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अडानी के स्वामित्व में भारत के सबसे पुराने सीमेंट संयंत्रों में से एक बंद, हजारों लोगों की आजीविका पर संकट
‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित मयंक आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित झिंकपानी का चाईबासा सीमेंट वर्क्स बंद हो गया है. अडानी समूह के स्वामित्व वाली एसीसी सीमेंट इकाई के बंद होने से हजारों लोगों की आजीविका संकट में पड़ गई है. यह संयंत्र क्षेत्र के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक था और दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा छोटे कारोबार का प्रमुख आधार बना हुआ था.
16 अगस्त को बंद हुआ संयंत्र
चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया. कंपनी ने इसके पीछे मुख्य कारण चूना पत्थर के भंडार का समाप्त होना बताया है. संयंत्र के लिए जरूरी चूना पत्थर की आपूर्ति अब पहले की तरह स्थानीय खदानों से नहीं हो पा रही थी.
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एक साल में 2 करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया, यूनिसेफ की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनिसेफ की नई रिपोर्ट के अनुसार, 21 देशों में 12 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 2 करोड़ बच्चों ने एक साल के दौरान तकनीक के जरिए यौन शोषण या उत्पीड़न का सामना किया. इनमें 1.5 करोड़ से अधिक बच्चे बिना इच्छा के अश्लील यौन सामग्री के संपर्क में आए, जबकि करीब 90 लाख बच्चों से जबरन यौन बातचीत करने या अपनी यौन तस्वीरें साझा करने के लिए कहा गया. लगभग 40 लाख बच्चों की यौन तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना साझा की गईं. भारत इस अध्ययन में शामिल 21 देशों में नहीं था.
रिपोर्ट के लिए करीब 21 देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले 21 हजार बच्चों का सर्वेक्षण किया गया. इसके अलावा बचपन में शोषण का सामना कर चुके 100 युवाओं से विस्तृत बातचीत भी की गई. यूनिसेफ ने कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चे ऐसी घटनाओं की शिकायत नहीं करते.
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एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम उन राज्यों में हटे, जहां पिछले तीन वर्षों में चुनाव हुए
‘द वायर’ में प्रकाशित श्रावस्ती दासगुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली और आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इन सभी राज्यों में पिछले तीन वर्षों के दौरान विधानसभा चुनाव हुए हैं. बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि यदि इतने मतदाता अपात्र थे, तो उन्हें हाल के चुनावों में मतदान करने की अनुमति कैसे मिली.
17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 6.15 करोड़ नाम हटे
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तीसरे चरण में जारी मसौदा मतदाता सूचियों से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 6,15,07,245 नाम हटाए गए हैं. अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक यह आंकड़ा बदल सकता है, क्योंकि दावे और आपत्तियों के बाद कई नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं.
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नोएडा के मजदूरों का प्रदर्शन कैसे दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा को एनएसए के तहत जेल ले गया
'द हिन्दू' में प्रकाशित इशिता मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 की एक गर्म दोपहर, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण कई देश तेल और गैस संकट तथा बढ़ती कीमतों से जूझ रहे थे, नोएडा के मजदूर सड़कों पर उतर आए. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा एशिया के प्रमुख नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जहां हजारों कारखाने और विनिर्माण इकाइयां हैं. मजदूरों ने भारत में बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग की.
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते श्रमिक असंतोष का भी हिस्सा था. इससे कुछ समय पहले पड़ोसी हरियाणा में मजदूरों को वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मिली थी.
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मनुस्मृति की छवि में भारत का संविधान बदलने की आरएसएस-भाजपा परियोजना
सुनील मुखोपाध्याय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए संसद भवन में संविधान की प्रति लेकर प्रवेश करने के बाद कुछ लोगों को लगा कि शायद भाजपा अब संविधान के समाजवादी, लोकतांत्रिक, संघीय और धर्मनिरपेक्ष चरित्र का सम्मान करेगी. लेकिन इसके बाद विपक्षी दलों के सांसदों को तोड़कर संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशों ने संविधान में बदलाव की आशंकाओं को फिर सामने ला दिया.
