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‘पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान से ज्यादा प्यार ज्ञानेश कुमार से करते हैं’: मीम्स के जरिए तंज़ और मज़ाक़
कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा बुलाए गए और विपक्षी दलों द्वारा समर्थित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुँचने से रोकने के लिए पुलिस ने शनिवार को दिल्ली को एक असाधारण सुरक्षा घेरे में ले लिया.
इस कार्रवाई के दौरान विपक्षी सांसदों, छात्र नेताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, जबकि प्रतिबंधों और सुरक्षा जांचों के कारण राजधानी के कई हिस्सों में आवाजाही प्रभावित हुई.
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सरकार के लिए अगली चुनौती: ‘बिना किसी नेता’ वाली भीड़ को दोबारा एकजुट होने से कैसे रोका जाए
यद्यपि केंद्र सरकार सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे प्रदर्शनकारियों को शनिवार (10 अक्टूबर, 2026) को जंतर-मंतर पर एकत्र होने से रोकने में सफल रही, लेकिन उसकी अगली चुनौती आने वाले दिनों में इस काफी हद तक ‘बिना किसी नेता’ वाली भीड़ को दोबारा एकजुट होने से रोकना प्रतीत हो रही है. उधर, सुरुचि कुमारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि युवा समूहों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया है और कहा है कि वे 'कल (रविवार, 11 अक्टूबर) फिर वापस आएंगे'.
विजयेता सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगे प्रतिबंधों के संबंध में शुक्रवार (9 अक्टूबर, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद सरकार ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के आयोजकों को प्रदर्शन के लिए एक वैकल्पिक स्थल के रूप में रामलीला मैदान की पेशकश करने पर विचार किया था. लेकिन, न तो सीजेपी और न ही आंदोलन में भाग ले रहे वामपंथी युवा समूहों ने इसके लिए कोई अनुरोध किया.
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सुशांत सिंह | मजबूत भारत के लिए संस्थानों पर कब्जे को पलटना जरूरी
‘द मॉर्निंग कॉन्टेक्स्ट’ में सुशांत सिंह लिखते हैं कि सत्तारूढ़ दल का सरकारी संस्थानों पर नियंत्रण अब सामान्य शासन व्यवस्था जैसा दिखाई देने लगा है. भारत के संवैधानिक लोकतंत्र को बहाल करने के लिए संस्थानों की स्वतंत्रता पर हुए इस कब्जे को पलटना जरूरी है.
स्टीवन लेवित्स्की और डैनियल ज़िब्लाट ने अपनी पुस्तक हाउ डेमोक्रेसीज़ डाई में लिखा है कि लोकतंत्र हमेशा सैन्य जनरलों के हाथों नहीं मरता, बल्कि निर्वाचित नेता भी उसे कमजोर कर सकते हैं. कई बार यह प्रक्रिया तेजी से होती है, लेकिन अक्सर लोकतंत्र धीरे-धीरे और ऐसे कदमों के जरिए कमजोर होता है, जिनका असर तुरंत दिखाई नहीं देता.
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ट्रंप का चौंकाने वाला रूसी डीजल सौदा: भारत के लिए एक नियम, अमेरिका के लिए दूसरा
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में सुकल्प शर्मा लिखते हैं कि रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर दबाव बनाने और अतिरिक्त शुल्क लगाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब खुद रूस से डीजल आयात का रास्ता खोल दिया है. यह फैसला रूस की ऊर्जा खरीद को लेकर वाशिंगटन की अब तक की नीति और भारत के खिलाफ दिए गए उसके तर्कों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है.
अमेरिका ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने के लिए भारत पर बार-बार निशाना साधा है. पिछले साल भारत पर अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाए गए और हाल ही में एक कानून के जरिए राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया. अमेरिकी प्रशासन का तर्क रहा है कि रूस से कच्चा तेल खरीदकर भारत यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है.
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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर दक्षिणपंथी संगठनों का हमला, भारी सुरक्षा तैनाती के बीच हिंसा
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में जिज्ञासा सिन्हा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 25 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद शनिवार को कनॉट प्लेस और एमसीडी सिविक सेंटर के पास दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को धमकाया और उनके साथ मारपीट की. कई घटनाओं में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों पर हमले किए गए.
दोपहर करीब 2:30 बजे पालिका बाजार के पास 30 से अधिक लोगों के एक समूह ने खुद को बजरंग दल का सदस्य बताते हुए नारेबाजी की और पत्रकारों को धमकाया. समूह के एक व्यक्ति ने कहा, “आप सीजेपी के पक्ष में फर्जी खबरें दिखा रहे हैं. हम दिल्ली पुलिस की रक्षा करेंगे, क्योंकि वह आपके खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर सकती.” पुलिस ने इन लोगों को वहां से खदेड़ा और करीब आधे घंटे बाद कुछ लोगों को हिरासत में लिया.
