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ओडिशा के भद्रक में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए सामूहिक आवेदन, जांच के बजाय दोबारा सत्यापन के निर्देश
‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ में आयुषी कर की रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा के भद्रक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बूथ-स्तरीय एजेंटों ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए. रिपोर्ट में दस्तावेजों, बूथ-स्तरीय अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार के आधार पर इन आवेदनों को संगठित प्रयास बताया गया है. शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन ने संबंधित लोगों के खिलाफ जांच शुरू करने के बजाय चिह्नित मतदाताओं के दोबारा सत्यापन के निर्देश दिए.
30 से अधिक बूथों पर आवेदन
भद्रक में चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान भाजपा के बूथ-स्तरीय एजेंटों ने सैकड़ों मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करते हुए फॉर्म-7 जमा किए. रिपोर्ट के अनुसार, बूथ-स्तरीय अधिकारियों और बीजू जनता दल (बीजद) के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि कम से कम 30 बूथों पर ऐसे आवेदन दिए गए, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 90 प्रतिशत से अधिक थी.
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‘यह अपहरण जैसा था’: भारतीय दस्तावेज होने के बावजूद 87 दिन जेल में रहे बंगाली मुस्लिम जलिल अख्तर
‘आर्टिकल 14’ में अंतरा स्वर्णाकर की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर निवासी 66 वर्षीय जलिल अख्तर को बांग्लादेशी होने के संदेह में 87 दिन तक जेल और हिरासत केंद्रों में रखा गया. उनके पास भारतीय नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेज थे, तीन मतदाता सूचियों में उनका नाम दर्ज था और वे हालिया मतदाता सूची पुनरीक्षण की जांच भी पूरी कर चुके थे. इस दौरान पुलिस ने उन्हें दो बार बांग्लादेश भेजने की कोशिश की और एक महीने से अधिक समय तक परिवार से संपर्क नहीं करने दिया.
आधी रात को घर से उठाया
उत्तर दिनाजपुर के बगराइल गांव में जलिल अख्तर अपनी पत्नी तौफा बीबी के साथ मिट्टी और टिन से बने छोटे घर में रहते हैं. उनके दोनों बेटे हैदराबाद में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और परिवार को पैसे भेजते हैं. 19 जून 2026 की रात पुलिस उन्हें बांग्लादेशी होने के संदेह में घर से उठा ले गई.
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कर्नाटक: नाम हटाने के लिए थोक में ‘फॉर्म-7’ दाखिल करने पर बवाल, चुनाव आयोग से जांच की मांग
‘द हिंदू’ ब्यूरो के अनुसार, कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए थोक में 'फॉर्म-7' जमा करने पर सियासत गरमा गई है. मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से अल्पसंख्यकों, दलितों, पिछड़ों और झुग्गीवासियों के नाम हटाने की आपराधिक साजिश रची है. इस मामले में पुलिस ने बेलगावी और भालकी में तीन एफआईआर दर्ज की हैं.
बेंगलुरु में कैबिनेट मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत निर्वाचन आयोग से सभी प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों में गहन जांच की मांग की. उन्होंने डेटा लीक और प्री-प्रिंटेड फॉर्म का आरोप लगाया. कहा कि फॉर्म-7 में मतदाताओं के नाम पहले से छपे हुए थे और केवल आवेदक का नाम हाथ से भरना था. उन्होंने मतदाता डेटा संभालने वाली एजेंसी का भाजपा से संबंध होने और डेटा लीक का आरोप लगाते हुए ऑडिट की मांग की. उन्होंने कहा कि बेलगावी में एक भाजपा कार्यकर्ता के नाम से 198 फॉर्म भरे गए, जिसने खुद हस्ताक्षर फर्जी होने की बात कही.
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सत्य सागर | बेचारे ज्ञानेश को दोष न दें, लोकतंत्र तो बहुत पहले मर चुका था
‘काउंटरकरंट्स’ में 29 सितंबर 2026 को प्रकाशित सत्य सागर का यह लेख भारत और केन्या के चुनावी संकटों को वैश्विक आर्थिक असमानता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण से जोड़ता है. इसमें तर्क दिया गया है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी लोकतंत्र के पतन की शुरुआत नहीं, बल्कि पहले से जारी संकट का परिणाम है.
सितंबर 2017 में नैरोबी हवाई अड्डे पर सत्य सागर की नजर एक स्थानीय अखबार की सुर्खी पर पड़ी—सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति चुनाव रद्द कर दिया. केन्या की अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं और चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी की हत्या के बाद दोबारा मतदान का आदेश दिया था. इस फैसले ने केन्या की लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोरी उजागर की. तब भारत में भी ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई थी.
