02/01/2026: ममदानी से मर्माहत | दूषित पानी का फैलता रायता, लोगों ने मुआवजे ठुकराया | बीवाईडी टेस्ला से आगे | आईपीएल, शाहरुख और बांग्लादेशी खिलाड़ी | टुल्ल पायलट पर कनाडा के सवाल | दिल की मिरैकल दवा
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आज की सुर्खियां
न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोह्रान ममदानी ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखा समर्थन वाला खत. भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति. इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल बताया.
इंदौर में दूषित पानी पीने से 6 महीने के बच्चे समेत कई लोगों की मौत. 10 साल की मन्नतों के बाद हुआ था बच्चा. परिवार ने मुआवजा ठुकराया.
चीन की कंपनी बीवाईडी ने एलन मस्क की टेस्ला को पछाड़ा. बनी दुनिया की सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेचने वाली कंपनी.
शाहरुख खान की आईपीएल टीम केकेआर द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी खरीदने पर विवाद. भाजपा नेताओं ने साधा निशाना. बताया देश के साथ गद्दारी.
वेतन संहिता के नए ड्राफ्ट से नौकरीपेशा लोगों की बढ़ी धड़कनें. अब 8 की जगह 12 घंटे काम कराने की मिल सकती है छूट.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान. कहा अवैध घुसपैठियों को अब सीधे बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा. किसी संधि की जरूरत नहीं.
शराब के नशे में ड्यूटी पर पहुंचा एअर इंडिया का पायलट. कनाडा के परिवहन विभाग ने एअर इंडिया से जवाब तलब किया.
कश्मीरी क्रिकेटर ने मैच के दौरान हेलमेट पर लगाया फिलिस्तीन का झंडा. पुलिस ने शुरू की मामले की जांच.
हार्ट अटैक के छुपे हुए कारण को खत्म करने वाली दवा का इंतजार जल्द होगा खत्म. वैज्ञानिकों ने जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल के इलाज में पाई बड़ी सफलता.
दक्षिण भारत के राज्यों में कम होती जनसंख्या बनी चिंता का विषय. नेताओं ने कपल्स से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की.
ममदानी की चिट्ठी पर भाजपा ने मोर्चा खोला, भारत के आंतरिक मामलों में दखल वगैरह.. करार दिया
न्यूयॉर्क सिटी के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोह्रान ममदानी द्वारा जेल में बंद भारतीय कार्यकर्ता उमर खालिद को लिखे गए एक हस्तलिखित नोट ने भारत में एक नया राजनीतिक और वैचारिक विवाद खड़ा कर दिया है. इस मामले में अब खालिद का परिवार, विपक्षी नेता, भाजपा, हिंदू संगठन और अमेरिकी सांसद भी शामिल हो गए हैं. खालिद के पिता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने अमेरिका यात्रा के दौरान ममदानी से मुलाकात की पुष्टि की. उन्होंने कहा, “ममदानी ने खालिद के नाम एक पत्र दिया जो उन्होंने अपनी लिखावट में लिखा था... उन्होंने पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया.” इलियास ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट में हालिया बहस के बाद इस बार खालिद को जमानत मिल जाएगी.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोह्रान ममदानी द्वारा जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद को लिखे गए नोट पर कड़ी आपत्ति जताई है. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में “हस्तक्षेप” करार दिया और कहा कि भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.
ममदानी ने खालिद के नाम एक हस्तलिखित नोट में लिखा था, “हम सब आपके बारे में सोच रहे हैं.” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाटिया ने कहा, “यह बाहरी व्यक्ति कौन होता है जो हमारे लोकतंत्र और न्यायपालिका पर सवाल उठाए? और वह भी उस व्यक्ति के समर्थन में जो भारत को तोड़ना चाहता है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीयों को अपनी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में यूएपीए (UAPA) के तहत जेल में हैं.
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ममदानी के पत्र को एक “वैचारिक पैटर्न” से जोड़ा. उन्होंने कहा कि मेयर बनने के तुरंत बाद अल-कायदा से जुड़े मामले के वकील को नियुक्त करना और फिर उमर खालिद का समर्थन करना “संयोग नहीं” है.
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस विवाद को राहुल गांधी से जोड़ते हुए कहा, “जब भी विदेशों में भारत विरोधी नेरेटिव चलाया जाता है, तो एक नाम पृष्ठभूमि में बार-बार आता है: राहुल गांधी. जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं, वे अनिवार्य रूप से उनके आसपास इकट्ठा होते हैं.” वहीं, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमेरिकी सांसदों पर “अपराधियों” के पक्ष में बोलने और हिंदुओं पर हमलों पर चुप रहने का आरोप लगाया.
विपक्षी नेताओं के लिए, यह नोट लंबी कैद और जमानत पर चर्चा का विषय बन गया. समाजवादी पार्टी के अबू आज़मी ने पूछा कि गंभीर आरोप न होने के बावजूद खालिद को जमानत क्यों नहीं मिल रही. कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कहा कि उमर खालिद आतंकवादी नहीं है और ममदानी के संदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए.
इंदौर: 10 साल की मन्नतों के बाद जन्मे बच्चे की दूषित पानी से मौत; परिवार ने ठुकराया मुआवजा
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से एक 6 महीने के बच्चे, अव्यान साहू, की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, अव्यान का जन्म 10 साल की प्रार्थनाओं और मन्नतों के बाद हुआ था. परिवार का आरोप है कि मां का दूध कम होने के कारण बच्चे को नल के पानी में मिलाकर पैकेट वाला दूध दिया गया था, जो जानलेवा साबित हुआ.
बच्चे की दादी कृष्णा साहू ने सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये के मुआवजे को ठुकराते हुए कहा, “हमने अब तक सरकार से कोई मुआवजा नहीं लिया है. हमारा बच्चा चला गया, क्या मुआवजा उसे वापस ला सकता है? पैसा बच्चे से बड़ा नहीं है.” स्थानीय निवासियों का दावा है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने केवल चार मौतों की पुष्टि की है. पिछले नौ दिनों में 1,400 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं.
