23/02/2026: राहुल ने मोदी को एप्सटीन फाइलों में लपेटा | मोदी के भाषण का इजराइल में बॉयकाट?| संघ का जातिवाद | अजीत पवार की मौत पर बढ़ते सवाल | मोहम्मद दीपक की जिम मेंबरशिप | मणिपुरी फिल्म को बाफ्टा
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निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां
आज की सुर्खियां
मोदी-राहुल जंग: राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर ‘एपस्टीन फाइल्स’ कनेक्शन का आरोप लगाया; मोदी के ‘गंदी राजनीति’ वाले बयान पर पलटवार.
इजरायल में विरोध: इजरायली संसद में पीएम मोदी के भाषण का बहिष्कार करेगा वहां का विपक्ष; जजों की नियुक्ति पर विवाद मुख्य वजह.
विमान हादसा: झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश; रांची से दिल्ली जा रहे 7 लोगों की तलाश जारी.
एआई का खतरा: भारतीय चुनावों में एआई और डीपफेक का बढ़ता इस्तेमाल; ‘आज तक’ का फेक वीडियो हुआ था वायरल.
बाफ्टा में भारत: मणिपुर की फिल्म ‘बून्ग’ ने जीता बाफ्टा अवार्ड; निर्देशक ने मणिपुर में शांति की अपील की.
नस्लीय भेदभाव: दिल्ली में अरुणाचल की महिलाओं और अमेरिका में तेलुगु समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर आक्रोश.
राफेल विरोधाभास: भारत 114 नए राफेल खरीदने की तैयारी में, जबकि फ्रांस में पुराने सौदे की जांच जारी.
अजीत पवार केस: एनसीपी विधायक का दावा- विमान हादसा नहीं, साजिश थी; पायलट की भूमिका पर उठाए सवाल.
मोदी पर राहुल गांधी का पलटवार, ‘एपस्टीन फाइल्स में आपका, आपके मंत्री और दोस्त का नाम आना शर्मनाक है’
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कांग्रेस पर “गंदी और नंगी राजनीति” के हमले के कड़ा जवाब देते हुए, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “शर्मनाक” करार दिया और प्रधानमंत्री पर “गंदी राजनीति” करने का आरोप लगाया.
एक वीडियो संदेश में, गांधी ने अपने दावों को दोहराया कि अमेरिका के साथ समझौता राष्ट्रीय हितों के साथ विश्वासघात के समान है. उन्होंने कहा, “आपने अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौता किया, जिसमें आपने देश को बेच दिया, वह शर्मनाक है.” उन्होंने आगे दावा किया कि इस समझौते ने भारत की डेटा सुरक्षा के साथ समझौता किया है और किसानों तथा कपड़ा क्षेत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है.
प्रीता नायर की रिपोर्ट के अनुसार, ये टिप्पणियां मोदी द्वारा हाल ही में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न (बिना शर्ट के) विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने के एक दिन बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने इसे “गंदी और बेशर्म राजनीति” बताया था. प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए गांधी ने कहा, “और आप शर्म की बात करते हैं? मैं आपको बताता हूँ कि शर्म क्या होती है,” उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए उसका बचाव किया.
गांधी ने जोर देकर कहा, “आपने हमारे देश का डेटा दूसरों को दे दिया. आपने किसानों को तबाह कर दिया. आपने कपड़ा उद्योग को बर्बाद कर दिया, वह शर्मनाक है.”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ‘डर’ के कारण संसद से बच रहे हैं. अडानी समूह और अन्य मुद्दों से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, “भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओ, अपने प्रधानमंत्री की आँखों में देखो, तुम्हें डर दिखाई देगा. वह संसद तक नहीं आ सके.”
उन्होंने आगे कहा, “आपका नाम, आपके मंत्री का नाम और आपके दोस्त का नाम एपस्टीन फाइल्स में एक साथ आना, ऐसे जघन्य अपराधी के साथ जोड़ा जाना—वह शर्मनाक है.”
गांधी ने कहा, “सच्चाई वही है जो मैंने संसद में कही थी—आपके प्रधानमंत्री के गले पर अमेरिका की पकड़ है, उन्होंने भारत का गला घोंट दिया है और उसे बेच दिया है. पूरा देश जानता है कि अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रहे केस ने आपकी नींद उड़ा दी है—क्योंकि यह मामला भाजपा और आपके वित्तीय ढांचे पर है.”
गांधी ने आगे आरोप लगाया कि इस मामले के संबंध में एक साल से अधिक समय से कोई कार्रवाई नहीं की गई है और इसे “शर्मनाक” बताया. उन्होंने सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों को बचाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष अपनी आवाज उठाना जारी रखेगा.
महात्मा गांधी और भगत सिंह का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि अहिंसा और असहमति भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार का अभिन्न अंग हैं. उन्होंने पूछा, “यह रास्ता गांधी जी और भगत सिंह जी ने दिखाया था. आप इससे इतने डरे हुए क्यों हैं?”
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि कांग्रेस “किसानों, मजदूरों, एमएसएमई और भारत के डेटा की रक्षा” करने और संविधान को बचाने के लिए लड़ना जारी रखेगी. उन्होंने कहा, “भारत की रक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, हम करेंगे। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे.”
एपस्टीन मामले में अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत रहे मैंडेलसन गिरफ्तार
यूके पुलिस के एक बयान के अनुसार, अमेरिका में पूर्व ब्रिटिश राजदूत लॉर्ड पीटर मैंडेलसन को सार्वजनिक पद पर कदाचार के संदेह में गिरफ्तार किया गया है.
‘एक्सप्रेस ग्लोबल डेस्क’ ने बीबीसी की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि मैंडेलसन पर इस आरोप में जाँच चल रही थी कि मंत्री रहते हुए उन्होंने मृत यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ सरकार की बाज़ार-संवेदनशील जानकारी साझा की थी.
मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने अपने बयान में कहा, “अधिकारियों ने सार्वजनिक पद पर कदाचार के संदेह में एक 72 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. उन्हें सोमवार, 23 फरवरी को कैमडेन के एक पते से गिरफ्तार किया गया और पूछताछ के लिए लंदन के एक पुलिस स्टेशन ले जाया गया है. यह कार्रवाई विल्टशायर और कैमडेन क्षेत्रों में दो ठिकानों पर तलाशी वारंट के बाद की गई है.”
