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भावनगर: पुलिस इंस्पेक्टर ने लिव-इन पार्टनर के संदिग्ध हत्यारे फैसल को 10 मिनट में 107 बार पीटा, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
3 सितंबर को भावनगर के एसटी बस स्टैंड पर फैसल नाम के व्यक्ति ने कथित तौर पर उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही एक महिला की हत्या कर दी. सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने फैसल को गिरफ्तार कर लिया और आज (5 सितंबर) उसे अपराध स्थल पर ले आई. इस दौरान नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई (पुलिस निरीक्षक) डी.पी. उंडडकट ने कथित तौर पर उसे रस्सी से बांधा और डंडे से 107 बार पीटा; आरोपी को आज अदालत में पेश किया जाना था. इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
‘भास्कर इंग्लिश’ के अनुसार, नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई डी.पी. उंडडकट द्वारा आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाने और उसकी बर्बरतापूर्वक पिटाई करने के बाद सवाल खड़े हो गए हैं, मानो गुजरात के डीजीपी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश उन पर लागू ही नहीं होते हों. उल्लेखनीय है कि गुजरात के पूर्व प्रभारी डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव ने सख्त लिखित आदेश जारी कर कहा था कि किसी भी आरोपी का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालने (परेड कराने) या आरोपियों के साथ अपमानजनक व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
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अपूर्वानंद | मनुस्मृति विवाद हिंदू एकता के मिथक को कैसे उजागर करता है
'फ्रंटलाइन' में प्रोफेसर अपूर्वानंद लिखते हैं कि राहुल गांधी ने पितृसत्ता पर हमला करते हुए जब “मनुस्मृति मानसिकता” की आलोचना की, तो इतने सारे हिंदू नाराज क्यों हो गए? इनमें वे हिंदू भी शामिल हैं, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के आलोचक रहे हैं. हालांकि उनकी आपत्तियां अलग-अलग हैं.
कुछ लोगों का कहना है कि शायद ही किसी हिंदू परिवार में मनुस्मृति की प्रति मौजूद हो. कुछ कहते हैं कि उन्होंने जीवन में कभी किसी को मनुस्मृति का नाम लेते तक नहीं सुना. वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि इस ग्रंथ में कई अच्छी बातें भी हैं, इसलिए इसे पूरी तरह खारिज करना उचित नहीं है.
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सीबीआई ने 1,322 करोड़ रुपये के एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस धोखाधड़ी मामले में सुभाष चंद्रा को आरोपी बनाया
‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित महेंद्र सिंह मनराल की रिपोर्ट क्र मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जी समूह के संस्थापक और एस्सेल समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा, कई कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. आरोप है कि चंद्रा की संपत्ति का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, जिसके आधार पर जीवन बीमा निगम हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड यानी एलआईसीएचएफएल से ऋण लिया गया. बाद में ये ऋण डूब गए, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के इस ऋणदाता को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का कथित नुकसान हुआ.
सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड शाखा ने यह प्राथमिकी 31 अगस्त को दर्ज की. यह कार्रवाई एलआईसीएचएफएल की महाप्रबंधक नीता मेंघानी की लिखित शिकायत के आधार पर की गई.
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नेपाल त्रासदी के बावजूद ब्रह्मपुत्र पर विशाल बांध परियोजना को आगे बढ़ाने पर अड़ा चीन, भारत की चिंताएं
नेपाल-चीन सीमा पर हाल ही में हुए विनाशकारी हिमस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद, चीन तिब्बत में भारत सीमा के पास यारलुंग ज़ंगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले प्रवाह पर अपने महत्वाकांक्षी मेगा बांध का निर्माण जारी रखने पर अड़ा हुआ है. यह क्षेत्र अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील है, लेकिन इसके बावजूद बीजिंग की योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है.
