24/03/2026: पाकिस्तान मध्यस्थ| कैसी शांति| इनसाइड स्टोरी| फंसे ट्रंप| भारत के लिए झटका| ट्रांसजेंडर| भारत 6 वाँ| ईसाई-मुस्लिम को 'नो'| ब्लॉक
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निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फलक अफ़शां, विश्वजीत कुमार
आज की सुर्खियां
पाकिस्तान मध्यस्थ! जेडी वेंस पाकिस्तान में अमेरिकी पक्ष से ईरान शांति वार्ता का नेतृत्व कर सकते हैं
ईरान युद्ध का 25वां दिन: ट्रंप के शांति के दावे और तेहरान का इनकार
एक्सक्लूसिव: नेतन्याहू की सलाह और खामेनेई पर ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ की इनसाइड स्टोरी
विश्लेषण: क्या ट्रंप अपने ही शुरू किए गए युद्ध के जाल में फंस गए हैं?
6 कारण: क्यों अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान का मध्यस्थ होना भारत के लिए एक रणनीतिक झटका
मोदी ने भारत की विदेश नीति को ‘व्यक्तिगत नीति’ बनाया: राहुल गांधी
लोकसभा में ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन विधेयक पारित; विपक्ष ने यौन रुझानों को बाहर रखे जाने पर जताई आपत्ति
रिपोर्ट: पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश, भारत 6वाँ, यूपी का लोनी सबसे प्रदूषित शहर, दिल्ली चौथे पर
मोहन भागवत बोले, नागरिक घुसपैठियों की सूचना दें और इन्हें रोजगार न दें, तीन बच्चे जरूरी
अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद, दो साथियों को 30 साल की सजा
हिंदू, सिख, बौद्ध से बाहर धर्म परिवर्तन पर नहीं मिलेगा SC का दर्जा: सुप्रीम कोर्ट
मोदी और सरकार पर तंज़ किया तो भारत में ब्लॉक हो गए ‘एक्स’ हैंडल
ईरान युद्ध का 25वां दिन:
पाकिस्तान मध्यस्थ! जेडी वेंस पाकिस्तान में अमेरिकी पक्ष से ईरान शांति वार्ता का नेतृत्व कर सकते हैं
‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है. यह घटनाक्रम तब सामने आया जब व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने रविवार को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर इस संघर्ष पर चर्चा की थी.
राजनयिक सूत्रों ने कहा कि युद्ध को समाप्त करने पर चर्चा के लिए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि इसी सप्ताह इस्लामाबाद में बैठक कर सकते हैं.
इस बात पर जोर दिया गया कि शांति वार्ता के लिए अभी तक आधिकारिक तौर पर इस्लामाबाद के नाम की पुष्टि नहीं हुई है, और अभी तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से इसके लिए सहमति नहीं जताई है. माना जा रहा है कि ट्रंप के मध्य पूर्व दूत, स्टीव विटकॉफ, इस्लामाबाद जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन ईरानी पक्ष से किसी के वहां उपस्थित होने की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है. पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि यदि वार्ता आगे बढ़ती है, तो विटकॉफ या ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर (जिन्होंने युद्ध से पहले ईरान के साथ परमाणु वार्ता का नेतृत्व किया था) के बजाय, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को अमेरिकी पक्ष से मुख्य वार्ताकार के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है.
ऐसी कैसी 5 दिन की शांति; ईरान ने मिसाइलें दागीं तो इज़राइल की बमबारी
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध के 25वें दिन मंगलवार को स्थिति बेहद तनावपूर्ण और विरोधाभासी बनी हुई है. युद्ध के मैदान में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार तड़के ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की कई लहरें दागीं, जिससे तेल अवीव में इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान पहुँचा है. इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने आधी रात से अब तक सात बार मिसाइल हमले किए हैं, जिसके कारण डिमोना जैसे शहरों में भी सायरन बजाए गए. जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने तेहरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय सहित 50 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की है. इस बीच, इजरायल के भीतर भी सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ गई हैं. इजरायली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों (सैटलर्स) की हिंसा में भारी बढ़ोतरी के बाद लेबनान सीमा से एक लड़ाकू बटालियन को वेस्ट बैंक की ओर भेजा गया है. मानवाधिकार समूह ‘येश दीन’ के अनुसार, मार्च की शुरुआत से हर दिन औसतन 10 हमले हो रहे हैं.