मैंडेलसन की गिरफ्तारी पूर्व प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी के चार दिन बाद हुई है, जिन्हें एपस्टीन के साथ उनके संबंधों से जुड़े इसी तरह के अपराध के संदेह में एक अलग मामले में गिरफ्तार किया गया था. हालाँकि, पूर्व प्रिंस को 11 घंटे की हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया था, और ब्रिटिश पुलिस अभी भी उस मामले की जाँच कर रही है.
पीटर मैंडेलसन दशकों तक लेबर पार्टी के एक प्रमुख व्यक्तित्व रहे हैं, उन्होंने 1980 के दशक में पार्टी के लिए काम करना शुरू किया था. मैंडेलसन ने 1997 में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की शानदार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वे ब्रिटेन में ‘न्यू आंदोलन के केंद्र में रहे थे.
इजरायली संसद में भारतीय पीएम मोदी के भाषण का बहिष्कार करेगा विपक्ष
‘हारेत्ज़’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में विपक्ष ने बुधवार को नेसेट (इजरायली संसद) में होने वाले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का बहिष्कार करने की योजना बनाई है. यह कदम नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध का नतीजा है. विवाद की मुख्य वजह स्पीकर द्वारा सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट इसाक अमित को इस विशेष सत्र में आमंत्रित न करने का फैसला है, जबकि रवायत के मुताबिक उन्हें बुलाया जाना चाहिए था. ‘हारेत्ज़’ के अनुसार, स्पीकर ओहाना ने कहा कि पीएम मोदी आधी-अधूरी संसद को संबोधित नहीं करेंगे और उन्होंने बहिष्कार करने वाले विपक्षी सांसदों की कुर्सियों को भरने के लिए पूर्व सांसदों को बुलाने की योजना बनाई है.
विपक्ष के नेता यैर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आग्रह किया है कि वे सुनिश्चित करें कि जस्टिस अमित को आमंत्रित किया जाए, ताकि विपक्ष इस सत्र में शामिल हो सके. लैपिड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हम सत्र में रहना चाहते हैं, हमें सत्र में होना चाहिए. प्रधानमंत्री नेतन्याहू को ओहाना को निर्देश देना चाहिए कि वे हमें भाग लेने की अनुमति दें.” दरअसल, जस्टिस अमित को आमंत्रित न करने का फैसला नेतन्याहू सरकार द्वारा इजरायल की न्यायपालिका की शक्तियों को कम करने और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देने की कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है.
लैपिड ने पिछले हफ्ते ही बहिष्कार की घोषणा करते हुए कहा था कि “जस्टिस अमित का बहिष्कार विपक्ष का भी बहिष्कार है.” उन्होंने संसद में बोलते हुए तर्क दिया कि विपक्ष नहीं चाहता कि भारत को शर्मिंदगी उठानी पड़े और डेढ़ अरब लोगों के नेता आधी खाली नेसेट के सामने खड़े हों. उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति को लेकर भारतीय दूतावास भी घबराया हुआ है. वहीं, स्पीकर ओहाना ने इस धमकी को “राजनीतिक संघर्ष में नाजायज हथियार” बताया और लैपिड से आग्रह किया कि वे दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक के साथ इजरायल के विदेशी संबंधों को नुकसान न पहुंचाएं. पीएम मोदी की यह यात्रा 2017 के बाद इजरायल की उनकी दूसरी यात्रा होगी और वे नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे.
झारखंड: एयर एंबुलेंस क्रैश, 7 लोग थे सवार, रांची से दिल्ली जा रहा था विमान
‘द हिंदू’ और पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के चतरा जिले में सोमवार (23 फरवरी, 2026) को एक एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि इस विमान में सात लोग सवार थे. एयर एंबुलेंस ने शाम करीब 7:10 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी, जिसके कुछ देर बाद ही यह हादसा हुआ. यह विमान रांची से मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था.
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एक बयान जारी कर पुष्टि की है कि रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का ‘बीचक्राफ्ट C90’ विमान (VT-AJV), जो मेडिकल इवैक्यूएशन फ्लाइट के तौर पर संचालित हो रहा था, चतरा जिले के कसारी पंचायत इलाके में क्रैश हुआ है. विमान में दो क्रू सदस्यों सहित कुल सात लोग सवार थे. डीजीसीए के मुताबिक, “विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी. शाम 7:34 बजे कोलकाता एटीसी से संपर्क स्थापित करने के बाद, वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में विमान का संचार और रडार संपर्क टूट गया.”
चतरा की उपायुक्त (डीसी) कीर्तिश्री जी ने बताया कि विमान शाम करीब 7:30 बजे लापता हो गया था और यह सिमरिया के बारियातु पंचायत में क्रैश हुआ है. चूंकि घटना स्थल घने जंगल के बीच है, इसलिए हताहतों की संख्या के बारे में तत्काल कोई पुष्टि नहीं की जा सकती. जिला प्रशासन की खोज और बचाव दल मौके पर पहुंच रही है और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की एक टीम को भी जांच के लिए भेजा जा रहा है.
‘राहुल गांधी ने कहा कि वह मेरा जिम जॉइन करेंगे’
उत्तराखंड के कोटद्वार के जिम ट्रेनर दीपक कुमार, जो 26 जनवरी को बजरंग दल के सदस्यों से एक मुस्लिम दुकानदार को बचाने के बाद सोशल मीडिया सनसनी बन गए थे, उन्होंने सोमवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. राहुल गांधी ने दीपक से कहा कि वह उनके जिम की सदस्यता लेंगे.
दीपक कुमार, जिन्हें अब लोकप्रिय रूप से ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से भी जाना जाता है, 26 जनवरी को एक 70 वर्षीय दुकानदार के बचाव में आगे आए थे. उस दुकानदार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा उसकी दुकान के नाम ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ को लेकर परेशान किया जा रहा था. कार्यकर्ताओं का दावा था कि ‘बाबा’ शब्द से एक स्थानीय देवता का अपमान हुआ है. तीखी बहस के दौरान, कुमार ने व्यंग्यात्मक रूप से खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया था, जिसका वीडियो वायरल हो गया था.
दीपक के साथ अपनी मुलाकात की झलकियां साझा करते हुए राहुल गांधी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कहा कि जिम ट्रेनर ने एकता और साहस की वह ज्वाला दिखाई है, जो हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए. राहुल गांधी ने कहा, “हर इंसान बराबर है. यही भारतीयता है, यही मोहब्बत की दुकान है.”
