19/02/2026: राहुल को जान की धमकी | एआई समिट की असहजताएं जारी, गेट्स भाषण देने नहीं आए | चंद्रबाबू का ब्लू प्रिंट | बिरयानी से 70हजार करोड़ की टैक्सचोरी तक | ईरान पर कसता घेरा | चार्ल्स का भाई गिरफ्तार
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निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां
आज की सुर्खियां
राहुल को धमकी: वीडियो जारी कर जान से मारने की चेतावनी, आरोपी कोटा से गिरफ्तार.
एआई कोल्ड वॉर: दिल्ली समिट में सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ के बीच दिखी तल्खी, बिल गेट्स ने भाषण से नाम वापस लिया.
बिरयानी घोटाला: बिलिंग सॉफ्टवेयर में हेरफेर कर 70,000 करोड़ की टैक्स चोरी का पर्दाफाश.
शाही गिरफ्तारी: यौन शोषण मामले में ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू गिरफ्तार, शाही परिवार को लगा झटका.
फ्री की रेवड़ी: सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त बिजली-पानी बांटने पर राज्यों को लगाई फटकार.
अनोखी मौत: उन्नाव में क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले में अंपायर की जान गई.
आंखों की रोशनी गई: गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 लोगों की आंखें निकालनी पड़ीं.
ईरान पर खतरा: अमेरिकी सेना ने बढ़ाई तैनाती, ट्रम्प कर सकते हैं हमले का फैसला.
राहुल गांधी को जान से मारने की धमकी, कांग्रेस ने ‘गोडसे फैक्ट्री’ को ठहराया जिम्मेदार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जान से मारने और उनकी पार्टी के 25 सांसदों की हत्या करने की धमकी देने वाला एक वीडियो सामने आया है. ‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, खुद को दक्षिणपंथी समूह ‘करणी सेना’ का सदस्य बताने वाले एक व्यक्ति ने यह धमकी भरा वीडियो जारी किया. वीडियो में खुद को ‘राज अमेरा’ बताने वाला यह शख्स चेतावनी देता है कि अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जुड़ी कथित घटना दोहराई गई, तो “हम आपके घर में घुसकर आपको गोली मार देंगे.” उसने 24 घंटे के भीतर 25 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, अन्यथा उन्हें मारने की धमकी दी.
वीडियो वायरल होने के बाद, राजस्थान की कोटा पुलिस ने उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है. कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि बोरखेड़ा पुलिस स्टेशन में उससे पूछताछ की गई और उस पर पहले से ही चार आपराधिक मामले दर्ज हैं. हालांकि, हिरासत में लिए जाने के दौरान, आरोपी ने मीडिया से कहा कि वीडियो में वह नहीं है और उसने वह वीडियो देखा भी नहीं है. उसने राजनीतिक विरोधियों पर वीडियो बनाने का आरोप लगाया. भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, उसने कहा, “मैं दुनिया से जुड़ा हूं. मैं देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता हूं.”
करणी सेना ने इस व्यक्ति से अपना पल्ला झाड़ लिया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि उनका संगठन प्रदर्शन करता है, लेकिन हिंसा का समर्थन नहीं करता. राजस्थान में सत्ताधारी भाजपा ने भी आरोपी से दूरी बना ली है. हालांकि, करणी सेना के एक संभागीय अध्यक्ष ने कथित तौर पर कहा कि राज अमेरा को कुछ दिन पहले ही प्रवक्ता बनाया गया था.
इस धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे एक “सुनियोजित और कुटिल योजना” का हिस्सा बताया. उन्होंने नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुए इसे “गोडसे फैक्ट्री” का काम करार दिया और धमकी भरे वीडियो की ओर इशारा किया.
एआई समिट:
मोदी के मंच पर दिखा ‘कोल्ड वॉर’, बिल गेट्स ने किया किनारा, फिर भी बरसे अरबों डॉलर
नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई समिट’ न केवल भारत के तकनीकी भविष्य के लिए ऐतिहासिक निवेश वादों का गवाह बना, बल्कि यह मंच वैश्विक टेक दिग्गजों के बीच की आपसी खींचतान और हाई-प्रोफाइल अनुपस्थिति के कारण भी सुर्खियों में आ गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित इस महाकुंभ में जहाँ एक तरफ रिलायंस और गूगल जैसी कंपनियों ने भारत के लिए अपना खजाना खोल दिया, वहीं दूसरी तरफ सिलिकॉन वैली के प्रतिद्वंद्वियों के बीच की तल्खी और बिल गेट्स के अचानक कार्यक्रम से हटने की खबर चर्चा का केंद्र बनी रही.
मंच पर दिखी असहजता और ‘एआई कोल्ड वॉर’
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शिखर सम्मेलन में एक दिलचस्प और असहज वाकया तब हुआ जब पीएम मोदी ने मंच पर मौजूद 13 कॉर्पोरेट लीडर्स से ‘एआई एकता’ प्रदर्शित करने के लिए हाथ उठाने का आग्रह किया. अल्फ़ाबेट (गूगल) के सुंदर पिचाई और अन्य अधिकारियों ने तुरंत पीएम मोदी के संकेत का पालन किया, लेकिन ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई के बीच की दूरी साफ नजर आई.
मंच पर अगल-बगल खड़े होने के बावजूद, जब हाथ उठाने की बारी आई, तो दोनों प्रतिद्वंद्वियों ने अपनी मुट्ठियाँ एक-दूसरे से स्पष्ट रूप से दूर रखीं. ऑल्टमैन इस दौरान काफी असहज दिखे और दूसरी तरफ देखने लगे. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसे यूजर्स ने “एआई कोल्ड वॉर” का नाम दिया. गौरतलब है कि डारियो आमोदेई पहले ओपनएआई में ही थे, लेकिन मतभेदों के चलते उन्होंने अलग होकर एंथ्रोपिक की शुरुआत की थी. हालांकि, ऑल्टमैन ने बाद में सफाई देते हुए कहा, “मुझे पता नहीं था कि मंच पर क्या हो रहा है या हमें क्या करना चाहिए.”
बिल गेट्स का ‘यू-टर्न’ और विवाद
समिट का दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अपने निर्धारित मुख्य भाषण से कुछ घंटे पहले ही नाम वापस ले लिया. बीबीसी के मुताबिक, गेट्स फाउंडेशन ने इसे “सावधानीपूर्वक विचार” के बाद लिया गया निर्णय बताया, लेकिन कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया. उनकी जगह फाउंडेशन के अंकुर वोरा ने भाषण दिया.
