10/01/2026: गौमूत्र घोटाला? | अयोध्या में मांस नहीं | ममता के चुनाव आयोग पर हमले जारी | एक हिंदू की सार्वजनिक माफ़ी | चीन बनाम हिंदू राष्ट्र | डोभाल के लिए मोदी नेपोलियन | इंदौर का पानी
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां
गोबर और गौमूत्र से कैंसर इलाज के नाम पर 3.5 करोड़ खर्च, जांच में वित्तीय गड़बड़ी मिली.
यति के भड़काऊ बोल: नरसिंहानंद ने हिंदुओं से बजरंग दल छोड़कर ISIS जैसा संगठन और आत्मघाती दस्ते बनाने को कहा.
ईरान सुलग रहा है: सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज, अस्पतालों में घायलों की भीड़, सर्जनों की कमी, 51 मौतें.
अयोध्या में मीट बैन: राम मंदिर के 15 किमी दायरे में नॉन-वेज डिलीवरी बंद, लेकिन शराब की दुकानें मौजूद.
शर्मनाक खेल: ग्रेटर नोएडा में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के दौरान खिलाड़ियों को कड़ाके की ठंड में हॉस्टल से निकाला गया.
एसआईआर के कारण 77 मौतें: ममता ने चुनाव आयोग पर फिर लगाए आरोप; अमानवीय स्थितियों की ओर इशारा
मतदाता सूची में गड़बड़ी को साजिश बताते हुए बंगाल की अधिकारी ने दिया इस्तीफा
ईडी बनाम ममता बनर्जी: बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, गिरफ्तारी से पहले सुनवाई की मांग
अजित डोभाल का बयान: भारत को इतिहास का ‘बदला’ लेना चाहिए, नेपोलियन के कथन से की पीएम मोदी की तुलना
राजू परूलेकर: शर्मिंदा हिंदू की सार्वजनिक माफी
मुरादाबाद में कॉलेज के बाहर मुस्लिम छात्र को आग लगाई, दो गिरफ्तार
महाराष्ट्र में मुर्शिदाबाद के प्रवासी श्रमिक को बांग्लादेशी समझ मार डाला, दूसरे की पंजाब में मौत
8 बच्चों समेत आगरा से 38 बांग्लादेश निर्वासित
पीसीबी के सर्वे में इंदौर के भूजल में मल संबंधी बैक्टीरिया की पुष्टि
मोदी के खिलाफ पोस्ट डालने के लिए लंदन स्थित डॉक्टर और उनकी पत्नी हिरासत में
राम मंदिर परिसर के भीतर नमाज़ पढ़ने की कोशिश करने पर महिला सहित तीन हिरासत में
बिहार की मैथिली अकादमी: 21 पद स्वीकृत, मगर कर्मचारी नहीं, 5 साल से कोई नई पुस्तक नहीं
गिग वर्कर की आपबीती: ‘दीपिंदर गोयल गलत हैं, यह नौकरी नहीं, मजबूरी का जाल है’
“पार्टी विद ए डिफरेंस”: भाजपा ने बदलापुर यौन उत्पादन के सह-आरोपी तुषार आप्टे को बना दिया पार्षद
आकार पटेल: इधर हिंदू राष्ट्र बनाते रह गये, उधर चीन कहाँ पहुंच गया
ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी: अस्पताल घायलों से पटे, ‘हमारे पास सर्जन कम पड़ गए हैं’
लंदन स्थित दूतावास पर इस्लामी क्रांति से पूर्व का ईरानी झंडा लगाया
गोबर और गौमूत्र से करोड़ों के घोटाले की बू
“द इंडियन एक्सप्रेस” की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में गाय के गोबर और गौमूत्र से कैंसर का इलाज खोजने के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में 2011 में शुरू की गई ‘पंचगव्य’ परियोजना अब जांच के दायरे में है. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य गाय के गोबर, मूत्र और दूध से बनी औषधियों द्वारा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज खोजना था. सरकार ने इसके लिए 3.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि भारी भरकम खर्च के बावजूद न तो कोई ठोस नतीजा निकला और न ही पैसों का सही हिसाब मिला.
रिपोर्टर आनंद मोहन जे बताते हैं कि संभागीय आयुक्त के आदेश पर हुई जांच में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से 2018 के बीच करीब 1.92 करोड़ रुपये केवल गोबर, गौमूत्र, गमले और अन्य कच्चे माल की खरीद पर खर्च कर दिए गए, जबकि जांचकर्ताओं का दावा है कि बाजार दर के हिसाब से इनकी कीमत 15 से 20 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए थी. इसके अलावा, शोध के नाम पर विश्वविद्यालय की टीम ने गोवा और बेंगलुरु जैसे शहरों की 23-24 हवाई यात्राएं कीं, जिनका शोध से कोई सीधा संबंध नहीं दिख रहा.
अतिरिक्त कलेक्टर रघुवर मरावी ने बताया कि जांच में एक ऐसी गाड़ी (कीमत 7.5 लाख रुपये) की खरीद का भी पता चला है, जिसकी मंजूरी मूल प्रस्ताव में नहीं थी. साथ ही, 7.5 लाख रुपये ईंधन और मेंटेनेंस पर और 15 लाख रुपये फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान पर खर्च किए गए. हालांकि, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एस. तोमर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया में सरकारी नियमों का पालन किया गया है और कोई घोटाला नहीं हुआ है. फिलहाल जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है.
अयोध्या: राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहार की डिलीवरी पर प्रतिबंध
अयोध्या प्रशासन ने राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की डिलीवरी पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह निर्णय उन शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें कहा गया था कि खाद्य वितरण कंपनियां (डिलीवरी कंपनियां) अयोध्या शहर की परिधि में मांसाहारी भोजन की आपूर्ति कर रही हैं, जो ‘पंच कोसी परिक्रमा’ क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
‘टाइम्स न्यूज नेटवर्क’ में अरशद अफजल खान के मुताबिक, अयोध्या शहर के उन होटलों और होमस्टे को भी चेतावनी जारी की गई है, जहां कथित तौर पर मेहमानों को मांसाहारी भोजन और मादक पेय (शराब) परोसे जा रहे थे.
अयोध्या के सहायक खाद्य आयुक्त मानिक चंद्र सिंह ने कहा, “हमें शिकायतें मिली थीं कि पहले से लागू प्रतिबंध के बावजूद, ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से पर्यटकों को मांसाहारी भोजन परोसा जा रहा था. इसके बाद ऑनलाइन नॉन-वेज डिलीवरी पर भी रोक लगा दी गई है.” उन्होंने आगे बताया कि सभी होटलों, दुकानदारों और डिलीवरी कंपनियों को प्रतिबंध के आदेश की जानकारी दे दी गई है. प्रशासन द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की जाएगी.
