18/03/2026: इजराइल की हत्याएं| ईरान के भी हमले| कांग्रेस को एक और झटका| गटर गैस से 3 मरे | महाराष्ट्र में बाबा बलात्कारी| रुपया और गिरा| चुनावी तानाशाही
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फलक अफ़शां, विश्वजीत कुमार
आज की सुर्खियां
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92.64 के नए निचले स्तर पर पहुँचा.
ईरान-इज़रायल युद्ध: इज़रायली हमलों में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और ख़ुफ़िया मंत्री की मौत का दावा.
ऊर्जा संकट: अमेरिका और इज़रायल का ईरान के विशाल ‘साउथ पार्स’ गैस फ़ील्ड पर हमला.
असम राजनीति: वरिष्ठ कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में शामिल, कांग्रेस को एक और झटका.
मानवाधिकार: दिल्ली पुलिस पर कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने के आरोप, हाईकोर्ट ने माँगा जवाब.
सांप्रदायिक तनाव: पुणे में इफ्तार के दौरान मुस्लिम युवकों पर हमला, गिरफ्तारी न होने से आक्रोश.
साइबर अपराध: 2025 में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में भारी वृद्धि, सरकारी आंकड़े जारी.
अनोखी कला: कोलकाता में मृतकों की ‘हाइपर-रियलिस्टिक’ सिलिकॉन मूर्तियां बना रहे हैं सुबिमल दास.
रुपया रिकॉर्ड गिरा; आयातकों की मांग और डॉलर की कमी के कारण ₹ 92.64/$
आयातकों द्वारा डॉलर की निरंतर मांग के बीच भारतीय रुपया बुधवार को 92.64 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया, जिससे 92.50 का मनोवैज्ञानिक स्तर भी टूट गया. गुरुवार को बैंक अवकाश से पहले डॉलर की तरलता में कमी के कारण दबाव और बढ़ गया. डीलरों का कहना है कि बढ़ते व्यापार घाटे की चिंताओं ने भी मुद्रा पर असर डाला.
अंजली कुमार के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 92.50 प्रति डॉलर के स्तर का बचाव करते हुए देखा गया, जो बुधवार को रुपये में 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ टूट गया.
‘फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स’ के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “आरबीआई ने दिन के अंत में 92.50 का स्तर टूटने दिया. फिलहाल, संघर्ष जारी है और तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाता घाटे को तब तक ऊंचा बनाए रख सकती हैं जब तक कि कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे नहीं आ जातीं.”
रुपया, जो मंगलवार को 92.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, इस वित्तीय वर्ष में अब तक डॉलर के मुकाबले 7.74 प्रतिशत टूट चुका है. मार्च में अब तक इसमें 1.79 प्रतिशत और वर्तमान कैलेंडर वर्ष में 2.98 प्रतिशत की गिरावट आई है.
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, “भारतीय रुपया एक नए निचले स्तर पर पहुंच गया क्योंकि 92.50 प्रति डॉलर के नीचे जाने से भारी बिकवाली शुरू हो गई, जो बैंक अवकाश से पहले डॉलर की कम तरलता के कारण और गंभीर हो गई. मजबूत जोखिम क्षमता और कच्चे तेल की नरम कीमतों के बावजूद, मुद्रा को आयातकों की आक्रामक डॉलर मांग का सामना करना पड़ा. भू-राजनीतिक तनावों के कारण व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका से साल के अंत की मांग मजबूत बनी हुई है.”
ब्रेंट क्रूड दिन के दौरान फिसलकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था, जो भारतीय कारोबारी घंटों की समाप्ति तक 103.20 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 102.80 डॉलर प्रति बैरल था. इस बीच, डॉलर इंडेक्स—जो छह प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है—99.57 पर लगभग स्थिर रहा, जबकि एक दिन पहले यह 99.78 पर था.
बाजार सहभागियों ने कहा कि व्यापारियों को फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार है, जो बुधवार को बाजार बंद होने के बाद आने वाला है. बाजारों को व्यापक रूप से उम्मीद है कि फेड दरों को 3.50-3.75 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखेगा. अब सारा ध्यान तेल की बढ़ती कीमतों और श्रम बाजार से मिल रहे मिश्रित संकेतों के बीच जेरोम पॉवेल के भविष्य के मार्गदर्शन पर टिक गया है.
एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के डीलर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “दो दिनों तक नरम रहने के बाद अब फेड का निर्णय और कमेंट्री ही डॉलर इंडेक्स की दिशा तय करेगी. आरबीआई ने रुपये को 92.50 प्रति डॉलर का स्तर पार करने दिया, लेकिन हम शुक्रवार को हस्तक्षेप की उम्मीद करते हैं, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि गुरुवार को ‘नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड’ बाजार में रुपया कैसा प्रदर्शन करता है.”