अल जज़ीरा की एलिजाबेथ मेलिमौपोलोस के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सप्ताहांत में ईरान के साथ “सकारात्मक और उत्पादक” बातचीत हुई है और दोनों पक्ष समझौते के अहम बिंदुओं पर सहमत हो गए हैं. हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय और वरिष्ठ सैन्य सलाहकारों का कहना है कि वाशिंगटन के साथ कोई संवाद नहीं हुआ है और ट्रंप के बयान केवल ऊर्जा की कीमतों को कम करने और सैन्य तैयारियों के लिए समय खरीदने की एक कोशिश हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता के एक सलाहकार ने स्पष्ट किया कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक तेहरान को हुए नुकसान का पूरा मुआवज़ा नहीं मिल जाता.
बाज़ार की स्थिति भी ट्रंप के बयानों और ईरान के इनकार के बीच झूल रही है. ट्रंप द्वारा हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई थीं, लेकिन ईरान के खंडन के बाद ये फिर से बढ़ गईं. रॉयटर्स की हुमैरा पामुक के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, क्योंकि उनकी तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है. संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा कंपनी ‘एडनॉक’ ने ईरान की इस नाकेबंदी को “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया है. पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहे हैं, जहाँ पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सीधी बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है.
एक्सक्लूसिव: नेतन्याहू की सलाह और खामेनेई पर ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ की इनसाइड स्टोरी
रॉयटर्स के रिपोर्टर एरिन बैंको और ग्राम स्लैटरी की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू होने से महज 48 घंटे पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहद गोपनीय फोन कॉल हुई थी. इस बातचीत में नेतन्याहू ने ट्रंप को एक “डेकैपिटेशन स्ट्राइक” (शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने वाला हमला) के लिए राजी किया. खुफिया जानकारी मिली थी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके सिपहसालार शनिवार सुबह अपने परिसर में एक बैठक करने वाले हैं. नेतन्याहू ने तर्क दिया कि खामेनेई को खत्म करने और ट्रंप की हत्या की पिछली ईरानी साजिशों का बदला लेने का इससे बेहतर मौका फिर कभी नहीं मिलेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पहले ही सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दे चुके थे, लेकिन समय और परिस्थितियों को लेकर दुविधा में थे. नेतन्याहू ने ट्रंप को यकीन दिलाया कि खामेनेई की मौत से ईरान की धार्मिक सत्ता गिर सकती है और वहां के लोग सड़कों पर उतरकर शासन बदल सकते हैं. इसी बातचीत के बाद ट्रंप ने 27 फरवरी को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का अंतिम आदेश दिया. शनिवार सुबह बमबारी हुई और उसी शाम ट्रंप ने खामेनेई की मौत की घोषणा कर दी. हालांकि, अब चार हफ्ते बीत जाने के बाद भी ईरान में सत्ता का तख्तापलट नहीं हुआ है, बल्कि खामेनेई के बेटे मोजतबा को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त कर दिया गया है, जिन्हें अपने पिता से भी अधिक कट्टर और अमेरिका विरोधी माना जाता है.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने इस फोन कॉल की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन कहा कि सैन्य अभियान का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता और नौसेना को नष्ट करना था ताकि वह कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिया कि यह हमला एक तरह का बदला था. उन्होंने कहा, “ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप को मारने की कोशिश की थी, और आखिरी हंसी ट्रंप की रही.” इस युद्ध में अब तक 2,300 से अधिक ईरानी नागरिक और कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. सीआईए ने पहले ही चेतावनी दी थी कि खामेनेई की मौत के बाद उनकी जगह कोई और कट्टरपंथी ही लेगा, जो अब सच साबित होता दिख रहा है.
विश्लेषण: क्या ट्रंप अपने ही शुरू किए गए युद्ध के जाल में फंस गए हैं?
सीएनएन के राजनीतिक विश्लेषक स्टीफन कोलिन्सन और आरोन ब्लेक ने ट्रंप की ईरान नीति और उनके फैसलों के समय पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कोलिन्सन का कहना है कि युद्ध को किसी अवैध टैरिफ की तरह राष्ट्रपति की मर्जी पर चालू या बंद नहीं किया जा सकता. ट्रंप ने ईरान के बिजली घरों को बम से उड़ाने की धमकी देकर दुनिया को महाविनाश के करीब ला दिया था, लेकिन सोमवार को अचानक उन्होंने पांच दिनों के लिए इसे टाल दिया. आलोचक इसे ट्रंप का “टाको” (Trump Always Chickens Out - ट्रंप हमेशा पीछे हट जाते हैं) मोमेंट कह रहे हैं. सवाल यह है कि क्या ट्रंप वास्तव में इस युद्ध से बाहर निकलना चाहते हैं या वे केवल बाज़ार को स्थिरता देने की कोशिश कर रहे हैं.
