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श्रवण गर्ग | जनता अब तमाशबीन नहीं, भागीदार है
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए मार्च, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की. बातचीत में गर्ग ने इस घटनाक्रम को केवल विपक्ष के प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि राजनीति में जनता की बढ़ती भागीदारी के संकेत के तौर पर देखा. उनके अनुसार, अब विपक्ष जनता को अपने साथ जोड़ने के बजाय जनता के दबाव में अपनी भूमिका तय करने को मजबूर हो रहा है.
श्रवण गर्ग ने दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर उतरने को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना बताया. उन्होंने कहा कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शनकारियों का जुटना नागरिकों के साहस को दर्शाता है. उनके मुताबिक, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का एक साथ आना विपक्षी एकजुटता का नया संकेत है. उन्होंने इस बदलाव को इन शब्दों में व्यक्त किया, “जनता अब तमाशबीन नहीं है, वह भागीदार है.” गर्ग का मानना है कि जनता का दबाव विपक्ष की राजनीति और उसकी रणनीति को प्रभावित कर रहा है.
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लात-घूंसे, थप्पड़ और मारपीट: दिल्ली पुलिस की बस में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप, नाबालिगों को भी पीटा
‘आर्टिकल-14’ में बेतवा शर्मा और सबा गुरमत लिखती हैं कि 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश प्रकाश के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट करने, नाबालिगों को पीटने, मोबाइल फोन जब्त करने और भोजन, पानी व चिकित्सा सहायता से वंचित रखने का आरोप लगाया है. चार प्रत्यक्षदर्शियों ने इस संबंध में अपनी आपबीती साझा की. दिल्ली पुलिस से फोन और ईमेल के जरिए प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था.
नरेगा संघर्ष मोर्चा के 30 वर्षीय कार्यकर्ता अर्जुन उन्नीकृष्णन ने आरोप लगाया कि मध्य दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने बस के भीतर उन्हें चेहरे, पीठ और निजी अंगों पर लात-घूंसों से पीटा. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के 20 वर्षीय सदस्य विशाल कुमार ने भी मारपीट का आरोप लगाया. उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उनके घुटने पर प्रहार किया, कोहनियों से चोट पहुंचाई और चेहरे तथा पेट पर मुक्के मारे.
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केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में शाजू फिलिप की रिपोर्ट के मुताबिक, कि केरल विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया. ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाली केरल देश की पहली विधानसभा बन गई है. प्रस्ताव में केंद्र सरकार से कुमार को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया गया है.
140 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने यह प्रस्ताव पेश किया. सदन में कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के 102 सदस्य हैं, जबकि वामपंथी दलों के 35 विधायक हैं. वाम दलों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.
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गोदी मीडिया का पतन: स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे सरकार के नैरेटिव को चुनौती दे रही है
‘काउंटरकरंट्स’ में मोहम्मद जियाउल्लाह खान लिखते हैं कि भाजपा सरकार के ‘अच्छे दिन’ का वादा पूरा नहीं हुआ है, लेकिन एक बदलाव उम्मीद जगाता है. अब अधिक भारतीय पारंपरिक टेलीविजन स्टूडियो से बाहर खबरें तलाश रहे हैं. वर्षों तक प्राइम टाइम में भारत को विश्वगुरु बनने की ओर बढ़ता देश और उसके नेतृत्व को अजेय बताया गया. रोजगार, शिक्षा, महंगाई और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के बजाय हिंदू-मुस्लिम संबंधों, राष्ट्रवाद और पाकिस्तान पर बहस को अधिक जगह मिली.
इसी पत्रकारिता शैली के कारण कई समाचार संस्थानों को आलोचकों ने ‘गोदी मीडिया’ कहना शुरू किया. इसका अर्थ यह नहीं कि हर टेलीविजन पत्रकार समझौता कर चुका है या सरकार के पक्ष में हर खबर प्रचार है. असली सवाल यह है कि क्या मीडिया सत्ता में बैठे लोगों की भी उतनी ही कठोरता से जांच करता है, जितनी विपक्ष की. लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका सरकार का समर्थन करना नहीं, बल्कि उसके कामकाज पर स्वतंत्र निगरानी रखना है.