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1.56 अरब हेक्टेयर भूमि क्षरित, दुनिया की कुल भूमि का 10% और भारत के क्षेत्रफल से करीब 5.2 गुना: संयुक्त राष्ट्र
‘डाउन टू अर्थ’ में हिमांशु नितनवारे की 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट में दुनिया की 1.56 अरब हेक्टेयर भूमि के क्षरण का उल्लेख है. यह क्षेत्रफल दुनिया की कुल भूमि का करीब 10 प्रतिशत और भारत के क्षेत्रफल का लगभग 5.2 गुना है. रिपोर्ट में जंगलों के क्षरण और बहाली के बीच बढ़ते अंतर को भी रेखांकित किया गया है.
दुनियाभर में जंगलों का क्षरण उनकी बहाली की तुलना में तेजी से हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र की द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स 2026: रिस्टोरिंग फॉरेस्ट्स एंड लैंडस्केप्स रिपोर्ट के अनुसार, 46 करोड़ हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र क्षरण की स्थिति में है. जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का विस्तार इसके प्रमुख कारण हैं. भूमि उपयोग में बदलाव, ऊर्जा और संसाधनों की बढ़ती मांग तथा आजीविका के लिए भूमि पर निर्भरता भी इस समस्या को बढ़ा रही है.
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घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट ईंधन की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी, वाणिज्यिक एलपीजी भी महंगे
‘डेक्कन हेराल्ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में करीब 13% या 15.8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. इसके बाद एटीएफ की कीमत बढ़कर 137 रुपये प्रति लीटर हो गई है. यह लगातार तीसरा महीना है, जब विमानन ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं.
इससे पहले सितंबर में एटीएफ की कीमत 6.2 रुपये प्रति लीटर और अगस्त में 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी. ताजा बढ़ोतरी से एयरलाइंस की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि विमानन ईंधन उनके कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% होता है.
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भारतीय महिलाएं फिर सड़कों पर हैं | सब कुछ बदला, लेकिन कुछ नहीं बदला
‘स्क्रोल’ में शिल्पा फड़के ने महिलाओं की सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच, यौन हिंसा और विरोध के अधिकार पर टिप्पणी की है. उनका कहना है कि महिलाएं अब केवल सुरक्षा की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि शहरों और सड़कों पर अपने बराबर के अधिकार का दावा कर रही हैं. इसके बावजूद, उनके अनुसार, संस्थागत और सामाजिक प्रतिक्रियाएं इस बदलाव को स्वीकार करने के बजाय कई बार पीछे ले जाने वाली दिखाई देती हैं.
फड़के लिखती हैं कि सितंबर में महिलाओं और लड़कियों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आईं, जबकि वास्तविक हिंसा इससे अधिक हो सकती है. निजी हिंसा अक्सर दर्ज ही नहीं होती और सार्वजनिक चर्चा से बाहर रह जाती है. लेखिका के लिए यह निराशाजनक है कि 2026 में भी महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी मौजूदगी पर वही सवाल उठ रहे हैं, जिन पर उन्होंने 2003 में शोध शुरू किया था.
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भारत के अप्रैल-अगस्त के राजकोषीय घाटे में 1.1 ट्रिलियन रुपये की वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त के महीनों में भारत का राजकोषीय घाटा 7.1 ट्रिलियन रुपये ($74.09 बिलियन) दर्ज किया गया, जो कि मार्च में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के कुल लक्ष्य का 41.9% है. पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह घाटा 6 ट्रिलियन रुपये था.
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, भारत ने वर्ष 2027 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए अपने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% या 16.96 ट्रिलियन रुपये निर्धारित किया है.
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहन हर सड़क के लिए उपयुक्त नहीं, बहु-ईंधन परिवहन रणनीति की आवश्यकता
द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) और पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सड़क परिवहन को कार्बन-मुक्त बनाने के लिए एक समान नहीं, बल्कि बहु-ईंधन (मल्टी फ्यूल) रणनीति अपनानी होगी.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, छह प्रमुख वाहन श्रेणियों और 10 शहरों के विश्लेषण के बाद रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी एकल ईंधन तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता. इसलिए वाहनों के उपयोग और क्षेत्र के हिसाब से चरणबद्ध बदलाव जरूरी है: दोपहिया व तीन-पहिया: कम परिचालन लागत के कारण लंबी अवधि में विद्युतीकरण (ईवी) सबसे उपयुक्त है. यात्री कारें व हल्के वाणिज्यिक वाहन: वर्तमान में सीएनजी किफायत और उपयोगिता का सबसे व्यावहारिक विकल्प है. इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरने पर ईवी की भूमिका बढ़ेगी.
