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भारत की ‘गोल्डीलॉक्स’ अर्थव्यवस्था का मिथक; जीडीपी के मामले में भारत से आगे निकले जापान और ब्रिटेन
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“वोट देने के लिए भरोसा नहीं, लेकिन चुनाव कराने के लिए उन पर पूरा भरोसा है” : बंगाल के चुनाव अधिकारी जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए
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औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर मार्च में 5 महीने के निचले स्तर 4.1% पर पहुँची; पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहला महीना
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ईरान संघर्ष: नए शीत युद्ध की आहट, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी
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डिजिटल अरेस्ट घोटाला: व्हाट्सएप ने 9,400 खाते बंद किए, सुप्रीम कोर्ट को बताया — पूरे नेटवर्क को किया ध्वस्त
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वैश्विक तेल उत्पादक समूह को बड़ा झटका: यूएई ने ओपेक और ओपेक+ छोड़ा
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‘जिसका खाता है, उसे लेकर आओ’: ओडिशा में बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा शख्स
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अमेरिका-भारत रिश्तों में तनाव: ट्रंप की टिप्पणी, भारत की चुप्पी और उठते बड़े सवाल
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“धार्मिक पहचान के कारण बनाया निशाना”, एमपी में हिरासत में लिए गए 155 मुस्लिम छात्रों के अभिभावकों का आरोप
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बंगाल चुनाव में आलू का भी दर्द; भाजपा को क्यों दिख रही है उम्मीद
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ट्रंप के इतने करीब कैसे पहुँचा बंदूकधारी?
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किसका पलड़ा भारी है दो माह से जारी जंग के बाद..
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डीप डाइव विद श्रवण गर्ग | ममता की हार का मतलब देश के लिए क्या होगा?
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बिरयानी के बाद तरबूज खाया और फिर 4 मौतें: मुंबई में एक त्रासदी जो 12 घंटों के भीतर घटित हुई
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आकार पटेल: भाजपा मुस्लिमों का पूर्ण बहिष्कार चाहती है
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बंगाल: मछली और झींगा भी मुद्दा; डेल्टा क्षेत्र के बड़े दांव वाले चुनाव में जीविका और वफादारी का असर
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“लॉरेंस ही कर्म है”: मोदी के भारत का गैंगस्टर जो आइकन बन गया
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‘मर्ज़ लाइलाज है, पूरा भारतीय समाज राघव चड्ढा है’
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राघव चड्ढा और बड़ी समस्या: नेता-केंद्रित दलों की संरचनात्मक कमजोरी
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ओडिशा में खनन विरोध पर सख्ती: दलित-आदिवासी प्रदर्शनकारियों को ज़मानत के बदले पुलिस थाने साफ करने की शर्त
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द ग्रेट भाजपा वाशिंग मशीन
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पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान: 92% वोटिंग के पीछे क्या है असली कहानी?
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आप में फूट: राघव चड्ढा ने बगावत की, 6 सांसदों के साथ भाजपा में शामिल, मित्तल को 10 दिन पहले ईडी ने घेरा था
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‘इन तर्कों को ट्रिब्यूनल के समक्ष रखें’: सुप्रीम कोर्ट का उन लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार, जिनके नाम बंगाल ‘एसआईआर’ के बाद हटाए
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भाजपा की योजनाओं पर हिटलर की छाप: बेबी ने ‘एसआईआर’ को हिंदुत्व की बड़ी योजना का हिस्सा बताया
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एक अलग आवाज़: बंगाल बोल रहा है, भारत को सुनना चाहिए
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शमशेरगंज एक सैंपल: मतदान से पहले ही ‘एसआईआर’ ने बदला चुनावी समीकरण, भाजपा को वोटिंग से पूर्व लाभ
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लोकतंत्र की अप्रत्याशित घर वापसी
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इंडियन एक्सप्रेस में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘ग्राफ्स, डेटा, पर्सपेक्टिव्स’ में वरिष्ठ लेखक उदित मिश्रा लिखते हैं कि फरवरी के बजट के समय आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को “दुर्लभ गोल्डीलॉक्स काल” बताया था — यानी वह स्थिति जहां विकास दर ऊंची हो, महंगाई कम हो और बेरोज़गारी भी कम हो. लेकिन ईरान युद्ध और रुपये की गिरावट के बाद जापान और ब्रिटेन दोनों जीडीपी के मामले में भारत से आगे निकल गए हैं. भारत छठे स्थान पर आ गया है.
‘एक्सिओस’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ अमेरिकी टकराव अब शीत युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गया है — वित्तीय प्रतिबंध, समुद्री नाकाबंदी और बातचीत के प्रयासों के बीच. कई अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सिस को बताया कि उन्हें डर है कि अमेरिका एक ऐसे “जमे हुए संघर्ष” में फंस सकता है जहां न युद्ध हो न कोई समझौता.
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ है कि व्हाट्सप ने गृह मंत्रालय को बताया कि उसने स्वतंत्र जांच के बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘कानून प्रवर्तन के प्रतिरूपण’ से जुड़े 9,400 खाते बंद किए. कंपनी ने कहा कि उसने महज एक-एक खाता बंद करने के बजाय पूरे ठग नेटवर्क को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो मुख्यतः कंबोडिया में सक्रिय था.