अनंत कृष्णन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने जुलाई 2026 में जारी अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना (अक्षय ऊर्जा) में 'यारलुंग ज़ंगबो लोअर रीचेस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट' को प्राथमिकता दी है. जुलाई 2025 में चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने इसे "सदी की परियोजना" करार देते हुए इसकी शुरुआत की थी. इस पूरी परियोजना के अंतर्गत 5 पावर स्टेशन बनाए जाने हैं, जिस पर कुल 1.2 ट्रिलियन युआन (लगभग ₹14 लाख करोड़) का खर्च आएगा. इस विशाल परियोजना के संचालन के लिए राज्य-संचालित 'चीन याजियांग ग्रुप' का गठन किया गया है.
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हिमाचल के टिक-टिक करते ‘वॉटर बम’: आईआईटी अध्ययन में तेजी से बढ़ती 9 ग्लेशियल झीलों की पहचान
आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर डेरिक्स पी. शुक्ला के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में तेजी से फैल रही नौ ग्लेशियल झीलों की पहचान कर उन्हें "वॉटर बम" करार दिया है. नेपाल में हाल ही में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ की पृष्ठभूमि में यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बढ़ते तापमान के कारण पूरे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं.
अध्ययन के हवाले से ‘पीटीआई’ की रिपोर्ट कहती है कि पिछले एक दशक में हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों की संख्या में लगभग 30% और कुल क्षेत्रफल में 28.45% की वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2025 में 3,500 मीटर से ऊपर 2,076 ग्लेशियल झीलों का मानचित्रण किया गया, जो 2015 की तुलना में 710 अधिक हैं.
चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में स्थित नौ झीलों—कालीकुंड, चंद्रताल, वासुकी, सुरई, क्या त्सो, योचे, समुद्र टापू, कशांग और गेपांग गथ—को विशेष रूप से खतरनाक माना गया है.
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अमेरिकी जज ने गौतम अडानी के सह-आरोपियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप हटाने की याचिका खारिज की
गौतम अडानी और उनके दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ आरोप हटाने की अनुमति देने के ठीक तीन सप्ताह बाद, एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने शेष पांच सह-आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने के न्याय विभाग (डीओजे) के प्रयास को मंजूरी देने से एक बार फिर इनकार कर दिया है. जज ने अपने उस पूर्व निष्कर्ष को दोहराया, जिसमें कहा गया था कि विभाग द्वारा प्रस्तुत भारतीय कानूनी आदेश भारत के इस दावे का खंडन करते प्रतीत होते हैं कि उसके अधिकारियों ने इन आरोपों की जांच की थी.
‘द वायर’ के अनुसार, 10 अगस्त को, न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गराउफिस ने गौतम अडानी, सागर अडानी और विनीत जैन के खिलाफ प्रतिभूति (सिक्योरिटीज़) और वायर धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया था. 10 अगस्त की यह ख़ारिजगी विभाग द्वारा आरोप हटाने के लिए पेश किए गए कई तर्कों में से केवल एक पर आधारित थी. तर्क यह था कि अडानी ग्रीन एनर्जी के वित्तीय दस्तावेजों में उसकी रिश्वत-विरोधी नीतियों के बारे में दिए गए बयान बहुत सामान्य थे, जिन पर निवेशक कंपनी के बॉन्ड खरीदने का फैसला करते समय तार्किक रूप से भरोसा नहीं कर सकते थे.
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फैक्ट्री कर्मचारी से पत्रकार तक: नोएडा के ‘साजिश’ मामले में पुलिस ने 8 लोगों को कैसे फंसाया
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भूयान ने शुक्रवार को कहा कि जुलाई में जंतर-मंतर पर पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखना "व्यथित करने वाला" और "गंभीर चिंता का विषय" था. उनकी यह टिप्पणी उनके उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अलग राय व्यक्त करने या सवाल पूछने पर छात्रों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए.
जस्टिस भूयान ने पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की किताब "पुलिसिंग द रिपब्लिक" के विमोचन के अवसर पर यह टिप्पणी की. समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ के अनुसार, उन्होंने कहा, "जब हम भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जाकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखते हैं, तो हम सभी हताश हो जाते हैं. इसे देखना बहुत, बहुत व्यथित करने वाला है."
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मणिपुर: 2023 की हिंसा के बाद 300 से अधिक लोगों की मौत, 49 लापता
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग लापता हैं. पीटीआई ने गुरुवार को विधानसभा में सरकार के हवाले से यह जानकारी दी.
राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में 31 अगस्त तक के आंकड़े पेश किए. उन्होंने कहा कि जातीय संघर्ष के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है और सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है.
जातीय झड़पें पहली बार मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो-हमार समुदायों के बीच हुई थीं.
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अडानी के स्वामित्व में भारत के सबसे पुराने सीमेंट संयंत्रों में से एक बंद, हजारों लोगों की आजीविका पर संकट
‘आर्टिकल 14’ में प्रकाशित मयंक आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित झिंकपानी का चाईबासा सीमेंट वर्क्स बंद हो गया है. अडानी समूह के स्वामित्व वाली एसीसी सीमेंट इकाई के बंद होने से हजारों लोगों की आजीविका संकट में पड़ गई है. यह संयंत्र क्षेत्र के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में से एक था और दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा छोटे कारोबार का प्रमुख आधार बना हुआ था.
16 अगस्त को बंद हुआ संयंत्र
चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया. कंपनी ने इसके पीछे मुख्य कारण चूना पत्थर के भंडार का समाप्त होना बताया है. संयंत्र के लिए जरूरी चूना पत्थर की आपूर्ति अब पहले की तरह स्थानीय खदानों से नहीं हो पा रही थी.
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श्रवण गर्ग | 20 जुलाई के बाद की घटनाएं बताती हैं कि देश में भरोसे का संकट गहराता जा रहा है
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार और अपने पुराने मित्र श्रवण गर्ग के साथ भारत की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की. बातचीत का केंद्र 20 जुलाई के बाद सामने आईं वे घटनाएं रहीं, जिनमें सरकार के नियंत्रण, पुलिस की भूमिका, नागरिक अधिकारों और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं.
श्रवण गर्ग के मुताबिक, इन घटनाओं को अब तक अलग-अलग तरीके से देखा जाता रहा है. किसी घटना को कानून-व्यवस्था का मामला माना गया, किसी को राजनीतिक विवाद और किसी को प्रशासनिक चूक. लेकिन जब इन्हें एक साथ रखकर देखा जाता है, तो पूरे सिस्टम में गहराते संकट का संकेत मिलता है. उनके अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सरकार के रवैये में बदलाव दिखाई देता है. चुनाव परिणामों ने उस धारणा को चुनौती दी कि विपक्ष कमजोर हो चुका है और जनता पूरी तरह सरकार के साथ है.
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मोदी के शपथ समारोह में आमंत्रित था जंतर-मंतर पर नाबालिग के पिता का सिर फोड़ने वाला स्वतंत्र भारद्वाज
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को नाबालिग छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता का सिर फोड़ने वाला स्वतंत्र भारद्वाज 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था. ‘ऑल्ट न्यूज़’ के प्रतीक सिन्हा ने अपने ‘एक्स’ हैन्डल पर इस बारे में ब्योरा शेयर किया है.
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब’ के मुताबिक, खुद को “सनातनी हीरो” बताने वाले 22 वर्षीय हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक बड़ा आधार तैयार किया है. उसके फेसबुक पर लगभग 3,27,000, इंस्टाग्राम पर 1,84,000 और ‘एक्स’ पर 6,400 से अधिक फॉलोअर्स हैं. वह लगातार हिंदुत्व, गौ रक्षा, उकसाऊ बयानों और मुसलमानों तथा सरकार के आलोचकों पर हमलों से जुड़ी सामग्रियां पोस्ट करता रहता था. अपनी प्रोफाइल पर उसने लाल किले के कार्यक्रम, 15 अगस्त के लिए रक्षा मंत्रालय से प्राप्त निमंत्रण पत्र और केंद्र सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के कार्ड की तस्वीरें साझा कर खुद को सत्ता के करीब दिखाने का प्रयास किया. इसके अलावा, कई बड़े नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें और एआई निर्मित भड़काऊ फोटो भी उसके सोशल मीडिया पर मौजूद थीं.
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हिंदी पट्टी के राज्यों में सरकारी स्कूल शिक्षा का बुरा हाल; नई संसद और नया पीएम आवास बन सकता है तो स्कूल क्यों नहीं?