हालांकि, राम पथ पर अभी भी दो दर्जन से अधिक लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानें मौजूद हैं, जबकि अयोध्या नगर निगम ने पिछले मई में राम पथ के 14 किलोमीटर के हिस्से पर शराब और मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव अपनाया था. एक एएमसी अधिकारी ने कहा, “हमने फैजाबाद शहर में भी राम पथ पर मांस की दुकानों को हटाने की कोशिश की है, लेकिन राम पथ से शराब की दुकानों को हटाने के लिए हमें जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी.” रक्षा मामलों और अंतरराष्ट्रीय रणनीति के विशेषज्ञ सुशांत सिंह ने “एक्स” पर यह खबर शेयर करते हुए टिप्पणी की, “काश, उन्होंने यह जानने के लिए कई रामायण पढ़ी होतीं कि राम और सीता क्या खाते थे, विशेष रूप से तब जब राजकुमार जंगल में शिकार कर रहे थे.”
‘एसआईआर के कारण 77 मौतें’: ममता ने चुनाव आयोग पर फिर लगाए आरोप; ‘अमानवीय’ स्थितियों की ओर इशारा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) की निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया, जिससे रचनात्मक होने की उम्मीद थी, अब तक 77 लोगों की जान ले चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ गई है.
“टीओआई न्यूज़ डेस्क” के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा, “यह चौंकाने वाला है कि एक ऐसा अभ्यास जिसे रचनात्मक और उत्पादक होना चाहिए था, उसमें अब तक 77 मौतें हो चुकी हैं, साथ ही आत्महत्या के 4 प्रयास और 17 व्यक्तियों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.”
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रक्रिया “आम नागरिकों को लगातार प्रताड़ित” कर रही है और मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण मानवीय निर्णय के बिना पूरी तरह से तकनीकी डेटा के आधार पर किया जा रहा है.
ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ईसीआई) ने उचित योजना के बिना यह प्रक्रिया शुरू की है, जिससे “आयोग द्वारा किए गए इस अनियोजित अभ्यास के कारण भय, डराने-धमकाने का माहौल और काम का अत्यधिक बोझ पैदा हो गया है,” मुख्यमंत्री ने लिखा.
खास बात यह है कि टाइप किये हुए इस पत्र में ममता ने अपनी कलम से ज्ञानेश कुमार को लिखा, “यद्यपि, मैं जानती हूं कि आप इस पत्र का कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं देंगे. लेकिन आपको पूरे विवरण से अवगत करवाना मेरा कर्तव्य था.”
मतदाता सूची में गड़बड़ी को ‘साजिश’ बताते हुए बंगाल की अधिकारी ने दिया इस्तीफा
“द न्यू इंडियन एक्सप्रेस” के लिए शुभेंदु माइती की रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में एक सहायक चुनाव पंजीयन अधिकारी (असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) मौसमी सरकार ने मतदाता सूची में चल रही गड़बड़ियों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. मौसमी, जो एक राज्य सेवा के अधिकारी हैं, ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ‘लॉजिकल विसंगतियों’ के नाम पर जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों का मताधिकार छीनने की एक साजिश हो सकती है.
अपने इस्तीफे में मौसमी ने लिखा है कि 2002 की मतदाता सूची के पीडीएफ डेटा को डिजिटल फॉर्मेट में बदलते समय कई तकनीकी खामियां रह गई थीं. कई मतदाताओं के नाम में केवल ‘या’ (Ya) लिखा है या उनकी उम्र और लिंग गलत दर्ज है. अब इन पुरानी गलतियों को आधार बनाकर लोगों से सबूत मांगे जा रहे हैं. उन्होंने कहा, “यह उन गरीब लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की चाल है, जिनके पास अपनी नागरिकता साबित करने के लिए आयोग द्वारा मांगे गए 12 दस्तावेज नहीं हैं.”
मौसमी ने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के साथ समझौता नहीं कर सकतीं, इसलिए इस्तीफा दे रही हैं ताकि उन्हें यह तसल्ली रहे कि उन्होंने देशवासियों के साथ विश्वासघात नहीं किया. उनका इस्तीफा चुनाव आयोग की सुनवाई से ठीक पहले आया है, जिससे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में हड़कंप मच गया है.
ईडी बनाम ममता बनर्जी: बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, गिरफ्तारी से पहले सुनवाई की मांग
टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. शनिवार को ममता बनर्जी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक ‘कैविएट’ दाखिल की है. इसमें अनुरोध किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी के मामले में राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना कोर्ट कोई भी आदेश पारित न करे. इसे राज्य सरकार का एक एहतियाती कदम माना जा रहा है, क्योंकि ईडी भी जल्द ही शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है.
कलकत्ता हाई कोर्ट में पहले से ही यह मामला गर्माया हुआ है. ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान “जबरन चोरी” की और डिजिटल डिवाइस व फाइलें अपने साथ ले गईं. ईडी ने इस पूरी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है और पुलिस कमिश्नर समेत वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. वहीं, ममता बनर्जी का कहना है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और वह केवल अपनी पार्टी के डेटा और चुनावी रणनीति को चोरी होने से बचा रही थीं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि एक तरफ ईडी कानूनी लड़ाई लड़ रही है, तो दूसरी तरफ कोलकाता पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही जांच शुरू कर दी है. शेक्सपियर सरानी और इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन की टीमें आई-पैक के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर हुई छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं. यह लड़ाई अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी आर-पार की हो गई है.
अजित डोभाल का बयान: भारत को इतिहास का ‘बदला’ लेना चाहिए, नेपोलियन के कथन से की पीएम मोदी की तुलना
“द टेलीग्राफ इंडिया” की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने दिल्ली में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है. डोभाल ने कहा कि भारत को अपने दर्दनाक इतिहास, आक्रमणों और अधीनता का “बदला” लेना चाहिए. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बदला लेने का मतलब किसी पर हमला करना नहीं, बल्कि देश को इतना शक्तिशाली और मूल्यों पर आधारित बनाना है कि दोबारा कोई हम पर हावी न हो सके.
डोभाल ने 3,000 युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “हम एक प्रगतिशील समाज थे, हमने कभी किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन सुरक्षा के प्रति जागरूक न होने के कारण हमारा इतिहास दुखद रहा. हमारे मंदिर तोड़े गए, गांव लूटे गए और हम मूकदर्शक बने रहे.” उन्होंने कहा कि अगर आपके पास शक्ति है, तो ही आप स्वतंत्र रह सकते हैं.