सोमवार को कांग्रेस नेता से मिलने के बाद दीपक ने कहा, “राहुल गांधी जी ने मुझे सोनिया जी से भी मिलवाया. उन्होंने मेरी पत्नी और परिवार से बात की और मुझे आश्वासन दिया कि मैंने जो किया वह अच्छा था और मुझे डरना नहीं चाहिए.” दीपक ने आगे कहा, “आज कोटद्वार में स्थिति पहले से बेहतर है. मेरा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. यह जानकर अच्छा लगा कि कोई यह समझता है कि मैंने मानवता के लिए आवाज उठाई है.”
‘एचटी न्यूज़ डेस्क’ के अनुसार, इसी महीने, उत्तराखंड पुलिस ने दीपक की हत्या करने वाले को ₹2 लाख का इनाम देने की घोषणा करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. उन्होंने कहा कि मौत की धमकी के कारण वह और उनका परिवार डर के साये में जी रहे हैं.
हरकारा डीप डाइव:
जाति उन्मूलन पर जुबानी खर्च के बजाय संघ पहले अपने ढांचे में बदलाव करे : भंवर मेघवंशी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर इस बार ‘हरकारा’ डीप डाइव में चर्चा का विषय रहा संघ की विचारधारा, जाति पर उसका रुख और नेतृत्व की संरचना. लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी से विस्तार से बातचीत की गई. मेघवंशी खुद कभी आरएसएस से जुड़े रहे हैं और अपनी किताब ‘मैं एक कार सेवक था’ के ज़रिये उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं.
चर्चा की शुरुआत हाल में दिए गए मोहन भागवत के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी हिंदू सरसंघचालक बन सकता है. सवाल यह उठा कि क्या यह सच में बदलाव का संकेत है या केवल एक राजनीतिक संदेश. अब तक संघ के शीर्ष पदों पर रहे लोगों की पृष्ठभूमि पर भी बात हुई और यह प्रश्न सामने आया कि क्या दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्गों को वास्तविक नेतृत्व में जगह मिली है.
भंवर मेघवंशी ने कहा कि संघ सार्वजनिक मंचों पर जाति विरोध की बात करता है, लेकिन उसकी संगठनात्मक संरचना अब भी द्विज वर्चस्व वाली दिखाई देती है. मनुस्मृति, गोलवलकर और सावरकर जैसे पुराने विचारकों से दूरी के दावों पर भी चर्चा हुई. उनका तर्क था कि विवाद होने पर कुछ बातों से किनारा किया जाता है, लेकिन मूल वैचारिक ढांचे को चुनौती नहीं दी जाती.
डॉ. बी.आर. अंबेडकर और संघ की सोच की तुलना भी इस चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही. अंबेडकर ने जाति को धर्मशास्त्रों से जुड़ा बताया और उसे खत्म करने के लिए मूल आधार को चुनौती दी. इसके उलट, संघ धर्मशास्त्रों को स्वीकारते हुए जाति खत्म करने की बात करता है. इस अंतर को लेकर सवाल उठाया गया कि क्या दोनों दृष्टिकोणों को एक जैसा बताया जा सकता है. चर्चा में महिलाओं की भूमिका पर भी बात हुई. क्या संघ में कभी कोई महिला सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती है, या नेतृत्व संरचना पुरुषों तक सीमित रहेगी. साथ ही “हिंदू खतरे में है” जैसे नारों की राजनीति और उसके पीछे की असुरक्षा की भावना पर भी विचार किया गया.
एक अहम हिस्सा दलित-बहुजन नेतृत्व के संकट पर रहा. आज अंबेडकर जैसा सर्वस्वीकार्य नेतृत्व क्यों नहीं उभर पा रहा है. क्या सामाजिक विभाजन, राजनीतिक रणनीतियां और वैचारिक भ्रम इसकी वजह हैं. इस पर भी खुलकर बात हुई. इस चर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि बयान और वास्तविक संरचना के बीच अंतर को समझना जरूरी है. अगर जाति उन्मूलन की बात सच में की जानी है, तो केवल शब्दों से नहीं, संगठनात्मक और वैचारिक स्तर पर ठोस बदलाव की ज़रुरत होगी.
विरोधाभास: भारत 114 राफेल खरीदने की तैयारी में, लेकिन फ्रांस में पुराने सौदे की जांच अभी जारी
“द वायर” में आशीष रे की रिपोर्ट इस विरोधाभास को उजागर करती है कि भारत एक ऐसी कंपनी (दसॉल्ट) के साथ एक और विशाल रक्षा सौदे की ओर कदम बढ़ा रहा है, जो अपने पिछले सौदे के कारण फ्रांस में गंभीर कानूनी जांच के दायरे में है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार भारतीय वायु सेना के लिए 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों (एमआरएफए) को खरीदने की प्रक्रिया में है. इस दौड़ में फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन का ‘राफेल’ सबसे आगे माना जा रहा है.
का मुख्य पहलू यह है कि एक तरफ भारत और फ्रांस नए सौदे की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फ्रांस के अभियोजक साल 2016 में हुए 36 राफेल विमानों के शुरुआती सौदे में कथित “भ्रष्टाचार, पक्षपात और मनी लॉन्ड्रिंग” की जांच अभी भी जारी रखे हुए हैं.
फ्रांस में यह न्यायिक जांच 2021 में शुरू की गई थी. इसमें भारत के एक बिचौलिये को दी गई कथित गुप्त कमीशन और ऑफसेट पार्टनर (अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस) के चयन में हुए कथित पक्षपात की जांच की जा रही है.
फ्रांसीसी एनजीओ ‘शेरपा’ द्वारा दायर शिकायतों के बाद यह मामला गरमाया था. रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांसीसी जांचकर्ता उन दस्तावेजों और सबूतों की जांच कर रहे हैं जो यह संकेत देते हैं कि सौदे को प्रभावित करने के लिए अनुचित तरीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है.
भारत में सुप्रीम कोर्ट और सीएजी (महालेखा नियंत्रक परीक्षक) ने पहले ही इस सौदे को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन फ्रांस में चल रही यह आपराधिक जांच राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है, खासकर जब भारत एक और बड़ा रक्षा सौदा करने की तैयारी में है.
रिपोर्ट बताती है कि इस जांच के बावजूद भारत और फ्रांस के रक्षा संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन 114 विमानों के नए सौदे के दौरान पारदर्शिता और पुरानी जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी.
