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चुनाव आयोग में अभूतपूर्व दरार: 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने ईसी के कदमों पर दर्ज कराई आपत्ति
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है. हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक विशेष जांच ने इस प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर पनप रहे अभूतपूर्व असंतोष और प्रशासनिक दरार को उजागर कर दिया है.
रीतिका चोपड़ा की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम—जो कि मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है—अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन चुका है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस अभियान के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. बड़े पैमाने पर की गई इस कटौती ने पूरे देश में इस बात पर बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का निर्धारण आखिर किस प्रक्रिया के तहत हो रहा है.
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चुनाव आयोग को लेकर चौंकाने वाला खुलासा ‘पूरी सड़न’ को दर्शाता है, यह ‘देशद्रोह’ के समान: वरिष्ठ वकील
‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत द्वारा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर मर्चेंट शुल्क लागू करने के फैसले से वॉलमार्ट समर्थित फोन पे ( PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) को सालाना करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है. 15 अक्टूबर से यूपीआई पर निःशुल्क लेनदेन की छह साल पुरानी व्यवस्था समाप्त हो रही है. अब 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होगा.
ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के अनुसार, इस नए शुल्क से मार्च 2028 तक भुगतान ऐप्स के लिए $1.1 अरब (लगभग 9,000 करोड़ रुपये) का वार्षिक राजस्व उत्पन्न हो सकता है. यूपीआई के 80% बाजार पर कब्जा जमाने वाले फोन पे और गूगल पे को इसमें से लगभग $900 मिलियन मिलने का अनुमान है. फोन पे के सह-संस्थापक राहुल चारी ने इसे परिचालन लागत और देनदारियों की भरपाई की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है.
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‘ज्ञानेश, काम हो गया भाई’: चुनाव आयोग का विवाद सोशल मीडिया पर मीम्स का मसाला बना
चुनाव आयोग के भीतर जारी आंतरिक मतभेदों की खबर अभी ठीक से लोगों तक पहुँची भी नहीं थी कि सोशल मीडिया ने तय कर लिया कि इस पर मीम बनाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि बेहद ज़रूरी है.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, मीम चक्र का पहला शिकार जाहिर तौर पर चुनाव आयोग का तीन सदस्यीय ढांचा बना.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कार्टून में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग के ब्रांड वाले एक ऑटो-रिक्शा को चलाते हुए दिखाया गया है, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी पीछे की सीट पर सिमटे हुए बैठे हैं. दोनों आयुक्तों ने हाथों में "14 आपत्तियाँ" लिखी तख्तियाँ पकड़ रखी हैं, जबकि कुमार स्टेयरिंग संभाल रहे हैं—यह इस बात की सटीक व्याख्या है कि आयोग का नियंत्रण वास्तव में किसके हाथों में है.
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजा; न्यायमूर्ति दत्ता ने वर्तमान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया. यद्यपि न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की दो जजों की पीठ इस बात पर असहमत थी कि मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं, फिर भी उन्होंने अंततः आगे होने वाली देरी से बचने के लिए आदेश दिया कि इस मामले को उचित संख्या वाली संविधान पीठ के गठन हेतु भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए. पीठ ने टिप्पणी की कि प्रारंभिक संदर्भ बिंदु पर मामले को 3 जजों की पीठ के पास भेजना समय बर्बाद करने वाली कसरत होगी.
‘लाइव लॉ’ में अमीषा श्रीवास्तव की रिपोर्ट के अनुसार, जहां न्यायमूर्ति दत्ता का मानना था कि केंद्र सरकार की बड़ी पीठ को मामला भेजने की मांग अकारण थी, वहीं न्यायमूर्ति शर्मा का विचार इसके विपरीत था.
