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जंतर-मंतर पर सीजेपी कार्यकर्ता के पिता का सिर फोड़ने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को कोर्ट से नियमित जमानत
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (6 अक्टूबर, 2026) को जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता का सिर फोड़ने का दावा करने वाले और खुद को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को नियमित जमानत दे दी है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, अपर सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने भारद्वाज को पहले तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देने और इस अवधि के दौरान उनके आचरण का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किया. अदालत ने 15 सितंबर को भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि जमानत अदालत के विश्वास की अभिव्यक्ति है, "प्रदर्शित की जाने वाली कोई ट्रॉफी नहीं".
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केन-बेतवा परियोजना: आदिवासी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ 200 से अधिक संगठनों ने उठाई आवाज
‘कॉउंटरकरंट्स’ के मुताबिक, केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित समुदायों के ‘चिता आंदोलन’ के 25 दिन पूरे होने के बीच देशभर के 200 से अधिक नागरिकों और जनसंगठनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर आदिवासी समुदायों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कदम उठाने की मांग की है. संगठनों ने गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई और मझगवां तथा रुनझ बांध से प्रभावित परिवारों के उचित और कानूनी पुनर्वास की मांग की है.
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने आरोप लगाया कि प्रभावित समुदायों की जायज मांगों को बातचीत के जरिए हल करने के बजाय सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रशासन ने आदिवासी महिला और पुरुष प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की. इस दौरान जय किसान संगठन के अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत समेत कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है.
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एसआईआर में काटे गए नाम: बंगाल के चार लोग छत्तीसगढ़ के डिटेंशन सेंटर में एक महीने से बंद
‘द हिंदू’ में सेंजुती सेनगुप्ता की रिपोर्ट है कि हाल ही में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम काटे जाने के बाद, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के चार प्रवासी मजदूर एक अजीबोगरीब स्थिति में फंस गए हैं. एक महीना बीत चुका है; पीढ़ियों से भारत में रहने वाले नागरिक होने के बावजूद बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस ने हिरासत में लेकर रायपुर के एक डिटेंशन सेंटर (निरोध केंद्र) में रखा हुआ है.
अगस्त के अंत में, मुर्शिदाबाद के समसेरगंज और साहाबाद इलाकों के सबीर शेख (42), शफिकुल इस्लाम (39), नासिरुद्दीन शेख (35) और लालटू शेख (28) सहित कम से कम 23 प्रवासी मजदूर काम की तलाश में छत्तीसगढ़ गए थे, जहाँ वे बिलासपुर क्षेत्र में घर-घर जाकर सामान भी बेच रहे थे.
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135 साल पुरानी लाइब्रेरी, 8.5 लाख किताबें और नई सेंट्रल विस्टा योजना में कोई जगह तक नहीं
जब 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने ब्रिटिश भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने के फैसले की घोषणा की, तो सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी (सीएसएल), जिसे तब इम्पीरियल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता था, इसके साथ ही स्थानांतरित हो गई और इसे सिविल लाइंस क्षेत्र की ओल्ड सेक्रेटेरियट बिल्डिंग (पुराना सचिवालय) में पहला ठिकाना मिला. अंग्रेजों द्वारा रायसीना हिल के आसपास सत्ता की नई सीट बनाने के बाद, लाइब्रेरी को फिर से नॉर्थ ब्लॉक और फिर शास्त्री भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ यह 1969 से मौजूद है.
अब इसे फिर से स्थानांतरित करने का समय आ गया है - लेकिन किसी को यकीन नहीं है कि कहाँ?
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होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमले में 11 भारतीय घायल
‘स्क्रोल’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय घायल हो गए. हमले में पनामा के झंडे वाला एमटी ऑन पीस जहाज निशाना बना, जिसमें कुल 19 चालक दल के सदस्य सवार थे. इनमें 17 भारतीय थे. हमले में कुल 12 लोग घायल हुए.
घायलों को ओमान के अधिकारियों की मदद से जहाज से बाहर निकाला गया और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए इसे भारत के लिए गहरी चिंता का विषय बताया है.