दो माह पहले से थीं तेजाब, गंदे पानी, भयानक दुर्गंध की शिकायतें, पर अनसुनी कर दी गईं
इंदौर जल त्रासदी का पहला संकेत दो महीने पहले ही मिल गया था, जब शहर महापौर के हेल्पलाइन नंबर पर एक नियमित शिकायत दर्ज की गई थी. 15 अक्टूबर को, दिनेश भारती वर्मा ने इंदौर के वार्ड 11 के एक भीड़भाड़ वाले इलाके भागीरथपुरा में एक स्थानीय मंदिर के पास कुएं के पानी में कुछ गड़बड़ी देखी. उनकी शिकायत में चेतावनी दी गई थी: “बोरवेल का पानी नाले के पानी के साथ मिल रहा है... मंदिर और आश्रम में आने वाले लोगों के लिए स्वच्छ पानी आवश्यक है.”
“द इंडियन एक्सप्रेस” में आनंद मोहन जे. के अनुसार, नवंबर के मध्य तक समस्या और गंभीर हो गई. एक अन्य निवासी, शिवानी ठाकरे ने एक अधिक गंभीर शिकायत दर्ज कराई: “गंदे पानी में एसिड (तेजाब) आ रहा है.” जैसे-जैसे दिसंबर बीता, शिकायतें हताशा में बदल गईं. 18 तारीख को, निवासियों ने नर्मदा जल आपूर्ति में “भयानक दुर्गंध” की सूचना दी. 28 दिसंबर तक, गणेश पाराशर और यश परेवा ने सूचित किया कि “वार्ड 11 के 90 प्रतिशत लोग बीमार पड़ रहे हैं — गंभीर उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) की समस्या हो रही है.”
29 दिसंबर को, पहली मौतों की खबर आने के बाद, प्रशासन आखिरकार जागा. ऋतिक प्रजापत ने कहा, “हमारी चाची, निर्मला प्रजापत और मेरे पिता, इंदर प्रजापत की हालत गंभीर है. अगर उन्हें कुछ हुआ, तो मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूंगा.”
पीने के पानी में सीवेज मिलने के कारण भागीरथपुरा में कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं. मध्यप्रदेश के अधिकारी अब नुकसान को नियंत्रित करने में जुटे हैं. प्रथम दृष्टया, इसका कारण पेयजल पाइपलाइन के ऊपर बना एक शौचालय प्रतीत होता है, जिसके नीचे कोई सुरक्षा टैंक (सेप्टिक टैंक) नहीं था. आधिकारिक तौर पर, प्रशासन ने अब तक दूषित पानी से चार मौतों और 212 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि की है.
लेकिन भागीरथपुरा में जो हुआ वह कोई अप्रत्याशित आपदा नहीं थी. नगर निगम के रिकॉर्ड, हेल्पलाइन डेटा और निवासियों व अधिकारियों के बयान बताते हैं कि कैसे अनदेखी की गई चेतावनियों और अटकी हुई नौकरशाही प्रक्रियाओं ने इस घटना को अंजाम दिया.
वर्ष 2025 में, इंदौर शहर भर से पानी की गुणवत्ता से संबंधित 266 शिकायतें प्राप्त हुईं. जोन 4, जिसमें भागीरथपुरा शामिल है, वहां 23 औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं. इंदौर मेयर हेल्पलाइन के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले एक साल में जल संदूषण (पानी के दूषित होने) के 16 मामले सहायक इंजीनियर योगेश जोशी को सौंपे गए थे. उन 16 मामलों में से केवल पांच का समाधान किया गया, जबकि सात मामलों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के ‘पूर्ण’ बताकर बंद कर दिया गया.
इसके अलावा, इंदौर नगर निगम के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस बीमारी के फैलने से एक साल से भी पहले नई नर्मदा जल पाइपलाइन बिछाने के लिए एक फाइल तैयार की गई थी. निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मौके पर निरीक्षण करने और पाइपलाइनों की मरम्मत की आवश्यकता पाए जाने के बाद टेंडर जारी किया गया था. यह फाइल 12 नवंबर, 2024 को तैयार की गई थी और टेंडर 30 जुलाई, 2025 को निकाला गया था. परियोजना के अंतिम चरण को पूरा करने का ‘वर्क ऑर्डर’ 26 दिसंबर, 2025 को पारित किया गया—ठीक उसी समय जब मौतों की खबरें सामने आने लगी थीं.
पार्षद कमल वाघेला, जिनके अधिकार क्षेत्र में भागीरथपुरा आता है, ने पुष्टि की कि नई नर्मदा पाइपलाइन बिछाने की मांग पिछले साल उठाई गई थी, जिसके बाद फाइल तैयार हुई थी. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि फाइल को “अनावश्यक रूप से लगभग सात महीनों तक लंबित रखा गया.”
31 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में वाघेला ने आरोप लगाया कि बार-बार फॉलो-अप के बावजूद, अधिकारी यही जवाब देते रहे कि मामला “प्रक्रियाधीन” है. जब उन्होंने महापौर से संपर्क किया, तब जाकर अंततः “अत्यधिक देरी के बाद” 30 जुलाई, 2025 को टेंडर जारी किया गया, लेकिन उसके बाद भी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई.
वाघेला ने लिखा, “यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि गंभीर आपराधिक लापरवाही का परिणाम है, जिसने जानबूझकर सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डाला. प्रथम दृष्टया, यह मामला कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, आदेशों की अवमानना और सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों के उल्लंघन के अंतर्गत आता है.”
जब इस संबंध में जोन 4 के जिम्मेदार सहायक अभियंता योगेश जोशी (जिन्हें जल संदूषण की शिकायतों का समाधान न करने के लिए निलंबित कर दिया गया है) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैं तीन जोन संभालता हूं, जिसे अकेले संभालना असंभव है. स्थानीय कर्मचारियों ने मुझे इस स्थिति के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था. वास्तव में, मुख्यालय को पता था कि इस क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन कम से कम एक साल पहले ही क्षतिग्रस्त हो गई थी. हालांकि मरम्मत के लिए टेंडर निकाला गया था, लेकिन वर्क ऑर्डर केवल दो या तीन दिन पहले जारी किया गया.”
