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अजित साही | लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि सरकार आलोचना को कितनी जगह देती है
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार अजित साही ने छात्र आंदोलन के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम, सरकार की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों पर विस्तार से चर्चा की.
अजित साही का कहना है कि आंदोलन की प्रमुख मांगें मान लिए जाने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई वापस लेने के आश्वासन के बावजूद कई जगह पुलिस पूछताछ, निगरानी और एफआईआर की खबरें सामने आ रही हैं. उनके अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सरकार की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा भी माना जा सकता है.
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जैसे-जैसे मोदी युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम रील्स बना रहे हैं, उनसे सवाल हो रहा है- “अपनी स्किनकेयर रूटीन बताइए”
भारत की डिजिटल-नेटिव (डिजिटल युग में पली-बढ़ी) युवाओं की गुस्सैल पीढ़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चमकती त्वचा को अपना निशाना बनाया है, जो अब उन्हीं लोगों से सीधे बात करने के प्रयास में देर रात सोशल मीडिया वीडियो पोस्ट कर रहे हैं.
अहेली बनर्जी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पोस्ट की जाने वाली हर इंस्टाग्राम रील पर एक ही तरह के कमेंट आ रहे हैं: "अपनी स्किनकेयर रूटीन बताइए." जो एक मज़ाक के रूप में शुरू हुआ था, उसने धीरे-धीरे एक विरोध-प्रदर्शन के नारे का रूप ले लिया है. 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके के युवा आलोचक इसका इस्तेमाल यह उजागर करने के लिए कर रहे हैं कि वे इसे क्या मानते हैं
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अडानी समूह ने ऑस्ट्रेलिया में कोयला खनन से 1 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया, लेकिन नहीं देगा कोई कॉर्पोरेट टैक्स
अडानी उद्योग समूह, पिछले एक वर्ष में क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया) में कोयला खनन से लगभग $1 बिलियन (करीब 9,500 करोड़ रुपये) का राजस्व अर्जित करने के बावजूद कोई कंपनी टैक्स नहीं देगा.
‘द गार्डियन’ में जोनाथन बैरेट की रिपोर्ट के अनुसार, कार्माइक्ल थर्मल कोल परिचालन ने 31 मार्च तक के 12 महीनों में अपने $963.5 मिलियन (करीब 9,100 करोड़ रुपये) के राजस्व की भरपाई करने के लिए बड़े खर्चों—जिसमें उत्पादन और संबंधित पक्षों के लॉजिस्टिक्स खर्च शामिल हैं—का उपयोग किया. इसके परिणामस्वरूप वर्ष के लिए $340.6 मिलियन (करीब 32 अरब रुपये) का घाटा दर्ज किया गया, जिससे इसका टैक्स बिल पूरी तरह समाप्त हो गया.
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यूएन प्रमुख की चेतावनी: पृथ्वी ‘आग की लपटों में है’, भारत की मानसून बारिश पर मंडराया खतरा
जलवायु संकट के कारण इस वर्ष प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली ‘अल नीनो’ प्रणाली विकसित हो रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर तापमान बढ़ने और चरम मौसम की आशंका है. इसका सबसे गंभीर प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ सकता है, जिससे सामान्य से कम बारिश और सूखे का खतरा बढ़ गया है, जो कृषि और किसानों को प्रभावित करेगा, जैसा कि ‘द गार्डियन’ में फियोना हार्वे ने अपनी रिपोर्ट में बताया है.
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है. अगस्त से अक्टूबर के दौरान यह स्थिति और विकराल हो सकती है,
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'मार देंगे, रेप करेंगे': मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली युवतियों को कैसे बनाया जा रहा है निशाना
‘स्क्रोल’ में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में पत्रकार आयुषी तिवारी ने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बाद महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकियों और कानूनी कार्रवाई की पड़ताल की है. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी या आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली कई युवा महिलाओं को सोशल मीडिया पर संगठित ट्रोलिंग, बलात्कार और हत्या की धमकियों, निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने (डॉक्सिंग) और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.
