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भाजपा-एकनाथ शिंदे के रिश्तों में बढ़ता तनाव: जरांगे को 500 करोड़ किसने पहुँचाए?
लगभग चार वर्षों से, एकनाथ शिंदे और भाजपा ने अपने गठबंधन को महाराष्ट्र के हित में बनी एक साझेदारी के रूप में पेश किया है. लेकिन मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े 500 करोड़ रुपये के आरोप ने एक पुराना सवाल फिर से सामने ला खड़ा किया है: “उस गठबंधन में शिंदे की स्थिति कितनी सुरक्षित है जिसमें भाजपा एक प्रमुख/हावी भागीदार के रूप में उभरी है?”
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परकला प्रभाकर | व्यापक बदलाव की जरूरत
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ किसी भी आंदोलन का उद्देश्य केवल चुनावी लाभ-हानि तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसका लक्ष्य चुनावी प्रक्रिया की पूर्ण निष्पक्षता और विश्वसनीयता बहाल करना होना चाहिए. एसआईआर से सत्तारूढ़ गठबंधन को तत्काल राजनीतिक लाभ मिलने की आशंका हो सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर इसका विरोध करना इसके कहीं अधिक गंभीर परिणामों को नजरअंदाज करना है.
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आसिम अली | ‘राक्षसी’ बनाई गई एक आवाज़
सोशल मीडिया पर हाल ही में शर्जील इमाम के मामले को लेकर नया बवंडर तब खड़ा हुआ जब 'द प्रिंट' में 'इब्न खल्दून भारती' उपनाम से एक लेख छपा. इस लेख में लेखक ने उदारवादियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने शर्जील इमाम के उन खतरनाक "इस्लामवादी" विचारों के लिए उसकी आलोचना नहीं की, जो उसने 'द क्विंट' को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में व्यक्त किए थे. 'भारती' ने इमाम के विचारों का सार इन शब्दों में निकाला था: "बिना किसी शर्म के उदारवाद-विरोधी, धर्मनिरपेक्षता-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी, संविधान-विरोधी—एक शब्द में कहें तो, राष्ट्र-विरोधी."
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‘ब्लडी झूठी पार्टी’: नसीरुद्दीन शाह बोले- बीजेपी असहमत लोगों से बदला लेने पर आमादा
दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) के छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया. परिसर में हुई हिंसा के विरोध में छात्र अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं. इस दौरान शाह ने भाजपा पर उन लोगों से "बदला" लेने का आरोप लगाया जो उसकी मान्यताओं और नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं.
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मुस्लिमों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज होती है, लेकिन इस मामले में नहीं
'आर्टिकल-14' बेतवा शर्मा लिखती हैं कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक आवासीय परिसर में मकान मालिकों को किराए पर घर देते समय हिंदू परिवारों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया. नोटिस पर “समिति के आदेशानुसार” लिखा था. भोपाल निवासी प्यारे खान ने 3 सितंबर 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन 23 अक्टूबर तक, यानी 48 दिन बाद भी प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं हुई थी. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब मुस्लिमों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने या सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की शिकायतों पर अक्सर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाती है.
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अपूर्वानंद | लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियां
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों पर लगाई जा रही पाबंदियों, पुलिस की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जिम्मेदारी पर चर्चा की. बातचीत का मुख्य विषय भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को मिले विरोध के अधिकार और जंतर-मंतर जैसे प्रदर्शन स्थलों पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने के लिए दायर की गई याचिका रहा.
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“हममें से कोई भी ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था”: अरुणाचल में बांध विरोधी शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हुआ, कई घायल
‘मकतूब मीडिया’ में निकिता जैन की रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के विरोध और बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर शुक्रवार को बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. घटना के बाद पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में तनाव फैल गया और शनिवार को भी स्थिति संवेदनशील बनी रही.
