08/01/2026: ममता ने कहा, अमित शाह डकैत | चीन पर नर्म पड़ती मोदी सरकार | ट्रंप ने फिर झटका | वांगचुक का वीडियो सरकार ने छिपाया? | माधव गाडगिल का निधन | रेखा गुप्ता का जीके | झारखंड में लिंचिंग
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां
आज की सुर्खियां
बंगाल में घमासान: आईपैक पर ED की रेड के दौरान ममता बनर्जी ने खुद पहुंचकर दस्तावेज जब्त किए. अमित शाह को बताया ‘डकैत’.
ट्रम्प का डबल अटैक: रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ वाले बिल को अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन. सोलर अलायंस से भी अमेरिका बाहर.
चीन से नरमी: गलवान के बाद पहली बार चीनी कंपनियों से सरकारी ठेकों पर लगा बैन हटा सकता है भारत.
बस्तर के जंगल खतरे में: माओवाद कमज़ोर होते ही माइनिंग लॉबी हुई मज़बूत. 100 एकड़ जंगल साफ.
सोनम वांगचुक की दलील: सुप्रीम कोर्ट में कहा. हिंसा या पत्थर नहीं. शांति की अपील को प्रशासन ने छिपाया.
इतिहास की गलत व्याख्या: दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा. भगत सिंह ने कांग्रेस सरकार पर बम फेंका था. आप ने ली चुटकी.
माधव गाडगिल नहीं रहे: पश्चिमी घाट को बचाने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद का 82 वर्ष की उम्र में निधन.
कोलकाता में हाई ड्रामा
आईपैक पर ईडी की रेड के बीच ममता बनर्जी ने खुद ‘जब्त’ किए दस्तावेज; एजेंसी पहुंची हाई कोर्ट, सीएम ने अमित शाह को बताया ‘डकैत’
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव अब तक के सबसे तीखे मोड़ पर पहुंच गया है. गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चुनावी रणनीति संभालने वाली कंपनी ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आईपैक) और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और कथित तौर पर जांच एजेंसी के सामने से अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत अपने कब्जे में ले लिए. इस मामले में ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) की जांच से जुड़ा है.
ईडी का आरोप: सीएम ने जबरन सबूत हटाए, जांच को पटरी से उतारा
कलकत्ता हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए ईडी के वकील ने गंभीर आरोप लगाए. एजेंसी ने अपनी याचिका और बयान में कहा कि जब वे कोलकाता और दिल्ली में 10 स्थानों (जिनमें आईपैक का सॉल्ट लेक स्थित दफ्तर और प्रतीक जैन का लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास शामिल है) पर सबूतों के आधार पर तलाशी ले रहे थे, तभी मुख्यमंत्री ने बाधा उत्पन्न की.
ईडी ने अपने बयान में कहा, “छापेमारी की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी. तभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं. उन्होंने वहां से महत्वपूर्ण सबूत, जिनमें फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल थे, अपने कब्जे में ले लिए. इसके बाद उनका काफिला आईपैक के ऑफिस पहुंचा, जहां सीएम, उनके सहयोगियों और राज्य पुलिस ने जबरन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को वहां से हटा दिया.” एजेंसी का दावा है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों पर आधारित थी.
ममता का आक्रामक रुख: धरने पर बैठीं, फाइलों को लेकर निकलीं
रेड की खबर मिलते ही ममता बनर्जी पहले प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और फिर सॉल्ट लेक स्थित आईपैक के दफ्तर पहुंचकर धरने पर बैठ गईं. टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर से एक ‘हरी फाइल’ लेकर निकलती देखी गईं. बाद में आईपैक दफ्तर में उन्होंने करीब 45 मिनट बिताए.
मीडिया से बात करते हुए ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन में ऐसे डकैत नहीं देखे. अमित शाह, अगर आप बंगाल जीतना चाहते हैं तो राजनीतिक रूप से लड़ें. यह क्या तरीका है? ईडी हमारी पार्टी की उम्मीदवार सूची, चुनावी रणनीति और आंतरिक डेटा चोरी करने आई थी. क्या यह अमित शाह का काम है? जो गृह मंत्री देश की सुरक्षा नहीं कर सकते, वे मेरी पार्टी के दस्तावेज चुरा रहे हैं.”
ममता ने चुनौती देते हुए कहा, “मिस्टर अमित शाह, अगर आप ऐसे ही चलते रहे तो बंगाल में आपको ‘जीरो’ सीटें मिलेंगी. प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ऐप के जरिए बंगाल के 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है और ईडी अब आईपैक के डेटा के जरिए चुनावों को प्रभावित करना चाहती है.
