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ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
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और तो और ये साहब भी यथावत हैं, बल्कि जज साहब का तबादला हो गया!
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भारतीय मेडिकल छात्र ने एआई से बनाई ‘मागा गर्ल’, अमेरिकी मर्दों को ठगकर कमाए हज़ारों डॉलर
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जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
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2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप रद्द किए
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लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
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मोदी के भाषण और आचार संहिता पर विवाद, 700 नागरिकों की चिट्ठी से बढ़ी बहस, “टॉकिंग न्यूज़” में विस्तृत चर्चा
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“अब नहीं आऊंगा दोस्त…”: सूरत से पलायन की पीड़ा के बीच नोएडा से तमिलनाडु तक मज़दूर असंतोष
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अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
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मोदी बनाम ममता: पूरा दिल्ली दरबार उतर आया है एक राज्य के चुनाव को जीतने?
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आकार पटेल: ईरान को छोड़कर किसी भी अन्य देश की तुलना में भारतीयों ने सबसे अधिक कष्ट झेला है और झेल रहे हैं
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नेपाल में जेन जी का इन्क़लाब: 'ट्रॉमा' से 'उम्मीद' तक का सफ़र
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महंगी होती पढ़ाई: स्कूल फीस, कोचिंग और बढ़ता ख़र्च परिवारों पर भारी
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“लेकिन तुम हमारे बिना क्या हो?” कुछ भी नहीं!
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पहलगाम: एक साल बाद भी, मोदी सरकार ने उन ‘चूक’ पर स्थिति स्पष्ट नहीं की जिनके कारण हमला हुआ
ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान देश का प्रतिनिधित्व करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक और अदालत द्वारा “गटरनुमा” कही गई टिप्पणी के बावजूद उनका पद पर बने रहना कई सवाल खड़े करता है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए महज़ चार घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था और पुलिस को फटकार भी लगाई थी. बावजूद इसके, मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, मंत्री माफी भी मांग चुके हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है.
पहलगाम एक अत्यधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है, जहाँ अमरनाथ यात्रा के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहते हैं. बैसरन के 10 किमी के भीतर सेना का कैंप और 5 किमी पर सीआरपीएफ की चौकी होने के बावजूद, पर्यटकों के रास्ते पर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था. चौंकाने वाली बात यह है कि बैसरन के लिए निर्धारित सीआरपीएफ की दो कंपनियों में से एक को हमले से ठीक पहले कहीं और तैनात कर दिया गया था. इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा जारी किए गए हमलावरों के स्केच भी बाद में एनआईए द्वारा गलत पाए गए, जो जांच और जमीनी स्तर के समन्वय की कमजोरी को उजागर करता है.
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.
आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और चुनाव आचार संहिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए. चर्चा में बताया गया कि हाल ही में लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के फेल होने के अगले दिन प्रधानमंत्री ने दूरदर्शन के मंच से राष्ट्र के नाम संबोधन किया. आरोप है कि इस सरकारी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल चुनावी उद्देश्य से किया गया और संबोधन में कांग्रेस का नाम करीब 58-59 बार लिया गया, जबकि विषय महिलाओं से जुड़ा बताया गया था.इस मुद्दे पर 700 से अधिक नागरिकों, रिटायर्ड अफसरों और एक्टिविस्टों ने इलेक्शन कमीशन को पत्र लिखकर शिकायत की है.
अवतारी देवी ने इस कानून के सबसे विवादित पहलू सेल्फ आईडेन्टिफिकेशन के अधिकार पर रौशनी डाली. उनके अनुसार, नए कानून में अब किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान को खुद तय करने के बजाय मेडिकल प्रक्रिया और सरकारी प्रमाण से जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि जेंडर एक व्यक्तिगत और मनोवैज्ञानिक पहचान है, जिसे कोई बाहरी संस्था तय नहीं कर सकती. चर्चा में यह भी सामने आया कि नए प्रावधानों के तहत ट्रांसजेंडर पहचान के लिए मेडिकल बोर्ड, सर्जरी और जिला प्रशासन की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हो सकती हैं. इसके बाद ही व्यक्ति को आधिकारिक सर्टिफिकेट मिलेगा, जिससे वह अपने अधिकारों का दावा कर सकेगा. इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए.
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आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.