क्षेत्र के जल कार्य प्रभारी बबलू पार्षद ने भागीरथपुरा को बुनियादी ढांचे के लिहाज से एक ‘दुःस्वप्न’ बताया: शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक, जहां सड़कें केवल 10 से 12 फीट चौड़ी हैं और नेटवर्क पुराना व अनियोजित है. उन्होंने कहा कि जब तीन साल पहले उन्होंने वहां काम शुरू किया था, तब “सीवेज और जल प्रणाली पहले ही ध्वस्त हो चुकी थी.”
उन्होंने दावा किया कि वे क्षेत्र की लगभग 60 प्रतिशत पानी की पाइपलाइनों को ठीक करने में सफल रहे. “आठ महीने पहले, महापौर ने क्षेत्र का दौरा किया था और खुद खराब स्थिति देखी थी. शेष मुद्दों को हल करने के लिए एक टेंडर डाला गया था, लेकिन अधिकारी आगे बढ़ने में विफल रहे. महापौर और मैं इसे आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे.” पार्षद ने कहा कि पाइपलाइन बदलने की आवश्यकता के बारे में बार-बार चेतावनी दी गई थी. “कई मौकों पर हमने रिपोर्ट दी कि एक नई लाइन आवश्यक है और यह भी बताया कि इसके लिए नए बजट की भी आवश्यकता नहीं है. इसके बावजूद, लाइनें कभी नहीं बदली गईं.”
पानी नहीं जहर बंट रहा था : राहुल गांधी
इस बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “इंदौर में पानी नहीं—ज़हर बँट रहा था और प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोता रहा. घर-घर मातम पसरा है, गरीब लाचार है—और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान. जिनके चूल्हे बुझ गए, उन्हें सांत्वना की ज़रूरत थी; सरकार ने इसके बदले अहंकार परोसा.”
राहुल ने कहा कि निवासियों ने बार-बार गंदे और दुर्गंधयुक्त पानी की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने में विफल रहा. उन्होंने सवाल उठाया कि पीने के पानी में सीवेज कैसे मिलने दिया गया, समय रहते आपूर्ति क्यों नहीं रोकी गई और जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी तक पहुंच जीवन का अधिकार है. लेकिन इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा की डबल इंजन सरकार, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है. उन्होंने इंदौर की घटना को मध्यप्रदेश के अन्य मामलों से जोड़ते हुए राज्य को ‘कुशासन का केंद्र’ बताया. उन्होंने कफ सिरप से जुड़ी मौतों और सरकारी अस्पतालों में चूहों द्वारा बच्चों को मारे जाने की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि “हर बार गरीब मरता है और मोदी जी हमेशा की तरह चुप रहते हैं.”
हाईकोर्ट को बताया 4 मरे, महापौर ने कहा, 10 मौतें हुई हैं, मीडिया ने 15 मृतकों के नाम-फोटो दिए
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उनके पास भागीरथपुरा में डायरिया के प्रकोप से 10 मौतों की सूचना है. लेकिन भार्गव ने ‘पीटीआई’ को बताया, “स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चार लोगों की मौत हुई है. हालांकि, मुझे इस प्रकोप के कारण 10 मौतों की जानकारी मिली है.” इधर, दैनिक भास्कर में खबर है कि कुल 15 लोगों की जान गई है, जिनमें 6 माह का मासूम अव्यान साहू भी है, जिसके माता-पिता दस साल से एक बेटे के लिए प्रार्थना कर रहे थे. छह माह पहले ही सुनील साहू के घर में खुशियां आई थीं. मगर प्रशासन ने मार डाला. यह भी खबर है कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी है.
लैब की रिपोर्ट: पानी दूषित था
इधर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने कहा कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि पाइपलाइन में रिसाव के कारण क्षेत्र का पीने का पानी दूषित था.
‘इंसानी जान की कीमत 2 लाख नहीं’: उमा भारती
मध्य प्रदेश के “सबसे स्वच्छ शहर” इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ही वरिष्ठ और तेजतर्रार नेता उमा भारती ने अपनी पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार और जिला प्रशासन को इस त्रासदी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.
उमा भारती ने लिखा, “2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों ने हमारे राज्य, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित किया है. एक शहर जिसे सबसे स्वच्छ होने का पुरस्कार मिला हो, वहां ऐसी कुरूपता—जहर मिला पानी इतनी जिंदगियां निगल रहा है और यह सिलसिला जारी है—यह एक कलंक है. मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.”
सरकार द्वारा मुआवजे पर फोकस किए जाने की आलोचना करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इंसानी जान की कीमत 2 लाख रुपये नहीं है. परिवार हमेशा के लिए गम में जिएंगे. इस पाप के लिए गहरे पश्चाताप की जरूरत है. पीड़ितों से माफी मांगी जानी चाहिए और नीचे से ऊपर तक, जो भी दोषी है, उसे अधिकतम सजा दी जानी चाहिए.”उन्होंने लिखा, “यह मोहन यादव जी के लिए अग्निपरीक्षा का क्षण है.” एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने अधिकारियों के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर थी. उमा भारती ने तीखे सवाल करते हुए कहा, “सिर्फ इंदौर के मेयर ही नहीं, बल्कि पूरी मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन जनता के अपराध के कटघरे में खड़े हैं. अगर आपका नियंत्रण नहीं था, तो आपने अपने दफ्तरों में बैठकर सील बंद बोतल का पानी क्यों पिया? आपने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और लोगों के बीच क्यों नहीं गए? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता—केवल पश्चाताप या सजा होती है.”
