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“वे हमारी जमीन छीन रहे हैं”: काजीरंगा में लग्जरी होटल परियोजनाओं के खिलाफ आदिवासी परिवारों की लड़ाई
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के काजीरंगा में आदिवासी परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन, आजीविका और पर्यावरण को बचाने के लिए प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमीन से बेदखली, पुलिस कार्रवाई, कथित धमकियों और कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत ने इस संघर्ष को और तीखा कर दिया है.
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के प्रवेश क्षेत्र में स्थित कोहारा गांव की गीता गोवाला और उनकी बहन मिनाली गोवाला उन परिवारों में शामिल हैं जो अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. गीता का कहना है कि उनके परिवार और समुदाय पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती करते आए हैं. जिस जमीन को स्थानीय लोग ‘इंग्ले पाथर’ कहते हैं, वह हाथी गलियारे और काजीरंगा के आसपास के वन क्षेत्र से जुड़ी हुई है.
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ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा बढ़ाई; जम्मू-कश्मीर, बंगाल और छत्तीसगढ़ से अतिरिक्त कंपनियां बुलाईं
मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है. उनके न्यू मोती बाग कॉलोनी स्थित दिल्ली आवास के बाहर, चुनाव आयोग कार्यालय में और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं. जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ की कंपनियां बुलाई जा रही हैं.
ज्ञानेश कुमार के पास पहले से ही Z+ सुरक्षा कवच है, जो प्रधानमंत्री और उनके निकटतम परिवार को दी जाने वाली विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के बाद देश में दूसरी सबसे बड़ी सुरक्षा श्रेणी है. अधिकारियों ने कहा कि इस नवीनतम कदम के तहत मौजूदा सुरक्षा श्रेणी को बदलने के बजाय, सुरक्षा स्थिति के आधार पर पहले से ही स्टैंडबाय (तैयार) रखे गए अतिरिक्त कर्मियों को तैनात करना शामिल है.
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श्रवण गर्ग | विपक्षी दलों की भूमिका तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में सुरक्षा तैयारियों और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी आंदोलन के संभावित स्वरूप पर चर्चा की. बातचीत में एसआईआर, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोप, विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन और सरकार की तैयारियों को लेकर कई सवाल उठाए गए.
श्रवण गर्ग ने कहा कि फिलहाल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 10 अक्टूबर को क्या होगा, बल्कि उससे पहले के घटनाक्रम को समझना भी जरूरी है. उन्होंने राजघाट पर विपक्षी सांसदों को प्रार्थना की अनुमति मिलने को पिछले दिनों की तुलना में एक बदलाव बताया. वहीं, दिल्ली में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती, सीमाओं पर निगरानी और प्रदर्शनकारियों को लेकर पुलिस की तैयारियों को उन्होंने सरकार के “टकराव की तैयारी” का संकेत बताया.
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निधीश त्यागी | किसका चुनाव, किसका रेफ़री?
हरकारा रोज़ाना के इस एपिसोड में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों पर.
सवाल सिर्फ़ इतना नहीं है कि वोटर लिस्ट में कितने नाम कटे. बड़ा सवाल यह है कि देश में यह तय करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और भरोसेमंद है. विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान करोड़ों नामों के हटने, नोटिस जारी होने और मतदाताओं से दस्तावेज़ मांगे जाने को लेकर विपक्ष और नागरिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं. वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और दोहरे नामों को हटाकर उसे साफ़ करना है.
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‘क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं’, एलन मस्क ने पूछा; केंद्र ने पक्षपात से किया इनकार
दूरसंचार विभाग ने गुरुवार (8 अक्टूबर 2026) को उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि वह भारत में स्पेसएक्स की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की मंजूरियों में देरी करके उद्योगपतियों (ऑलिगार्क) को प्रतिस्पर्धा से बचा रहा है.
हालांकि, खरबपति एलन मस्क ने अपनी आलोचना को और तीखा करते हुए भारत में स्टारलिंक के लॉन्च का समर्थन करने वाली कई पोस्ट को आगे बढ़ाया और उद्योगपति मुकेश अंबानी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे भारत के "असली बॉस" हैं.
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अमेरिका ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी, एचसीएल को ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित किया
अमेरिका ने गुरुवार को आईटी कंपनियों कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से निलंबित कर दिया.
