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10 नागरिक, अराजकता की 10 कहानियाँ: कैसे एसआईआर के माध्यम से वंचित मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है
अंतरा बरुआ की यह विस्तृत रिपोर्ट कहती है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इससे नागरिकों के लिए पैदा हुई समस्याओं की बाढ़ हर कोने में दिखाई दे रही है. इस प्रक्रिया ने जाति, वर्ग और धर्म की दीवारों से परे लोगों को प्रभावित किया है. फिर भी, यह मुख्य रूप से विशेषाधिकार प्राप्त लोग ही हैं जो दस्तावेज़ जुटाने की इस अराजकता और भ्रम की स्थिति का सामना करने में सक्षम हैं.
'द वायर' के लिए अंतरा ने दिल्ली के ऐसे ही 10 मतदाताओं और एसआईआर से निपटने के उनके संघर्ष पर एक नज़र डाली है:
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आकार पटेल | ज्ञानेश कुमार को जाना होगा, यह आंदोलन नहीं रुकेगा
'हरकारा डीप डाइव' के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के साथ 9 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद पर चर्चा की. बातचीत में दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती, प्रदर्शनकारियों पर लगाई जा रही पाबंदियों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाए गए.
आकार पटेल का मानना है कि सरकार की कोशिश प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुँचने से रोकने और आंदोलन को कमजोर करने की है, लेकिन यह आंदोलन केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि एसआईआर एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मताधिकार और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया से है. उनके अनुसार, नागरिकों पर अपने नाम और पात्रता के प्रमाण देने का बोझ डालने से कई तरह की मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.
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बंगाल के राज्यपाल के कार्यालय की निबंध प्रतियोगिता में छात्रों से ‘सभ्यतागत भारत पर घातक हमले’ पर लिखने को कहा गया
श्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि के कार्यालय 'लोक भवन' ने छात्रों के लिए राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता की घोषणा की है. इसमें ₹1,00,000 तक के नकद पुरस्कार रखे गए हैं. प्रतियोगिता के दो विषय तय किए गए हैं—कक्षा 10 से 12 के लिए 'कलकत्ता नरसंहार, 1946 - कारण और परिणाम' तथा कॉलेज स्तर के लिए 'ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा डायरेक्ट एक्शन डे - सभ्यतागत भारत पर एक घातक हमला'.
ये विषय 16 अगस्त 1946 के 'डायरेक्ट एक्शन डे' और 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' से जुड़े हैं. हालांकि, इन विषयों के चयन और शब्दावली पर सवाल उठ रहे हैं. प्रांतिक अली की रिपोर्ट में विशेषज्ञों का मानना है कि 'सभ्यतागत भारत' जैसे शब्द मानक ऐतिहासिक शब्दावली नहीं हैं, बल्कि यह एक विशेष विचारधारात्मक और हिंदू राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं.
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उत्तर प्रदेश में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बिना कारण 85,854 फॉर्म तैयार किए गए
‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की जांच के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने 85,854 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ऐसे फॉर्म तैयार किए, जिनमें विलोपन का कोई कारण दर्ज नहीं था. रिपोर्ट के अनुसार, इन फॉर्मों पर चुनाव अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर भी थे. जबकि नियमों के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए स्पष्ट कारण दर्ज करना और संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी देना जरूरी है.
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 4.3 लाख से अधिक फॉर्म-7 जमा किए गए. इनमें से लगभग 20 प्रतिशत आवेदन निर्वाचन आयोग के अपने विधानसभा स्तरीय अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत किए गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने ये फॉर्म स्वयं नहीं भरे थे, बल्कि आयोग के ईआरओनेट सॉफ्टवेयर ने सुनवाई के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर इन्हें स्वतः तैयार किया था.
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श्रवण गर्ग | अब सड़कों से ‘घर वापसी’ हुकूमत की होनी है, जनता की नहीं!
नागरिकों के मन में एक जिज्ञासा है! तीन दिन से राहुल गांधी राजधानी दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं. सारे विपक्षी सांसद पुलिसिया प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं. मंगलवार के दिन गिरफ़्तारी के पहले राहुल, प्रियंका और अन्य लोग आठ घंटे तक संसद मार्ग स्थित आकाशवाणी परिसर में धरना देते रहे. उन्हें और अन्य सैकड़ों सांसदों को नज़दीक ही स्थित ‘निर्वाचन आयोग’ की इमारत तक नहीं पहुँचने दिया गया. बुधवार को उन्हें ‘जनपथ’ से ‘जंतर मंतर’ तक बसों के द्वारा भी नहीं जाने दिया गया. उनकी बसों को जनपथ और अशोका रोड के चौराहे पर सुरक्षा बलों के पाँच हज़ार जवानों ने रोक दिया. तीन घंटे तक रोके रखा गया.