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5 छात्र निलंबित, 25 के खिलाफ मामला दर्ज: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘भगवाकरण’ का विरोध, मुस्लिम छात्रों को निशाना बनाने का आरोप
मकतूब मीडिया में प्रकाशित अशफाक ईजे की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में कथित ‘भगवाकरण’ के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच छात्रों को दो सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने 25 अन्य छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन मुस्लिम छात्रों को निशाना बना रहा है और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में संघ परिवार की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है.
विवाद वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को लेकर शुरू हुआ. गुरुवार शाम जारी निलंबन आदेश में पांच छात्रों को तत्काल छात्रावास खाली कर परिसर छोड़ने का निर्देश दिया गया. इसके बाद छात्रों ने प्रॉक्टर के. श्रीकुमार से आदेश वापस लेने और उनके इस्तीफे की मांग की. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को छोड़कर अन्य छात्र संगठनों ने प्रशासनिक भवन का घेराव किया. शुक्रवार को भी कक्षाओं का बहिष्कार जारी रहा.
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श्रवण गर्ग | जंतर-मंतर अब कोई जगह नहीं, जहां बच्चे खड़े होंगे, वहीं जंतर-मंतर होगा
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और सरकार की कार्रवाई के राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा की. बातचीत में दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने, मीडिया की भूमिका और आंदोलन के संभावित दूरगामी प्रभावों पर सवाल उठाए गए.
श्रवण गर्ग के मुताबिक, 10 अक्टूबर को दिल्ली में सरकार ने जिस पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया, वह उसकी सफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक विफलता का संकेत है. उन्होंने कहा कि यह केवल ज्ञानेश कुमार की नौकरी बचाने का मामला नहीं है, बल्कि सरकार अपने सत्ता तंत्र और राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है. उनके अनुसार, यह विफलता केवल अमित शाह या किसी एक नेता की नहीं, बल्कि उस पूरी राजनीतिक व्यवस्था की है, जो इस कार्रवाई के पीछे खड़ी दिखाई देती है.
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शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक है: ईएएस शर्मा ने केंद्रीय गृह सचिव को लिखा पत्र
‘काउंटरकरंट्स’ में प्रकाशित पत्र में पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस शर्मा ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के निर्देश वापस लेने की अपील की है. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने से रोकने की खबर पर चिंता जताई है.
शर्मा ने ‘द प्रिंट’ की 9 अक्टूबर की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को सीजेपी के सदस्यों और समर्थकों को प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया था.
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‘भारत में हिरासत’: दुनिया का पहला प्रोटेस्ट, जो सरकार की सख्ती से सफल हो गया; ‘सांस लेता हूँ तो कोई डिटेन हो जाता है’
शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर और देश की राजधानी से हज़ारों किलोमीटर दूर भी ‘द ग्रेट इंडियन डिटेंशन’ (भारत में बड़े पैमाने पर हिरासत) का नज़ारा देखने को मिला, जब केंद्र और कुछ राज्यों की सरकारों ने छात्रों, युवाओं, बुजुर्ग राजनेताओं और देश के नागरिकों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इकट्ठा होने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी.
शनिवार को भारत “लोकतंत्र की जननी” जैसा बिल्कुल नहीं लग रहा था. इतिहास 10 अक्टूबर, 2026 को उस दिन के रूप में याद रखेगा जब भारत की राजधानी एक विशाल छावनी में बदल गई थी. कार्टूनिस्ट मंजुल ने ‘एक्स’ पर लिखा, “ये दुनिया का पहला प्रोटेस्ट है, जो बिना हुए भी सक्सेसफुल होगा.” मंजुल ने एक पोस्ट में यह भी कहा, “आज का हाल देखिए, सोचिए और खुद से सवाल पूछिए- प्रशासन के चाहे बगैर 2002 का कत्लेआम मुमकिन था क्या? और प्रशासन यही महाशय चला रहे थे.
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‘प्रधानमंत्री अंबानी’: एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की अटकी एंट्री की बिड पर किया हंगामा
भारत में स्टारलिंक के लॉन्च में हो रही देरी से निराश एलन मस्क ने अरबपति मुकेश अंबानी पर अपना हमला तेज कर दिया है.
‘एक्स’ पर रिलायंस प्रमुख के खिलाफ अपने हालिया तीखे हमले में, मस्क ने तंज कसते हुए उन्हें “प्रधानमंत्री अंबानी” कहा और उन पर अपने खुद के टेलीकॉम साम्राज्य की रक्षा के लिए उनकी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भारत से बाहर रखने का आरोप लगाया.
मस्क ने यह कहते हुए भी मज़ाक उड़ाया कि वे यह पहचानने में विफल रहे कि भारत में असल हुकूमत किसकी चलती है: “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया यह न समझ पाने के लिए मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप भारत के असली बॉस हैं.”