भाजपा के कई नेता संविधान की प्रस्तावना से "समाजवाद" और "धर्मनिरपेक्षता" शब्द हटाने की मांग करते रहे हैं. उनका तर्क है कि ये शब्द मूल संविधान में नहीं थे और 1976 में जोड़े गए. हालांकि संविधान के मूल प्रावधानों में पहले से ही सामाजिक न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की भावना मौजूद थी. इन शब्दों को बाद में इसलिए जोड़ा गया क्योंकि आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों ने संवैधानिक मूल्यों पर लगातार हमले किए.
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‘हमें भ्रमित किया गया, मोहन भागवत के आगमन की सूचना नहीं दी गई’: न्यूयॉर्क के धर्मगुरुओं ने आरएसएस के कार्यक्रम में भाग लेने पर ‘खेद’ जताया
न्यूयॉर्क के तीन धर्मगुरुओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में भाग लेने के लिए "भ्रमित" किया गया था, जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, रिवरसाइड चर्च की वरिष्ठ पादरी रेवरेंड एड्रिएन थॉर्न ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि भागवत के बगल में कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति एक "गलती" थी. थॉर्न ने कहा, "मेरी उपस्थिति से यह गलत धारणा बनी कि रिवरसाइड चर्च या मैं भागवत, आरएसएस या इस संगठन से जुड़ी विचारधारा का समर्थन करते हैं. जबकि हम ऐसा नहीं करते हैं."
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जंतर-मंतर पर ‘आदमी का सिर फोड़ दिया, जेल भी नहीं गया,’ हिंदुत्व कार्यकर्ता ने दिखाया भाजपा के ‘आशीर्वाद’ का रोब
स्वतंत्र भरद्वाज नाम के एक स्वयंभू हिंदुत्व कार्यकर्ता ने यह दावा कर रोब दिखाया है कि उसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता का सिर फोड़ दिया था, लेकिन वह "जेल भी नहीं गया" क्योंकि उस पर भाजपा के कपिल मिश्रा जैसे नेताओं का "आशीर्वाद" है.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, यूट्यूब पर उपलब्ध एक घंटे के पॉडकास्ट में भरद्वाज ने कहा, “निशु के बाप का हम सिर फाड़े हैं.” “आपको पता है कौन सी धारा लगती है? 307. हाफ-मर्डर (हत्या का प्रयास). उसके सिर में 60 टांके आए थे, ठीक है? एम्बुलेंस में वह बंदा मरने की स्थिति में था. उसकी बेटी थाने के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर मेरे पिता को न्याय नहीं मिला तो मैं जहर खाकर खुदकुशी कर लूंगी. ठीक है? स्वतंत्र अगले ही दिन बाहर था. मैं तो जेल भी नहीं गया.
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जीडीपी आंकड़ों की समीक्षा करने वाले पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग कौन हैं?
इस सप्ताह के शुरू में (31 अगस्त) भारत की पहली तिमाही (क्वार्टर-1) के जीडीपी वृद्धि आंकड़े जारी होने के बाद, पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सुभाष चंद्र गर्ग खुद को इन आंकड़ों को लेकर छिड़ी एक जोरदार बहस के केंद्र में पा रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक टीवी चैनल (एनडीटीवी) को दिए गए एक साक्षात्कार में, जो काफी वायरल हुआ है, वित्त मंत्रालय के इस पूर्व शीर्ष नौकरशाह ने भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर पर सवाल उठाए हैं, जिसने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया था.
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श्रवण गर्ग | जीडीपी की खुशी सिर्फ प्रधानमंत्री के चेहरे पर है, देश के चेहरे पर नहीं है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर को लेकर उठे सवालों पर विस्तार से चर्चा की. सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत बताई है, लेकिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने इस आंकड़े पर सवाल उठाते हुए वास्तविक वृद्धि दर करीब 2.6 प्रतिशत होने का दावा किया है.
विवाद की मुख्य वजह जीडीपी की गणना के लिए इस्तेमाल किए गए आधार वर्ष और पुराने आंकड़ों में किया गया संशोधन है. सुभाष गर्ग का कहना है कि पिछले वर्ष की जीडीपी के आंकड़े को 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया. इसके बाद मौजूदा वर्ष के आंकड़े से तुलना करने पर वृद्धि दर काफी अधिक दिखाई देने लगी. उनका सवाल है कि यदि पिछले वर्ष का आंकड़ा नहीं बदला जाता, तो वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के बजाय लगभग 2.6 प्रतिशत होती.
