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रूस पर नए अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक ने मोदी को असमंजस में डाला, निकलने का रास्ता आसान नहीं
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय ऊर्जा नीति और विदेश नीति के एक ऐसे जटिल दोराहे पर खड़े हैं, जहाँ से निकलने का कोई आसान मार्ग दिखाई नहीं देता. एक तरफ, यदि भारत संभावित नए अमेरिकी शुल्कों (टैरिफ) से बचने के लिए रूसी तेल के आयात में कटौती करता है, तो देश में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं या सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव पड़ सकता है. आगामी उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावों से ठीक पहले ईंधन के दाम बढ़ना सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ा राजनीतिक जोखिम है. दूसरी तरफ, यदि भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखता है, तो अमेरिका में भारतीय निर्यात पर भारी शुल्क लग सकता है, जिससे भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
‘रॉयटर्स’ की यह रिपोर्ट कहती है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऊर्जा नीति के ऐसे असमंजस में फंस गए हैं जहाँ से निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं है. दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और रूसी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार भारत ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस में पेश उस विधेयक पर असामान्य रूप से कड़ा रुख अपनाया है, जो वॉशिंगटन को रूस से तेल खरीदने वाले देशों (जैसे भारत और चीन) पर 100% तक द्वितीयक शुल्क (सेकेंडरी टैरिफ) लगाने का अधिकार देता है.
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पश्चिम बंगाल में हटाए गए 27 लाख मतदाताओं में 22 लाख ने की अपील
‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित दामिनी नाथ की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22.21 लाख ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील दायर की है. इसका अर्थ है कि हटाए गए मतदाताओं में करीब 82 प्रतिशत ने अपने निष्कासन को चुनौती दी है.
पहली बार निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया है कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी कुल 38.31 लाख अपीलें अपीलीय अधिकरणों के सामने लंबित हैं. इनमें 22.21 लाख अपीलें उन मतदाताओं ने दायर की हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. वहीं 16.10 लाख अपीलें ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने की मांग को लेकर दायर की गई हैं, जिन्हें सूची में शामिल किया गया है. आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये अपीलें किसने दायर की हैं.
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ममता बनर्जी और कांग्रेस: एक राजनीतिक यात्रा का पूरा होता चक्र
रवीक भट्टाचार्य और सात्विक बर्मन की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान ने एक नया राजनीतिक मोड़ लिया है. अपनी पार्टी द्वारा कांग्रेस के साथ किसी भी चुनावी समझौते से स्पष्ट इनकार करने और नंदीग्राम से प्रत्याशी न उतारने के निर्णय के ठीक कुछ ही दिनों बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उपचुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी (कांग्रेस) का समर्थन करेगी. यह घोषणा टीएमसी उम्मीदवार के मैदान से हटने के तुरंत बाद आई, जिसने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है.
कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में ममता बनर्जी ने कहा, "आपसी संबंधों में बेहतर तालमेल और सौहार्द बनाए रखने के लिए हमने पहले ही यह तय कर लिया था कि हम नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन करेंगे. यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर बने ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है.
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भारी चूक के कारण भारत को एशियाई खेलों का ध्वजवाहक बदलना पड़ा, समय पर किट ही नहीं भेज पाया प्रबंधन
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, जापान के नागोया में शनिवार को प्रारंभ हुए एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत को अपने पुरुष ध्वजवाहक को ऐन वक्त पर बदलना पड़ा, क्योंकि मूल रूप से चुने गए तजिंदरपाल सिंह तूर को उनकी आधिकारिक किट नहीं मिली है और वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते हैं.
गोला फेंक (शॉट पुट) में लगातार तीसरा एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रख रहे तूर की जगह अब कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत पुरुष ध्वजवाहक होंगे. पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर महिला ध्वजवाहक हैं.
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गिरफ्तारी के करीब नौ साल बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को दी जमानत
कथित आतंकवाद के आरोपों में 2017 से भारत में बंद 39 वर्षीय ब्रिटिश सिख नागरिक जगतार सिंह जोहल को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है. स्कॉटलैंड के डंबार्टन निवासी जोहल को खालिस्तान लिबरेशन फोर्स को आर्थिक मदद देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिस पर पंजाब में लक्षित हत्याएं करने का आरोप है.
‘द गार्डियन’ में पैट्रिक विंटोर की खबर है कि अदालती कार्यवाही में लगातार देरी हुई और अभियोजन पक्ष सत्यापन योग्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. इससे पहले पंजाब की एक अदालत इसी तरह के साजिश के आरोपों को खारिज कर चुकी है. जोहल 2017 में शादी के लिए भारत आए थे. विवाह के तीन सप्ताह बाद 4 नवंबर को जालंधर से कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बिठा लिया. जोहल का आरोप है कि उन्हें कानूनी सहायता नहीं दी गई और प्रताड़ित कर बयान लिया गया.