अपने भाषण में उन्होंने परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के लिए नेपोलियन बोनापार्ट के एक कथन का इस्तेमाल किया: “मैं भेड़ों के उस झुंड से नहीं डरता जिसका नेतृत्व एक शेर कर रहा हो, लेकिन शेरों के उस झुंड से डरता हूं जिसका नेतृत्व एक भेड़ कर रही हो.” डोभाल ने कहा कि आज भारत भाग्यशाली है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला है. हालांकि, रिपोर्ट में इतिहासकार डी.एन. झा के हवाले से यह भी बताया गया है कि प्राचीन भारत पूरी तरह अहिंसक नहीं था और चोल राजाओं ने भी दूसरे देशों पर आक्रमण किए थे.
राजू परूलेकर: शर्मिंदा हिंदू की सार्वजनिक माफ़ी
लेखक राजू परुलेकर ने देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ बढ़ती नफ़रत, मॉब लिंचिंग, संस्थागत चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण के माहौल पर एक भावुक लेकिन बेहद कठोर ट्वीट थ्रेड जारी किया है. इस ट्वीट में उन्होंने स्वयं को “शर्मिंदा हिंदू” बताते हुए 2014 के बाद अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों, के ख़िलाफ़ बढ़े अत्याचारों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे ऐसे समाज और ऐसे धर्म से स्वयं को अलग करना चाहते हैं जो हिंसा, बहिष्कार और अमानवीयता को सामान्य बनाता जा रहा है.
परुलेकर ने अपने ट्वीट में विशेष रूप से अपने ब्राह्मण हिंदू मित्रों, साथियों और फ़ॉलोअर्स से अपील की है कि वे इस अन्याय के ख़िलाफ़ चुप्पी तोड़ें और सामूहिक रूप से आवाज़ उठाएँ.
यह ट्वीट ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा, भीड़ द्वारा हत्याएँ, शिक्षा संस्थानों में भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों के क्षरण को लेकर चिंताएँ लगातार गहराती जा रही हैं.
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस विवाद और ट्वीट का संदर्भ
राजू परुलेकर का यह ट्वीट जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ से एमबीबीएस कोर्स की अनुमति वापस लिए जाने के फ़ैसले के बाद सामने आया. इसी संदर्भ में वे लिखते हैं,“मेरे प्यारे देशवासी मुस्लिम भाइयों और बहनों,
मैं मोदी सरकार द्वारा 2014 से आप सभी के साथ हो रहे लगातार अत्याचारों के लिए तहे दिल से माफी मांगता हूँ.”
आगे वे लिखते हैं कि“हज़ारों-लाखों मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने इस देश को बनाने के लिए अपना खून और जान दी, जब आरएसएस के गद्दार अंग्रेजों के साथ मिले हुए थे.”
माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि “जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से एमबीबीएस कोर्स वापस लेने पर कुछ खुद को हिंदू कहने वालों को जो शैतानी खुशी मिल रही है, वह इतनी निराशाजनक और घिनौनी है कि मैं इस तरह के हिंदू समुदाय से जुड़ना नहीं चाहता.”
संवैधानिक मूल्यों और अंबेडकर की पीड़ा
अपने ट्वीट में परुलेकर संविधान और सामाजिक नैतिकता के क्षरण को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हैं,“मेरी निराशा और दुख इतना गहरा है कि अब मुझे एहसास हो रहा है और मैं उस दर्द को महसूस कर रहा हूँ जो डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने इस नफरत भरे, शैतानी, अमानवीय सामाजिक व्यवस्था को छोड़ते समय महसूस किया होगा.”
वे आगे लिखते हैं कि “मनुस्मृति के मानने वाले उसी संविधान का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसने आप सभी, अन्य अल्पसंख्यकों और गरीब और पिछड़े लोगों को 15-08-1947 को आज़ाद हुए भारत में एक सम्मानजनक, बराबरी का दर्जा देने का वादा किया था. न तो यह वह भारत है, और न ही उस संविधान के रक्षक सुरक्षित हैं.”
एनएमसी का फ़ैसला और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मंगलवार देर रात माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट को एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति यह कहते हुए वापस ले ली कि कॉलेज में शिक्षकों और क्लिनिकल सुविधाओं की गंभीर कमी है. यह फ़ैसला उस समय आया जब श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति, जो लगभग 60 आरएसएस और बीजेपी समर्थक संगठनों का समूह बताई जाती है, कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रही थी और मुस्लिम छात्रों के दाख़िले का विरोध कर रही थी.
कॉलेज के पहले एमबीबीएस बैच में कुल 50 छात्र थे, जिनमें से 44 छात्र मुस्लिम थे. इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्लाह ने संघर्ष समिति के नेताओं और बीजेपी पर आरोप लगाया कि उन्होंने एनएमसी के फैसले का जश्न मनाया.
हिंसा, अमानवीयकरण और डर का माहौल
राजू परुलेकर अपने ट्वीट में देश के मौजूदा हालात का एक भयावह चित्र खींचते हैं, “मुसलमानों की लिंचिंग करना, उन्हें अमानवीय बनाना, उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना, उनके घरों पर बुलडोजर चलाना और उन्हें ज़बरदस्ती बांग्लादेश भेजना… यहाँ तक कि एक मुस्लिम सांसद भी सुरक्षित नहीं है.”
वे आगे लिखते हैं कि “मेरा दम घुट रहा है, मैं सचमुच सांस लेने के लिए हांफ रहा हूँ, जैसे-जैसे घटनाओं की कड़ी मेरे दिमाग में एक तेज़ फॉरवर्ड वीडियो की तरह चल रही है, जिसमें खून, मदद के लिए चीखें, खंजर और तलवारों से इंसानों को काटा जा रहा है, मासूम युवा कश्मीरी मुसलमानों पर गोलियां चलाई जा रही हैं, गरीब ट्रक ड्राइवरों को पीटा जा रहा है, भीड़ द्वारा मारा जा रहा है और गाय की तस्करी के नफरत भरे, अमानवीय और झूठे हिंदुत्व के नाम पर मार डाला जा रहा है.”
और यह सवाल उठाते हैं कि “क्या तुम्हारा धर्म इसी बारे में है?”
हिंदू धर्म बनाम हिंसक राजनीति
परुलेकर हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए पूछते हैं कि “मैंने वेद, उपनिषद, गीता, रामायण, महाभारत पढ़े हैं. किस श्लोक के आधार पर मुसलमानों को भीड़ द्वारा मारा जा रहा है?” “माफ़ करें, यह किसी भी कल्पना से हिंदू धर्म नहीं है. यह तालिबान की तरह हिंदू धर्म का इस्तेमाल लोगों को मारने, सत्ता और नियंत्रण के लिए किया जा रहा है.”