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अडानी के स्वामित्व में भारत के सबसे पुराने सीमेंट संयंत्रों में से एक बंद, हजारों लोगों की आजीविका पर संकट
‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित मयंक आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित झिंकपानी का चाईबासा सीमेंट वर्क्स बंद हो गया है. अडानी समूह के स्वामित्व वाली एसीसी सीमेंट इकाई के बंद होने से हजारों लोगों की आजीविका संकट में पड़ गई है. यह संयंत्र क्षेत्र के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक था और दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा छोटे कारोबार का प्रमुख आधार बना हुआ था.
16 अगस्त को बंद हुआ संयंत्र
चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया. कंपनी ने इसके पीछे मुख्य कारण चूना पत्थर के भंडार का समाप्त होना बताया है. संयंत्र के लिए जरूरी चूना पत्थर की आपूर्ति अब पहले की तरह स्थानीय खदानों से नहीं हो पा रही थी.
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एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में सबसे अधिक नाम उन राज्यों में हटे, जहां पिछले तीन वर्षों में चुनाव हुए
‘द वायर’ में प्रकाशित श्रावस्ती दासगुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली और आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इन सभी राज्यों में पिछले तीन वर्षों के दौरान विधानसभा चुनाव हुए हैं. बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि यदि इतने मतदाता अपात्र थे, तो उन्हें हाल के चुनावों में मतदान करने की अनुमति कैसे मिली.
17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 6.15 करोड़ नाम हटे
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तीसरे चरण में जारी मसौदा मतदाता सूचियों से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 6,15,07,245 नाम हटाए गए हैं. अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक यह आंकड़ा बदल सकता है, क्योंकि दावे और आपत्तियों के बाद कई नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं.
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"मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी". 15 साल की लड़की ने कहा, "मैं पीछे नहीं हटूंगी"
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, नोएडा की 15 वर्षीय रुचिका सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न, धमकियों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. अब मकतूब मीडिया से बातचीत में रुचिका ने कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी जिंदगी "नरक" बना दी है और वह अपने चेहरे को छिपाकर रहने के लिए मजबूर हैं.
रुचिका ने कहा, "मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी है." उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल की लड़की को इस तरह परेशान किया गया कि वह कहीं स्वतंत्र रूप से जा या रह नहीं सकती. उनके मुताबिक, उन्हें हर जगह अपना चेहरा छिपाना पड़ता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "कायर" भी कहा और साफ किया कि वह पीछे नहीं हटेंगी.
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सोनिया गांधी की किताब: पेंगुइन इंडिया के वकीलों ने 'कई अध्यायों' में बदलाव और कटौती माँगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग' को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) के वकीलों ने कई अध्यायों में बदलाव और कटौती की माँग की थी. पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इकाई अल्फ़्रेड ए नॉफ़ इस किताब की वैश्विक प्रकाशक है, जबकि भारत में इसे छापने और बाँटने की ज़िम्मेदारी पीआरएचआई के पास थी. किताब 10 नवंबर को आनी थी. इसकी घोषणा सबसे पहले नॉफ़ ने की थी और यह भी बताया था कि पहली छपाई एक लाख प्रतियों की होगी.
इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार जिन हिस्सों पर आपत्ति उठाई गई, उनमें थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके 12 साल के शासन से जुड़े संदर्भ, आरएसएस की भूमिका, साम्प्रदायिक विभाजन और दंगों की घटनाओं का ज़िक्र, और अल्पसंख्यकों की दुर्दशा.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द हिन्दू' में इशिता मिश्रा की रिपोर्ट: नोएडा मजदूर आंदोलन, एलएलबी छात्रा आकृति चौधरी पर लगा रासुका (NSA) रद्द; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया 5 लाख का मुआवजा.
सुनील मुखोपाध्याय का विश्लेषण: संघ की विचारधारा, 'वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड', मनुस्मृति बनाम संविधान और भारतीय लोकतंत्र पर मंडराते खतरों की विस्तृत पड़ताल.
'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट: न्यूयॉर्क के तीन धर्मगुरुओं ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में मोहन भागवत के कार्यक्रम में "भ्रमित" करके बुलाने का आरोप लगाया; रेवरेंड थॉर्न और इमाम शमसी अली का बड़ा बयान.
'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट: जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान संजय जी का सिर फोड़ने वाले स्वयंभू हिंदुत्व कार्यकर्ता स्वतंत्र भरद्वाज के वायरल दावों, कपिल मिश्रा पर लगे आरोपों और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट.