गेट्स का यह कदम उस समय आया है जब हाल ही में जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में उनके नाम का जिक्र होने पर विवाद छिड़ा था. हालांकि, गेट्स के प्रवक्ता ने इन दावों को खारिज किया है, लेकिन समिट से उनकी दूरी ने कई कयासों को जन्म दे दिया.
विवादों के बीच निवेश की बारिश
इन तमाम नाटकों के बावजूद, भारत के एआई इकोसिस्टम के लिए यह समिट बेहद सफल रहा. समिट में कुल 200 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश के वादे किए गए:
रिलायंस इंडस्ट्रीज: मुकेश अंबानी ने अगले सात वर्षों में एआई इकोसिस्टम के लिए 110 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया.
गूगल: सुंदर पिचाई ने विशाखापत्तनम में एक नया एआई हब स्थापित करने की घोषणा की.
कूटनीतिक साझा दृष्टिकोण: पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एआई के “लोकतंत्रीकरण” और नवाचार पर जोर दिया.
हालांकि, समिट में कुछ कुप्रबंधन की खबरें भी आईं, जैसे एक ‘स्वदेशी’ रोबोट डॉग का वास्तव में चीनी मेक निकलना. फिर भी, सैम ऑल्टमैन ने अपने संबोधन में एआई को विनियमित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया, ताकि तकनीक किसी एक देश या कंपनी के हाथ में केंद्रित होकर तबाही का सबब न बने.
चंद्रबाबू नायडू का आक्रामक ब्लूप्रिंट: 10 लाख युवाओं को स्किलिंग और क्वांटम यूनिवर्सिटी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और आक्रामक योजना तैयार की है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नायडू वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) द्वारा “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता” विषय पर आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे.
आंध्र प्रदेश सरकार राज्य में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रही है. इसमें सबसे प्रमुख आईबीएम के साथ होने वाला समझौता है, जिसके तहत राज्य के 10 लाख (एक मिलियन) युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. इसके अलावा, क्वांटम और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए यूएनआईसीसी के साथ एक और समझौता किया जाएगा.
नायडू की योजना यहीं नहीं रुकती. राज्य सरकार आंध्र प्रदेश में एक ‘क्वांटम एआई यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ समझौता करेगी. साथ ही, आईआईटी मद्रास के सहयोग से एक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्यूटर’ पहल शुरू की जाएगी, और एनवीडिया राज्य में ‘एआई लिविंग लैब्स’ स्थापित करने में भागीदार बनेगा.
शिखर सम्मेलन में नायडू क्वांटिला इंक के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीधर गढ़ी से मुलाकात करेंगे. गोलमेज चर्चा में उनके साथ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सीईओ बोर्गे ब्रेंडे भी शामिल होंगे. नायडू यूके के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मिलेंगे और एआई मंत्री कनिष्क नारायण व अन्य अधिकारियों के साथ विभिन्न सहयोगात्मक पहलों पर चर्चा करेंगे. दोपहर में, वह अरामको इंडिया, एडोब और ऑटोडेस्क के शीर्ष अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे, जो राज्य में निवेश और तकनीकी विकास की उनकी गंभीर मंशा को दर्शाता है.
हैदराबाद में बिरयानी की जाँच से खुला 70,000 करोड़ रुपये का देशव्यापी टैक्स घोटाला
हैदराबाद के बिरयानी रेस्तरां में एक सामान्य निरीक्षण ने पूरे भारत में चल रहे 70,000 करोड़ रुपये के विशाल कर चोरी घोटाले का पर्दाफाश कर दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा उद्धृत टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पाया कि कई रेस्तरां बिलिंग सॉफ़्टवेयर में हेरफेर करके अपनी असली कमाई छिपा रहे थे.
जांच में पता चला कि रेस्तरां मालिक एक विशेष बिलिंग सॉफ़्टवेयर का उपयोग कर रहे थे जो एक लाख से अधिक रेस्तरां में इस्तेमाल होता है. अधिकारियों ने एआई और कंप्यूटर टूल्स की मदद से लगभग 1.77 लाख रेस्तरां के 60 टेराबाइट डेटा का विश्लेषण किया. उन्होंने पाया कि ग्राहकों द्वारा भुगतान किए जाने के बाद, सिस्टम के अंदर से कई बिल चुपचाप हटा दिए जाते थे या बदल दिए जाते थे. पूरे भारत में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के बिल सिस्टम से मिटा दिए गए थे.
घोटाले का तरीका बेहद शातिर था. अक्सर ‘कैश’ (नकद) वाले बिलों को हटा दिया जाता था, क्योंकि उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है. कई बार तो पूरे दिन या महीने के बिल ही मिटा दिए जाते थे और टैक्स रिटर्न में बहुत कम आय दिखाई जाती थी. केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही 5,100 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई गई थी. जब अधिकारियों ने 40 रेस्तरां में जाकर भौतिक जाँच की, तो वहाँ भी 400 करोड़ रुपये की बिक्री का अंतर मिला.
इस कर चोरी में कर्नाटक सबसे आगे रहा, जिसके बाद तेलंगाना और तमिलनाडु का नंबर आता है. अधिकारियों का मानना है कि अब तक के डेटा से पता चलता है कि कुल रेस्तरां बिक्री का लगभग एक-चौथाई हिस्सा छिपाया जा रहा था. जांच अब पूरे देश में फैला दी गई है क्योंकि अधिकारियों को संदेह है कि अन्य बिलिंग सॉफ़्टवेयर भी इसी तरह के घोटाले में शामिल हो सकते हैं.
ट्रम्प का नया दावा: ‘भारत-पाक युद्ध रोका, 11 महंगे जेट मार गिराए गए थे’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोध के दौरान मध्यस्थता करने के अपने दावे को एक नए मोड़ के साथ दोहराया है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि उस समय हुए संघर्ष में “11 जेट मार गिराए गए थे” और वे “बहुत महंगे जेट” थे.
ट्रम्प ने आरोप लगाया कि उन्होंने दोनों देशों को व्यापारिक सौदों और टैरिफ का डर दिखाकर रोका. उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें फोन किया और कहा, सुनिए, अगर आप यह मामला नहीं सुलझाते हैं तो मैं आप दोनों के साथ व्यापार नहीं करूँगा... और अचानक हमने समझौता कर लिया. मैंने कहा था कि अगर आप लड़ेंगे, तो मैं आपके देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा.”
दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प पिछले कुछ महीनों में 80 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक संघर्ष को रोका था, लेकिन उनके द्वारा बताए गए मार गिराए गए जेट्स की संख्या बार-बार बदलती रही है. पहले उन्होंने 5 जेट्स की बात की थी, फिर 7, 8, 10 और अब यह संख्या 11 तक पहुँच गई है.
