-
‘उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी’: अरुणाचल प्रदेश में मेगा बांध के विरोध के बीच सेंसरशिप और सरकारी कार्रवाई तेज
‘आर्टिकल 14’ में शमिक बाग की रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के विरोध के बीच स्थानीय समुदायों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्रवाई तेज हो गई है. अक्टूबर 2026 में कम से कम चार स्थानीय फेसबुक पेज सरकारी आदेश के बाद बंद कर दिए गए. इससे पहले, बांध विरोधी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां, आपराधिक मामले दर्ज किए जाने और सुरक्षा बलों की तैनाती जैसी कार्रवाइयां भी हुईं. आदि आदिवासी समुदाय के लोगों को आशंका है कि इस परियोजना से उनकी पुश्तैनी जमीन, सियांग नदी, आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होगी.
-
आरएसएस से जुड़े संगठन ने कश्मीर में पहला कार्यालय खोला
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा स्थित एकांत गांव बारसू की एक संकीर्ण लेन में एक साधारण एक-मंजिला इमारत मौजूद है. सुरक्षा कैमरों, लोहे की रेलिंग और पुलिस के पहरे वाली इस इमारत पर केवल "कार्यालय" लिखा एक छोटा सा बोर्ड लगा है. बशारत मसूद की रिपोर्ट के अनुसार, यह आरएसएस से जुड़े ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) का डिविजनल कार्यालय है. यह कश्मीर में सार्वजनिक रूप से कार्यालय खोलने वाला पहला आरएसएस सहयोगी संगठन है.
-
सत्य सागर | भारत में लोकतंत्र का तख्तापलट?
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने लेखक और विश्लेषक सत्य सागर के साथ भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक व्यवस्था, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक परियोजना और देश में सत्ता के बदलते स्वरूप पर विस्तार से बातचीत की. सत्य सागर का तर्क है कि भारत की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को केवल ‘अघोषित आपातकाल’ या ‘साइलेंट इमरजेंसी’ कहना पर्याप्त नहीं है. उनके मुताबिक, देश में सत्ता और संवैधानिक व्यवस्था के बीच संतुलन में ऐसे बदलाव हुए हैं
-
जातीय तनाव के बीच मणिपुर के एक वीरान गांव में कई घर फूंके गए
बुधवार (21 अक्टूबर, 2026) की सुबह मणिपुर के कमजोंग जिले के एक वीरान (खाली पड़े) गांव में कई घरों में आग लगा दी गई, जिससे नया तनाव पैदा हो गया.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, चासाद गांव के पास स्थित खोईकाई कुकी गांव में सुबह करीब 5:30 बजे संदिग्ध उग्रवादियों ने आग लगा दी.
-
मणिपुर संकट एक राजनीतिक मुद्दा है, सुरक्षा का नहीं: कुकी-जो महिला मंच, राष्ट्रपति शासन की मांग
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को फिर से लागू करने की मांग करते हुए, कुकी-जो महिला फोरम ने बुधवार (21 अक्टूबर, 2026) को कहा कि राज्य का संकट एक ऐसा राजनीतिक मुद्दा है, जिसे केवल अधिक सुरक्षा बल तैनात करके हल नहीं किया जा सकता है. समूह ने यह भी जोर देकर कहा कि एक अलग प्रशासन की उसकी मांग अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है.
-
डेटा उल्लंघन: एसबीआई ने डार्क वेब पर अपने ग्राहकों के डेटा उजागर होने की बात स्वीकार की
अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और CERT-In से डार्क वेब पर अपने ग्राहकों के डेटा के संदिग्ध रूप से उजागर होने से संबंधित अलर्ट प्राप्त करने के पांच दिन बाद, भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बुधवार, 21 अक्टूबर, 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को कुछ डेटा के लीक होने की घटना के बारे में जानकारी दी.
-
विद्याधर दाते | भारत में जेन जी के प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक, फ्रांस की हिंसा से करें तुलना
‘काउंटरकरंट्स’ में विद्याधर दाते ने लिखा है कि भारत में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताते हुए सरकार और कुछ शिक्षाविदों के रवैये की आलोचना की गई है. लेखक का तर्क है कि भारत में युवाओं ने लंबे समय से चले आ रहे अन्याय के बावजूद संयमित तरीके से विरोध किया है, लेकिन अधिकारियों ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया.