कैसे भारत के चुनावी खेल को बदल रहा है ‘एआई’
सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ऐसा दिखाया गया कि यह ‘आज तक’ का न्यूज बुलेटिन है. एंकर कहते नजर आए कि एक लीक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक असम विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए “रेड अलर्ट” है और पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है. वीडियो बिल्कुल असली जैसा लग रहा था, लेकिन सच्चाई यह थी कि आज तक ने ऐसी कोई खबर नहीं चलाई थी. बाद में फैक्ट-चेक में सामने आया कि यह एआई से बनाया गया डीपफेक वीडियो था.
यह सिर्फ एक फ़र्ज़ी वीडियो नहीं था. यह उस बड़े बदलाव की झलक है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के चुनावी मैदान में “हकीकत गढ़ने” का औज़ार बन चुका है. यह रिपोर्ट ऑउटलुक में प्रकाशित हुई है.
इस साल असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले ही एआई के ज़रिये राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. ‘बूम’ की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल 1,067 फैक्ट-चेक में से 219 मामलों में एआई -जनरेटेड कंटेंट शामिल था, यानी 20.5 प्रतिशत. यह 2024 के मुक़ाबले दोगुना ज़्यादा है.
रिपोर्ट में दो ट्रेंड साफ दिखे, एक “एआई स्लोप”, यानी जल्दी-जल्दी बनाया गया वायरल कंटेंट, और दूसरा संगठित डीपफेक अभियान, जिनका सीधा निशाना नेता, संस्थाएं और चुनावी प्रक्रिया थी.
बिहार और दिल्ली विधानसभा चुनावों में डीपफेक का खुला इस्तेमाल हुआ. नीतीश कुमार और योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं के फ़र्ज़ी वीडियो सामने आए. एक वीडियो में अभिनेता मनोज बाजपेयी को राष्ट्रीय जनता दल का समर्थन करते दिखाया गया, जबकि ऐसा कभी हुआ ही नहीं. 2025 में विधानसभा चुनावों से जुड़े 100 से ज़्यादा झूठे दावे पकड़े गए, जिनमें सिर्फ बिहार में 77 मामले एआई और डीपफेक से जुड़े थे.
अब फर्क यह है कि पहले गलत जानकारी पुराने वीडियो को एडिट कर फैलती थी. आज एआई पूरा का पूरा वीडियो और ऑडियो शुरू से बना देता है. किसी नेता को विरोधी पार्टी का समर्थन करते दिखाना हो या भड़काऊ बयान देते हुए दिखाना. सब कुछ बिना असली रिकॉर्डिंग के तैयार हो सकता है.
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है. राजनीतिक दल खुद भी एआई का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. एलेवेनलैब्स, चैटजीपीटी और क्लॉउड़ जैसे टूल से भाषण, प्रचार वीडियो और स्थानीय भाषाओं में संदेश तैयार किए जा रहे हैं. वॉइस क्लोनिंग के ज़रिये नेता अलग-अलग इलाकों में बिना गए वहां की बोली में संदेश भेज रहे हैं. 2024 के आम चुनाव से पहले दो महीनों में 5 करोड़ से ज़्यादा एआई -जनरेटेड कॉल किए गए. यह तरीका पारंपरिक कॉल सेंटर से करीब आठ गुना सस्ता पड़ा.
व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर एआई चैटबॉट लगाए गए, जो वोटरों के सवालों के जवाब देते और टारगेटेड मैसेज भेजते रहे, यहां तक कि प्रचार बंदी के दौरान भी. एआई ने चुनावी खर्च घटाया और पहुंच बढ़ाई, लेकिन साथ ही बड़े पैमाने पर गलत सूचना फैलाने का रास्ता भी खोल दिया.
2024 के आम चुनाव के दौरान व्हाट्सऐप और फेसबुक की मालिक कंपनी मेटा ने कुछ एआई -जनरेटेड राजनीतिक विज्ञापनों को मंज़ूरी दी, जिनमें भड़काऊ भाषा थी. विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, यह लोकतंत्र की बुनियाद को चुनौती देने वाला बदलाव है.
रिसर्चर अनादी अपनी स्टडी डीप फेक्स, डीप इम्पैक्टस में लिखती हैं कि एआई चुनावी राजनीति को नई दिशा दे रहा है. इससे पार्टियां कई भाषाओं में तेज़ी से कंटेंट बना सकती हैं, सही भी और गलत भी. लेकिन डीपफेक वोटरों को गुमराह कर सकते हैं, डिजिटल जानकारी पर भरोसा कमज़ोर कर सकते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
अहमदाबाद में 15 साल की मुस्लिम लड़की की आत्महत्या मामले में ‘डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट’ के दुरुपयोग का आरोप
अहमदाबाद में पिछले साल 9 अगस्त 2025 को 15 साल की मुस्लिम छात्रा सानिया अंसारी की आत्महत्या का मामला अब भी चर्चा में है, क्योंकि परिवार का आरोप है कि यह केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं था, बल्कि गुजरात के 39 साल पुराने “डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट” के दुरुपयोग, पड़ोसियों की धमकियों और पुलिस की कथित लापरवाही का नतीजा था.
इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट ‘आर्टिकल-14’ में प्रकाशित हुई है. सानिया के परिवार ने आर्टिकल-14 को बताया कि 2024 में उन्होंने अहमदाबाद के गोमतीपुर स्थित चोकसी नी चाली इलाके में अपने सामने वाला घर करीब 15.5 लाख रुपये में खरीदा था और दिसंबर 2024 तक पूरी रकम चुका दी थी. लेकिन घर बेचने वाली सुमनबेन सोनावणे के बेटे दिनेश सोनावणे, उसकी पत्नी सरला और बेटा मानव ने घर खाली करने से इनकार कर दिया और ऊपरी मंज़िल पर क़ब्ज़ा बनाए रखा. परिवार का कहना है कि उन्हें केवल निचली मंज़िल तक सीमित रखा गया, गालियां दी गईं, गंदा पानी फेंका गया और सानिया को स्कूल जाते समय परेशान किया गया.
परिवार के मुताबिक़ आरोपियों ने बार-बार कहा कि यह “डिस्टर्ब्ड एरिया” है और मुसलमान यहां घर नहीं खरीद सकते, और बिक्री को “आशांत धारा” यानी डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट के तहत अवैध बताया. सानिया की बहन रिफ़त जहां ने कहा कि “चार महीने हो गए, हमने अपनी बहन, अपनी बेटी और अपना घर सब खो दिया.” उनका आरोप है कि मां ने कई बार गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने यह कहकर टाल दिया कि यह डिस्टर्ब्ड एरिया है.