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‘पुलिस ही जज और जल्लाद’: बंगाल की नागरिकता जांच व्यवस्था पर विशेषज्ञों की आपत्ति
'स्क्रोल' में रोकीबुज जमान ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल में कथित बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और हिरासत को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया पर कानूनी विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि राज्य की नई व्यवस्था में न्यायिक समीक्षा की पर्याप्त गुंजाइश नहीं है और पुलिस को नागरिकता तय करने तथा लोगों को हिरासत में लेने की व्यापक शक्तियां मिल गई हैं.
अगस्त के अंतिम सप्ताह में केरल से लौट रहे मुर्शिदाबाद के मजदूर असरुल शेख को रेलवे स्टेशन के पास पुलिस ने रोक लिया. पुलिस ने उस पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया और करीब 15 किलोमीटर दूर लालगोला हिरासत केंद्र भेज दिया. उसकी भतीजी रोजिना खातून के मुताबिक, 20 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद पुलिस ने परिवार को यह बताने वाला कोई दस्तावेज या नोटिस नहीं दिया कि उसे बांग्लादेशी क्यों माना गया.
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श्रवण गर्ग | ये चुनाव आयोग में मतभेद नहीं, दो लोगों का विद्रोह है
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उस रिपोर्ट पर चर्चा की, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति का जिक्र किया गया है. बातचीत का केंद्र यह सवाल रहा कि अगर चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर मतभेद हैं, तो इसका चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है.
श्रवण गर्ग ने इस रिपोर्ट को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का मामला नहीं है. उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कई महीनों में मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि दोनों अधिकारी लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें आयोग के फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की जरूरत महसूस हुई.
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सुर्खियों में ज्ञानेश कुमार: नियुक्ति पर सवालों से लेकर एसआईआर के बीच आयोग के भीतर असहमति तक
केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार गुप्ता को 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के रूप में नियुक्त किया गया था. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' के माध्यम से चयन प्रक्रिया बदले जाने के बाद चुने जाने वाले पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं.
‘द टेलीग्राफ ब्यूरो’ के मुताबिक, दो दशकों से अधिक समय बाद देश में फिर से लागू किया गया मतदाता सूचियों का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर), ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग द्वारा उठाया गया सबसे अधिक चर्चित और विवादित फैसला रहा है. खबरों के मुताबिक, इसके तहत देश भर में मतदाता सूचियों से 12 करोड़ (120 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. इसका असर लगातार हुए राज्य विधानसभा चुनावों में देखने को मिला—उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में जहाँ नाम जोड़े गए, और बंगाल में जहाँ मृत और अनुपस्थित घोषित किए गए मतदाताओं सहित कुल 92 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए.
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‘सैनिटाइज्ड रिपब्लिक’: जाति और ठेका श्रम पर बनी फिल्म की स्क्रीनिंग तीसरी बार रोकी गई
'द मूकनायक' में गीता सुनील पिल्लई ने लिखा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान दिल्ली के दो बड़े अस्पतालों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'सैनिटाइज्ड रिपब्लिक: कास्ट(ई) एंड कॉन्ट्रैक्ट्स' की स्क्रीनिंग तीसरी बार रोक दी गई है. अफिया खालिद और रिजवान रहमान द्वारा निर्देशित यह फिल्म केरल के 18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल के लिए आधिकारिक रूप से चुनी गई थी. 25 से 30 सितंबर के बीच तिरुवनंतपुरम में होने वाले महोत्सव में इसे दिखाया जाना था, लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जरूरी सेंसर छूट नहीं मिलने के कारण स्क्रीनिंग रोक दी गई.
मंत्रालय ने महोत्सव की 31 फिल्मों को अनुमति नहीं दी है. इससे पहले फिल्म को दुर्गापुर फिल्म फेस्टिवल और ऋतु रंगम फिल्म फेस्टिवल में भी स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं मिली थी.