विपक्ष पर भी सवाल
अपने ट्वीट में वे कांग्रेस और विपक्ष की भूमिका पर भी तीखा सवाल उठाते हैं.“कांग्रेस पार्टी हमारे मुस्लिम भाइयों की रक्षा करने में बुरी तरह विफल रही है… 2014 से कांग्रेस और विपक्ष के सांसदों, विधायकों ने इस बारे में क्या किया है?”
एक सार्वजनिक आत्ममंथन
ट्वीट के अंत में परुलेकर कहते हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से कमजोर हैं, लेकिन चाहते हैं कि खासकर हिंदू और ब्राह्मण समुदाय के लोग इस अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े हों और इसे सामान्य मानने से इनकार करें.
यह ट्वीट केवल एक व्यक्तिगत भावुक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत में लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक नैतिकता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है.
मैं व्यक्तिगत रूप से इसके बारे में कुछ भी करने के लिए बहुत कमजोर हूँ, लेकिन मुझे उम्मीद है और मेरी इच्छा है कि मेरे साथी भारतीय, दोस्त और फॉलोअर्स, हमारे मुस्लिम, गरीब, पिछड़े, दलित वर्ग के भाइयों और बहनों को दिखाएं कि मोदी सरकार जो उनके ख़िलाफ़ कर रही है, हम सब ऐसी राजनीति के ख़िलाफ़ हैं.
हिंदू राष्ट्र और नफरत के खेल
‘बजरंग दल छोड़ो, आईएसआईएस जैसा संगठन बनाओ और आत्मघाती दस्ते तैयार करो’: यति नरसिंहानंद का भड़काऊ आह्वान
ऑल्ट न्यूज़ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के विवादास्पद मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद गिरी ने एक बार फिर बेहद भड़काऊ और खतरनाक बयान दिया है. रिपोर्टर पवन कुमार बताते हैं कि नरसिंहानंद ने एक वीडियो जारी कर हिंदुओं से अपील की है कि वे बजरंग दल जैसे संगठनों को छोड़ दें और इसके बजाय आईएसआईएस जैसा एक संगठन खड़ा करें. इतना ही नहीं, उन्होंने हिंदुओं से ‘आत्मघाती दस्ते’ (सुसाइड स्क्वॉड) बनाने का भी आह्वान किया है.
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब ‘हिंदू रक्षा दल’ (एचआरडी) के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा दिल्ली और गाजियाबाद में खुलेआम तलवारें बांटी जा रही हैं. यति नरसिंहानंद, जो हेट स्पीच के कई मामलों में जमानत पर बाहर हैं, ने पिंकी चौधरी के इस कदम का न केवल समर्थन किया, बल्कि इसे नाकाफी बताते हुए और भी आधुनिक और घातक हथियार बांटने की वकालत की. उन्होंने पिंकी चौधरी की तारीफ करते हुए कहा कि समाज को ऐसे ही साहस की जरूरत है.
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि 29 दिसंबर को हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके साथियों ने गाजियाबाद स्थित अपने कार्यालय से हिंदू परिवारों को तलवारें बांटीं. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, इसलिए भारत में हिंदुओं को अपनी रक्षा के लिए हथियार उठाने होंगे. यह वितरण केवल दफ्तर के अंदर सीमित नहीं था, बल्कि सड़कों पर खुलेआम तलवारें लहराई गईं, जिससे अफरा-तफरी मच गई. लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर छोड़कर भागने लगे और आसपास के निवासी डर के मारे घरों में दुबक गए. पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए 16 नामजद और 25-30 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और 10 लोगों को गिरफ्तार किया.
मुख्य आरोपी पिंकी चौधरी घटना के बाद एक हफ्ते तक पुलिस की गिरफ्त से बचते रहे, लेकिन आखिरकार 6 जनवरी, 2026 को गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. अपनी फरारी के दौरान भी वह सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय थे और वीडियो जारी कर पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए अपने कृत्य को सही ठहरा रहे थे. इसी मामले में एक अन्य आरोपी अन्नू चौधरी अभी भी फरार है, लेकिन वह भी वीडियो के जरिए हिंदुओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने के लिए उकसा रहा है.
रिपोर्ट में इस बात का भी विश्लेषण किया गया है कि इस तरह के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को किस तरह का ‘संस्थागत समर्थन’ मिल रहा है. हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी मुस्लिम विरोधी भाषण दिए गए थे. ऑल्ट न्यूज़ ने रेखांकित किया है कि यति नरसिंहानंद अपनी जमानत शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं, जिसमें उन्हें किसी भी तरह के वैमनस्य फैलाने वाले बयान न देने की हिदायत दी गई थी, फिर भी प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है.
मुरादाबाद में कॉलेज के बाहर मुस्लिम छात्र को आग लगाई, दो गिरफ्तार
उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद में हिंदू कॉलेज के बाहर दिनदहाड़े हुए एक कथित आगजनी के हमले में 19 वर्षीय मुस्लिम छात्र घायल हो गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई और कैंपस की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.
बी.कॉम तीसरे सेमेस्टर के छात्र फरहाद अली पर उस समय हमला किया गया, जब वह परीक्षा हॉल से बाहर निकला ही था. पुलिस ने बताया कि जलने के कारण उसे चोटें आईं और इस वजह से उसको अस्पताल ले जाया गया.
पुलिस के अनुसार, उसी कॉलेज के दो छात्रों, 21 वर्षीय आरुष सिंह (बी.ए. तीसरे सेमेस्टर) और 20 वर्षीय दीपक कुमार ने कथित तौर पर कॉलेज गेट के पास पीड़ित पर एक ज्वलनशील पदार्थ फेंका और उसे आग लगा दी. पुलिस ने बताया कि बाद में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. “द टाइम्स ऑफ इंडिया” से बात करते हुए पीड़ित फरहाद ने पुलिस की इस थ्योरी से इनकार किया कि यह महज एक दुर्घटना थी. उसने कहा, “पुलिस कह रही है कि तेल धोखे से गिर गया. यदि ऐसा है तो फिर आरोपियों ने लाइटर का इस्तेमाल क्यों किया?”