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जयश्री पिंगले | सरकार के हाथ से नैरेटिव निकल चुका है, उसकी विश्वसनीयता दांव पर है
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक जयश्री पिंगले के साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और सरकार के राजनीतिक संकट पर चर्चा की. बातचीत में दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों, युवाओं के बढ़ते असंतोष और भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामने खड़ी चुनौतियों पर सवाल उठाए गए.
जयश्री पिंगले ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए की गई व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने जन आंदोलनों के सहारे अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाई, उसी की सरकार आज प्रदर्शन कर रहे युवाओं को रोकने के लिए सड़कों पर कीलें लगा रही है, बैरिकेडिंग कर रही है और परिवहन सेवाओं को बाधित कर रही है. उनके अनुसार, यह स्थिति सरकार के भीतर बढ़ते असमंजस और उसकी राजनीतिक रणनीति की कमजोरियों को उजागर करती है.
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अक्षय राउत | भारतीय चुनावों की चमक को बनाए रखने की आवश्यकता
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के आसपास हो रहे निरंतर विरोध प्रदर्शनों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या अपनी निष्पक्षता के लिए प्रसिद्ध भारतीय चुनाव प्रणाली अपनी चमक खो रही है? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इसके प्रबंधन पर उठे सवालों ने विवाद खड़ा किया है, लेकिन चुनावी संकट केवल यहीं तक सीमित नहीं है.
‘द हिंदू’ में अक्षय राउत लिखते हैं कि दशकों से भारत की सबसे बड़ी 'सॉफ्ट पावर' माने जाने वाले चुनावों का मूल्यह्रास चिंताजनक है. एशिया और अफ्रीका के कई देशों की तुलना में भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत रही हैं. लेकिन आज चुनावी प्रणाली के प्रति गिरते विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए चुनाव प्रबंधकों, कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मतदाताओं को एक साथ सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है.
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कर्नाटक: मतदाता सूची से नाम हटाने वाले हजारों फॉर्म सार्वजनिक जांच के लिए पोर्टल पर उपलब्ध नहीं
‘द हिंदू’ में ऋषिता खन्ना और पोन वसंत बी.ए. की रिपोर्ट है कि कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 8 अक्टूबर 2026 तक प्राप्त फॉर्म 7 आवेदनों में से लगभग 29,000 आवेदनों का विवरण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) या भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइटों पर सार्वजनिक नहीं किया गया है. ये फॉर्म मुख्य रूप से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जमा किए गए हैं.
यह स्थिति तब है जब सीईओ और निर्वाचन आयोग दोनों की ओर से यह कहा गया था कि सार्वजनिक जांच के लिए सभी फॉर्म 7 आवेदनों का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा. सीईओ के कार्यालय से 9 अक्टूबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि पूर्व-एसआईआर मतदाता सूचियों को फ्रीज करने की तिथि (16 जून 2026) से 8 अक्टूबर के बीच 1,10,654 फॉर्म 7 आवेदन प्राप्त हुए थे.
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श्रवण गर्ग | राहुल के लोग जेपी को ‘हरामी’ बता रहे हैं और मैं चुप हूँ!
‘लोकनायक’ जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आज जन्मदिन है. मेरे एक पच्चीस साल पुराने यूट्यूबर-पत्रकार मित्र ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जेपी के चित्र के साथ किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखे गए आलेख को टैग करते हुए टिप्पणी की है : ‘भारत के लोकतंत्र और संविधान के क़त्ल का असली साज़िशकर्ता यही सीआईए एजेंट जय प्रकाश नारायण था. थू है इस हरामी पर.’ पत्रकार मित्र का नाम जान-बूझकर नहीं दे रहा हूँ.
