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अमेरिका के 90 नेताओं का संकल्प: आरएसएस से जुड़ा चंदा नहीं लेंगे
द वायर के मुताबिक़, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों ख़ेमों के नब्बे अमेरिकी राजनेताओं ने सार्वजनिक संकल्प लिया है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा राजनीतिक चंदा नहीं लेंगे. यह ऐलान 'हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ऐक्शन' और 'सेक्रेड ऐक्ट्स' ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के विवादित अमेरिका दौरे के आख़िरी दिनों में किया.
'सेक्रेड ऐक्ट' के कार्यकारी निदेशक पुष्कर शर्मा ने कहा, "आज हम क़रीब 100 राजनीतिक नेताओं के एक बहुधार्मिक और बहुनस्लीय गठबंधन का ऐलान कर रहे हैं, जो कह रहे हैं कि अमेरिकी लोकतंत्र को अति-अमीर लोग और उनके चरमपंथी एजेंडे ख़रीद नहीं सकते."
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गुजरात में तीन साल में एससी-एसटी अत्याचार के 4,890 मामले, सज़ा की दर बेहद कम
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, गुजरात में 2022 से 2024 के बीच अनुसूचित जातियों और जनजातियों के ख़िलाफ़ अत्याचार के 4,890 मामले दर्ज हुए. राज्यसभा में रखे आँकड़ों के अनुसार 2022 में 1,609, 2023 में 1,680 और 2024 में 1,601 मामले दर्ज हुए, जिनमें क़रीब 81 फ़ीसदी एससी से जुड़े थे.
जाँच के लंबित मामले 2022 के 489 से घटकर 2024 में 449 रह गए, यानी 8.2 फ़ीसदी की गिरावट. एसटी मामलों में यह संख्या 125 से घटकर 90 हुई, जबकि एससी में मामूली फ़र्क़ आया — 364 से 359.
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मोदी की 'युद्ध ख़त्म हो' अपील के बाद कीएव पर हमला, मरने वालों में एक भारतीय
मानवता के हित में 'युद्ध ख़त्म करने' की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने ढंग से जवाब दिया — रूसी सेना ने कीएव और आसपास के इलाक़े में एक रिहायशी इमारत पर हमला किया. अल जज़ीरा के मुताबिक़, रात भर चले इस हमले में कम से कम 12 नागरिक मारे गए, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है, और 21 घायल हुए. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इसे "रूसी आतंक" बताते हुए सहयोगी देशों से हवाई सुरक्षा मज़बूत करने की अपील की.
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'क्या आईएएस-आईपीएस एसोसिएशन इस सांप्रदायिक बेहूदगी पर बोलेंगे?' — महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह के सरकारी कार्यक्रमों से मुसलमान अफ़सरों को दूर रखा गया. उनका कहना है कि सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर वक़ार रज़ा को स्वागत की क़तार से बाहर रखा गया, डीजी एसटीएफ़ जावेद शमीम को कार्यक्रमों में नहीं बुलाया गया और आईएएस अफ़सर ख़लील अहमद को एक बैठक से उठकर जाने को कहा गया. एक्स पर आईएएस और आईपीएस एसोसिएशनों को टैग करते हुए मोइत्रा ने पूछा कि क्या वे इस "बीमार सांप्रदायिक बेहूदगी" पर आवाज़ उठाएँगे. ऑनलाइन भी नाराज़गी दिखी, जहाँ सवाल उठा कि अफ़सरों के संगठन संविधान की सेवा कर रहे हैं या "हिंदू राष्ट्र" की.
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राजीव कुमार | उलटा सदन
कई बार संसद ऐसी संस्था कम दिखाई देती है जो कार्यपालिका से जवाब मांगती है और धृतराष्ट्र जैसी अधिक, जो मोहवश अपने पुत्रों की हर मांग को आंख मूंदकर स्वीकार करती है.
टेलीविजन पर संसद की कार्यवाही देखना और संसद के भीतर बैठकर उसे देखना दो बिल्कुल अलग अनुभव हैं. भीतर से देखने पर तस्वीर कहीं अधिक जटिल और कई बार काफी दिलचस्प भी दिखाई देती है. 36 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहने के बाद जब संसद में पहुंचा, तो मेरा पहला संसदीय सत्र एक अलग तरह की सीख लेकर आया.
