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‘मौत तो दूर की बात, एक भी व्यक्ति की हड्डी नहीं टूटी’, ‘दिल्ली पुलिस की तारीफ होनी चाहिए’: रिजिजू ने कहा
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार (18 अगस्त) को पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि “एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई” और पुलिस की “तारीफ होनी चाहिए.”
‘द वायर’ के अनुसार, रिजिजू की यह टिप्पणी तब आई है जब दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा है कि 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. जहाँ रिजिजू ने बिहार के सिवान में एके-47 राइफल के इस्तेमाल से इनकार किया है
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8,452 करोड़ रुपये के ‘पीएम केयर्स’ फंड ने सिर्फ 0.1% ही खर्च किया, ऑडिट में खुलासा होने के बाद उठे तीखे सवाल
केंद्र सरकार द्वारा जारी पीएम केयर्स फंड की नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट ने फंड के उपयोग, पारदर्शिता और दान में आई गिरावट को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. विपक्ष, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वित्तीय विशेषज्ञों ने रिपोर्ट के सामने आते ही सरकार की नीयत और फंड के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में 8,452.06 करोड़ रुपये की विशाल राशि शेष थी. इसमें से 7,846 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में और 605 करोड़ रुपये बचत बैंक खातों में जमा हैं.
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दिल्ली में 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का खतरा, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में करीब 7 लाख प्रभावित
‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के तहत 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47.62 लाख मतदाताओं के नाम बाहर रह सकते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम आबादी वाले और कम आय वाले इलाकों के करीब 7 लाख मतदाता शामिल हैं. दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जानी है.
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए गणना फॉर्म जमा करने की समयसीमा सोमवार को खत्म हो गई. जिन मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं, उन्हें 24 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका मिलेगा.
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आनंद तेलतुम्बड़े | 80 साल बाद भी दलित के ‘छूने’ से जमीन को शुद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ती है?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रामलीला मैदान में रैली को संबोधित किया. दो दिन बाद, 10 अगस्त को श्री राम सेना के सदस्यों ने उसी मंच पर ‘शुद्धिकरण’ हवन किया. वजह यह बताई गई कि उस मंच पर एक दलित नेता खड़गे खड़े हुए थे. खड़गे ने संसद में सवाल उठाया, "क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं?" केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना की निंदा की और जांच का आश्वासन दिया.
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भारत के युवा विद्रोही और उम्मीद से भरे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है — आगे कठिन और लंबे काम का पहाड़ खड़ा है
‘आर्टिकल 14’ के मुताबिक, दिसंबर 1973 में गुजरात के कॉलेज छात्रों ने बढ़े हुए भोजन खर्च के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था. जल्द ही यह आंदोलन खराब शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया. ‘नवनिर्माण’ आंदोलन के दबाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल को इस्तीफा देना पड़ा. आधी सदी से ज्यादा समय बाद 2026 का ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी आंदोलन उसी पुराने असंतोष का आधुनिक रूप दिखाई देता है. परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन मूल समस्या वही है — खराब शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के सीमित अवसर और युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ती बेचैनी.
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मार्च से जुलाई के बीच सरकार ने सोशल मीडिया की सामग्री ब्लॉक करने के 1.95 लाख आदेश भेजे
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मार्च से जुलाई 2026 के बीच केंद्र और राज्य सरकारों ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को ऑनलाइन सामग्री ब्लॉक करने के लिए करीब 1.95 लाख आदेश भेजे. यानी औसतन हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग आदेश और हर दिन करीब 1,275 आदेश. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में ऑनलाइन सामग्री पर सरकारी निगरानी और कार्रवाई में तेज बढ़ोतरी को दिखाता है.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इन पांच महीनों में इंस्टाग्राम को करीब एक लाख ब्लॉकिंग आदेश मिले, जो कुल आदेशों के आधे से ज्यादा हैं.
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बंगाल में 2011 के बाद जारी जाति प्रमाणपत्रों के सत्यापन के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
‘द स्टेट्समैन’ के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत 2011 से वोटर पहचान पत्र के आधार पर जारी किए गए जाति प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन किया जाना था. यह आदेश मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी किया गया था और इसके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को जारी जाति प्रमाणपत्रों की जांच की जानी थी.
