05/02/2026: 15 बार 'मोदी की कब्र' का जिक्र किया खुद मोदी ने | मोदी डरे हुए हैं: श्रवण गर्ग | वेनेजुएला से रिलायंस ने तेल लेना शुरू किया | अमेरिकी डील पर संयुक्त बयान 3-4 दिन में | मणिपुर फिर भभका
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां
आज की सुर्खियां
संसद में पीएम का वार: मोदी ने कहा कि जितने चाहे नारे लगा लो लेकिन उनकी कब्र नहीं खुदेगी.
स्पीकर का दावा: ओम बिरला बोले कि संसद में पीएम मोदी पर हमले की साजिश थी.
मणिपुर में फिर तनाव: कुकी समूहों ने विधायकों की हत्या पर इनाम घोषित किया.
रिलायंस की वेनेजुएला डील: अमेरिकी छूट के बाद 20 लाख बैरल तेल खरीदने का सौदा.
रूस से तेल आयात: ट्रंप के दावे पर भारत सरकार ने कहा ऊर्जा सुरक्षा सबसे ऊपर.
बजरंग दल बनाम मोहम्मद दीपक: ऑल्ट न्यूज़ ने एफआईआर में अज्ञात उपद्रवियों की पहचान उजागर की.
मेघालय हादसा: अवैध कोयला खदान में विस्फोट से 18 लोगों की मौत.
‘जितने चाहे नारे लगा लो, मेरी कब्र कभी नहीं खोद पाओगे’: विपक्ष पर बरसे मोदी; स्पीकर ने किया पीएम पर हमले की साजिश का दावा
संसद के बजट सत्र में गुरुवार को राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला. विपक्ष द्वारा लगाए गए “कब्र खुदेगी” के नारों का करारा जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश की करोड़ों माताओं-बहनों और उन लोगों का सुरक्षा कवच मेरे साथ है, जिनकी मैंने सेवा की है. आप चाहे जितने नारे लगा लो, लेकिन मोदी की कब्र कभी नहीं खोद पाओगे.” मोदी ने मोदी की कब्र खोदने का उल्लेख अपने भाषण में कम से कम 15 बार किया.
गांधी परिवार पर निजी हमला: ‘आदतन चोर’ : राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने गांधी परिवार को सीधे निशाने पर लिया. उन्होंने गांधी परिवार को “आदतन चोर” करार देते हुए कहा कि इन लोगों ने चोरी को अपना पारिवारिक पेशा बना लिया है. मोदी ने तंज कसते हुए कहा, “इन्होंने तो एक गुजराती, महात्मा गांधी का सरनेम (उपनाम) भी चुरा लिया है, ताकि अपनी राजनीतिक रोटियां सेक सकें.” उन्होंने कहा कि देश ने कांग्रेस के ‘प्रथम परिवार’ को दशकों तक मौका दिया, लेकिन उन्होंने ‘गरीबी हटाओ’ के सिर्फ नारे दिए और जनता को गुमराह किया. मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों, आदिवासियों और दलितों का अपमान किया है.
बिट्टू और सिखों के अपमान का मुद्दा : मोदी ने राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को “गद्दार” कहे जाने पर भी कड़ा विरोध जताया. मोदी ने कहा कि बिट्टू के परिवार ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है (उनके दादा और पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या आतंकियों ने की थी). पीएम ने कहा, “कांग्रेस के भीतर सिखों के प्रति नफरत भरी है. एक सांसद को सिर्फ इसलिए गद्दार कहा गया क्योंकि वह सिख है और उसने कांग्रेस छोड़ दी है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी दुश्मनी स्वीकार्य नहीं है.”
पीएम ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 370 की दीवार गिराई, पूर्वोत्तर में शांति स्थापित की और “ऑपरेशन सिंदूर” के जरिए पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों पर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत को “विश्वमित्र” मान रही है, जबकि कांग्रेस के राज में रक्षा सौदों का मतलब सिर्फ ‘बोफोर्स’ घोटाले जैसा होता था.
स्पीकर ओम बिरला का सनसनीखेज खुलासा: ‘पीएम पर हमले की थी आशंका’ : इस सियासी घमासान के बीच एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री लोकसभा में अपनी बात रखने क्यों नहीं आए. बिरला ने दावा किया कि उनके पास “पुख्ता जानकारी” थी कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ संसद के भीतर किसी “अनहोनी या अप्रत्याशित घटना” को अंजाम देने की योजना बना रहे थे. स्पीकर ने कहा, “मुझे जानकारी मिली थी कि कई कांग्रेसी सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर कोई ऐसी हरकत कर सकते हैं, जो इतिहास में कभी नहीं हुई. इसी वजह से मैंने खुद पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे सदन में न आएं.” बिरला ने बुधवार को विपक्ष के आचरण को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का “काला धब्बा” बताया.
कांग्रेस का पलटवार: “स्पीकर की आड़ में छिप रहे हैं पीएम”
इस बीच, कांग्रेस ने स्पीकर के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “यह सरासर झूठ है. किसी भी सांसद की प्रधानमंत्री को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोई योजना नहीं थी. प्रधानमंत्री में सदन का सामना करने की हिम्मत नहीं है, इसलिए वे स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं और स्पीकर से ऐसे बयान दिलवा रहे हैं.” राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि पीएम मोदी सच से डरकर झूठ की शरण ले रहे हैं.