महाराष्ट्र में मुर्शिदाबाद के प्रवासी श्रमिक को बांग्लादेशी समझ मार डाला, दूसरे की पंजाब में मौत
ओडिशा के बाद अब महाराष्ट्र और पंजाब में मुर्शिदाबाद के दो और प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार, रानीतला के अमदाहरा गांव के निवासी रिंतु शेख (25) की शुक्रवार रात महाराष्ट्र के हाटीगंज इलाके में बेरहमी से हत्या कर दी गई. आरोप है कि हमलावरों ने उसे बांग्लादेशी समझकर उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया और उसके साथ बार-बार मारपीट की, फिर उसे बंद कर दिया. बाद में अन्य सह-प्रवासियों ने उसे बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. “डेक्कन क्रॉनिकल” के मुताबिक, मृतक की माँ आलिया ने शिकायत करते हुए कहा, “मेरा बेटा निर्दोष था, उन्होंने उसे सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि वह बंगाली बोलने वाला व्यक्ति था. वह हमारे परिवार का इकलौता कमाने वाला था और सात महीने पहले मुंबई, महाराष्ट्र गया था.” हालांकि, महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पांच अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
पीड़ित के रिश्तेदार जुम्मत अली ने कहा, “हम बहुत डरे हुए हैं क्योंकि वैध दस्तावेज होने के बावजूद एक-एक करके निर्दोष बंगाली भाषी प्रवासी श्रमिकों को बांग्लादेशी समझकर महाराष्ट्र या ओडिशा में मार दिया जा रहा है. मैंने अपील की है कि हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इन राज्यों से बात करनी चाहिए और दोषियों को तुरंत मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.” लुधियाना, पंजाब में एक अन्य प्रवासी श्रमिक मफीदुल शेख (30), जो हरिहरपाड़ा थाना क्षेत्र के खलीलाबाद गांव का स्थायी निवासी था, शनिवार सुबह ड्यूटी पर जाते समय सड़क पार करते वक्त एक तेज रफ्तार लॉरी की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई.
8 बच्चों समेत आगरा से 38 बांग्लादेश निर्वासित
इस बीच ‘पीटीआई’ की खबर है कि आगरा से शनिवार को आठ बच्चों सहित 38 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित (डिपोर्ट) कर दिया गया. सहायक पुलिस आयुक्त (इंटेलिजेंस) दिनेश सिंह ने बताया कि 5 फरवरी, 2022 को सिकंदरा थाना क्षेत्र के सेक्टर 15 में 38 बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रहते हुए पाए गए थे. इनमें से 30 वयस्क (पुरुष और महिला) और आठ नाबालिग थे. उनमें से किसी के भी पास कोई वैध दस्तावेज़ नहीं था. उन्होंने बताया कि पुलिस ने अवैध रूप से रहने के आरोप में उन्हें अदालत में पेश किया था और अदालत ने उन्हें विदेशी अधिनियम (फॉरेनर्स एक्ट) के तहत सजा सुनाई थी. सिंह ने कहा कि अपनी सजा पूरी करने के बाद, उन्हें शनिवार को वाहनों द्वारा बांग्लादेश सीमा पर भेज दिया गया. उन्हें 13 जनवरी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया जाएगा.
पीसीबी के सर्वे में इंदौर के भूजल में मल संबंधी बैक्टीरिया की पुष्टि
मध्यप्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) द्वारा इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में किए गए एक सर्वेक्षण में भूजल के दूषित होने की बात सामने आई है. मंडल के एक क्षेत्रीय वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इन क्षेत्रों के कुछ ट्यूबवेलों से लिए गए पानी के नमूनों में ‘फेकल कोलीफॉर्म’ (मल संबंधी बैक्टीरिया) की उपस्थिति पाई गई है, जो स्पष्ट रूप से इन क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का संकेत देती है.
अधिकारी ने कहा कि यह इन क्षेत्रों में जल संदूषण की भयावहता को दर्शाता है. उनके अनुसार, भागीरथपुरा—जहाँ दूषित पानी के कारण कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा—और उसके आसपास के इलाकों में नर्मदा आपूर्ति लाइन और ट्यूबवेलों से 50 नमूने एकत्र किए गए थे. इन नमूनों में ‘फेकल कोलीफॉर्म’ की पुष्टि हुई है, जिससे पता चलता है कि प्रदूषण पेयजल आपूर्ति लाइन से भी आगे तक फैल चुका है.
रबींद्र नाथ चौधरी के अनुसार, यह सर्वेक्षण प्रदूषण के स्रोत या स्रोतों का पता लगाने के अभ्यास के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था. हालांकि, आधिकारिक तौर पर भागीरथपुरा में दूषित पानी से होने वाली मौतों की संख्या 8 बताई गई है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने क्षेत्र के 18 मृतक व्यक्तियों के परिवारों को वित्तीय सहायता जारी की है.
एक अध्ययन से पता चला है कि स्वच्छ सर्वेक्षणों में लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुने गए इंदौर के नगर निगम के बजट में पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता के लिए मात्र 25-30 प्रतिशत का आवंटन किया गया है. वर्ष 2025-2026 के लिए, नगर निगम ने अपने 8,236.98 करोड़ रुपये के प्रस्तावित वार्षिक बजट में से पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता के लिए 2,450 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं.
मोदी के खिलाफ पोस्ट डालने के लिए लंदन स्थित डॉक्टर और उनकी पत्नी हिरासत में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में महाराष्ट्र के जलगांव मूल के ब्रिटिश नागरिक डॉ. संग्राम पाटिल को शनिवार को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है. अधिकारियों ने बताया कि पाटिल और उनकी पत्नी से पूछताछ की गई और प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. डॉ. पाटिल और उनकी पत्नी, जो स्वयं भी एक डॉक्टर हैं, पिछले कई वर्षों से लंदन में रह रहे हैं.
सुधीर सूर्यवंशी के अनुसार, यह कार्रवाई भाजपा मीडिया सेल के पदाधिकारी निखिल भामरे की शिकायत पर दर्ज मानहानि के मामले के आधार पर की गई थी. भामरे ने आरोप लगाया कि पाटिल ने पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी.
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने डॉ. संग्राम पाटिल को गिरफ्तार करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र एक लोकतांत्रिक राज्य है, लेकिन इसके मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आचरण “पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण” है. सपकाल ने कहा, “हम इस गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. भाजपा और उसके नेता अपनी आलोचना के प्रति इतने असहिष्णु क्यों हैं? लोकतंत्र में, प्रत्येक नागरिक को सरकार और सत्ता में बैठे नेताओं की कमियां निकालने और उनकी आलोचना करने का अधिकार है.”
राम मंदिर परिसर के भीतर नमाज़ पढ़ने की कोशिश करने पर महिला सहित तीन हिरासत में
एक चौंकाने वाली घटना और कथित तौर पर सुरक्षा में एक बड़ी चूक के मामले में, शनिवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश करने और नमाज़ पढ़ने का प्रयास करने के बाद एक युवती सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया गया. नमिता बाजपेयी की खबर है कि कश्मीर के निवासी होने का दावा करने वाले दो युवकों और एक महिला ने डी1 गेट के माध्यम से राम मंदिर परिसर में प्रवेश किया. इनमें से एक युवक मंदिर की रसोई के पास बैठ गया और ‘नमाज़’ पढ़ने लगा, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और पूछताछ के लिए तीनों को हिरासत में ले लिया.