ट्रम्प ने अपने भाषण के बीच में यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें “देख रहे हैं” और वे “उत्साहित” हैं. हालाँकि, भारत ने हमेशा किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है और व्यापारिक लाभ उठाने के दावों की भी पुष्टि नहीं की है.
विकल्प तलाशता मायावती का काडर वोट, खाली जगह देख यूपी का रुख कर रहे हैं दलित केंद्रित दल
“द इंडियन एक्सप्रेस” में दीप्तिमान तिवारी ने लिखा है कि 2027 में उत्तरप्रदेश का विधानसभा चुनाव दलित राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहां मायावती की विरासत और दलित नेतृत्व पर वर्चस्व के लिए कई नए और पुराने चेहरों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है.
अपनी रिपोर्ट में तिवारी ने लिखा है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का राजनीतिक प्रभाव अपने सबसे निचले स्तर पर है. 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. मायावती का जो ‘काडर वोट’ (विशेषकर दलित मतदाता) कभी उनके साथ मजबूती से खड़ा था, अब वह विकल्पों की तलाश कर रहा है.
बसपा की इस कमजोरी से पैदा हुए ‘राजनीतिक शून्य’ को भरने के लिए कई दलित और आंबेडकरवादी पार्टियां उत्तरप्रदेश की ओर आकर्षित हो रही हैं. इनमें मुख्य रूप से चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) सबसे आगे है. नगीना सीट से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनका मनोबल बढ़ा है और वे 2027 में सभी 403 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.
यूपी के दलित मतदाताओं को रिझाने के लिए अन्य क्षेत्रीय दल भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. बिहार के चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), रामदास अठावले की आरपीआई (ए) और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) भी सक्रिय हो रही हैं. ये पार्टियां मुख्य रूप से ‘जाटव’ वोटों के अलावा ‘पासी’ और ‘पासवान’ जैसे अन्य दलित समुदायों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही हैं.
चंद्रशेखर आजाद अब कांशीराम के पदचिन्हों पर चलते हुए अति पिछड़े वर्गों (ईबीसी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को भी जोड़ने की रणनीति बना रहे हैं. वे सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे हैं, ताकि पार्टी का विस्तार हो सके.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, गठबंधन की संभावनाएं भी हैं. जहां कुछ दल भाजपा के साथ गठबंधन की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन के दरवाजे खुले रखे हैं, बशर्ते विचारधारा का टकराव न हो.
‘रेवड़ी संस्कृति’ पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार; कहा, सब मुफ़्त बांटोगे तो काम कौन करेगा?
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को राजनीतिक “मुफ्त उपहारों” की बढ़ती संस्कृति को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने चेतावनी दी कि राज्यों द्वारा बिना सोचे-समझे दी जा रही इस उदारता से देश के आर्थिक विकास और कार्य संस्कृति को नुकसान पहुँच रहा है.
‘एजेंसियों’ के मुताबिक, तमिलनाडु पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, जिसमें उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति पर ध्यान दिए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव था, शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारों के लिए “गरीबों का हाथ थामना” समझ में आता है, लेकिन वित्तीय क्षमता का आकलन किए बिना सभी उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली और अन्य लाभ देना “तुष्टीकरण की नीति” के समान है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि अधिकांश राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं, लेकिन इसके बावजूद वे रोजगार सृजन और विकास परियोजनाओं में निवेश करने के बजाय मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली की घोषणाएं करना जारी रखते हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए पूछा, “इस तरह की उदारता के वितरण से राष्ट्र का आर्थिक विकास बाधित होगा. कल्याण प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है, लेकिन जो लोग इन मुफ्त उपहारों का आनंद ले रहे हैं, क्या वह ऐसी चीज नहीं है जिसकी जांच की जानी चाहिए?” उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि बिजली दरें अधिसूचित करने के बाद भी राज्य सरकारी खजाने के द्वार क्यों खोल रहे हैं.
पीठ ने आगे आगाह किया कि मुफ्त उपहारों पर अत्यधिक निर्भरता कार्य संस्कृति को नष्ट कर सकती है. मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, “यदि आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली देना शुरू कर देंगे, तो काम कौन करेगा? और कार्य संस्कृति का क्या होगा?” उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकारें वेतन देने और खैरात बांटने के अलावा और कुछ नहीं कर रही हैं.
क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के हमले में अंपायर की मौत, करीब एक दर्जन खिलाड़ी घायल
उत्तरप्रदेश के उन्नाव में बुधवार दोपहर को खेल के मैदान पर मधुमक्खियों के झुंड के हमले में 60 वर्षीय क्रिकेट अंपायर की जान चली गई.
मानिक गुप्ता, जो लगभग तीन दशकों से कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (केसीए) से जुड़े हुए थे, को हमले के दौरान कई डंक लगे. उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें कानपुर के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहाँ बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
फिरोज़ मिर्ज़ा के अनुसार, यह घटना उन्नाव के शुक्लागंज स्थित सप्रू स्टेडियम में हुई, जहाँ वाईएमसीसी और पैरामाउंट के बीच मैच चल रहा था.
केसीए के महाप्रबंधक दिनेश कटियार ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “मानिक ने केसीए के अंडर13 लीग टूर्नामेंट के पिछले मैच में अंपायरिंग की थी, जो दोपहर करीब 1:30 बजे समाप्त हुआ था. वह अपने एक दोस्त के लिए रुक गए थे, जो पहले मैच के बाद शुरू हुए दूसरे मैच में अंपायरिंग कर रहा था. तभी मधुमक्खियों ने हमला कर दिया.”
कटियार ने बताया कि लगभग एक दर्जन बच्चे, जिनमें से अधिकांश ने सफेद टी-शर्ट पहनी हुई थी, मधुमक्खियों के डंक का शिकार हुए.
उन्होंने कहा, “आमतौर पर उन लोगों पर हमला किया गया जिन्होंने सफेद टी-शर्ट पहनी थी. हमले के दौरान लगभग एक दर्जन खिलाड़ी और एक अन्य अंपायर सहित कुछ अन्य लोगों को भी डंक मारे गए.
किश्तवाड़ कलेक्टर के रमजान चंदा आदेश पर राजनीतिक बवाल
किश्तवाड़ के जिला मजिस्ट्रेट ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए रमजान के महीने के दौरान चंदा जुटाने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य करने के दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसकी राजनीतिक दलों द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है.
