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जम्मू में म्यांमार से जान बचाकर आए रोहिंग्या शरणार्थियों के घर फिर उजड़े, 350 परिवार बेघर
‘आर्टिकल 14’ में बशारत अमीन की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू के नरवाल इलाके में करीब 350 रोहिंग्या परिवारों को उनके अस्थायी घरों से बेदखल कर दिया गया. प्रशासन ने जमीन मालिकों द्वारा कृषि भूमि का गैर-कृषि इस्तेमाल किए जाने को कार्रवाई का आधार बताया. लेकिन इस कार्रवाई ने उन परिवारों की जिंदगी फिर उजाड़ दी, जिन्होंने म्यांमार में जातीय हिंसा से भागकर भारत में 14 से 18 वर्षों के दौरान अपना घर और आजीविका खड़ी की थी.
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एसआईआर की दोहरी भूमिका से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित, शिक्षकों की कमी से शिक्षा पर पड़ी मार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बावजूद कि शिक्षकों को स्कूल के समय के दौरान गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए, मतदाता सूची पुनरीक्षण और जनगणना जैसे कार्यों में शिक्षकों की तैनाती के कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षण और सीखने की गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों, जिन्हें महज एक महीने पहले ही बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) बनाया गया था, द्वारा एसआईआर गतिविधियों की एक श्रृंखला पूरी करने के बाद, अब चुनाव आयोग चाहता है कि वे छूटे हुए मतदाताओं को शामिल करने के लिए एक विशेष अभियान चलाएं.
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तृणमूल छोड़ने के महीनों बाद, यूसुफ पठान को विवादित जमीन के लिए गुजरात सरकार से मिली मंजूरी
यूसुफ पठान के ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होने के दो महीने बाद, गुजरात सरकार ने पूर्व क्रिकेटर को वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) का विवादित 978 वर्ग मीटर का भूखंड (प्लाट) आवंटित करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए उन्हें दो साल पहले अतिक्रमण का नोटिस जारी किया गया था.
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मध्य प्रदेश | वनाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों के बीच आदिवासियों के घरों पर चला बुलडोजर
‘डाउन टू अर्थ’ में सत्याम श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों की झोपड़ियां तोड़ दी गईं और उनकी खड़ी फसलें नष्ट कर दी गईं. यह कार्रवाई वन भूमि पर कथित अतिक्रमण के आरोप में की गई, लेकिन प्रभावित परिवारों के वनाधिकार संबंधी दावों पर फैसला लंबित होने के कारण विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं.
11 अक्टूबर की रात मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम की टीम चार खुदाई मशीनों और चार ट्रैक्टरों के साथ गांव पहुंची. टीम ने बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों की अस्थायी झोपड़ियां ढहा दीं. ग्रामीणों के मुताबिक, मक्का और अरहर की फसल नष्ट करने के साथ सिंचाई के कुएं को मिट्टी और पत्थरों से भर दिया गया. परिवारों को बेदखली की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है.
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जयश्री पिंगले | हिंदुत्व का ‘ब्लैंक चेक’ अब बाउंस होने लगा है
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार और संपादक जयश्री पिंगले के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सौ वर्ष पूरे होने, विजयादशमी पर मोहन भागवत के संबोधन और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में संघ की भूमिका पर चर्चा की. बातचीत में यह सवाल प्रमुखता से उठा कि क्या संघ अपने शताब्दी वर्ष में देश के सामने मौजूद राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों पर स्पष्ट रुख अपनाएगा या वैचारिक संकेतों के जरिए अपनी बात रखेगा.
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मणिपुर: उग्रवादियों के हमले में 3 लोगों की मौत के बाद उग्र प्रदर्शन, आक्रोशित भीड़ शवों को मुख्यमंत्री आवास ले गई
मणिपुर में सोमवार को जंगल में लकड़ी इकट्ठा कर रहे तीन लोगों की उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर हत्या कर दी गई, जिसके विरोध में स्थानीय लोगों ने यहां मुख्यमंत्री आवास के बाहर दो शवों को रखकर प्रदर्शन किया.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर उग्रवादियों द्वारा लकड़ी बीनने वालों के एक समूह पर की गई गोलीबारी में तीन अन्य लोग घायल हो गए, जबकि तीन और लोग लापता बताए जा रहे हैं.