उत्तर और मध्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूली शिक्षा गंभीर बुनियादी और ढांचागत चुनौतियों से जूझ रही है. चाहे वह प्रत्येक स्कूल में शिक्षकों की संख्या की बात हो या उस इमारत की स्थिति की जिसमें बच्चे पढ़ते हैं. चार प्रमुख राज्यों—बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश—के सरकारी स्कूल शिक्षा की ‘द हिंदू’ के रिपोर्टरों अमरनाथ तिवारी, आशना बुटानी, मयंक कुमार और मेहुल मालपानी ने पड़ताल की है.
10 अगस्त को, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक वीडियो में कहा कि आजादी के बाद से कोई भी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को वैसी सुविधाएं नहीं दे पाई है जैसी शहरी क्षेत्रों के छात्रों को मिलती हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के अपने गृह जिले हिंगोली के स्कूलों का निरीक्षण शुरू करने और स्थिति में सुधार के लिए सरपंचों से अनुरोध करने का संकल्प लिया.
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जीडीपी आंकड़ों की समीक्षा करने वाले पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग कौन हैं?
इस सप्ताह के शुरू में (31 अगस्त) भारत की पहली तिमाही (क्वार्टर-1) के जीडीपी वृद्धि आंकड़े जारी होने के बाद, पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सुभाष चंद्र गर्ग खुद को इन आंकड़ों को लेकर छिड़ी एक जोरदार बहस के केंद्र में पा रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक टीवी चैनल (एनडीटीवी) को दिए गए एक साक्षात्कार में, जो काफी वायरल हुआ है, वित्त मंत्रालय के इस पूर्व शीर्ष नौकरशाह ने भारत की 7.8% आर्थिक वृद्धि दर पर सवाल उठाए हैं, जिसने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया था.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'भास्कर इंग्लिश' रिपोर्ट: भावनगर में लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी फैसल को पुलिस इंस्पेक्टर डी.पी. उंडडकट ने सड़क पर 107 डंडे मारे; सुप्रीम कोर्ट और डीजीपी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन.
'फ्रंटलाइन' में प्रो. अपूर्वानंद का लेख: राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर विवाद, आरएसएस की विचारधारा, जातिगत पदानुक्रम और सवर्ण-दलित दृष्टिकोण का विश्लेषण.
महेंद्र सिंह मनराल की 'इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: सुभाष चंद्रा और एस्सेल ग्रुप के खिलाफ सीबीआई की ₹1,322 करोड़ धोखाधड़ी मामले में नई प्राथमिकी दर्ज.
अनंत कृष्णन की रिपोर्ट: तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग ज़ंगबो) पर चीन के ₹14 लाख करोड़ के मेगा बांध 'ग्रेट बैंड' प्रोजेक्ट से भारत की जल सुरक्षा और पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा बढ़ा.
'पीटीआई' रिपोर्ट: आईआईटी मंडी के प्रोफेसर डेरिक्स पी. शुक्ला के अध्ययन में हिमाचल की 9 ग्लेशियल झीलों को 'वॉटर बम' करार दिया गया, राज्य सरकार ने केंद्र से ₹105 करोड़ की मदद मांगी.
'द वायर' और 'पॉलिटिको' की रिपोर्ट: अमेरिकी जज निकोलस गराउफिस ने अडानी रिश्वतकांड में डीओजे की अर्जी खारिज की; 5 सह-आरोपियों पर केस हटाने से फिर इनकार.
'आर्टिकल 14' में सबा गुरमत की ग्राउंड रिपोर्ट: नोएडा मजदूर आंदोलन के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर, छात्र और पत्रकारों की गिरफ्तारियों, NSA हटाने और पुलिस दावों पर उठे गंभीर सवाल.
'डेक्कन हेराल्ड' रिपोर्ट: मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में मौतों का आंकड़ा 306 पहुंचा, गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने सदन में पेश किया विस्थापन डेटा.