मध्य प्रदेश की 23 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर और योग प्रशिक्षक श्रद्धा सिंह प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल हुई थीं. प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों के साथ सात सेकंड की एक इंस्टाग्राम रील बनाई.
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एम. राजशेखर | भारत अपने डेटा सेंटरों को ऊर्जा कैसे दे?
‘कार्बनकॉपी’ में प्रकाशित अपने विश्लेषण में पत्रकार एम. राजशेखर ने भारत में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर उद्योग और उससे जुड़ी बिजली, पानी, पर्यावरण तथा सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों की पड़ताल की है. उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ देश में डेटा सेंटरों की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस विकास के साथ कई गंभीर नीतिगत और पर्यावरणीय चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.
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राकेश कायस्थ | किसने चुराई हमारी नीली जर्सी?
जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावा लूट लिया गया. जिस तरह जनता की गाढ़ी कमाई जेब में आते ही छूत-मंतर हो जाती है, जिस पुल नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर लेते हैं और सुसाइड नोट में लिख जाते हैं कि मैंने बालू और सीमेंट नहीं खाया, जिस तरह इस देश में विधायक और सांसद चोरी हो जाते हैं, उसी तरह हम सबकी आँखों में बसी भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी भी चोरी हो गई. नीला यानी सपनों का रंग, आसमान का रंग, वो रंग जिसे देखकर हर हिंदुस्तानी के मन में जगते थे अरमान—हॉकी का सुनहरा दौर फिर से वापस आएगा.
सुनहरा दौर आया भी. चार दशक के लंबे इंतज़ार के बाद भारत ने टोकियो ओलंपिक में ब्रांज मेडल जीता और यही कारनामा पेरिस के अगले ओलंपिक में भी दोहराया. बैक टू बैक दो मेडल, वो भी चार दशक के इंतज़ार के बाद.
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हरियाणा में 16.4% और आंध्र प्रदेश में 10.8% मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटे
‘स्क्रोल’ रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को हरियाणा और आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई. ड्राफ्ट सूची के अनुसार हरियाणा में 16.4% और आंध्र प्रदेश में 10.8% मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
आंध्र प्रदेश में करीब 45 लाख और हरियाणा में 33.8 लाख नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए. दोनों राज्यों में गणना की प्रक्रिया 24 जुलाई को पूरी हुई थी.
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सुप्रीम कोर्ट के जज ने कॉलेजियम की अपारदर्शिता पर उठाए सवाल, बोले- न्यायपालिका में ‘लोगों को चींटियाँ’ बताने वाले आ जाते हैं
न्यायिक नियुक्तियों के कारण न बताने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की आलोचना करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुयान ने शनिवार को कहा कि पारदर्शिता की कमी ऐसे व्यक्तियों के न्यायपालिका में प्रवेश करने का अवसर बनाती है जो बाद में असंवैधानिक या आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हैं. जैसे- “लोगों को चींटियाँ” बताना.
‘एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस’ के मुताबिक, एक रिपोर्ट के विमोचन पर बोलते हुए, जस्टिस भुयान ने जजों की सिफारिश के लिए कारण दर्ज करने की कॉलेजियम की पिछली प्रथा से हाल ही में पीछे हटने पर सवाल उठाया.
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द गार्डियन | ‘कॉकरोच’ विरोध प्रदर्शनों ने भारत सरकार की दरारों को किस तरह उजागर किया है
‘द गार्डियन’ में हेटी ओ'ब्रायन ने लिखा है कि इस सप्ताहांत जहाँ फ़्रांस और स्पेन के कुछ हिस्से आग की लपटों में घिरे थे, वहीं भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बिल्कुल अलग तरह की आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे. शनिवार को दिल्ली में हज़ारों लोग उनके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग करने पहुँचे. दोपहर बाद जैसे ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया, विरोध प्रदर्शन एक विजयी जश्न में बदल गए.