पुलिस बनाम ईडी: अब एजेंसी पर ही चोरी का केस
मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब 9 घंटे की छापेमारी के बाद प्रतीक जैन के परिवार ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी. हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक जैन की पत्नी ने शेक्सपियर सारणी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है कि रेड के दौरान ईडी अधिकारियों ने उनके घर से जरूरी दस्तावेज चोरी किए हैं. कोलकाता पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
विपक्ष के सवाल: ‘संविधान से ऊपर कोई नहीं’
इस घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने कहा, “जब एक मुख्यमंत्री खुद जाकर जांच एजेंसी के सामने से दस्तावेज हटाती है, तो वह खुद को संविधान और कानून से ऊपर रख रही हैं. क्या कुछ लोग दूसरों से ज्यादा समान हैं?” वहीं, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने ममता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.
दूसरी ओर, माकपा (सीपीएम) और कांग्रेस ने इसे ‘नूराकुश्ती’ करार दिया है. माकपा नेता मोहम्मद सलीम और कांग्रेस नेता शुभंकर सरकार ने सवाल उठाया कि एक प्राइवेट कंपनी (आईपैक) पर रेड के दौरान मुख्यमंत्री वहां क्यों गईं? उन्होंने इसे भाजपा और तृणमूल के बीच का ‘फिक्स ड्रामा’ बताया.
ममता बनर्जी का सबसे घातक हथियार
पूर्वी कोलकाता की एक इमारत की 11वीं मंजिल पर, 100 से ज्यादा कर्मचारी नीले-सफेद डेस्क पर लैपटॉप के साथ बैठे हैं और दो बड़ी टीवी स्क्रीन पर खबरें चल रही हैं. यह जगह है आईपैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) का दफ्तर, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के शस्त्रागार का सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है. टेलीग्राफ की अर्नब गांगुली द्वारा लिखित एक विशेष रिपोर्ट में बताया गया है कि यह एजेंसी कैसे बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के लिए पर्दे के पीछे काम करती है.
आईपैक वह सब करती है जो ममता बनर्जी पहले खुद करती थीं—अभियान की थीम तय करना, उम्मीदवारों की जांच करना, और कई बार पार्टी के लिए ‘डर्टी वर्क’ (कठिन या अप्रिय काम) संभालना. निजी बातचीत में भाजपा का एक वर्ग भी मानता है कि आईपैक अपने काम में माहिर है. ममता सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया, “तृणमूल ‘आवेग’ (भावनाओं) पर चलती है, लेकिन आईपैक ने इसमें एक ढांचा और सिस्टम ला दिया है.”
प्रशांत किशोर और आईपैक की एंट्री 2019 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल के खराब प्रदर्शन के बाद हुई थी. 2021 के विधानसभा चुनावों में आईपैक ने ‘दुआरे सरकार’ और ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के जरिए ममता की एक नई छवि पेश की, जिसने भाजपा के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया. अब प्रशांत किशोर के जाने के बाद, संगठन का नेतृत्व तीन निदेशक कर रहे हैं, जिनमें प्रतीक जैन, विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह शामिल हैं.
प्रतीक जैन (35) तृणमूल और एजेंसी के बीच की मुख्य कड़ी हैं. सूत्रों के मुताबिक, आईपैक की कार्यप्रणाली बेहद डेटा-आधारित है. वे विधायकों को प्रश्नावली भेजते हैं, जमीनी स्तर पर फीडबैक लेते हैं और पार्टी नेतृत्व को समाधान सुझाते हैं. हालांकि, यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा है. कई वरिष्ठ तृणमूल नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन में एजेंसी के दखल पर नाराजगी भी जताई है. लेकिन, 2026 के विधानसभा चुनाव और मतदाता सूची संशोधन जैसे मुद्दों को लेकर आईपैक एक बार फिर ममता बनर्जी के लिए नैरेटिव सेट करने में जुटी है. क्योंकि बंगाल में ममता से बेहतर यह कोई नहीं जानता कि ‘नैरेटिव’ ही चुनाव जिताते हैं.