-
महाराष्ट्र | सूखाग्रस्त बीड में मोदी सरकार की ग्रामीण रोजगार योजना पर सवाल, कागजों पर मजदूरों की हाजिरी और मौके से गायब
‘स्क्रॉल’ में तबस्सुम बरनागरवाला की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त बीड जिले में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. जांच में ऐसे कार्यस्थल मिले, जहां मजदूरों की डिजिटल हाजिरी दर्ज थी, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं हो रहा था. कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें अपने नाम पर जारी कार्यादेशों की जानकारी तक नहीं थी और कुछ के खातों में जमा रकम स्थानीय नेताओं द्वारा निकाल लिए जाने का आरोप है.
-
सुलेमान पठान की मॉब लिंचिंग के एक साल बाद भी मुकदमा शुरू नहीं, 10 में से 7 आरोपी जमानत पर
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में 20 वर्षीय सुलेमान पठान की मॉब लिंचिंग के एक साल बाद भी मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हुई है. मामले में 10 गिरफ्तार आरोपियों में से सात को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है. ‘आर्टिकल 14’ में कुनाल पुरोहित की रिपोर्ट के मुताबिक, न्याय मिलने में हो रही देरी और आरोपियों से कथित धमकियों के कारण सुलेमान का परिवार निराशा और असुरक्षा के बीच जी रहा है.
-
इंडिपेंडेंट | ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए सरकार इतनी प्रतिबद्ध क्यों है
भारत में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का एक नया और आक्रामक दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि यह पूरी कवायद केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है.
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर विशाल प्रदर्शन देखने को मिले हैं.
-
क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी
अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.
-
रॉयटर्स | मोदी का धर्मसंकट: असंतोष बढ़ते ही भारत की सड़कों पर उतरा ‘जेन जी’, यूपी चुनाव में परीक्षा
उन्हें रोकने के लिए तैनात हजारों सुरक्षाकर्मियों के बावजूद, भारत में युवा प्रदर्शनकारियों ने पिछले हफ्ते बैरिकेड्स लांघे, सरकार विरोधी नारे लगाए और उन्हें खींचकर दूर ले जाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से झड़प की.
एक युवक ने पुलिस द्वारा बस में बैठाए जाने से पहले चिल्लाकर कहा, "इंकलाब जिंदाबाद."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
ईटीबी शिवप्रियन की रिपोर्ट: सीजेपी नेताओं की हिरासत पर भाजपा के हमलों का अन्नामलाई द्वारा तीखा जवाब; 'राष्ट्रविरोधी' टैग और केंद्रीय नीतियों की आलोचना।
कीर्तिवास की 'साउथ फर्स्ट' रिपोर्ट: कर्नाटक के शरावती वन्यजीव अभयारण्य में 2,000 MW पंप्ड-स्टोरेज परियोजना पर पर्यावरणीय चिंताएं और हाई कोर्ट का स्थगनादेश.
अमरेंद्र किशोर की 'डाउन टू अर्थ' रिपोर्ट: बिहार के रोहतास में कैमूर पहाड़ियों में नए खनन ब्लॉकों की नीलामी, पर्यावरण, स्वास्थ्य, और शैलाश्रयों पर संकट का विश्लेषण।
भरत जोशी की रिपोर्ट: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने RSS को विजयादशमी पथ संचलन के लिए औपचारिक पुलिस अनुमति लेने का निर्देश दिया।
शमिक बाग की 'आर्टिकल 14' रिपोर्ट: अरुणाचल प्रदेश में 11,000 MW सियांग अपर बांध परियोजना का विरोध, डिजिटल सेंसरशिप, गिरफ्तारियां और आदि समुदाय की चिंताएं।
बशारत मसूद की रिपोर्ट: पुलवामा के बारसू में बीएमएस कार्यालय; कश्मीर में आरएसएस से जुड़े ट्रेड यूनियन के सार्वजनिक विस्तार और रणनीतिक प्रभाव का विश्लेषण।
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और सत्य सागर की बातचीत: भारतीय लोकतंत्र, आरएसएस की वैचारिक परियोजना, संस्थागत स्वतंत्रता और सत्ता के तीन स्वरूपों का विश्लेषण।
PTI रिपोर्ट: मणिपुर के कमजोंग जिले के खोईकाई कुकी गांव में सुबह आगजनी; नागा-कुकी जातीय संघर्ष के बीच नया तनाव उत्पन्न।
वीडियो
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.