मैंने जेपी के सान्निध्य में जीवन के कई महत्वपूर्ण साल बिताए हैं. 1974 के बिहार के आंदोलन में भाग लिया है. उसके भी पहले 1972 में चंबल घाटी और बुंदेलखंड में हुए सैकड़ों दस्युओं के आत्मसमर्पण का उनके साथ साक्षी रहा हूँ. उनके साथ कई स्थानों की यात्राएँ की हैं. इस सबकी स्मृतियाँ पिछले पचास से अधिक सालों से सहेजे हुए हूँ. पत्रकार मित्र की टिप्पणी पर खून तो खौला, पर मन को शांत कर लिया.
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दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंताओं के बीच चुनाव आयोग में नए उप चुनाव आयुक्त नियुक्त, संजय कुमार को समय से पहले मूल काडर में भेजा
‘द हिंदू’ में श्रीपर्णा चक्रवर्ती की रिपोर्ट है कि 2010 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) नियुक्त किया गया है. वह संजय कुमार के समय से पहले अपने मूल काडर में वापस लौटने से खाली हुए पद को भरेंगे, जो मतदाता सूची और आईटी प्रभाग के प्रभारी थे.
इस नई नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग में कार्यों का आवंटन कैसा होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संजय कुमार अगस्त 2024 से इस साल अगस्त तक उप चुनाव आयुक्त रहे थे और चुनाव आयोग के मतदाता सूची व आईटी प्रभागों के लिए जिम्मेदार थे. उन्होंने देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने वाले चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे.
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मणिपुर हिंसा: नगा संगठन ने मारे गए व्यक्ति का सिर वापस पाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया
भारत में स्टारलिंक के लॉन्च में हो रही देरी से निराश एलन मस्क ने अरबपति मुकेश अंबानी पर अपना हमला तेज कर दिया है.
‘एक्स’ पर रिलायंस प्रमुख के खिलाफ अपने हालिया तीखे हमले में, मस्क ने तंज कसते हुए उन्हें “प्रधानमंत्री अंबानी” कहा और उन पर अपने खुद के टेलीकॉम साम्राज्य की रक्षा के लिए उनकी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भारत से बाहर रखने का आरोप लगाया.
मस्क ने यह कहते हुए भी मज़ाक उड़ाया कि वे यह पहचानने में विफल रहे कि भारत में असल हुकूमत किसकी चलती है: “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया यह न समझ पाने के लिए मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप भारत के असली बॉस हैं.”
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मणिपुर हिंसा: कुकी-नागा के बीच ताजा झड़पों में 5 लोगों की मौत, गोलीबारी हुई, 10 घर जलाए गए
‘पीटीआई’ के मुताबिक, मणिपुर के कामजोंग और उखरूल जिलों में सशस्त्र समूहों के बीच हुई ताजा झड़पों में पांच लोगों की मौत हो गई.
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि नागा-बहुसंख्यक कामजोंग जिले के कुकी-प्रधान चासाद गांव में 22 वर्षीय एक युवक और 42 वर्षीय एक महिला की हत्या कर दी गई. अधिकारियों ने बताया कि पांच बच्चों की मां उस महिला को शुक्रवार रात गर्दन के पास गोली मारी गई थी और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई.
उन्होंने आगे बताया कि उसकी हत्या के कारण कुकी और नागा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही. इसके बाद हुई झड़पों में उस युवक की मौत हो गई, और इस दौरान 10 घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया.
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मणिपुर के गुटों ने भारत में राज्य के 1949 के विलय के खिलाफ बंद का आह्वान किया
मणिपुर के सात प्रतिबंधित सशस्त्र समूहों ने 1949 में भारतीय संघ के साथ राज्य के विलय के विरोध में "राष्ट्रीय काला दिवस" (नेशनल ब्लैक डे) मनाने के लिए 15 अक्टूबर को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है.