हेट क्राइम
झारखंड: मवेशी चोरी के आरोप में भीड़ ने मुस्लिम व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला
झारखंड के गोड्डा जिले में मवेशी चोरी के आरोप में भीड़ (मॉब) ने 45 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति, जिसकी पहचान पप्पू अंसारी के रूप में हुई है, की पीट-पीटकर हत्या कर दी. ‘पीटीआई’ ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि मृतक जिले के पथरगामा थाना क्षेत्र के रानीपुर गाँव का निवासी था. यह घटना बुधवार रात पोरैयाहाट थाना क्षेत्र के मतिहानी गाँव में हुई. पीटीआई ने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जे.पी.एन. चौधरी के हवाले से बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि यह घटना कैसे हुई और इस अपराध में शामिल व्यक्तियों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं. डीएसपी ने यह भी बताया कि पीड़ित का आपराधिक रिकॉर्ड था और वह कई बार जेल भी गया था.
दलित महिला की हत्या कर उसकी बेटी को उठा ले गया दबंग, मेरठ के गांव में तनाव
उत्तरप्रदेश के मेरठ में ऊंची जाति के एक दबंग ने एक दलित महिला की हत्या कर दी और फिर उसकी बेटी को उठा ले गया. इस वारदात के बाद तनाव फैल गया. पुलिस परिवार को बिना बताए शव अस्पताल से सीधे पोस्टमॉर्टम हाउस ले जा रही थी, लेकिन नाराज लोगों ने एम्बुलेंस को रोक लिया. तोड़फोड़ कर दी.
“हिंदुस्तान टाइम्स” की खबर है कि मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कापसाड़ गांव में अपहरण और हत्या की इस घटना से तनाव फैल गया है. 45 वर्षीय अनुसूचित जाति की महिला की जान अपनी 20 वर्षीय बेटी को बचाने में गई.
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी ठाकुर समुदाय से है और यह हमला और अपहरण लड़की द्वारा उससे दोस्ती करने से इनकार करने का परिणाम था. हालांकि, पुलिस आधिकारिक तौर पर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. गुरुवार शाम उपचार के दौरान पीड़िता ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रशासनिक कार्रवाई तेज कर दी गई.
अमेरिका द्वारा जब्त रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर के चालक दल में 3 भारतीय भी शामिल
‘रशिया टुडे’ (आर टी) की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को अमेरिकी सेना द्वारा जब्त किए गए रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर पर चालक दल के 28 सदस्य सवार थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. रूस के परिवहन मंत्रालय के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी ध्वज वाले इस तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को कैरिबियन सागर से पीछा करने के बाद उत्तरी अटलांटिक में जब्त किया गया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने वेनेजुएला के साथ कथित संबंधों के कारण इस टैंकर को जब्त किया है.
‘आरटी’ की रिपोर्ट के हवाले से ‘एचटी न्यूज़ डेस्क” की खबर है कि इस जहाज को एक निजी व्यापारी ने चार्टर किया था और इसका नाम ‘बेला 1’ था. यह गयाना के ध्वज के तहत संचालित हो रहा था. इसके 28 सदस्यीय चालक दल में जॉर्जिया के 6, यूक्रेन के 17, भारत के 3 और रूस के 2 नागरिक शामिल हैं.
रॉयटर्स के अनुसार, हाल के इतिहास में यह संभवतः पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने रूसी ध्वज वाले किसी जहाज को जब्त किया है. यह कार्रवाई पिछले शनिवार को काराकास में अमेरिकी विशेष बलों द्वारा किए गए उस गुप्त ऑपरेशन के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जिसमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था.
रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ के अनुसार, सत्तारूढ़ ‘यूनाइटेड रशिया’ पार्टी के एक वरिष्ठ रूसी सांसद आंद्रेई क्लिशस ने अमेरिका की इस कार्रवाई को “सरासर समुद्री डकैती” करार दिया है. रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना बलों के जहाज पर सवार होने के बाद उनका ‘मरीनेरा’ से सारा संपर्क टूट गया है. ‘आरटी’ ने एक हेलीकॉप्टर की तस्वीर भी दिखाई जो ‘मरीनेरा’ के पास मंडरा रहा था. रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिकी बल इस प्रतिबंधित टैंकर पर उतरने की कोशिश कर रहे थे.
गलवान के बाद सरकारी ठेकों में चीनी कंपनियों पर लगी रोक हटाने की योजना बना रहा है भारत
भारत का वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों (निविदाओं) में बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को खत्म करने की योजना बना रहा है. दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि सीमा पर तनाव कम होने के बाद नई दिल्ली अब व्यावसायिक संबंधों को पुनर्जीवित करना चाहती है. ये प्रतिबंध साल 2020 में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद लगाए गए थे. इसके तहत चीनी बोलीदाताओं के लिए एक भारतीय सरकारी समिति के पास पंजीकरण कराना और राजनीतिक एवं सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया था.
