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आनंद तेलतुम्बड़े | 80 साल बाद भी दलित के ‘छूने’ से जमीन को शुद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ती है?
उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रामलीला मैदान में रैली को संबोधित किया. दो दिन बाद, 10 अगस्त को श्री राम सेना के सदस्यों ने उसी मंच पर ‘शुद्धिकरण’ हवन किया. वजह यह बताई गई कि उस मंच पर एक दलित नेता खड़गे खड़े हुए थे. खड़गे ने संसद में सवाल उठाया, "क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं?" केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना की निंदा की और जांच का आश्वासन दिया.
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भारत के युवा विद्रोही और उम्मीद से भरे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है — आगे कठिन और लंबे काम का पहाड़ खड़ा है
‘आर्टिकल 14’ के मुताबिक, दिसंबर 1973 में गुजरात के कॉलेज छात्रों ने बढ़े हुए भोजन खर्च के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था. जल्द ही यह आंदोलन खराब शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया. ‘नवनिर्माण’ आंदोलन के दबाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल को इस्तीफा देना पड़ा. आधी सदी से ज्यादा समय बाद 2026 का ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी आंदोलन उसी पुराने असंतोष का आधुनिक रूप दिखाई देता है. परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन मूल समस्या वही है — खराब शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के सीमित अवसर और युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ती बेचैनी.
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मार्च से जुलाई के बीच सरकार ने सोशल मीडिया की सामग्री ब्लॉक करने के 1.95 लाख आदेश भेजे
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मार्च से जुलाई 2026 के बीच केंद्र और राज्य सरकारों ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को ऑनलाइन सामग्री ब्लॉक करने के लिए करीब 1.95 लाख आदेश भेजे. यानी औसतन हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग आदेश और हर दिन करीब 1,275 आदेश. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में ऑनलाइन सामग्री पर सरकारी निगरानी और कार्रवाई में तेज बढ़ोतरी को दिखाता है.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, इन पांच महीनों में इंस्टाग्राम को करीब एक लाख ब्लॉकिंग आदेश मिले, जो कुल आदेशों के आधे से ज्यादा हैं.
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आकार पटेल | क्या भारत में आज़ादी लगातार सिकुड़ रही है?
आज़ादी का रिश्ता स्वतंत्रता से है और उसके बिना यह शब्द बेमानी है. कुछ साल पहले मैंने इस बात का जायज़ा लिया था कि दुनिया भारत में आज़ादी की हालत को किस तरह देखती है. यह काम मैंने अपनी एक किताब के लिए किया था, लेकिन समय-समय पर मैं इन सूचकांकों की इस फ़ेहरिस्त पर लौटता रहता हूँ, यह देखने के लिए कि क्या बदला है.
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श्रवण गर्ग | अमित शाह के गुस्से के पीछे क्या है?
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ अमित शाह के हालिया बयानों, संसद में उनके टकराव और सरकार की बदलती राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की.
15 अगस्त के बाद अमित शाह का सोनिया गांधी पर वंदे मातरम को लेकर हमला राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है.
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‘जनगणना से पहले एनआरसी’: मणिपुर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन, दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान
कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) स्टूडेंट विंग' ने राज्य में जनगणना शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की मांग को लेकर 17 अगस्त की मध्यरात्रि से मणिपुर में दो दिवसीय आम हड़ताल की घोषणा की है.
जनगणना 2027 का मकान सूचीकरण (हाउस-लिस्टिंग) चरण 17 अगस्त से स्व-गणना के साथ शुरू हो रहा है. मुख्य मकान सूचीकरण कार्य इस वर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर तक निर्धारित है.
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बंगाल में सीजेपी स्वयंसेवक के पिता की हमले में मौत; "स्कूल ठीक करो" अभियान में गया था
सेंजुति सेनगुप्ता के अनुसार, पश्चिम बंगाल के बांकुरा में गुरुवार (13 अगस्त 2026) को हुए हमले में घायल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक स्वयंसेवक के पिता की शनिवार (15 अगस्त 2026) को मौत हो गई, जिसके बाद रविवार (16 अगस्त 2026) को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. हालांकि ‘पीटीआई’ ने पुलिस के हवाले से गिरफ्तार लोगों की संख्या 8 बताई है.