हिरासत में लिए गए व्यक्तियों ने कश्मीरी पोशाक पहनी हुई थी. उनमें से एक की पहचान जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के निवासी अबू अहमद शेख के रूप में हुई है. महिला की पहचान सोफिया के रूप में हुई है, जबकि तीसरे युवक की पहचान की पुष्टि होना अभी बाकी है. प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि जब सुरक्षाकर्मियों ने तीनों को रोका, तो उन्होंने कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए.
बिहार की मैथिली अकादमी: 21 पद स्वीकृत, मगर कर्मचारी नहीं, 5 साल से कोई नई पुस्तक नहीं
“द इंडियन एक्सप्रेस” में संतोष सिंह की एक रिपोर्ट बताती है कि बिहार की प्रतिष्ठित मैथिली अकादमी, जिसने कभी साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतने वाली नौ कृतियां दी थीं, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. पटना के राजेंद्र नगर स्थित बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के परिसर में चल रही यह अकादमी अब केवल एक कमरे में सिमट कर रह गई है. वहां न कोई कर्मचारी है, न कोई हलचल, बस एक सन्नाटा पसरा है.
1976 में स्थापित इस अकादमी का उद्देश्य मैथिली भाषा का प्रचार-प्रसार करना था. लेकिन सरकारी उदासीनता और स्टाफ की कमी ने इसे बर्बाद कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, अकादमी में 21 कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में वहां एक भी कर्मचारी नहीं है. जो एकमात्र कर्मचारी था, उसे भी वापस भेज दिया गया है. स्थिति यह है कि 2021 के बाद से अकादमी ने कोई नई किताब प्रकाशित नहीं की है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और अन्य लेखकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अकादमी को बचाने की गुहार लगाई है. विडंबना यह है कि खस्ताहाल होने के बावजूद अकादमी ने 2023 में किताबों की बिक्री से करीब 8-9 लाख रुपये का राजस्व कमाया था. सिर्फ मैथिली ही नहीं, हिंदी (राष्ट्रभाषा परिषद) और संस्कृत अकादमियों का भी यही हाल है. वहां किताबें फर्श पर धूल फांक रही हैं और दीमक का शिकार हो रही हैं. चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा कहते हैं, “सरकार भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन हकीकत में इन संस्थानों को डूबने के लिए छोड़ दिया गया है.”
गिग वर्कर की आपबीती: ‘दीपिंदर गोयल गलत हैं, यह नौकरी नहीं, मजबूरी का जाल है’
“स्क्रॉल” में प्रकाशित एक रिपोर्ट में गिग वर्कर और संगठनकर्ता जावेद सिद्दीकी ने ज़ोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डिलीवरी सेक्टर में कर्मचारियों का जल्दी नौकरी छोड़ना असल में उनके कौशल विकास और बेहतर भविष्य का संकेत है. जावेद लिखते हैं कि यह दावा जमीनी हकीकत से कोसों दूर है.
जावेद के अनुसार, डिलीवरी बॉय का काम ‘करियर की सीढ़ी’ नहीं, बल्कि ‘मजबूरी का जाल’ है. अधिकांश युवा इसे इसलिए चुनते हैं, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं होता. 16 से 18 घंटे काम करने के बाद भी उनकी कमाई इतनी नहीं होती कि वे बचत कर सकें. लेख में राघव, सुरजीत और विजेंद्र जैसे वर्कर्स का उदाहरण दिया गया है. राघव को लॉकडाउन के बाद मजबूरी में यह काम करना पड़ा, लेकिन गिरते पे-आउट ने उसे तोड़ दिया. वहीं, समीर एक दुर्घटना का शिकार हुआ, लेकिन कंपनी ने मदद करने के बजाय उस पर ही 15,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया.
जावेद लिखते हैं कि कंपनियां जिसे ‘फ्लेक्सिबिलिटी’ (लचीलापन) कहती हैं, वह असल में असुरक्षा है. दुर्घटना होने पर कोई बीमा नहीं, बीमार पड़ने पर कोई छुट्टी नहीं और रेटिंग गिरने पर आईडी ब्लॉक होने का डर हमेशा बना रहता है. वर्कर्स के पास अपने परिवार के लिए वक्त नहीं बचता. सुरजीत की मां ने तो यहां तक कह दिया था, “बेटा, अब तो तेरा चेहरा भी नहीं दिखता.” लेख का निष्कर्ष है कि वर्कर्स अपनी मर्जी से या बेहतर मौके के लिए नौकरी नहीं छोड़ते, बल्कि थकान, कम पैसे और अमानवीय परिस्थितियों से तंग आकर भागते हैं. इसे रोकने के लिए सरकार को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के नियम बनाने होंगे.
“पार्टी विद अ डिफरेंस”: भाजपा ने बदलापुर यौन उत्पीड़न के सह-आरोपी तुषार आप्टे को बना दिया पार्षद
भाजपा दूसरों से खुद को अलग दिखाने के लिए अक्सर “पार्टी विद अ डिफरेंस” का दावा करती है, लेकिन उसके फैसले इस दावे को झुठलाते हैं. यदि अपने ही गढ़े नारे पर वह अमल करती तो महाराष्ट्र में यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी को पार्षद नियुक्त नहीं किया जाता.
सुधीर सूर्यवंशी की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में बदलापुर नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले के सह-आरोपी तुषार आप्टे को भाजपा ने शुक्रवार को बदलापुर नगर परिषद में सह-नियोजित पार्षद नियुक्त कर दिया. इस बात की भी परवाह नहीं की कि इसका आम जनमानस में क्या संदेश जाएगा. जाहिर है, इस फैसले से व्यापक आक्रोश फैल गया, जिसके कारण पार्टी को उसी दिन अपना निर्णय वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा.
तुषार आप्टे उस शिक्षण संस्थान के सचिव थे, जहां अक्षय शिंदे द्वारा कथित तौर पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया था. बाद में, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले अक्षय शिंदे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था.
दरअसल, बदलापुर नगर परिषद ने अपने सह-नियोजित कॉर्पोरेटर्स (पार्षदों) की सूची प्रकाशित की थी, जिसमें भाजपा और शिवसेना ने दो-दो, जबकि अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एनसीपी) ने एक कॉर्पोरेटर नामित किया था. भाजपा की सूची में 2024 के बदलापुर मामले के सह-आरोपी तुषार आप्टे का नाम शामिल था. आश्चर्यजनक यह है कि स्थानीय भाजपा नेताओं ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि आप्टे केवल एक सह-आरोपी हैं और उनके खिलाफ आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं. एक भाजपा नेता ने कहा, “आप्टे एक बहुत ही प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और एक प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान के ट्रस्टी हैं. इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में बदलापुर नगर पंचायत चुनाव में कई भाजपा पार्षदों को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसलिए उन्हें सह-नियोजित कॉर्पोरेटर नियुक्त करके पुरस्कृत किया गया था.”