'हरकारा डीप डाइव': निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की चर्चा; पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के दावों, 7.8% बनाम 2.6% जीडीपी आंकड़ों और जमीनी आर्थिक स्थिति का विश्लेषण.
'द इंडियन एक्सप्रेस' में आँचल मैगजीन की रिपोर्ट: 7.8% जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, आरबीआई विवाद और निर्मला सीतारमण से मतभेदों का विस्तृत विश्लेषण.
'द इंडियन एक्सप्रेस' में श्यामलाल यादव की रिपोर्ट: 2027 की जनगणना में जाति गणना के लिए 'ओपन-एंडेड' प्रारूप, ORGI और मंत्रालय के मतभेद, और 2011 के डेटा संकट का विश्लेषण.
यूनिसेफ की रिपोर्ट: 21 देशों में 2 करोड़ बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार; मानसिक स्वास्थ्य पर असर, सोशल मीडिया की भूमिका और UNICEF की चेतावनियों पर रिपोर्ट.
वीडियो
हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा और उनके हालिया बयान पर खास चर्चा. न्यूयॉर्क में श्री मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है. उन्होंने हिंदुत्व, धार्मिक विविधता, सभी धर्मों के सम्मान और “यूनिटी इन डायवर्सिटी” की बात भी की. लेकिन सवाल यह है कि भागवत ने वास्तव में क्या कहा और उस बयान का पूरा संदर्भ क्या है? जिस बात पर इतना हल्ला मचा, क्या बहस उसी बात पर हो रही है जो उन्होंने कही? RSS, हिंदुत्व और हिंदू समाज को लेकर भागवत का संदेश क्या है? और न्यूयॉर्क से दिया गया यह संदेश भारत के लिए क्या मायने रखता है? हरकारा डीप डाइव LIVE में इन्हीं सवालों की पड़ताल. देखिए और जुड़िए चर्चा में.
सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज और इनसॉल्वेंसी मामले ने भारत की कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. करीब 226.57 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये में मामला निपटाने की प्रक्रिया से "हेयरकट" को लेकर बहस तेज हुई है. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने आर्थिक मामलों के पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ विस्तार से समझा कि हेयरकट क्या होता है, एनसीएलटी और आईबीसी की प्रक्रिया कैसे काम करती है और बड़े कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आखिर कितना पैसा वसूल हो पाता है. बातचीत में पिछले एक दशक में करीब 16 से 17 लाख करोड़ रुपये की रिकवर न हो सकने वाली रकम, वीडियोकॉन जैसे बड़े कॉरपोरेट मामलों, विजय माल्या, किसानों की कर्जमाफी और आम आदमी बनाम बड़े कॉरपोरेट्स के लिए कर्ज की अलग-अलग लागत पर भी चर्चा हुई. क्या कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग मापदंड लागू होते हैं? बैंकों में जमा आम लोगों के पैसे पर बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट का क्या असर पड़ता है? और क्या सरकार इस पूरे सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित कर पा रही है? देखिए पूरी बातचीत और समझिए भारत की कॉरपोरेट कर्ज व्यवस्था के पीछे का पूरा गणित. #HarkaraDeepDive #RakeshKayastha #NidheeshTyagi #SubhashChandra #CorporateDebt #NCLT #IBC #Banking #CorporateGovernance #IndianEconomy
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने की अपील की. लेकिन सवाल यह है कि GDP के आंकड़े तय कौन करता है? और अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो आम जनता की जिंदगी में इसका असर कितना दिखाई दे रहा है? हरकारा डीप डाइव लाइव में निधीश त्यागी एवं श्रवण गर्ग के साथ इसी सवाल पर चर्चा. क्या GDP ग्रोथ और आम आदमी की आर्थिक स्थिति एक ही कहानी बताते हैं? क्या विकास के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस में असली सवाल पीछे छूट जाता है? और प्रधानमंत्री की स्वदेशी वाली अपील का अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है? इस एपिसोड में चर्चा होगी: 7.8% GDP ग्रोथ का मतलब और इसके पीछे के आंकड़े. GDP तय करने वाली संस्थाओं और सरकार की भूमिका. आर्थिक विकास और आम जनता के अनुभव के बीच का अंतर. स्वदेशी, विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद पर प्रधानमंत्री की अपील.