7 अगस्त 2025 को दोनों परिवारों में हिंसक झड़प हुई, जिसमें सानिया के भाई मुसैफ पर हमला हुआ और सानिया के साथ भी मारपीट की गई. परिवार ने पॉक्सो कानून के तहत शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ. दो दिन बाद, रक्षाबंधन के दिन, सानिया नए खरीदे गए घर के कमरे में फांसी पर लटकी मिली. उसने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें छह लोगों के नाम लिखे थे.
घटना के बाद दिनेश और मानव फरार हो गए. परिवार के वकील नितीश मोहन ने आर्टिकल 14 को बताया कि एफआईआर 14 अगस्त 2025 को, मौत के पांच दिन बाद, तब दर्ज हुई जब परिवार ने पुलिस आयुक्त से संपर्क किया. आरोपियों को गुजरात हाईकोर्ट से अंतरिम गिरफ्तारी से राहत मिल गई है और अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है.
डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट 1986 में दंगों के बाद लाया गया था, ताकि दंगे के समय मजबूरी में संपत्ति की बिक्री रोकी जा सके. 1991 से यह स्थायी रूप से लागू है और वर्तमान में गुजरात के 33 में से 18 जिलों, जिनमें अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, भावनगर और भरूच शामिल हैं, में लागू है.
इस कानून के तहत “डिस्टर्ब्ड एरिया” में संपत्ति की खरीद- फ़रोख़्त से पहले कलेक्टर की मंज़ूरी ज़रूरी होती है, जो जांच करता है कि सौदा स्वेच्छा और उचित कीमत पर हुआ या नहीं. लेकिन विशेषज्ञों और वकीलों का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल अक्सर हिंदू से मुस्लिम खरीदारों को रोकने के लिए किया जाता है, जिससे धार्मिक आधार पर अलगाव बढ़ता है. 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि 2013 से 2019 के बीच अहमदाबाद में डिस्टर्ब्ड एरिया 51% बढ़ा, और एक अन्य अध्ययन में शहर को मुसलमानों के लिए देश का सबसे अधिक अलग-थलग शहर बताया गया.
‘क्या अजीत पवार को राजीव गांधी की तरह मारा गया, क्या पायलट कपूर सुसाइड बॉम्बर था?’
अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एनसीपी) के विधायक अमोल मिटकरी और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के वरिष्ठ विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सोमवार को 28 जनवरी के उस विमान हादसे पर सवाल उठाए, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु हो गई थी.
‘स्टेट्समैन न्यूज़ सर्विस’ के मुताबिक, एक कार्यक्रम में अमोल मिटकरी ने कहा, “क्या अजीत पवार को ले जाने वाले ‘वीएसआर वेंचर्स’ के पायलट सुमित कपूर एक सुसाइड बॉम्बर (आत्मघाती हमलावर) थे? क्या अजीत पवार की हत्या उसी तरह की गई जैसे लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की थी? अगर पायलट सुमित कपूर की पत्नी का कहना है कि उनके पति जीवित हैं, तो क्या विमान दुर्घटना में मरने वाला वास्तव में कपूर ही था?”
उन्होंने आगे सवाल किया, “जब उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान हादसे को लेकर इतने बड़े रहस्य बने हुए हैं, तब महाराष्ट्र इतना शांत और खामोश कैसे है? अजीत पवार एक ऐसे व्यक्ति थे जो शिवाजी महाराज के आदर्शों का पालन करते थे. किन परिस्थितियों में कैप्टन साहिल मदान और कैप्टन यश, जिन्हें मूल रूप से अजीत पवार के विमान को उड़ाना था, ट्रैफिक में फंस गए? सीसीटीवी फुटेज कहाँ है? वे दोनों पायलट वर्तमान में कहाँ हैं? ब्लैक बॉक्स का डेटा और सीसीटीवी फुटेज अभी तक जारी क्यों नहीं किया गया है?”
अजीत पवार के भतीजे रोहित पवार ने सीबीआई जांच के लिए फड़नवीस सरकार की आलोचना की; कहा- सीआईडी जांच हो
राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की जान लेने वाले विमान हादसे की सीबीआई जांच कराने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से जांच में केवल देरी होगी.
कर्जत-जामखेड के विधायक की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे की सीबीआई जांच के आदेश देने का अनुरोध किया है. इस हादसे में अजीत पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी.
सोमवार को विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए रोहित पवार ने कहा कि सीबीआई जांच की मांग वाली रिपोर्ट संबंधित केंद्रीय मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और मुख्यमंत्री सहित सभी संबंधित अधिकारियों को पहले ही सौंपी जा चुकी है.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय एजेंसी (सीबीआई) के पास लगभग 7,000 मामले लंबित हैं, जिनमें से करीब 2,500 मामले एक दशक से अधिक समय से लंबित हैं.
उन्होंने कहा, “हम महाराष्ट्र में जांच के नाम पर समय की इस बर्बादी को बर्दाश्त नहीं करेंगे. सीआईडी इसकी जांच कर सकती है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि दुर्घटना के संबंध में केवल 30 प्रतिशत जानकारी ही अब तक सार्वजनिक की गई है और 70 प्रतिशत सामग्री अभी भी उनके पास है.
उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर में होली के जुलूस से पहले मस्जिदों, मजारों को तिरपाल से ढका गया
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर प्रशासन ने वार्षिक ‘जूता मार होली’ के पारंपरिक जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली मस्जिदों और मजारों को तिरपाल की चादरों से ढंक दिया है. साथ ही, इस वार्षिक उत्सव के लिए सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा कर दिया गया है.
नमिता वाजपेयी के अनुसार, ‘जूता मार होली’ शाहजहाँपुर में होली के दिन मनाई जाने वाली सदियों पुरानी एक अनूठी परंपरा है. इसमें रंगों से खेलने के दौरान लोग भैंसा गाड़ी पर सवार, ब्रिटिश काल के ‘लाट साहब’ के रूप में तैयार व्यक्ति पर जूते फेंकते हैं.
शाहजहाँपुर के पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी के अनुसार, 200 से अधिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती के साथ, इस वर्ष के जुलूस में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग डेढ़ गुना अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. जुलूस मार्ग पर पड़ने वाली 48 मस्जिदों और मजारों को पूरी तरह से मोटी प्लास्टिक की चादरों से ढंक दिया गया है. यह जुलूस फूलमती देवी मंदिर में पूजा के साथ शुरू होता है और फिर शहर भर में निकलता है. साल 1990 में इस जुलूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह एक पुरानी परंपरा है.
