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मणिपुर हिंसा: तीन साल बाद, न्याय और शांति सिर्फ ‘शब्द’
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चौराहे पर इंडिया गठबंधन: क्या जनता पार्टी जैसा प्रयोग संभव है?
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यूपी में मुस्लिम धर्मगुरु को मारपीट के बाद ट्रेन से बाहर फेंका गया; पोस्टमार्टम में सभी पसलियों में फ्रैक्चर की पुष्टि
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बंगाल की 96 सीटों पर नज़र: इनमें से 48 में मतदान गिरा और एसआईआर के तहत 28% नाम हटाए गए
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मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन और उसके चार शावकों की मौत, कुत्तों से फैलने वाले वायरस पर संदेह
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बंगाल में सत्ता की जंग या सक्सेशन बैटल? अमित शाह क्यों केंद्र में
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अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों में अंधराष्ट्रवाद का प्रवेश; विशेषज्ञों ने एनसीईआरटी की सैन्यवादी सामग्री पर उठाए सवाल
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हॉर्मुज़ के ठप होने से वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच भारत-चीन की तेल पर टक्कर, बढ़ सकती हैं कीमतें!
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बंगाल: केंद्र के कर्मचारी ही कराएंगे वोटों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं मानी टीएमसी की मांग
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‘छिपे हुए शुक्राणुओं’ की खोज: नई तकनीक ने उन पुरुषों को दी उम्मीद जिन्हें ‘बांझ’ घोषित कर दिया गया था
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ममता का छेड़छाड़ का आरोप: मतदान और गिनती के बीच, स्ट्रॉन्ग रूम में कैसे रखी जाती हैं ईवीएम
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हेट स्पीच: अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट विवाद और मुसलमानों की भागीदारी पर उठते सवाल
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बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने हिमंता की टिप्पणियों पर भारत के दूत को किया तलब, नाराजगी जताई
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नागरिकता की रेखाओं को फिर से खींच रहा है बंगाल का ‘एसआईआर’
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जबलपुर बोट हादसा: आखिरी पल तक कलेजे से चिपका रहा मासूम, मां की बांहों में मिला शव; 9 की मौत
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श्रवण गर्ग | मोदी के डर से मुक्त होने का क्या यही सबसे अच्छा अवसर नहीं है ?
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ईडी ने कोई आपत्ति नहीं की, दिल्ली की अदालत ने आई-पैक निदेशक विनेश चंदेल को जमानत दी
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बंगाल के चुनावी रण में केंद्रीय बलों की ज्यादती के आरोप और राजनीतिक तनाव
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ममता का दावा, ‘तृणमूल 226 से ज्यादा सीटें जीतेगी’, टीवी चैनलों को एग्जिट पोल दोपहर 1.08 बजे भाजपा ऑफिस से भेजे गए थे
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असम सीएम की पत्नी पर टिप्पणी मामला: पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
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विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत छह स्थान फिसला, पाकिस्तान पांच पायदान ऊपर चढ़ा
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छत्तीसगढ़ में पेसा कानून का ग़लत इस्तेमाल: आदिवासियों को सशक्त करने वाला कानून बना ईसाइयों के ख़िलाफ़ हथियार
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पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 92% मतदान, लेकिन वजह बनी घटती मतदाता संख्या
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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.34 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा
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“लग रहा है कि घर में बेघर हो गए हम”: मतदान के लिए व्हीलचेयर तैयार रखी थी, लेकिन सूची से नाम ही हटा दियापूरा पढ़ें/ देखें
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‘एनएचआरसी’ मुसलमानों पर हो रहे हमलों की अनदेखी कर रहा है और उन मामलों में दखल दे रहा है जो उससे संबंधित नहीं हैं: इलाहाबाद हाई कोर्ट
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ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- परमाणु समझौता होने तक जारी रहेगी नौसैनिक नाकेबंदी
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योगेंद्र यादव: पश्चिम बंगाल चुनाव में अल्पसंख्यकों को बाहर करने की साज़िश
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‘हम बनाम वे’ की मानसिकता से पैदा होती है हेट स्पीच; कानूनों का खराब प्रवर्तन ‘हेट क्राइम्स’ की वजह: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कार्ति चिदंबरम के मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग, शराब कंपनी से कथित रिश्वत का आरोप
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हरकारा डीप डाइव | पत्रकार सुमित झा| क्या गरीबी का संबंध जाति से है? तेलंगाना सर्वे ने दिया जवाब!
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‘मेड इन इंडिया’ संकट: बंगाल चुनाव में ‘एसआईआर’ ने महानगरों में बढ़ाई घरेलू सहायकों की किल्लत
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“वोट देने के लिए भरोसा नहीं, लेकिन चुनाव कराने के लिए उन पर पूरा भरोसा है” : बंगाल के चुनाव अधिकारी जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए
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औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर मार्च में 5 महीने के निचले स्तर 4.1% पर पहुँची; पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहला महीना
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ट्रंप के इतने करीब कैसे पहुँचा बंदूकधारी?
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किसका पलड़ा भारी है दो माह से जारी जंग के बाद..