हाईकोर्ट की खंडपीठ के सामने राज्य सरकार के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में सरकार के फैसले को ‘व्यापक स्तर पर सत्यापन’ की कार्रवाई बताया गया था.
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‘आप’ के दो चेहरे: दिल्ली में सेंसरशिप के खिलाफ चिल्लाती है, पंजाब में मीडिया का दमन करती है
‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ ने लिखा है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में पत्रकारों को चुप कराने का एक नया तरीका खोज निकाला है—कॉपीराइट कानून! इसने राज्य सरकार की आलोचना करने वाले फेसबुक पेजों और पोस्टों को हटाने के लिए बौद्धिक संपदा (आईपी) के दावों का इस्तेमाल किया है. उनका दावा है कि वे पत्रकार नहीं हैं क्योंकि उनके पास पत्रकारिता की डिग्री नहीं है.
दिल्ली में 'आप' सेंसरशिप का रोना रोती है, लेकिन पंजाब में वह वही पुराना रवैया अपना रही है. पार्टी ने ऐसी सामग्री पर भी अपने कॉपीराइट का दावा किया है जो उसकी अपनी भी नहीं है
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महात्मा गांधी की हत्या में दोषी नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे: सावरकर के रिश्तेदार ने पुणे अदालत को बताया
दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर को कथित तौर पर बदनाम करने के आरोप में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मुकदमे में एक उल्लेखनीय मोड़ आया है. विनायक सावरकर के परपोते सत्यकी ने पुणे की विशेष सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत को बताया कि उनके नाना गोपाल गोडसे और 1948 में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 'सक्रिय' सदस्य थे.
नरसी बेनवाल की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा लंदन में दिए गए एक भाषण में उनके दादा (पिता के चाचा) सावरकर को बदनाम करने का आरोप लगाने वाले सत्यकी से विशेष अदालत में राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार द्वारा जिरह की जा रही है.
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प्रधानमंत्री जी, मुफ्त कोचिंग से मुख्य समस्या का समाधान नहीं होता है
अजीत रानाडे ने लिखा है कि प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करने की घोषणा भारतीय शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी विषमता और चुनौती को रेखांकित करती है. सरकार की यह पहल गरीब और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है, जिससे वित्तीय तंगी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ से बाहर होने वाले छात्रों को राहत मिल सकती है. लेकिन, यह कदम समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय केवल उसके लक्षणों का इलाज करता है. असली सवाल यह है कि आखिर देश में कोचिंग प्रणाली इतनी अपरिहार्य क्यों बन गई है?
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मोदी की टिप्पणी के बाद “दिमागी नक्सल पार्टी” इंस्टाग्राम पर 2,00,000 से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम अकाउंट अस्तित्व में आया और रातों-रात इसके 1,81,000 से अधिक फॉलोअर्स बन गए.
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, सोमवार दोपहर तक, इस इंस्टाग्राम पेज के फॉलोअर्स की संख्या 2,00,000 से अधिक हो गई, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह के नाम वाले कई अन्य अकाउंट भी दिखाई देने लगे.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'आर्टिकल 14' में आदित्य कृष्ण की रिपोर्ट: तरुण तेजपाल और बृजभूषण शरण सिंह मामलों के जरिए यौन हिंसा मुकदमों में लैंगिक पूर्वाग्रहों और न्यायिक निष्पक्षता का विश्लेषण.
'स्क्रोल' की विशेष रिपोर्ट: अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को जमीन बेचकर नेताओं, एबीवीपी नेता और पूर्व महापौर के करीबियों को मिला कई गुना मुनाफा, जांच के बाद भी सौदे जारी.
'हरकारा डीप डाइव' में राकेश कायस्थ का विश्लेषण: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान, 'बौद्धिक समाजवाद' और असहमति की आवाजों पर बढ़ता राजनीतिक दबाव.
'द हिन्दू' में ज्यां द्रेज एवं मोहम्मद जमीर की रिपोर्ट: मनरेगा की जगह आई 'वीबी-जी राम जी' योजना के बाद रोजगार सृजन में 40% से अधिक की भारी गिरावट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट.
