ने कहा कि पाटिल ने कार्यालय में प्रवेश किया, उनसे झगड़ा किया, दस्तावेज फाड़े, और फिर उनका दाहिना कंधा पकड़कर दबाया व उन्हें पीछे धकेल दिया. उन्होंने कहा कि इस आचरण से उन्हें लज्जा महसूस हुई.
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पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी के संस्मरण में मोदी, आरएसएस और चीन से जुड़े अंशों में कटौती की मांग की थी
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (पीआरएचआई) के साथ किताब का सौदा इसलिए टूट गया क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक स्रोत - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), और चीनी घुसपैठ से जुड़े संदर्भों में बदलाव या उन्हें हटाने से इनकार कर दिया था. दरअसल, 79 वर्षीय सोनिया गांधी का रुख था कि यह उनकी कहानी है और अपने जीवन के वृत्तांत में किसी भी तरह के फेरबदल की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता.
सुनेत्रा चौधरी के अनुसार, पेंगुइन की एक छाप (इंप्रिंट) 'अल्फ्रेड ए नोफ' द्वारा इस संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' को 10 नवंबर को दुनिया भर में जारी किए जाने की उम्मीद है. हालांकि हार्परकॉलिन्स ने पूछे जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन वह भारत में इस किताब को प्रकाशित और वितरित करने के समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है.
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भारत में हर 3 में से 1 जेन जी युवा काम से बाहर. वजह सिर्फ कौशल की कमी नहीं
भारत की युवा आबादी को अक्सर देश की सबसे बड़ी ताकत बताया जाता है. लेकिन रोजगार और शिक्षा से जुड़े आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं. ‘द क्विंट’ में प्रकाशित अपने लेख में औनिंद्यो चक्रवर्ती ने सरकारी आंकड़ों और श्रम सर्वेक्षणों के आधार पर सवाल उठाया है कि आखिर भारत की जेन जी पीढ़ी का बड़ा हिस्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से बाहर क्यों है. उनका तर्क है कि समस्या केवल युवाओं के पास कौशल की कमी की नहीं, बल्कि रोजगार के सीमित अवसरों, सामाजिक बाधाओं और खासकर महिलाओं के खिलाफ मौजूद संरचनात्मक भेदभाव की भी है.
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'उसके बिना घर, घर जैसा नहीं लगता'. बांग्लादेश भेजी गई बंगाल की मुस्लिम महिला की वापसी का इंतजार
एक महीने पहले नवी मुंबई पुलिस द्वारा कथित तौर पर "घुसपैठिया" बताकर बांग्लादेश भेज दी गई पश्चिम बंगाल की 40 वर्षीय साहिदा फकीर की गैरमौजूदगी में उनका परिवार बिखरने की कगार पर है. ‘मकतूब मीडिया’ में प्रकाशित गजाला अहमद की रिपोर्ट के मुताबिक, साहिदा के पति जुम्मन फकीर लगातार अपनी पत्नी की भारत वापसी का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी मामले में गृह मंत्रालय से कार्रवाई करने को कहा है.
साहिदा को पुलिस ने नवी मुंबई में हिरासत में लिया था. परिवार का दावा है कि उनके भारतीय नागरिक होने से जुड़े कई सरकारी दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया. अब उनके पति और दो बेटे भारत में हैं, जबकि साहिदा बांग्लादेश के सतखीरा में एक स्थानीय परिवार के यहां रह रही हैं.
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आकार पटेल | मोहन भागवत का भाषण नहीं, भारत का 12 साल का रिकॉर्ड ज्यादा सवालों के घेरे में है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने लेखक, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के साथ न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम और उसके विरोध के बहाने भारत की छवि, हिंदुत्व, प्रवासी भारतीयों और वैश्विक राजनीति पर चर्चा की.
चर्चा का केंद्र न्यूयॉर्क का वह दृश्य रहा, जहां एक तरफ मोहन भागवत को सुनने के लिए समर्थक जुटने वाले थे, वहीं दूसरी तरफ उनके कार्यक्रम का विरोध करने वाले समूह सक्रिय थे. निधिश त्यागी ने इसे "दो भारतों" के आमने-सामने होने के रूप में रखा. एक भारत आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति से अपनी पहचान जोड़ता है, जबकि दूसरा भारत बहुलतावादी, समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की बात करता है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द टेलीग्राफ' में टी.एम. कृष्णा का विश्लेषण: भारतीय समाज, जाति व्यवस्था और राजनीति में 'मनुस्मृति' का प्रभाव, सवर्णों की मानसिकता और डॉ. आंबेडकर के विरोध पर विस्तृत रिपोर्ट.
