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‘लव जिहाद’, ऑनर किलिंग और संविधान: भारतीय महिलाओं के प्रेम और विवाह की आजादी पर बढ़ती लड़ाई
भारत में अंतरधार्मिक विवाह 2% से भी कम हैं. फिर भी विभाजन के दौरान महिलाओं पर हुई हिंसा से लेकर आज के ‘लव जिहाद’ अभियानों, धर्मांतरण विरोधी कानूनों और ऑनर किलिंग तक, महिलाओं के प्रेम और विवाह के फैसले परिवार, समुदाय और राज्य की सत्ता के बीच संघर्ष का विषय बने हुए हैं.
'आर्टिकल-14' में हर्ष मंदर ने लिखा है कि भारत में महिलाओं को यह अधिकार कि वे किसे प्रेम करें और किससे विवाह करें, लंबे समय से परिवार और समुदाय की ‘इज्जत’ से जोड़कर देखा जाता रहा है. 1947 के विभाजन के दौरान यह सोच भयावह हिंसा में बदल गई थी. पंजाब के कई हिस्सों में महिलाओं को दूसरे समुदाय के पुरुषों के हाथों पड़ने से पहले आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया. कई महिलाओं की हत्या उनके अपने पिता, भाई और पति तक ने कर दी.
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‘सुपर अल नीनो’ से भारत में 15,800 अतिरिक्त गर्मी से मौतों का अनुमान: रिपोर्ट
जलवायु प्रभाव प्रयोगशाला (सीआईएल) के नए अनुमान में कहा गया है कि असामान्य रूप से शक्तिशाली अल नीनो के कारण सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में गर्मी से जुड़ी करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. यह अनुमान सामान्य वर्ष की तुलना में होने वाली अतिरिक्त मौतों का है.
सीआईएल के विश्लेषण के अनुसार, जून 2026 से फरवरी 2027 तक चलने वाले अल नीनो के पहले नौ महीनों में दुनियाभर में गर्मी से करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने मौजूदा स्थिति को भविष्य की एक झलक बताया है. उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले दशकों में इस तरह का तापमान सामान्य स्थिति का हिस्सा बन सकता है.
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जेन जी के मतदान अधिकार अटके, जनवरी 2024 से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ठप
'इकोनॉमिक टाइम्स' में अनुभूति बिश्नोई ने लिखा है कि भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूचियों के वार्षिक पुनरीक्षण को लेकर मतभेद के कारण 2026-27 के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) में देरी हो रही है. इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ सकता है जो 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं और पहली बार मतदाता बनने के पात्र हैं.
दशकों से राज्यों में अंतिम मतदाता सूची जनवरी के पहले सप्ताह में प्रकाशित होती रही है. लेकिन 2024 के बाद से वार्षिक एसएसआर की प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हो सकी है. 2025 में बिहार से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद कई राज्यों में इसी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई और वार्षिक एसएसआर पीछे चला गया.
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7 दिनों में 8 ईमेल, फिर भी गोवा के वैध मतदाता सूची से बाहर: चुनाव आयोग की खामियों से भरी व्यवस्था
'द इंडियन एक्सप्रेस' में रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 97 ऐसे मतदाता, जिन्हें स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद मतदाता सूची में शामिल करने योग्य पाया था, अंतिम सूची से बाहर रह गए. खास बात यह है कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सात दिनों के भीतर चुनाव आयोग को आठ बार ईमेल भेजकर इन नामों को शामिल करने के लिए तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन अंतिम सूची जारी होने तक समस्या का समाधान नहीं हुआ.
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची से बाहर होना गोवा में सिर्फ मतदान के अधिकार से वंचित होना नहीं है. राज्य की कुछ सरकारी योजनाओं में पात्रता तय करने के लिए मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है.
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जज के आदेश के बावजूद पॉलिटिको, एमएस नाउ, सीएनएन को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोका गया
‘रॉयटर्स’ के लिए सुज़ैन हीवी की खबर है कि एक न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा तीन समाचार संस्थानों पर लगाए गए प्रतिबंध को संभवतः असंवैधानिक करार देने और उनका प्रवेश तत्काल बहाल करने का आदेश देने के महज कुछ घंटों बाद, गुरुवार को पॉलिटिको, एमएस नाउ और सीएनएन के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश करने से रोक दिया गया.