हरकारा डीप डाइव
श्रवण गर्ग : चीन, नरवणे, लद्दाख पर मोदी की चुप्पी बताती है कि वे देश से कितने ईमानदार हैं
हरकारा डीप डाइव के ताज़ा एपिसोड में निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने प्रधानमंत्री के हालिया भाषण और पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब को लेकर विस्तृत चर्चा की. बातचीत में मुख्य सवाल यह रहा कि क्या चीन और लद्दाख के मुद्दे पर देश को पूरी सच्चाई बताई गई है.
श्रवण गर्ग ने प्रधानमंत्री के डेढ़ घंटे के भाषण को “राजनीतिक रूप से हिंसक” बताया. उनका कहना था कि भाषण में कांग्रेस, नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी पर तीखे हमले किए गए, लेकिन चीन, लद्दाख और नरवणे की किताब पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की गई. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री हर विषय पर बोल सकते हैं तो राहुल गांधी को लोकसभा में तथ्यात्मक बयान देने से क्यों रोका गया.
चर्चा में नरवणे की किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” के उन हिस्सों का उल्लेख हुआ जिसमें 2020 के चीन संकट का विवरण है. किताब के अनुसार, चीनी सेना कैलाश रेंज के पास 500 मीटर तक आ गई थी. उस समय कोविड काल था और देश की अर्थव्यवस्था दबाव में थी. नरवणे के अनुसार, उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट निर्देश मांगे, लेकिन अंत में उन्हें कहा गया कि “जो उचित समझें करें.” उन्होंने इसे “हॉट पोटैटो” की तरह बताया, यानी पूरी ज़िम्मेदारी उनके कंधों पर छोड़ दी गई.
श्रवण गर्ग का मत है कि यह घटना राजनीतिक-सैन्य संबंधों की गंभीर तस्वीर दिखाती है. उन्होंने कहा कि आधिकारिक बयान और ज़मीनी हकीकत में अंतर नजर आता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि गलवान के समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि “ना कोई घुसा है, ना कोई आया है,” जबकि किताब में अलग स्थिति का ज़िक्र है.
बातचीत में यह भी कहा गया कि 1962 के युद्ध के दौरान नेहरू ने संसद में चर्चा कराई थी, जबकि वर्तमान में चीन मुद्दे पर खुली बहस से बचा जा रहा है. श्रवण गर्ग ने मुख्यधारा मीडिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस विषय पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही.
रिलायंस की वेनेजुएला वापसी: प्रतिबंधों में ढील के बाद 20 लाख बैरल तेल का सौदा
रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स संचालित करती है, ने करीब एक साल के अंतराल के बाद दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से कच्चा तेल (क्रूड ऑइल) खरीदना फिर से शुरू कर दिया है. उद्योग सूत्रों के अनुसार, रिलायंस ने कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी विटोल के माध्यम से 20 लाख बैरल तेल का सौदा किया है, जिसकी डिलीवरी अप्रैल महीने में होनी है.
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट है कि यह कदम तब उठाया गया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर लगे कठोर प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है. अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान और वहां अंतरिम सरकार (डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में) के साथ हुए समझौतों के बाद, अमेरिका ने विटोल और ट्रैफिगुरा जैसी ट्रेडिंग फर्मों को वेनेजुएला का तेल बेचने का लाइसेंस दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस को यह तेल अंतरराष्ट्रीय मानक ‘ब्रेंट क्रूड’ के मुकाबले करीब 6.5 से 7 डॉलर प्रति बैरल की भारी छूट पर मिल रहा है. यह रिलायंस के लिए एक बड़ा व्यावसायिक लाभ है, क्योंकि वेनेजुएला के हेवी क्रूड को रिफाइन करने में रिलायंस की रिफाइनरी सक्षम है और सस्ता कच्चा तेल उनके मुनाफे को बढ़ाएगा. रिलायंस और विटोल ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
मणिपुर में पत्थरबाजी, आगजनी और बंद; ‘मैतेई-नेतृत्व’ वाली भाजपा सरकार में शामिल होने वाले विधायकों के खिलाफ कुकी समूह भड़के
सुमिर कर्माकर की रिपोर्ट है कि “ग्राम स्वयंसेवकों” (हथियारबंद कुकी समूह) के एक संगठन ने इंफाल में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले किपगेन और दो हमार-ज़ोमी विधायकों की हत्या के लिए “नकद इनाम” की घोषणा की है.
कलह से जूझ रहे मणिपुर में “लोकप्रिय सरकार” की बहाली के एक दिन बाद ही, गुरुवार को कुकी-बहुल चूराचांदपुर जिले में हिंसा भड़क उठी. यह हिंसा कुकी संगठनों द्वारा पाँच कुकी विधायकों के सरकार में शामिल होने के फैसले के खिलाफ बुलाए गए “बंद” और “सामाजिक बहिष्कार” के दौरान हुई.
गुरुवार शाम को कुकी संगठनों द्वारा साझा किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को तुइबोंग क्षेत्र में पत्थरबाजी करते, टायर जलाते और संपत्तियों में तोड़फोड़ करते देखा गया. उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को “बंद” लागू करने से रोकने की कोशिश की, तो उनके बीच झड़प हो गई.