‘द हिंदू’ में टी.सी.ए. शरद राघवन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर मार्च 2026 में गिरकर पांच महीने के निचले स्तर 4.1% पर आ गई है. पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद यह आंकड़ों का पहला महीना है. निर्माण क्षेत्र (कन्स्ट्रक्शन सेक्टर) की विकास दर में लगभग 50% की गिरावट और उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों में सुस्त वृद्धि ने इस आंकड़े को नीचे पहुँचाया है.
जो सरकारी कर्मचारी दशकों से चुनाव ड्यूटी में तैनात होकर लोकतंत्र के इस महापर्व को संपन्न कराने में अपना योगदान देते रहे हैं, “एसआईआर” के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया है. दुखद यह है कि कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में अत्री मित्रा की यह रिपोर्ट मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाती है. यह दिखाती है कि कैसे सिस्टम की खामियों के कारण स्वयं 'सिस्टम के रक्षक' (चुनाव अधिकारी) ही 2026 के विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रह गए हैं.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को कहा कि वह ओपेक पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और ओपेक+ से अलग हो रहा है. तेल निर्यातक समूहों और उनके वास्तविक नेता सऊदी अरब के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब ईरान युद्ध के कारण ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर है. ओपेक के पुराने सदस्य यूएई का इस तरह अचानक अलग होना समूह के भीतर अव्यवस्था पैदा कर सकता है और उसे कमजोर कर सकता है. यह समूह आमतौर पर भू-राजनीति से लेकर उत्पादन कोटा जैसे कई मुद्दों पर आंतरिक मतभेदों के बावजूद एक एकजुट मोर्चा दिखाने की कोशिश करता रहा है. ओपेक के खाड़ी उत्पादक पहले से ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्यात करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
क्योंझर जिले के डियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा (50) की बड़ी बहन कलारा मुंडा (56) की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को हो गई थी. कलारा के बैंक खाते में ₹20,000 जमा थे. आर्थिक रूप से बेहद कमजोर जीतू मुंडा अपनी बहन की जमा पूंजी निकालने के लिए कई बार ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा गया. जीतू का आरोप है कि उसने बैंक कर्मचारियों को बार-बार बताया कि उसकी बहन की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन बैंक वालों ने एक न सुनी. उन्होंने कथित तौर पर शर्त रख दी कि ‘पैसे तभी मिलेंगे जब खाताधारक खुद बैंक आएगा
हरकारा डीप डाइव के एक ऑडियो संस्करण में वरिष्ठ विश्लेषक श्रवण गर्ग के साथ भारत-अमेरिका संबंधों पर विस्तृत बातचीत की गई. इस चर्चा में मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी और भारत सरकार की प्रतिक्रिया या कहें, चुप्पी, पर सवाल उठाए गए. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माइकल सैवेज की एक टिप्पणी साझा की, जिसमें भारत को “नर्क” कहा गया और भारतीयों को “गैंगस्टर्स विद लैपटॉप्स” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
पश्चिम बंगाल का 2026 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक राज्य की सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक ‘कुरुक्षेत्र’ बन चुका है. ‘हरकारा डीप डाइव’ पर ऑडियो पॉडकास्ट में, वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव के उन अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली, जो इसे आज़ाद भारत के सबसे जटिल और अभूतपूर्व चुनावों में से एक बनाते हैं. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग इस चुनाव की तुलना ‘प्लासी के युद्ध’ से करते हैं. उनका मानना है कि बंगाल में जिस तरह से ‘मीर जाफरों’ और ‘जगत सेठों’ की तलाश की गई है, वह अभूतपूर्व है. ममता बनर्जी के खिलाफ इस बार भयंकर सत्ता विरोधी लहर है. 2021 के मुकाबले इस बार भाजपा ने हिंदू वोटों की नाराज़गी को और गहरा किया है, वहीं 30% वाले मुस्लिम वोट बैंक में भी दरार डालने की कोशिश की है.
टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के इस लाइव शो में हम चर्चा करेंगे पश्चिम बंगाल चुनाव में दर्ज हुए 92% मतदान पर, आख़िर यह आंकड़ा क्या संकेत देता है? क्या यह बढ़ती राजनीतिक भागीदारी और जागरूकता का प्रमाण है, या इसके पीछे कोई और सामाजिक और राजनीतिक परतें छिपी हैं? इस बातचीत में हम समझने की कोशिश करेंगे कि इतने उच्च मतदान का लोकतंत्र, चुनावी रणनीतियों और ज़मीनी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है. क्या यह ट्रेंड भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है?
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


हरकारा डीप डाइव के एक ऑडियो संस्करण में वरिष्ठ विश्लेषक श्रवण गर्ग के साथ भारत-अमेरिका संबंधों पर विस्तृत बातचीत की गई. इस चर्चा में मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी और भारत सरकार की प्रतिक्रिया या कहें, चुप्पी, पर सवाल उठाए गए. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माइकल सैवेज की एक टिप्पणी साझा की, जिसमें भारत को “नर्क” कहा गया और भारतीयों को “गैंगस्टर्स विद लैपटॉप्स” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया.