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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को व्यक्तिगत प्रतिवादी बनाया और भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 10-11 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है. इन याचिकाओं में सीईसी के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म-6 में बदलावों को चुनौती दी गई है. प्रमुख याचिका ‘राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ में सीईसी ज्ञानेश कुमार को व्यक्तिगत प्रतिवादी बनाया गया है और अब उन्हें अपना जवाब दाखिल करना होगा. पीठ ने नए मतदाता को पंजीकृत करने वाले फॉर्म 6 के संशोधन पर भी निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया.
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वन्या वैदेही भार्गव | कांग्रेस को क्यों सीजेपी को बदनाम नहीं करना चाहिए
देश में कुछ अभूतपूर्व घट रहा है. भारत के विपक्षी दल और हज़ारों आम नागरिक आखिरकार मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए हैं. वे मतदाता दमन के खिलाफ और भारत के भविष्य के लिए एक ही आवाज़ में बात कर रहे हैं. पुलिस की ज़बरदस्त जवाबी गोलबंदी यह संकेत देती है कि कभी अजेय मानी जाने वाली सरकार अब खुद को खतरे में महसूस कर रही है. फिर भी, विपक्षी दल इस अवसर को गंवा सकते हैं. इसके संकेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मिल रहे हैं, जहां कुछ कांग्रेस समर्थक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर हमले कर रहे हैं.
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अर्घ्य सेनगुप्ता | विवेक की आवाज़: जब न्यायपालिका ने सरकार को आईना दिखाया
तकनीकी पेचीदगियों, प्रक्रियाओं और शब्दों के जाल के बीच कानून बुनियादी तौर पर 'व्यावहारिक समझ' (कॉमन सेंस) पर आधारित होता है—इस बात को समय-समय पर याद दिलाने की आवश्यकता पड़ती है. हाल ही में यह सीख एक ऐसी जगह से आई, जिसकी उम्मीद कम ही थी.
‘द टेलीग्राफ’ में अर्घ्य सेनगुप्ता ने लिखा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों (ईसीज़) की नियुक्ति से जुड़े कानून की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई के दौरान भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की टिप्पणियों ने यह सिद्ध कर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय को सत्ता के सामने सच बोलने वाली एक निर्भीक आवाज़ के रूप में क्यों बने रहना चाहिए. न्यायमूर्ति दत्ता ने तीन प्रमुख बिंदु रेखांकित किए:
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चुनाव आयोग ने 14 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का दिया निर्देश
चुनाव आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को 14 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का निर्देश दिया. यह प्रक्रिया 1 जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर आयोजित की जाएगी.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत हर साल होने वाली प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करना, खासकर युवा और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना तथा मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को सुधारना है.
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अरुंधति रॉय | कयामत अभी और तब भी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को मानव सभ्यता की अगली बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बढ़ती कॉरपोरेट सत्ता, पर्यावरणीय नुकसान, निगरानी और मानवीय स्वतंत्रता के क्षरण का खतरा छिपा है. अरुंधति रॉय अपने लेख ‘Apocalypse Now and Then’ में तर्क देती हैं कि एआई का संकट केवल नौकरियों या तकनीक तक सीमित नहीं है. यह भाषा, रचनात्मकता, लोकतंत्र और मानव अस्तित्व को प्रभावित कर सकता है.
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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद अभिनेता इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) ने 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया है. उन पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन में शामिल होकर विदेशी अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है.
10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान इमरान खान को हिरासत में लिया गया था. इसके बाद बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और प्रदर्शन में हिस्सा लेकर उन्होंने विदेशी अधिनियम का उल्लंघन किया है.
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प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में 27,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती 20 अक्टूबर तक बढ़ाई गई
‘द टेलीग्राफ’ में इमरान अहमद सिद्दीकी की खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों, नागरिक अधिकार समूहों और कॉकरोच जनता पार्टी के उग्र प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में लगभग 27,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती को 20 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है.
पिछले सप्ताह, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों से पहले केंद्र ने राजधानी में 25,000 पुलिसकर्मियों सहित 50,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था.
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वॉल्टर फर्नांडिस | एक खतरनाक शिकंजा
पूर्वोत्तर भारत में नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) समूह विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों और 22 जून, 2026 के राजपत्र में प्रकाशित नियमों से बेहद चिंतित हैं. नए नियमों के अनुसार, विदेशी धन प्राप्त करने के नवीनीकरण हेतु आवेदन करने वाले संगठनों को पिछले वर्ष के अपने तथा अपने प्रमुख अधिकारियों के सोशल मीडिया पोस्ट, पुस्तकों और लेखों का ब्योरा देना होगा. साथ ही, अपनी सटीक गतिविधियों को भी स्पष्ट करना होगा.
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‘मेटा की बर्बरता’: दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई के वीडियो पर सोशल मीडिया पाबंदियाँ, यूजर्स ने उठाए सवाल
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता को उजागर करने वाले वीडियो ‘मेटा’ के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्मों पर पाबंदियों का सामना कर रहे हैं. पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि उनकी फीड्स से फुटेज गायब हो रहे हैं और भारत में कुछ अकाउंट्स को ब्लॉक किया जा रहा है.
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, कथित पाबंदियों का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदर्शनों के आसपास केंद्र सरकार द्वारा सेलुलर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने को लेकर एक अलग कानूनी विवाद चल रहा है.