भीमा कोरेगांव की 208वीं वर्षगांठ: लाखों इकट्ठे हुए ‘जय स्तंभ’ पर श्रद्धांजलि देने
गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र में ऐतिहासिक भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 208वीं वर्षगांठ मनाने के लिए लाखों अनुयायी ‘जयस्तंभ’ (विजय स्तंभ) पर एकत्रित हुए. हर साल की तरह, महाराष्ट्र और देश के विभिन्न हिस्सों से अम्बेडकरवादी अनुयायी इस स्थल पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे. पुणे-अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) राजमार्ग पर पेड़ने गांव में स्थित यह जयस्तंभ 1821 में ब्रिटिश शासन के दौरान उन महार (दलित) सैनिकों की याद में बनाया गया था, जिन्होंने 1818 में कोरेगांव भीमा में पेशवाओं के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी.
वायर में अतुल होवाले के मुताबिक सुबह से ही स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की लंबी कतारें लग गईं. नीले कपड़ों में सजे लोगों का हुजूम वाघोली रोड से भीमा कोरेगांव तक लगभग पांच किलोमीटर तक फैला हुआ था. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के अनुयायियों के लिए 1 जनवरी का दिन ‘शौर्य दिवस’ (बहादुरी का दिन) के रूप में मनाया जाता है.
तमिलनाडु से पहली बार इस सभा में शामिल होने आए छात्र मणिकंदन वी.ई. ने कहा, “मैंने तमिलनाडु में कई राजनीतिक सभाओं में भाग लिया है, लेकिन यह मेरे जीवन में देखी गई लोगों की सबसे बड़ी सभा है... मैंने देखा कि न केवल दलित समुदाय बल्कि अन्य हाशिए के समूहों के लोग भी बड़ी संख्या में आए थे.” उन्होंने इस स्मारक की तुलना प्राचीन तमिल साहित्य में वर्णित ‘हीरो वॉरशिप’ (वीर पूजा) से की.
जयस्तंभ के आसपास डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (BARTI), पुणे द्वारा 100 से अधिक बुक स्टॉल लगाए गए थे, जहां भारतीय संविधान और अन्य दलित व अम्बेडकरवादी साहित्य प्रदर्शित किया गया. युवाओं की भारी भीड़ यहां से किताबें खरीदती नजर आई. परभणी से आए रोहन वाघमारे ने कहा, “मैं पिछले चार साल से हर साल यहां आ रहा हूं. इस बार किताबें खरीदने वाले लोगों की भीड़ पहले से कहीं ज्यादा है.”
उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 2018 को, लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ पर, यहां हिंसा भड़क उठी थी, जिसके बाद एल्गार परिषद मामले में कई लेखकों, शिक्षाविदों और वकीलों को माओवादी लिंक के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 1 जनवरी 1927 को जयस्तंभ का दौरा किया था और 2027 में उस ऐतिहासिक यात्रा के 100 साल पूरे होंगे.
नए वेज कोड ड्राफ्ट में सरकार को काम के घंटे तय करने की खुली छूट, 12 घंटे की शिफ्ट और शोषण
वेतन संहिता के नए मसौदा नियमों ने श्रम अर्थशास्त्रियों, यूनियनों और कामगारों के प्रतिनिधियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है. केंद्र सरकार द्वारा जारी नए नियमों में सरकारों को सामान्य दैनिक काम के घंटे तय करने की अनुमति दी गई है, जबकि वर्तमान में यह सीमा आठ घंटे तय है. आलोचकों को डर है कि “ओपन एंडेड” (अस्पष्ट) कार्य दिवस के नियमों का फायदा उठाकर निजी नियोक्ता श्रमिकों का शोषण कर सकते हैं. टेलीग्राफ में बसंत मोहंती ने इस पर विस्तार से लिखा है.
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को 2019 में पारित सभी चार श्रम संहिताओं के लिए नए मसौदा नियम प्रकाशित किए और उस पर प्रतिक्रिया मांगी है. पुराने मसौदे (2020) और मौजूदा न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की तरह इसमें 9 घंटे के दिन (जिसमें एक घंटे का ब्रेक शामिल है) का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. नए मसौदे में कहा गया है कि सामान्य कार्य दिवस के घंटे समय-समय पर जारी आदेशों द्वारा तय किए जाएंगे.
चूंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें दोनों अपने नियम बना सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान सरकारों को दिन में 10 से 12 घंटे काम करने की अधिसूचना जारी करने की अनुमति दे सकता है. यह गिग और प्लेटफॉर्म इकोनॉमी के बढ़ते कार्यबल को शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील बना देगा.
श्रम अर्थशास्त्री श्याम सुंदर ने कहा कि मंत्रालय को आठ घंटे के कार्य दिवस का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए था, जो अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और वैश्विक मानकों के अनुरूप है. उन्होंने चेतावनी दी कि साप्ताहिक काम के घंटों को 48 घंटे रखने के बावजूद, दैनिक घंटों पर स्पष्टता की कमी का फायदा उठाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, मजदूरों से हफ्ते में चार दिन 12-12 घंटे काम कराया जा सकता है और उन्हें बाकी दिनों के लिए हटाकर नए मजदूरों को रखा जा सकता है, जिससे उन्हें ओवरटाइम नहीं देना पड़ेगा.
गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन के निर्मल गोराना ने कहा कि गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय) पहले से ही शोषित हैं. अगर सरकार कंपनियों को 12 घंटे काम कराने की अनुमति देती है, तो इससे उनकी सेहत और मनोबल पर बुरा असर पड़ेगा. विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि महामारी के दौरान कई राज्यों ने काम के घंटे बढ़ाए थे, और अब यह नियम बिना किसी आपातकाल के सामान्य हो सकता है.
शराब के नशे में ड्यूटी पर आने वाले पायलट की जांच करे एअर इंडिया: कनाडाई परिवहन नियामक
कनाडा के परिवहन नियामक (ट्रांसपोर्ट कनाडा) ने एअर इंडिया को अपने एक पायलट के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है, जो कथित तौर पर शराब के नशे में ड्यूटी पर पहुंचा था और दो बार किए गए ब्रीथलाइजर टेस्ट में फेल हो गया था. एक सूत्र के अनुसार, यह घटना वैंकूवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई, जहां कनाडाई पुलिस ने पायलट का परीक्षण किया था. पायलट को विमान से नीचे उतार दिया गया था.
ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एअर इंडिया को लिखे एक पत्र में इस घटना को “गंभीर मामला” बताया है और एयरलाइन से 26 जनवरी तक अपनी जांच के निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है. एअर इंडिया ने एक बयान में पुष्टि की है कि 23 दिसंबर को वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली उड़ान में आखिरी समय में देरी हुई थी क्योंकि इस घटना के कारण एक वैकल्पिक पायलट का इंतजाम करना पड़ा था.
एयरलाइन ने कहा, “पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान पायलट को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है. एअर इंडिया नियमों के किसी भी उल्लंघन के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति रखती है.” एयरलाइन ने आश्वासन दिया कि जांच के परिणाम आने पर किसी भी पुष्टि किए गए उल्लंघन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारतीय विमानन नियामक (डीजीसीए) सुरक्षा खामियों को लेकर एअर इंडिया और उसके पायलटों की कड़ी निगरानी कर रहा है.
जनसंख्या ‘विस्फोट’ से कम प्रजनन दर तक: महिलाओं के शरीर पर खेली जा रही भारत की जनसांख्यिकीय चिंताएं
भारत की प्रजनन दर पहली बार गिरकर 1.9 पर आ गई है, जो जनसंख्या को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक बनाए रखने के लिए आवश्यक ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ (2.1) से नीचे है. यह डेटा इस व्यापक धारणा को चुनौती देता है कि भारत ‘ओवरपॉपुलेटेड’ है. इसके विपरीत, ये आंकड़े बताते हैं कि देश जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर बढ़ रहा है और भविष्य में जनसंख्या घटने भी लग सकती है. लेकिन गिरती प्रजनन दर ने अब एक नई चिंता को जन्म दिया है—”बहुत कम जन्म” की चिंता. विडंबना यह है कि पहले जहां बहस “बहुत अधिक लोग” पर थी, अब वह “बहुत कम जन्म” पर केंद्रित हो गई है.
स्क्रोल में सरोजिनी नादिमपल्ली अपने लेख में तर्क देती हैं कि इन बहसों के बीच, महिलाओं के शरीर को हमेशा जनसांख्यिकीय लक्ष्यों को पूरा करने का एक साधन माना जाता है, न कि उन्हें व्यक्तिगत स्वतंत्रता वाले इंसान के रूप में देखा जाता है. राजनेता और धार्मिक नेता अब जोड़ों को अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं. इसके पीछे कभी सांस्कृतिक या देशभक्ति के कारण गिनाए जाते हैं, तो कभी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का डर.
लेख में बताया गया है कि कैसे औपनिवेशिक काल से लेकर आपातकाल की नसबंदी और आज के दौर तक, प्रजनन को नियंत्रित करने का बोझ हमेशा महिलाओं पर डाला गया है. दक्षिण भारतीय राज्यों को डर है कि कम जनसंख्या के कारण 2026 के परिसीमन के बाद उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, इसलिए वहां के नेता (जैसे एम.के. स्टालिन और चंद्रबाबू नायडू) अधिक बच्चे पैदा करने पर प्रोत्साहन दे रहे हैं.
लेखिका का कहना है कि प्रजनन संबंधी निर्णय महिलाओं की स्वायत्तता का मामला होना चाहिए, न कि सरकारी या सामाजिक दबाव का. भारत के प्रजनन बहस को जनसंख्या लक्ष्यों से हटाकर “प्रजनन न्याय” के ढांचे पर केंद्रित करने की आवश्यकता है, जहां हर व्यक्ति को बिना किसी दबाव, प्रलोभन या नैतिक दबाव के बच्चे पैदा करने या न करने का अधिकार हो.
बुलडोजर राज’ का काला सच
जिसका घर यूपी सरकार ने तोड़ा, उसने 53 ‘दंडात्मक’ डिमोलिशन को ट्रैक किया;
इलाहाबाद (प्रयागराज) में जावेद मोहम्मद और उनकी बेटी आफरीन फातिमा का घर जून 2020 में यूपी सरकार द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था. सरकार ने जावेद मोहम्मद पर दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया था और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के, आनन-फानन में उनका घर मलबे में तब्दील कर दिया. इस घटना के बाद, आफरीन फातिमा ने खुद को शोध कार्य में लगाया और 2019 से 2024 के बीच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में हुए 53 “एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल” (न्यायेतर) और दंडात्मक ध्वस्तीकरणों का दस्तावेजीकरण किया.
आर्टिकल-14 में बेतवा शर्मा को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में आफरीन ने बताया कि इन सभी मामलों में एक ही पैटर्न है—हिंसा या दंगों के बाद आरोपी के परिवार और समुदाय को सामूहिक सजा देने के लिए, नोटिस के बिना या बहुत कम समय देकर घर तोड़ दिए जाते हैं. उन्होंने पाया कि अधिकांश ध्वस्त घर मुसलमानों के थे, जो अक्सर सबसे गरीब या सबसे मुखर थे. आफरीन की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा ध्वस्तीकरण हरियाणा (1,208 घर) और मध्य प्रदेश (112 घर) में हुए, जबकि घटनाओं की संख्या यूपी में सबसे ज्यादा थी.
आफरीन ने अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए कहा कि उनके पिता 21 महीने जेल में रहे और बाद में सभी मामलों में जमानत पर रिहा हुए, लेकिन घर टूटने का सदमा अभी भी ताज़ातरीन है. “मैं मलबे के बिना अपने घर को याद नहीं कर पाती,” उन्होंने कहा. उनकी मां की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिछले तीन सालों से लंबित है और 60 बार सूचीबद्ध होने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई है. आफरीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद, अधिकारी राजनीतिक संदेश देने के लिए ध्वस्तीकरण जारी रखे हुए हैं और कोर्ट इसके पीछे के “राजनीतिक तर्क” पर सवाल नहीं उठा रहा है.