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म्यांमार में हथियारों के प्रशिक्षण मामले में आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को भारत से बाहर रहने की अनुमति बढ़ी
'हिंदुस्तान टाइम्स' में अर्नबजीत सूर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की एक अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिकों को भारत से बाहर रहने की अनुमति अगले साल 24 फरवरी तक बढ़ा दी है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत को बताया था कि मामले के कई पहलुओं की जांच पूरी करने के लिए उसे और समय चाहिए.
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बंगाल: तीन ईसाई परिवारों ने मारपीट, धर्म छोड़ने की धमकी और जबरन अनुष्ठान कराने का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में कुछ लोगों के एक समूह ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें अपना धर्म छोड़ने की धमकी दी. इसके साथ ही उन पर जबरन धार्मिक अनुष्ठान कराने का भी आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को ‘पीटीआई’ को बताया कि पीड़ित परिवार पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और करीब 18 महीने पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. उन्होंने पुलिस से यह भी शिकायत की है कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है.
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इंडिपेंडेंट | ज्ञानेश कुमार का बचाव करने के लिए सरकार इतनी प्रतिबद्ध क्यों है
भारत में मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का एक नया और आक्रामक दौर शुरू हो गया है. विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि यह पूरी कवायद केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है.
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर विशाल प्रदर्शन देखने को मिले हैं.
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क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी
अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.
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रॉयटर्स | मोदी का धर्मसंकट: असंतोष बढ़ते ही भारत की सड़कों पर उतरा ‘जेन जी’, यूपी चुनाव में परीक्षा
उन्हें रोकने के लिए तैनात हजारों सुरक्षाकर्मियों के बावजूद, भारत में युवा प्रदर्शनकारियों ने पिछले हफ्ते बैरिकेड्स लांघे, सरकार विरोधी नारे लगाए और उन्हें खींचकर दूर ले जाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से झड़प की.
एक युवक ने पुलिस द्वारा बस में बैठाए जाने से पहले चिल्लाकर कहा, "इंकलाब जिंदाबाद."
टीका - टिप्पणियां | विश्लेषण | लेख
जीशान शेख की रिपोर्ट: मनोज जरांगे-पाटिल से जुड़े 500 करोड़ के ऑडियो क्लिप विवाद, एकनाथ शिंदे-भाजपा गठबंधन के अंदरूनी तनाव और महाराष्ट्र की राजनीति पर विश्लेषण।।
परकला प्रभाकर का 'द क्रुक्ड टिम्बर ऑफ न्यू इंडिया' संदर्भ विश्लेषण: मतदाता सूची से 13.5 करोड़ नाम हटने, एसआईआर विवाद, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मताधिकार की सार्वभौमिकता पर रिपोर्ट।
आसिम अली का विश्लेषण: शर्जील इमाम, सोशल मीडिया विवाद, 'इब्न खल्दून भारती' का लेख, मुस्लिम राजनीति, संवैधानिक व्यवस्था और कट्टरपंथी लोकतंत्र की पड़ताल.
'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एसआरएफटीआई छात्र विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया, भाजपा पर निशाना साधा और कुलपति के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया.
निकिता जैन की 'मकतूब मीडिया' रिपोर्ट: अरुणाचल प्रदेश के सियांग में बांध विरोधी आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, आंसू गैस के गोले, 10 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पासीघाट में तनाव.
'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी और प्रो. अपूर्वानंद की चर्चा: दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, प्रदर्शन स्थलों पर पाबंदियां, पुलिस कार्रवाई और अदालतों की भूमिका का विश्लेषण।
बेतवा शर्मा की 'आर्टिकल-14' रिपोर्ट: भोपाल के पीएम आवास योजना परिसर में हिंदू परिवारों को मकान किराए पर देने के नोटिस और पुलिस द्वारा FIR न दर्ज करने पर विश्लेषण.
अर्नबजीत सूर की 'हिंदुस्तान टाइम्स' रिपोर्ट: दिल्ली अदालत ने म्यांमार केस में अमेरिकी वैनडाइक और 6 यूकेरियाई नागरिकों की विदेश प्रवास अवधि 24 फरवरी तक बढ़ाई.
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