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20 साल से लंबित मामला, सुप्रीम कोर्ट में आधे घंटे में निस्तारित
सुप्रीम कोर्ट में 20 से अधिक वर्षों से लंबित विधायी विशेषाधिकार बनाम प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामले को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 7 जजों की पीठ ने निष्फल मानते हुए आधे घंटे में खारिज कर दिया.
कृष्णदास राजागोपाल के अनुसार, यह विवाद 2003 में शुरू हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की आलोचनात्मक संपादकीय छापने पर तमिलनाडु विधानसभा ने 'द हिंदू' के संपादकों को गिरफ्तार करने का प्रस्ताव पारित किया था. विधानसभा का तर्क था कि यह संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत सदन के विशेषाधिकार का हनन है. इसके खिलाफ 'द हिंदू' के संपादक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस की आजादी का पक्ष रखा.
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‘नीतिगत पंगुता’ : केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के कार्यकाल में बार-बार विस्तार से विशेषज्ञ हैरान
सरकार ने आधा दर्जन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के निवर्तमान कुलपतियों को फिर से नियुक्त किया है या उनके पांच साल के कार्यकाल को आगे बढ़ाया है. शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग द्वारा इस कदम को "नीतिगत पंगुता" के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है.
बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाध्यक्ष के रूप में अपनी क्षमता में, पिछले तीन महीनों में दिल्ली विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपतियों - योगेश सिंह और संगीता श्रीवास्तव - को पांच साल का दूसरा कार्यकाल देने के शिक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. मुर्मू ने हाल ही में दोनों विश्वविद्यालयों की कार्यकारी परिषदों की उन सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिनमें उनके परिनियमों के उस प्रावधान में संशोधन करने की बात कही गई थी जो निवर्तमान कुलपतियों के दूसरे कार्यकाल पर रोक लगाता था.
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2026 में भारत में सीवर, सेप्टिक टैंक और बंद जगहों में 125 लोगों की मौत
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (डीएएसएएम) ने जनवरी से 2 अक्टूबर 2026 के बीच देश के 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सीवर, सेप्टिक टैंक, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य बंद जगहों में काम के दौरान कम से कम 125 मौतें दर्ज की हैं. संगठन के अनुसार, ये घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि असुरक्षित सैनिटेशन कार्य, ठेकेदारी व्यवस्था, संस्थागत लापरवाही और सुरक्षा नियमों के कमजोर क्रियान्वयन की समस्या को दिखाती हैं.
डीएएसएएम के आंकड़ों में जुलाई सबसे घातक महीना रहा, जिसमें 28 मौतें दर्ज हुईं. मार्च में 25, जून में 20, मई में 19 और अप्रैल में 10 मौतें हुईं. राज्यवार आंकड़ों में बिहार में 14, तमिलनाडु में 12, हरियाणा में 11 और उत्तर प्रदेश में 10 मौतें दर्ज की गईं.
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“ज्ञानू, अब बहुत हो गया, ब्रो!”: भारत में हो रहे विद्रोह मोदी की अजेयता के आभा-मंडल में सुराख कर रहे हैं
‘अलजज़ीरा’ में विद्या कृष्णन ने लिखा है कि इस अक्टूबर भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा दिखाई दे रहा है जहाँ देश के कोने-कोने से असंतोष की अनगिनत धाराएँ मिलकर एक विशाल जनांदोलन का रूप ले रही हैं. देश की सड़कों पर 'लाखों विद्रोह' एक साथ आकार ले रहे हैं. महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के समर्थकों ने अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन का पुनराभ्यास करते हुए सड़कों पर कब्ज़ा कर लिया. वातावरण में एक अजीब सी ऊर्जा और उत्सव जैसा माहौल था—चारों ओर युवाओं की भीड़, मार्च करती छात्राएं और कंधे से कंधा मिलाकर चलते नवयुवक, जो हवा में मुट्ठियाँ लहराते हुए नारे लगा रहे थे: "ज्ञानू, अब बहुत हो गया, ब्रो!"
प्रदर्शनकारियों के इस तेवर में सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि वे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार—उर्फ 'ज्ञानू'—के बारे में अभी से भूतकाल में बात कर रहे हैं.
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एसआईआर: तेलंगाना में थोक में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने पर भाजपा बूथ एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना पुलिस ने मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 30 से अधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा करने के आरोप में भाजपा के बूथ-लेवल एजेंट एस. बालचंदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन आवेदनों में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए थे, वे सभी मुस्लिम हैं. इनमें कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंट शफीउद्दीन और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं.