कुकी महिला विधायक नेमचा किपगेन द्वारा वर्चुअली उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कुकी-ज़ो संगठनों ने कड़ा विरोध जताया. मैतेई विधायक युमनम खेमचंद सिंह ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जबकि नागा विधायक लोसी दिखो ने दूसरे उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
कुकी समुदाय के एक समूह ने गुरुवार रात नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया, जहां से किपगेन ने वर्चुअली शपथ ली थी. कुकी-बहुल क्षेत्रों में कई लोग सड़कों पर उतर आए, जबकि हथियारबंद कुकी समूहों (ग्राम स्वयंसेवकों) ने किपगेन की हत्या के लिए 20 लाख रुपये और मैतेई-बहुल इंफाल में शपथ ग्रहण में शामिल होने वाले दो हमार-ज़ोमी विधायकों के लिए 10-10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की.
कुकी-ज़ो काउंसिल ने अपना प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की
कुकी-ज़ो काउंसिल (केज़ेडसी), जो मणिपुर के कुकी-ज़ो जनजातियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने नई सरकार में शामिल होने वाले कुकी-ज़ो विधायकों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की है.
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, कुकी-ज़ो पहाड़ी क्षेत्रों में, ‘जॉइंट फोरम ऑफ सेवन’ नामक कुकी-ज़ो संगठन द्वारा नई सरकार में कुछ कुकी-ज़ो विधायकों की भागीदारी के विरोध में बुलाए गए ‘सुबह से शाम तक’ के पूर्ण बंद के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा.
यह बंद केंद्र सरकार द्वारा कुकी-ज़ो समुदाय की ‘विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश’ की मांग को संबोधित करने के बजाय सरकार गठन को प्राथमिकता देने के खिलाफ भी बुलाया गया था.
केज़ेडसी ने कहा कि कुछ कुकी-ज़ो विधायकों का सरकार में शामिल होने का निर्णय उस प्रस्ताव का घोर उल्लंघन है, जिसे ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ विद्रोही समूहों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया था. इस प्रस्ताव में कहा गया था कि केंद्र और राज्य सरकारों से बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान के लिखित आश्वासन के बिना विधायक और केज़ेडसी मणिपुर सरकार के गठन में शामिल नहीं होंगे.
केज़ेडसी ने कहा, “मैतेई-बहुल सरकार के गठन में शामिल होकर, इन विधायकों ने प्रभावी रूप से खुद को हमारे दुश्मनों के साथ खड़ा कर लिया है और कुकी-ज़ो समुदाय द्वारा झेले गए अपार दर्द और बलिदानों की अनदेखी की है.”
केज़ेडसी ने आगे कहा, “यह बहिष्कार तब तक प्रभावी रहेगा जब तक वे मणिपुर सरकार में भागीदारी से पीछे नहीं हट जाते और खुद को कुकी-ज़ो लोगों के सामूहिक रुख के साथ फिर से नहीं जोड़ लेते.”
4-5 दिनों में अमेरिकी समझौते पर संयुक्त बयान, मार्च में डील: पीयूष गोयल
इस बीच, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पहली किश्त लगभग तैयार है और दोनों देश चार-पांच दिनों में एक संयुक्त बयान जारी करेंगे. यह जानकारी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हुए उस समझौते के शुरुआती विवरण सामने आने के बाद आई है, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात ‘ट्रुथ सोशल’ पर की थी.
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, गोयल ने बताया कि इस सौदे पर औपचारिक समझौता होने में 30-45 दिन लगेंगे और इस पर मार्च में हस्ताक्षर किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि संयुक्त समझौते पर वर्चुअल माध्यम से हस्ताक्षर किए जाएंगे, और संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर होते ही कार्यकारी आदेश के जरिए भारत से आने वाली वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा.
गोयल ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह समझौता जल्द से जल्द हो जाए ताकि इसके बाद हमें और अधिक रियायतें मिल सकें.”
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, “मार्च में कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत अमेरिका पर टैरिफ (शुल्क) कम करेगा.”
ट्रंप के उस दावे पर भी कुछ स्पष्टता सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा.
रॉयटर्स ने व्यापार अधिकारियों के हवाले से बताया कि अकेले विमानों की मांग और ऑर्डर 70-80 अरब डॉलर के हैं, जो अमेरिकी खरीदारी का हिस्सा होंगे.
उन्होंने कहा कि भारत को प्रति वर्ष 300 अरब डॉलर के सामान का आयात करने की आवश्यकता होगी और अमेरिका ऊर्जा, विमान और चिप्स के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक होगा. अधिकारियों ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत की कुल खरीद बढ़कर 2 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर हो जाएगी और अमेरिका इस हिस्से के रूप में 500 अरब डॉलर की आपूर्ति करेगा.
मेघालय की अवैध कोयला खदान में संदिग्ध डायनामाइट विस्फोट, 18 लोगों की मौत
मेघालय में गुरुवार सुबह एक अवैध कोयला खदान में संदिग्ध डायनामाइट विस्फोट में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया. यह घटना कोयला समृद्ध पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में हुई. पुलिस ने खदान में विस्फोट होने की पुष्टि की है. अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया, “हमने 16 शव बरामद किए हैं जिनकी पहचान अभी बाकी है. घायल व्यक्ति को शिलांग के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है. वह झुलस गया है.”
एसपी ने कहा, “हम खदान मालिक और इसे चलाने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. उसके बाद हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे.