ग्राउंड रिपोर्ट: मुस्लिम मतदाताओं के लिए बंगाल का चुनाव अस्तित्व और पहचान की लड़ाई
‘द वायर’ में मधुसूदन चटर्जी की लंबी रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के एक गाँव के माध्यम से यह दर्शाती है कि मुस्लिम मतदाता नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर कितने चिंतित और अनिश्चित हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल के ग्रामीण इलाकों (विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों) में मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी नागरिकता साबित करने को लेकर गहरा डर व्याप्त है. उन्हें डर है कि दस्तावेजी कमियों के कारण उन्हें ‘अवैध’ घोषित किया जा सकता है. गाँव के लोग अपने पुराने भूमि रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेज जुटाने में लगे हैं. इससे पता चलता है कि कैसे एक छोटी सी वर्तनी (स्पेलिंग) की गलती भी उनके लिए भारी चिंता का विषय बनी हुई है. यह अनिश्चितता उनके मतदान व्यवहार को प्रभावित कर रही है. मतदाता उस पार्टी की ओर झुकाव दिखा रहे हैं जो उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दे सके और सीएए- एनआरसी के विरोध में मजबूती से खड़ी हो.
जहाँ भाजपा नागरिकता कानून को शरणार्थियों के हित में बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इसे मुस्लिमों को बाहर करने की साजिश के रूप में प्रचारित कर रही है. ग्रामीण मुस्लिम मतदाता टीएमसी को एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में देख रहे हैं, लेकिन उनमें प्रशासन के प्रति एक अंतर्निहित अविश्वास भी है.
चटर्जी बताते हैं कि नागरिकता की इस अनिश्चितता ने सामान्य जीवन को बाधित कर दिया है. लोग अपने दैनिक कामकाज और भविष्य की योजनाओं के बजाय वकीलों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. कुलमिलाकर, बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं के लिए चुनाव केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और पहचान की लड़ाई बन गया है.
निर्वस्त्र किया, पीटा, यौन उत्पीड़न किया: हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं का दिल्ली पुलिस पर आरोप
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पर दस छात्र और श्रम कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में रखने, उन्हें निर्वस्त्र करने, पीटने और उनका यौन उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगे हैं.
निकिता जैन की रिपोर्ट है कि 12 मार्च को दलित कार्यकर्ता शिव कुमार सहित तीन कार्यकर्ताओं को सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने बिना किसी वारंट के उठा लिया. इसके बाद कुल 10 कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगहों से इसी तरह हिरासत में लिया गया.
रिहा हुए कार्यकर्ताओं (शिव कुमार और रुद्र विक्रम) ने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों उल्टा लटकाया गया, रबर के डंडों और बेल्ट से उनके निजी अंगों पर वार किए गए, और उनके साथ जातिगत भेदभाव एवं अपमानजनक व्यवहार किया गया.
19 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता रुद्र ने आरोप लगाया कि उसे निर्वस्त्र कर मेज के नीचे बैठने और पुलिस अधिकारी के जूते चूमने पर मजबूर किया गया. अन्य कार्यकर्ताओं (गौरव और मंजीत) ने भी गंभीर यौन उत्पीड़न और अश्लील वीडियो बनाने के आरोप लगाए हैं.
पुलिस और जांच एजेंसियां (आईबी, एनआईए) लगातार वल्लिका नामक एक कार्यकर्ता के बारे में पूछ रही थीं, जो अपनी माँ (एक आईएएस अधिकारी) के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण पिछले साल से ‘गायब’ है.
कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं से जुड़े एक व्यंग्यात्मक वीडियो के बारे में भी पूछताछ की गई और उन्हें ‘आतंकवादी’ कहकर संबोधित किया गया. इस बीच तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह स्पेशल सेल परिसर केसीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखे. दिल्ली पुलिस ने मामले की एफआईआर को “गोपनीय” बताते हुए आरोपियों के साथ साझा करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को करेगा. कार्यकर्ताओं का दावा है कि उन्हें बंदूक की नोक पर झूठे बयान दर्ज करने के लिए मजबूर किया गया था.
ईरान-इज़रायल युद्ध का 19वां दिन
अली लारीजानी, जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल ख़तीब !
इज़रायल के भीषण हमलों में ईरान के ख़ुफ़िया मंत्री की मौत का दावा: क्षेत्र में बढ़ा तनाव
इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने दावा किया है कि रात भर चले हमलों में ईरान के ख़ुफ़िया मंत्री इस्माइल ख़तीब और मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं. इज़रायली सेना के एक बयान के अनुसार, ख़तीब और उनका मंत्रालय दुनिया भर में इज़रायली और अमेरिकी ठिकानों के ख़िलाफ़ जासूसी और गुप्त अभियानों की निगरानी कर रहे थे.
इस बीच, इज़रायल ने ईरान और लेबनान में अपने हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है, जिसमें दर्जनों लोगों के मारे जाने और घायल होने की ख़बर है. इसके जवाब में ईरान ने भी इज़रायल पर नए हमले किए हैं. यह कार्रवाई ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बसीज बल के कमांडर ग़ुलामरेज़ा सुलेमानी की हत्या के प्रतिशोध में की गई है. इज़रायली आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, ईरान के ताज़ा हमलों में इज़रायल में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने स्पष्ट किया है कि उनके नेतृत्व की हत्याओं से ईरान पीछे नहीं हटेगा और तेहरान का राजनीतिक तंत्र पूरी तरह मज़बूत है.
युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक भी पहुँच रही है. इराक़ के बग़दाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन और रॉकेटों से निशाना बनाया गया है. वहीं, बहरीन, कुवैत, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी सीमाओं के पास ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट (मार गिराने) करने की सूचना दी है. इज़रायली रक्षा मंत्री काट्ज़ ने सेना को निर्देश दिया है कि वे ईरानी नेतृत्व का शिकार जारी रखें और “अष्टबाहु (ऑक्टोपस) का सिर बार-बार काटते रहें.” विश्लेषकों का मानना है कि इन हत्याओं से कूटनीति के रास्ते बंद हो सकते हैं और क्षेत्र में एक पूर्ण युद्ध का ख़तरा बढ़ गया है.
इज़रायल ने मंगलवार को ईरान के नेतृत्व के ऊपरी गलियारों पर दोहरे ज़ोरदार प्रहार किए. इज़रायली हवाई हमलों में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) से जुड़े शक्तिशाली अर्धसैनिक बल ‘बसीज’ के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल ग़ुलामरेज़ा सुलेमानी मारे गए हैं. इज़रायली सेना के मुताबिक़, लारीजानी तेहरान के पास रात में किए गए हवाई हमलों में मारे गए. वह आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के बेहद क़रीबी और भरोसेमंद थे. ग़ौरतलब है कि ख़ामेनेई की मौत युद्ध की शुरुआत में 28 फ़रवरी को हो गई थी, जिसके बाद लारीजानी ईरान के वास्तविक नेता बन गए थे.
ईरानी सरकारी मीडिया ने इन दोनों मौतों की पुष्टि करते हुए लारीजानी को ‘शहीद’ बताया है. तसनीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, लारीजानी के बेटे मुर्तज़ा लारीजानी, जो अपने पिता के सुरक्षा प्रमुख थे, वह भी इस हमले में मारे गए हैं. लारीजानी की मौत को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि वह एक मंझे हुए कूटनीतिज्ञ थे जो अमेरिका के साथ बातचीत करने की क्षमता रखते थे. विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मौत के बाद अब ईरान में कट्टरपंथियों का दबदबा बढ़ेगा, जो केवल युद्ध को ही एकमात्र रास्ता मानते हैं.
इस बीच, व्हाइट हाउस में आयरिश प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि लारीजानी के हाथों पर बहुत ख़ून था. ट्रंप ने युद्ध का बचाव करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने ईरानी सेना और उसके परमाणु ख़तरे को लगभग नष्ट कर दिया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान में वियतनाम जैसी स्थिति में फंसने का जोखिम उठा रहा है, तो ट्रंप ने कहा, “मैं किसी चीज़ से नहीं डरता.” उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर उतर सकते हैं. वहीं, ट्रंप प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी जो केंट (निदेशक, राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र) ने इस युद्ध के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है. केंट ने अपने इस्तीफ़े में लिखा कि ईरान से कोई आसन्न ख़तरा नहीं था और यह युद्ध इज़रायल और उसके अमेरिकी लॉबी के दबाव में शुरू किया गया है.
बग़दाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला
ईरान ने अपने दो शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद इज़रायल से बदला लेने की क़सम खाई है. बुधवार सुबह इज़रायल के तेल अवीव सहित कई शहरों पर ईरान ने मिसाइलों की बौछार कर दी, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और संपत्ति को भारी नुक़सान पहुँचा. जवाब में इज़रायल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह के ठिकानों और तेहरान के पास बसीज बल के केंद्रों पर बमबारी तेज़ कर दी है. लेबनान के टायर शहर से हज़ारों लोग पलायन करने को मजबूर हुए हैं.
इराक़ की राजधानी बग़दाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को एक बार फिर ड्रोन और रॉकेट हमलों का निशाना बनाया गया. ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा कि वे तेहरान के समर्थन में यह कार्रवाई कर रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में युद्ध फैलने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि बहरीन, कुवैत, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी सीमाओं में घुस रही मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराने की सूचना दी है. क़तर ने सुरक्षा कारणों से दोहा के लिए उड़ानों को निलंबित कर दिया है.
मानवीय क्षति के आँकड़े डराने वाले हैं. ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक कम से कम 1,348 ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि वहां 912 लोगों की जान गई है. इज़रायल में अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि पेंटागन के अनुसार 13 अमेरिकी सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि उनके नेताओं की हत्याओं से देश पीछे नहीं हटेगा और तेहरान का राजनीतिक तंत्र अभी भी मज़बूत है.
