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तेलंगाना में 30 लाख से अधिक मतदाता सुनवाई में नहीं पहुंचे, एसआईआर की समयसीमा करीब
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस पाने वाले 30 लाख से अधिक मतदाता अब तक सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा मंगलवार, 29 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 7 अक्टूबर को समाप्त होगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 9 नवंबर को प्रकाशित की जानी है.
29 सितंबर तक निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं को जारी किए जाने वाले 92,88,181 नोटिसों में से 92,88,180 तैयार कर लिए थे, जिनके मतदाता विवरण में विसंगतियां थीं या जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका था. केवल एक नोटिस तैयार होना बाकी था. तैयार नोटिसों में से 88,52,173 मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके थे, जबकि 4,36,007 नोटिस अभी वितरित नहीं हुए थे.
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चुनाव आयोग पर नियंत्रण के आरोप और एसआईआर: सतही सुधारों से भरोसा बहाल होने पर सवाल
‘आर्टिकल 14’ में समर हलर्नकर ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उनका तर्क है कि आयोग की ओर से हाल में घोषित सुधार मतदाता सूची से जुड़े संकट का समाधान नहीं करते. लेख में चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभाव में काम करने और मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था को केंद्रीकृत करने के आरोप लगाए गए हैं.
हलर्नकर ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक जांच का हवाला देते हुए लिखा है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी. इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और एसआईआर लागू करने से जुड़े निर्णय शामिल थे. लेख के अनुसार, जांच का एक अहम पहलू मतदाता डेटाबेस के सॉफ्टवेयर को स्थानीय स्तर से हटाकर दिल्ली में केंद्रीकृत करने की कोशिश थी. लेखक का कहना है कि इससे मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर केंद्रीय नियंत्रण बढ़ सकता है.
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ई.ए.एस. शर्मा | मुख्य चुनाव आयुक्त के एसआईआर और फॉर्म 6 संबंधी एकतरफा फैसले प्रथम दृष्टया अवैध
‘काउंटरकरंट्स’ में भारत सरकार के पूर्व सचिव ई.ए.एस. शर्मा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि 19 फरवरी 2025 के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्वाचन आयोग के बहुसदस्यीय निकाय के बजाय व्यक्तिगत हैसियत से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. शर्मा ने इन फैसलों को प्रथम दृष्टया अवैध बताते हुए विभिन्न राज्यों में जारी एसआईआर रोकने और फॉर्म 6 को सरकार द्वारा स्वीकृत मूल प्रारूप में बहाल करने की मांग की है.
शर्मा ने 26 सितंबर 2026 को जारी निर्वाचन आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के उस बिंदु का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले साझा किया जाएगा और बैठक के बाद कार्यवृत्त जारी किया जाएगा. उनके मुताबिक, इससे यह सवाल उठता है कि क्या वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद आयोग ने पहली बार अब बहुसदस्यीय निकाय के रूप में बैठक करने का निर्णय लिया है.
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श्रवण गर्ग | 2027 में उत्तर प्रदेश विपक्षी एकता की बड़ी परीक्षा होगा
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक, कांग्रेस की भूमिका और विपक्षी दलों के बीच तालमेल की चुनौतियों पर चर्चा की. बातचीत में चुनाव आयोग से जुड़े सवालों, कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक और उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में विपक्ष की रणनीति को समझने की कोशिश की गई.
चर्चा में सबसे पहले यह सवाल उठा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इंडिया गठबंधन की बैठक की जरूरत क्यों महसूस हो रही है और कांग्रेस इस गठबंधन में अपनी भूमिका किस तरह तय कर रही है. श्रवण गर्ग ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक और राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उल्लेख करते हुए विपक्ष के राजनीतिक एजेंडे पर विचार रखा. चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों, चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का संदर्भ भी बातचीत में आया.
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पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह का गंभीर आरोप: कहा- ज्ञानेश कुमार और उनके ‘आका’ कानून का उल्लंघन कर रहे हैं
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और बिहार के आरा से पूर्व सांसद आर.के. सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर देश की मतदाता सूची से करोड़ों नाम अवैध रूप से हटाने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2003 के बाद निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) द्वारा जोड़े गए मतदाताओं के नाम बिना किसी जांच, कानूनी आधार या कारण बताओ नोटिस जारी किए हटा दिए गए हैं.
अमित भेलारी की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देशवासियों के नाम जारी एक खुले पत्र में पूर्व आईएएस अफसर, जो मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं, ने देश के लोकतंत्र पर मंडराते खतरे की चेतावनी दी. सिंह ने कहा, "क्या आप चाहते हैं कि भारत एक लोकतंत्र बना रहे? तो फिर आपको यह समझना होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके आका तथाकथित एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) में क्या कर रहे हैं. वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं.