एफआईआर मुशीराबाद के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत पर चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. बालचंदर पर भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है.
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दलबदल का ‘संवैधानिक पाप’: सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के चुनाव चिह्न पर शिंदे गुट के दावे पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस बात पर सवाल उठाया कि क्या शिवसेना का 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न उन विधायकों के पास रहना चाहिए जो दलबदल के कारण अयोग्यता की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं. अदालत यह सवाल एकनाथ शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग) के फैसले की समीक्षा के दौरान कर रही थी.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने पूछा, "क्या चुनाव चिह्न से जुड़ा जनभाव उन लोगों के पक्ष में काम करेगा जिन्होंने संवैधानिक पाप किया है, या फिर यह उन लोगों के पक्ष में रहेगा जिन्होंने इस संवैधानिक पाप की शिकायत की है?"
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चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस, एक सप्ताह में जवाब दें
इस बीच ‘द हिंदू’ की ही खबर है कि उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग द्वारा दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कथित रूप से निर्णय लेने के तरीके को चुनौती दी गई है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए यह नोटिस जारी किया.
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अफगानिस्तान का 121 किलोमीटर लंबा वाखान कॉरिडोर भारत के लिए बढ़ा सकता है चिंताएं: सड़क बदख्शां प्रांत को चीन के शिनजियांग से जोड़ती है
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ‘एक्स’ पर बताया है कि अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के माध्यम से चीन के शिनजियांग क्षेत्र को जोड़ने वाली 121 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरा कर उसका उद्घाटन कर दिया है. लगभग 55 लाख डॉलर (5.5 मिलियन डॉलर) की लागत से बनी यह सड़क दोनों देशों के बीच पहला सीधा ज़मीनी संपर्क बन गई है.
तालिबान सरकार अपने प्राकृतिक संसाधनों और सोने की खदानों के लिए चीनी बाजार तक सीधी पहुंच चाहती है. इससे विदेशी कंपनियों और अन्य देशों पर उसकी निर्भरता काफी कम हो जाएगी.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'पीटीआई' रिपोर्ट: दिल्ली सत्र अदालत ने जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दी नियमित ज़मानत; 3 हफ़्ते के अंतरिम आचरण का अवलोकन.
'कॉउंटरकरंट्स' रिपोर्ट: केन-बेतवा परियोजना के 'चिता आंदोलन' के 25 दिन; 200 से अधिक नागरिक संगठनों की NHRC और NCST से आदिवासियों की रिहाई व उचित पुनर्वास की मांग.
'द हिंदू' रिपोर्ट: सेंजुती सेनगुप्ता का खुलासा; एसआईआर के बाद छत्तीसगढ़ में हिरासत में लिए गए मुर्शिदाबाद के 4 प्रवासी मजदूर, कलकत्ता हाईकोर्ट का कड़ा रुख.
'हरकारा डीप डाइव' : निधीश त्यागी और श्रवण गर्ग की विशेष बातचीत; विपक्षी सांसदों के ईसीआई मार्च, डिटेंशन और 'पुलिस स्टेट' के आरोपों पर विश्लेषण.
'स्क्रोल' विशेष: होर्मुज जलडमरूमध्य में पनामा ध्वज वाले मालवाहक जहाज 'MT On Peace' पर हमला; 11 भारतीय नागरिक घायल, MEA की गंभीर चिंता.
'द हिंदू' रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट में 20 साल पुराना केस आधे घंटे में खारिज; 'द हिंदू' बनाम तमिलनाडु विधानसभा विशेषाधिकार विवाद निष्फल घोषित.
'द टेलीग्राफ' विशेष: बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट; आधा दर्जन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल बढ़ाने पर 'नीतिगत पंगुता' और नियमों में संशोधन का विवाद.
'मकतूब मीडिया' विशेष: डीएएसएएम रिपोर्ट; 2026 में सेप्टिक टैंक और सीवर सफाई के दौरान 125 दलित-आदिवासी मजदूरों की मौत, ठेकेदारी व्यवस्था और संस्थागत विफलता का विश्लेषण.
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