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वी-डेम के लोकतंत्र सूचकांक में भारत की स्थिति 1975 के बाद सबसे निचले स्तर पर
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति यानी यूएन सीईआरडी की ओर से भारत में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर जताई गई चिंता, यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग स्थित वैरायटीज ऑफ डेमोक्रेसी यानी वी-डेम संस्थान की ताजा रिपोर्ट से मेल खाती है. वी-डेम ने भारत को उन देशों में शामिल किया है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था धीरे-धीरे निरंकुशता की ओर बढ़ रही है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं.
यूएन सीईआरडी ने 2007 के बाद भारत की पहली समीक्षा में कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर कथित उल्लंघनों पर "गंभीर चिंता" जताई. समिति ने विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों, खासकर मुस्लिम मतदाताओं, के नाम बाहर किए जाने को लेकर भी चिंता व्यक्त की.
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दिवालियापन और ठगों की दुनिया: कैसे दिवालियापन कानून अमीरों को फायदा और जनता को सजा देते हैं
राजनीतिक टिप्पणीकार भवानी शंकर नायक के इस लेख का केंद्रीय तर्क है कि पूंजीवादी व्यवस्था में दिवालियापन और ऋण चुकाने में असमर्थता से जुड़े कानून आम लोगों और बड़े कारोबारियों के साथ समान व्यवहार नहीं करते. आम व्यक्ति छोटे कर्ज की अदायगी में असफल होता है तो उसे वित्तीय संस्थाओं की कानूनी कार्रवाई, दबाव और सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ता है, जबकि बड़े कारोबारी और कंपनियां दिवालियापन की कानूनी प्रक्रिया के जरिए भारी कर्ज से राहत पाने में सफल हो जाती हैं.
लेख में 2008 के अमेरिकी वित्तीय संकट में लेहमैन ब्रदर्स से लेकर भारत में 2026 में सुभाष चंद्र से जुड़े मामले तक उदाहरण दिए गए हैं. लेख के मुताबिक, सुभाष चंद्र पर करीब 22,006 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे हाल की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया में घटाकर केवल 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान तक सीमित कर दिया गया.
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7.8% की वृद्धि, लेकिन विदेश यात्रा और सोना न खरीदने की अपील, मोदी की ‘हार्दिक बधाई’ पर उठे सवाल
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश पर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने देश की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पर बधाई देने के साथ ही भारतीयों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा, विदेश में शादियां और जरूरत न होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील की. रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ सरकार मजबूत आर्थिक वृद्धि को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों से खर्च सीमित करने की अपील ने राजनीतिक और सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है.
1 सितंबर को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में मोदी ने कहा कि भारतीयों को केवल घूमने-फिरने के लिए विदेश यात्रा नहीं करनी चाहिए, विदेश में शादियां नहीं करनी चाहिए और जब तक जरूरी न हो, सोना भी नहीं खरीदना चाहिए. इसके कुछ ही क्षण पहले उन्होंने 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को देश की उपलब्धि बताते हुए बधाई दी.
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श्रवण गर्ग | अमेरिका के हिंदू जो सुनना चाहते थे, वह भागवत ने नहीं कहा
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के मेडिसिन स्क्वायर गार्डन में दिए भाषण के उन पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं, जिन पर सार्वजनिक बहस अपेक्षाकृत कम हुई. भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं हो सकता. लेकिन श्रवण गर्ग का सवाल है कि इस बयान में नया क्या है, क्योंकि 2018 में दिल्ली में भी भागवत इसी तरह की बात कह चुके हैं. फिर 2018 और 2026 के बीच भारत में मुसलमानों की स्थिति में क्या बदलाव आया, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों नहीं बनता.
चर्चा में श्रवण गर्ग इस बात पर जोर देते हैं कि भागवत के भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति, विविधता और आरएसएस के सेवा कार्यों का उल्लेख तो हुआ, लेकिन आधुनिक भारत की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर लगभग कोई बात नहीं हुई.
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'कॉकरोच' पलटकर लड़ रहे हैं: बॉस्टन के एक कमरे से दिल्ली की सड़कों तक
तीस साल के अभिजीत दीपके बॉस्टन में रहने वाले एक ताज़ा पोस्ट-ग्रैजुएट हैं. उनकी योजना भारत में कोई युवा आंदोलन खड़ा करने की कभी नहीं थी. न्यूयॉर्क टाइम्स के ओपिनियन वीडियो में वे ख़ुद बताते हैं कि वे बॉस्टन के अपने कमरे में बैठे रहने वाले एक अंतर्मुखी आदमी थे और दिमाग़ में बस दो चीज़ें थीं. नौकरी और एजुकेशन लोन की अदायगी.
