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मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है: चुनाव आयोग
भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक संयुक्त हलफनामा दायर किया है, जिसमें इस बात पर बल दिया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को प्रतिबंधित करने का कोई भी प्रयास कानून के विपरीत होगा.
सोमवार देर रात (26 अक्टूबर, 2026) शीर्ष अदालत में दायर लगभग 250 पन्नों के दस्तावेज़ में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के तरीके और आधारों के अलावा पद से नहीं हटाया जा सकता है.
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मनीषा प्रियम | युवा सिर्फ नौकरी नहीं, जवाब भी मांग रहे हैं
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने शिक्षाविद् और राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर मनीषा प्रियम के साथ भारत में जेन ज़ी के उभार, युवाओं के असंतोष, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी पर चर्चा की.
प्रोफेसर मनीषा प्रियम के अनुसार, 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के साथ युवाओं के बीच रोजगार, उद्यमिता और विकास को लेकर नई उम्मीदें पैदा हुई थीं. ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘स्टैंड अप इंडिया’ और ‘न्यू इंडिया’ जैसे नारों ने युवाओं को बेहतर भविष्य का सपना दिखाया. हालांकि, समय के साथ इन उम्मीदों और युवाओं के वास्तविक अनुभवों के बीच अंतर बढ़ता गया.
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सरकार रीढ़ वाले जजों का सम्मान करती है… चंद्रचूड़ बहुत अधिक दब्बू थे; सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कौल
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस संजय किशन कौल की आने वाली आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के संबंधों पर एक नई बहस छेड़ दी है. पुस्तक के अनुसार, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ न्यायिक नियुक्तियों के मामले में "सरकार के प्रति अत्यधिक दब्बू" थे. जस्टिस कौल का यह संस्मरण एक ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय की स्वतंत्रता और सरकार के साथ उसके संतुलन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
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“हमें जंगल में फेंक दिया गया”: रेसकोर्स के विस्थापित परिवारों की रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई पर संकट
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के रेसकोर्स इलाके में करीब 717 घरों को तोड़े जाने के कई महीने बाद वहां रहने वाले परिवारों को रोजी-रोटी, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन परिवारों को उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सावदा घेवरा में बसाया गया है, जो उनके पुराने घरों से लगभग 40 से 45 किलोमीटर दूर है. निवासियों का कहना है कि विस्थापन ने उनकी आजीविका छीन ली है और उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
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मुक़्तदर खान | भारत-अमेरिका संबंधों में बदलाव और भारत की विदेश नीति पर सवाल
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मुक़्तदर खान के साथ भारत-अमेरिका संबंधों में बदलाव, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, द्विपक्षीय व्यापार समझौते, एच-1बी वीजा और भारत की विदेश नीति पर चर्चा की.
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अपूर्वानंद | लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियां
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों पर लगाई जा रही पाबंदियों, पुलिस की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी पर चर्चा की. बातचीत का मुख्य विषय भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को मिले विरोध के अधिकार और जंतर-मंतर जैसे प्रदर्शन स्थलों पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने के लिए दायर की गई याचिका रहा.
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“हममें से कोई भी ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था”: अरुणाचल में बांध विरोधी शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हुआ, कई घायल
‘मकतूब मीडिया’ में निकिता जैन की रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के विरोध और बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर शुक्रवार को बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. घटना के बाद पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में तनाव फैल गया और शनिवार को भी स्थिति संवेदनशील बनी रही.
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म्यांमार में हथियारों के प्रशिक्षण मामले में आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को भारत से बाहर रहने की अनुमति बढ़ी
'हिंदुस्तान टाइम्स' में अर्नबजीत सूर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की एक अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिकों को भारत से बाहर रहने की अनुमति अगले साल 24 फरवरी तक बढ़ा दी है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत को बताया था कि मामले के कई पहलुओं की जांच पूरी करने के लिए उसे और समय चाहिए.
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बंगाल: तीन ईसाई परिवारों ने मारपीट, धर्म छोड़ने की धमकी और जबरन अनुष्ठान कराने का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में कुछ लोगों के एक समूह ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें अपना धर्म छोड़ने की धमकी दी. इसके साथ ही उन पर जबरन धार्मिक अनुष्ठान कराने का भी आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को ‘पीटीआई’ को बताया कि पीड़ित परिवार पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और करीब 18 महीने पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने पुलिस से यह भी शिकायत की है कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है.
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इंडिपेंडेंट | ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए सरकार इतनी प्रतिबद्ध क्यों है
भारत में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का एक नया और आक्रामक दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि यह पूरी कवायद केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है.
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर विशाल प्रदर्शन देखने को मिले हैं.
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क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी
अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.
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रॉयटर्स | मोदी का धर्मसंकट: असंतोष बढ़ते ही भारत की सड़कों पर उतरा ‘जेन जी’, यूपी चुनाव में परीक्षा
उन्हें रोकने के लिए तैनात हजारों सुरक्षाकर्मियों के बावजूद, भारत में युवा प्रदर्शनकारियों ने पिछले हफ्ते बैरिकेड्स लांघे, सरकार विरोधी नारे लगाए और उन्हें खींचकर दूर ले जाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से झड़प की.
एक युवक ने पुलिस द्वारा बस में बैठाए जाने से पहले चिल्लाकर कहा, "इंकलाब जिंदाबाद."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'हरकारा डीप डाइव' में प्रो. मनीषा प्रियम का विश्लेषण: भारत में जेन ज़ी का उभार, युवा असंतोष, शिक्षा प्रणाली, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक भागीदारी पर चर्चा।
चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर 250 पन्नों के हलफनामे में मीडिया रिपोर्टों पर आधारित याचिकाओं को खारिज करते हुए अपनी संवैधानिक निष्पक्षता का बचाव किया।
ऋतु सरीन की रिपोर्ट: पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल की आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' में कॉलेजियम, सीजेआई चंद्रचूड़, एनजेएसी विवाद और पीएमएलए बेंच ट्रांसफर पर खुलासे।
'मकतूब मीडिया' की रिपोर्ट: दिल्ली के रेसकोर्स क्षेत्र से सावदा घेवरा विस्थापित 717 परिवारों की आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट तथा ऐतिहासिक रेसकोर्स मस्जिद पर मंडराता खतरा।
सुरभि करवा की 'आर्टिकल-14' रिपोर्ट: दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट शक्तियों, बीएनएसएस प्रावधानों और निवारक हिरासत के इस्तेमाल पर संवैधानिक व विधिक विश्लेषण.
'हरकारा डीप डाइव' में प्रो. मुक़्तदर खान का विश्लेषण: भारत-अमेरिका संबंध, डोनाल्ड ट्रंप नीतियां, मार्को रूबियो यात्रा, एच-1बी वीजा और विदेश नीति की चुनौतियां.
अरुण श्रीवास्तव का 'काउन्टरकरंट्स' विश्लेषण: राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति, एसआईआर विवाद, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली और भाजपा-आरएसएस का मुकाबला।
'द हिंदू' की रिपोर्ट: कर्नाटक एसआईआर में चुनाव अधिकारियों द्वारा बिना कारण 61,000 स्वतः उत्पन्न फॉर्म-7 से मतदाता नाम हटाने का गंभीर खुलासा.
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