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2023 मणिपुर हिंसा शुरू होने से एक दिन पहले सरकार के साथ राजनीतिक समाधान पर हुई थी चर्चा: विद्रोही गुट
विजयेता सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, 3 मई 2023 को मणिपुर में कुकी-जो और मैतेई समुदाय के बीच जातीय हिंसा भड़कने से ठीक एक दिन पहले, कुकी-जो समूह केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के साथ एक राजनीतिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब थे. यह जानकारी ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स’ समझौते में शामिल विद्रोही गुट ‘यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट’ (यूपीएफ) के प्रवक्ता एरॉन किपगेन ने दी.
किपगेन के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर 2 मई 2023 को इंफाल में कुकी विद्रोही संगठनों—केएनओ और यूपीएफ—की केंद्र के वार्ताकार ए.के. मिश्रा और आईबी अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. गृह मंत्रालय का स्पष्ट संदेश था कि 2008 से चले आ रहे ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स’ समझौते का तार्किक अंत किया जाए—या तो राजनीतिक समाधान लागू हो या इस अध्याय को समाप्त किया जाए.
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बिलकिस बानो मामले में दोषी को परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर सात दिन की पैरोल
‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी राधेश्याम शाह को सात दिन की पैरोल दी. अदालत ने उसके परिवार की “आर्थिक स्थिति” और जेल अधिकारियों की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी. न्यायमूर्ति संजीव जे. ठाकेर ने कहा कि याचिका में बताए गए कारणों और जेल प्रशासन की टिप्पणियों पर विचार करने के बाद अदालत पैरोल देने के पक्ष में है.
शाह ने अदालत में पैरोल की मांग करते हुए कहा था कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और उसे आर्थिक मदद के लिए घर जाना जरूरी है. वह 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए 11 लोगों में शामिल है.
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शुभ्रांशु चौधरी | केवल 10 लोगों को सजा देकर इसे न्याय की पूरी प्रक्रिया मान लेना उचित नहीं
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से काम कर चुके पत्रकार और नक्सलवाद पर किताब लिख चुके शुभ्रांशु चौधरी के साथ 2013 के झीरम घाटी हमले और 13 साल बाद आए अदालत के फैसले पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत का सवाल सिर्फ 10 लोगों को मिली मृत्युदंड की सजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समझने की कोशिश भी की गई कि इस हमले की पूरी साजिश, सुरक्षा व्यवस्था, जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कितने सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और विधायक उदय मुदलियार समेत कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों की मौत हुई थी. यह घटना छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई थी और इसे कांग्रेस की एक पूरी राजनीतिक पीढ़ी के खत्म होने वाली बड़ी घटना के रूप में देखा गया. हमले के बाद सुरक्षा में लापरवाही और व्यापक साजिश को लेकर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप हुए.
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मेलघाट से बालाघाट तक: आदिवासी स्वास्थ्य व्यवस्था की न खत्म होने वाली त्रासदी
‘काउंटरकरंट्स’ में विकास परशराम मेश्राम ने लिखा है कि मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा तहसीलों के घने जंगलों में जून-जुलाई से सामने आई घटनाएं केवल किसी महामारी की कहानी नहीं हैं. यह इस बात का उदाहरण हैं कि भारत की स्वास्थ्य योजनाएं जमीनी स्तर पर आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने में किस तरह विफल हो रही हैं और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की उपेक्षा किस तरह जानलेवा बन सकती है.
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से लगे मचुरदा, अडोरी, बोंदारी, कोरका, गतिया, कोन्हीमोर और कुंडेकसा जैसे गांवों में बैगा और गोंड समुदाय के बच्चों को तेज बुखार और शरीर पर लाल चकत्ते होने लगे. कुछ बच्चों की मौत भी हुई, लेकिन प्रशासन तक इसकी सूचना पहुंचने में कई सप्ताह लग गए. अगस्त के मध्य तक स्थिति गंभीर होने के बाद 12 अगस्त को केंद्र ने राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल भेजा. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की टीमों ने रक्त और पानी के नमूनों की जांच की.
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टी. नवीन | दो नागरिक, न्याय की दो रफ्तार
‘काउंटरकरंट्स’ में टी. नवीन ने लिखा है कि सितंबर 2026 में स्वतंत्र भारतद्वाज को जंतर-मंतर पर एक छात्र प्रदर्शनकारी के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया. मामला तब चर्चा में आया जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें भारतद्वाज ने कथित तौर पर हमले की बात स्वीकार की थी. गिरफ्तारी के करीब दस दिन बाद दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि दस दिन की हिरासत उन्हें आत्मचिंतन के लिए पर्याप्त समय दे चुकी होगी.
इसके विपरीत उमर खालिद को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था. छह साल बाद भी वह विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी और अप्रैल में पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई.