हिमंता ने कहा, हर साल हम 50,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेज सकते हैं
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किए जाने के एक सप्ताह के भीतर असम सरकार बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों को बांग्लादेश “वापस भेज” देगी. उन्होंने आगे कहा कि पिछले तीन महीनों में असम सरकार ने 2,000 व्यक्तियों को जबरन बांग्लादेश भेजा है.
“मकतूब मीडिया” के मुताबिक, सरमा ने कहा कि राज्य सरकार को इसके लिए नई दिल्ली और ढाका के बीच किसी प्रत्यार्पण संधि की “आवश्यकता नहीं” है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई नीति के साथ, इस मामले में भारत और बांग्लादेश के बीच संधि की आवश्यकता को “दरकिनार” कर दिया गया है. सरमा ने कहा कि इसके माध्यम से, यदि पहचान हो जाती है, तो राज्य एक वर्ष में 10,000 से 50,000 बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों को निकालने में सक्षम होगा.
उन्होंने बताया कि ‘असम से प्रवासियों का निष्कासन अधिनियम 1950’ को पुनर्जीवित करने के बाद इसे एक नीति के रूप में अपनाया गया है. यह अधिनियम जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया से गुजरे बिना “अवैध प्रवासियों” को राज्य से निकालने की शक्ति देता है. सितंबर में असम कैबिनेट ने इस अधिनियम के तहत एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने को मंजूरी दी थी. इससे पहले, बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों से संबंधित मामले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा संभाले जाते थे.
क्रिकेट हेलमेट पर फिलिस्तीनी झंडा लगाने पर कश्मीरी क्रिकेटर के खिलाफ जांच शुरू
जम्मू में गुरुवार को एक निजी क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान एक कश्मीरी क्रिकेटर ने अपने हेलमेट पर फिलिस्तीनी झंडा लगाया, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(3) के तहत 14 दिनों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है.
“मकतूब मीडिया” की खबर के अनुसार, अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है. वीडियो में खिलाड़ी मुट्ठी स्थित ‘केसी डोर’ मैदान में खेलते समय अपने हेलमेट पर फिलिस्तीन का लोगो प्रदर्शित करते हुए दिखाई दे रहा है.
खिलाड़ी की पहचान पुलवामा जिले के तांगीपुना निवासी फुरकान बट के रूप में हुई है. वह जम्मू जिले में चल रही ‘जम्मू-कश्मीर चैंपियंस लीग’ के दौरान ‘जम्मू ट्रेलब्लेजर्स’ के खिलाफ स्थानीय टीम ‘जेके11’ के लिए खेल रहे थे. ऑनलाइन विरोध के बाद जम्मू पुलिस ने फुरकान भट और आयोजक जाहिद बट को तलब किया.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भारत के खिलाफ सीरीज़ की घोषणा की, भारत की पुष्टि बाकी
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने शुक्रवार को घोषणा की है कि वह इस साल सितंबर में तीन वनडे और तीन टी20 मैचों की सीमित ओवरों की श्रृंखला के लिए भारत की मेजबानी करेगा.
“पीटीआई” के मुताबिक, बांग्लादेश ने मैचों का कार्यक्रम तय कर दिया है, लेकिन इस बात पर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बीच इस दौरे के लिए सहमत होगा, जहां वर्तमान में कोई स्थिर सरकार नहीं है.
बहरहाल, यह घोषणा भारत के बांग्लादेश के निर्धारित दौरे के स्थगित होने के लगभग एक साल बाद हुई है. पिछले साल जुलाई में, छह मैचों की सफेद गेंद श्रृंखला को शेड्यूलिंग समस्याओं का हवाला देते हुए अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दिया गया था.
मुस्तफ़िज़ूर पर विवाद: भाजपा सांसद ने शाहरुख खान को ‘गद्दार’ कहा, कांग्रेस ने जय शाह की भूमिका पर उठाए सवाल
शाहरुख खान की कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफ़िज़ूर रहमान को आईपीएल के लिए खरीदने का विवाद बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने आईपीएल नीलामी पूल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को शामिल करने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं और केकेआर (कोलकाता नाइट राइडर्स) द्वारा मुस्तफ़िज़ूर रहमान को चुनने से जुड़े विवाद के लिए आईसीसी प्रमुख जय शाह को जिम्मेदार ठहराया है.
“द टेलीग्राफ” के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह पर सीधा निशाना साधते हुए श्रीनेत ने कहा, “गृह मंत्री के बेटे जय शाह को जवाब देना चाहिए कि आईपीएल खिलाड़ियों की खरीद-फरोख्त वाले पूल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को किसने रखा? वह पूरी दुनिया में क्रिकेट के मुख्य निर्णयकर्ता हैं.” दिलचस्प यह है कि बीसीसीआई ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है.
कांग्रेस विधायक प्रियांक खरगे ने भी भाजपा पर जनता के गुस्से को गलत दिशा में मोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने पूछा, “फ्रेंचाइजी को दोष देने के बजाय, क्या भाजपा नेताओं को यह नहीं पूछना चाहिए कि बीसीसीआई बांग्लादेशी खिलाड़ियों को आईपीएल में भाग लेने की अनुमति क्यों दे रहा है, जबकि उन्हें इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए?” प्रियांक ने भाजपा के ‘चयनात्मक आक्रोश’ पर भी तंज कसा और याद दिलाया कि पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ मैच खेला था, कोविड के दौरान आईपीएल मैच इस्लामिक देशों में स्थानांतरित किए गए थे और आईपीएल की नीलामी विदेश में आयोजित की गई थी.
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने केकेआर के मालिक शाहरुख खान को चेतावनी दी. निरुपम ने कहा, “अगर शाहरुख खान की टीम में कोई बांग्लादेशी है, तो इससे पहले कि वह बड़ा निशाना बनें, हम उनसे अपनी टीम से बांग्लादेशी खिलाड़ी को हटाने का अनुरोध करते हैं. यह उनके अपने भले के लिए होगा और भारत के हितों की भी रक्षा करेगा.”