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एशिया में भारतीय मुद्रा का सबसे खराब प्रदर्शन, निचले स्तर पर बना हुआ है भारतीय रुपया
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड (प्रतिफल) में उछाल के कारण स्थानीय संपत्तियों पर दबाव बढ़ा है, जिससे भारतीय रुपया इस तिमाही और पिछले 30 दिनों में एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा.
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार किए गए हस्तक्षेपों के कारण मुद्रा बड़े नुकसान से बचने में काफी हद तक सफल रही, फिर भी इस महीने इसमें 0.7% और जुलाई-सितंबर तिमाही में 1.2% की गिरावट दर्ज की गई. बुधवार को यह डॉलर के मुकाबले 95.83 पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के 95.98 के स्तर से थोड़ा सुधार दर्शाता है. दक्षिण एशियाई मुद्रा ने एक उथल-पुथल भरी तिमाही का सामना किया, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते-घटते तनाव के कारण बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $70 प्रति बैरल से लगभग $110 के बीच झूलती रहीं.
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आसिम अली | न्यूक्लियर बटन
‘द टेलीग्राफ’ में आसिम अली ने लिखा है कि देश “अभूतपूर्व स्थिति” में प्रवेश कर चुका है, जहाँ “वोट, कानून और संविधान को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी टूट चुकी है.” मुख्य चुनाव आयुक्त की देखरेख में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े विवादित कदमों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की मीडिया रिपोर्ट आने के बाद, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह तीखी प्रतिक्रिया दी थी.
भारतीय राजनीति के लोकतांत्रिक दायरों से भटककर एक हाइब्रिड 'चुनावी-सत्तावादी' दौर में चले जाने की चिंता पूरे 'इंडिया' विपक्षी गठबंधन में व्याप्त है. उदाहरण के लिए, जून में गठबंधन के 23 नेताओं ने उच्चतम न्यायालय को एक संयुक्त पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त के “पक्षपातपूर्ण आचरण” और बिहार व पश्चिम बंगाल में एसआईआर के क्रियान्वयन में हुई कथित गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया. पत्र में आगाह किया गया था कि यदि न्यायपालिका ने इस पर हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह “गणराज्य के पूरी तरह से चरमराने” का संकेत होगा.
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जापान की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी बुलेट ट्रेन की समय-सीमा
जापान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना की प्रगति की गति जापान की शुरुआती उम्मीदों के "अनुरूप नहीं रही है". भारत की इस पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को जापान द्वारा वित्तीय और तकनीकी रूप से सहायता प्रदान की जा रही है.
‘द हिंदू’ से विशेष बातचीत करते हुए अधिकारी ने कहा कि जापान यह घोषणा करने की स्थिति में नहीं है कि यह परियोजना कब पूरी होगी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि देरी के बावजूद अब यह परियोजना निरंतर प्रगति कर रही है.
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135 साल पुरानी लाइब्रेरी, 8.5 लाख किताबें और नई सेंट्रल विस्टा योजना में कोई जगह तक नहीं
जब 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने ब्रिटिश भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने के फैसले की घोषणा की, तो सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी (सीएसएल), जिसे तब इम्पीरियल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता था, इसके साथ ही स्थानांतरित हो गई और इसे सिविल लाइंस क्षेत्र की ओल्ड सेक्रेटेरियट बिल्डिंग (पुराना सचिवालय) में पहला ठिकाना मिला. अंग्रेजों द्वारा रायसीना हिल के आसपास सत्ता की नई सीट बनाने के बाद, लाइब्रेरी को फिर से नॉर्थ ब्लॉक और फिर शास्त्री भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ यह 1969 से मौजूद है.
अब इसे फिर से स्थानांतरित करने का समय आ गया है - लेकिन किसी को यकीन नहीं है कि कहाँ?
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'ऋषिता खन्ना' रिपोर्ट: डी.के. शिवकुमार के 5 घंटे के विरोध के बाद चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन; फर्जी 'फॉर्म-7' जमा करने वालों पर धारा 31 के तहत होगी कड़ी कार्रवाई.
'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' रिपोर्ट: ओडिशा के भद्रक में 'फॉर्म-7' के दुरुपयोग से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने का संगठित प्रयास; बीजद और स्थानीय नेताओं के गंभीर आरोप.