अमेरिकी जिला न्यायाधीश टिम केली के रातों-रात आए फैसले ने इस प्रतिबंध पर 14 दिनों के लिए रोक लगा दी, जो मीडिया के साथ ट्रम्प के सबसे बड़े संघर्षों में से एक में उनके लिए एक बड़ा झटका है. पॉलिटिको ने बताया कि केली द्वारा ट्रम्प के प्रतिबंध पर अस्थायी रोक लगाने के बाद उसके पत्रकार के क्रेडेंशियल (प्रवेश पत्र) भी ज़ब्त कर लिए गए. एमएस नाउ की एक पत्रकार ने कहा कि उन्हें भी व्हाइट हाउस में प्रवेश करने से रोका गया, जबकि सीएनएन ने कहा कि उसके कुछ कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश से वंचित कर दिया गया.
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‘कॉकरोच’ : अगर चुनाव आयोग प्रमुख ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन
भारत के "कॉकरोच" युवा आंदोलन के नेताओं ने गुरुवार को कहा कि यदि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे. इस स्व-घोषित आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी... हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बिना पीछे नहीं हटेंगे."
यह चेतावनी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर उनके सहयोगियों (चुनाव आयुक्तों) ने उनसे सवाल पूछे थे.
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पिछले 4 वर्षों में राजनीतिक दलबदल से तीन दलों को सबसे अधिक लाभ हुआ, भाजपा उनमें से एक है
‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले चार वर्षों में अन्य दलों के नेताओं को अपने पाले में शामिल करने के मामले में नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ), भाजपा और नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) शीर्ष पर हैं.
अर्णब गांगुली ने रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि 2022 से 2026 के बीच 26 लोकसभा सांसद, सात राज्यसभा सांसद और 78 विधायक दूसरी पार्टियों में शामिल हुए. एनपीएफ, भाजपा और एनसीपीआई को नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी), ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस की कीमत पर फायदा हुआ.
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भाजपा ने बंगाल चुनाव पर ₹286.99 करोड़ खर्च किए, जो कांग्रेस द्वारा 5 राज्यों में किए गए खर्च से अधिक है
चुनाव आयोग के पास दाखिल किए गए व्यय विवरण के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल विधानसभा चुनाव पर ₹286.99 करोड़ खर्च किए. यह राशि इस साल की शुरुआत में पाँच राज्यों (एक केंद्र शासित प्रदेश समेत) में हुए चुनावों में कांग्रेस द्वारा खर्च किए गए ₹248.55 करोड़ से अधिक है.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, पांचों राज्यों (असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल) में भाजपा के कुल ₹529.38 करोड़ के खर्च में से आधे से अधिक हिस्सा केवल बंगाल का था. पार्टी ने बंगाल में आम प्रचार पर ₹217.16 करोड़ और उम्मीदवारों पर ₹69.83 करोड़ खर्च किए. भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को बेदखल कर बंगाल में पहली बार सत्ता हासिल की. पार्टी ने घोषित 293 सीटों में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं.
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28 सितंबर से देशव्यापी बैंक हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने सुरक्षा बढ़ाने को कहा
'द वायर' की रिपोर्ट के अनुसार, 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से बैंकों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाओं के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का अनुरोध किया है. वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने गृह मंत्रालय से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी करने को कहा है.
डीएफएस ने 21 सितंबर को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में मुद्रा तिजोरियों, चेक क्लियरिंग केंद्रों, डेटा सेंटर, डेटा रिकवरी सेंटर, ट्रेजरी संचालन, आईटी केंद्र, साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ और एटीएम के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया. इसके अलावा हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले बैंक कर्मचारियों को भी सुरक्षा देने की बात कही गई है.
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बंगाल फिर सुर्खियों में: मुस्लिम व्यक्ति और तीन बेटों को घर से उठाया गया, पुलिस का कहना है कि उन्हें ‘निर्वासित’ कर दिया गया
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक बंगाली मुस्लिम परिवार के चार सदस्य करीब 40 दिनों से लापता हैं. परिवार के अनुसार, पुलिस ने उन्हें उनके घर से उठाया था और उन पर बिना दस्तावेज के बांग्लादेशी प्रवासी होने का आरोप लगाया गया था. पुलिस ने ‘स्क्रोल’ को बताया कि चारों को सीमा सुरक्षा बल को सौंप दिया गया और उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया है. हालांकि, ‘स्क्रोल’ स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सका कि चारों को वास्तव में बांग्लादेश भेजा गया था.
