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वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी ने बोला हमला, कहा- ‘ज्ञानेश कुमार जेल भेजे जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर छिड़े भारी विवाद के बीच, बिहार में महागठबंधन के घटक दल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग प्रमुख पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें एक खून (हत्या) माफ कर दिया जाए, तो वे जिस पहले व्यक्ति को गोली मारेंगे, वह ज्ञानेश कुमार होंगे. हालांकि, इसी सांस में उन्होंने यह भी कहा, "हम क्या कर सकते हैं, हम कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं जो संविधान का सम्मान करते हैं."
‘द हिंदू’ में अमरनाथ तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, बॉलीवुड के पूर्व सेट डिजाइनर सहनी ने 2018 में विकासशील इंसान पार्टी का गठन किया था. वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले निषाद और मल्लाह (मछुआरों और नाविकों) समुदायों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, जिसमें मछुआरों की लगभग 20 उप-जातियां शामिल हैं जो पारंपरिक रूप से अपनी आजीविका के लिए नदियों पर निर्भर रही हैं. बिहार की आबादी में इस जाति की हिस्सेदारी 9% के करीब है. उन्हें 'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से भी जाना जाता है और वे अपने राजनीतिक पल्टीमार (राजनीतिक रुख बदलने वाले) रवैये के लिए भी चर्चित रहे हैं.
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बिहार में ‘एसआईआर’ लागू होने के बाद फॉर्म 6 के घोषणा पत्र भाग में हुआ बदलाव, जबकि इसकी शक्ति ईसी के पास नहीं
पिछले साल बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण के दौरान पहली बार पेश किए गए फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणा पत्र में बाद के चरणों में बड़े बदलाव किए गए हैं.
भारत निर्वाचन आयोग नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 का उपयोग करता है. बिहार में, इस घोषणा पत्र के जरिए नए मतदाता के जन्म की सटीक समयावधि (कि जन्म 1987 से पहले हुआ था, 1987 और 2004 के बीच हुआ था, या 2004 के बाद हुआ था) की पुष्टि मांगी गई थी, जिसके आधार पर भावी मतदाता को दस्तावेज जमा करने होते थे.
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मणिपुर के सेनापति जिले में दो नागा नागरिकों की हत्या, दो घायल; 48 घंटे में दूसरी वारदात
म्यानमार स्थित हमलावरों द्वारा कामजोंग जिले में चार लोगों की गोली मारकर हत्या करने के महज 48 घंटे के भीतर शनिवार (26 सितंबर, 2026) को मणिपुर के सेनापति जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने दो नागा नागरिकों की हत्या कर दी.
जिला अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर सके कि चौवाईनामेई गांव के रॉकी माओ और लाई शिराफी गांव के कुमार पोमई के रूप में पहचाने गए दो नागा पुरुषों की हत्या कैसे की गई या घटना का कारण क्या था.
‘द हिंदू’ ब्यूरो के मुताबिक, सेनापति एक नागा बहुल जिला है. मृतकों में से एक माओ नागा और दूसरा पोमई नागा समुदाय से है, वहीं, घायल हुए दो अन्य लोग — अशिशो सानी और अदानी मानियो — माओ नागा समुदाय से हैं.
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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा: एससी-एसटी के सांसदों को संसद में बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे एक पत्र में कहा है कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से आने वाले सांसदों को "बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता है."
मांझी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख हैं, जो सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक सहयोगी दल है.
शोभना के. नायर की रिपोर्ट के अनुसार, 16 सितंबर की तारीख वाले अपने पत्र में, मांझी ने 5 अगस्त को अपने आवास पर आयोजित "एनडीए सांसद समूह संवाद बैठक" का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के खरगोन (सुरक्षित जनजातीय निर्वाचन क्षेत्र) से भाजपा के लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया था कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान एससी/एसटी समुदायों के सांसदों को बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है.
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मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में एएफएसपीए छह महीने के लिए बढ़ा
‘पीटीआई’ के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम यानी एएफएसपीए को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. यह फैसला इन इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है.