‘द हिंदू’ ब्यूरो के मुताबिक, मुख्य रूप से इम्फाल घाटी के मैतेई समुदाय के इन समूहों ने कहा कि चिकित्सा आपात स्थिति, मीडिया संचालन और धार्मिक गतिविधियों सहित आवश्यक सेवाओं को इस बंद से छूट दी जाएगी.
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एम.ए. बेबी | बैरिकेड्स लोकतंत्र की आवाज़ को खामोश नहीं कर सकते
पिछले कुछ महीनों में जंतर-मंतर के बैरिकेड्स पर भारी हलचल देखी गई है. भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) में घटी घटनाओं पर हालिया मीडिया खुलासे से विरोध प्रदर्शनों की एक नई लहर पैदा हुई, इस बार निशाना मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार थे. कुमार के इस्तीफे की मांग अब स्वयं चुनावी शुचिता की मांग बन चुकी है. सीईसी के खिलाफ जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले, 2 अक्टूबर 2026 को पूरे नई दिल्ली जिले में धारा 163 (बीएनएसएस) के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी. कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और यातायात पर भारी प्रतिबंधों की घोषणा की गई.
इन उपायों ने प्रदर्शनकारियों के हौसले पस्त नहीं किए, लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए सामूहिक कस्टडी/हिरासत और प्रतिबंध कई ऐसे कठिन सवाल खड़े करते हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है: यह राजधानी किसकी है? ये सड़कें किसकी हैं? जुलाई 2026 में, राजधानी के तय विरोध स्थल 'जंतर-मंतर' ने वर्ष के सबसे बड़े युवा विरोध प्रदर्शनों में से एक देखा, जो अंततः प्रदर्शनकारियों के लिए एक बड़ी जीत में तब्दील हुआ.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'हरकारा डीप डाइव' निधीश त्यागी-श्रवण गर्ग संवाद: राहुल गांधी का दिल्ली मार्च, चुनाव आयोग की जवाबदेही और 'जनता बनी भागीदार' पर बड़ा राजनीतिक विश्लेषण.
'आर्टिकल-14' बेतवा शर्मा-सबा गुरमत की रिपोर्ट: 11 अक्टूबर दिल्ली विरोध प्रदर्शन में हिरासत के दौरान पुलिस बर्बरता, नाबालिगों की पिटाई और फोन जब्ती के गंभीर आरोप.
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित किया; देश की पहली ऐसी राज्य विधानसभा बनी.
'काउंटरकरंट्स' में मोहम्मद जियाउल्लाह खान का विश्लेषण: 'गोदी मीडिया' बनाम डिजिटल पत्रकारिता, जी एंटरटेनमेंट का वित्तीय संकट और स्वतंत्र मीडिया की भूमिका.
'हरकारा डीप डाइव' निधीश त्यागी-जयश्री पिंगले चर्चा: 10 अक्टूबर दिल्ली प्रदर्शन, 'ज्ञानेश गए तो सब गए' विवाद और मोदी सरकार के राजनीतिक संकट पर बड़ा विश्लेषण.
'द हिंदू' अक्षय राउत का विश्लेषण: भारतीय चुनाव आयोग की साख पर उठते सवाल, एसआईआर विवाद और चुनावी प्रणाली में 'विश्वास' बहाली के उपाय.
'श्रवण गर्ग' का भावुक लेख: जयप्रकाश नारायण (जेपी) की जयंती, राहुल गांधी के समर्थकों की विवादित टिप्पणियां और भारतीय लोकतंत्र में जेपी आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत.
'द हिंदू' की पड़ताल: कर्नाटक एसआईआर में 29,000 फॉर्म-7 आवेदनों का विवरण गायब; वेबसाइट और प्रेस विज्ञप्ति के आंकड़ों में अंतर से विवाद.
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हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
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हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.