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डीप डाइव विद श्रवण गर्ग | ममता की हार का मतलब देश के लिए क्या होगा?
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बिरयानी के बाद तरबूज खाया और फिर 4 मौतें: मुंबई में एक त्रासदी जो 12 घंटों के भीतर घटित हुई
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“लॉरेंस ही कर्म है”: मोदी के भारत का गैंगस्टर जो आइकन बन गया
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राघव चड्ढा और बड़ी समस्या: नेता-केंद्रित दलों की संरचनात्मक कमजोरी
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द ग्रेट भाजपा वाशिंग मशीन
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पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान: 92% वोटिंग के पीछे क्या है असली कहानी?
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आप में फूट: राघव चड्ढा ने बगावत की, 6 सांसदों के साथ भाजपा में शामिल, मित्तल को 10 दिन पहले ईडी ने घेरा था
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‘इन तर्कों को ट्रिब्यूनल के समक्ष रखें’: सुप्रीम कोर्ट का उन लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार, जिनके नाम बंगाल ‘एसआईआर’ के बाद हटाए
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भाजपा की योजनाओं पर हिटलर की छाप: बेबी ने ‘एसआईआर’ को हिंदुत्व की बड़ी योजना का हिस्सा बताया
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एक अलग आवाज़: बंगाल बोल रहा है, भारत को सुनना चाहिए
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होर्मुज़ में बारूदी सुरंगें बिछाने वालों को देखते ही गोली मारने का ट्रम्प का आदेश
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शमशेरगंज एक सैंपल: मतदान से पहले ही ‘एसआईआर’ ने बदला चुनावी समीकरण, भाजपा को वोटिंग से पूर्व लाभ
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‘तृणमूल के गुंडों’ पर सीआरपीएफ की कार्रवाई? बांग्लादेश का पुराना वीडियो गलत दावे के साथ वायरल
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बंगाल चुनाव: भाजपा ने राहुल गांधी के वीडियो क्लिप का इस्तेमाल कर उन्हें धन्यवाद दिया!
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परिसीमन की राजनीति:उत्तर-दक्षिण असंतुलन और कंपनसेशन पॉलिटिक्स
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लाखों मतदाताओं का छूटना हमारे लोकतंत्र पर कलंक है’: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत
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ऑनलाइन गेमिंग पर सरकार का ‘कंट्रोल मोड’: नए नियम लागू, पैसे वाले गेम्स पर सख्ती
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क्या गरीबी सच में ‘जातिहीन’ है? तेलंगाना सर्वे ने ‘समान हालात’ की सदियों पुरानी दलील तोड़ी
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ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
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और तो और ये साहब भी यथावत हैं, बल्कि जज साहब का तबादला हो गया!
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भारतीय मेडिकल छात्र ने एआई से बनाई ‘मागा गर्ल’, अमेरिकी मर्दों को ठगकर कमाए हज़ारों डॉलर
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जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
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2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप रद्द किए
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लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
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मोदी के भाषण और आचार संहिता पर विवाद, 700 नागरिकों की चिट्ठी से बढ़ी बहस, “टॉकिंग न्यूज़” में विस्तृत चर्चा
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“अब नहीं आऊंगा दोस्त…”: सूरत से पलायन की पीड़ा के बीच नोएडा से तमिलनाडु तक मज़दूर असंतोष
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अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
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मोदी बनाम ममता: पूरा दिल्ली दरबार उतर आया है एक राज्य के चुनाव को जीतने?
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आकार पटेल: ईरान को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में भारतीयों ने सबसे अधिक कष्ट झेला है और झेल रहे हैं
मणिपुर हिंसा को अब तीन साल होने को आए हैं, लेकिन इस सीमावर्ती राज्य में शांति और सामान्य स्थिति आज भी एक कोरी कल्पना बनी हुई है. 'शिलॉन्ग टाइम्स' की संपादक पेट्रीसिया मुखिम ‘द वायर’ में प्रकाशित अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, भाजपा की राजनीति और मणिपुर के जटिल जनजातीय संघर्षों पर तीखा प्रहार करती हैं.
इंडिया गठबंधन, भाजपा और एनडीए के अभेद्य चुनावी रथ को रोकने के लिए 1977 की जनता पार्टी की तर्ज पर एक ठोस और एकीकृत इकाई क्यों नहीं बन पाया? हालांकि विपक्षी एकता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन एक पूर्ण 'विलय' या जनता पार्टी जैसा ऐतिहासिक प्रयोग अब भी एक दूर का सपना नजर आता है. इसके पीछे वैचारिक मतभेद, नेतृत्व का संकट और क्षेत्रीय राजनीति की विवशताएं प्रमुख कारण हैं.