लेकिन, सार्वजनिक आक्रोश के बाद भाजपा को आप्टे की नियुक्ति रद्द करने पर मजबूर होना पड़ा. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने चेतावनी दी थी कि यदि भाजपा अपना फैसला नहीं बदलती है, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि तुषार आप्टे को कॉर्पोरेटर बनाने के फैसले से भाजपा का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है. सपकाल ने कहा कि यह इस तरह का पहला मामला नहीं है. 2017 में भाजपा ने उन्नाव मामले के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को नामांकित किया और विधायक बनाया. अंकिता भंडारी मामले में भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय भाजपा ने उन्हें संरक्षण दिया.
सपकाल ने आगे कहा, “हजारों महिलाएं भाजपा के खिलाफ सड़कों पर उतरीं, लेकिन ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का बड़ा वादा करने वाली भाजपा हर बार इसके ठीक विपरीत काम करती है. बदलापुर मामले ने भाजपा की पोल खोल दी है. महाराष्ट्र और पूरे भारत में भाजपा शासन के तहत महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. “
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि आप्टे ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और पार्टी नेतृत्व उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जिन्होंने उन्हें सह-नियोजित कॉर्पोरेटर नियुक्त किया था.
हरकारा डीप डाइव:
आकार पटेल : इधर हिंदू राष्ट्र बनाते रह गये, उधर चीन कहाँ पंहुच गया
हरकारा डीप डाइव के इस ताज़ा एपिसोड में मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखक आकारपटेल ने भारत और चीन के विकास मॉडल की तुलना करते हुए एक असहज लेकिन ज़रूरी सवाल उठाया कि जब 1990 में भारत और चीन लगभग बराबर थे, तो आज चीन सुपरपावर और भारत हाशिए पर क्यों है?
आकार पटेल बताते हैं कि आज की दुनिया में केवल दो देश वास्तविक वैश्विक शक्ति हैं — अमेरिका और चीन. चीन की अर्थव्यवस्था यूरोप के बराबर है और वह अमेरिका से भी आगे निकल चुका है. इसके उलट भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से पाँच–छह गुना कम है, और वैश्विक स्तर पर भारत को गंभीर चुनौती के रूप में नहीं देखा जाता.
बातचीत में यह भी सामने आता है कि चीन ने पिछले 25 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक और आत्मनिर्भरता पर लगातार काम किया. जहाँ भारत मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर एक दशक से अटका है, वहीं चीन 45,000 किलोमीटर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क खड़ा कर चुका है. चीन ने तकनीक “कॉपी” करने के आरोपों से विचलित हुए बिना अपने मॉडल को मज़बूत किया.
इसके विपरीत, भारत ने 2014 के बाद संविधान की मूल भावना से हटकर धर्म आधारित राजनीति को प्राथमिकता दी. गौ तस्कर, लव जिहाद, नागरिकता संशोधन कानून और लक्षित आपराधिक विधानों जैसी राजनीती से भारत के अल्पसंख्यकों को एक बवंडर में धकेल दिया है. आकर पटेल के अनुसार, हिंदू राष्ट्र का वास्तविक हासिल न तो आर्थिक है, न वैश्विक बल्कि केवल आत्ममहिमा और मुसलमानों पर बुलडोज़र चलाने की राजनीति है.
बातचीत का निष्कर्ष स्पष्ट है यह है कि भारत ने हार्ड पावर कभी बनाई नहीं, और अब वह अपनी सॉफ्ट पावर भी खुद नष्ट कर रहा है. चीन जहाँ ग्लोबल साउथ में भरोसे और निवेश के साथ आगे बढ़ रहा है, वहीं भारत आंतरिक विभाजन और प्रतीकात्मक राष्ट्रवाद में फँसता जा रहा है.
यह एपिसोड केवल चीन की सफलता का विश्लेषण नहीं है, बल्कि भारत के खोए हुए अवसरों और भटकी हुई प्राथमिकताओं का आईना है.
जब बॉक्सिंग की चैम्पियनशिप चल रही थी, तब घूंसेबाजों को ठंड में हॉस्टल से निकाला जा रहा था
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर नोएडा में आयोजित एलीट नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के दौरान कुप्रबंधन का एक शर्मनाक मामला सामने आया है. फाइनल मुकाबले से ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार की रात देश भर से आए कई मुक्केबाजों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को उनके हॉस्टल से बाहर निकाल दिया गया. यह घटना तब हुई जब बाहर का तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच था और खिलाड़ी ठिठुरने को मजबूर हो गए.
रिपोर्ट बताती है कि बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली साबित हुई. तेलंगाना, केरल, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, पंजाब, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसी कई टीमों को इस बदइंतजामी का शिकार होना पड़ा. एक कोच ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब हम शाम 7:30 बजे मैच खेलकर लौटे, तो हमें बताया गया कि हमारी बुकिंग आज तक ही थी और हमें तुरंत परिसर खाली करना होगा. हमारे खिलाड़ी और हम सामान लेकर सड़क पर खड़े थे और हमारे पास रुकने का कोई दूसरा विकल्प नहीं था.”