फ़ैयाज़ वानी की रिपोर्ट के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट पंकज कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत जारी एक आदेश में, पहाड़ी जिले किश्तवाड़ में पवित्र रमजान के महीने के दौरान चंदा इकट्ठा करने के लिए अनिवार्य शर्तें लागू की हैं.
यह आदेश दान एकत्र करने के इच्छुक एनजीओ, ट्रस्टों, सोसायटियों, समितियों या व्यक्तियों के लिए आधिकारिक प्राधिकरण, साख का सत्यापन, जबरन वसूली पर रोक, सार्वजनिक पारदर्शिता और रिपोर्टिंग तंत्र को अनिवार्य बनाता है.
आदेश के अनुसार, कोई भी व्यक्ति, एनजीओ, ट्रस्ट, सोसाइटी या समिति किश्तवाड़ जिले के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में नकद, वस्तु या डिजिटल माध्यम से तब तक चंदा इकट्ठा नहीं करेगी, जब तक कि उनके पास जेएंडके सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट या ट्रस्ट एक्ट जैसे प्रासंगिक अधिनियमों के तहत वैध पंजीकरण न हो. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और गुरुवार से शुरू हुए पवित्र रमजान माह के दौरान प्रभावी रहेगा.
इस निर्देश की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और अन्य विधायकों ने कड़ी आलोचना की है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक निजाम-उद-दीन भट ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की कि इस आदेश को जल्द से जल्द वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि दान और ज़कात धार्मिक कर्तव्य हैं और अधिकारियों को सूचित करने के बाद नहीं दिए जाते हैं.
उन्होंने जिलाधिकारी के आदेश को असंवैधानिक और उकसाने वाला बताते हुए कहा, “क्या दान और ज़कात की प्रशासनिक जांच होती है? मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूं कि वे आदेश की समीक्षा करें और इसे वापस करवाएं.” उनकी टिप्पणियों का कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर ने भी समर्थन किया. हालांकि, जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस आदेश की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह आदेश निर्देशित करता है कि कोई व्यक्ति कहीं भी खड़ा होकर चंदा स्वीकार नहीं कर सकता. विशेष रूप से रमजान के इस महीने के दौरान, जो एक पवित्र महीना है जब मुस्लिम समुदाय ज़कात के रूप में दान देता है, इस दान का दुरुपयोग राष्ट्रविरोधी और विनाशकारी गतिविधियों के लिए किया जाता है.”
22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगला एसआईआर चरण अप्रैल में, तैयारी शुरू
चुनाव आयोग ने गुरुवार को 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) से संबंधित प्रारंभिक कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है, क्योंकि यह प्रक्रिया “अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद” है.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, एक बार यह कार्य पूरा हो जाने के बाद, सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसके दायरे में आ जाएंगे. मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय स्तर पर एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था.
बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वर्तमान में यह नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है. असम में, एसआईआर के बजाय एक ‘विशेष पुनरीक्षण’ (एसआर) 10 फरवरी को पूरा किया गया था.
गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखें निकाली गईं, 9 ने गंवाई रोशनी
उत्तरप्रदेश में गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद संक्रमण फैलने से नौ मरीजों की एक आंख निकालनी पड़ी और नौ अन्य की आंखों की रोशनी चली गई. इस घटना के बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है और जांच के आदेश दिए हैं.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि 1 फरवरी को न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में आयोजित एक नेत्र शिविर के दौरान 30 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे. उन्होंने बताया कि सर्जरी के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों ने ऑपरेशन वाली आंख में तेज दर्द और पानी आने की शिकायत शुरू कर दी. अधिकारियों ने पुष्टि की कि कम से कम 18 मरीजों में संक्रमण फैल गया और हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के अस्पतालों में रेफर कर दिया गया. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि अस्पताल को सील कर दिया गया है और मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं.
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने इसे “गंभीर लापरवाही” करार दिया और कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी. इनमें से कई ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए थे. मरीजों ने आरोप लगाया कि सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अगले दिन से समस्याएं शुरू हो गईं. सबसे गंभीर रूप से प्रभावित कुछ मरीजों का इलाज एम्स दिल्ली और वाराणसी व लखनऊ के अस्पतालों में चल रहा है. अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में डॉक्टरों को संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए संक्रमित आंख निकालनी पड़ी.
प्रभावित मरीजों में से एक, परदेशी ने बताया कि 17 फरवरी को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उन्होंने अपनी आंख की रोशनी खो दी है. उन्होंने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर आंख निकालनी पड़ सकती है.”
गोला की सहवान अली ने कहा कि सर्जरी के एक दिन बाद उनकी पीड़ा और बढ़ गई. उन्होंने बताया, “अगले दिन आंख से खून बह रहा था. हमें आनन-फानन में दिल्ली ले जाया गया. डॉक्टरों ने एक आंख निकाल दी. अब मैं देख नहीं सकती.”
रादौली की शंकरावती, जिनकी आंख वाराणसी के एक अस्पताल में निकाली गई, ने कहा कि अब उन्हें दूसरी आंख की रोशनी खोने का डर है. उन्होंने कहा, “मुझे अभी भी दर्द है और धुंधला दिखाई दे रहा है. मुझे डर है कि संक्रमण फैल सकता है.” उनके बेटे ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी दूसरी आंख पर कोई असर पड़ा तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे.
जल जीवन मिशन की रिपोर्ट: हर चार में से एक पानी का सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतरता
इंदौर में हाल के दिनों में प्रदूषित पानी की वजह से हुई मौतों ने हालात को गंभीर बना दिया है. इसी बीच इंडियास्पेंड में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने देश में सुरक्षित और साफ़ पानी की सीमित पहुंच को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है.
जल जीवन मिशन की 2024 की एक राष्ट्रीय आकलन रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में घरों के नल से लिए गए पानी के हर चार सैंपलों में से एक माइक्रोबायोलॉजिकल मानकों पर खरा नहीं उतरा. जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 76% सैंपल लैब टेस्ट में पास हुए, जबकि 24% फेल पाए गए.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग 75% परिवार पीने से पहले पानी को किसी भी तरह से उबालते या फिल्टर नहीं करते. 92.4% परिवारों ने नल के पानी की गुणवत्ता पर संतोष जताया.
सार्वजनिक संस्थानों की स्थिति घरों से भी खराब पाई गई. स्कूलों, आंगनवाड़ियों और स्वास्थ्य केंद्रों से लिए गए पानी के केवल 73% सैंपल ही पास हुए. इसका मतलब है कि बच्चे, गर्भवती महिलाएं और इलाज कराने वाले लोग भी मानक से कम गुणवत्ता का पानी पी रहे हैं.