यह घोषणा अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग द्वारा अमेरिकी धोखाधड़ी-विरोधी कार्यबल (एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स) के प्रमुख, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उपस्थिति में की गई.
‘द टेलीग्राफ’ के अनुसार, उन्होंने कहा कि श्रम विभाग इस कार्यक्रम से माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी निलंबित कर रहा है. "हम इन कंपनियों से संबंधित किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही किसी लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन को आगे संसाधित करेंगे."
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सुप्रिया शर्मा | क्या 2026 मोदी युग के अंत की शुरुआत है?
‘स्क्रोल’ में सुप्रिया शर्मा लिखती हैं कि 2026 में दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में बढ़ती भागीदारी और पुलिस कार्रवाई का सामना करने के बावजूद लोगों का सड़कों पर उतरना सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा सकता है. लेख में 2011 के उन आंदोलनों से तुलना की गई है, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने में भूमिका निभाई थी.
2011 में जंतर-मंतर पर अप्रैल से शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद जून और अगस्त में रामलीला मैदान में बड़े आंदोलन हुए थे. 2026 में भी जून में युवाओं के जंतर-मंतर पहुंचने के कुछ ही समय बाद विरोध की दूसरी लहर दिखाई दे रही है. इस बार प्रदर्शन परीक्षा पत्रों में कथित गड़बड़ी और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हो रहे हैं. लेख के अनुसार, इस साल गर्मियों में हुए प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, जबकि अब प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
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जगजीत सिंह | जब उम्मीद भी कीमत मांगने लगे
‘काउंटरकरंट्स’ में जगजीत सिंह लिखते हैं कि कभी उम्मीद को सबसे बड़ा बराबरी का माध्यम माना जाता था. गरीब परिवार का बच्चा डॉक्टर बनने का सपना देख सकता था, सामान्य परिवार अपना घर बनाने की उम्मीद कर सकता था और युवा यह भरोसा रख सकता था कि शिक्षा उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलेगी. सपना आज भी वही है, लेकिन उसे हासिल करने की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है.
आधुनिक भारत में अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षित घर, कानूनी सहायता और रोजगार की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए आर्थिक संसाधन जरूरी होते जा रहे हैं. यह केवल गरीबी की कहानी नहीं है, बल्कि अवसरों के बढ़ते व्यावसायीकरण की कहानी भी है.
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कॉकरोच जनता पार्टी पर सवाल: आंदोलन से चुनाव तक पहुंची राजनीति की जवाबदेही क्या है?
'हरकारा रोज़ाना' के इस एपिसोड में निधीश त्यागी चर्चा कर रहे हैं कॉकरोच जनता पार्टी के उभार, उसकी राजनीति, उसके संगठनात्मक ढांचे और उससे जुड़े कई गंभीर सवालों पर. परीक्षा और छात्रों के भविष्य से शुरू हुआ यह आंदोलन अब चुनाव, मताधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुका है. ऐसे में सवाल यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी आखिर किसकी नुमाइंदगी कर रही है और उसकी राजनीतिक जवाबदेही किसके प्रति है.
कॉकरोच जनता पार्टी का उभार ऑनलाइन माध्यम से हुआ और कुछ ही समय में उसके सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर समर्थक जुड़ गए. इसके बाद आंदोलन जंतर-मंतर तक पहुंचा और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, आंसू गैस और एफआईआर जैसे मामले सामने आए. 25 जुलाई के समझौते और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी पुलिस को निर्देश: यदि ध्वनि मानकों का पालन हो तो मस्जिद में अज़ान के अधिकार में ‘हस्तक्षेप न करें’
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित ध्वनि सीमाओं और लाउडस्पीकर के उपयोग पर अदालत के 2020 के निर्णय का पालन करते हैं, तो सहारनपुर की एक मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान देने के उनके अधिकार में हस्तक्षेप न किया जाए.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के अनुसार, न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शाहनवाज़ खान और पांच अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया. याचिकाकर्ताओं ने आयशा मस्जिद में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी, और आरोप लगाया था कि ध्वनि-प्रवर्धक यंत्रों (साउंड एम्पलीफायरों) के उपयोग को नियंत्रित करने वाले न्यायिक नज़ीरों के बावजूद स्थानीय अधिकारी उनके काम में बाधा डाल रहे हैं.