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संभल हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पर लगा एनएसए रद्द किया, शक्ति का ‘अवैध रूप से प्रयोग’ करने के लिए यूपी सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना
अरात्रिका भौमिक की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 सितंबर, 2026) को नवंबर 2024 की संभल हिंसा के सिलसिले में एक व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत पारित निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि हिरासत की शक्ति का "अवैध रूप से प्रयोग" किया गया था. इसके लिए अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया.
जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने संभल के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अक्टूबर 2025 में पारित हिरासत आदेश को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अधिकारियों ने बंदी को उसकी स्वतंत्रता से वंचित करने से पहले प्रासंगिक सामग्री पर विचार नहीं किया था. अदालत ने यह भी माना कि अधिकारियों द्वारा जिस इकबालिया बयान पर भरोसा किया गया था, वह अपने आप में निवारक हिरासत को उचित नहीं ठहरा सकता. पीठ ने खुली अदालत में फैसले के मुख्य हिस्से को सुनाया.
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‘पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का देश के सबसे बड़े निजी बैंक का प्रमुख बनना बहस का विषय होना चाहिए’
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा है कि चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर जारी विवाद केवल किसी एक मीडिया रिपोर्ट का नतीजा नहीं है. यह कहते हुए कि चुनावी संस्था के कामकाज पर लगभग एक दशक से सवाल उठ रहे हैं, प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर देशव्यापी चर्चा और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की.
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, रविवार रात मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका होनी चाहिए.
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‘ब्रांड एंबेसडर’: ज्ञानेश कुमार ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था
जब आप किसी ब्रांड से गहराई से प्रभावित होते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से उसके ‘ब्रांड एंबेसडर’ या वक्ता बन जाते हैं और बिना किसी औपचारिक शुल्क के उसकी मार्केटिंग करने लगते हैं. इसे मार्केटिंग की भाषा में 'वर्ड-ऑफ-माउथ मार्केटिंग' या ऑर्गेनिक एडवोकेसी कहा जाता है. केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन ने खुलासा किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में पथनमथिट्टा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था.
थॉमसन ने ‘द हिंदू’ को बताया, "यह कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं बल्कि एक मित्रवत सुझाव था. जब मैं केरल के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत था और अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर था, तब दिल्ली की एक उड़ान के दौरान ज्ञानेश कुमार ने मेरी सेवानिवृत्ति के बाद की योजनाओं के बारे में पूछा था. मैंने कहा था कि मेरी ऐसी कोई योजना नहीं है. इसी दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि मैं भाजपा के लिए पथनमथिट्टा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता हूँ."
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एक व्यक्ति (ज्ञानेश कुमार) का विचार बाकी दो लोगों (आयुक्तों) पर कैसे हावी हुआ: पूर्व चुनाव आयुक्त
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने ‘द टेलीग्राफ ऑनलाइन’ से बातचीत में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को अपने कामकाज, विशेष रूप से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.
लवासा ने कहा, "उन्हें पूरे तथ्यों के साथ खुले तौर पर सामने आना चाहिए. एसआईआर के तीसरे चरण को रद्द कर देना चाहिए क्योंकि इसमें कई कमियां हैं और यह अनावश्यक है. तीसरा चरण अभी पूरा नहीं हुआ है. आयोग को एसआईआर से पहले वाली मतदाता सूचियों पर वापस लौट जाना चाहिए."
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सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई एमडीआर पर सरकार से पूछा: यदि यह न टैक्स है न शुल्क, तो फिर यह ‘जब्ती’ क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 सितंबर, 2026) को ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट यूपीआई व्यक्ति-से-व्यापारी (पर्सन-टु-मर्चन्ट) लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4% शुल्क वसूलने के सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क से लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटेंगे, जो कि काले धन का कारण बनेगा.
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मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों की मदद से प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संयुक्त विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपा जाएगा.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, यह घटनाक्रम उसकी इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर आंतरिक रूप से लिखित आपत्तियां जताई थीं. त्रि-सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त 'बराबर वालों में प्रथम' होते हैं और नियमतः फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए.
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अजित साही | मोदी जी की रवानगी अब तय है
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ चुनाव आयोग में कथित असहमति, राहुल गांधी के आरोपों, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और केंद्र सरकार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की.
बातचीत में साही ने इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण बताया, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही गई थी. साही के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति और मतदाता सूची से जुड़े सवाल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं.
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चुनाव आयोग में अभूतपूर्व दरार: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने ईसी के कदमों पर दर्ज कराई आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है. हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष जांच ने इस प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर पनप रहे अभूतपूर्व असंतोष और प्रशासनिक दरार को उजागर कर दिया है.
रीतिका चोपड़ा की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम—जो कि मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है—अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन चुका है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. बड़े पैमाने पर की गई इस कटौती ने पूरे देश में इस बात पर बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का निर्धारण आखिर किस प्रक्रिया के तहत हो रहा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'साउथ फर्स्ट' रिपोर्ट: तेलंगाना में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 30 लाख वोटरों ने नहीं दिया नोटिस का जवाब; देश भर में अब तक 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से बाहर.