मणिपुर में 13 थाना क्षेत्र एएफएसपीए से बाहर
मणिपुर में 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक पूरे राज्य को ‘अशांत क्षेत्र’ माना जाएगा. हालांकि, पांच घाटी जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है. इनमें इम्फाल, लांफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगांग, इरिलबुंग, थौबल, बिष्णुपुर, नंबोल और काकचिंग शामिल हैं.
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महाराष्ट्र के 74% हिस्से में सूखे जैसी स्थिति घोषित
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को मानसून में कम बारिश के कारण राज्य के लगभग 74% तालुकों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की. सरकार ने 358 में से 265 तालुकों में फसल नुकसान का आकलन करने और किसानों के लिए राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं.
सरकारी आदेश के तहत प्रभावित क्षेत्रों में 12 तरह की राहत उपलब्ध कराई जा सकेगी. इनमें भूमि राजस्व की वसूली से छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत और पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर उपलब्ध कराना शामिल है.
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ज्ञानेश कुमार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है; ठाकरे बंधुओं ने वादा किया, ‘मुंबई सड़कों पर उतरेगी’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस सप्ताह की शुरुआत में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा यह रिपोर्ट किए जाने के बाद से ही वे विवादों के केंद्र में हैं कि देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदमों पर दो चुनाव आयुक्तों ने बार-बार आपत्ति जताई थी. इस प्रक्रिया के तहत देश भर में लाखों नाम मतदाता सूचियों से हटाए और जोड़े गए हैं.
शनिवार को राज ठाकरे, उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और भतीजे आदित्य ठाकरे ने वादा किया कि भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई, मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कुमार को हटाने की मांग करने वाले आंदोलन का पूरी ताकत से समर्थन करेगी. विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रतिनिधि अगले कदमों पर समन्वय बढ़ाने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में बैठक भी करेंगे.
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‘भाजपा सरकार पर काला धब्बा’: राजस्थान में थाने के बाहर मुस्लिम व्यक्ति की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या
‘द वायर’ में दीप मुखर्जी ने लिखा है कि राजस्थान के अलवर जिले में 40 वर्षीय सैकुन खान की बरौड़ा मेव पुलिस थाने के बाहर पत्थर से हमला कर हत्या कर दी गई. परिवार ने आशंका जताई है कि उनकी दाढ़ी और टोपी के कारण उन्हें निशाना बनाया गया, जबकि पुलिस ने हत्या को घृणा अपराध मानने से इनकार किया है.
24 सितंबर की सुबह बरवास गांव निवासी सैकुन अपने बेटे को यह बताकर निकले थे कि वे मोटरसाइकिल का टायर खरीदने बाजार जा रहे हैं और लौटकर खेत में बोई प्याज की फसल की देखभाल करेंगे. परिवार के मुताबिक, वे एक अन्य ग्रामीण के साथ बरौड़ा मेव पहुंचे थे. थाने के मुख्य द्वार के पास एक व्यक्ति ने उनके सिर पर भारी पत्थर से हमला किया. गिरने के बाद उनके पैर मोटरसाइकिल के नीचे फंस गए. इसके बाद आरोपी ने नुकीले पत्थर से कई वार किए, जिससे उनका सिर बुरी तरह कुचल गया.
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अरुण श्रीवास्तव | धर्मनिरपेक्ष भारत की पहचान बदलने की दक्षिणपंथी योजना उजागर
‘काउंटरकरंट्स’ में अरुण श्रीवास्तव ने लिखा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे कथित राजनीतिक मंशा उजागर होने से भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान और चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल 2029 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत सुनिश्चित करने और देश को हिंदू राष्ट्र की दिशा में ले जाने के लिए किया जा रहा है.