मुर्शिदाबाद के बालियाघाटी गांव में रहने वाले 60 वर्षीय डाबलू शेख और उनके तीन बेटे- 29 वर्षीय कायम शेख, 20 वर्षीय रजाउल शेख और 16 वर्षीय असमाउल शेख को 13 या 14 अगस्त की रात सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उनके घर से उठाया था. मानवाधिकार संगठन बांग्लार मानवाधिकार सुरक्षा मंच के अनुसार, डाबलू शेख की पत्नी जहांआरा बीबी को घटना की सटीक तारीख याद नहीं थी.
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मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों की मदद से प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संयुक्त विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपा जाएगा.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, यह घटनाक्रम उसकी इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर आंतरिक रूप से लिखित आपत्तियां जताई थीं. त्रि-सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त 'बराबर वालों में प्रथम' होते हैं और नियमतः फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए.
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अनंत अंबानी की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर संरक्षणवादियों का विरोध
‘द गार्जियन’ में रेचल हॉल और पैट्रिक ग्रीनफील्ड ने लिखा है कि न्यूकैसल विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय तेल और गैस कारोबारी परिवार के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी को स्थिरता के क्षेत्र में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त किए जाने के बाद संरक्षणवादियों, पर्यावरणविदों और विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं.
विश्वविद्यालय ने कहा कि यह नियुक्ति अंबानी के संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा, पशु कल्याण और पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में काम तथा “अधिक टिकाऊ भविष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान” को मान्यता देती है.
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चुनाव आयोग में अभूतपूर्व दरार: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने ईसी के कदमों पर दर्ज कराई आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है. हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष जांच ने इस प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर पनप रहे अभूतपूर्व असंतोष और प्रशासनिक दरार को उजागर कर दिया है.
रीतिका चोपड़ा की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम—जो कि मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है—अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन चुका है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. बड़े पैमाने पर की गई इस कटौती ने पूरे देश में इस बात पर बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का निर्धारण आखिर किस प्रक्रिया के तहत हो रहा है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग की तैयारी; अनुच्छेद 324(5) के तहत हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया और विपक्ष की रणनीति का विश्लेषण.
'द गार्जियन' रिपोर्ट: अनंत अंबानी को ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' बनाए जाने पर वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और शिक्षाविदों ने उठाए तीखे सवाल.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: रोकीबुज जमान का बड़ा खुलासा; मुर्शिदाबाद के बंगाली मुस्लिम परिवार के 4 सदस्य गायब, पुलिस पर बिना जांच बांग्लादेश भेजने का आरोप.
'आर्टिकल-14' में हर्ष मंदर की विशेष रिपोर्ट: अंतरधार्मिक विवाह, संविधान सभा की बहसों, धर्मांतरण विरोधी कानूनों और 'लव जिहाद' के दौर में महिलाओं के अधिकारों का विश्लेषण.
'सीआईएल' अध्ययन रिपोर्ट: सुपर अल नीनो के प्रभाव से भारत में गर्मी के कारण 15,800 अतिरिक्त मौतों की चेतावनी; जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आपातकाल पर रिपोर्ट.
'इकोनॉमिक टाइम्स' रिपोर्ट: अनुभूति बिश्नोई का खुलासा; मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों में मतभेद से 2026-27 एसएसआर में देरी, 18 साल के नए मतदाताओं और अधिकारियों की एसीआर पर असर.
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: गोवा में तकनीकी खामी से 97 पात्र मतदाता सूची से बाहर; चुनाव आयोग (ECI) को 8 बार भेजे पत्र के बावजूद ईआरओनेट सॉफ्टवेयर में रोल-बैक विकल्प नहीं मिला.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: 'कॉकरोच' युवा आंदोलन और कांग्रेस का CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अल्टीमेटम; 'वोट चोरी' विवाद पर राहुल गांधी का पीएम मोदी व गृह मंत्री पर कड़ा हमला.