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मणिपुर हिंसा: कुकी-नागा के बीच ताजा झड़पों में 5 लोगों की मौत, गोलीबारी हुई, 10 घर जलाए गए
‘पीटीआई’ के मुताबिक, मणिपुर के कामजोंग और उखरूल जिलों में सशस्त्र समूहों के बीच हुई ताजा झड़पों में पांच लोगों की मौत हो गई.
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि नागा-बहुसंख्यक कामजोंग जिले के कुकी-प्रधान चासाद गांव में 22 वर्षीय एक युवक और 42 वर्षीय एक महिला की हत्या कर दी गई. अधिकारियों ने बताया कि पांच बच्चों की मां उस महिला को शुक्रवार रात गर्दन के पास गोली मारी गई थी और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई.
उन्होंने आगे बताया कि उसकी हत्या के कारण कुकी और नागा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही. इसके बाद हुई झड़पों में उस युवक की मौत हो गई, और इस दौरान 10 घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया.
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आरक्षण का विरोध करने वालों के लिए सैलूनों से एक सबक, जहाँ दलित युवाओं ने जातिगत बाधाओं को दी चुनौती
मई में, पुरी जिले की सौरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत जोराकानी भोई सही के दृढ-संकल्पित दलित युवाओं के एक समूह ने उन सैलूनों में बाल कटवाने की मांग करके अपनी बात रखने का फैसला किया, जो पारंपरिक रूप से केवल उच्च जातियों की सेवा करते आए थे.
युवाओं का यह प्रयास विफल रहा और इसने छुआछूत की इस प्रथा के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई को जन्म दे दिया—एक ऐसी प्रथा जो भारत द्वारा सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देने वाले संविधान को अपनाने के 76 साल बाद भी जारी है.
बसंत कुमार मोहंती के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संपन्न वर्गों ने जाति-आधारित आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने की मांग को लेकर एक अभियान चला रखा है.
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आरबीआई सर्वे: खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों से भारत में घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एक सर्वेक्षण से बुधवार को यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय परिवारों को महंगाई और बढ़ने की आशंका है. यह इस बात का संकेत है कि भोजन और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति से आगे भी दिखाई देने लगा है.
‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय केंद्रीय बैंक ने बुधवार को लगभग चार वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर बारीक नज़र रखी जाती है क्योंकि यह लोगों के खर्च करने के तौर-तरीकों और वेतन वृद्धि की मांगों को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सर्वेक्षण जनभावना को दर्शाते हैं और ये वास्तविक मुद्रास्फीति का सीधा पूर्वानुमान नहीं हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
10 अक्टूबर दिल्ली बंद पर सोशल मीडिया का रूख: 'द ग्रेट इंडियन डिटेंशन', धर्मेंद्र प्रधान मीम्स, हरिशंकर परसाई के कोट और 'जंतर-मंतर 2.0'.
'द विजयेता सिंह और सुरुचि कुमारी की रिपोर्ट': 10 अक्टूबर दिल्ली लॉकडाउन के बाद प्रशासन के सामने 'बिना नेता वाली भीड़' और रविवार को फिर जुटने की चुनौती.
'द मॉर्निंग कॉन्टेक्स्ट' सुशांत सिंह का विश्लेषण: भारत में संवैधानिक संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण, 'चुनावी निरंकुशता' और लेवित्स्की-ज़िब्लाट के लोकतांत्रिक क्षरण के मॉडल पर विचार.
'द इंडियन एक्सप्रेस' सुकल्प शर्मा का विश्लेषण: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से अमेरिका के लिए डीजल आयात का रास्ता खोलने का निर्णय; भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों की दोहरी नीति पर सवाल.
'हिंदुस्तान टाइम्स' जिज्ञासा सिन्हा की रिपोर्ट: 10 अक्टूबर को सीपी और एमसीडी सेंटर के पास बजरंग दल व दक्षिणपंथी समूहों का तांडव; पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों पर हमला.
'काउंटरकरंट्स' डॉ. अरुण मित्रा: 10 अक्टूबर दिल्ली पाबंदियां, 'ब्रिटिश राज' और आपातकाल से तुलना; फासीवाद के खिलाफ ग्राम्शी-दिमित्रोव के सिद्धांतों पर विश्लेषण.
'हरकारा डीप डाइव' में श्रवण गर्ग का विश्लेषण: 10 अक्टूबर आंदोलन पर सरकार की विफलता, 'जंतर-मंतर' की बदलती धारणा और एसआईआर/चुनाव आयोग पर उठे सवाल.
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में वंदे मातरम संगोष्ठी पर हंगामा; 5 छात्र निलंबित, 25 पर केस और भगवाकरण के आरोप.
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