प्रशांत मजूमदार की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2014 में कोयला खनन और उसके परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह फैसला अनियंत्रित और असुरक्षित खनन प्रथाओं, विशेष रूप से कोयला निकालने की खतरनाक “रैट-होल” तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए लिया गया था. प्रतिबंध के बावजूद, अवैध गतिविधियां जारी हैं. उच्च गुणवत्ता वाले कोयले से समृद्ध मेघालय में अतीत में कोयला खदान से जुड़ी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. वह बताते हैं कि 2018 में, एक अवैध खदान के भीतर 370 फीट की गहराई में कम से कम 15 खनिक फंस गए थे. भारतीय नौसेना सहित कई एजेंसियों के दो महीने से अधिक लंबे प्रयासों के बावजूद, केवल कुछ ही पीड़ितों के शव निकाले जा सके थे.
रिपोर्ट कहती है कि प्रतिदिन मिलने वाली ऊंची मजदूरी (जो ₹2,000 तक हो सकती है), लोगों को, विशेष रूप से असम से, मेघालय की इन कोयला खदानों की ओर आकर्षित करती है.
इससे पहले, मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य में अवैध कोयला खनन पर प्रतिबंध के बाद पर्यावरणीय बहाली के उपायों की जांच, निगरानी और सिफारिश करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीपी कटाकी की एक सदस्यीय समिति का गठन किया था. राज्य के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से अधिकांश अवैध कोयला खदानें प्रभावशाली लोगों के स्वामित्व में हैं.
‘मोहम्मद’ दीपक बनाम बजरंग दल: ऑल्ट न्यूज़ ने एफआईआर में दर्ज ‘अज्ञात’ उपद्रवियों की पहचान उजागर की
उत्तराखंड पुलिस ने पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर हुए एक विवाद के संबंध में तीन एफआईआर दर्ज की हैं. यह मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक स्थानीय व्यक्ति दीपक कुमार कश्यप के बीच हुए टकराव से जुड़ा है. दीपक ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा परेशान किए जा रहे एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में आवाज उठाई थी, जिसके बाद यह पूरा विवाद खड़ा हुआ.
इनमें से एक मामला 31 जनवरी को दीपक कश्यप के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन से संबंधित है. पुलिस ने इसमें नेशनल हाईवे-119 को ब्लॉक करने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में 30 से 40 “अज्ञात व्यक्तियों” के खिलाफ मामला दर्ज किया है. हालांकि, घटना के फुटेज की गहन जांच करके ऑल्ट न्यूज़ में शिंजनी मजूमदार और मोहम्मद ज़ुबैर ने इन कथित ‘अज्ञात’ लोगों में से कम से कम पांच की पहचान कर ली है, जिनके दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े होने और हिंदुत्ववादी गतिविधियों में शामिल रहने के पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं.
26 जनवरी को आखिर हुआ क्या था?
सोमवार, 26 जनवरी को हिंदुत्ववादी भीड़ ने कोटद्वार में 70 वर्षीय दुकानदार वकील अहमद को उनकी दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द होने को लेकर घेर लिया था. भीड़ का कहना था कि ‘बाबा’ शब्द स्थानीय धार्मिक स्थल बाबा सिद्धबली से जुड़ा है, इसलिए मुस्लिम दुकानदार इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता. तभी वहां मौजूद दीपक कुमार कश्यप ने हस्तक्षेप किया और भीड़ से पूछा कि उन्हें नाम बदलवाने का क्या अधिकार है.
जब भीड़ ने दीपक से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने गुस्से और व्यंग्य में जवाब दिया, “मोहम्मद दीपक... मेरे नाम का इस बात से क्या लेना-देना है?” बाद में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए दीपक ने बताया कि उन्होंने ऐसा यह जताने के लिए कहा था कि वे एक भारतीय हैं और कानून के सामने सब बराबर हैं.
इस घटना के कुछ दिनों बाद, 31 जनवरी को 40 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दीपक के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके जिम के बाहर उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दीं.
तीन एफआईआर और ‘अज्ञात’ आरोपी
इस मामले में तीन एफआईआर दर्ज हुईं: पहली एफआईआर विहिप और बजरंग दल के सदस्यों ने दीपक और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ दर्ज कराई, जिसमें मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया. दूसरी एफआईआर दुकानदार वकील अहमद ने स्थानीय लोगों द्वारा धमकाए जाने के खिलाफ दर्ज कराई. तीसरी एफआईआर पुलिस ने हाईवे जाम करने और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की करने के आरोप में “अज्ञात व्यक्तियों” के खिलाफ दर्ज की.
ऑल्ट न्यूज़ द्वारा पहचान और आरोपियों का इतिहास
ऑल्ट न्यूज़ ने 31 जनवरी के विरोध प्रदर्शन के वीडियो (जो इंस्टाग्राम यूजर @dehradun_exclusive ने पोस्ट किए थे) की जांच की. इसमें पुलिस की मौजूदगी में भीड़ को दीपक को गालियां देते और धमकियां देते देखा जा सकता है. जांच में पांच व्यक्तियों की पहचान हुई: अमन स्वेडिया: बजरंग दल का जिला संयोजक (देहरादून). सिद्धांत बडोनी: वीडियो में यह व्यक्ति पुलिसकर्मियों के ऊपर से कूदकर दीपक तक पहुंचने की कोशिश करते हुए दिखाई दिया. नरेश उनियाल: बजरंग दल गौ रक्षा प्रमुख. भूपी चौधरी: बजरंग दल कार्यकर्ता. सचिन चौधरी.