एसआईआर के बाद तमिलनाडु की अंतिम मतदाता सूची जारी, 74 लाख नाम हटाए
चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद, तमिलनाडु की अंतिम मतदाता सूची सोमवार को जारी की गई. अंतिम सूची के अनुसार, मतदाता सूची से 74 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के अलावा, इस गर्मी में केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में भी चुनाव होने वाले हैं.
‘एचटी’ न्यूज़ डेस्क के अनुसार, एसआईआर अभ्यास से पहले 27 अक्टूबर 2025 तक मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी, जो अब 23 फरवरी 2026 तक घटकर 5.67 करोड़ रह गई है. कुल मतदाताओं में 2.7 करोड़ पुरुष, 2.8 करोड़ महिलाएँ और 7,617 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल हैं.
विशेष रूप से, राज्य के चेंगलपट्टू जिले के शोलिंगनल्लूर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 5.36 लाख मतदाता दर्ज किए गए हैं. वहीं, हार्बर विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 1.16 लाख मतदाता दर्ज किए गए हैं. चुनाव आयोग ने कहा है कि जो मतदाता असंतुष्ट महसूस करते हैं, वे अंतिम सूची जारी होने के बाद नाम जोड़ने या हटाने के लिए अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं.
ईरान-अमेरिका तनाव: सैन्य टकराव की आशंका के बीच भारतीयों को ‘ईरान छोड़ने’ की चेतावनी
सैन्य टकराव की बढ़ती आशंकाओं के बीच, भारत ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है. इसमें उनसे व्यावसायिक उड़ानों सहित परिवहन के सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करके देश छोड़ने का आग्रह किया गया है.
‘एचटी’ में पूर्वा जोशी और आकांक्षा पुरोहित की रिपोर्ट है कि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित परमाणु समझौते पर अगले दौर की वार्ता गुरुवार, 26 फरवरी को जिनेवा में होगी. इस तारीख की पुष्टि ओमान के विदेश मंत्री ने की है, जो पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर चुका है.
ईरान की चेतावनी: ईरान ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी हमला, चाहे वह सीमित स्तर का ही क्यों न हो, “आक्रामकता का कृत्य” माना जाएगा. यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे ईरान पर सीमित हमले पर विचार कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को परमाणु समझौते के लिए 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा न करना देश के लिए “दुर्भाग्यपूर्ण” साबित होगा.
इस बीच ईरान के कुछ विश्वविद्यालयों, मुख्य रूप से तेहरान और मशहद में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ नए प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को लगातार दूसरे दिन ऐसे विरोध प्रदर्शन हुए.
समाचार एजेंसी ‘एएफपी’ के अनुसार, अमेरिकी सेना के अब मध्य पूर्व में 13 युद्धपोत तैनात हैं, इनमें विमान वाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ (जो पिछले महीने के अंत में पहुँचा था), नौ विध्वंसक और तीन फ्रिगेट शामिल हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक तनाव जनवरी में तब बढ़ गया जब ट्रंप ने गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों पर ईरानी शासन की कार्रवाई की निंदा की और कार्रवाई का संकल्प लिया. जहाँ ईरान का कहना है कि 3,000 से अधिक लोग मारे गए और इसके लिए विदेशी समर्थित “आतंकवादियों” को जिम्मेदार ठहराया, वहीं अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने इस कार्रवाई में 7,000 से अधिक मौतों की रिपोर्ट दी है.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जहाँ परमाणु वार्ता पर जल्द ही कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई, वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने हमला करने का फैसला किया तो उनका देश करारा जवाब देगा. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने भी शनिवार को कहा था कि अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के बीच उनका देश विश्व शक्तियों के दबाव के आगे सिर नहीं झुकाएगा.
राजस्थान में ‘साइबर सरकार’: कैसे एक नेटवर्क ने ‘पीएम किसान’ समेत सरकारी योजनाओं का पैसा हड़प लिया
“द इंडियन एक्सप्रेस” में हमज़ा खान की रिपोर्ट राजस्थान (विशेषकर झालावाड़ जिले) में फैले एक ऐसे बहुत बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा करती है, जिसने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के पैसे को अवैध रूप से हड़प लिया. इसमें पांच ‘अवैध लाभार्थियों’ का जिक्र कर बताया गया है कि कैसे यह नेटवर्क काम कर रहा था. यह नेटवर्क गांव स्तर पर काम करने वाले फील्ड एजेंटों से लेकर राजधानी जयपुर में बैठे सरकारी अधिकारियों तक फैला हुआ था. अधिकारियों ने इस समानांतर व्यवस्था को एक नाम दिया है – “साइबर सरकार”.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अगस्त में, एक व्हिसल ब्लोअर ने सबसे पहले इस घोटाले की ओर ध्यान खींचा था, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र की पीएम-किसान योजना, राज्य के पेंशन कार्यक्रम और फसल नुकसान के लिए मुआवजा योजना के लाभार्थियों के लिए तय पैसे की हेराफेरी शामिल थी. इसके जवाब में अक्टूबर के मध्य में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ – जिसे अब राज्य पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने अपने हाथ में ले लिया है – के तहत अब तक सरकारी अधिकारियों सहित 51 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लग्जरी वाहन और 3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी भी जब्त की गई है. जांचकर्ताओं का कहना है कि इस पूरे मामले में 11,000 से अधिक “संदिग्ध” बैंक खाते शामिल थे.
गांव स्तर के एजेंट (जैसे ई-मित्र संचालक) ग्रामीणों को लालच देकर उनके आधार कार्ड की जानकारी लेते थे और उन्हें बिना पात्रता के लाभार्थी बना देते थे. बदले में मिलने वाली सरकारी राशि का 50% हिस्सा गिरोह रख लेता था.
निशाने पर रही मुख्य योजनाओं में पीएम-किसान के तहत पात्रता नियमों में ढील और ‘ऑटो-अप्रूवल’ (स्वचालित मंजूरी) जैसी कमियों का फायदा उठाकर अपात्र लोगों को लाभ दिया गया. सामाजिक सुरक्षा पेंशन में स्वस्थ लोगों को फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्रों के आधार पर पेंशन दी गई. कुछ क्षेत्रों में तो 60% से अधिक आबादी को कागजों पर विकलांग दिखा दिया गया. फसल मुआवजा में प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान के पोर्टल में हेराफेरी कर असली किसानों की जगह गिरोह के सदस्यों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया.
घोटाले का मुख्य आरोपी रामवतार सैनी (28 वर्ष) है, जो पहले गन्ने का रस बेचता था, उसने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से सरकारी पोर्टल की खामियों को खोजा और अधिकारियों की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल किया.