श्रीवास्तव के मुताबिक, विपक्षी दलों ने एसआईआर को मुख्य रूप से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित किए जाने के रूप में देखा, लेकिन मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 18 करोड़ नामों की पृष्ठभूमि की पड़ताल नहीं की. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन सभी मतदाताओं को रोहिंग्या या बांग्लादेशी घुसपैठिया मान लिया गया था. लेख में बांग्लादेश की आबादी लगभग 11 करोड़ और भारत में रह रहे रोहिंग्या लोगों की संख्या करीब 5,000 बताई गई है. लेखक का कहना है कि दोनों समूहों की कुल संख्या हटाए गए मतदाताओं से बहुत कम है.
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एचडी कुमारस्वामी भी एनडीए के सहयोगी दलों के साथ जुड़े, चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की
एक दिन पहले एनडीए के तीन प्रमुख सहयोगी दलों द्वारा चुनाव आयोग से सच्चाई सामने लाने की मांग के बाद, जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने भी शनिवार को भारत निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह अपने तीन शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेदों की रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण दे और संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जनता के सामने तथ्य रखे.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग एक जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है, जिसने पिछले 78 वर्षों में देश में लोकतंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जेडी (एस) एनडीए का हिस्सा है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), तेलुगु देशम पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा चुनाव आयोग से अधिक स्पष्टता की मांग के विपरीत, बीजेपी ने आयोग का बचाव करते हुए इसके भीतर सामने आए मतभेदों को "शुद्ध लोकतंत्र" करार दिया है.
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मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों की मदद से प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संयुक्त विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपा जाएगा.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, यह घटनाक्रम उसकी इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर आंतरिक रूप से लिखित आपत्तियां जताई थीं. त्रि-सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त 'बराबर वालों में प्रथम' होते हैं और नियमतः फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए.
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अजित साही | मोदी जी की रवानगी अब तय है
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ चुनाव आयोग में कथित असहमति, राहुल गांधी के आरोपों, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और केंद्र सरकार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की.
बातचीत में साही ने इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण बताया, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही गई थी. साही के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति और मतदाता सूची से जुड़े सवाल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं.
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चुनाव आयोग में अभूतपूर्व दरार: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने ईसी के कदमों पर दर्ज कराई आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है. हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष जांच ने इस प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर पनप रहे अभूतपूर्व असंतोष और प्रशासनिक दरार को उजागर कर दिया है.
रीतिका चोपड़ा की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम—जो कि मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है—अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन चुका है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. बड़े पैमाने पर की गई इस कटौती ने पूरे देश में इस बात पर बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का निर्धारण आखिर किस प्रक्रिया के तहत हो रहा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द हिंदू' रिपोर्ट: अमरनाथ तिवारी का खुलासा; VIP प्रमुख मुकेश सहनी का चुनाव आयोग प्रमुख पर तीखा हमला, अति पिछड़ा वर्ग समीकरण और राहुल गांधी पर बयान.
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: श्रीपर्णा चक्रवर्ती का खुलासा; एसआईआर (SIR) के फॉर्म 6 में नए मतदाता पंजीकरण नियमों, ऑनलाइन पोर्टल बदलावों और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर रिपोर्ट.
'द हिंदू' रिपोर्ट: मणिपुर के सेनापति जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने दो नागा नागरिकों की हत्या की; नागा निकाय UNC ने अस्थायी रूप से हटाई आर्थिक नाकेबंदी.
'द हिंदू' रिपोर्ट: शोभना के. नायर का खुलासा; केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में एससी/एसटी सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय देने की मांग की.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: महाराष्ट्र के 74% तालुकों (265 तालुकों) में सूखे जैसी स्थिति घोषित; मानसून में कम बारिश के बाद सरकार ने 12 तरह के राहत उपायों के निर्देश दिए.
'द वायर' रिपोर्ट: राजस्थान के अलवर (बरौड़ा मेव) में पुलिस थाने के बाहर सैकुन खान की पत्थर से हत्या; परिजनों ने जताई नफरती अपराध की आशंका, पुलिस का इनकार.
'काउंटरकरंट्स' रिपोर्ट: अरुण श्रीवास्तव का विश्लेषण; एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से 18 करोड़ नाम हटने पर एनडीए सहयोगियों, चुनाव आयोग की अंदरूनी असहमति और सुप्रीम कोर्ट पर रिपोर्ट.