टूर्नामेंट के नियमों (प्रॉस्पेक्टस) में स्पष्ट रूप से लिखा था कि खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था आयोजकों द्वारा मुफ्त की जाएगी और यह पूरे टूर्नामेंट के दौरान मान्य होगी। इसके बावजूद, ऐसी लापरवाही बरती गई। एक अन्य टीम अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा, “कल हमारे खिलाड़ी का फाइनल मैच है और आज रात हमें यह नहीं पता कि हम सोएंगे कहां। यह बुनियादी जिम्मेदारी आयोजकों की थी।”
बीएफआई ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि स्थिति को संभाल लिया गया है और प्रभावित एथलीटों को पास ही स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में शिफ्ट कर दिया गया है। हालांकि, तब तक कई घंटों तक खिलाड़ी और कोच ठंड में परेशान होते रहे। यह टूर्नामेंट पहले से ही दिल्ली-एनसीआर के खराब वायु गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण विवादों में रहा है। पहले दिन भी अव्यवस्था के कारण खेल 5 घंटे देरी से शुरू हुआ था और रेफरी के फैसलों पर भी सवाल उठाए गए थे।
इंडोनेशिया ने अश्लील एआई छवियों के कारण एलन मस्क के ‘ग्रोक’ चैटबॉट को ब्लॉक किया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया ने शनिवार को एलन मस्क की कंपनी ‘एक्सएआई’ (xAI) के चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) तक पहुंच को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है। सरकार ने यह सख्त कदम एआई द्वारा बनाई जा रही अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री (पोर्नोग्राफिक कंटेंट) के जोखिम को देखते हुए उठाया है। इसी के साथ इंडोनेशिया इस एआई टूल को प्रतिबंधित करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
इंडोनेशिया की संचार और डिजिटल मंत्री म्यूटिया हाफिज ने एक बयान में कहा, “सरकार बिना सहमति के बनाए गए यौन डीपफेक को मानवाधिकारों, गरिमा और नागरिकों की सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन मानती है।” मंत्रालय ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के अधिकारियों को तलब भी किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब यूरोप से लेकर एशिया तक की सरकारों ने ऐप पर मौजूद यौन सामग्री की जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि हाल ही में यह बात सामने आई थी कि ‘ग्रोक’ के सुरक्षा उपायों में खामियों के कारण बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें और अन्य अश्लील सामग्री जनरेट हो रही थी। इसके जवाब में ‘एक्सएआई’ ने घोषणा की है कि वह इमेज जनरेशन और एडिटिंग फीचर को केवल भुगतान करने वाले सब्सक्राइबर्स तक सीमित कर रहा है ताकि ऐसे दुरुपयोग को रोका जा सके।
एलन मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा है कि जो कोई भी गैरकानूनी सामग्री बनाने के लिए ग्रोक का उपयोग करेगा, उसे उन्हीं कानूनी परिणामों का सामना करना होगा जैसे कि उसने कोई अवैध सामग्री अपलोड की हो। वहीं, जब रॉयटर्स ने इस पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया, तो कंपनी की ओर से एक स्वचालित जवाब मिला: “लेगेसी मीडिया लाइज़” (पुराना मीडिया झूठ बोलता है)। दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में अश्लील सामग्री को लेकर बेहद सख्त कानून हैं।
ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी: अस्पताल घायलों से पटे, ‘हमारे पास सर्जन कम पड़ गए हैं’
बीबीसी की एक विस्तृत रिपोर्ट ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और वहां की बिगड़ती मानवीय स्थिति को बयां करती है. तेहरान और शिराज के अस्पतालों के डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों ने बीबीसी को बताया कि उनके पास इतने घायल आ रहे हैं कि इलाज करना मुश्किल हो रहा है. स्थिति यह है कि अस्पतालों में सर्जनों की भारी कमी हो गई है.
तेहरान के मुख्य नेत्र चिकित्सालय (आई हॉस्पिटल), ‘फराबी हॉस्पिटल’ के एक डॉक्टर ने स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट के जरिए संपर्क कर बताया कि अस्पताल ‘क्राइसिस मोड’ में चला गया है. आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं और गैर-जरूरी सर्जरी रोक दी गई हैं. शिराज के एक अन्य अस्पताल के कर्मचारी ने वीडियो संदेश में बताया कि बड़ी संख्या में लोगों को सिर और आंखों में गोली लगी है. मानवाधिकार समूहों के अनुसार, 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 51 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं. इसके अलावा, 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय तनाव का भी जिक्र है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है, “ईरान बड़ी मुसीबत में है. अगर आपने गोलीबारी शुरू की, तो हम भी गोलीबारी करेंगे.” इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि अमेरिका इन प्रदर्शनों को हवा दे रहा है और हिंसक तोड़फोड़ को बढ़ावा दे रहा है.
ईरान में लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट है, जिससे वहां की सटीक जानकारी बाहर आना मुश्किल हो रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार “विनाशकारी तत्वों” से निपटने में कोई रियायत नहीं बरतेगी. वहीं, ईरान के अंतिम शाह के बेटे रजा पहलवी ने इन प्रदर्शनों को “शानदार” बताते हुए लोगों से शहर के केंद्रों पर कब्जा करने का आह्वान किया है. संयुक्त राष्ट्र ने जान-माल के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है.
लंदन स्थित दूतावास पर इस्लामी क्रांति से पूर्व का ईरानी झंडा लगाया
प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘एएफपी’ को बताया कि शनिवार को एक प्रदर्शन के दौरान, एक प्रदर्शनकारी ने लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर इस्लामी गणराज्य ईरान के झंडे को हटाकर थोड़े समय के लिए 1979 से पहले वाला पुराना झंडा लगा दिया.
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में हाइड पार्क के पास स्थित दूतावास की बालकनी पर एक व्यक्ति को देश के वर्तमान झंडे को हटाकर अपदस्थ शाह के शासनकाल के दौरान इस्तेमाल होने वाले झंडे को लगाते हुए दिखाया गया, जिसे देख नीचे खड़े सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने खुशी मनाई.
यह झंडा—तीन रंगों वाला, जिसमें एक शेर और सूरज है और जो एक माला व मुकुट से घिरा हुआ है—इस्लामी क्रांति से पहले ईरान में इस्तेमाल होने वाला एक औपचारिक झंडा था. मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘एएफपी’ को बताया कि हटाया जाने से पहले यह झंडा कई मिनटों तक वहाँ लगा रहा. प्रदर्शनकारियों ने “ईरान के लिए लोकतंत्र. शाह रज़ा पहलवी. ईरान के लिए न्याय” के नारे लगाए. यह नारा ईरान के दिवंगत शाह के बेटे के संदर्भ में था, जो अब संयुक्त राज्य अमेरिका में रहते हैं. कुछ लोगों ने “ईरान को आज़ाद करो” लिखी हुई तख्तियाँ भी ले रखी थीं.
उल्लेखनीय है कि ईरान 28 दिसंबर से सड़क प्रदर्शनों से जूझ रहा है, जो अब देशव्यापी रूप ले चुके हैं. शुरुआत में देश की मुद्रा के अवमूल्यन और जीवनयापन की बढ़ती लागत की चिंताओं के कारण शुरू हुए ये प्रदर्शन अब एक बड़े आंदोलन में बदल गए हैं, जिसमें इस्लामी गणराज्य को समाप्त करने की मांग की जा रही है.
ईरानी अधिकारियों ने देश में इंटरनेट का उपयोग बंद कर दिया है. एनजीओ और निगरानी संगठनों का कहना है कि उन्हें डर है कि इस ‘ब्लैकआउट’ का उपयोग प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के लिए किया जाएगा. नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ के अनुसार, अब तक नौ बच्चों सहित कम से कम 51 लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं.
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.