आरोन ब्लेक ने ध्यान दिलाया कि ट्रंप की युद्ध संबंधी घोषणाएं अक्सर शेयर बाज़ार के खुलने या बंद होने के समय से मेल खाती हैं. सोमवार सुबह बाज़ार खुलने से ठीक पहले ट्रंप ने हमलों को टालने का एलान किया, जिससे डूबते हुए बाज़ार को सहारा मिला. इससे पहले भी कई बार उन्होंने इसी तरह की घोषणाएं की थीं. उदाहरण के लिए, 28 फरवरी को ईरान पर शुरुआती हमले की पुष्टि भी उन्होंने शनिवार तड़के की थी, जब बाज़ार बंद थे. यह पैटर्न सुझाव देता है कि ट्रंप युद्ध के कूटनीतिक उद्देश्यों से ज़्यादा वैश्विक बाज़ारों और ऊर्जा की कीमतों को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतें उनकी घरेलू राजनीति को नुकसान पहुँचा सकती हैं.
विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप के पास अब बहुत कम अच्छे विकल्प बचे हैं. अगर वे युद्ध जारी रखते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक मंदी आ सकती है. अगर वे ज़मीनी सेना भेजते हैं, तो यह उन “अंतहीन युद्धों” की वापसी होगी जिनका उन्होंने हमेशा विरोध किया है. वहीं, बिना किसी ठोस समझौते (जैसे ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करना) के पीछे हटने से उनके कट्टरपंथी समर्थक और मध्य-पूर्व के सहयोगी नाराज़ हो सकते हैं. ईरान की ओर से भी समझौते की उम्मीद कम है, क्योंकि खामेनेई की मौत और भारी नुकसान के बाद वहां की लीडरशिप अब पहले से कहीं अधिक कट्टर हो चुकी है और ट्रंप के विरोधाभासी बयानों को उनकी कमज़ोरी के रूप में देख रही है.
6 कारण: क्यों पाकिस्तान का मध्यस्थ होना भारत के लिए एक रणनीतिक झटका
‘द वायर’ का एक विश्लेषण कहता है कि ईरान और अमेरिका के बीच एक प्राथमिक बैक-चैनल मध्यस्थ के रूप में मिस्र और तुर्की के साथ पाकिस्तान का उभरना, नई दिल्ली के लिए एक करारा रणनीतिक झटका है. खासकर, ऐसी सरकार के लिए, जिसने पाकिस्तान को अलग-थलग करने और नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व में भारत को एक अपरिहार्य “विश्वगुरु” के रूप में पेश करने पर अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी, यह घटनाक्रम किसी राजनीतिक और राजनयिक आपदा से कम नहीं है.
स्वतंत्र भारत के राजनयिक इतिहास के सबसे अपमानजनक बिंदुओं में से एक, यह मोदी की विदेश नीति के दिशाहीन आडंबर को उजागर करता है. 6 बिंदुओं के उल्लेख के साथ यहाँ बताया गया है कि यह भारत के लिए एक बड़ा झटका क्यों है:
1. ‘पाकिस्तान को अलग-थलग करने’ की नीति की विफलता: पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का एक मुख्य आधार पाकिस्तान को राजनयिक रूप से अकेला करना था. अमेरिका और ईरान दोनों का पाकिस्तान पर भरोसा करना यह दर्शाता है कि यह रणनीति पूरी तरह विफल रही है.
2. रणनीतिक स्वायत्तता का कम होना: जहाँ भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से ईरान के साथ अपने संबंधों में बहुत सावधानी बरत रहा है, वहीं पाकिस्तान को वाशिंगटन और तेहरान दोनों का विश्वास प्राप्त है. इससे यह संदेश जाता है कि भारत की अपनी स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कम हुई है.
3. ईरान के साथ संबंधों में बदलाव: तेहरान द्वारा पाकिस्तान की भूमिका को स्वीकार करना यह दिखाता है कि ईरान अब इस्लामाबाद को एक व्यावहारिक माध्यम के रूप में देखता है, जबकि भारत के साथ उसके संबंध केवल औपचारिक कॉल और बयानों तक सिमट कर रह गए हैं.
4. क्षेत्रीय प्रभाव में कमी: यदि पाकिस्तान शांतिदूत की भूमिका निभाता है, तो उसे ईरानी प्रशासन की सद्भावना प्राप्त होगी—जो भारत ने अपनी इज़रायल-समर्थक कूटनीति के कारण खो दी है. भारत ने पाकिस्तान को दरकिनार करने की कोशिश की, लेकिन अब वह खुद को महत्वपूर्ण शक्ति गलियारों से बाहर पा रहा है.