जांच में सामने आया कि अमन स्वेडिया और भूपी चौधरी पहले भी ऐसी ‘विजिलांटे’ (मनमानी कार्रवाई) गतिविधियों में शामिल रहे हैं. 19 जनवरी को इन्होंने एक मुस्लिम दर्जी अब्दुल जब्बार को ‘हिंदू उपनाम’ (पुंडीर टेलर) रखने पर धमकाया था और उनकी दुकान के होर्डिंग तोड़ दिए थे. इसके अलावा, अमन स्वेडिया और उसके साथियों ने रैपर ‘सीधे मौत’ का एक शो यह कहकर रद्द करवा दिया था कि इससे “अश्लील संस्कृति” फैलती है. वहीं, नरेश उनियाल का एक वीडियो सामने आया जिसमें वह क्रिसमस समारोह में बाधा डालते हुए और माइक पर चिल्लाते हुए कह रहे थे कि यह धर्म गौमांस खाने को बढ़ावा देता है.
जून 2025 में अमन स्वेडिया के खिलाफ देहरादून के श्री गुरु राम राय दरबार साहिब के खिलाफ सोशल मीडिया पर भड़काऊ और अपमानजनक पोस्ट करने के लिए भी शिकायत दर्ज कराई गई थी. इन सबूतों से स्पष्ट है कि एफआईआर में जिन्हें ‘अज्ञात’ बताया गया है, वे जाने-पहचाने चेहरे हैं जो लगातार ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं.
असम सीएम के बयान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची जमीयत
मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के हालिया बयान के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है. यह याचिका 2021 से लंबित हेट स्पीच मामले का हिस्सा है. जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि मुख्यमंत्री का बयान साम्प्रदायिक, असंवैधानिक और एक संवैधानिक पद की गरिमा के ख़िलाफ़ है. 27 जनवरी 2026 को दिए गए बयान में मुख्यमंत्री ने कहा था कि चार से पांच लाख “मिया” वोटरों को वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा और उनकी पार्टी “मिया समुदाय के सीधे ख़िलाफ़” है. याचिका में कहा गया है कि “मिया” शब्द असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप में इस्तेमाल होता है.
जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के सार्वजनिक भाषण के लिए सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि कोई भी अपने पद का इस्तेमाल किसी समुदाय के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने के लिए न कर सके. याचिका में कहा गया है कि ऐसे बयान पूरे समुदाय को बदनाम करते हैं और संविधान के मूल्यों बराबरी, भाईचारा और धर्मनिरपेक्षता, को कमज़ोर करते हैं. अर्ज़ी में यह भी आरोप लगाया गया है कि हेट स्पीच के मामलों में कानून का समान रूप से पालन नहीं हो रहा. कई बार अल्पसंख्यकों की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती.
कर्नाटक में बदले की हत्याएं और यूएपीए का अलग-अलग इस्तेमाल
जुलाई 2022 से मई 2025 के बीच दक्षिणी तटीय कर्नाटक में बदले की हिंसा में छह लोगों की हत्या हुई, दो हिंदू और चार मुसलमानों की. लेकिन इन हत्याओं को दर्ज करने और उनकी जांच के तरीके में साफ़ तौर पर फर्क देखा गया. यह रिपोर्ट आर्टिकल14 में प्रकाशित मोहित एम की है और यूएपीए के इस्तेमाल पर उनकी चार भागों की श्रृंखला का दूसरा हिस्सा है, जिसमें बताया गया है कि एक जैसे अपराधों में कानून का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से कैसे किया गया.
चार मुस्लिम युवकों की हत्या को पुलिस ने साधारण हत्या के मामलों के रूप में दर्ज किया है. वहीं दो हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, यानी यूएपीए लगाया गया, जो देश का सख्त आतंकवाद विरोधी कानून है.
हिंसा की शुरुआत 21 जुलाई 2022 को हुई, जब बजरंग दल से जुड़े आठ लोगों ने 19 वर्षीय मोहम्मद बी. मसूद पर कथित तौर पर बछड़ा खरीदने के विवाद में हमला किया. एक हफ्ते बाद, करीब पांच किलोमीटर दूर, 32 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण नेत्तारू की हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार यह हमला पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े लोगों ने बदले की भावना से किया. इसके दो दिन बाद, हिंदू कट्टरपंथी समूहों से जुड़े लोगों ने 23 वर्षीय मोहम्मद फ़ाज़िल की मंगलुरु के पास हत्या कर दी, जिसे नेत्तारू की हत्या का बदला बताया गया. यह सिलसिला 1 मई 2025 को फिर शुरू हुआ, जब फ़ाज़िल हत्या मामले के मुख्य आरोपी सुहास शेट्टी की हत्या कर दी गई. आरोप है कि यह हमला फ़ाज़िल के परिवार ने करवाया. इसके बाद 27 मई 2025 को अब्दुल रहिमान, जो एक मस्जिद कमेटी सदस्य थे, की हत्या कर दी गई. हमलावरों ने शेट्टी का नाम लेकर हमला किया.