तौसीफ रजा बरेली में आयोजित वार्षिक उर्स में शामिल होकर ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे. 26 अप्रैल की रात लगभग 9:45 बजे उन्होंने अपनी पत्नी तबस्सुम को तीन बार कॉल किया. यह कॉल सामान्य हाल-चाल जानने के लिए नहीं, बल्कि मदद की आखिरी गुहार थी. 29 सेकंड की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और एक वीडियो कॉल के जरिए तौसीफ ने बताया कि ट्रेन में कुछ लोग उनके साथ मारपीट कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव दो प्रमुख कारणों से चर्चा में रहे: पहला, 'तार्किक विसंगतियों' का एक नया मानदंड जिसके तहत मतदाता सूची से 27.16 लाख नाम हटा दिए गए, और दूसरा, 92.95% का रिकॉर्ड मतदान, जिसमें 2021 की तुलना में 31 लाख अधिक वोट पड़े.
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व (केटीआर) में पिछले दो हफ्तों के भीतर एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई है. बाघिन और एक शावक ने बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को दम तोड़ा. इस साल (2026) अब तक राज्य में कुल 27 बाघों की मृत्यु हो चुकी है. इन पांचों जानवरों की मौत फेफड़ों के संक्रमण के कारण हुई है.
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर एक अहम चर्चा हुई, जिसमें फोकस सीधे तौर पर अमित शाह की भूमिका और दांव पर रहा. बातचीत की शुरुआत इस से होती है कि जब देश के कई राज्यों में चुनाव हुए हैं, तो पूरा राष्ट्रीय ध्यान सिर्फ बंगाल पर ही क्यों केंद्रित है और केरल, तमिलनाडु या असम जैसे राज्यों को उसी तरह क्यों नहीं देखा जा रहा.
मुंबई के एक परिवार के चार सदस्यों की कथित तौर पर तरबूज खाने के बाद हुई मौत के कुछ दिनों बाद, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा उनके घर से लिए गए नमूनों—तरबूज, बिरयानी, पानी और मसालों—की प्रारंभिक जांच में मिलावट के कोई संकेत नहीं मिले हैं.
पिछले दो वर्षों में एनसीईआरटी द्वारा जारी की गई अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों में ऐसी कई कविताएँ, नाटक और कहानियाँ शामिल हैं, जो परिषद की पाठ्यपुस्तक टीम के सदस्यों द्वारा ही लिखी गई हैं. ये रचनाएँ 'सैन्यवादी देशभक्ति' का महिमामंडन करती हैं. इस रुझान ने विशेषज्ञों को यह सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है कि अंग्रेजी सिखाने के लिए प्रामाणिक साहित्य के बजाय इस तरह की बनावटी सामग्रियों का उपयोग क्यों किया जा रहा है?
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
हरकारा डीप डाइव के एक ऑडियो संस्करण में वरिष्ठ विश्लेषक श्रवण गर्ग के साथ भारत-अमेरिका संबंधों पर विस्तृत बातचीत की गई. इस चर्चा में मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी और भारत सरकार की प्रतिक्रिया या कहें, चुप्पी, पर सवाल उठाए गए. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माइकल सैवेज की एक टिप्पणी साझा की, जिसमें भारत को “नर्क” कहा गया और भारतीयों को “गैंगस्टर्स विद लैपटॉप्स” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया.
पश्चिम बंगाल का 2026 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक राज्य की सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक ‘कुरुक्षेत्र’ बन चुका है. ‘हरकारा डीप डाइव’ पर ऑडियो पॉडकास्ट में, वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव के उन अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली, जो इसे आज़ाद भारत के सबसे जटिल और अभूतपूर्व चुनावों में से एक बनाते हैं. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग इस चुनाव की तुलना ‘प्लासी के युद्ध’ से करते हैं. उनका मानना है कि बंगाल में जिस तरह से ‘मीर जाफरों’ और ‘जगत सेठों’ की तलाश की गई है, वह अभूतपूर्व है. ममता बनर्जी के खिलाफ इस बार भयंकर सत्ता विरोधी लहर है. 2021 के मुकाबले इस बार भाजपा ने हिंदू वोटों की नाराज़गी को और गहरा किया है, वहीं 30% वाले मुस्लिम वोट बैंक में भी दरार डालने की कोशिश की है.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में हमने पत्रकार सुमित झा से गहन बातचीत की, जिन्होंने तेलंगाना के जातिगत सर्वे से उजागर हुई असमानताओं पर साउथ फर्स्ट में विस्तृत लेखों की श्रृंखला लिखी है. तेलंगाना का 2024 का जाति सर्वे, एक ऐसा सर्वे जो सिर्फ आंकड़े नहीं देता, बल्कि समाज की छुपी परतों को उधेड़ कर सामने रखता है. बातचीत में यह समझने की कोशिश की गई कि क्या सच में हम जाति से आगे बढ़ चुके हैं, या जाति आज भी हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी को चुपचाप नियंत्रित कर रही है.
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय आर्थिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के स्तर पर अब भी पीछे हैं. इलाज के लिए क़र्ज़ लेना, असंगठित काम में फंसा रहना, और बुनियादी सुविधाओं की कमी, ये सब सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि जीवन की कठोर सच्चाइयां हैं. वहीं दूसरी तरफ, सरकारी योजनाओं का बड़ा हिस्सा उन वर्गों तक पहुंच रहा है जो पहले से ही अपेक्षाकृत मज़बूत हैं.