'आर्टिकल 14' रिपोर्ट: समर हलर्नकर का विश्लेषण; चुनाव आयोग का केंद्रीकरण, एसआईआर (SIR) विवाद, आयुक्तों की असहमति और 37.3 लाख वोटरों के निष्कासन पर सवाल.
'काउंटरकरंट्स' रिपोर्ट: पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. शर्मा का CEC ज्ञानेश कुमार को पत्र; एसआईआर (SIR) और फॉर्म 6 में एकतरफा बदलावों को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट को सूचित करने की मांग.
'हरकारा डीप डाइव' विश्लेषण: निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग की चर्चा; इंडिया गठबंधन की बैठक, कांग्रेस की रणनीति, चुनाव आयोग विवाद और UP 2027 के भावी समीकरण.
'लाइव लॉ'/'बार एंड बेंच' रिपोर्ट: अरात्रिका भौमिक का खुलासा; संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज पर लगा एनएसए (NSA) सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द, यूपी सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना.
'द हिंदू' रिपोर्ट: अमित भेलारी का बड़ा खुलासा; पूर्व मंत्री आर.के. सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देश भर से 13 करोड़ वोटर हटाने और एसआईआर (SIR) में धांधली का लगाया आरोप.
'द वायर' रिपोर्ट: संतोष सिंह का खुलासा; बिहार में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी सांसद शंभू शरण पटेल का अपनी ही सरकार पर तीखा प्रहार.
'द हिंदू' रिपोर्ट: जे.पी. यादव का विश्लेषण; बिहार में बढ़ते अपराध पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नीतीश-बीजेपी सरकार पर हमला और यूपी चुनाव 2027 लड़ने का बड़ा ऐलान.
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हरकारा सीरीज़ में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची में बदलाव और लोकतंत्र के सामने उठते सवालों पर. हालिया रिपोर्टों, दस्तावेज़ों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर इस एपिसोड में चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता से जुड़े 10 अहम सवाल उठाए गए हैं. चर्चा में चुनाव आयुक्तों की भूमिका, आयोग की बैठकों और असहमतियों से जुड़ी रिपोर्ट, ईसीआई-नेट, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची में बदलाव, गोवा और पश्चिम बंगाल से जुड़े मामले तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल हैं. इन सवालों के ज़रिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही की पड़ताल की गई है. एपिसोड में उठाए गए आरोपों और संभावित राजनीतिक परिदृश्यों को दावों एवं सवालों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में नहीं. पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं. #Harkara #हरकारा #चुनावआयोग #ज्ञानेशकुमार #SIR #मतदाता_सूची #लोकतंत्र #मताधिकार #सुप्रीमकोर्ट #निधीशत्यागी
23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट छपी. रिपोर्ट के मुताबिक़ चुनाव आयोग के तीन में से दो आयुक्त महीनों से असहमति दर्ज करा रहे थे. इसके तीन दिन के भीतर आयोग की बैठक हुई, सफ़ाई आई और नौ फ़ैसले लिए गए. इनमें बैठकों के एजेंडा और मिनट्स अनिवार्य करना, ईसीनेट तक ज़मीनी अफ़सरों की पहुँच और गोवा के 97 मतदाताओं की बहाली शामिल हैं. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग कहते हैं कि ये बदलाव ख़ुद एक स्वीकारोक्ति हैं. उनका सवाल है कि बंगाल के 16 लाख मतदाताओं के ख़िलाफ़ अपील, फ़ॉर्म 6 में बदलाव और केंद्रीकृत ईसीनेट पर आयोग अब भी चुप क्यों है. बातचीत का दूसरा हिस्सा परिदृश्य-निर्माण है. इसमें कई सवाल ऐसे हैं जिन्हें गर्ग ख़ुद अटकल और कल्पना कहते हैं. फिर भी ये सवाल इसलिए उठते हैं क्योंकि सरकार और संस्थाएँ पारदर्शी नहीं हैं. harkaraonline.com harkara.substack.com शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


क्या INDIA गठबंधन की बैठक विपक्षी दलों को साझा रणनीति की ओर ले जा पाएगी? कांग्रेस की भूमिका, राहुल गांधी का नेतृत्व और अखिलेश यादव के साथ उसके राजनीतिक रिश्ते गठबंधन की आगे की दिशा को कैसे प्रभावित करेंगे? हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से विपक्षी राजनीति की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं. बातचीत में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े सवाल, INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल और उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव के संभावित समीकरण शामिल हैं. ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं की भूमिका के साथ-साथ कांग्रेस-सपा के बीच सीटों का सवाल भी चर्चा का हिस्सा है. क्या विपक्षी दल अपने मतभेदों के बावजूद साझा राजनीतिक एजेंडा बना पाएंगे? सुनिए श्रवण गर्ग का विश्लेषण, निधीश त्यागी के साथ. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #INDIAAlliance #Congress #AkhileshYadav #IndianPolitics