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मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के वादे का क्या हुआ?
‘स्क्रोल’ में प्रकाशित शोएब दानियाल का यह लेख मोदी सरकार के उस लंबे समय से किए जा रहे 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के वादे की पड़ताल करता है, जिसकी समय-सीमा बार-बार बदली गई और जिसके बावजूद भारत अभी तक 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक भी नहीं पहुंचा है.
पिछले सप्ताह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद 2029 में 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा.
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बार काउंसिल का कुछ ही घंटों में यू टर्न, नालसार के छात्रों के पंजीकरण पर रोक हटाई, सीजेआई का विरोध बना था कारण
भारतीय बार काउंसिल (बीसीआई) ने गुरुवार (13 अगस्त, 2026) को सभी राज्य बार कौंसिलों को यह निर्देश दिया कि वे 2026 में हैदराबाद के 'नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' से पास आउट हुए छात्रों का नामांकन न करें, लेकिन कुछ ही घंटों बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया.
सोईबाम रॉकी सिंह के अनुसार, इसके कुछ घंटे पहले अपने पत्र में, बीसीआई ने राज्य बार काउंसिलों को अगले आदेश तक इन स्नातकों का पंजीकरण रोकने का निर्देश दिया था. यह कदम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का विरोध करने वाले छात्रों के एक अभियान की जांच लंबित होने के कारण उठाया गया था.
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बारिश के बाद नोएडा के 11 हजार करोड़ के नए एयरपोर्ट में भर गया पानी, मोदी ने 4 माह पहले किया था उद्घाटन
मंगलवार को हुई भारी बारिश के कारण ₹11,000 करोड़ की लागत से बने नए नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जलभराव हो गया. इस पर विपक्ष ने "मेगा-भ्रष्टाचार" को लेकर सरकार पर निशाना साधा.
पीयूष श्रीवास्तव के अनुसार, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जेवर स्थित इस हवाई अड्डे के टर्मिनल को पार्किंग क्षेत्र से जोड़ने वाले हिस्से पर पानी जमा दिखाई दिया. बंद पड़े एस्केलेटरों से कुछ यात्रियों के देखते रहने के बीच कर्मचारी इलाके की सफाई करते नजर आए.
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कहानी का प्लॉट खो गया: कैसे भगवा पार्टी के माहिर कहानीकारों के पास कहानी खत्म हो गई
निहार नलिनी सारंगी के मुताबिक, हर प्रभुत्वशाली राजनीतिक मशीन के सामने आखिरकार एक ही संरचनात्मक समस्या आती है: जिन औजारों ने उसका प्रभुत्व बनाया, वे जरूरी नहीं कि उसे बनाए रखने के लिए भी काम आएं. पिछले एक दशक में भारतीय जनता पार्टी का उभार बड़े पैमाने पर नैरेटिव इंजीनियरिंग की उपलब्धि रहा है — यानी हर बातचीत की दिशा तय करने की ऐसी क्षमता, जिसमें विपक्ष पिछली बात का जवाब देना भी पूरा नहीं कर पाता और सत्ता पक्ष अगली कहानी तय कर चुका होता है. अभी जो हो रहा है, वह कोई एक घोटाला या खबरों का कोई एक खराब दौर नहीं है. यह कुछ धीमा है: मशीनरी खुद अपनी गति और ताकत खो रही है. कोई घोटाला मौसम की एक घटना है. लेकिन मशीन का अपनी ताकत खोना एक बीमारी का निदान है.
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भारत-चीन विवाद: अरुणाचल प्रदेश के छात्रों ने सीमा की ओर मार्च निकाला, पूर्व मंत्री ने पीएम मोदी पर उठाए सवाल
‘ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन’ (एएपीएसयू) ने गुरुवार को राज्य के ऊपरी सुबनसिरी जिले के एक सीमावर्ती गांव ताक्सिंग की ओर एक मार्च की शुरुआत की. इस मार्च ने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और उत्तर-पूर्वी राज्य में भारत-चीन सीमा तनाव पर ध्यान आकर्षित किया है.