इन छह हत्याओं में से केवल प्रवीण नेत्तारू और सुहास शेट्टी के मामलों में यूएपीए लगाया गया. नेत्तारू मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 21 लोगों को गिरफ्तार किया और अब तक किसी को ज़मानत नहीं मिली है. इसके उलट,फ़ाज़िल हत्या मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों, जिनमें शेट्टी भी शामिल थे, को डेढ़ साल के भीतर ज़मानत मिल गई. यूएपीए लगने के बाद निचली अदालतों से ज़मानत मिलना बेहद कठिन हो जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2005 से फरवरी 2025 तक कर्नाटक में यूएपीए के इस्तेमाल पर एसओएएस, लंदन विश्वविद्यालय के शोध में पाया गया कि कुल 925 लोगों पर यह कानून लगाया गया, जिनमें 783 यानी लगभग 85 प्रतिशत मुस्लिम थे. पिछले 20 वर्षों में भाजपा और कांग्रेस लगभग बराबर समय सत्ता में रहीं, लेकिन आंकड़ों से पता चला कि यूएपीए के तहत गिरफ्तार 10 में से 8 लोग भाजपा के शासनकाल में आरोपी बनाए गए. भाजपा ने कांग्रेस की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक बार यूएपीए का इस्तेमाल किया.
2016 से 2023 के बीच कर्नाटक में 53 सांप्रदायिक या राजनीतिक हत्याएं दर्ज हुईं. इनमें से पांच मामलों में यूएपीए लगाया गया और ये सभी मामले आरएसएस या भाजपा से जुड़े लोगों की हत्या से जुड़े थे. 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता आर. रुद्रेश की हत्या के मामले में पहले साधारण हत्या की धाराएं लगीं, लेकिन बाद में यूएपीए जोड़ा गया और मामला एनआईए को सौंप दिया गया. आरोपी आठ साल से जेल में हैं और अब तक आधे से कम गवाहों की सुनवाई हुई है. इसके विपरीत, 2017 में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के आरोपियों को छह साल बाद ज़मानत मिल गई, क्योंकि उन पर यूएपीए नहीं लगाया गया था.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2020 के बेंगलुरु दंगों और 2022 के हुब्बली हिंसा मामलों में सैकड़ों मुस्लिम युवकों पर यूएपीए लगाया गया. 2020 बेंगलुरु दंगों में 246 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर हुई, जिनमें 47 पर यूएपीए लगा. कई आरोपी अब भी पांच साल से जेल में है. रिपोर्ट के इस दूसरे भाग में कहा गया है कि कर्नाटक में यूएपीए का इस्तेमाल कई बार साधारण आपराधिक मामलों में भी किया गया, खासकर तब जब पीड़ित भाजपा या आरएसएस से जुड़े थे.
चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बदलाव की भारत कर रहा निगरानी, राज्यसभा को बताया
सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि वह चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीतियों में हालिया बदलावों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ “संपर्क में बनी हुई है.”
‘पीटीआई’ के अनुसार, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार से पूछा था कि क्या उसने इस तरह के प्रभावों का आकलन किया है. कांग्रेस नेता ने पिछले पांच वर्षों में ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना के विकास और संचालन पर भारत द्वारा प्रतिबद्ध धन और खर्च की गई राशि के बारे में भी सवाल किया था.
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में कहा, “13 मई 2024 को चाबहार बंदरगाह के शहीद बेहिश्ती टर्मिनल को सुसज्जित करने और संचालित करने के लिए इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच हस्ताक्षरित मुख्य अनुबंध के अनुसार, भारत ने बंदरगाह उपकरणों की खरीद के लिए 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर के योगदान की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है.” उन्होंने आगे बताया कि इसकी अंतिम किश्त 26 अगस्त, 2025 को हस्तांतरित की गई थी.
खड़गे ने विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा था कि क्या पिछले दो वर्षों में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की भागीदारी के संबंध में संयुक्त राज्य अमेरिका या अन्य प्रासंगिक भागीदारों के साथ कोई राजनयिक चर्चा हुई है. उन्होंने इस परियोजना में भारत की भागीदारी जारी रखने के लिए विचार की जा रही “आकस्मिक योजनाओं” का विवरण भी मांगा था.
मंत्री ने कहा, “16 सितंबर, 2025 को अमेरिकी विदेश विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से, अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए ‘ईरान फ्रीडम एंड काउंटर प्रोलिफरेशन एक्ट, 2012’ के तहत 2018 में जारी की गई प्रतिबंधों की छूट को रद्द कर दिया, जो 29 सितंबर, 2025 से प्रभावी हो गया.”
उन्होंने आगे कहा, “अमेरिकी पक्ष के साथ हुई चर्चा के बाद, अमेरिका ने 26 अप्रैल, 2026 तक सशर्त प्रतिबंध छूट को बढ़ाने का दिशा-निर्देश जारी किया है. भारत सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में बनी हुई है.”
‘रूसी कच्चे तेल को महंगे अमेरिकी और वेनेजुएलाई तेल से बदलना मुश्किल’
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने ‘फाइनेंशियल क्रॉनिकल’ के साथ बातचीत में कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से खरीदता है और रूसी तेल को अमेरिका तथा वेनेजुएला की आपूर्ति से बदलना मुश्किल है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी या वेनेजुएलाई कच्चा तेल, छूट पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल की तुलना में महंगा होगा.
ट्रंप की टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा के बारे में उन्होंने कहा कि एक साल पहले भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका में औसत टैरिफ 3 प्रतिशत से भी कम था. बेशक, यह हर उत्पाद के लिए अलग-अलग होता है. जब इसे 50 प्रतिशत बढ़ाया गया, तो यह 53 प्रतिशत हो गया. अब हम इसे घटाकर 18 प्रतिशत पर ले आए हैं. तो, यह 18 प्लस 3 यानी कुल 21 प्रतिशत हो गया.
