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कर्नाटक के एसआईआर में बेंगलुरु के लगभग आधे मतदाता हटाए जाने की सूची में
‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेंगलुरु के लगभग आधे पंजीकृत मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची से हटाए जाने की संभावित श्रेणी में रखा गया है. कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु के 1.03 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 49.42 लाख मतदाताओं को "अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट अथवा अन्य" श्रेणी में चिह्नित किया गया है.
पूरे कर्नाटक में ऐसे मतदाताओं की संख्या 1.11 करोड़ है, जो राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग पांचवां हिस्सा है.
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"क्या आप मुसलमान हैं?": रंगकर्मी ने कहा, "अगर हूं तो क्या? क्या यह देश मुसलमानों का भी नहीं?", इसके बाद पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर हुई पिटाई
‘ऑल्ट न्यूज़’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के श्यामनगर रेलवे स्टेशन के पास एक रंगकर्मी के साथ कथित तौर पर धर्म पूछकर मारपीट की गई. पीड़ित शुभंकर दाशशर्मा का आरोप है कि 28 जुलाई की रात कोलकाता में नाटक का मंचन करने के बाद वह अपने घर लौट रहे थे. स्टेशन से बाहर निकलकर सार्वजनिक वाहन की तलाश में जा रहे थे, तभी चार युवकों ने उन्हें रोक लिया और पूछा, "क्या आप मुसलमान हैं?" शुभंकर का कहना है कि उन्होंने पहले सवाल का विरोध करते हुए कहा कि केवल काला कुर्ता-पायजामा पहन लेने से किसी की धार्मिक पहचान तय नहीं की जा सकती. लेकिन जब युवक लगातार यही सवाल दोहराते रहे, तो उन्होंने जवाब दिया, "अगर मैं मुसलमान हूं तो क्या? क्या यह देश मुसलमानों का भी नहीं है? क्या मुसलमान होना कोई अपराध है?"
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पीएम मोदी की 2026 की विदेश यात्राओं का खर्च: 3 करोड़ रुपये प्रतिदिन से लेकर 12.4 लाख रुपये प्रति घंटा तक
अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले लगभग आधे भारतीय 1 लाख रुपये से कम खर्च करते हैं. इसकी तुलना में, 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक विदेश यात्राओं पर विदेश में बिताए गए हर घंटे औसतन लगभग 12.4 लाख रुपये खर्च हुए हैं.
गुरुवार को राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर ₹74.59 करोड़ खर्च हुए, जिसमें 13 देशों में बिताए गए 25 कैलेंडर दिवस शामिल हैं. यह विदेश में बिताए गए प्रत्येक दिन के लिए लगभग 2.98 करोड़ रुपये बैठता है. इस आंकड़े में 6 जुलाई से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की उनकी हालिया यात्राएं शामिल हैं.
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प्रयागराज में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति ऐन वक्त पर रद्द
कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए 8 अगस्त को प्रयागराज के के.पी. ग्राउंड में आयोजित होने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी है. ट्रस्ट ने कार्यक्रम रद्द करने के पीछे कार्यक्रम स्थल पर जलभराव का भी हवाला दिया.
‘पीटीआई’ के अनुसार, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राहुल गांधी से "डरती" है और राजनीतिक कारणों से कार्यक्रम में बाधा डाली जा रही है. कोटा और देहरादून में भी गांधी के कार्यक्रमों को इसी तरह रद्द कर दिया गया था.
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सीजेपी का ऐलान, ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान: चुनावी, न्यायिक और मीडिया सुधारों को भी उजागर करेंगे
जंतर-मंतर पर अपना सफल आंदोलन समाप्त करने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अगले चरण के लिए तैयार है. इस समूह—जो अभी भी खुद के एक सामाजिक संगठन होने का दावा करता है, हालांकि इसका विरोध प्रदर्शन राजनीतिक प्रकृति का है—ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति के नामों की घोषणा करने के अलावा, देशव्यापी सदस्यता अभियान, एक जनसंवाद पहल और एक विस्तार योजना की घोषणा की. विनया देशपांडे पंडित के अनुसार, ये घोषणाएं गुरुवार को छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय कोर कमेटी की बैठक के अंत में की गईं.