“ताक्सिंग चलो, भारत बचाओ” के बैनर तले आयोजित यह मार्च तब आयोजित किया गया जब पूर्व भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे आर.के. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सवाल किया कि भारत ने 2014 के बाद से कितने गश्ती बिंदु (पेट्रोलिंग पॉइंट्स) "छोड़" दिए हैं.
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वीवीपी शर्मा | कॉकरोच और पंडित की क्रिस्टल बॉल
इस बात में कुछ लगभग छू लेने वाला है कि सम्मानित राजनीतिक विश्लेषण की दुनिया ने इतनी बेचैनी के साथ यह पूछना शुरू कर दिया है कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी आखिर जा कहां रही है. सीजेपी को अभी यह समझने का समय भी नहीं मिला है कि वह आखिर है क्या, और उससे पहले ही बड़े-बुजुर्ग यह समझाने के लिए जमा हो गए हैं कि उसे क्या बनना चाहिए.
11 अगस्त के एक ही समाचार चक्र में उसी अखबार में प्रकाशित तीन लेख इस सवाल तक अलग-अलग रास्तों से पहुंचे. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में सीपी सुरेंद्रन ने 1968 के पेरिस की ओर लौटते हुए सुझाव दिया कि पारंपरिक राजनीति से बाहर का कोई आंदोलन, किसी संगठित पार्टी के नेतृत्व वाले अभियान से कहीं आगे जा सकता है.
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श्रवण गर्ग | ये सरकार सच का सामना करने से डर रही है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग चर्चा कर रहे हैं संसद के मानसून सत्र के उस अंत की, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी मांगों के साथ खड़े रहे, लेकिन संसद में सार्थक कामकाज नहीं हो सका. अब संसद का सत्र खत्म हो चुका है और देश की नजर 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर है. सवाल यह है कि मोदी इस बार देश से क्या कहेंगे?
श्रवण गर्ग इस पूरे घटनाक्रम को एक ऐसे राजनीतिक "सीरियल" की तरह देखते हैं, जिसका पहला हिस्सा संसद के भीतर खत्म हुआ, लेकिन जिसकी कहानी 15 अगस्त को लाल किले से आगे बढ़ेगी.
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‘अब सरकार हमारी बात सुनती है’: बजरंग दल मुंबई के स्वतंत्र चर्चों पर हमले तेज कर रहा है
श्रीनाथ राव ने ‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है कि मार्च से अगस्त 2026 के बीच मुंबई और आसपास के इलाकों में बजरंग दल तथा उससे जुड़े हिंदुत्ववादी संगठनों ने छोटे स्वतंत्र चर्चों की प्रार्थना सभाओं को बार-बार बाधित किया और उन पर जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए. उनके मुताबिक, इस दौरान कम से कम 14 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जबकि मुंबई और वसई पुलिस ने चर्च के पादरियों और सदस्यों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज कीं. इनमें से अधिकांश मामले महाराष्ट्र के अंधविश्वास और काला जादू विरोधी कानून के तहत दर्ज किए गए, क्योंकि जबरन धर्मांतरण को अपराध बनाने वाला महाराष्ट्र का कानून 30 जुलाई 2026 को लागू हुआ.
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विरोध स्थलों पर पुलिस की चेहरे पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
स्क्रोल के मुताबिक, माकपा सांसद ए.ए. रहीम ने विरोध-प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान और अन्य जैवमेट्रिक निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में आरोप है कि प्रदर्शनकारियों का डेटा एकत्र कर सुरक्षित रखना डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को दिल्ली के युवा प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया. ये प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, खासकर नीट से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए थे.
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ई20 ईंधन को लेकर मारुति, टाटा और महिंद्रा ने भी उठाए थे सवाल, ई-मेल से चिंताओं का खुलासा
जब से देशभर में 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई20) को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है, तब से वाहनों में खराबी आने के मामले सामने आ रहे हैं. विशेषकर सोशल मीडिया में ई20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान की व्यापक चर्चा है. अब पता चला है कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रमुख संस्था ‘एसआईएएम’ (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने भी 28 जुलाई को सरकार को एक शिकायत पत्र भेजकर ई20 ईंधन में संदूषण (मिलावट और अशुद्धि) की बात उठाई थी. लेकिन केंद्र सरकार ने जैसे हि ई20 ईंधन के सुरक्षित होने का आश्वासन दिया, इसके तुरंत बाद एसआईएएम ने अपना पत्र वापस ले लिया और कहा कि डेटा को और अधिक "प्रमाणीकरण" और जांच की आवश्यकता है.