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बंगाल उपचुनाव: मुस्लिम मतदाताओं को रोका गया, विपक्षी कार्यकर्ता गिरफ्तार, पत्रकारों पर भी शिकंजा
‘स्क्रोल’ में अनंत गुप्ता और रोकिबुज जमान की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने, विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और स्थानीय पत्रकारों के सोशल मीडिया खातों को प्रतिबंधित करने के आरोप सामने आए हैं. विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया है.
रेजीनगर के नजीरपुर गांव स्थित तेघारी प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर रिपोर्टर ने देखा कि कई मुस्लिम महिलाएं मतदान के लिए कतार में थीं, लेकिन नए मतदाता कतार में शामिल नहीं हो रहे थे. मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर मुस्लिम पुरुषों को कथित तौर पर वापस भेजा जा रहा था. वहां मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने हस्तक्षेप नहीं किया. एक ग्रामीण ने बताया कि कैमरे पर बात करने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर था.
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आरक्षण का विरोध करने वालों के लिए सैलूनों से एक सबक, जहाँ दलित युवाओं ने जातिगत बाधाओं को दी चुनौती
मई में, पुरी जिले की सौरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत जोराकानी भोई सही के दृढ-संकल्पित दलित युवाओं के एक समूह ने उन सैलूनों में बाल कटवाने की मांग करके अपनी बात रखने का फैसला किया, जो पारंपरिक रूप से केवल उच्च जातियों की सेवा करते आए थे.
युवाओं का यह प्रयास विफल रहा और इसने छुआछूत की इस प्रथा के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई को जन्म दे दिया—एक ऐसी प्रथा जो भारत द्वारा सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देने वाले संविधान को अपनाने के 76 साल बाद भी जारी है.
बसंत कुमार मोहंती के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संपन्न वर्गों ने जाति-आधारित आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने की मांग को लेकर एक अभियान चला रखा है.
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आरबीआई सर्वे: खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों से भारत में घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एक सर्वेक्षण से बुधवार को यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय परिवारों को महंगाई और बढ़ने की आशंका है. यह इस बात का संकेत है कि भोजन और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति से आगे भी दिखाई देने लगा है.
‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय केंद्रीय बैंक ने बुधवार को लगभग चार वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर बारीक नज़र रखी जाती है क्योंकि यह लोगों के खर्च करने के तौर-तरीकों और वेतन वृद्धि की मांगों को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सर्वेक्षण जनभावना को दर्शाते हैं और ये वास्तविक मुद्रास्फीति का सीधा पूर्वानुमान नहीं हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: काजीरंगा में लग्जरी होटल प्रोजेक्ट्स और हाथी गलियारे की जमीन का विवाद; आदिवासियों का विरोध, प्रणब डोले पर NSA और गुवाहाटी हाई कोर्ट की सुनवाई.
'हरकारा डीप डाइव': निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग का विश्लेषण; 10 अक्टूबर प्रदर्शन, दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती और ईसीआई विवाद.
'हरकारा रोज़ाना' चर्चा: निधीश त्यागी का CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विश्लेषण; एसआईआर विवाद, आंतरिक मतभेद और लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर सवाल.
'द हिंदू' रिपोर्ट: एलन मस्क ने स्टारलिंक सेवा में देरी पर उठाए सवाल, मुकेश अंबानी और भारतीय नियमों पर जताई चिंता; राहुल गांधी का तंज.
'स्क्रोल' निबंध: सुप्रिया शर्मा का विश्लेषण; 2011 बनाम 2026 के जनविरोध, जंतर-मंतर आंदोलन, एसआईआर और मोदी सरकार के समक्ष राजनीतिक चुनौतियों का तुलनात्मक अध्ययन.
'काउंटरकरंट्स' निबंध: मोहम्मद जियाउल्लाह खान का विश्लेषण; एसआईआर में 13.3 करोड़ नाम हटने के आंकड़े, सुप्रीम कोर्ट का फैसला और परकला प्रभाकर का बयान.
'लवप्रीत कौर' रिपोर्ट: CEC ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा और सख्त; जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर प्रदर्शन से पहले दिल्ली में 7,000 CRPF जवान तैनात, राहुल-प्रियंका पर 3 नई FIR.
अमेरिका ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल समेत कई बड़ी आईटी कंपनियों को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित कर दिया. इस फैसले के बाद इन कंपनियों से जुड़े नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी.
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हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
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