मोड़ तब आया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोज़गार नौजवानों के एक हिस्से को 'कॉकरोच' कहा — ऐसे नौजवान जिन्हें रोज़गार नहीं मिलता और जिनके लिए किसी पेशे में कोई जगह नहीं. दीपके ने एक्स पर लिखा कि क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएँ. पोस्ट वायरल हो गई. पाँच दिन के भीतर उनके साथ एक करोड़ लोग जुड़ चुके थे.
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"मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी". 15 साल की लड़की ने कहा, "मैं पीछे नहीं हटूंगी"
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, नोएडा की 15 वर्षीय रुचिका सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न, धमकियों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. अब मकतूब मीडिया से बातचीत में रुचिका ने कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी जिंदगी "नरक" बना दी है और वह अपने चेहरे को छिपाकर रहने के लिए मजबूर हैं.
रुचिका ने कहा, "मोदी जी, आपने मेरी जिंदगी नरक बना दी है." उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल की लड़की को इस तरह परेशान किया गया कि वह कहीं स्वतंत्र रूप से जा या रह नहीं सकती. उनके मुताबिक, उन्हें हर जगह अपना चेहरा छिपाना पड़ता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "कायर" भी कहा और साफ किया कि वह पीछे नहीं हटेंगी.
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सोनिया गांधी की किताब: पेंगुइन इंडिया के वकीलों ने 'कई अध्यायों' में बदलाव और कटौती माँगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलॉन्गिंग' को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) के वकीलों ने कई अध्यायों में बदलाव और कटौती की माँग की थी. पेंगुइन रैंडम हाउस की एक इकाई अल्फ़्रेड ए नॉफ़ इस किताब की वैश्विक प्रकाशक है, जबकि भारत में इसे छापने और बाँटने की ज़िम्मेदारी पीआरएचआई के पास थी. किताब 10 नवंबर को आनी थी. इसकी घोषणा सबसे पहले नॉफ़ ने की थी और यह भी बताया था कि पहली छपाई एक लाख प्रतियों की होगी.
इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार जिन हिस्सों पर आपत्ति उठाई गई, उनमें थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके 12 साल के शासन से जुड़े संदर्भ, आरएसएस की भूमिका, साम्प्रदायिक विभाजन और दंगों की घटनाओं का ज़िक्र, और अल्पसंख्यकों की दुर्दशा.
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आकार पटेल | हम ग़रीब और अप्रासंगिक बने रहेंगे — इस बात से संतुष्ट कि हमारे अल्पसंख्यकों का हाल हमसे भी बुरा है
इस हफ़्ते एक विदेशी आउटलेट ने मेरा इंटरव्यू लिया. बात ख़त्म होने के बाद इंटरव्यू लेने वाले ने कहा कि वह हैरान है . उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि भारत इस हाल में पहुँच चुका है. मुझे लगता है, यह काफ़ी आम प्रतिक्रिया है. भारत पर काम करने वाले शिक्षाविदों और यहाँ तैनात विदेशी संवाददाताओं को छोड़ दें तो बहुत कम लोग समझ पाते हैं कि भारत अपनी पुरानी छवि से कितना दूर आ चुका है.
मैं संक्षेप में बता देता हूँ कि उस इंटरव्यू में मुझसे क्या पूछा गया और मैंने क्या जवाब दिए, ताकि आपको अंदाज़ा हो सके कि सामने वाले ने क्या समझा. आप इसे अपने इस आकलन से भी मिलाकर देख सकते हैं कि आज भारत कहाँ खड़ा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'अल जज़ीरा' व 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की रिपोर्ट: कीएव पर रूसी हमले में भारतीय की मौत; रूसी सेना में शामिल 227 भारतीयों और 51 मौतों पर विक्रम मिस्री का बड़ा खुलासा.
'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट: गुजरात में 2022 से 2024 के बीच दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार के 4,890 मामले; सजा की बेहद कम दर और केंद्रीय सहायता के आंकड़ों का पूरा विश्लेषण.
'द वायर' की रिपोर्ट: अमेरिका के 90 नेताओं ने आरएसएस से जुड़ा राजनीतिक चंदा न लेने का लिया 'अहिंसा संकल्प'; मोहन भागवत के अमेरिका दौरे और वित्तीय जाँच पर विस्तृत रिपोर्ट.