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चुनाव आयोग के भीतर क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? इंडियन एक्सप्रेस की रतिका चोपड़ा की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित असहमति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस रिपोर्ट, एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की. इस बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्तियां दर्ज किए जाने का क्या मामला है? क्या मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व मिला? मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण को लेकर क्या सवाल उठ रहे हैं? चुनाव आयोग की स्वायत्तता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका हो सकती है? * इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और सरकार से किन सवालों के जवाब अपेक्षित हैं? श्रवण गर्ग ने इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग के भीतर मतभेद से आगे बढ़कर संस्थागत स्वायत्तता का सवाल बताया. उन्होंने खोजी पत्रकारिता की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर भी अपनी बात रखी. देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की पूरी बातचीत. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #ElectionCommission #GyaneshKumar #SIR #IndianExpress #IndianDemocracy
भारत और अमेरिका के रिश्ते कभी तीन बुनियादों पर टिके थे — सच, सम्मान और सामरिक विषय. ग्लोबल गांधी के कोऑर्डिनेटर विशाल शिवहरे का कहना है कि आज वे तीन बुनियादें हटकर तीन दूसरी चीज़ों पर आ गई हैं — दया, दान और दोस्ती. और इसका नतीजा भारत भुगत रहा है. हरकारा डीपडाइव की इस बातचीत में निधीश त्यागी और विशाल शिवहरे नेहरू के दौर से लेकर पोखरन-2, करगिल, मनमोहन सिंह के परमाणु क़रार और फिर मोदी–ट्रंप युग तक की पूरी यात्रा खोलते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप का सीज़फ़ायर का बार-बार दावा, टैरिफ़, एच-1बी वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फ़ीस, हथकड़ियों में लौटाए गए भारतीय, अमेरिका में बढ़ते हेट क्राइम — और इन सब पर भारत सरकार की चुप्पी. शिवहरे का तर्क है कि जब विदेश नीति दो व्यक्तियों के रिश्ते में सिमट जाती है, तो उसका सीधा फ़ायदा आपके प्रतिद्वंद्वी को मिलता है. वे बताते हैं कि कैसे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उसी ट्रंप के सामने विपक्ष, प्रांतों और जनता को साथ लेकर एक दूसरा रास्ता निकाला — और भारत वह क्यों नहीं कर पाया. आख़िर में एक ठोस सुझाव: प्रधानमंत्री के सीधे मातहत एक विशेष दूत, जो उद्योग और निर्यातकों की सलाह लेकर वॉशिंगटन से सीधे बात करे.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
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हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


आकार पटेल को एसआईआर का नोटिस व्हाट्सएप पर मिला. उन्होंने पहले तय किया कि नहीं जाएँगे — "भाड़ में जाए वोट". फिर पत्नी लौटकर बोलीं कि खिड़की के उस पार बैठा आदमी दुखी था कि आपने जवाब तक नहीं दिया. आकार काग़ज़ों की फ़ाइल लेकर पहुँचे. जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल सर्टिफ़िकेट 2006 की सूरत बाढ़ में बह चुके हैं, पासपोर्ट अदालत के पास ज़ब्त है. इस बातचीत में लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल बताते हैं कि एसआईआर की गड़बड़ी सिर्फ़ प्रक्रिया की नहीं, बुनियाद की है: सबूत का बोझ नागरिक पर डाल दिया गया है. सरकार को साबित करना चाहिए कि कोई नाम संदिग्ध है, न कि हर नागरिक को कि वह मौजूद है. दो चरणों के बाद 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुद्ध रूप से करीब 5.84 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं. तीसरा चरण 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में जारी है. हरकारा स्वतंत्र हिंदी पत्रकारिता का मंच है. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. हमारा साथ दें, सब्सक्राइब करें और घंटी दबाएँ. आकार पटेल का लेख: https://www.harkaraonline.com/latest-articles/ep2y76ft64pbdlpb22mfea94hfshfe चुनाव आयोग में 14 आपत्तियां! क्या ज्ञानेश कुमार ने अनसुनी की सहयोगियों की बात? | श्रवण गर्ग #harkara https://youtu.be/LvkuPUKKokQ वेबसाइट: harkaraonline.com