विपक्षी सांसद गुरुवार को राजघाट ज़रूर पहुँचे और बापू को श्रद्धांजलि भी अर्पित की. सांसदों की भारी भीड़ के साथ राजघाट तक पहुँचने के पहले समाधि के आसपास के इलाक़े को पुलिस द्वारा घेर लिया गया था.
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अमेरिका ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी, एचसीएल को ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित किया
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्वे की नोबेल समिति ने दक्षिण अफ्रीका की भारतीय तमिल मूल की न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है. उन्हें युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत बनाने के प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है.
रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्लै ने वकालत के जरिए नस्लीय भेदभाव, अलगाव और सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ संघर्ष किया. उनके शुरुआती कानूनी कार्यों में नेल्सन मंडेला और रंगभेद शासन को चुनौती देने वाले अन्य लोगों का बचाव करना शामिल था.
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आने वाला लोकतंत्र: सरकारों को युवाओं की आवाज क्यों सुननी चाहिए
‘काउंटरकरंट्स’ में प्रोफेसर डॉ. पी. जे. थॉमस पथिलचिरा लिखते हैं कि लोकतंत्र कोई पूर्ण व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर विकसित होने वाली प्रक्रिया है. फ्रांसीसी दार्शनिक जैक्स देरिदा की ‘आने वाले लोकतंत्र’ की अवधारणा के अनुसार, लोकतंत्र को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत होती है. इसकी वास्तविक ताकत लोगों को मौजूदा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने और सत्ता के दुरुपयोग को चुनौती देने की स्वतंत्रता देने में है.
लेखक के मुताबिक, लोकतंत्र की इसी प्रक्रिया में जन आंदोलन और विरोध प्रदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. एक अन्य फ्रांसीसी दार्शनिक जैक्स रांसिएर मानते हैं कि लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप असहमति में दिखाई देता है. जब हाशिये पर पड़े लोग अपनी आवाज उठाते हैं, मौजूदा कानूनों और सत्ता संरचनाओं को चुनौती देते हैं तथा अपने अधिकारों की मांग करते हैं, तभी लोकतांत्रिक राजनीति जीवंत होती है.
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भारत की पहली बुलेट ट्रेन का ‘सपना’ देरी और बढ़ती लागत से क्यों जूझ रहा है, जापान के साथ मतभेदों के कारण लड़खड़ाया
भारत की पहली बुलेट ट्रेन को देश की महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक माना गया था—मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने वाला 508 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर, जिसे जापानी तकनीक और वित्तपोषण से बनाया जा रहा था. लेकिन एक दशक के बाद भी, यह ट्रेन अपने पहले यात्री को ले जाने से काफी दूर है. ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के मुताबिक, भारत की पहली बुलेट ट्रेन साझेदार जापान के साथ मतभेदों के कारण लड़खड़ा गई है.
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना को 2015 में अनुमानित ₹980 अरब की लागत से स्वीकृति दी गई थी, जिसे बाद में संशोधित करके लगभग ₹1.87 ट्रिलियन (1.87 लाख करोड़) कर दिया गया. हालांकि, यह परियोजना भूमि अधिग्रहण में देरी, बढ़ती लागत और खरीद (प्रोक्योरमेंट) से जुड़े मतभेदों से घिरी रही है.
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ज्ञानेश कुमार की खातिर... दिल्ली में लॉकडाउन, कई बंदिशें; सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा-“मक्खी मारने के लिए हथौड़ा चला रहे हैं”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की खातिर भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को एक तरह से छावनी बना दिया है. तमाम बंदिशें लगाई हैं. मेट्रो और अन्य ट्रेन स्टेशन बंद करने के लिए कहा गया है. जंतर-मंतर और कर्तव्य पथ के 4 किमी के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया है. इतने प्रतिबंध लगाए हैं कि देश की सबसे बड़ी अदालत को सरकार को फटकारते हुए कहना पड़ा है- “आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते.” केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काम करने और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ने से रोकने के लिए निवारक (अग्रिम) कदम उठाने को कहा है.
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं द्वारा शनिवार 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किए जाने और देश के शीर्ष चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बाद, भारत की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने कड़ी नाकेबंदी कर दी है. यह विवाद मतदाता सूची के एक विवादास्पद संशोधन को लेकर है, जिसके तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे उन्हें सार्वभौमिक मताधिकार से वंचित कर दिया गया है.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी पुलिस को निर्देश: यदि ध्वनि मानकों का पालन हो तो मस्जिद में अज़ान के अधिकार में ‘हस्तक्षेप न करें’
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित ध्वनि सीमाओं और लाउडस्पीकर के उपयोग पर अदालत के 2020 के निर्णय का पालन करते हैं, तो सहारनपुर की एक मस्जिद में दिन में पांच बार अज़ान देने के उनके अधिकार में हस्तक्षेप न किया जाए.
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के अनुसार, न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शाहनवाज़ खान और पांच अन्य स्थानीय निवासियों द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया. याचिकाकर्ताओं ने आयशा मस्जिद में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी, और आरोप लगाया था कि ध्वनि-प्रवर्धक यंत्रों (साउंड एम्पलीफायरों) के उपयोग को नियंत्रित करने वाले न्यायिक नज़ीरों के बावजूद स्थानीय अधिकारी उनके काम में बाधा डाल रहे हैं.