उन्होंने कहा कि पारस्परिक शुल्क कांग्रेस की मंजूरी लेकर नहीं लगाए गए हैं और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इन्हें उसी तरह अवैध ठहरा सकता है जैसे निचली दो अदालतों ने किया है. यहां, हमें संतुलन नहीं दिख रहा है, बल्कि हम तुलनात्मक या प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देख रहे हैं. हम इस बात से बहुत खुश हैं कि हम बांग्लादेश, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया या यहां तक कि पाकिस्तान जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम टैरिफ दे रहे हैं. व्यापारिक समझौते कोई दान-पुण्य का काम नहीं हैं. मैं कुछ लाभ तभी दूंगा जब मुझे बदले में कुछ मिलेगा.
ट्रंप के इस दावे पर कि भारत रूस से तेल न खरीदने पर सहमत हो गया है, श्रीवास्तव ने कहा कि यह एक दुखद मुद्दा है. भारतीय निर्णयों की जानकारी भारत सरकार या भारतीय स्रोतों द्वारा भारतीय लोगों को दी जानी चाहिए. लेकिन यहां दो बातें हैं. भारत सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है. उसने न तो इसे स्वीकार किया है और न ही इससे इनकार किया है. रूसी प्रवक्ता का कहना है कि तेल खरीद पर भारत सरकार के साथ व्यवस्था जारी है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसलिए, खेल वास्तव में क्या है, इसे समझने के लिए हमें कुछ और दिनों का इंतजार करना होगा. लेकिन एक बात साफ है, भारत अपने कच्चे तेल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से खरीदता है और अमेरिका या वेनेजुएला जैसे स्रोतों से रूसी तेल को बदलना मुश्किल है. उनके पास इतनी आपूर्ति नहीं है. वेनेजुएला का तेल निम्न गुणवत्ता वाला और गाढ़ा होता है, और वहां के कुएं सही स्थिति में नहीं हैं, इसलिए वह तेल भी महंगा पड़ेगा.
भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए सहमत हो गया है, इस बारे में उनका कहना था कि 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना असंभव है. अमेरिका के पास ऐसी बहुत सी चीजें नहीं हैं जिनकी हमें जरूरत हो. वे भारी सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों या बहुत हाई-टेक सामानों और विमानों के कारोबार में हैं. हम इन्हें इतनी बड़ी मात्रा में नहीं खरीद सकते. हम यह कह सकते हैं कि इस 500 अरब डॉलर को कई वर्षों में फैलाया जा सकता है. एक साल में 500 अरब डॉलर असंभव है.
रूसी तेल आयात बंद करने के ट्रंप के दावे का सीधा उत्तर नहीं, वेनेजुएला से व्यावसायिक आधार पर तेल खरीदने के लिए तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के बीच कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है, विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को दोहराया कि अपनी 1.4 अरब जनता के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, विशेष रूप से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के बीच.
‘एएनआई’ के मुताबिक, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “जहां तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा या सोर्सिंग का सवाल है, सरकार ने सार्वजनिक रूप से कई अवसरों पर यह स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
उन्होंने सरकार की रणनीति को रेखांकित करते हुए आगे कहा, “बाजार की वस्तुनिष्ठ स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के अनुरूप अपनी ऊर्जा सोर्सिंग में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल हिस्सा है. भारत के सभी निर्णय इसी को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और आगे भी लिए जाएंगे.”
दरअसल, ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रेड डील (व्यापार समझौते) की जानकारी देते हुए दावा किया था कि नई दिल्ली रूसी तेल खरीदना बंद कर देगी और अमेरिका तथा वेनेजुएला से खरीद बढ़ाएगी. बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार समझौते की पुष्टि की थी, हालांकि रूसी तेल आयात बंद करने के संबंध में कुछ नहीं कहा था. आज भी जायसवाल ने रूस से तेल खरीदी बंद करने के बारे में सीधा जवाब नहीं दिया.
वेनेजुएला पर पूछे गए सवालों के जवाब में जायसवाल ने कहा कि भारत व्यावसायिक आधार पर तेल खरीदने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, “भारत का रुख स्पष्ट है. वेनेजुएला के साथ हमारी पुरानी साझेदारी है. हम वेनेजुएला या अन्य स्थानों से उनकी व्यावसायिक व्यावहारिकता के आधार पर तेल खरीदने के विकल्प खुले रखते हैं.”
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 32वीं मौत, एक माह बाद भी लोगों में डर और गुस्सा
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी के कारण मौतों का सिलसिला जारी है. द मूकनायक की रिपोर्ट के मुताबिक़ रविवार रात 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की मौत हो गई. इसके साथ ही मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है. सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं और आज भी लोग नल का पानी पीने से डर रहे हैं. नगर निगम के अनुसार ड्रेनेज की मुख्य लाइन का काम पूरा हो चुका है और 30 प्रतिशत इलाके में पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है. बाकी क्षेत्रों में टैंकर से पानी दिया जा रहा है. निगम का दावा है कि अगले 20 दिनों में बाकी काम भी पूरा कर लिया जाएगा और पूरे इलाके में सुरक्षित जल सप्लाई शुरू होगी.