जांच व्यवस्था कमज़ोर
गांवों में पानी की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) 73% गांवों में उपलब्ध नहीं थे. यानी अधिकांश गांवों में लोग यह जांच ही नहीं कर सकते कि उनका पानी सुरक्षित है या नहीं. जब तक पानी साफ दिखता, स्वाद और गंध ठीक लगती है, लोग उसे सुरक्षित मान लेते हैं. ऐसे निष्कर्ष पहले नॉर्वे, कनाडा और भारत के कई राज्यों में हुए अध्ययनों में भी सामने आए हैं.
28 जनवरी 2026 तक, जल जीवन मिशन के तहत करीब 15.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों (81.6%) को नल कनेक्शन दिया जा चुका है, यह जानकारी सरकार ने लोकसभा में दी. इनमें से 98% परिवारों के पास कनेक्शन है, 87% ने बताया कि कनेक्शन चालू है, 84% को नियमित पानी मिल रहा है और 80% को पर्याप्त मात्रा (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर से ज्यादा) मिल रही है.
यह आकलन जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 761 जिलों के चयनित गांवों में किया गया. हर गांव में 12 घरों और सभी सार्वजनिक संस्थानों, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र, का सर्वे किया गया.
रखरखाव और कर्मचारियों की कमी
रिपोर्ट के अनुसार केवल 55% गांवों में ही ‘विलेज वाटर एंड सैनिटेशन कमेटी’ या पानी समिति सक्रिय है. जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायतों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे पानी की योजना और प्रबंधन करें.
58.1% गांवों में ही संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं. यानी चार में से एक से ज़्यादा गांवों में सिस्टम संभालने के लिए कुशल कर्मचारी नहीं हैं. केवल 26.8% गांवों में पानी सेवा के लिए उपयोग शुल्क लिया जाता है. 27.2% गांवों में ही टेस्ट किट उपलब्ध हैं, जबकि 70.3% गांवों में क्लोरीनीकरण की व्यवस्था है. लेकिन क्लोरीन से सिर्फ जैविक प्रदूषण कम होता है, रासायनिक प्रदूषण की सफाई नहीं होती. इसलिए असल में खराब सैंपलों की संख्या ज़्यादा हो सकती है.
टूटी पाइपलाइन और पंप खराबी
जिन घरों में नल कनेक्शन काम नहीं कर रहा था, उनमें 32% मामलों में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की वजह सामने आई. 30% मामलों में पंप ख़राब थे. जनवरी 2025 में ग्रामीण महाराष्ट्र में भी अनियमित पानी आपूर्ति की रिपोर्ट आई थी, जहां लोगों को निजी स्रोतों से पानी खरीदना पड़ रहा था.
2024 के एक अध्ययन में भी कहा गया कि केवल नल कनेक्शन देने से नियमित पानी की गारंटी नहीं होती. परियोजना में देरी, संचालन की कमी और स्थानीय समस्याएं भी बाधा बनती हैं. जो परिवार पानी को शुद्ध करते हैं, उनमें 13.2% पानी उबालते हैं और 11.2% कपड़े से छानते हैं.
राज्यों में बड़ा अंतर
राज्यों के बीच पानी की गुणवत्ता में बड़ा अंतर देखा गया. लद्दाख में 99% सैंपल पास हुए, जबकि त्रिपुरा में केवल 31.1%. उत्तर प्रदेश (66.4%), मध्य प्रदेश (63.3%), केरल (56.4%) और गुजरात (47.3%) जैसे बड़े राज्यों में भी पास दर राष्ट्रीय औसत 76% से कम रही.
‘सहयोग पोर्टल’: ऑनलाइन कंटेंट हटाने की एकतरफ़ा प्रक्रिया, प्रभावितों को नहीं मिलती सूचना
‘द वायर’ को गृह मंत्रालय के ‘सहयोग पोर्टल’ का यूज़र मैनुअल मिला है, जिसमें बताया गया है कि सरकार ऑनलाइन कंटेंट हटाने के आदेश कैसे जारी करती है. यह मैनुअल कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था, इसमें साफ है कि कंटेंट हटाने के आदेश एकतरफा होते हैं और सीधे सरकारी एजेंसियों तथा आईटी इंटरमीडियरी (जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टेलीकॉम कंपनियां) के बीच भेजे जाते हैं. मैनुअल में पत्रकारों या कंटेंट बनाने वालों को “स्टेकहोल्डर” यानी हितधारक नहीं माना गया है. इसमें यह भी नहीं बताया गया कि किसी कंटेंट को हटाने से पहले कोई स्वतंत्र समीक्षा प्रक्रिया होगी.
यह पोर्टल अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था. इसे गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने बनाया है. इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा आईटी एक्ट 2000 की धारा 79(3)(b) और इंटरमीडियरी गाइडलाइंस 2021 के नियम 3(1)(d) के तहत कंटेंट हटाने के नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाना है. आलोचना इस बात की हुई है कि इस पोर्टल का इस्तेमाल धारा 69A ,जो खास तौर पर ब्लॉकिंग आदेश से जुड़ी है, को दरकिनार कर किया जा रहा है और यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है.
10 फरवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने आईटी संशोधन नियम 2026 जारी किए. इन नए नियमों में कंटेंट हटाने की समय-सीमा 24-36 घंटे से घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दी गई है. ये नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे, जो नई दिल्ली में एआई इंडिया समिट के खत्म होने का दिन है.
पहले कंटेंट ब्लॉक करने के लिए लिखित आदेश, कारण बताना, प्रभावित पक्ष को नोटिस देना और एक न्यायिक समिति द्वारा समीक्षा जरूरी थी, लेकिन सहयोग पोर्टल के मैनुअल से पता चलता है कि अब गृह मंत्रालय सीधे नियंत्रण में है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा MeitY की भूमिका को प्रभावी रूप से किनारे किया जा रहा है.
मैनुअल में जिनको स्टेकहोल्डर बताया गया है, उनमें गृह मंत्रालय, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, दूरसंचार विभाग, केंद्र और राज्यों की अधिकृत एजेंसियां तथा इंटरमीडियरी शामिल हैं. कंटेंट बनाने वाले या जिनका कंटेंट हटाया जा रहा है, उन्हें इसमें शामिल ही नहीं किया गया है.
पोर्टल पर यह भी दिखता है कि किसी राज्य में कितने कंटेंट हटाने के अनुरोध आए, कितने लंबित हैं, कितने यूआरएल हटाए गए, कितने प्रक्रिया में हैं, और कितनों पर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है. इन कार्रवाइयों के कारण भी केवल स्टेकहोल्डर को ही दिखाई देते हैं.