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निठारी धारावाहिक हत्या कांड में बरी हुआ सुरेंद्र कोली हरिद्वार में फांसी पर लटका मिला
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, नोएडा के निठारी हत्याकांड से जुड़े आखिरी बचे मामले में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरी किए गए सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान के अंदर मृत पाया गया.
उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले ही चाय की दुकान शुरू करने वाले कोली संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला. पुलिस अधिकारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और उसकी मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है.
राणा ने कहा कि अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव का रहने वाले कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था. चाय की दुकान किराए पर लेने से पहले उसने सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया था. अधिकारी ने बताया कि अल्मोड़ा में उसके परिवार को सूचित कर दिया गया है.
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दिल्ली एसआईआर में 47.7 लाख मतदाता बाहर, कमजोर मतदाताओं की सुरक्षा के अपने ही नियमों की अनदेखी करता चुनाव आयोग
‘आर्टिकल-14’ में पत्रकार अरित्रि दास की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची से 47.7 लाख मतदाताओं को बाहर कर दिया गया. यह राजधानी के लगभग हर तीन मतदाताओं में से एक के नाम के बाहर होने के बराबर है. रिपोर्ट में ऐसे घरेलू कामगारों, कबाड़ संग्रहकर्ताओं और झुग्गी में रहने वाले लोगों के मामले सामने आए हैं, जिनके पास मतदाता पहचान पत्र है और जो पहले चुनावों में मतदान कर चुके हैं, लेकिन इस बार उन्हें फॉर्म और सत्यापन प्रक्रिया में पर्याप्त सहायता नहीं मिली.
फॉर्म और सत्यापन की मुश्किल
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की बंगाली कॉलोनी में रहने वाली 42 वर्षीय घरेलू कामगार मीनू चौधरी का नाम भी मसौदा सूची से बाहर है. उनका कहना है कि तुगलकाबाद के बीएलओ ने उनसे उनके पति के मतदाता पहचान पत्र की जानकारी मांगी, लेकिन पिछले 18 वर्षों से उनका पति से कोई संपर्क नहीं है. उनका नाम एएसडीडी सूची में ‘अनुपस्थित’ श्रेणी में दर्ज किया गया.
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जम्मू-कश्मीर में भूमि अभियान के तहत सरकारी संपत्तियों के कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस
जम्मू और कश्मीर सरकार ने श्रीनगर के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी संपत्तियों के उन कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस जारी किए हैं, जिनकी लीज (पट्टे) की अवधि समाप्त हो चुकी है. इसे 2019 के बाद सरकारी जमीन वापस लेने के व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.
यह पहल उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रशासन द्वारा लागू किए गए 'जम्मू और कश्मीर लैंड ग्रांट रूल्स, 2022' के तहत शुरू किए गए अभियान का हिस्सा लगती है. इन नियमों के तहत प्रशासन को आवासीय उद्देश्यों के लिए मौजूदा/समाप्त पट्टों को छोड़कर, उन सभी पट्टेदारों से जमीन का कब्जा वापस लेने का अधिकार मिला है जिनकी लीज खत्म हो चुकी है. ऐसा न करने पर उन्हें बेदखल कर दिया जाएगा. मुजफ्फर रैना की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में कई लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल का मकसद स्थानीय कब्जाधारियों को संपत्तियों से हटाकर बाहरी लोगों के लिए बोली लगाने का रास्ता साफ करना है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद; 27.16 लाख हटाए गए नामों में से 22.21 लाख ने दी अधिकरण में चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: अमेरिकी 100% दंडात्मक टैरिफ और रूसी तेल आयात के बीच उलझी भारत की ऊर्जा नीति; आगामी राज्य चुनावों पर महंगाई का संभावित असर और कूटनीतिक चुनौतियां.
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में टीएमसी (ममता बनर्जी) का कांग्रेस को ऐतिहासिक समर्थन; 1998 में टीएमसी गठन से 2026 'इंडिया' गठबंधन तक के राजनीतिक सफर का विशेष विश्लेषण.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: नागोया एशियाई खेल 2026 के उद्घाटन समारोह में भारत के पुरुष ध्वजवाहक तजिंदरपाल सिंह तूर की किट भारत में छूटने के बाद किट विवाद; पवन सहरावत बने नए ध्वजवाहक.
'द गार्डियन' रिपोर्ट: 2017 से भारत में बंद ब्रिटिश सिख नागरिक जगतार सिंह जोहल को दिल्ली की अदालत से मिली जमानत; कानूनी देरी और साक्ष्यों की कमी पर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया.
'विजयेता सिंह' की रिपोर्ट: मई 2023 मणिपुर हिंसा से ठीक पहले शांति समझौते के करीब थे कुकी संगठन; हिंसा के बाद पृथक केंद्र शासित प्रदेश (अनुच्छेद 239A) की उठी मांग.