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बंगाल उपचुनाव: मुस्लिम मतदाताओं को रोका गया, विपक्षी कार्यकर्ता गिरफ्तार, पत्रकारों पर भी शिकंजा
‘स्क्रोल’ में अनंत गुप्ता और रोकिबुज जमान की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने, विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और स्थानीय पत्रकारों के सोशल मीडिया खातों को प्रतिबंधित करने के आरोप सामने आए हैं. विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया है.
रेजीनगर के नजीरपुर गांव स्थित तेघारी प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर रिपोर्टर ने देखा कि कई मुस्लिम महिलाएं मतदान के लिए कतार में थीं, लेकिन नए मतदाता कतार में शामिल नहीं हो रहे थे. मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर मुस्लिम पुरुषों को कथित तौर पर वापस भेजा जा रहा था. वहां मौजूद पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों ने हस्तक्षेप नहीं किया. एक ग्रामीण ने बताया कि कैमरे पर बात करने पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का डर था.
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आरक्षण का विरोध करने वालों के लिए सैलूनों से एक सबक, जहाँ दलित युवाओं ने जातिगत बाधाओं को दी चुनौती
मई में, पुरी जिले की सौरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत जोराकानी भोई सही के दृढ-संकल्पित दलित युवाओं के एक समूह ने उन सैलूनों में बाल कटवाने की मांग करके अपनी बात रखने का फैसला किया, जो पारंपरिक रूप से केवल उच्च जातियों की सेवा करते आए थे.
युवाओं का यह प्रयास विफल रहा और इसने छुआछूत की इस प्रथा के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई को जन्म दे दिया—एक ऐसी प्रथा जो भारत द्वारा सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देने वाले संविधान को अपनाने के 76 साल बाद भी जारी है.
बसंत कुमार मोहंती के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संपन्न वर्गों ने जाति-आधारित आरक्षण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने की मांग को लेकर एक अभियान चला रखा है.
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आरबीआई सर्वे: खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों से भारत में घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एक सर्वेक्षण से बुधवार को यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय परिवारों को महंगाई और बढ़ने की आशंका है. यह इस बात का संकेत है कि भोजन और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति से आगे भी दिखाई देने लगा है.
‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय केंद्रीय बैंक ने बुधवार को लगभग चार वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की. परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर बारीक नज़र रखी जाती है क्योंकि यह लोगों के खर्च करने के तौर-तरीकों और वेतन वृद्धि की मांगों को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह सर्वेक्षण जनभावना को दर्शाते हैं और ये वास्तविक मुद्रास्फीति का सीधा पूर्वानुमान नहीं हैं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द वायर' अंतरा बरुआ की रिपोर्ट: दिल्ली में एसआईआर का जमीनी सच; सराय काले खां से बेला एस्टेट तक अनपढ़, रेहड़ी-पटरी, वकीलों और लेखकों के नाम हटने की दास्तान.
'हरकारा डीप डाइव': आकार पटेल का 9 अक्टूबर दिल्ली प्रदर्शन और एसआईआर विवाद पर विश्लेषण; मताधिकार, दस्तावेजों की जटिलता और लोकतांत्रिक आंदोलनों का भविष्य.
'प्रांतिक अली' रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल राज्यपाल कार्यालय द्वारा 'डायरेक्ट एक्शन डे' निबंध प्रतियोगिता पर विवाद; विशेषज्ञों ने 'सभ्यतागत भारत' शब्दावली पर उठाए सवाल.
'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' जांच: यूपी एसआईआर में चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा बिना कारण 85,854 फॉर्म-7 जनरेट; 1.10 लाख आवेदन समयसीमा के बाद स्वीकार.
'हरकारा रोज़ाना': निधीश त्यागी का 10 अक्टूबर जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विश्लेषण; दिल्ली में 26,000 बल तैनात, CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और सरकार की राजनीतिक बेचैनी पर सवाल.
'काउंटरकरंट्स' निबंध: प्रोफेसर थॉमस पथिलचिरा का विश्लेषण; जैक्स देरिदा, रांसिएर की लोकतांत्रिक अवधारणाएं, शेली की कविता और 65% युवा आबादी की भूमिका.
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: दक्षिण अफ्रीकी-तमिल मूल की न्यायविद नवी पिल्लै को 2026 नोबेल शांति पुरस्कार; युद्ध अपराधों व नरसंहार पर अंतरराष्ट्रीय कानून मजबूत करने के लिए सम्मान.
'श्रवण गर्ग' का विश्लेषण: राहुल गांधी का दिल्ली में आंदोलन, जंतर-मंतर पर तनाव, ज्ञानेश कुमार की स्थिति और पीएम मोदी की धार्मिक व राजनीतिक दिनचर्या पर सवाल.
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