किस तरह का कंटेंट हटाया जा सकता है
धारा 79(3)(b) के तहत न केवल गैरकानूनी जानकारी बल्कि ऐसी किसी भी जानकारी, डेटा या लिंक को हटाया जा सकता है जो “गैरकानूनी काम” के लिए इस्तेमाल हो रहा हो. इसमें बाल यौन शोषण सामग्री, आत्महत्या से जुड़ा कंटेंट, फ़र्ज़ी खबरें, पोर्नोग्राफी, गैर-सहमति से साझा की गई निजी तस्वीरें, धोखाधड़ी, जुआ-सट्टा, मनी लॉन्ड्रिंग, हैकिंग, डेटा लीक, किसी धर्म या जाति के ख़िलाफ़ नफ़रत, फिशिंग, मानव तस्करी, अवैध हथियार या ड्रग्स का व्यापार आदि शामिल हैं.
मैनुअल में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कंटेंट हटाने के आदेश से पहले कोई स्वतंत्र समीक्षा होगी या कंटेंट बनाने वाले को सूचना दी जाएगी. पहले भी धारा 69A के तहत स्वतंत्र समीक्षा का प्रावधान नहीं था, लेकिन वहां कम से कम एक समिति के ज़रिये प्रक्रिया होती थी और प्लेटफॉर्म को जवाब देने का मौका मिलता था. अंतिम चुनौती केवल अदालत में दी जा सकती थी.
सहयोग पोर्टल पर आपत्ति और कानूनी चुनौती
अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम को 2,300 से ज़्यादा ब्लॉकिंग आदेश भेजे गए, यह जानकारी आरटीआई के ज़रिये ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने दी.
‘एक्स’ ने इस पोर्टल के ख़िलाफ़ कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने ‘एक्स’ की याचिका खारिज कर दी और सहयोग पोर्टल को “सार्वजनिक हित का साधन” बताया.
डिजिपब ने इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) की मदद से ‘एक्स’ के मामले में हस्तक्षेप किया. उनका कहना था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना के प्रसार का माध्यम हैं और संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है. आवेदन में कहा गया था कि सहयोग पोर्टल का कोई स्पष्ट वैधानिक आधार नहीं है और यह आईटी एक्ट की धारा 69A से आगे बढ़कर काम करता है. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में धारा 69A को संवैधानिक माना था.
इस तरह सहयोग पोर्टल के ज़रिये ऑनलाइन कंटेंट हटाने की प्रक्रिया तेज़ और केंद्रीकृत हो गई है, लेकिन इसमें पारदर्शिता और स्वतंत्र समीक्षा की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
चीन की रोबोटिक्स फर्म ‘यूनिट्री’ का उदय और भारत के साथ कनेक्शन
चीन की रोबोटिक्स कंपनी ‘यूनिट्री’ के लिए यह सप्ताह काफी हलचल भरा रहा है, जिसने चीन और भारत दोनों ही देशों में सुर्खियां बटोरी हैं. “द हिंदू” की रिपोर्ट के अनुसार, 16 फरवरी को चीन के सबसे बड़े टीवी कार्यक्रम ‘स्प्रिंग फेस्टिवल गाला’ (जिसे 50 करोड़ से ज़्यादा लोग देखते हैं) में यूनिट्री के ह्यूमरॉइड रोबोट्स ने शानदार मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले तकनीक में भारी सुधार को दर्शाता है, जहाँ रोबोट्स अब लचीलेपन के साथ पंच और किक मार सकते हैं.
लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद, यूनिट्री का एक पुराना मॉडल, चौपाया “रोबो डॉग”, भारत में एक विवाद का कारण बन गया. नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में निजी गलगोटियास यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक रोबोट को उनके प्रतिनिधियों ने ‘स्वदेशी डिज़ाइन’ बताया था. हालांकि, बाद में खुलासा हुआ कि वह असल में ‘यूनिट्री Go2’ मॉडल था, जिसे ऑनलाइन लगभग 1,600 डॉलर में खरीदा जा सकता है. इस खुलासे के बाद विश्वविद्यालय को अपना स्टॉल बंद करना पड़ा.
यूनिट्री एक निजी कंपनी है, जिसे 36 वर्षीय टेक उद्यमी वांग शिनशिंग ने शुरू किया था. वांग ने अपना पहला रोबोट विश्वविद्यालय में ही डिज़ाइन किया था. कंपनी ने इस सप्ताह घोषणा की है कि वह इस साल 20,000 ह्यूमरॉइड रोबोट बेचने की योजना बना रही है, जो 2025 के मुकाबले लगभग चार गुना ज़्यादा है. कंपनी का नाम “यूनिवर्स” और “ट्री” से मिलकर बना है. संस्थापक वांग ने बताया कि उनके कुंग-फू करने वाले रोबोट भविष्य में विभिन्न परिदृश्यों में रोबोट की तैनाती के लिए आधार तैयार करेंगे. रिपोर्ट बताती है कि यूनिट्री चीन के तकनीकी परिदृश्य को बदलने वाली कई कंपनियों में से एक है. वैश्विक रोबोटिक्स बाज़ार में चीन की हिस्सेदारी पिछले साल 40% थी, और घरेलू बाज़ार 2028 तक 108 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है. चीन में रोबोटिक्स के क्षेत्र में 7,40,000 कंपनियां हैं, जिनमें यूनिट्री और एजीबॉट सबसे आगे हैं. प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी है कि न्यू ईयर प्रोग्राम में अपने प्रोडक्ट दिखाने के लिए कंपनियों के बीच 10 मिलियन डॉलर तक की बोली लगाने की खबरें भी आई थीं.
चीन की पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) में रोबोटिक्स को प्राथमिकता दी गई है. कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रमुख क्षेत्रों में मुख्य तकनीकों में सफलता हासिल करने और “यूनिकॉर्न कंपनियों” को बढ़ावा देने का आह्वान किया है. वांग शिनशिंग की सफलता यह दर्शाती है कि चीन का टेक स्पेस कितनी तेज़ी से विकसित हो रहा है. वांग ने अपना पहला प्रोटोटाइप केवल 20,000 युआन (करीब 2 लाख रुपये) में बनाया था, और आज उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है.