इन उपायों ने प्रभावी रूप से चीनी कंपनियों को उन भारतीय सरकारी अनुबंधों के लिए प्रतिस्पर्धा करने से रोक दिया था, जिनका मूल्य अनुमानित रूप से $700 बिलियन से $750 बिलियन (लगभग 58 से 62 लाख करोड़ रुपये) के बीच था. ‘रॉयटर्स’ को एक सूत्र ने बताया कि अधिकारी अब पंजीकरण की अनिवार्यता को हटाने पर काम कर रहे हैं. इस मामले में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय (पीएमओ) लेगा. हालांकि वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने ‘रॉयटर्स’ द्वारा टिप्पणी के अनुरोध पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
जानकारी के अनुसार, इन प्रतिबंधों का गहरा प्रभाव पड़ा था. सार्वजनिक होने के कुछ ही महीनों बाद, चीन की सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 216 मिलियन डॉलर के ट्रेन निर्माण अनुबंध (टेंडर) से अयोग्य घोषित कर दिया गया था. सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय द्वारा इन प्रतिबंधों में ढील देने की योजना उन अन्य सरकारी विभागों के अनुरोधों के बाद आई है, जो 2020 के प्रतिबंधों के कारण सामान की कमी और परियोजनाओं में देरी का सामना कर रहे हैं.
पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने भी इन प्रतिबंधों को कम करने की सिफारिश की है. ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा प्रतिबंध लगाने के तुरंत बाद, चीनी बोलीदाताओं को दिए गए नए प्रोजेक्ट्स का मूल्य 2021 में 27% गिरकर 1.67 बिलियन डॉलर रह गया. विशेष रूप से, बिजली क्षेत्र के उपकरणों के आयात पर लगी रोक ने अगले दशक में अपनी थर्मल पावर क्षमता को लगभग 307 गीगावॉट तक बढ़ाने की भारत की योजना में बाधा डाली है.
गुरुवार को रॉयटर्स की इस रिपोर्ट के बाद, चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना के चलते उपकरण निर्माता बीएचईएल (भेल) के शेयर 10.5% और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) के शेयर 3.1% गिरकर बंद हुए.
भारत-चीन संबंधों पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव
पिछले साल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने और वाशिंगटन के पाकिस्तान के साथ सुधरते संबंधों के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने सात वर्षों में पहली बार चीन का दौरा किया था. इस यात्रा के दौरान वे बीजिंग के साथ गहरे व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए थे. इस दौरे के बाद, भारत और चीन ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू कीं और नई दिल्ली ने चीनी पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा की मंजूरी में तेजी लाने के लिए कागजी कार्यवाही को कम किया.
हालांकि इन दो एशियाई दिग्गजों के बीच संबंधों में सुधार हुआ है, लेकिन भारत का दृष्टिकोण अभी भी सतर्क है, क्योंकि चीनी फर्मों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध अभी भी लागू हैं. इस बीच, अमेरिका द्वारा वाशिंगटन-नई दिल्ली व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर अनिश्चित संकेत दिए जा रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति भारत-चीन संबंधों को और बेहतर बनाने का अवसर दे सकती है.
माओवाद हुआ कमजोर, लेकिन मजबूत हुई खनन लॉबी : दांव पर बस्तर के जंगल
हाल ही में बीजापुर ज़िले के पेद्दाकोड़ेपाल गांव में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है. स्थानीय आदिवासियों और विहान बस्तर यूट्यूब चैनल के वीडियो के अनुसार, लगभग 100 एकड़ जंगल साफ कर दिया गया है. ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि यह कटाई ‘पेसा’ कानून और पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन कर, बिना ‘ग्राम सभा’ की अनुमति के की जा रही है. वन विभाग के अधिकारियों ने इसे ‘कूप कटाई’ (वैज्ञानिक तरीके से खराब पेड़ों की छंटाई) बताया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि महुआ और तेंदू जैसे फलदार हरे-भरे पेड़ों को भी काटा जा रहा है.