'पीटीआई' व मीडिया रिपोर्ट: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और सीजेपी का हल्लाबोल; 2 अक्टूबर से मुंबई में विरोध प्रदर्शन, आदित्य व राज ठाकरे का समर्थन.
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चुनाव आयोग को लेकर सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और उसके बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर बहस तेज कर दी है. इस Harkara Deep Dive में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इसी पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित असहमति, 10 महीनों में दर्ज किए गए डिसेंट नोट्स, मतदाता सूची से जुड़े सवाल और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टिंग के आधार पर सामने आए मुद्दों पर बात हुई. साथ ही राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए वोट चोरी और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा हुई. क्या राहुल गांधी के आरोप और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट एक ही मुद्दे की ओर इशारा करते हैं या दोनों को अलग-अलग समझने की जरूरत है? रिपोर्ट को लेकर उठे पत्रकारिता और स्रोतों से जुड़े सवाल क्या हैं? और क्या चुनाव आयोग के भीतर चल रही कथित असहमति का आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक या संस्थागत असर दिखाई देगा? श्रवण गर्ग ने खोजी पत्रकारिता की प्रक्रिया, डिसेंट नोट्स के सामने आने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवालों पर अपनी बात रखी. देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की पूरी बातचीत. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #ElectionCommission #GyaneshKumar #RahulGandhi #IndianExpress #SIR #IndianPolitics
आकार पटेल को एसआईआर का नोटिस व्हाट्सएप पर मिला. उन्होंने पहले तय किया कि नहीं जाएँगे — "भाड़ में जाए वोट". फिर पत्नी लौटकर बोलीं कि खिड़की के उस पार बैठा आदमी दुखी था कि आपने जवाब तक नहीं दिया. आकार काग़ज़ों की फ़ाइल लेकर पहुँचे. जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल सर्टिफ़िकेट 2006 की सूरत बाढ़ में बह चुके हैं, पासपोर्ट अदालत के पास ज़ब्त है. इस बातचीत में लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल बताते हैं कि एसआईआर की गड़बड़ी सिर्फ़ प्रक्रिया की नहीं, बुनियाद की है: सबूत का बोझ नागरिक पर डाल दिया गया है. सरकार को साबित करना चाहिए कि कोई नाम संदिग्ध है, न कि हर नागरिक को कि वह मौजूद है. दो चरणों के बाद 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुद्ध रूप से करीब 5.84 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं. तीसरा चरण 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में जारी है. हरकारा स्वतंत्र हिंदी पत्रकारिता का मंच है. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. हमारा साथ दें, सब्सक्राइब करें और घंटी दबाएँ. आकार पटेल का लेख: https://www.harkaraonline.com/latest-articles/ep2y76ft64pbdlpb22mfea94hfshfe चुनाव आयोग में 14 आपत्तियां! क्या ज्ञानेश कुमार ने अनसुनी की सहयोगियों की बात? | श्रवण गर्ग #harkara https://youtu.be/LvkuPUKKokQ वेबसाइट: harkaraonline.com
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क्या चुनाव आयोग के भीतर दर्ज असहमतियां और मतदाता सूची से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे की नई बहस खड़ी कर रहे हैं? राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, जंतर-मंतर पर युवाओं का विरोध और केंद्र सरकार की राजनीतिक चुनौतियां—इन मुद्दों पर हरकारा डीप डाइव के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही से विस्तार से बातचीत की. चर्चा में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद, एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े विवाद, सरकार की निर्णय प्रक्रिया, युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और भाजपा, आरएसएस तथा हिंदुत्व की राजनीति के भविष्य को लेकर साही के विश्लेषण और आकलन शामिल हैं. पूरी बातचीत देखें और अपनी राय कमेंट में साझा करें. वीडियो पसंद आए तो लाइक, शेयर और हरकारा को सब्सक्राइब करें. #HarkaraDeepDive #AjitSahi #NidheeshTyagi #ElectionCommission #RahulGandhi #IndianPolitics #Democracy