'लाइव लॉ' रिपोर्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार व हत्या मामले के दोषी राधेश्याम शाह को 7 दिन की अंतरिम पैरोल दी; आर्थिक तंगी का हवाला.
'हरकारा डीप डाइव' पॉडकास्ट: 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के 13 साल बाद कोर्ट का फैसला; शुभ्रांशु चौधरी और निधीश त्यागी की बस्तर, सुरक्षा चूक और जांच पर विशेष चर्चा.
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राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के नतीजे आ गए हैं. भाजपा ने 566 वार्ड ज़्यादा जीते, पर वोटों में उसकी बढ़त 1% से भी कम है. भाजपा को 35.19%, कांग्रेस को 34.25% और निर्दलीयों को 27.38% वोट मिले. क्या यह भाजपा की जीत है या कांग्रेस के बिखराव की कहानी? जंतर-मंतर के जन-उभार के बाद पहले बड़े चुनाव में जनता का ग़ुस्सा कहाँ गया? वसुंधरा राजे के झालावाड़ से अर्जुन मेघवाल के बीकानेर तक दिग्गजों के गढ़ में क्या हुआ? और 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए ये नतीजे क्या संकेत देते हैं? निधीश त्यागी की बातचीत जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन से, जो दैनिक भास्कर के कई संस्करणों के संपादक रहे हैं और दशकों से राजस्थान की राजनीति पर लिखते रहे हैं. पढ़ें: harkaraonline.com न्यूज़लेटर: harkara.substack.com स्पॉटिफ़ाई और एपल पॉडकास्ट्स पर भी उपलब्ध बातचीत अच्छी लगी तो अपने हमख़यालों से साझा करें और चैनल सब्सक्राइब करें. हरकारा: शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत ने जमानत, जेल व्यवस्था और न्यायपालिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. लेकिन क्या इस बहस को सिर्फ एक व्यक्ति की जमानत तक सीमित रखना चाहिए? हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत से आगे भारतीय जेल व्यवस्था, विचाराधीन कैदियों, न्याय तक समान पहुंच और मीडिया के अलग-अलग मामलों में अलग रवैये पर विस्तार से बात की. बातचीत में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुरमीत राम रहीम और बिलकिस बानो मामले जैसे संदर्भों के जरिए यह सवाल उठाया गया कि जेल, जमानत और रिहाई को लेकर समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों दिखाई देती है. साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की 'ऑरवेलियन डिस्टोपिया' वाली टिप्पणी, संस्थागत भरोसे और लोकतंत्र में जनता की भूमिका पर भी चर्चा हुई. क्या स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत को सिर्फ कानूनी घटना के रूप में देखना चाहिए? या इसके जरिए न्याय व्यवस्था, मीडिया और समाज के रवैये को भी परखना चाहिए? श्रवण गर्ग इस पूरे सवाल को एक अलग नजरिए से देखते हैं. पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं. स्वतंत्र भारद्वाज सिर्फ एक चेहरा या बड़ी सियासी प्रवृत्ति? | रीबॉर्न मनीष https://youtu.be/D0hg9AC_zD4 #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #SwatantraBhardwaj #IndianJudiciary #Democracy #CivilLiberties
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25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले ने देश की राजनीति को झकझोर दिया था. इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों की मौत हुई. 13 साल बाद इस मामले में 10 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है. लेकिन क्या इस फैसले के साथ झीरम घाटी मामले के सभी सवालों के जवाब मिल गए हैं? इस हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से काम कर चुके पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी के साथ झीरम घाटी हमले की जांच, एनआईए की चार्जशीट, जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग की रिपोर्ट, कथित व्यापक साजिश, सुरक्षा व्यवस्था और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी नेताओं की भूमिका पर विस्तार से बातचीत की. इस बातचीत में सवाल उठता है कि जिन लोगों को सजा मिली है, क्या वे इस हमले के अंतिम जिम्मेदार लोग हैं? चार्जशीट में बताए गए अन्य लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई? 2021 में तैयार जस्टिस मिश्रा आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? और क्या 10 लोगों को सजा मिलने के बाद भी झीरम घाटी मामले की जांच का दायरा बढ़ना चाहिए? साथ ही चर्चा में 2013 की भाजपा की विकास यात्रा और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा, माओवादी संगठन की रणनीति, सुरक्षा व्यवस्था और छत्तीसगढ़ की आत्मसमर्पण नीति से जुड़े सवालों पर भी बात हुई. झीरम घाटी केस में सजा के बाद भी कौन से सवाल बाकी हैं? देखिए पूरा हरकारा डीप डाइव. #Harkara #HarkaraDeepDive #JiramGhati #JhiramGhati #Bastar #Chhattisgarh #Naxalism #Maoist #NIA #NidheeshTyagi