“द वायर” में संतोषी मरकाम की रिपोर्ट है कि छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे माओवादी आंदोलन कमजोर हो रहा है, आदिवासियों में अपनी ज़मीन छीने जाने का डर बढ़ रहा है. उन्हें लगता है कि सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी वास्तव में खदानों को सुरक्षा देने के लिए है. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास भी निजी खदानों को मंजूरी दी जा रही है. बस्तर का युवा वर्ग अब सोशल मीडिया के माध्यम से इन गतिविधियों का विरोध कर रहा है, क्योंकि उनका जीवन पूरी तरह से इन्हीं जंगलों और वनोपज पर निर्भर है.
रिपोर्ट कहती है कि बस्तर अब एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभर रहा है. सितंबर 2025 में आयोजित ‘बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट’ प्रोग्राम के माध्यम से सरकार ने लगभग 52,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है.
अकेले एनएमडीसी 43,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है. रेलवे (5,200 करोड़) और सड़क (2,300 करोड़) परियोजनाओं के लिए भारी आवंटन किया गया है. नई औद्योगिक नीति के तहत बस्तर के 88% ब्लॉक को ग्रुप-3 में रखा गया है, जहां उद्यमियों को भारी सब्सिडी और एससी-एसटी वर्ग के निवेशकों को 10% अतिरिक्त लाभ देने का प्रावधान है.
बस्तर संभाग खनिज संसाधनों का भंडार है. छत्तीसगढ़ माइंस की रिपोर्ट के अनुसार, यहां लौह अयस्क, चूना पत्थर, डोलोमाइट, बॉक्साइट, टिन, हीरा और लिथियम जैसे कीमती खनिजों के भंडार चिन्हित किए गए हैं. बैलाडीला की खदानों में आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील, रूंगटा सन्स और अडानी एंटरप्राइजेज (एमडीओ के रूप में) को ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. मार्च 2024 में हीरा और दुर्लभ खनिजों के अन्वेषण के लिए 1,478 वर्ग किमी क्षेत्र में निविदाएं जारी की गईं. 1970 से लंबित बोधघाट बहुउद्देश्यीय परियोजना को जून 2025 में प्रधानमंत्री द्वारा पुनः हरी झंडी दी गई है.
इस बीच विपक्ष (कांग्रेस और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस) का आरोप है कि सरकार नक्सलवाद खत्म करने के नाम पर ‘अडानीवाद’ को बढ़ावा दे रही है. अमित जोगी और दीपक बैज जैसे नेताओं का दावा है कि नगरनार स्टील प्लांट से लेकर बैलाडीला के डिपॉजिट-13 तक सब कुछ निजी हाथों (विशेषकर अडानी समूह) को सौंपने की तैयारी है. दूसरी ओर, गृह मंत्री अमित शाह ने 2030 तक बस्तर को देश का सबसे उन्नत आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प दोहराया है, जबकि उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आश्वासन दिया है कि जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय लोगों का ही हक रहेगा. कुलमिलाकर, बहरहाल, बस्तर में पहले से जारी और आगे आने वाली माइनिंग परियोजनाओं को लेकर पक्ष और विपक्ष चाहे जो भी कहें, माइनिंग लॉबी जितनी तेजी से बस्तर की ओर रुख कर रही है, उसे देखते हुए वहां की आदिवासी आबादी आशंकित है कि उनके जल-जंगल-जमीन के सामने गंभीर खतरा है.
बस्तर के युवा अब सोशल मीडिया में आए दिन नए-नए वीडियो डाल रहे हैं, जिसमें पेड़ काटे जाने या जंगलों के विनाश के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. उनकी शिकायत है कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है.
‘हिंसा, पत्थर या तीरों से नहीं...’: सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- शांति की अपील को अवैध रूप से छिपाया गया
लद्दाख स्थित पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शांति के लिए की गई उनकी अपील को जानबूझकर हिरासत में लेने वाले अधिकारियों से छिपाया गया. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि उनका पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया था, न कि “हिंसा, पत्थरों या तीरों के माध्यम से.”
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना वराले की पीठ के समक्ष सिब्बल ने कहा, “सोनम वांगचुक को वीडियो में साफ तौर पर अंग्रेजी में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आंदोलन हिंसा, पत्थर या तीरों के जरिए नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण साधनों से होगा.” सिब्बल ने पूरे आंदोलन में वांगचुक की निर्दोषता का दावा करते हुए कहा कि वांगचुक ने दूसरों को परेशान किए बिना बदलाव लाने के लिए एक ‘शांतिपूर्ण क्रांति’ की बात की थी. उन्होंने तर्क दिया कि वांगचुक ने न तो राज्य की सुरक्षा को खतरा पहुँचाया, न ही हिंसा का प्रचार किया.