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उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं का प्रभाव
'द हिंदू' में संजय कुमार और विभा अत्री ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों में अभी छह महीने से अधिक का समय है, लेकिन राजनीतिक दल मतदाताओं को लामबंद करने वाले मुद्दों की तलाश में जुट गए हैं. हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली और उसके बाद कुछ लोगों द्वारा की गई पूजा, जिसे शुद्धिकरण पूजा बताया गया, ऐसा ही एक मुद्दा बनकर उभरा है. कांग्रेस इसे दलित समुदायों के बीच अपनी अपील बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है, हालांकि राज्य में उसका दलित समर्थन फिलहाल बहुत सीमित है.
उत्तर प्रदेश में बड़ा सवाल यह है कि दलित वोट अब कितना स्थानांतरित होने वाला है और 2027 में कौन-सा दल या गठबंधन इसे बड़े पैमाने पर अपने पक्ष में कर पाता है.
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28 सितंबर से देशव्यापी बैंक हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने सुरक्षा बढ़ाने को कहा
'द वायर' की रिपोर्ट के अनुसार, 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से बैंकों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाओं के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का अनुरोध किया है. वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने गृह मंत्रालय से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी करने को कहा है.
डीएफएस ने 21 सितंबर को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में मुद्रा तिजोरियों, चेक क्लियरिंग केंद्रों, डेटा सेंटर, डेटा रिकवरी सेंटर, ट्रेजरी संचालन, आईटी केंद्र, साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ और एटीएम के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया. इसके अलावा हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले बैंक कर्मचारियों को भी सुरक्षा देने की बात कही गई है.
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धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने वाले व्यक्ति पर कोई आपराधिक परिणाम न हों, ऐसी हमारी अपेक्षा है’ : केंद्र से सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक संगीतकार टी.एम. कृष्णा द्वारा दायर उस रिट याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के 2026 के संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. यह संशोधन राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को दंडात्मक संरक्षण प्रदान करता है, साथ ही गृह मंत्रालय के उन निर्देशों को भी चुनौती दी गई है जिनके तहत सरकारी कार्यक्रमों में इस गीत के सभी छह छंदों (स्तबकों) को गाना अनिवार्य किया गया है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस रिट याचिका पर सुनवाई की.
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डोकलाम विवाद और चीनी बैंक: 18.5 करोड़ डॉलर के कर्ज पर रोक और भू-राजनीतिक खुलासा
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में ऋतु सरीन की रिपोर्ट है कि 2017 में पूर्वोत्तर सीमा पर हुए डोकलाम गतिरोध का सीधा असर 2,000 किलोमीटर दूर मुंबई स्थित ‘इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना’ (आईसीबीसी) की एकमात्र भारतीय शाखा पर पड़ा था. इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा की गई 'चाइना कैपिटल' वैश्विक जाँच से खुलासा हुआ है कि सीमा तनाव के दौरान आईसीबीसी ने जोखिम कम करने के लिए 18.5 करोड़ डॉलर (लगभग ₹1500 करोड़) के 11 स्वीकृत ऋणों और बॉन्ड निवेशों का वितरण रोक दिया था.
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की सक्रियता : गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार, संकट के समय बैंक ने अपने हर विभाग में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को संगठित कर उन्हें चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावास के साथ निरंतर संपर्क में रखा. 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों वाला आईसीबीसी दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है, जो यह दर्शाता है कि चीन के सरकारी वित्तीय संस्थान बीजिंग के भू-राजनीतिक एजेंडे को लागू करने में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं.
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व्हाइट हाउस के प्रतिबंध के विरोध में अमेरिकी टेलीविज़न नेटवर्क ने ट्रम्प के कवरेज पर लगाई रोक
व्हाइट हाउस से तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों को प्रतिबंधित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले के विरोध में सोमवार (21 सितंबर 2026) को अमेरिकी टेलीविज़न नेटवर्कों ने एक तरह से उनके कवरेज का बहिष्कार कर दिया. 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता (ट्रम्प) द्वारा अमेरिकी मीडिया पर वर्षों से जारी हमलों को तेज़ करने के बीच, शुक्रवार (18 सितंबर) को ट्रम्प द्वारा सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको को प्रतिबंधित किए जाने के बाद इन संस्थानों ने अदालत का रुख भी किया है.
‘एएफपी’ के मुताबिक, एक दुर्लभ कदम उठाते हुए, अमेरिका के शीर्ष पाँच प्रसारकों ने सोमवार (21 सितंबर) को कहा कि वे सीएनएन के साथ एकजुटता दिखाते हुए व्हाइट हाउस के "पूल" कवरेज को रोक रहे हैं—जहाँ एक प्रसारक दिन भर के लिए सभी टेलीविज़न आउटलेट्स की ओर से फ़िल्मांकन (शूटिंग) करता है.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'पीटीआई-टेलीग्राफ' रिपोर्ट: बांधवगढ़-अचनकमार बाघ गलियारे के पास शहडोल समेत 4 कोयला खदान परियोजनाओं को हरी झंडी; जेके सीमेंट के प्रोजेक्ट और वन्यजीव सुरक्षा पर रिपोर्ट.
'द वायर' रिपोर्ट: 28-30 सितंबर बैंक हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय (DFS) ने गृह मंत्रालय से बैंकों, डेटा सेंटरों और कैश चेस्टों पर अतिरिक्त सुरक्षा मांगी; 5-डे बैंकिंग और ओपीएस की मांग.
'द टेलीग्राफ ऑनलाइन' रिपोर्ट: अहेली बनर्जी की जांच; वरिष्ठ वकीलों (संजय हेगड़े, कोलिन गोंसाल्वेस) और पूर्व आईएएस जवाहर सरकार ने चुनाव आयोग के मतभेदों को "पूर्ण सड़न" बताया.
'द टेलीग्राफ' रिपोर्ट: चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के मतभेद पर सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़; '14 आपत्तियों' पर इंटरनेट का व्यंग्य.
'स्क्रोल' रिपोर्ट: रोकीबुज जमान का खुलासा; पश्चिम बंगाल में संदिग्ध बांग्लादेशियों पर कार्रवाई, मई 2025 के गृह मंत्रालय आदेश और पुलिस शक्तियों पर उठे कानूनी सवाल.
'द हिंदू' रिपोर्ट: संजय कुमार और विभा अत्री का विश्लेषण; 2027 चुनाव से पहले यूपी में दलित मतदाताओं की लामबंदी, बसपा की घटती पकड़ और भाजपा-सपा का बड़ा दांव.
'द मूकनायक' रिपोर्ट: गीता सुनील पिल्लई का खुलासा; कोविड सफाई कर्मचारियों पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'सैनिटाइज्ड रिपब्लिक' की स्क्रीनिंग पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय की रोक.
'हरकारा डीप डाइव' पॉडकास्ट: निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग की बातचीत; 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट, चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेद, डेटा केंद्रीयकरण और स्वायत्तता पर विशेष चर्चा.