लेकिन इस गर्मी में पूरे भारत में फैले 'कॉकरोच' (तिलचट्टा) विरोध प्रदर्शन किसी एक मंत्री से कहीं अधिक बड़े मुद्दे को लेकर हैं. इन्होंने मोदी को नीचा दिखाया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उस अजेय शक्ति को कमज़ोर किया है
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23 साल पहले लापता हुआ था बेटा, पता चलते ही तमिलनाडु से पंजाब पहुंच गई माँ
‘बीबीसी’ में ज़ेवियर सेल्वाकुमार और हरमनदीप सिंह के अनुसार, यह कहानी तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली सुंदरी और उनके बेटे प्रकाशम की है, जो 23 साल पहले लापता हो गए थे और जिन्हें पंजाब में 15 सालों तक बंधुआ मज़दूर बनाकर भयानक यातनाएँ दी गईं.
साल 2003 में, 16 वर्षीय प्रकाशम अपने छोटे भाई से दोपहिया वाहन चलाने को लेकर हुए झगड़े के बाद गुस्से में घर छोड़कर चले गए थे. परिवार और पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद उनका कोई पता नहीं चला. सुंदरी और उनके पति रामामूर्ति ने अपने बेटे की तलाश में सालों गुज़ार दिए. रामामूर्ति को हमेशा विश्वास था कि उनका बेटा ज़िंदा है, लेकिन 2021 में कैंसर से उनका निधन हो गया. सुंदरी अपने छोटे बेटे प्रभु के साथ खेती और मवेशी पालकर गुज़ारा करने लगीं.
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सुप्रीम कोर्ट ने अब आवश्यक मामलों के “उल्लेख” के दौरान लाइव स्ट्रीम का ऑडियो भी बंद किया
विशेष अदालत द्वारा कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों के सिलसिले में मनमोहन सिंह को समन भेजे जाने के एक दशक से भी अधिक समय बाद, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें दिवंगत प्रधानमंत्री को इस मामले में बेदाग (क्लीन चिट) करार दिया गया है. याद हो, 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले भाजपा ने कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर सिंह पर बार-बार निशाना साधा था और इसे “कोलगेट घोटाला” नाम दिया था. नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मनमोहन सिंह पर सरकारी खजाने को हुए भारी नुकसान के लिए नैतिक, राजनीतिक और प्रत्यक्ष जिम्मेदारी का आरोप लगाया था और चुनाव अभियानों व संसदीय बहसों के दौरान बार-बार इस कथित घोटाले का जिक्र किया था. लिहाजा कांग्रेस ने कहा है कि मोदी को देश से माफी मांगना चाहिए.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'इंडियन एक्सप्रेस' की विशेष रिपोर्ट: जानिए कैसे भारतीय उच्च शिक्षा संकट, छात्र असंतोष और कुलपतियों की भूमिका पर उठ रहे हैं तीखे सवाल.
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में नाम और पहचान पूछकर छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों—दीपक रात्रे और भूपिंदर भैना—की आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या की दर्दनाक दास्तान.
'एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस' की रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुयान ने कॉलेजियम में पारदर्शिता की कमी और जजों की नियुक्ति के कारण न बताने पर उठाए गंभीर सवाल.
राकेश कायस्थ का विशेष विश्लेषण: जानिए कैसे छात्र आंदोलन और गालियों के शोर पर पीएम मोदी की इंस्टाग्राम रील और युवा असंतोष पर तीखे सवाल खड़े हुए.
'हरकारा डीप डाइव' लाइव में अजित साही का विश्लेषण: छात्र आंदोलन के बाद पुलिस कार्रवाई, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही पर उठते गंभीर सवाल.
'अहेली बनर्जी' का विश्लेषण: जानिए कैसे परीक्षा सुधारों और छात्र असंतोष के बीच पीएम मोदी की इंस्टाग्राम रील्स पर युवाओं का 'स्किनकेयर रूटीन' तंज एक राजनीतिक नारे में बदल गया.