इज़रायल और अमेरिका का ईरान के ‘साउथ पार्स’ गैस फ़ील्ड पर हमला: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संकट
इज़रायली वायु सेना ने अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण इकाई पर हमला किया है. यह पहली बार है जब इज़रायल ने ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ माने जाने वाले गैस ठिकानों को निशाना बनाया है. वरिष्ठ इज़रायली अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह हमला ट्रंप प्रशासन की मंज़ूरी के बाद किया गया था. तसनीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बुशहर के पास ‘साउथ पार्स’ गैस फ़ील्ड के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया है, जहाँ भीषण आग बुझाने के लिए आपातकालीन टीमें मशक़्क़त कर रही हैं. साउथ पार्स को दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र माना जाता है, जिसका एक हिस्सा क़तर के पास भी है.
इज़रायली अधिकारियों के अनुसार, इस हमले का उद्देश्य ईरान को यह संकेत देना है कि यदि उसने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल की आपूर्ति में बाधा डालना बंद नहीं किया, तो उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा. इस हमले के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “याद रखें, उन सभी ‘मूर्खों’ के लिए, ईरान को दुनिया भर में आतंकवाद का नंबर एक प्रायोजक माना जाता है. हम तेज़ी से उनका कारोबार बंद कर रहे हैं!” ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान जहाजों के मुक्त और सुरक्षित मार्ग में हस्तक्षेप करेगा, तो वे तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करेंगे.
क़तर ने इस इज़रायली हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “ख़तरनाक और ग़ैर-जिम्मेदाराना” बताया है. क़तरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है. इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने धमकी दी है कि यदि उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमले नहीं रुके, तो वे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और क़तर में स्थित ऊर्जा केंद्रों पर जवाबी हमला कर सकते हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता में डाल सकती है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल ला सकती है.
असम में चुनाव से पहले कांग्रेस को दूसरा झटका, भूपेन बोरा के बाद वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ी पार्टी
असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को दूसरा बड़ा झटका लगा है. बड़े दलबदल के सिलसिले के बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भी बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता शशि थरूर का समर्थन करने के कारण उन्हें पार्टी के भीतर अपमान का सामना करना पड़ा था.
‘एचटी न्यूज़ डेस्क’ के मुताबिक, असम के नगांव निर्वाचन क्षेत्र से दो बार के सांसद बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद, नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली.
पत्रकारों से बात करते हुए बोरदोलोई ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से पार्टी के भीतर “घुटन और अपमान” महसूस कर रहे थे. उन्होंने बताया कि उनकी मुश्किलें तब शुरू हुईं जब उन्होंने कांग्रेस के भीतर शशि थरूर का समर्थन किया. उसके बाद मुझे पार्टी के भीतर हर मंच से बाहर कर दिया गया. वह 1975 से कांग्रेस से जुड़े थे. उन्होंने मंगलवार शाम को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपा. वह आगामी असम विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष भी थे.
दो बार के सांसद, चार बार के विधायक और असम के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे “कई मुद्दों” को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने असम कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की एक बैठक का हवाला दिया, जहाँ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेता इमरान मसूद ने एक उम्मीदवार के कथित आपराधिक संबंधों के उनके दावों को “मनगढ़ंत” बताकर खारिज कर दिया था. वहां मौजूद एपीसीसी अध्यक्ष चुप रहे. इस बात ने मुझे बहुत ठेस पहुँचाई,” उन्होंने पत्रकारों से कहा.
उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम पूर्व असम कांग्रेस प्रमुख भूपेन कुमार बोरा के फरवरी में भाजपा में शामिल होने के कुछ हफ्तों बाद हुआ है. मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया कि आने वाले दिनों में और भी कांग्रेस नेता पाला बदल सकते हैं, क्योंकि आत्मसम्मान वाला कोई भी व्यक्ति अब कांग्रेस में नहीं रह सकता. बता दें कि असम में 9 अप्रैल को राज्य विधानसभा के चुनाव हैं और 4 मई को नतीजे आ जाएंगे.
टिकट आवंटन से परेशान थे: प्रियंका
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस सांसद और असम के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा ने बोरदोलोई के फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया. संसद भवन परिसर के भीतर पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका ने कहा: “मुझे लगता है कि वह टिकट आवंटन को लेकर परेशान थे. काश हमें बातचीत करने का मौका मिलता, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.”
छत्तीसगढ़: सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस की चपेट में आने से 3 सफाई कर्मचारियों की मौत
रायपुर के एक निजी अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई. अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार रात की इस दुखद घटना में प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस सूंघने से उनकी मौत हुई है. मृतकों की पहचान अमोल मांझी (25), जी. सेंधे (35) और पेरो कुमार (22) के रूप में हुई है.
अधिकारियों ने बताया कि सफाई के लिए सबसे पहले एक कर्मचारी सीवेज टैंक के अंदर उतरा था. जब पहले कर्मचारी ने कोई जवाब नहीं दिया, तो उसे देखने के लिए अन्य दो कर्मचारी एक-एक करके टैंक के अंदर गए और वे भी गैस का शिकार हो गए.