'काउंटरकरंट्स' में फरहान सिद्दीकी का लेख: भारत में लैंगिक न्याय, दलित नारीवाद, जाति, वर्ग और पितृसत्ता के त्रिकोण पर गहराता तीखा विश्लेषण.
'द वायर' रिपोर्ट: दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए किरेन रिजिजू का बयान, 200 घायलों के बावजूद कहा- 'एक भी व्यक्ति की हड्डी नहीं टूटी'.
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: दिल्ली एसआईआर प्रक्रिया में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.62 लाख नाम बाहर होने की आशंका, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित.
पीएम केयर्स फंड की 2024-25 ऑडिट रिपोर्ट से बढ़ा विवाद: 8,452 करोड़ शेष, लेकिन खर्च केवल 0.01%, कांग्रेस और कार्यकर्ताओं ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल.
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20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर से संसद की तरफ़ बढ़ रहे छात्रों पर लाठी, आँसू गैस और — रिकॉर्ड के मुताबिक़ — पेलेट चले. उसके बाद सरकार पीछे हटती दिखी. शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा हुआ, गिरफ़्तार नाबालिग़ छोड़े गए, राज्यों ने कार्रवाई रोकी. ग़लती सरकार की थी, पर माफ़ मोदी जी ने किया. मोहन भागवत वात्सल्य रस से ओत प्रोत नज़र आये. हालांकि सरकार के मंत्री और आरएसएस के दूसरे पदाधिकारी नौजवान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जहर उगलते रहे. ये बताने से बचने के लिए कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन्स, छात्राओं से बदसलूकी, एके -47, बल प्रयोग किसके कहने पर हुए थे, देश के गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन मे आने से बचते रहे. फिर सरकार वापस लौट आई. एफ़आईआर बनी रहीं, घरों पर दस्तक हुई, इंस्टाग्राम से पोस्ट ग़ायब होने लगीं, और रामपुर में बुलडोज़र फिर से खड़ा हो गया. 15 अगस्त को लाल किले से 77 मिनट का भाषण हुआ. उसमें युवा शक्ति थी, एआई ट्रेनिंग थी, 2047 था. 20 जुलाई नहीं था. इस एपिसोड में हम पाँच बातें रखते हैं — और आख़िर में उन्हें दोहराते हैं ताकि वे याद रहें.
Harkara Deep Dive Live में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग. अमित शाह के तीखे तेवरों के पीछे की सियासत क्या है? क्या सरकार विपक्षी दलों से ज्यादा अब जनता के सवालों और नाराजगी से घिर रही है? क्या जनता का ‘विपक्ष’ गृहमंत्री के सामने नई चुनौती बन रहा है? समझिए देश की मौजूदा राजनीति और सत्ता के बदलते समीकरणों का पूरा विश्लेषण. #IndianPolitics, #AmitShah, #IndianGovernment, #PoliticalAnalysis, #IndianPoliticsNews, #NarendraModi, #HomeMinister, #BJP, #Opposition, #PublicOpinion, #PoliticalNews, #PoliticsToday, #IndiaNews, #PoliticalDebate, #CurrentAffairs, #GovernmentPolitics, #PublicMood, #PoliticalStrategy, #IndianDemocracy, #PoliticalCommentary, #ElectionPolitics, #PowerPolitics, #PoliticalTrends, #NewsAnalysis, #DeepDive, #PoliticalDeepDive, #HarkaraDeepDive, #ShravanGarg, #IndiaPolitics2026
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हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया.आखिर इस शब्द का मतलब क्या है और इसके पीछे की राजनीतिक सोच क्या है? हरकारा डीप डाइव के इस खास एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार राकेश कायस्थ के साथ ‘दिमागी नक्सल’ की राजनीति, शिक्षा, असहमति, सवाल पूछने की संस्कृति और मोदी सरकार की बदलती राजनीतिक भाषा पर विस्तार से बातचीत की. क्या ‘दिमागी नक्सल’ महज एक नया राजनीतिक जुमला है या आने वाले समय में इसका इस्तेमाल असहमति और सवाल पूछने वालों को परिभाषित करने के लिए किया जाएगा? इस पूरी बहस को राकेश कायस्थ अपने व्यंग्यात्मक और विश्लेषणात्मक अंदाज में समझाते हैं.