कपिल सिब्बल ने जांच एजेंसी के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि वांगचुक के भाषण का लहजा राष्ट्रीय अखंडता और एकता के अनुरूप था, जो हिरासत आदेश में किए गए दावों के ठीक विपरीत है. सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि 26 सितंबर, 2025 का हिरासत आदेश मुख्य रूप से चार वीडियो पर आधारित था, लेकिन हिरासत के आधार बताते समय ये वीडियो बंदी (वांगचुक) को उपलब्ध नहीं कराए गए. उन्होंने कहा कि हिरासत प्राधिकरण से उस वीडियो को छिपाना, जिसमें वांगचुक हिंसा के खिलाफ बोल रहे थे, ‘दुर्भावना’ को दर्शाता है.
सुनवाई के दौरान अदालत में वांगचुक के कुछ वीडियो चलाए गए, जिन्हें जजों ने देखा. सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने पति की हिरासत को अवैध और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है. अंगमो ने अपनी संशोधित याचिका में कहा है कि वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का इस्तेमाल ‘असहमति के अधिकार’ को कुचलने की एक सोची-समझी कोशिश है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिन पांच एफआईआर (FIR) का हवाला दिया गया है, उनमें से तीन 2024 की हैं, जिनका सितंबर 2025 की हिरासत से कोई तार्किक संबंध नहीं है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 12 जनवरी को दोपहर 2 बजे तय की है.
भारत को ट्रम्प का दोहरा झटका: रूसी तेल पर 500% टैरिफ बिल को हरी झंडी, सोलर अलायंस से भी अमेरिका बाहर
भारत को गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसलों से दोहरे दबाव का सामना करना पड़ा. हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर “500% तक टैरिफ” लगाने वाले बिल का समर्थन किया है और साथ ही भारत के नेतृत्व वाले ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) से अमेरिका को बाहर करने का फैसला किया है.
यह घोषणाएं अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर के इस सप्ताहांत दिल्ली आगमन से ठीक पहले आई हैं. गोर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारत द्वारा रूसी तेल का आयात बंद करवाना उनकी “शीर्ष प्राथमिकता” है. पेरिस में, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की उपस्थिति में भारत द्वारा रूसी तेल आयात कम करने पर “संतोष” व्यक्त किया और कहा कि यह तेल खरीद पुतिन की ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित करती है. जयशंकर ने इस टिप्पणी का कोई खंडन नहीं किया.
ट्रम्प के करीबी सहयोगी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ने ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ को हरी झंडी दे दी है, जिस पर अगले सप्ताह अमेरिकी कांग्रेस में मतदान हो सकता है. ग्राहम ने कहा, “यह बिल राष्ट्रपति ट्रम्प को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ जबरदस्त लाभ देगा ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें.” इस बिल को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भारी समर्थन प्राप्त है.
रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ने दिसंबर के अधिकांश समय में अपने जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल का कोई कार्गो प्राप्त नहीं किया है और जनवरी में भी इसकी उम्मीद नहीं है, जो दर्शाता है कि निजी कंपनियों ने आदेश रोक दिए हैं. हालांकि, भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों ने नवंबर 2025 में अपनी खरीद बढ़ाई थी, लेकिन रिलायंस और नायरा एनर्जी (जो पहले से पश्चिमी प्रतिबंधों के तहत है) के बिना, भारत के लिए रूसी तेल की खरीद को पिछले स्तर पर बनाए रखना मुश्किल होगा.
सरकार ने ट्रम्प के दूसरे बड़े फैसले—आईएसए से बाहर निकलने—पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा शुरू किए गए इस गठबंधन में 90 से अधिक सदस्य हैं. अमेरिका का इससे और संयुक्त राष्ट्र के अन्य जलवायु निकायों से बाहर निकलना बहुपक्षवाद और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल का 82 वर्ष की आयु में निधन
प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में उनके आवास पर निधन हो गया. वे 82 वर्ष के थे. हिंदू के मुताबिक, उनके बेटे सिद्धार्थ गाडगिल ने बताया कि वे कुछ समय से बीमार थे. माधव गाडगिल को पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व पर उनके अभूतपूर्व काम के लिए जाना जाता था. साल 2024 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित किया था. उनकी अध्यक्षता वाली ‘पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल’ (डब्ल्यूजीईईपी) की रिपोर्ट ने इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करते हुए सख्त प्रतिबंधों की सिफारिश की थी. इसमें नई सड़कों, निर्माण और खनन पर रोक लगाने की बात कही गई थी, जिसने विकास बनाम पर्यावरण की एक बड़ी बहस छेड़ दी थी.