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विद्याधर दाते | भारत में जेन जी के प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक, फ्रांस की हिंसा से करें तुलना
‘काउंटरकरंट्स’ में विद्याधर दाते ने लिखा है कि भारत में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताते हुए सरकार और कुछ शिक्षाविदों के रवैये की आलोचना की गई है. लेखक का तर्क है कि भारत में युवाओं ने लंबे समय से चले आ रहे अन्याय के बावजूद संयमित तरीके से विरोध किया है, लेकिन अधिकारियों ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया.
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महाराष्ट्र | सूखाग्रस्त बीड में मोदी सरकार की ग्रामीण रोजगार योजना पर सवाल, कागजों पर मजदूरों की हाजिरी और मौके से गायब
‘स्क्रॉल’ में तबस्सुम बरनागरवाला की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त बीड जिले में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. जांच में ऐसे कार्यस्थल मिले, जहां मजदूरों की डिजिटल हाजिरी दर्ज थी, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं हो रहा था. कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें अपने नाम पर जारी कार्यादेशों की जानकारी तक नहीं थी और कुछ के खातों में जमा रकम स्थानीय नेताओं द्वारा निकाल लिए जाने का आरोप है.
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सुलेमान पठान की मॉब लिंचिंग के एक साल बाद भी मुकदमा शुरू नहीं, 10 में से 7 आरोपी जमानत पर
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में 20 वर्षीय सुलेमान पठान की मॉब लिंचिंग के एक साल बाद भी मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हुई है. मामले में 10 गिरफ्तार आरोपियों में से सात को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है. ‘आर्टिकल 14’ में कुनाल पुरोहित की रिपोर्ट के मुताबिक, न्याय मिलने में हो रही देरी और आरोपियों से कथित धमकियों के कारण सुलेमान का परिवार निराशा और असुरक्षा के बीच जी रहा है.
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इंडिपेंडेंट | ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए सरकार इतनी प्रतिबद्ध क्यों है
भारत में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का एक नया और आक्रामक दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि यह पूरी कवायद केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है.
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर विशाल प्रदर्शन देखने को मिले हैं.
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क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी
अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.
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रॉयटर्स | मोदी का धर्मसंकट: असंतोष बढ़ते ही भारत की सड़कों पर उतरा ‘जेन जी’, यूपी चुनाव में परीक्षा
उन्हें रोकने के लिए तैनात हजारों सुरक्षाकर्मियों के बावजूद, भारत में युवा प्रदर्शनकारियों ने पिछले हफ्ते बैरिकेड्स लांघे, सरकार विरोधी नारे लगाए और उन्हें खींचकर दूर ले जाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से झड़प की.
एक युवक ने पुलिस द्वारा बस में बैठाए जाने से पहले चिल्लाकर कहा, "इंकलाब जिंदाबाद."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
बशारत अमीन की 'आर्टिकल 14' रिपोर्ट: जम्मू के नरवाल में 350 रोहिंग्या परिवारों के घर उजड़े; कृषि भूमि कानून के नाम पर हुई बेदखली से आजीविका और भविष्य पर संकट।
बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट: गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की तैनाती पर रोक के बावजूद SIR और जनगणना ड्यूटी से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित।
अदिति राजा की रिपोर्ट: TMC छोड़ने के दो महीने बाद पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को गुजरात सरकार द्वारा वडोदरा का विवादित भूखंड आवंटित करने का निर्णय।
सत्याम श्रीवास्तव की 'डाउन टू अर्थ' रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में वनाधिकार कानून का उल्लंघन कर 12 बरेला आदिवासी परिवारों की झोपड़ियां और फसलें नष्ट करने का आरोप।
तबस्सुम बरनागरवाला की 'स्क्रॉल' रिपोर्ट: महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त बीड जिले में वीबी-जी राम जी योजना में फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार; ग्रामीणों का पलायन व जांच का ब्योरा।
विद्याधर दाते की 'काउंटरकरंट्स' रिपोर्ट: भारत में जेन जी के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, दिल्ली में पुलिस की सख्ती, यूरोपीय प्रदर्शनों से तुलना और बुद्धिजीवियों की भूमिका का विश्लेषण।
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और जयश्री पिंगले की चर्चा: RSS के 100 वर्ष, विजयादशमी पर मोहन भागवत का संबोधन, भाजपा-संघ संबंध और वैचारिक चुनौतियों का विश्लेषण।
मणिपुर में जंगल से लकड़ी इकट्ठा कर रहे 3 लोगों की उग्रवादियों द्वारा हत्या; आक्रोशित परिजनों का मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई।
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