ईरान पर संभावित हमले के लिए अमेरिकी सेना तैयार, ट्रम्प के फैसले का इंतज़ार
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना का जमावड़ा इतनी तेज़ी से बढ़ा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास अब इस सप्ताहांत ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का विकल्प मौजूद है. ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन और पेंटागन के अधिकारियों ने बताया है कि व्हाइट हाउस के सामने अब कूटनीति या युद्ध के बीच चयन करने की एक बड़ी और जोखिम भरी चुनौती है. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि उन्होंने आगे बढ़ने को लेकर क्या फैसला लिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रही, जिसमें ईरान ने कूटनीतिक समाधान के लिए प्रस्ताव तैयार करने हेतु दो सप्ताह का समय मांगा है. इसके बावजूद, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और लॉन्च साइटों पर हमला करने में सक्षम सैन्य बल को इकट्ठा करने का काम इस हफ्ते भी जारी रहा. ट्रम्प लगातार यह मांग कर रहे हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दे और यूरेनियम संवर्धन बंद कर दे. वहीं, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जिनका देश संभावित हमले में हिस्सा ले सकता है, ईरान की मिसाइल क्षमता को कमज़ोर करने के लिए कार्रवाई पर ज़ोर दे रहे हैं.
इज़राइली रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इज़राइली सेना हफ्तों से हाई अलर्ट पर है और संभावित युद्ध की तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं. इज़राइल की सुरक्षा कैबिनेट की बैठक गुरुवार से हटाकर रविवार को कर दी गई है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जिनेवा में हुई बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी बड़े मतभेद हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रम्प, जिन्होंने युद्धों से दूर रहने के वादे पर चुनाव लड़ा था, अब पिछले एक साल में किसी दूसरे देश में सातवें और ईरान पर दूसरे अमेरिकी सैन्य हमले पर विचार कर रहे हैं. गौरतलब है कि आठ महीने पहले 12 दिनों तक चले युद्ध में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, जिसके बाद ट्रम्प ने दावा किया था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “नष्ट” हो गया है. लेकिन अब वह काम पूरा करने के लिए सेना वापस भेजने पर विचार कर रहे हैं.
पेंटागन ने क्षेत्र में अपनी ताकत काफी बढ़ा ली है. इसमें दर्जनों रिफ्यूलिंग टैंकर, 50 से अधिक अतिरिक्त फाइटर जेट्स और दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (अपने विध्वंसक जहाजों और पनडुब्बियों के साथ) शामिल हैं. ‘यू.एस.एस. जेराल्ड आर. फोर्ड’ एयरक्राफ्ट कैरियर जिब्राल्टर के करीब पहुँच रहा है और जल्द ही क्षेत्र में मौजूद ‘यू.एस.एस. अब्राहम लिंकन’ के साथ जुड़ जाएगा. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति के लिए कूटनीति हमेशा पहला विकल्प है, लेकिन वे अमेरिकी हितों और सेना की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही फैसले लेते हैं.
इस बार अमेरिकी तैयारी पिछली बार से बेहतर बताई जा रही है. पिछले महीने जब ट्रम्प ने हमले की धमकी दी थी, तब पेंटागन पूरी तरह तैयार नहीं था क्योंकि क्षेत्र में मौजूद सैनिकों के पास पर्याप्त एयर डिफेंस नहीं था. लेकिन अब ‘पैट्रियट’ और ‘थाड’ जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियां तैनात कर दी गई हैं, जो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं. फिर भी, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शासन बदलने के उद्देश्य से किया गया कोई भी ऑपरेशन सफल होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है. जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के ईरान विशेषज्ञ वैली नस्र का कहना है कि कूटनीति से अमेरिका को तैयारी का समय मिला है, लेकिन इससे ईरान को भी जवाबी कार्रवाई की योजना बनाने का मौका मिल गया है.
व्यापार वार्ता से पहले अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के आयात की दी हरी झंडी
अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली व्यापार वार्ता से ठीक पहले, अमेरिका ने भारत को रूसी कच्चे तेल की “बेसलोड” मात्रा का आयात जारी रखने के लिए हरी झंडी दे दी है. टेलीग्राफ में परन बालकृष्णन की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह सहमत स्तर लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकता है. यह आंकड़ा 2024 के अंत और 2025 के दौरान भारत द्वारा किए गए आयात से काफी कम है, जब पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद सस्ता रूसी तेल भारत की ऊर्जा रणनीति का केंद्र बन गया था.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत ने सहमत मात्रा से अधिक “अतिरिक्त खरीद” को रोकने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, हालांकि उन्होंने सटीक आंकड़े नहीं बताए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले धमकी दी थी कि यदि भारत ने रूसी तेल का आयात जारी रखा तो भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने के लिए कुछ राहत हासिल कर लिया है.
केप्लर के प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि 10 लाख बैरल प्रतिदिन का आंकड़ा अपेक्षित था. जनवरी में भारत का आयात गिरकर 12 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया था, जो तीन साल में सबसे कम था, हालांकि फरवरी के पहले 17 दिनों में यह फिर से बढ़कर 13 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है. रिफाइनर नए प्रतिबंधों की उम्मीद में अपनी खरीद को समायोजित कर रहे हैं.
यह कदम वैश्विक बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है. यदि भारत अचानक रूसी तेल खरीदना बंद कर देता, तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती थीं. भारत रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल यूरोप और अमेरिका सहित अन्य देशों को निर्यात करता है. अमेरिका खुद भारत से वैक्यूम गैस ऑयल (वीजीओ) का आयात करता है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में जोर देकर कहा कि “रणनीतिक स्वायत्तता” भारतीय नीति निर्माण के केंद्र में है और ऊर्जा निर्णय केवल राष्ट्रीय हित से निर्देशित होते हैं. रोसनेफ्ट द्वारा नियंत्रित ‘नायरा एनर्जी’ और सरकारी रिफाइनरी जैसे इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम भी रूसी तेल के प्रमुख खरीदार बने हुए हैं. फिलहाल, भारत को अमेरिका से थोड़ी राहत मिल गई है, लेकिन ट्रम्प की अप्रत्याशित नीतियों को देखते हुए अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.
ब्रिटेन में किंग चार्ल्स के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबैटन गिरफ्तार, नाबालिग के साथ रेप का आरोप, एपस्टीन फाइलों में दर्ज है नाम
ब्रिटिश पुलिस ने गुरुवार को किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर को सार्वजनिक पद पर रहते हुए दुराचार के संदेह में गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनके संबंधों के आरोपों के बाद की गई है.