रबींद्रनाथ चौधरी के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही मृतक कर्मचारियों के परिजन अस्पताल में जमा हो गए और जमकर हंगामा किया. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि मजदूरों को सीवेज टैंक की सफाई के काम में लगाने से पहले ऑक्सीजन मास्क जैसे पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए. अस्पताल प्रबंधन ने बाद में स्पष्ट किया कि सफाई का यह कार्य ‘आउटसोर्स’ (बाहरी एजेंसी को दिया गया) किया गया था. छत्तीसगढ़ सरकार ने बुधवार को आदेश जारी किया कि अब से सीवेज की सफाई केवल स्थानीय नगर पालिका की अनुमति से ही की जाएगी.
‘मुस्लिम यहाँ नहीं बैठ सकते’: पुणे में इफ्तार पर भीड़ के हमले के 4 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं
13 मार्च 2026 की शाम को पुणे के ग्रामीण इलाके सासवड (बोपदेव घाट के पास) में इफ्तार के लिए जमा हुए मुस्लिम युवकों के एक समूह पर लगभग 50 से 150 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया.
पीड़ितों के अनुसार, हमलावर चिल्ला रहे थे कि “मुस्लिम यहाँ नहीं बैठ सकते”. यह हमला तब हुआ जब युवक अपना रोज़ा खोलने की तैयारी कर रहे थे. इस हमले में कई युवक गंभीर रूप से घायल हुए हैं. एक पीड़ित (अमीन) के सिर में 14 टांके आए हैं, जबकि अन्य को पीठ और शरीर पर गहरे घाव लगे हैं. घटना के कुछ घंटों बाद अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें दंगा, जानलेवा हथियारों से चोट पहुँचाने और आपराधिक धमकी जैसी धाराएं लगाई गई हैं. हालांकि, घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
स्थानीय कार्यकर्ताओं और पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने कुछ हमलावरों की पहचान कर पुलिस को उनकी तस्वीरें भी दी थीं. पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया लेकिन बाद में कथित तौर पर “अज्ञात दबाव” के कारण उन्हें छोड़ दिया गया.
पुलिस का कहना है कि मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे पहचान में मुश्किल हो रही है, लेकिन वे जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रहे हैं.
‘न्यूज़ लॉन्ड्री’ में अवधेश कुमार की इस रिपोर्ट में स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पुणे के ग्रामीण इलाकों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली सुनियोजित हिंसा का हिस्सा है. रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि सांप्रदायिक नफरत के कारण हुए इस हमले के बाद भी कानून व्यवस्था सुस्त बनी हुई है और पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है.
महाराष्ट्र में यौन शोषण मामले में ‘स्वयंभू बाबा’ गिरफ्तार, एकनाथ शिंदे और महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ तस्वीरें वायरल
नासिक पुलिस ने महिलाओं को आपत्तिजनक स्थितियों में फिल्माने और उनका यौन शोषण करने के आरोप में एक स्वयंभू बाबा और ज्योतिषी, कैप्टन अशोक खरात को गिरफ्तार किया है.
सुधीर सूर्यवंशी की खबर है कि पुलिस ने खरात के पास से महिलाओं के 58 आपत्तिजनक वीडियो बरामद किए हैं. खरात के कई राजनेताओं, उद्योगपतियों और मशहूर हस्तियों के साथ संबंध रहे हैं, जिनमें से कई कथित तौर पर विभिन्न मामलों में उससे सलाह लेते थे.
सोशल मीडिया पर खरात की उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर के साथ तस्वीरें वायरल हो गई हैं. एक वीडियो में चाकणकर खरात के पैर धोते और श्रद्धा प्रकट करते हुए दिखाई दे रही हैं, जबकि एक अन्य वीडियो में वह उन्हें अपना ‘गुरु’ बता रही हैं. वह ‘शिवनिका’ नामक एक ट्रस्ट की सदस्य भी हैं, जिसमें खरात अध्यक्ष के रूप में कार्यरत है.
चाकणकर ने स्वीकार किया कि वह सामाजिक कार्य के लिए शिवनिका ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होती थीं, जहाँ वह खरात के संपर्क में आईं. उन्होंने कहा कि वह उन पर लगे आरोपों से अवगत नहीं थीं.
पुलिस के अनुसार, खरात कथित तौर पर महिलाओं को नशीला पदार्थ पिलाता था, उनका वीडियो बनाता था और बाद में उन रिकॉर्डिंग्स का उपयोग उन्हें ब्लैकमेल करने और शोषण करने के लिए करता था. अधिकारियों ने यह भी बताया कि उन पर बलात्कार के आरोप लगाए गए हैं और औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है.
2025 में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध बढ़कर 76,657 हुए, अश्लील सामग्री की शिकायतें सबसे ऊपर
संसद को बुधवार को सूचित किया गया कि 2025 में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में भारी वृद्धि देखी गई है, जिसमें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 76,650 से अधिक मामले दर्ज किए गए.
राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 2024 की तुलना में 28,322 मामले अधिक है. गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने एक लिखित उत्तर में बताया कि इन शिकायतों में यौन रूप से अश्लील सामग्री, स्पष्ट यौन कृत्य, बलात्कार या सामूहिक बलात्कार से संबंधित अपमानजनक सामग्री और ऑनलाइन रिपोर्ट की गई बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े मामले शामिल हैं.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा यौन रूप से अश्लील सामग्री के 37,743 मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा स्पष्ट यौन कृत्य के 19,703, बाल यौन शोषण सामग्री के 10,431 और बलात्कार/सामूहिक बलात्कार संबंधी सामग्री के 8,780 मामले दर्ज किए गए.
ऑनलाइन और सोशल मीडिया से जुड़े अन्य अपराध की श्रेणी में साइबर स्टॉकिंग, फर्जी प्रोफाइल और पहचान की चोरी शामिल हैं. यह आंकड़ा 2021 के 72,301 से बढ़कर 2025 में 1,73,766 हो गया है. 2025 में साइबर बुलिंग/स्टॉकिंग/सेक्सटिंग की 45,832 शिकायतें, फर्जी या छद्म प्रोफाइल के46,784, प्रोफाइल हैकिंग/पहचान की चोरी के34,533, ऑनलाइन जॉब फर्जीवाड़े के11,126 और ऑनलाइन वैवाहिक धोखाधड़ी के1,128 मामले दर्ज किए गए.
भारत अब भी एक ‘चुनावी तानाशाही’ बना हुआ है, ‘उदार लोकतंत्र सूचकांक’ में पाँच स्थान फिसला
स्वीडन स्थित वी-डेम (वैरायटीज़ ऑफ़ डेमोक्रेसी) संस्थान की ‘डेमोक्रेसी रिपोर्ट’ के हवाले से ‘द वायर’ ने बताया है कि आज दुनिया में लोकतंत्रों की तुलना में तानाशाहियों की संख्या अधिक है. वर्ष 2025 के अंत तक की गणना में 92 तानाशाहियाँ और 87 लोकतंत्र पाए गए हैं. भारत दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले ‘चुनावी तानाशाही’ वाले देशों में शामिल है.
यह लोकतंत्र रिपोर्ट दुनिया भर में सबसे अधिक उद्धृत की जाने वाली रिपोर्टों में से एक है और इसे गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के वी-डेम संस्थान द्वारा जारी किया जाता है. वर्ष 2026 की इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2026: अनरैवलिंग द डेमोक्रेटिक एरा’ है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब एक ‘लोकतंत्र’ नहीं रहा, बल्कि इसे ‘चुनावी तानाशाही’ की श्रेणी में रखा गया है. भारत 2018 से ही इस श्रेणी में बना हुआ है और वर्तमान में इसे “सबसे खराब स्थिति वाले देशों” में से एक माना गया है. रिपोर्ट बताती है कि औसत भारतीय अब लोकतंत्र के उस स्तर का अनुभव कर रहा है जो आखिरी बार 1975 (आपातकाल के समय) में देखा गया था. भारत का ‘लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स’ (एलडीआई) स्कोर 2013 के 0.57 से गिरकर 2023 में 0.34 पर आ गया है.
इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं- मीडिया की स्वतंत्रता में भारी कमी, पत्रकारों का उत्पीड़न और सोशल मीडिया पर नकेल कसना. नागरिक समाज पर दबाव, जिसमें सरकारी नीतियों की आलोचना करने वाले एनजीओ और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई करना और चुनाव आयोग की स्वायत्तता में गिरावट और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर बढ़ता प्रभाव.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में लोकतंत्र पीछे हट रहा है. वर्तमान में दुनिया की 71% आबादी (लगभग 5.7 अरब लोग) तानाशाही शासन (बंद या चुनावी) के तहत रह रही है. एक दशक पहले यह आंकड़ा 48% था.
भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सत्ताधारी दल (बीजेपी) द्वारा ‘हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे’ को बढ़ावा देने से धार्मिक स्वतंत्रता और बहुलवाद को नुकसान पहुँचा है. ‘द वायर’ की यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भारत को अब “दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र” मानने के बजाय एक ऐसे देश के रूप में देख रहे हैं जहाँ चुनाव तो होते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्य और स्वतंत्रताएँ तेजी से खत्म हो रही हैं.
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शख्स की बेटी को नौकरी मिली, लेकिन लग गए 11 महीने
पहलगाम आतंकी हमले के एक पीड़ित की बेटी को पुणे में सरकारी नौकरी मिल गई है. यह नियुक्ति कश्मीर की वादियों में हुए उस हत्याकांड के 11 महीने बाद और उनकी उस शिकायत के एक महीने बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वादे के मुताबिक उन्हें रोजगार नहीं दिया गया है.