5. नया ‘मिडिल-पावर’ ब्लॉक: मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ता समन्वय एक ऐसे गुट का निर्माण कर रहा है जिसमें भारत शामिल नहीं है. गाजा और लाल सागर जैसे मुद्दों पर उनकी साझा भूमिका भारत के हितों के लिए शुभ संकेत नहीं है.
6. ग्लोबल साउथ के नेतृत्व को खोना : पाकिस्तान को इस उच्च-स्तरीय मध्यस्थता का नेतृत्व करने की अनुमति देकर, भारत ने प्रभावी रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व उस गठबंधन को सौंप दिया है जो भारतीय हितों के विपरीत हो सकता है.
कुलमिलाकर, विश्लेषण का यह निष्कर्ष है कि इज़रायल के प्रति भारत का झुकाव और पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी का उल्टा असर हुआ है, जिससे क्षेत्र में भारत की साख और प्रभाव कम हुआ है.
मोदी ने भारत की विदेश नीति को ‘व्यक्तिगत नीति’ बनाया: राहुल गांधी
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर भारत की विदेश नीति को “व्यक्तिगत नीति” बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर एक “मजाक” करार दिया और कहा कि पीएम भारत के बजाय अमेरिका और इज़रायल के हितों के अनुसार काम कर रहे हैं. ‘द वायर’ के अनुसार, राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया (ईरान-इज़रायल-अमेरिका) संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी, पेट्रोल और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और कीमतें बढ़ेंगी.
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल लोकसभा और आज मंगलवार को राज्यसभा में माना कि इस युद्ध से भारत के सामने “अभूतपूर्व चुनौतियां” आई हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले दशक के सुधारों के कारण भारत इस झटके को सहने में सक्षम है. लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में उन्हें इस गंभीर मुद्दे पर सवाल पूछने या स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति नहीं दी गई. राज्यसभा में सवाल पूछने की अनुमति न मिलने पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वॉकआउट किया. सांसद सागरिका घोष ने कहा कि पीएम ने केवल नौकरशाहों द्वारा लिखी गई स्क्रिप्ट पढ़ी है और सरकार जवाबदेही से बच रही है.
सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुधवार (25 मार्च) को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसे विपक्ष ने संसद की अवहेलना बताया है. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने पीएम के भाषण को “आत्म-प्रशंसा” बताया और उन पर राज्यों के अधिकारों को कुचलने तथा पुरानी योजनाओं (जैसे मनरेगा और खाद्य सुरक्षा अधिनियम) के प्रति दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.
पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव पर कोई केंद्रीय डेटा नहीं: सरकार
केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ “नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच), नस्लीय टिप्पणी, उत्पीड़न और भेदभाव” की घटनाओं का कोई केंद्रीकृत डेटा नहीं रखा जाता है. क्योंकि पुलिस व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ में खबर है कि लोकसभा में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के एक सवाल का जवाब देते हुए, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अपराधों की रोकथाम, पहचान, पंजीकरण, जांच और अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी राज्यों की है. राज्य सरकारें अपने कानून प्रवर्तन निकायों के माध्यम से अपराधों को रोकने, उनका पता लगाने, पंजीकरण करने, जांच करने और अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित कर अपनी “क्राइम इन इंडिया” रिपोर्ट में प्रकाशित करता है, जो 2023 तक उपलब्ध है.
हालाँकि, उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधान नफरत भरी टिप्पणियों, इशारों और नस्लीय कृत्यों (जिनमें पूर्वोत्तर के लोगों को निशाना बनाने वाले कृत्य भी शामिल हैं) के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम हैं.
लोकसभा में ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन विधेयक पारित; विपक्ष ने यौन रुझानों को बाहर रखे जाने पर जताई आपत्ति
लोकसभा ने मंगलवार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संरक्षण और अधिकारों से संबंधित कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पारित कर दिया, हालांकि विपक्षी सदस्यों ने यह चिंता जताई कि प्रस्तावित कानून सामाजिक झुकाव को इस अधिनियम के दायरे से बाहर रखता है.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पर बहस का जवाब देते हुए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य केवल उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है, जिन्हें जैविक कारणों से बहिष्कार का सामना करना पड़ता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संशोधन सुनिश्चित करेगा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिलती रहे.