सीजेपी ने दावा किया है कि सीजेपी स्वयंसेवक शेख अब्दुल हफीज के पिता जनाब मफीक पर स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने हमला किया था.
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डॉ. सुरेश खैरनार | ‘मेंटल नक्सल’ कहने से पहले युवाओं के गुस्से को समझना जरूरी है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक खुले पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सुरेश खैरनार ने हाल में युवाओं के आंदोलनों और उन्हें ‘मेंटल नक्सल’ कहे जाने पर सवाल उठाए हैं. 17 अगस्त 2026 को प्रकाशित इस लेख में खैरनार ने रोजगार, सरकारी भर्तियों, शिक्षा, रेलवे, आदिवासी अधिकार, किसान आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर केंद्र तथा विभिन्न राज्यों की सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. उनका तर्क है कि असहमति जताने वाले लोगों और आंदोलनों को नक्सल या ‘अर्बन नक्सल’ जैसे लेबल देने के बजाय उनके मुद्दों को समझने की जरूरत है.
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केन-बेतवा परियोजना के दाउधन बांध पर बड़ा सवाल, 60 करोड़ के चंदे से 3,389 करोड़ के ठेके तक
‘आर्टिकल 14’ के मुताबिक, मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत बन रहे दाउधन बांध को लेकर विस्थापन और पर्यावरण के सवालों के साथ अब ठेका प्रक्रिया भी विवाद के केंद्र में है. आंध्र प्रदेश की नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को 3,389 करोड़ रुपये का बांध निर्माण ठेका मिला है. सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कंपनी का बड़े बांधों के स्वतंत्र निर्माण का अनुभव सीमित बताया गया है और उसने 2019 से 2022 के बीच चुनावी बॉन्ड के जरिए केवल भारतीय जनता पार्टी को 60 करोड़ रुपये का चंदा दिया था. हालांकि, उपलब्ध सामग्री में चंदे और ठेके के बीच सीधे लेन-देन का प्रमाण स्थापित नहीं हुआ है.
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मोदी की टिप्पणी के बाद “दिमागी नक्सल पार्टी” इंस्टाग्राम पर 2,00,000 से अधिक फॉलोअर्स के साथ हुई लोकप्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम अकाउंट अस्तित्व में आया और रातों-रात इसके 1,81,000 से अधिक फॉलोअर्स बन गए.
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, सोमवार दोपहर तक, इस इंस्टाग्राम पेज के फॉलोअर्स की संख्या 2,00,000 से अधिक हो गई, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह के नाम वाले कई अन्य अकाउंट भी दिखाई देने लगे.
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यूजीसी-नेट के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा, सवालों में तथ्यात्मक और भाषा संबंधी गंभीर गलतियां
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने यूजीसी-नेट के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है. इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और प्रश्नों की भाषा से जुड़ी कई गलतियां पाई गई थीं. एनटीए ने रविवार को बताया कि जांच के लिए बनाई गई समिति ने प्रश्नपत्रों में ऐसी खामियां पाईं, जो परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता के तय मानकों पर खरी नहीं उतरती थीं.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: मार्च से जुलाई 2026 के बीच केंद्र और राज्य सरकारों ने इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को सामग्री हटाने के लिए भेजे 1.95 लाख आदेश.
'आर्टिकल 14' में अशोक मोदी का विश्लेषण: 1974 के नवनिर्माण आंदोलन से 2026 के CJP छात्र आंदोलन तक, भारत में शिक्षा, पेपर लीक और रोजगार संकट का गहराता सच.