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चुनाव आयोग के भीतर क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? इंडियन एक्सप्रेस की रतिका चोपड़ा की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित असहमति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस रिपोर्ट, एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की. इस बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्तियां दर्ज किए जाने का क्या मामला है? क्या मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व मिला? मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण को लेकर क्या सवाल उठ रहे हैं? चुनाव आयोग की स्वायत्तता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका हो सकती है? * इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और सरकार से किन सवालों के जवाब अपेक्षित हैं? श्रवण गर्ग ने इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग के भीतर मतभेद से आगे बढ़कर संस्थागत स्वायत्तता का सवाल बताया. उन्होंने खोजी पत्रकारिता की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर भी अपनी बात रखी. देखिए हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की पूरी बातचीत. #Harkara #HarkaraDeepDive #ShravanGarg #NidheeshTyagi #ElectionCommission #GyaneshKumar #SIR #IndianExpress #IndianDemocracy
भारत और अमेरिका के रिश्ते कभी तीन बुनियादों पर टिके थे — सच, सम्मान और सामरिक विषय. ग्लोबल गांधी के कोऑर्डिनेटर विशाल शिवहरे का कहना है कि आज वे तीन बुनियादें हटकर तीन दूसरी चीज़ों पर आ गई हैं — दया, दान और दोस्ती. और इसका नतीजा भारत भुगत रहा है. हरकारा डीपडाइव की इस बातचीत में निधीश त्यागी और विशाल शिवहरे नेहरू के दौर से लेकर पोखरन-2, करगिल, मनमोहन सिंह के परमाणु क़रार और फिर मोदी–ट्रंप युग तक की पूरी यात्रा खोलते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप का सीज़फ़ायर का बार-बार दावा, टैरिफ़, एच-1बी वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फ़ीस, हथकड़ियों में लौटाए गए भारतीय, अमेरिका में बढ़ते हेट क्राइम — और इन सब पर भारत सरकार की चुप्पी. शिवहरे का तर्क है कि जब विदेश नीति दो व्यक्तियों के रिश्ते में सिमट जाती है, तो उसका सीधा फ़ायदा आपके प्रतिद्वंद्वी को मिलता है. वे बताते हैं कि कैसे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उसी ट्रंप के सामने विपक्ष, प्रांतों और जनता को साथ लेकर एक दूसरा रास्ता निकाला — और भारत वह क्यों नहीं कर पाया. आख़िर में एक ठोस सुझाव: प्रधानमंत्री के सीधे मातहत एक विशेष दूत, जो उद्योग और निर्यातकों की सलाह लेकर वॉशिंगटन से सीधे बात करे.
हम हरकारा.
हरकारा एक देशज शब्द है संदेशवाहक के लिए.हमारी यह एक छोटी सी कोशिश है कि वे ज़रूरी ख़बरें आप तक पहुँचाई जाएँ, जो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती हैं, छिपा दी जाती हैं, या फिर इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश की जाती हैं कि वे भ्रम पैदा करें.
हरकारा की छोटी सी टीम हर चौबीस घंटे में आपके लिए ऐसी ख़बरों को संजोकर एक सूची के रूप में प्रस्तुत करती है, उनके मर्म के साथ, ताकि आप मीडिया के शोर-शराबे में दब रही सच्ची ख़बरों तक पहुँच सकें.
हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


आकार पटेल को एसआईआर का नोटिस व्हाट्सएप पर मिला. उन्होंने पहले तय किया कि नहीं जाएँगे — "भाड़ में जाए वोट". फिर पत्नी लौटकर बोलीं कि खिड़की के उस पार बैठा आदमी दुखी था कि आपने जवाब तक नहीं दिया. आकार काग़ज़ों की फ़ाइल लेकर पहुँचे. जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल सर्टिफ़िकेट 2006 की सूरत बाढ़ में बह चुके हैं, पासपोर्ट अदालत के पास ज़ब्त है. इस बातचीत में लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल बताते हैं कि एसआईआर की गड़बड़ी सिर्फ़ प्रक्रिया की नहीं, बुनियाद की है: सबूत का बोझ नागरिक पर डाल दिया गया है. सरकार को साबित करना चाहिए कि कोई नाम संदिग्ध है, न कि हर नागरिक को कि वह मौजूद है. दो चरणों के बाद 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुद्ध रूप से करीब 5.84 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं. तीसरा चरण 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में जारी है. हरकारा स्वतंत्र हिंदी पत्रकारिता का मंच है. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. हमारा साथ दें, सब्सक्राइब करें और घंटी दबाएँ. आकार पटेल का लेख: https://www.harkaraonline.com/latest-articles/ep2y76ft64pbdlpb22mfea94hfshfe चुनाव आयोग में 14 आपत्तियां! क्या ज्ञानेश कुमार ने अनसुनी की सहयोगियों की बात? | श्रवण गर्ग #harkara https://youtu.be/LvkuPUKKokQ वेबसाइट: harkaraonline.com