अपनी ‘क्या बोलती पब्लिक’ पहल की शुरुआत की घोषणा करते हुए, सीजेपी ने कहा कि वह देश के विभिन्न हिस्सों के आम लोगों की आवाज़ सुनने के लिए उत्सुक है. यह अपने विस्तार का समर्थन करने के लिए एक क्राउड-फंडिंग (जन-सहयोग) पहल शुरू करने की भी योजना बना रहा है.
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श्रवण गर्ग | मोहन भागवत ने आंदोलनकारी छात्रों को राष्ट्रविरोधी मानने से इनकार कर पूरी बहस का केंद्र बदल दिया
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग चर्चा कर रहे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उस संवाद की, जिसने मौजूदा राजनीतिक माहौल में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मुंबई में जनरेशन Z और अल्फा पीढ़ी के करीब दो हजार युवाओं के साथ हुई इस बातचीत को श्रवण गर्ग केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संघ की सार्वजनिक राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटना मानते हैं. उनका कहना है कि हाल के दिनों में छात्र आंदोलन को लेकर संघ के कुछ पदाधिकारियों और उससे जुड़े संगठनों की ओर से जिस तरह के बयान आए, उनके बीच मोहन भागवत का रुख बिल्कुल अलग दिखाई दिया.
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बुलडोजर से बरी होने तक: 11 मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ रामनवमी हिंसा का मामला बिना सबूत के खड़ा किया गया
मध्य प्रदेश के खड़गोन में अप्रैल 2022 की रामनवमी हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में 27 जुलाई 2026 को स्थानीय सत्र अदालत ने सभी 11 मुस्लिम आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, वही हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल थे. अदालत ने यह नहीं कहा कि हिंसा नहीं हुई, बल्कि स्पष्ट किया कि अपराध और आरोपी की पहचान दो अलग-अलग बातें हैं और केवल हिंसा साबित हो जाने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
‘आर्टिकल 14’ के मुताबिक, 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी जुलूस के दौरान खड़गोन के तालाब चौक इलाके में पथराव के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई, 24 से अधिक लोग घायल हुए तथा कई घरों, दुकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया.
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कश्मीर में अधिकांश पेलेट गन पीड़ित एक दशक बाद भी मुआवज़े के इंतज़ार में
जुलाई 2016 में कश्मीर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 14 वर्षीय इंशा मुश्ताक की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई. अपने घर की खिड़की खोलते ही सुरक्षा बलों द्वारा दागे गए पेलेट उनकी आंखों में लगे और उनकी दृष्टि चली गई. करीब दस साल बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें 41 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है. लेकिन घाटी में पेलेट गन से प्रभावित हजारों अन्य पीड़ित आज भी न्याय, पुनर्वास और आर्थिक सहायता का इंतज़ार कर रहे हैं.
‘स्क्रोल’ के मुताबिक, इंशा उन 6,000 से अधिक लोगों में शामिल थीं जो 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन से घायल हुए थे.