'तृणमूल कांग्रेस' सांसद महुआ मोइत्रा का अमित शाह पर आरोप: पश्चिम बंगाल में गृह मंत्री के सरकारी कार्यक्रमों से मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को दूर रखने का दावा.
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट: जंतर-मंतर नीट पेपर लीक प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल और मुआवजा नीति का दिया निर्देश.
पूर्व आईपीएस और राज्यसभा सांसद 'राजीव कुमार' का विशेष लेख: संसद की गिरती जवाबदेही, पेपर लीक कानून, न्यायिक सुधारों और लोकतंत्र के चार स्तंभों के संतुलन पर विस्तृत विश्लेषण.
'द हिंदू' की रिपोर्ट: संयुक्त राष्ट्र की CERD समिति की चिंता और V-Dem इंडेक्स 2026; भारत में मतदाता सूची पुनरीक्षण, संस्थागत स्वायत्तता और लोकतंत्र की स्थिति पर बड़ा खुलासा.
'काउंटरकरेंट्स' में भवानी शंकर नायक का विश्लेषण: दिवालियापन कानून, कॉरपोरेट कर्ज राहत और सुभाष चंद्रा केस के बहाने पूंजीवादी असमानता पर विस्तृत रिपोर्ट.
वीडियो
सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज और इनसॉल्वेंसी मामले ने भारत की कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. करीब 226.57 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये में मामला निपटाने की प्रक्रिया से "हेयरकट" को लेकर बहस तेज हुई है. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने आर्थिक मामलों के पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ विस्तार से समझा कि हेयरकट क्या होता है, एनसीएलटी और आईबीसी की प्रक्रिया कैसे काम करती है और बड़े कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आखिर कितना पैसा वसूल हो पाता है. बातचीत में पिछले एक दशक में करीब 16 से 17 लाख करोड़ रुपये की रिकवर न हो सकने वाली रकम, वीडियोकॉन जैसे बड़े कॉरपोरेट मामलों, विजय माल्या, किसानों की कर्जमाफी और आम आदमी बनाम बड़े कॉरपोरेट्स के लिए कर्ज की अलग-अलग लागत पर भी चर्चा हुई. क्या कॉरपोरेट कर्ज के मामलों में आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग मापदंड लागू होते हैं? बैंकों में जमा आम लोगों के पैसे पर बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट का क्या असर पड़ता है? और क्या सरकार इस पूरे सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित कर पा रही है? देखिए पूरी बातचीत और समझिए भारत की कॉरपोरेट कर्ज व्यवस्था के पीछे का पूरा गणित. #HarkaraDeepDive #RakeshKayastha #NidheeshTyagi #SubhashChandra #CorporateDebt #NCLT #IBC #Banking #CorporateGovernance #IndianEconomy
हरकारा डीप डाइव लाइव में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्री श्रवण गर्ग करेंगे देश और दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा. न्यूयॉर्क में मोहन भागवत की भूमिका और उनके संदेशों तक, इस चर्चा में समझने की कोशिश होगी कि इन घटनाओं और संकेतों के भारत के लिए क्या मायने हैं. क्या न्यूयॉर्क में बदलती परिस्थितियां भारत को प्रभावित कर सकती हैं? मोहन भागवत के विचारों और भूमिका को मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक संदर्भ में कैसे देखा जाए? देखिए हरकारा डीप डाइव लाइव.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा और उनके हालिया बयान पर खास चर्चा. न्यूयॉर्क में श्री मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है. उन्होंने हिंदुत्व, धार्मिक विविधता, सभी धर्मों के सम्मान और “यूनिटी इन डायवर्सिटी” की बात भी की. लेकिन सवाल यह है कि भागवत ने वास्तव में क्या कहा और उस बयान का पूरा संदर्भ क्या है? जिस बात पर इतना हल्ला मचा, क्या बहस उसी बात पर हो रही है जो उन्होंने कही? RSS, हिंदुत्व और हिंदू समाज को लेकर भागवत का संदेश क्या है? और न्यूयॉर्क से दिया गया यह संदेश भारत के लिए क्या मायने रखता है? हरकारा डीप डाइव LIVE में इन्हीं सवालों की पड़ताल. देखिए और जुड़िए चर्चा में.