‘एजेंसियों’ के अनुसार, थेम्स वैली पुलिस ने बताया कि जब तक पूर्व प्रिंस पुलिस हिरासत में हैं, तब तक वे बर्कशायर और नॉरफ़ॉक में उनसे जुड़े ठिकानों पर तलाशी ले रहे हैं. हालांकि पुलिस बल ने कहा कि वे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम उजागर नहीं करेंगे, लेकिन व्यापक रूप से यह रिपोर्ट दी जा रही है कि यह गिरफ्तारी एंड्रयू से जुड़ी है, जो गुरुवार को ही 66 वर्ष के हुए हैं.
‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता वर्जीनिया जुफ्रे के परिवार ने एक बयान में कहा कि एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है.”
जुफ्रे, एपस्टीन के सबसे प्रमुख पीड़ितों में से एक थीं, जिन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि उन्हें प्रिंस एंड्रयू के पास यौन तस्करी के लिए भेजा गया था. अप्रैल 2025 में, 41 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी.
परिवार ने एक बयान में कहा, “अंततः, आज हमारे टूटे हुए दिलों को इस खबर से राहत मिली है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है—यहां तक कि शाही परिवार भी नहीं. अपनी बहन की ओर से, हम एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर की जांच और गिरफ्तारी के लिए ब्रिटेन की थेम्स वैली पुलिस के प्रति आभार व्यक्त करते हैं.” ‘द गार्डियन’ के अनुसार, गिरफ्तारी की घोषणा से पहले, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बीबीसी ब्रेकफास्ट पर एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर के बारे में पूछे जाने पर कहा था कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है.
स्टार्मर ने आगे कहा: “जिस किसी के पास भी कोई जानकारी है, उसे गवाही देनी चाहिए. चाहे वह एंड्रयू हों या कोई और, जिसके पास भी प्रासंगिक जानकारी है, उसे संबंधित निकाय के सामने आना चाहिए. इस विशेष मामले में हम एपस्टीन के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन ऐसे कई अन्य मामले भी हैं.”
उल्लेखनीय है कि एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर आधुनिक इतिहास में गिरफ्तार होने वाले पहले वरिष्ठ शाही सदस्य हैं.
यह गिरफ्तारी अमेरिकी कांग्रेस द्वारा ‘एपस्टीन फाइल्स’ में जारी किए गए आरोपों के बाद हुई है. बकिंघम पैलेस ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान जारी कर कहा था कि वह एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर के आचरण की पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए “तैयार” है.
पैलेस ने कहा, “किंग चार्ल्स और कैमिला की संवेदनाएं दुर्व्यवहार के पीड़ितों के साथ रही हैं और रहेंगी.” यह बयान तब आया जब 77 वर्षीय सम्राट को शाही दौरों के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा. एंड्रयू, जिन्हें पिछले साल ‘प्रिंस’ और ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ की सभी शाही उपाधियों से वंचित कर दिया गया था, लगातार किसी भी गलत काम से इनकार करते रहे हैं.
बीबीसी ने रिपोर्ट दी कि एंड्रयू को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया है कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन को गोपनीय सरकारी दस्तावेज भेजे थे. इस महीने की शुरुआत में, पुलिस उन दावों पर विचार कर रही थी कि माउंटबैटन-विंडसर ने दिवंगत सजायाफ्ता यौन अपराधी को दस्तावेज सौंपे थे.
दिवंगत महारानी एलिजाबेथ के दूसरे बेटे एंड्रयू ने एपस्टीन के संबंध में हमेशा गलत काम से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें अपनी दोस्ती पर पछतावा है.
राजशाही विरोधी समूह ‘रिपब्लिक’ ने एपस्टीन से संबंधित 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज जारी होने के बाद एंड्रयू की शिकायत पुलिस से की थी. उन फाइलों से संकेत मिला कि 2010 में, माउंटबैटन-विंडसर ने वियतनाम, सिंगापुर और अन्य स्थानों की अपनी आधिकारिक यात्राओं की रिपोर्ट एपस्टीन को भेजी थी.
2011 में एपस्टीन के साथ उनकी दोस्ती पर बढ़ती चिंता के बीच एंड्रयू को व्यापारिक भूमिका से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा था. कभी अपनी प्रेम जीवन के लिए मीडिया के आकर्षण का केंद्र रहे एंड्रयू, जिन्हें टैब्लॉयड अखबारों ने “रैंडी एंडी” का नाम दिया था, अपनी आर्थिक तंगी और एपस्टीन जैसे संदिग्ध किरदारों के साथ संबंधों के कारण नियमित रूप से सुर्खियों में रहने लगे.
2019 में एपस्टीन की दोबारा गिरफ्तारी के बाद, एंड्रयू ने बीबीसी के ‘न्यूज़नाइट’ कार्यक्रम को एक विनाशकारी इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने एपस्टीन के साथ अपने संपर्कों को स्पष्ट करने की कोशिश की. यह दांव उल्टा पड़ गया – अविश्वसनीय स्पष्टीकरण देने और पीड़ितों के प्रति सहानुभूति न दिखाने के लिए उनकी व्यापक आलोचना हुई.
भारी विरोध के बीच, एंड्रयू ने 20 नवंबर, 2019 को घोषणा की कि वह “निकट भविष्य के लिए” सार्वजनिक कर्तव्यों और धर्मार्थ भूमिकाओं को छोड़ रहे हैं. अगस्त 2021 में, एपस्टीन की पीड़ितों में से एक, वर्जीनिया जुफ्रे ने न्यूयॉर्क की अदालत में एंड्रयू पर मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि जब वह नाबालिग थी तब राजकुमार ने उसके साथ यौन संबंध बनाए थे. एंड्रयू ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन उनसे सभी सैन्य संबद्धताएं और शाही धर्मार्थ कार्य छीन लिए गए.
अंततः एंड्रयू ने एक अज्ञात राशि के भुगतान के साथ मामले का निपटारा कर लिया. हालांकि, उन्होंने गलत काम स्वीकार नहीं किया, लेकिन यौन तस्करी की शिकार के रूप में जुफ्रे की पीड़ा को स्वीकार किया. जुफ्रे की अप्रैल 2025 में 41 वर्ष की आयु में आत्महत्या से मृत्यु हो गई.
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. पिछले साल ईमेल सामने आने के बाद, जिनसे पता चला कि एंड्रयू ने अपने पिछले दावों की तुलना में अधिक समय तक एपस्टीन से संपर्क बनाए रखा था, राजा चार्ल्स तृतीय ने अपने भाई से उनकी ‘प्रिंस’ की उपाधि, अन्य सम्मान और विंडसर में उनका घर ‘रॉयल लॉज’ छीन लिया. अब वह पुलिस हिरासत में हैं. वह ब्रिटिश सिंहासन के उत्तराधिकारियों की सूची में अभी भी आठवें स्थान पर हैं.
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