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मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में छह महीने में कम से कम 80 नवजातों की मौत
मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में छह महीने के दौरान कम से कम 80 नवजातों की मौत हुई है. इन मौतों के बाद जांच की मांग उठी है. परिजनों ने उचित इलाज नहीं मिलने की शिकायत की है, जबकि स्थानीय भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने रात के समय डॉक्टरों की अनुपलब्धता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.
विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां जिला और उप-जिला अस्पतालों में नवजात मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से स्थापित की जाती हैं. अस्पताल प्रशासन ने मौतों के लिए समय से पहले जन्म, कम वजन और गंभीर बीमारियों को जिम्मेदार बताया है. विधायक ने कहा कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.
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आरएसएस के आर्थिक संगठन ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर केंद्र से कहा, स्टारलिंक को लाइसेंस न दें
‘द हिंदू’ में श्रीपर्णा चक्रवर्ती की रिपोर्ट है कि 2010 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) नियुक्त किया गया है. वह संजय कुमार के समय से पहले अपने मूल काडर में वापस लौटने से खाली हुए पद को भरेंगे, जो मतदाता सूची और आईटी प्रभाग के प्रभारी थे.
इस नई नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग में कार्यों का आवंटन कैसा होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संजय कुमार अगस्त 2024 से इस साल अगस्त तक उप चुनाव आयुक्त रहे थे और चुनाव आयोग के मतदाता सूची व आईटी प्रभागों के लिए जिम्मेदार थे. उन्होंने देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने वाले चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे.
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द गार्डियन | ‘13 करोड़ नामों की बेदखली का हिसाब कौन देगा?’: भारत के मतदाता सड़कों पर क्यों हैं
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में जन्मी शाहिदा फ़कीर ने जीवन भर अपने वोट देने के अधिकार को एक अटूट सच्चाई माना था. लेकिन एक दिन अचानक उनसे यह बुनियादी अधिकार छीन लिया गया. अधिकारियों के सामने उन्होंने अपना भारतीय जन्म प्रमाण पत्र और वर्ष 1962 तक के पारिवारिक ज़मीन के दस्तावेज़ पेश किए. उनके माता-पिता दोनों दशकों से मतदाता सूची का हिस्सा रहे थे, जिसका प्रमाण भी उन्होंने प्रस्तुत किया. इसके बावजूद, जब अप्रैल में अंतिम संशोधित मतदाता सूची जारी हुई, तो शाहिदा का नाम उसमें से नदारद था.
‘द गार्डियन’ में हन्ना एलिस-पीटरसन और शेख अज़ीज़ुर्रहमान की रिपोर्ट के अनुसार, एक गरीब मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली 38 वर्षीय यह प्रवासी मज़दूर इस पीड़ा को सहने वाली अकेली नागरिक नहीं हैं. पिछले एक साल के भीतर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) नामक प्रक्रिया के ज़रिए भारत की मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ (130 मिलियन) नाम हटा दिए गए हैं—यह संख्या जापान की कुल आबादी से भी अधिक है. भारत की स्वतंत्रता के आठ दशकों के इतिहास में इतने कम समय में मतदाता सूचियों में इतनी भारी कटौती कभी नहीं देखी गई.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'द इंडियन एक्सप्रेस' अपूर्वा विश्वनाथ की रिपोर्ट: सुप्रीम COURT ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और ECI को नोटिस जारी किया; जंतर-मंतर डिनोटिफिकेशन पर सुनवाई के लिए सहमत.
'पीटीआई' रिपोर्ट: चुनाव आयोग ने 14 राज्यों और 3 यूटी में 1 जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के साथ विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का दिया निर्देश; यूपी समेत 5 राज्यों के चुनाव से पहले बड़ी पहल.
'इक्वेक्टर' में अरुंधति रॉय का लेख: 'Apocalypse Now and Then' में AI, कॉरपोरेट एकाधिकार, भाषाई क्षरण, गाज़ा/डिजिटल निगरानी और पर्यावरणीय लागत पर तीखा प्रहार.
'द इंडियन एक्सप्रेस' रिपोर्ट: अभिनेता इमरान खान को एफआरआरओ का भारत छोड़ने का नोटिस; मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने पर विदेशी अधिनियम उल्लंघन का आरोप.
'द टेलीग्राफ' वॉल्टर फर्नांडिस का लेख: पूर्वोत्तर में प्रस्तावित FCRA संशोधनों (2026), सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य-शिक्षा संकट और नागरिक समाज के दमन का विश्लेषण.
'रॉयटर्स' रिपोर्ट: ईरान युद्ध के बीच कच्चे तेल में उबाल से भारत का व्यापार घाटा सितंबर में बढ़कर $30.21 अरब पहुंचा, आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी.
'पीटीआई और द टेलीग्राफ' रिपोर्ट: दिल्ली प्रदर्शन में 'मेटा' (FB, Insta) पर पुलिस बर्बरता के वीडियो हटाने का आरोप; सीजेआई कोर्ट में केंद्रीय गृह सचिव की बिना शर्त माफी.
'द टेलीग्राफ' इमरान अहमद सिद्दीकी की खबर: दिल्ली में 27,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती 20 अक्टूबर तक बढ़ी; एसकेएम का एसआईआर व चुनाव आयोग के खिलाफ 23 नवंबर देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान.
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