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‘हम डेटा नहीं पी सकते’: गूगल की भारत डेटा सेंटर परियोजना पानी और वन्यजीवों से जुड़ी चिंताओं में उलझी
गूगल के प्रस्तावित भारतीय डेटा सेंटर हब के निर्माण का काम पूरे ज़ोरों पर है. साइट के ऊपर स्थित पहाड़ी को लाल मिट्टी तक खोदकर सीढ़ीदार बना दिया गया है, लेकिन पर्यावरणविदों के बढ़ते विरोध के कारण अमेरिकी टेक दिग्गज की 15 अरब डॉलर की इस परियोजना के सामने बाधाएँ खड़ी हो रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोगी द्वारा शासित दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश पर जल आपूर्ति और वन्यजीवों के जोखिमों का आकलन किए बिना इस परियोजना को तेज़ी से मंज़ूरी देने का आरोप है, हालांकि राज्य ने इसका खंडन किया है. लेकिन बढ़ता विरोध गूगल के भारत में अब तक के सबसे बड़े निवेश के लिए एक शुरुआती परीक्षा बन सकता है,
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यूपीआई लेन-देन पर अब ‘शुल्क’ लगेगा, लोकसभा ने बैंकों को अनुमति देने वाला विधेयक पारित किया
लोकसभा ने गुरुवार (6 अगस्त, 2026) को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करने वाले एक विधेयक को पारित कर दिया. यह विधेयक सरकार को यह अधिकार देता है कि वह बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति दे सके.
‘पीटीआई’ के अनुसार, कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक—जिसके माध्यम से सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में भी संशोधन किया है—को अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की लगातार नारेबाजी के बीच बिना किसी बहस के पारित कर दिया गया.
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विवेक काटजू | विदेश मंत्रालय को स्थापित करना होगा कि मोदी का ध्यान देश के हितों को बढ़ाने पर है, न कि ‘पुरस्कारों’ पर
भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी विवेक काटजू ने लिखा है कि किसी विदेशी देश द्वारा किसी देश के शासनाध्यक्ष (हेड ऑफ गवर्नमेंट) को दिए जाने वाले राष्ट्रीय सम्मानों का उस प्राप्तकर्ता देश के विदेशी और रणनीतिक हितों के लिए क्या अर्थ होता है? भारत की विदेश नीति और कूटनीति के लिए यह एक गंभीर सवाल है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2014 में पदभार संभालने के बाद से अब तक 33 देशों द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जा चुके हैं.पद पर रहते हुए किसी अन्य सेवारत शासनाध्यक्ष या राष्ट्रध्यक्ष — कार्यकारी या अन्य — को अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में इतने विदेशी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होते नहीं दिखे हैं जितने मोदी को मिले हैं.
मोदी को दिया गया पहला पुरस्कार 2016 में सऊदी अरब की उनकी यात्रा के दौरान मिला था. 5 अप्रैल 2016 को अपने मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय में तत्कालीन सचिव (आर्थिक संबंध) अमर सिन्हा ने कहा था, "...सऊदी पक्ष ने प्रधानमंत्री को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान — 'किंग अब्दुलअजीज स्पेशल सैश' से सम्मानित करके एक बहुत बड़ा आश्चर्य दिया.
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: बेंगलुरु में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के तहत 49.42 लाख voters संदिग्ध श्रेणी में; मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा बढ़ा.
'ऑल्ट न्यूज़' की रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल के श्यामनगर स्टेशन पर रंगकर्मी शुभंकर दाशशर्मा के साथ कथित तौर पर धार्मिक पहचान पूछकर मारपीट; नोआपाड़ा थाने में शिकायत दर्ज.
'पीटीआई' रिपोर्ट: प्रयागराज के के.पी. ग्राउंड में 8 अगस्त को प्रस्तावित राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम रद्द; कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने जलभराव और HC आदेश का दिया हवाला.
विनया देशपांडे पंडित और राहुल साधु की रिपोर्ट: जंतर-मंतर आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की राष्ट्रीय समिति, मोहन भागवत का रुख और पेंशनभोगियों का प्रदर्शन.
'हरकारा डीप डाइव' में Nidheesh Tyagi और श्रवण गर्ग का मोहन भागवत के Gen Z संवाद, छात्र आंदोलनों और संघ के बदलते रुख पर विशेष विश्लेषण.
संसद में सरकार का जवाब, 2021 से 2026 तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर ₹557.5 करोड़ खर्च; $381.8 अरब के FDI की प्रतिबद्धता.