पिछले साल ‘द हिंदू’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने पश्चिमी घाट में हो रही त्रासदियों पर चिंता जताई थी और कहा था कि, “हमने देखा कि लोगों पर विकास का एक मॉडल थोपा गया. खनन और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग बिना सहमति के समुदायों पर लाद दिए गए.”
कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक महान वैज्ञानिक, फील्ड रिसर्चर और संस्थान निर्माता बताया. उन्होंने कहा, “वे आधुनिक विज्ञान में प्रशिक्षित थे, लेकिन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के भी हिमायती थे.” गाडगिल ने 1983 में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी IISc) के तहत ‘सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज’ की स्थापना की थी. उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वे अपने पीछे एक समृद्ध विरासत और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक स्पष्ट रोडमैप छोड़ गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट : ‘यदि उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं, तो सभापति के कामों का उप सभापति क्यों नहीं कर सकते?’
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि यदि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं, तो सभापति की अनुपस्थिति में राज्यसभा के उप-सभापति उनके कार्यों का निर्वहन क्यों नहीं कर सकते? यह टिप्पणी न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने की. पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की ओर से दी गई उस दलील को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्यसभा के उप-सभापति के पास किसी प्रस्ताव को खारिज करने की शक्ति नहीं है. ‘पीटीआई’ के मुताबिक, न्यायाधीश वर्मा की दलील थी कि ‘न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968’ के तहत किसी न्यायाधीश के खिलाफ प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्ति केवल (लोकसभा) अध्यक्ष और (राज्यसभा) सभापति के पास होती है.
उल्लेखनीय है कि 14 मार्च को नई दिल्ली स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर नोटों की जली हुई गड्डियां मिलने के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था. पीठ ने न्यायमूर्ति वर्मा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी है. अदालत ने सभी पक्षों को सोमवार तक अपनी लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है.
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने “कांग्रेस सरकार” के खिलाफ बम फेंका था
बकौल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1929 में कांग्रेस की सरकार थी और भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने “कांग्रेस सरकार” के खिलाफ बम फेंका था. शिवम प्रताप सिंह के अनुसार, मंगलवार को बजट सत्र के दौरान दिल्ली विधानसभा को संबोधित करते हुए रेखा गुप्ता शहर के इतिहास पर प्रकाश डाल रही थीं. उन्होंने महाभारत के संदर्भ से शुरुआत की. पृथ्वीराज चौहान जैसे दिग्गजों के बारे में बात की और फिर 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में किए गए बम विस्फोट का जिक्र किया.
कार्यवाही के आधिकारिक वेबकास्ट में 1 घंटे 45 मिनट के निशान पर उन्हें यह कहते सुना गया, “दिल्ली ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की क्रांति को सुना है, जब उन्होंने “बहरी कांग्रेस सरकार” के खिलाफ बम फेंका था.” जाहिर है, इसके बाद मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमलावर हो गई. आप विधायक संजीव झा ने गुप्ता के गलत ज्ञान पर तंज़ कसते हुए इसे “इतिहास का अपडेटेड वर्जन” करार दिया. झा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी ने दिल्ली विधानसभा में इतिहास का एक नया ‘अपडेटेड’ वर्जन पेश किया है. शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें अब कांग्रेस सरकार के खिलाफ बम फेंकने वालों के रूप में चित्रित किया जा रहा है.” बुराड़ी के विधायक ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि इतिहास अब “रिमिक्स मोड” में है. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “अगली बार शायद हम यह भी सुनें कि चंद्रगुप्त मौर्य ने गांधीजी के निर्देशन में अपने साम्राज्य का विस्तार किया था.”
आम आदमी पार्टी की दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने “भारत को शर्मिंदा किया है.” भारद्वाज ने कहा, “स्कूली बच्चे भी जानते हैं कि शहीद भगत सिंह ने 1929 में ब्रिटिश सरकार के विरोध में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंका था.” दिलचस्प यह है कि फिलहाल, रेखा गुप्ता या दिल्ली सरकार की ओर से आप के इन तंजों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. अन्यथा, आम तौर पर ऐसे मामलों में अक्सर यही कहा जाता है कि “बात को तोड़ मरोड़ के पेश किया” गया है.