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भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने की अपील की. लेकिन सवाल यह है कि GDP के आंकड़े तय कौन करता है? और अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो आम जनता की जिंदगी में इसका असर कितना दिखाई दे रहा है? हरकारा डीप डाइव लाइव में निधीश त्यागी एवं श्रवण गर्ग के साथ इसी सवाल पर चर्चा. क्या GDP ग्रोथ और आम आदमी की आर्थिक स्थिति एक ही कहानी बताते हैं? क्या विकास के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस में असली सवाल पीछे छूट जाता है? और प्रधानमंत्री की स्वदेशी वाली अपील का अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है? इस एपिसोड में चर्चा होगी: 7.8% GDP ग्रोथ का मतलब और इसके पीछे के आंकड़े. GDP तय करने वाली संस्थाओं और सरकार की भूमिका. आर्थिक विकास और आम जनता के अनुभव के बीच का अंतर. स्वदेशी, विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद पर प्रधानमंत्री की अपील.
हरकारा डीप डाइव LIVE में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा और उनके हालिया बयान पर खास चर्चा. न्यूयॉर्क में श्री मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है. उन्होंने हिंदुत्व, धार्मिक विविधता, सभी धर्मों के सम्मान और “यूनिटी इन डायवर्सिटी” की बात भी की. लेकिन सवाल यह है कि भागवत ने वास्तव में क्या कहा और उस बयान का पूरा संदर्भ क्या है? जिस बात पर इतना हल्ला मचा, क्या बहस उसी बात पर हो रही है जो उन्होंने कही? RSS, हिंदुत्व और हिंदू समाज को लेकर भागवत का संदेश क्या है? और न्यूयॉर्क से दिया गया यह संदेश भारत के लिए क्या मायने रखता है? हरकारा डीप डाइव LIVE में इन्हीं सवालों की पड़ताल. देखिए और जुड़िए चर्चा में.
हम हरकारा.
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हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


खाँसी का अलग इलाज, ज़ुकाम का अलग — पर पूरे शरीर का टेस्ट किसी ने नहीं कराया. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग इस बातचीत में वही करते हैं जो हमारा रोज़ का न्यूज़ साइकिल नहीं करता — पिछले डेढ़ महीने की अलग-अलग दिखती घटनाओं को एक साथ रखकर देखते हैं. 20 जुलाई के जंतर-मंतर से लेकर 4 सितंबर तक की घटनाएँ जब एग्रीगेट होती हैं, तो जो तस्वीर उभरती है वह बेचैन करने वाली है. बातचीत में: • स्वतंत्र भारद्वाज का मामला और यह सवाल कि ऐसा शख़्स वीआईपी दायरों तक कैसे पहुँचता रहा • इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट जिसके मुताबिक़ जंतर-मंतर एफ़आईआर में नामज़द 2,873 लोगों में गंभीर अपराधों के आरोपी हैं और कम से कम 25 वे हैं जो जेल में सज़ा काट रहे थे — तो फिर फ़ेशियल रिकग्निशन सिस्टम क्या पहचान रहा है? • 4 पीएम की दो महिला पत्रकारों का साकेत थाने वाला आरोप, और आशीष जोशी की हिरासत • एसआईआर पर एसवाई क़ुरैशी का आकलन — तीन चरणों में 13 करोड़ नाम, यानी दो राज्यों की आबादी के बराबर • जीडीपी पर 7.8 बनाम 2.6 का विवाद • हल्द्वानी, खरगे साहब और 25 दिन बाद भी एफ़आईआर नहीं • और सबसे ज़रूरी हिस्सा — बंगाल और तमिलनाडु का सबक़: ममता और स्टालिन ने भी यही रास्ता चुना था, नतीजा सामने है श्रवण गर्ग का निष्कर्ष सीधा है — इनकंपीटेंस और अहंकार एक साथ नहीं चल सकते. और अगर आप नहीं बदलेंगे, तो लोग रिजीम बदल देंगे. चेतावनी: इस बातचीत की कुछ बातें आपको विचलित कर सकती हैं. मेज़बान: निधीश त्यागी मेहमान: श्रवण गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार हरकारा — शोर कम, रोशनी ज़्यादा. हमारा काम पसंद आए तो चैनल सब्सक्राइब करें, वीडियो शेयर करें और हरकारा को सहयोग दें: harkaraonline.com #हरकारा #श्रवणगर्ग #निधीशत्यागी