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जले हुए नोटों का मामला: न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप ‘साबित’
‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम’ के तहत गठित और उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने पाया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ सभी आरोप "साबित" हो गए हैं.
लोकसभा समिति ने पाया कि न्यायमूर्ति वर्मा का स्पष्टीकरण "टालमटोल वाला और असंतोषजनक" रहा और वे "अपने आवास के स्टोर रूम में पाई गई नकदी की मौजूदगी और उसके स्वामित्व पर संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
अभिनय लक्ष्मण और अमृत ढिल्लों की रिपोर्ट: ₹91,000 करोड़ की 'ग्रेट निकोबार' परियोजना से शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व और अधिकारों पर मंडराया संकट.
'अलजज़ीरा' में कामरान यूसुफ की रिपोर्ट: भारतीय कृषि निर्यात पर जापान, चीन और ईयू के कड़े प्रतिबंध; आम, चावल और मसालों की गुणवत्ता पर उठे सवाल.
'हरकारा डीप डाइव': 15 अगस्त को लाल किले से पीएम मोदी के संबोधन पर निधीश त्यागी और राकेश कायस्थ का विश्लेषण; जानें भाषण के मुख्य बिंदु और देश के सवाल.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 40 सवाल अधिसूचित किए, 1931 के बाद पहली बार होगी सभी समुदायों की व्यापक जातिगत जनगणना.
'इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह ने पूछताछ में वाहेगुरु के आदेश का दावा किया.
'स्क्रोल' में नोलिना मिंज की रिपोर्ट: झारखंड में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया से जूझते परिवारों का संघर्ष, जांच और इलाज में चुनौतियां.
बिनु मैथ्यू का विश्लेषण: जेन जी और ग्रामीण युवाओं के असंतोष को संसद के नीतिगत एजेंडे में बदलने के लिए विपक्ष के सामने 11-सूत्रीय रणनीतिक रोडमैप.
'स्क्रोल' में शोएब दानियाल का विश्लेषण: 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के वादों, बदलती समय-सीमाओं और भारत की वास्तविक आर्थिक चुनौतियों की पड़ताल.
वीडियो
Harkara Live में निधीश त्यागी के साथ चर्चा — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण की बदलती भूमिका और उसकी घटती राजनीतिक अहमियत पर. इस बार के भाषण में किन प्रमुख मसलों पर बात होगी? किन मुद्दों पर प्रधान चुप्पी साध सकते हैं? और क्या लाल किले से होने वाला भाषण अब जनता की उम्मीदों और वास्तविक सवालों से दूर होता जा रहा है? प्रमुख मसले, प्रधान चुप्पी और 15 अगस्त के भाषण की राजनीतिक प्रासंगिकता पर खास चर्चा.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
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हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे. लेकिन इस बार बड़ा सवाल यह है कि मोदी क्या बोलेंगे और किन ज्वलंत मुद्दों पर चुप रहेंगे? रोजगार, शिक्षा, युवाओं का आंदोलन, संसद में जवाबदेही, राम मंदिर से जुड़े सवाल, किसानों, अल्पसंख्यकों और विदेश नीति के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से देश जवाब की उम्मीद करता है. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने लेखक और व्यंग्यकार राकेश कायस्थ के साथ चर्चा की कि क्या इस बार प्रधानमंत्री का भाषण देश के असली सवालों का सामना करेगा या फिर एक बार फिर चुनावी तेवर और राजनीतिक दावों तक सीमित रहेगा. राकेश कायस्थ कहते हैं, "मैं इस हेडलाइन का इंतजार कर रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से भारत के प्रधानमंत्री की तरह कब बोलेंगे? यह इंतजार मैं 12 साल से कर रहा हूं." क्या इस बार लाल किले से देश के सवालों के जवाब मिलेंगे? देखिए पूरी बातचीत.