'आर्टिकल 14' विशेष: अंतरा स्वर्णाकर का खुलासा; उत्तर दिनाजपुर के जलिल अख्तर 87 दिन जेल में बंद रहे, अदालत से निर्दोष रिहा होने के बाद पुलिसिया ज्यादती पर उठे सवाल.
'द हिंदू' रिपोर्ट: कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 'फॉर्म-7' के जरिए फर्जी वोट हटाने की साजिश; डी.के. शिवकुमार के गंभीर आरोप, बेलगावी-भालकी में 3 एफआईआर दर्ज.
'डाउन टू अर्थ' विशेष: संयुक्त राष्ट्र FAO की 'State of the World’s Forests 2026' रिपोर्ट; दुनिया की 1.56 अरब हेक्टेयर भूमि क्षरित, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल जैव विविधता लक्ष्य पिछड़े.
'काउंटरकरंट्स' विशेष: सत्य सागर की रिपोर्ट; भारत और केन्या के चुनावी संकट, 'वोट चोरी' के आरोप, 2023 चुनाव आयोग कानून और आर्थिक असमानता का विश्लेषण.
'डेक्कन हेराल्ड'/'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: पश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर बड़ा प्रभाव; एटीएफ (ATF) के दाम 13% बढ़कर ₹137/लीटर और कमर्शियल एलपीजी ₹2,810 पर पहुँची.
'स्क्रोल' विशेष: शिल्पा फड़के की 'Why Loiter?' पर रिपोर्ट; सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा, 'लोइटरिंग' के नागरिक अधिकार और 'ब्लैंक नॉइज़' आंदोलन का विश्लेषण.
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क्या INDIA गठबंधन की बैठक विपक्षी दलों को साझा रणनीति की ओर ले जा पाएगी? कांग्रेस की भूमिका, राहुल गांधी का नेतृत्व और अखिलेश यादव के साथ उसके राजनीतिक रिश्ते गठबंधन की आगे की दिशा को कैसे प्रभावित करेंगे? हरकारा डीप डाइव के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से विपक्षी राजनीति की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं. बातचीत में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े सवाल, INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल और उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव के संभावित समीकरण शामिल हैं. ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और अन्य विपक्षी नेताओं की भूमिका के साथ-साथ कांग्रेस-सपा के बीच सीटों का सवाल भी चर्चा का हिस्सा है. क्या विपक्षी दल अपने मतभेदों के बावजूद साझा राजनीतिक एजेंडा बना पाएंगे? सुनिए श्रवण गर्ग का विश्लेषण, निधीश त्यागी के साथ. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #INDIAAlliance #Congress #AkhileshYadav #IndianPolitics
हरकारा सीरीज़ में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची में बदलाव और लोकतंत्र के सामने उठते सवालों पर. हालिया रिपोर्टों, दस्तावेज़ों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर इस एपिसोड में चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता से जुड़े 10 अहम सवाल उठाए गए हैं. चर्चा में चुनाव आयुक्तों की भूमिका, आयोग की बैठकों और असहमतियों से जुड़ी रिपोर्ट, ईसीआई-नेट, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची में बदलाव, गोवा और पश्चिम बंगाल से जुड़े मामले तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल हैं. इन सवालों के ज़रिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही की पड़ताल की गई है. एपिसोड में उठाए गए आरोपों और संभावित राजनीतिक परिदृश्यों को दावों एवं सवालों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में नहीं. पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं. #Harkara #हरकारा #चुनावआयोग #ज्ञानेशकुमार #SIR #मतदाता_सूची #लोकतंत्र #मताधिकार #सुप्रीमकोर्ट #निधीशत्यागी
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INDIA गठबंधन की बैठक से विपक्षी एकता और राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर क्या राजनीतिक संकेत मिले? वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने निधीश त्यागी के साथ बातचीत में बैठक के भीतर की मौजूदगी और गैरमौजूदगी, अखिलेश यादव के शामिल न होने, कांग्रेस-सपा संबंधों और उत्तर प्रदेश के 2027 चुनावी समीकरणों पर अपना विश्लेषण साझा किया. चर्चा में चुनाव आयोग से जुड़े सवाल, विपक्ष की प्रस्तावित आंदोलन रणनीति और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी शामिल रही. क्या यह बैठक राहुल गांधी के नेतृत्व को समर्थन देने का संकेत है? और विपक्षी दलों के बीच उभरते मतभेद आगे की राजनीति को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं? देखिए हरकारा डीप डाइव का यह विशेष एपिसोड.