राष्ट्रीय शूटिंग कोच पर यौन उत्पीड़न का मामला, राष्ट्रीय स्तर की महिला निशानेबाज की शिकायत
हरियाणा पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर की 17 वर्षीय एक महिला निशानेबाज के साथ फरीदाबाद के एक होटल में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में राष्ट्रीय शूटिंग कोच अंकुश भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने ‘पीटीआई’ को बताया, “उन्हें निलंबित कर दिया है और हम उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे.” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है. अब उन्हें खुद को निर्दोष साबित करना होगा. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वह किसी भी कोचिंग गतिविधि से नहीं जुड़ेंगे.”
शिकायत में कहा गया है कि भारद्वाज ने कथित तौर पर प्रदर्शन के मूल्यांकन के बहाने फरीदाबाद के एक होटल के कमरे में निशानेबाज का उत्पीड़न किया. पिछले साल अगस्त से भारद्वाज के साथ प्रशिक्षण ले रही शिकायतकर्ता खिलाड़ी ने बताया कि वह इस घटना से सदमे में थी और 1 जनवरी को अपनी मां द्वारा लगातार पूछे जाने पर उसने इस बारे में बात की.
उल्लेखनीय है कि अंकुश भारद्वाज ने 2008 के राष्ट्रमंडल युवा खेलों में 50 मीटर पिस्टल शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था. अपने प्रतिस्पर्धी दिनों के दौरान, भारद्वाज ने 2010 में ‘बीटा-ब्लॉकर’ के उपयोग के कारण डोपिंग प्रतिबंध भी झेला था.
हरकारा डीप डाइव : पंकज सेखसरिया
ग्रेट निकोबार: जब विकास का नक्शा ज़मीन से नहीं, ऊपर से बनाया जाता है
ग्रेट निकोबार अंडमान–निकोबार द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी और सबसे बड़ा द्वीप है. घने जंगलों, दुर्लभ जैव विविधता और सदियों से बसे आदिवासी समुदायों वाला यह इलाक़ा अब भारत की सबसे महंगी विकास परियोजनाओं में से एक का केंद्र है. हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में शोधकर्ता पंकज सेखसरिया बताते हैं कि यह परियोजना किस तरह एक अनछुए भूभाग को एक विशाल व्यावसायिक प्रयोग में बदलने जा रही है. 70 से 90 हज़ार करोड़ रुपये की इस योजना में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, पावर प्लांट और नया शहर शामिल है. इसके लिए सरकार के अपने आंकड़ों के मुताबिक़ कम से कम 10 लाख पेड़ काटे जाएंगे, जबकि वैज्ञानिकों का अनुमान इससे कहीं ज़्यादा है. यह सब एक ऐसे क्षेत्र में हो रहा है जिसे हाल ही में सिस्मिक ज़ोन 6 में रखा गया है, यानी यह देश के सबसे भूकंप-संवेदनशील इलाक़ों में से एक है.
सरकार का तर्क है कि ग्रेट निकोबार मलक्का स्ट्रेट्स के पास स्थित होने के कारण आर्थिक और रणनीतिक रूप से अहम है. लेकिन बातचीत में यह सवाल बार-बार उभरता है कि क्या यह निवेश वाकई आर्थिक रूप से टिकाऊ है. पत्रकारों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यह परियोजना उत्पादन आधारित नहीं, बल्कि केवल गुज़रते जहाज़ों पर निर्भर एक ट्रांजिट मॉडल है, जिसमें मुनाफ़े की संभावना बेहद सीमित है.
सबसे अहम सवाल आदिवासी समुदायों की सहमति का है. शॉम्पेन जैसे समुदायों से कभी औपचारिक बातचीत नहीं हुई. निकोबारी समुदाय ने पहले परियोजना को NOC दी, लेकिन बाद में लिखित रूप में उसे वापस ले लिया, यह कहते हुए कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी. फारेस्ट राइट एक्ट के उल्लंघन को लेकर मामला अदालत में भी है.
ग्रेट निकोबार का मामला यह दिखाता है कि जब विकास का खाका उन जगहों के लिए बनाया जाता है जहां आवाज़ें कम हैं, तो सवाल उठाने वाले भी कम रह जाते हैं. यह कहानी केवल एक द्वीप की नहीं है, बल्कि उस लोकतांत्रिक ज़िम्मेदारी की है जिसे अक्सर “राष्ट्रीय हित” के नाम पर टाल दिया जाता है.
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.