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने पैसे के लालच में लिए गए क्रिकेट निर्णयों की नैतिक निरंतरता पर सवाल उठाए. पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “वे आए और धर्म के नाम पर निर्दोष पर्यटकों को मार डाला. फिर भी भारत ने पैसे के लिए पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेला. मैं उस पैसे को ठुकराता हूँ जो मेरे देश के गौरव और सम्मान पर सवाल खड़ा करता है.”
इस बीच भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान पर दबाव बढ़ाते हुए इस मुद्दे को वफादारी की परीक्षा करार दिया. उन्होंने कहा, “अब शाहरुख खान को यह तय करना होगा कि वह राष्ट्रविरोधी ताकतों के साथ खड़े होंगे या भारत के लोगों के साथ.”
भाजपा नेता संगीत सोम ने शाहरुख खान को “गद्दार” तक कह दिया. सोम ने आरोप लगाया, “उनके पास जो कुछ भी है वह भारत और भारत के लोगों का दिया हुआ है. फिर भी वह उस देश के खिलाड़ियों पर निवेश करते हैं जो भारत के खिलाफ काम कर रहा है.” उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न की खबरों का हवाला देते हुए कहा, “किसी भी कीमत पर वे मुस्तफ़िज़ूर रहमान को यहाँ नहीं खिला पाएंगे. रहमान हवाई अड्डे से बाहर कदम भी नहीं रख पाएंगे.”
यह विवाद कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा मुस्तफ़िज़ूर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदने के फैसले से शुरू हुआ, जिससे वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे बांग्लादेशी खिलाड़ी बन गए.
चीनी बीवाईडी ने मस्क की टेस्ला को पछाड़ा, बनी दुनिया की सबसे बड़ी ईवी विक्रेता
वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है. चीन की दिग्गज कंपनी बीवाईडी (BYD) ने एलन मस्क की टेस्ला को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन विक्रेता होने का खिताब हासिल कर लिया है. यह पहली बार है जब किसी चीनी कंपनी ने वार्षिक बिक्री के मामले में अपनी अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी को मात दी है.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ला ने शुक्रवार को आंकड़े जारी करते हुए बताया कि साल 2025 में उसकी कारों की बिक्री में लगभग 9% की गिरावट आई है और यह आंकड़ा 1.64 मिलियन वाहनों तक सिमट गया है. यह लगातार दूसरा साल है जब टेस्ला की कार डिलीवरी में गिरावट दर्ज की गई है. इसके ठीक विपरीत, बीवाईडी ने गुरुवार को बताया कि पिछले साल उसकी बैटरी से चलने वाली कारों की बिक्री में लगभग 28% का उछाल आया और यह 2.25 मिलियन से अधिक हो गई. ये आंकड़े बताते हैं कि ईवी बाजार का गुरुत्वाकर्षण केंद्र अब अमेरिका से हटकर चीन की ओर जा रहा है. अमेरिकी कंपनी टेस्ला के लिए पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा. उसे अपने नए मॉडलों के लिए मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, एलन मस्क की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर ग्राहकों में बेचैनी रही और चीनी प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के आखिरी तीन महीनों में टेस्ला की बिक्री में 16% की गिरावट आई. इसका एक बड़ा कारण सरकारी सब्सिडी का समाप्त होना भी था, जो पहले कुछ इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की कीमत पर 7,500 डॉलर (लगभग 6.2 लाख रुपये) तक की छूट देती थी.
चीन की गीली (Geely), एमजी (MG) और अब देश की सबसे बड़ी ईवी कंपनी बीवाईडी ने पश्चिमी ब्रांडों की तुलना में अपनी गाड़ियों की कीमतें काफी कम रखकर बाजार पर दबाव बना दिया है. बीवाईडी की यह सफलता तब मिली है जब कई देशों ने चीनी ईवी पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगा रखे हैं. इसके बावजूद, लैटिन अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में कंपनी का विस्तार तेजी से हुआ है. अक्टूबर में बीवाईडी ने बताया था कि ब्रिटेन चीन के बाहर उसका सबसे बड़ा बाजार बन गया है, जहां उसकी बिक्री में 880% की भारी वृद्धि हुई है.
टेस्ला ने इस प्रतिस्पर्धा का जवाब देने के लिए अक्टूबर में अमेरिका में अपने दो सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों के सस्ते संस्करण लॉन्च किए थे. दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क के सामने अब दोहरी चुनौती है. शेयरधारकों द्वारा नवंबर में मंजूर किए गए रिकॉर्ड-तोड़ पे-पैकेज (जो 1 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता है) को सुरक्षित करने के लिए उन्हें अगले एक दशक में टेस्ला की बिक्री और शेयर बाजार मूल्य को काफी बढ़ाना होगा. इस समझौते के तहत मस्क को अगले दस सालों में 10 लाख ह्यूमनॉइड रोबोट (Humanoid Robots) भी बेचने होंगे.
विश्लेषकों का मानना है कि मस्क का ध्यान टेस्ला से हटकर अन्य चीजों पर ज्यादा रहा है. 2025 की शुरुआत में टेस्ला की बिक्री में तब गिरावट आई थी जब मस्क की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन में भूमिका को लेकर आलोचना हुई थी. मस्क के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X), स्पेसएक्स (SpaceX) और बोरिंग कंपनी की भी जिम्मेदारी है. इसके अलावा, वे ट्रम्प के ‘डिार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ (DOGE) का भी संचालन कर रहे थे, जिससे निवेशकों को लगा कि वे टेस्ला पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं. हालांकि, मस्क ने अब अमेरिकी सरकार में अपनी भूमिका को “काफी कम” करने का वादा किया है.