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह तो केवल एक नमूना या छोटा सा हिस्सा है, यानी असली घोटाला इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है और इसके तार पूरे देश में फैले हो सकते हैं. संक्षेप में, यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे डिजिटल सिस्टम की कमियों और भ्रष्टाचार का फायदा उठाकर गरीबों के हक का पैसा एक संगठित गिरोह की जेब में जा रहा था.
महिला से मिलने की कोशिश पर दलित युवक की लिंचिंग, चोरी के मामले में फंसाने की कोशिश
झारखंड के पलामू जिले में एक 25 वर्षीय दलित युवक की ग्रामीणों द्वारा कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) कर दी गई. पुलिस ने सोमवार को बताया कि युवक एक महिला से मिलने गया था, जिसके साथ उसके कथित संबंध थे.
मृतक की पहचान पवन कुमार उर्फ पवन राम के रूप में हुई है, जो मुरमा गांव का निवासी था. शनिवार देर रात पड़वा थाना क्षेत्र के तेलियाही गांव में मारपीट के बाद उसकी मौत हो गई.
पड़वा थाना प्रभारी अंचित कुमार ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि पुलिस को शुरुआत में सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति को ट्रैक्टर की बैटरी चुराते हुए पकड़ा गया है और स्थानीय लोग उसकी पिटाई कर रहे हैं. कुमार ने कहा, “जब थाने में पहली बार सूचना आई, तो वह बैटरी चोरी की कोशिश के बारे में थी. ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर उसके साथ मारपीट की थी. उसे खाट से बांधकर बेरहमी से पीटा गया. अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.”
पुलिस की एक गश्ती टीम मौके पर पहुंची और पवन को बंधा हुआ और गंभीर रूप से घायल पाया. उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जांच और एक गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान, पुलिस को चोरी के दावे में विसंगतियां मिलीं.
थाना प्रभारी ने बताया, “ट्रैक्टर की बैटरी का लॉक टूटा नहीं था, जिससे चोरी का मामला संदिग्ध लगा. पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि वह एक लड़की से मिलने उसके घर गया था. परिवार के सदस्यों ने उसे देख लिया और उसके साथ मारपीट की. बाद में, मामले को दूसरा रूप देने के लिए इसे बैटरी चोरी का मामला बताया गया और शोर मचाया गया, जिसके बाद अन्य ग्रामीण वहां एकत्र हो गए.”
पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान महिला के चाचा के रूप में हुई है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जो मॉब लिंचिंग से संबंधित है. पुलिस अन्य शामिल लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी परिवार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से संबंधित है.
‘तुम मसाज पार्लर में जिस्मफरोशी करती हो’: दिल्ली में अरुणाचल की महिलाओं के ‘उत्पीड़न’ पर बढ़ा आक्रोश
दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं द्वारा अपने पड़ोसियों पर पूर्वोत्तर के लोगों को “सेक्स वर्कर” कहने और नस्लवादी टिप्पणी करने के आरोपों के बाद देश भर में इसकी कड़ी निंदा हो रही है.
पीटीआई और टेलीग्राफ के अनुसार, यह कथित नस्लवादी घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत पूर्वोत्तर की फिल्म ‘’बून्ग’’ को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का बाफ्टा पुरस्कार मिलने का जश्न मना रहा है. सोशल मीडिया पर मालवीय नगर की घटना का एक कथित वीडियो व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, जिसमें एक महिला अरुणाचली महिलाओं को “मोमो” और “500 रुपये में मसाज पार्लर में काम करने वाली धंधेवाली” कहते सुनी जा सकती है. महिला वीडियो में पूछ रही है, “क्या तुम यहाँ धंधा करने बैठी हो? क्या घर में मसाज पार्लर खोल रखा है?”
पुलिस के अनुसार, यह घटना 20 फरवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे हुई, जब महिलाओं के चौथी मंजिल के अपार्टमेंट में ड्रिलिंग और बिजली का काम चल रहा था.
वीडियो और घटना के विवरण के अनुसार, मामूली विवाद जल्द ही बदसूरत मोड़ ले गया. महिलाओं का आरोप है कि दंपत्ति ने उन पर और पूर्वोत्तर भारतीयों पर अपमानजनक और नस्लवादी टिप्पणियां कीं. पीड़िता ने बताया कि जब उसने मसाज पार्लर वाली टिप्पणी पर विरोध किया, तो आरोपी की पत्नी ने और भी आपत्तिजनक बात कही. एक अन्य पड़ोसी, जो बीच-बचाव करने आई थी, उसने आरोप लगाया कि महिला ने उसे भी अपशब्द कहे और धमकी दी कि “हम तुम्हें निर्वस्त्र करके नचवाएंगे.” महिलाओं ने यह भी दावा किया कि दंपत्ति ने उन पर उल्टा जाति के आधार पर भेदभाव करने का झूठा आरोप लगाया.
अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ यह भेदभाव रुकना चाहिए.
नस्लवाद का पुराना इतिहास
रिपोर्ट में पूर्वोत्तर के लोगों के साथ हुई पिछली दुखद घटनाओं का भी जिक्र है: 2014: दिल्ली के लाजपत नगर में निदो तानियाम की पीट-पीटकर हत्या. 2023: दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस के पास नस्लवादी और महिला-विरोधी टिप्पणी. दिसंबर 2025: देहरादून में नस्लवादी हमले में छात्र अंजेल चाकमा की मौत. हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी के एक रिसॉर्ट में गुजरात के एक परिवार द्वारा कर्मचारियों को धमकाने का मामला भी सामने आया है.
अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियां; ‘धोखाधड़ी करके अमेरिका आते हैं और महंगे घर खरीदते हैं’
उधर, अमेरिका में तेलुगु भाषी भारतीयों को निशाना बनाने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ऑनलाइन आक्रोश पैदा कर दिया है. टेक्सास के एक यूजर ने आरोप लगाया कि इस समुदाय के सदस्य “धोखाधड़ी” करके अमेरिका आते हैं और महंगे घर खरीदते हैं. भव्या सुखेजा के अनुसार, इसकी शुरुआत तब हुई, जब एक यूजर ने टेक्सास के फेसबुक ग्रुप का एक स्क्रीनशॉट साझा किया. उस पोस्ट में, भारतीय मूल के एक निवासी ने फ्रिस्को या प्रॉस्पर जैसे समृद्ध इलाकों में 10 लाख से 20 लाख डॉलर के बजट वाले “नए बने” लग्जरी घरों के लिए सुझाव मांगे थे.