‘पीटीआई’ की रिपोर्ट के अनुसार, असावरी जगदाले को बुधवार को पुणे नगर निगम में अधिकारी के रूप में नियुक्ति पत्र मिला. उन्हें नागरिक निकाय में प्रशासनिक अधिकारी (क्लास 2 पद) के रूप में नियुक्त किया गया है. असावरी के पिता, पुणे निवासी संतोष जगदाले, उन 26 लोगों में शामिल थे, जो पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकवादियों की गोलीबारी में मारे गए थे. इस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी शिविरों पर लक्षित हमले (सर्जिकल स्ट्राइक) किए गए थे और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक झड़प चली थी.
हत्याकांड के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के छह पीड़ितों के परिवारों को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी. असावरी ने पिछले महीने आश्वासन के बावजूद सरकारी नौकरी न मिलने पर अपनी हताशा व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि पिता की मृत्यु के बाद से परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है और उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई है. मीडिया में उनकी चिंता सामने आने के तुरंत बाद, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पुणे नगर आयुक्त नवल किशोर राम को उन्हें सरकारी सेवा में शामिल करने का निर्देश दिया था.
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच ‘ईद-उल-फ़ितर’ पर पांच दिनों का युद्धविराम
हफ़्तों से जारी खूनी हिंसा के बीच पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान इस सप्ताह ईद-उल-फ़ितर के दौरान युद्ध में अस्थायी “विराम” के लिए सहमत हो गए हैं. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बुधवार को घोषणा की कि यह युद्धविराम गुरुवार आधी रात से शुरू होकर मंगलवार आधी रात तक चलेगा. तरार के अनुसार, यह समझौता सऊदी अरब, क़तर और तुर्किये के विशेष अनुरोध पर किया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान यह क़दम नेक नीयती और इस्लामी मानदंडों को ध्यान में रखते हुए उठा रहा है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीमा पार से कोई भी हमला या आतंकवादी घटना होती है, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई को तुरंत और दोगुनी तीव्रता के साथ शुरू कर देगा.
अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी इस घोषणा के तुरंत बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने की पुष्टि की है. यह समझौता उस समय हुआ है जब हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया था, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत की बात कही गई थी. संयुक्त राष्ट्र ने इस केंद्र (ओमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल) में 143 मौतों की पुष्टि की है, जिसे पाकिस्तान ने पूरी तरह ख़ारिज करते हुए कहा है कि वह केवल “आतंकवादी बुनियादी ढांचे” को निशाना बनाता है.
दोनों देशों के बीच फ़रवरी के अंत से डूरंड लाइन पर भीषण संघर्ष जारी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अढानोम घेब्येयियस ने इस बढ़ते संघर्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ रहा है. उन्होंने सभी पक्षों से शांति और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है. ईद के दौरान यह पाँच दिनों की राहत विस्थापित आबादी और प्रभावित नागरिकों के लिए एक बड़ी मानवीय उम्मीद बनकर आई है.
‘इंसानों जैसे’: टूटे हुए दिलों को जोड़ रही हैं मृतकों की आदमकद मूर्तियां
उत्तरी कोलकाता के दमदम जंक्शन के पास, सुबिमल दास और उनका 80 लोगों का स्टाफ एक पुराने फैक्ट्री-गोदाम में काम करता है. मिट्टी, फाइबरग्लास और सिलिकॉन का उपयोग करके, वे धार्मिक प्रतीकों, सांस्कृतिक हस्तियों, क्रिकेटरों और बॉलीवुड सितारों की असाधारण आदमकद प्रतिकृतियां (मूर्तियां) बनाते हैं.
लेकिन इस वर्कशॉप में अब एक नया और लोकप्रिय काम भी हो रहा है: परिवारों और प्रियजनों के ऑर्डर पर मृतकों की 30 किलोग्राम वजनी कस्टमाइज्ड (अपने अनुकूल) मूर्तियां बनाने का.
‘द गार्डियन’ के लिए कोलकाता से क्रिस जॉनस्टन ने लिखा है कि ‘सुबी क्रिएटिव हाउस’ में सबसे आम ग्राहक विधवा या विदुर (पति या पत्नी खो चुके लोग) होते हैं. वे दास और उनकी टीम को एक तस्वीर सौंपकर अपने मृत जीवनसाथी की मूर्ति का ऑर्डर देते हैं. कई महीनों बाद, वे उस प्रतिकृति को घर ले जाते हैं.
वर्कशॉप में मौजूद मूर्तियों में पश्चिम बंगाल के फूलों के लिए प्रसिद्ध शहर रानाघाट के एस. रॉय भी शामिल हैं. वे चेक शर्ट और स्लैक पहने एक कुर्सी पर बैठे हैं, जो घर भेजे जाने के लिए तैयार हैं. पास ही पड़ोसी राज्य ओडिशा की श्रीमती परिजा हैं. छोटे, चांदी जैसे सफेद बाल और लाल बिंदी के साथ उनका सिर तैयार है, लेकिन शरीर अभी जोड़ा जाना बाकी है. प्रत्येक मूर्ति की लागत लगभग 2.5 लाख रुपये है. साल 2025 में, एक ग्राहक समित कुमार ने अपने माता-पिता अरुण और हेना की मूर्तियां बनवाईं और फिर उन्हें एक उत्सव के दौरान कोलकाता में एक खुली छत वाली विंटेज कार में घुमाया.