अनिता कुशवाह के बेटे नीलेश के अनुसार उनकी मां को पहले कोई गंभीर बीमारी नहीं थी. 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त होने पर उन्हें भाग्यश्री अस्पताल में भर्ती कराया गया. दो दिन बाद छुट्टी मिलने के कुछ घंटों में हालत बिगड़ गई. 1 जनवरी को उन्हें अरबिंदो अस्पताल और 4 जनवरी को बॉम्बे अस्पताल में भर्ती किया गया. इलाज के दौरान उनकी किडनी फेल हो गई, लगातार डायलिसिस किया गया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया और रविवार रात उनकी मौत हो गई.
बिहार के दरभंगा में दलित परिवार पर हमले का आरोप, पूरे ब्राह्मण समुदाय के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज
द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार के दरभंगा जिले के हरिनगर गांव में एक दलित परिवार पर हमले के आरोप के बाद ब्राह्मण समुदाय के लगभग सभी वयस्क पुरुषों के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत शिकायत दर्ज की गई है. एफआईआर में 70 लोगों को नामज़द किया गया है और साथ ही 100 से 150 अज्ञात लोगों का भी ज़िक्र है. यह संख्या गांव के लगभग पूरे वयस्क ब्राह्मण पुरुषों के बराबर बताई जा रही है. कई नामज़द लोग दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में काम करते हैं और वर्षों से गांव में नहीं रह रहे हैं. अब तक 12 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
यह शिकायत असर्फी पासवान ने की है. घटना 31 जनवरी की बताई गई है, जो कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में हुई. विवाद की वजह असर्फी के बेटे विक्रम पासवान की बकाया मज़दूरी बताई जा रही है. विक्रम करीब पांच साल से हेमकांत झा के यहां काम कर रहा था.
शिकायत के मुताबिक, 30 जनवरी को गांव में समझौता बैठक हुई थी, लेकिन उसमें बहस और तनाव हो गया. अगले दिन सुबह विक्रम सब्ज़ी खरीदकर घर लौट रहा था, तभी उस पर हमला किया गया. असर्फी पासवान का आरोप है कि हेमकांत झा और अन्य लोगों ने जातिसूचक गालियां दीं और लाठी, लोहे की रॉड, कुल्हाड़ी, ईंट-पत्थर से जान से मारने की नीयत से हमला किया. असर्फी पासवान ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रामतारा देवी और पोती कोमल कुमारी के साथ भी मारपीट की गई. पत्नी के कपड़े फाड़ दिए गए और पोती के कूल्हे की हड्डी टूट गई. शिकायत में यह भी कहा गया है कि पोती की शादी के लिए रखे दो लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के गहने, घरेलू सामान और मोबाइल फोन लूट लिए गए.
“भगवान एक रचना है, प्यारी लड़कियां हकीकत हैं”: दीपक चोपड़ा के पुराने ईमेल्स से मचा हड़कंप; स्वीकार किया ‘लहजे में गलती’
दुनियाभर में अपनी आध्यात्मिक किताबों और ‘वेलनेस’ गुरु के तौर पर पहचाने जाने वाले भारतीय मूल के दीपक चोपड़ा विवादों में घिर गए हैं. अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में, दिवंगत और दोषी करार दिए गए सेक्स-अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ दीपक चोपड़ा के पुराने ईमेल सामने आए हैं, जिनमें बेहद आपत्तिजनक बातचीत दर्ज है.
क्या लिखा था ईमेल्स में?
2016 और 2017 के बीच हुए इन ईमेल संवादों में 79 वर्षीय चोपड़ा ने एपस्टीन से “प्यारी लड़कियों” (क्यूट गर्ल्स) के बारे में चर्चा की थी. एक ईमेल में चोपड़ा ने लिखा, “ब्रह्मांड एक मानवीय रचना है... भगवान एक रचना है. प्यारी लड़कियां हकीकत हैं.” एक अन्य संदेश में उन्होंने एपस्टीन से पूछा, “क्या तुमने मेरे लिए कोई प्यारी इजरायली लड़की ढूंढी?” उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें “युवा, बुद्धिमान और आत्म-जागरूक महिलाओं” का साथ पसंद है.
“द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, इन खुलासों के बाद दीपक चोपड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गुरुवार को सफाई पेश की. उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ पुराने ईमेल्स में उनके “लहजे में खराब निर्णय” झलकता है, जिसके लिए उन्हें खेद है. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसी भी तरह की आपराधिक या शोषणकारी गतिविधि में शामिल नहीं थे और एपस्टीन के साथ उनका संपर्क सीमित था. उन्होंने कहा, “मैं आज के संदर्भ में इन बातों को पढ़कर दुखी हूं.”
इस मामले पर बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चोपड़ा की पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “अगर जिंदगी तुम्हें दीपक बनाए, तो मोहम्मद दीपक बनो, चोपड़ा नहीं,” और साथ में उल्टी (वामिट) करने वाली इमोजी पोस्ट की. ऋचा का इशारा उस वायरल वीडियो की तरफ था जिसमें एक हिंदू व्यक्ति ने भीड़ से एक मुस्लिम बुजुर्ग को बचाते हुए अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था. गौरतलब है कि एपस्टीन फाइलों में बिल गेट्स, एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रम्प जैसे कई अन्य दिग्गजों के नाम भी शामिल हैं.
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.