'टेलीग्राफ वेब डेस्क' की रिपोर्ट: अहमदाबाद में एनी फ्रैंक और मलाला यूसुफजई की किताबें पढ़ रहे युवाओं पर बजरंग दल-वीएचपी समर्थकों का हमला, पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया.
'स्क्रोल' की रिपोर्ट: मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अगस्त के दौरान 60 नवजातों की मौत, 10 मौतें एक ही दिन में; पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी का विश्लेषण: क्या परिसीमन से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी है? 543 सीटों को बरकरार रखते हुए संघीय संतुलन और महिला आरक्षण पर विस्तृत रिपोर्ट.
'योहान वर्गीज़' की रिपोर्ट: महाराष्ट्र के जालना में दलित ड्राइवर से मारपीट, जबरन मवेशी का गोबर खिलाया; बजरंग दल के 6 कथित सदस्यों पर एफआईआर दर्ज.
'पीटीआई' की रिपोर्ट: मणिपुर के इम्फाल वेस्ट में बीजेपी विधायक और सरकारी प्रवक्ता सपम रंजन सिंह के घर पर तड़के बम विस्फोट, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने की कड़ी निंदा.
'चिन्मय गायकवाड़' की रिपोर्ट: बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; महिला का कंधा पकड़ना और पीछे धकेलना यौन उत्पीड़न (IPC 354A) नहीं, अदालत ने यौन मंशा के अभाव को माना आधार.
'सुनेत्रा चौधरी' की रिपोर्ट: सोनिया गांधी और पेंगुइन रैंडम हाउस के बीच किताब का सौदा रद्द, पीएम मोदी, आरएसएस और चीनी घुसपैठ से जुड़े अंश हटाने से सोनिया गांधी का इनकार.
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आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं. संघ इस दौरे को "वसुधैव कुटुम्बकम" के संदेश से जोड़ रहा है, लेकिन इस दौरे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ विस्तार से चर्चा की कि अमेरिका में आरएसएस और उससे जुड़े संगठन किस तरह काम करते हैं. हिंदू स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका, हिंदू पहचान की राजनीति, हिंदूफोबिया, जाति भेदभाव और अमेरिकी राजनीति में भारतीय संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दों पर इस बातचीत में गंभीर चर्चा हुई. क्या मोहन भागवत का यह दौरा सिर्फ प्रवासी भारतीयों और हिंदू समुदाय से संवाद का कार्यक्रम है? या फिर इसके पीछे अमेरिका में आरएसएस के सामाजिक और वैचारिक नेटवर्क को मजबूत करने की बड़ी रणनीति है? देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और अजित साही की पूरी बातचीत. #MohanBhagwat #RSS #America #HarkaraDeepDive #NidheeshTyagi #AjitSahi #IndianDiaspora #HinduPolitics #Hindutva #IndianPolitics
PM CARES Fund में करीब ₹8,450 करोड़ जमा हैं, लेकिन 2024-25 में सिर्फ करीब ₹88 लाख खर्च किए गए. आखिर आपदा के लिए बनाए गए इस फंड का पैसा खर्च क्यों नहीं हो रहा? हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ RTI और Transparency Activist अंजलि भारद्वाज ने PM CARES Fund, पारदर्शिता, जवाबदेही और फंड के इस्तेमाल से जुड़े अहम सवालों पर बात की. हरकारा - शोर कम, रोशनी ज्यादा.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने लेखक, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के साथ न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम और उसके विरोध पर चर्चा की. क्या न्यूयॉर्क में आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति के सामने एक दूसरा, बहुलतावादी और समावेशी भारत खड़ा है? प्रवासी भारतीय, जोरान ममदानी, भारत की ग्लोबल इमेज और मोहन भागवत के ग्लोबल आउटरीच पर देखिए पूरी बातचीत.