'द गार्डियन' में जोनाथन बैरेट की रिपोर्ट: ऑस्ट्रेलिया के कार्माइक्ल माइंस से अरबों रुपये कमाने के बावजूद अडानी समूह ने दर्ज कराया घाटा, नहीं चुकाया कॉर्पोरेट टैक्स.
'द गार्डियन' में फियोना हार्वे की रिपोर्ट: जानिए कैसे प्रशांत महासागर में अल नीनो और बढ़ते वैश्विक तापमान से भारतीय मानसून और कृषि पर मंडरा रहा है सूखे का खतरा.
वीडियो
राम मंदिर ट्रस्ट में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी का मामला है, या इससे राम मंदिर आंदोलन, न्यायिक प्रक्रिया, राजनीतिक परियोजना और संस्थागत जवाबदेही पर भी बहस जुड़ती है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने प्रोफेसर अपूर्वानंद से इन्हीं सवालों पर विस्तार से बातचीत की. चर्चा में राम जन्मभूमि आंदोलन की राजनीतिक पृष्ठभूमि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले, राम मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही, जांच एजेंसियों पर भरोसा, आरएसएस की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर प्रो. अपूर्वानंद ने अपने विचार रखे. यह बातचीत समकालीन राजनीति, इतिहास और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाती है. अगर वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, शेयर करें और हरकारा को सब्सक्राइब करना न भूलें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. #RamMandir #Ayodhya #Harkara #DeepDive #Apoorvanand #NidheeshTyagi #Politics #SupremeCourt #RSS #BJP #IndianPolitics #HindiNews #CurrentAffairs
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार मिल रहे विदेशी सम्मान क्या भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं, या इनके पीछे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की कोई अलग कहानी छिपी है? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और निधीश त्यागी चर्चा करते हैं कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं, विदेशी पुरस्कारों, इंडियन डायस्पोरा की राजनीति और भारत के भीतर मौजूद चुनौतियों को किस नज़र से देखा जाना चाहिए. इस बातचीत में चर्चा के प्रमुख मुद्दे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल रहे विदेशी सम्मान. विदेशी पुरस्कारों पर उठे सवाल और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट. इंडियन डायस्पोरा की भूमिका और विदेश यात्राओं की राजनीति. भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और घरेलू चुनौतियां. विदेश नीति, कूटनीति और रणनीतिक हित. क्या विदेशी सम्मान घरेलू राजनीति को प्रभावित करते हैं? अगर आपको यह विश्लेषण महत्वपूर्ण लगा हो तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें. हरकारा. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
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20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था? पुलिस कार्रवाई के दौरान आखिर ऐसा क्या हुआ कि वरिष्ठ पत्रकार और कवि चंद्रभूषण को भी हिरासत में लिया गया? हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभूषण ने जंतर-मंतर की अपनी आंखों देखी साझा की. उन्होंने बताया कि किस तरह हजारों छात्रों और युवाओं की भीड़, पुलिस की बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज, हिरासत और आंदोलन के बदलते स्वरूप ने भारतीय लोकतंत्र के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं. क्या यह केवल एक छात्र आंदोलन है या भारतीय राजनीति में एक नए सामाजिक उभार की शुरुआत? क्या सरकार इस नए तरह के स्वतःस्फूर्त जन आंदोलन को समझ पाने में असफल रही है? और आखिर क्यों चंद्रभूषण कहते हैं कि “सर कुछ बदले चाहे न बदले, हम तो बदल गए.” इस बातचीत में जानिए. जंतर-मंतर की पूरी आंखों देखी. पुलिस कार्रवाई और हिरासत का अनुभव. आंदोलन में शामिल युवाओं की मनःस्थिति. सोनम वांगचुक और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा. * सरकार के डर और लोकतंत्र के भविष्य पर चंद्रभूषण का विश्लेषण. #HarkaraDeepDive #JantarMantar #Chandrabhushan #NidheeshTyagi #SonamWangchuk #StudentProtest #DelhiPolice #Democracy #Harkara