इस स्क्रीनशॉट को “द रिपैट्रिएटरनाम के एक यूजर ने दोबारा पोस्ट किया और तेलुगु भाषी समुदाय पर नस्लवादी टिप्पणी की. यूजर ने लिखा, “तेलुगु बनो, अपने इलाके में 20 रिश्तेदारों के साथ एक झोपड़ी में रहो— फिर H-1B लॉटरी जीतो, फर्जी दस्तावेजों के साथ अमेरिका आओ और अचानक 10-20 लाख डॉलर का नया घर खरीदने के काबिल बन जाओ. यह तो कमाल की बात है.”
इस टिप्पणी की तुरंत आलोचना हुई, जिसमें एक पेमेंट ऐप के सीईओ और भारतीय मूल के उद्यमी नीतीश कन्नन भी शामिल थे. उन्होंने भारतीय प्रवासियों और H-1B वीजा धारकों का पुरजोर बचाव किया. कन्नन ने कहा कि उन्हें अमेरिका में संपत्ति खरीदने की चाहत रखने वाले किसी भारतीय में कुछ भी गलत नहीं लगता. उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया कि प्रवासी धोखाधड़ी के माध्यम से सफल होते हैं. उन्होंने लिखा, “वैसे, H-1B वीजा पर हर कोई टेक सेक्टर की नौकरियों में सालाना छह अंकों (लाखों में) की कमाई करता है. तकनीक के क्षेत्र में नौकरी पाने, पढ़ाई करने या कड़ी मेहनत करने से आपको किसी ने नहीं रोका है.” उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि, “मेरे 15 चचेरे भाई-बहन H-1B वीजा पर यहां आए थे और वे सभी छह या सात अंकों में कमाई करते हैं. उन सभी के अपने घर हैं और वे अब अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं. मेरा परिवार 100% मल्टी-मिलियनेयर है, उनके पास कई घर हैं और उन्होंने करोड़ों डॉलर का टैक्स चुकाया है.”
जब एक अन्य ‘एक्स’ यूजर ने आरोप लगाया कि “उनमें से ज्यादातर, यदि सभी नहीं, तो संभवतः भारत से फर्जी डिग्रियां खरीदकर और धोखाधड़ी करके यहाँ आए हैं,” तो कन्नन ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा, “उन सभी ने अमेरिका के कॉलेजों में पढ़ाई की और मास्टर व पीएचडी की डिग्रियां हासिल कीं.”
यह बहस वायरल हो गई है और H-1B वीजा धारकों के बारे में एक व्यापक चर्चा छिड़ गई है. एक यूजर ने लिखा, “आप पूरी तरह से मनगढ़ंत धारणाएं बना रहे हैं और इसलिए रो रहे हैं, क्योंकि कोई आपको आपके ही खेल में हरा रहा है. यह आपकी पीढ़ी का चुनाव था कि आपने कठिन विज्ञान नहीं सीखा और मुफ्त की सुविधाओं के आदी हो गए, जबकि दूसरे लोग कड़ी मेहनत करके पश्चिम का निर्माण कर रहे थे और आपके आराम के लिए टैक्स भर रहे थे.”
एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की: “हाँ, मैं एक तेलुगु हूँ, टेक्सास में 10-20 लाख डॉलर के घर में रहता हूँ, स्नातक की डिग्रियां लीं, H-1B पर काम किया, कतार में लगकर कानूनी रूप से ग्रीन कार्ड और अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की. नासा में 13 ‘इनोवेटर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार और अंतरिक्ष उपलब्धि के लिए ‘यूएस नेशनल स्टेलर अवार्ड’ जीतकर अमेरिका को फिर से महान बनाया है.”
एक अन्य यूजर ने लिखा: “वैसे, वे अमेरिका में पैसा खर्च कर रहे हैं और घरों की कीमतों को स्थिर रख रहे हैं. आपको यहाँ आने वाले हर व्यक्ति का शुक्रिया अदा करना चाहिए.”
मणिपुरी फिल्म ‘बून्ग’ को बाफ्टा पुरस्कार
डायरेक्टर बोलीं- हम प्रार्थना करते हैं, मणिपुर में शांति वापस आए
फरहान अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित मणिपुर की अनोखी ‘कमिंग-ऑफ-एज’ कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘बून्ग’ ने रविवार को लंदन में प्रतिष्ठित बाफ्टा पुरस्कार जीता. फिल्म ने ‘सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म’ की श्रेणी में यह जीत हासिल की.
‘ईटी ऑनलाइन’ के अनुसार, फिल्म की नवोदित निर्देशक, लक्ष्मीप्रिया देवी ने ‘पडिंगटन द म्यूजिकल’ के मुख्य किरदार ‘पडिंगटन बियर’ से ट्रॉफी लेने के बाद अपने स्वीकृति भाषण में मणिपुर में शांति के लिए एक भावुक अपील की. मंच पर उनके साथ निर्माता फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी और फिल्म के सहायक निर्देशक राहुल शारदा भी मौजूद थे.
लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा, “यहाँ तक चलकर आना पहाड़ की उस चोटी तक पहुँचने के आखिरी कुछ कदमों जैसा महसूस हुआ, जिसके बारे में हमें यह भी नहीं पता था कि हम उस पर चढ़ रहे हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इस अवसर का उपयोग यह कहने के लिए करना चाहती हूँ कि हम प्रार्थना करते हैं कि मणिपुर में शांति वापस आए. हम प्रार्थना करते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बाल कलाकारों सहित सभी आंतरिक रूप से विस्थापित बच्चे अपनी खुशी, अपनी मासूमियत और अपने सपनों को एक बार फिर से वापस पा सकें.”
“हम प्रार्थना करते हैं कि कोई भी संघर्ष इतना बड़ा न हो कि वह उस एकमात्र ‘सुपरपावर’ को नष्ट कर दे जो हम सभी मनुष्यों के पास है, और वह है ‘क्षमा’. इसलिए, बाफ्टा को हमें न केवल एक पुरस्कार देने के लिए, बल्कि अपनी आशा व्यक्त करने के लिए यह मंच देने के लिए धन्यवाद.”
गुगुन किपजेन और बाला हिजाम अभिनीत इस मणिपुरी फिल्म ने ‘लिलो एंड स्टिच’, ‘आर्को’ और ‘ज़ूट्रोपोलिस 2’ जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय नामांकनों को पछाड़कर यह खिताब अपने नाम किया.
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