हार्ट अटैक का ‘छुपा हुआ दुश्मन’: धमनियों को ब्लॉक करने वाले जेनेटिक कण को कम करने वाली दवा का इंतजार खत्म होने को
हृदय रोग विशेषज्ञ ऐसे ‘वसायुक्त कण’ के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं, जो कोलेस्ट्रॉल की तरह ही धमनियों को अवरुद्ध कर सकता है, लेकिन अक्सर इसका पता नहीं चलता. इसे लिपोप्रोटीन(ए) या Lp(a) कहा जाता है. यह ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ की तरह ही खतरनाक है, लेकिन यह मुख्य रूप से जेनेटिक (आनुवंशिक) होता है, जिसका मतलब है कि स्वस्थ जीवनशैली, डाइट या कसरत से इसका स्तर कम नहीं होता.
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पांच प्रायोगिक दवाएं विकास के अंतिम चरण में हैं. इनका उद्देश्य यह साबित करना है कि Lp(a) के स्तर को कम करने से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा कम होता है. सबसे उन्नत क्लिनिकल परीक्षण के परिणाम 2026 की पहली छमाही में आने की उम्मीद है. अब तक इस विकार के लिए कोई स्वीकृत दवा नहीं थी, इसलिए डॉक्टर अक्सर इसका टेस्ट भी नहीं करवाते थे. यह समस्या कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा क्लीवलैंड क्लिनिक के कार्डियोलॉजिस्ट स्टीव निसेन के बयान से लगाया जा सकता है. वे कहते हैं, “हमारी दुनिया में एक अरब से अधिक लोग हैं जिनका लिपोप्रोटीन स्तर बढ़ा हुआ है और जो खतरे में हैं. हमारे सामने लोगों को शिक्षित करने का एक बड़ा काम है.” अनुमान है कि दुनिया की लगभग 20% आबादी इस जेनेटिक विकार से प्रभावित है. वर्तमान में, नोवार्टिस द्वारा प्रायोजित एक दवा ‘पेलाकारसेन’ (pelacarsen) पर सबकी निगाहें टिकी हैं. यह दवा लिवर को उस अतिरिक्त प्रोटीन को बनाने से रोकती है जो Lp(a) को खतरनाक बनाता है. शुरुआती परीक्षणों में, इस इंजेक्शन ने Lp(a) के स्तर को 80% तक कम कर दिया था. अब यह देखा जा रहा है कि क्या इससे हृदय रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है. इसके अलावा, एमजेन की दवा ‘ओल्पासिरन’ (Olpasiran) ने तो स्तर को 100% तक कम करने में सफलता दिखाई है. एली लिली भी एक गोली विकसित कर रही है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर गैसेट रेयेस-सोफर कहती हैं, “अगर ये थेरेपी फायदेमंद साबित होती हैं, तो यह इन व्यक्तियों के जीवन को जबरदस्त रूप से प्रभावित करेंगी. आपको चार स्टेंट लगवाने की नौबत नहीं आएगी.”
‘यह हमारा समय है’: कॉर्नेलियस ईडी ने जो ‘प्रूफ’ कविता पढ़ी ममदानी के शपथ ग्रहण में
कविता और राजनीति का एक दुर्लभ संगम न्यूयॉर्क शहर में देखने को मिलने वाला है. नेशनल बुक अवार्ड के फाइनलिस्ट और प्रसिद्ध कवि कॉर्नेलियस ईडी 1 जनवरी को नवनिर्वाचित मेयर ज़ोह्रान ममदानी के शपथ ग्रहण समारोह में अपनी मौलिक कविता पढ़ी. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने इस कविता का शीर्षक “प्रूफ” रखा है. जब ममदानी की टीम ने पहली बार ईडी को ईमेल भेजकर कविता पढ़ने का आग्रह किया, तो ईडी को लगा कि यह कोई ‘फ़िशिंग’ (Phishing) या स्पैम ईमेल है. ईडी कभी ममदानी से मिले नहीं थे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर गर्व से लिखा था कि उन्होंने ममदानी को वोट दिया है. एक प्रगतिशील डेमोक्रेट के रूप में, ईडी ममदानी के मूल्यों से जुड़ाव महसूस करते हैं. ईडी ने एक साक्षात्कार में कहा, “लोग ममदानी और उनकी ऊर्जा में खुद को देख रहे हैं... यह ऊर्जा लोगों को निराश न होने और आगे बढ़ने की अनुमति देती है. मुझे उम्मीद है कि कविता उस तरह के पल को दर्शाएगी.” उन्होंने अपनी कविता को एक “सार्वजनिक कविता” बताया है जो उन न्यू यॉर्क वासियों को समर्पित है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है—वे लोग जिनकी चिंताएं और विचार शहर के नेताओं द्वारा नहीं सुने जाते.
आखिरी बार 2014 में बिल डी ब्लासियो के शपथ ग्रहण में किसी कवि ने कविता पढ़ी थी. ज़ोह्रान ममदानी की वरिष्ठ सलाहकार ज़ारा रहीम ने बताया कि ममदानी और उनकी टीम ईडी की कविताओं में शक्ति, जिम्मेदारी और आम लोगों के आंतरिक जीवन की खोज से प्रभावित थे. ममदानी ने एक बयान में कहा कि ईडी के पास सिर्फ सुंदर कविताएं लिखने का ही नहीं, बल्कि दुनिया के बारे में सच बोलने का “दुर्लभ उपहार” है. ईडी ने अपनी कविता के लिए ममदानी के अक्टूबर में दिए गए एक भाषण “Our Time is Now” (अब हमारा समय है) से प्रेरणा ली. उन्होंने अपनी कविता की कुछ पंक्तियां साझा कीं:
“न्यूयॉर्क, आविष्कार का शहर... जहां आपकी किस्मत आपका इंतजार करती है... जहां आपकी जड़ों के लिए हमेशा मिट्टी है. यह हमारा समय है.”
एलिजाबेथ अलेक्जेंडर, जिन्होंने 2009 में बराक ओबामा के शपथ ग्रहण में कविता पढ़ी थी, ने ईडी के काम की तुलना वॉल्ट व्हिटमैन से की है. उन्होंने कहा कि ममदानी का एक मौलिक कविता का चयन करना बहुत कुछ कहता है, क्योंकि “कवि और कलाकार उस भाषा में बोल सकते हैं जो राजनेताओं की भाषा से अलग होती है.”
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.