दास कहते हैं कि उनके ग्राहक किसी न किसी तरह से अपने प्रियजन को अपने पास रखना चाहते हैं. उनके लिए, यह मृत्यु और क्षति के दुख को संभालने का एक तरीका है. अक्सर अपने पसंदीदा पहनावे या साड़ी में सजी ये मूर्तियां उसी घर में, उसी परिचित स्थान या कुर्सी पर खड़ी या बैठी रहती हैं जहाँ वे कभी रहा करते थे.
दास कहते हैं, “परिवार के लिए, वे इंसान हैं—लगभग इंसान. मैं उनसे कहता हूं कि मैं उन्हें असलियत के जितना संभव हो सके उतना करीब बना सकता हूं.” दास का लक्ष्य मूर्तियों को “हाइपर-रियलिस्टिक” (अत्यधिक वास्तविक) बनाना है, और इसके लिए वे असली इंसानी बालों का उपयोग करते हैं. “जब वे देखते हैं कि हमने उनकी माँ को कैसे बनाया है, वह अपने विशेष आभूषण और साड़ी कैसे पहनती थीं... और जब वे देखते हैं कि हमने उनकी आँखें बिल्कुल सटीक बनाई हैं, तो वे और मैं, दोनों बहुत भावुक हो जाते हैं.”
पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय इलाके में पले-बढ़े दास ने कोलकाता में कला की पढ़ाई की. उन्होंने पुरानी कोलकाता ट्रामों के हटने से पहले उन्हें पेंट किया और एक संग्रहालय में मॉडल बनाने का काम किया. उन्होंने 2013 में अपनी वर्कशॉप शुरू की थी, जहाँ वे उत्सवों के लिए मूर्तियां बनाते थे. लेकिन जब कोविड ने भारत में तबाही मचाई, तो मृतकों की मूर्तियां बनाने के अनुरोध तेजी से आने लगे.
पश्चिमी नजरिए से वर्कशॉप की ये कृतियां डरावनी या विचित्र लग सकती हैं, लेकिन हिंदू आमतौर पर मृत्यु, परलोक और यादों के प्रति एक जटिल समझ रखते हैं. मृत्यु को अक्सर केवल एक समय अवधि माना जाता है जिसके बाद जीवन फिर से घटित होता है, इसलिए मृत्यु कोई अंत नहीं है. यह दास की फैक्ट्री को एक अजीब ‘वैक्स म्यूजियम’ के बजाय ‘स्मरण’ (याद रखने) का एक मार्मिक संस्करण बनाता है.
67 वर्षीय तापस शांडिल्य ने 2021 में कोविड के कारण अपनी पत्नी इंद्राणी को खो दिया था. दस साल पहले, उन्होंने एक मंदिर में हरे कृष्णा के एक प्रसिद्ध नेता की सिलिकॉन प्रतिमा देखी थी. शांडिल्य बताते हैं कि इंद्राणी को वह बहुत पसंद आई थी. उन्होंने कहा, “इंद्राणी ने कहा था कि ‘अगर मैं तुमसे पहले मर जाऊं, तो मैं चाहूंगी कि तुम्हारे पास मेरी भी ऐसी ही एक मूर्ति हो.’ हमारी शादी को 39 साल हो चुके थे. उन्हें खोने के बाद मैं टूट गया था और चाहता था कि उनकी इच्छा इसी तरह पूरी हो, लेकिन इसे बिल्कुल हूबहू होना था.” शांडिल्य, जिन्होंने अब खुद भी वस्तुओं के सिलिकॉन मॉडल बनाना शुरू कर दिया है, कहते हैं कि उनकी पत्नी की मूर्ति उन्हें शांति और “निरंतर साथ” होने का अहसास देती है.
मशहूर हस्तियों का जमावड़ा
दास की व्यस्त वर्कशॉप एक अंधेरी और शोरगुल वाली जगह है. एक कोने में, दो युवा कर्मचारी मिट्टी तैयार कर रहे हैं. वहीं, प्रसिद्ध भारतीयों, संतों और जानवरों के सांचों के बीच एक विशाल ‘आदिमानव’ (संग्रहालय के लिए) खड़ा है. गोदाम में 1960 के दशक की बॉलीवुड स्टार सुचित्रा सेन और हिंदू संत आचार्य श्रीमत् स्वामी प्रणवानंद महाराज की मूर्तियां रखी हैं.
दास बताते हैं कि उनकी टीम अब तक नरेंद्र मोदी की 50 आदमकद मूर्तियां और क्रिकेट दिग्गज विराट कोहली की मूर्तियां बना चुकी है. अन्य हस्तियों में गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और मदर टेरेसा शामिल हैं. फुटबॉल खिलाड़ी पेले और लियोनेल मेसी को भी यहाँ सिलिकॉन में अमर किया गया है.
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.