'आर्टिकल 14' रिपोर्ट: खड़गोन हिंसा मामले में सभी 11 आरोपी बरी, अदालत ने पुलिस जांच, बिना सबूत गिरफ्तारी और बुलडोजर कार्रवाई पर उठाए सवाल.
'स्क्रोल' की रिपोर्ट: कश्मीर की इंशा मुश्ताक को 10 साल बाद ₹41 लाख का मुआवजा; पेलेट गन के अन्य हजारों पीड़ितों के पुनर्वास और न्याय की मांग जारी.
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जिस आदमी ने पंद्रह साल तक दूसरों के लिए छह मुख्यमंत्री जिताए — मोदी, नीतीश, ममता, जगन, स्टालिन, केजरीवाल — उसकी अपनी पार्टी 2025 में 238 सीटों पर लड़कर एक भी नहीं जीत पाई, कई जगह नोटा से भी पीछे रही. और अब वही प्रशांत किशोर बीजेपी के 30 साल पुराने गढ़ बांकीपुर से, पहली बार लड़कर जीत गए हैं. पर हरकारा डीपडाइव की यह बातचीत "बी टीम" की बहस से आगे जाती है. निधीश त्यागी और लेखक-व्यंग्यकार राकेश कायस्थ की बातचीत में: ▪️ बी टीम की थ्योरी को एक तरफ़ रखकर — प्रशांत किशोर आख़िर करना क्या चाहते हैं ▪️ आँकड़ों की कहानी: 34% का न्यूनतम मतदान, बीजेपी से 28% और आरजेडी से 18% वोट का खिसकना ▪️ वोटर की बेचैनी — केजरीवाल, तमिलनाडु में विजय, पंजाब में भगवंत मान, और CJP की लहर से जोड़कर ▪️ अपने ही वोटर से सवाल करने की शैली — नेहरू, अंबेडकर और कांशीराम की परंपरा से तुलना ▪️ "सर्जिकल स्ट्राइक": मोदी-शाह और संघ पर चुप्पी, पर सम्राट चौधरी पर सीधा हमला ▪️ माइग्रेशन, शिक्षा और बिहार की तरक़्क़ी के मुद्दे — जो कांग्रेस-आरजेडी को उठाने चाहिए थे ▪️ तेजस्वी यादव का गिरता ग्राफ़ और आरजेडी का संकट ▪️ आगे का सवाल: PK एनडीए के साथ जाएँगे या इंडिया गठबंधन के, या नवीन पटनायक की तरह उदासीन? विस्तृत विश्लेषण और फ़ैक्टशीट: harkaraonline.com
हम हरकारा.
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हम अनुभवी पत्रकारों की एक छोटी टीम हैं, लेकिन एक बड़े समुदाय का हिस्सा भी, जिसमें आप भी शामिल हैं.
हमारा उद्देश्य उन मुद्दों पर संवाद और विमर्श शुरू करना है, जो अक्सर छूट जाते हैं या जानबूझकर हाशिए पर डाल दिए जाते हैं.
हरकारा तथ्यपरक पत्रकारिता, लोकतंत्र और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थक है. हम खबरों और उनके पाठकों/श्रोताओं को फिर से केंद्र में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ये गाना सुनिये. शायद आपको भी उतना ही पसंद आए, जितना टीम हरकारा को है.


RSS को जेन ज़ी की ज़रूरत क्यों पड़ गई? भागवत का बड़ा दांव या बढ़ती बेचैनी? पेपर लीक, छात्र आंदोलन और देशभर में उभरते युवा आक्रोश के बीच RSS ने पहली बार जेन ज़ी (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) के प्रतिनिधियों के साथ विशेष संवाद का आयोजन किया है. सवाल यह है कि आखिर संघ को अचानक नई पीढ़ी से सीधे बात करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सिर्फ वैचारिक संवाद है या युवाओं के बदलते राजनीतिक रुझान को समझने और प्रभावित करने की कोशिश? क्या राहुल गांधी के युवा-केंद्रित अभियान और छात्र आंदोलनों ने संघ और भाजपा की रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है?