आनंद तेलतुंबडे का विश्लेषण: हल्द्वानी में खड़गे के भाषण के बाद मंच के 'शुद्धिकरण' से उजागर हुई जातिवादी मानसिकता, अनुच्छेद 17 और संवैधानिक बराबरी पर सवाल.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: जुलाई में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5.1% हुई; ग्रामीण रोजगार और महिला श्रम बल भागीदारी में सुधार.
पीटीआई रिपोर्ट: विजय हंसारिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; 251 लोकसभा सांसद, 75 राज्यसभा सांसद और 14 मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों के इस्तेमाल से युवा हो रहे पारा विषाक्तता के शिकार; 100 से अधिक मामले सामने आए.
आकार पटेल का विश्लेषण: स्वतंत्रता दिवस पर वैश्विक सूचकांकों के आईने में भारत में घटती नागरिक, राजनीतिक और मीडिया आजादी की स्थिति.
'हरकारा डीप डाइव': अमित शाह के सोनिया गांधी पर वंदे मातरम हमले और बदलती राजनीतिक स्थिति पर निधीश त्यागी की श्रवण गर्ग के साथ खास चर्चा.
वीडियो
वंदे मातरम् को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज है. इसके 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर इसे अनिवार्य किए जाने की चर्चाओं के बीच Harkara Live में प्रोफेसर अपूर्वानंद ने इसके इतिहास, संवैधानिक पक्ष और विवादित संदर्भों पर विस्तार से बात की. अपूर्वानंद बताते हैं कि वंदे मातरम् के शुरुआती दो हिस्सों और बाद के हिस्सों के संदर्भ में क्या अंतर है? ‘आनंदमठ’ से इसका क्या संबंध है? मुस्लिम समुदाय की आपत्तियों के बाद स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्या समझौता हुआ था? और आज पूरे गीत को अनिवार्य करने की कोशिश को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के संदर्भ में कैसे देखा जाना चाहिए? साथ ही सवाल यह भी कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए—नौकरी, शिक्षा और स्वास्थ्य या राष्ट्रवादी प्रतीकों को लेकर अनिवार्यता? देखिए निधीश त्यागी के साथ प्रोफेसर अपूर्वानंद की यह खास बातचीत. तनिका सरकार वायर लेख: https://thewire.in/history/bande-mataram-fits-the-bjps-agenda-but-its-history-is-complicated #VandeMataram #Apoorvanand #HarkaraLive #NidheeshTyagi #IndianPolitics #Constitution #Democracy #India #History
15 अगस्त के लाल क़िले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है. स्वतंत्रता दिवस के मंच से मोदी क्या संदेश देंगे? वंदे मातरम् को लेकर जारी बहस के पीछे की राजनीति और इसके व्यापक मायने क्या हैं? इन्हीं सवालों पर हरकारा लाइव में प्रो. अपूर्वानंद के साथ चर्चा कर रहे हैं.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
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हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


Harkara Deep Dive Live में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग. अमित शाह के तीखे तेवरों के पीछे की सियासत क्या है? क्या सरकार विपक्षी दलों से ज्यादा अब जनता के सवालों और नाराजगी से घिर रही है? क्या जनता का ‘विपक्ष’ गृहमंत्री के सामने नई चुनौती बन रहा है? समझिए देश की मौजूदा राजनीति और सत्ता के बदलते समीकरणों का पूरा विश्लेषण. #IndianPolitics, #AmitShah, #IndianGovernment, #PoliticalAnalysis, #IndianPoliticsNews, #NarendraModi, #HomeMinister, #BJP, #Opposition, #PublicOpinion, #PoliticalNews, #PoliticsToday, #IndiaNews, #PoliticalDebate, #CurrentAffairs, #GovernmentPolitics, #PublicMood, #PoliticalStrategy, #IndianDemocracy, #PoliticalCommentary, #ElectionPolitics, #PowerPolitics, #PoliticalTrends, #NewsAnalysis, #DeepDive, #PoliticalDeepDive, #HarkaraDeepDive, #ShravanGarg, #IndiaPolitics2026