कुमार ने कहा कि जहाँ 2019 के कानून में अधिकतम दो साल के कारावास का प्रावधान था, वहीं इस संशोधन विधेयक में जुर्माने के साथ अधिकतम 14 साल की जेल का प्रावधान है. विधेयक पारित होने से पहले, सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज कर दिया.
जहाँ सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करना है, वहीं विपक्ष ने प्रस्तावित कानून की यह कहकर आलोचना की कि यह समलैंगिक जैसे व्यक्तियों की अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करने के अधिकार को छीनता है. विपक्ष ने मांग की कि इसे उचित परामर्श के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाए.
विधेयक का उद्देश्य “ट्रांसजेंडर” शब्द की एक सटीक परिभाषा देना है और प्रस्तावित कानून के दायरे से “विभिन्न यौन रुझानों और स्व-अनुभूत यौन पहचानों” को बाहर करना है. यह विधेयक इसी महीने की शुरुआत में लोकसभा में पेश किया गया था. यह रेखांकित करता है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति में “विभिन्न यौन रुझानों और स्व-अनुभूत यौन पहचान वाले व्यक्ति शामिल नहीं होंगे, और न ही कभी शामिल रहे हैं.” विधेयक में “एक प्राधिकरण के पदनाम” का भी प्रावधान है, जिसके पास आवश्यकता पड़ने पर “विशेषज्ञ सलाह” लेने का विकल्प होगा.
इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक सरकार का ट्रांसजेंडर लोगों के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर एक “बेशर्मी भरा हमला” है. यह प्रतिगामी विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों से उनकी स्वयं की पहचान निर्धारित करने की क्षमता छीन लेता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लंघन है.
रिपोर्ट: पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश, भारत 6वाँ, यूपी का लोनी सबसे प्रदूषित शहर, दिल्ली चौथे पर
स्विट्जरलैंड की वायु गुणवत्ता तकनीक कंपनी आईक्यू एयर (IQAir) द्वारा प्रकाशित ‘वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, सूक्ष्म कणों के स्तर के मामले में पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश है. इसके बाद बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो का नंबर आता है, जबकि भारत छठे स्थान पर है.
इस रिपोर्ट में भारत के लिए खुशी की कोई खास बात नहीं है. 143 देशों, क्षेत्रों और प्रदेशों के 9,446 शहरों में निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरप्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है और दिल्ली चौथे स्थान पर है. वास्तव में, दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से पाँच भारत में हैं. असम-मेघालय सीमा पर स्थित बर्नीहाट, उत्तरप्रदेश का गाजियाबाद और उला (जिसे बंगाल में बीरनगर के नाम से बेहतर जाना जाता है) भी शीर्ष 10 में शामिल हैं.
‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है, “दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहर भारत, पाकिस्तान और चीन में स्थित थे, जिनमें से चार सबसे प्रदूषित शहरों में से तीन भारत में हैं. भारत का लोनी सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहाँ वार्षिक औसत PM2.5 सांद्रता 112.5 µg/m³ दर्ज की गई—यह 2024 की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि है और डबल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के दिशा-निर्देशों से 22 गुना से भी अधिक है.”
पिछले वर्ष की तुलना में, 54 देशों में PM2.5 के वार्षिक औसत में वृद्धि देखी गई, कुल 75 देशों में गिरावट दर्ज की गई, दो में कोई बदलाव नहीं हुआ और इस वर्ष के डेटासेट में 12 नए देशों को शामिल किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया, ‘दुनिया के केवल 14 प्रतिशत शहर ही डबल्यूएचओ के 5 µg/m³ के वार्षिक PM2.5 दिशा-निर्देश पर खरे उतरे, जो पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से कम है. केवल तेरह देशों/क्षेत्रों ने ही डबल्यूएचओ के वार्षिक औसत PM2.5 दिशा-निर्देश का पालन किया—फ्रेंच पोलिनेशिया, प्यूर्टो रिको, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, बारबाडोस, न्यू कैलेडोनिया, आइसलैंड, बरमूडा, रीयूनियन, अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेनाडा, पनामा और एस्टोनिया.”
मोहन भागवत बोले, नागरिक घुसपैठियों की सूचना दें और इन्हें रोजगार न दें, तीन बच्चे जरूरी
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को भारत में अवैध प्रवासियों को लेकर चिंता जताई और लोगों से घुसपैठियों की पहचान करने के लिए कड़ी निगरानी रखने और अधिकारियों को उनकी सूचना देने के लिए कहा. यह भी कहा कि ऐसे लोगों को रोजगार भी नहीं देना चाहिए.
‘पीटीआई’ के अनुसार, उन्होंने तीन बच्चों की नीति के अपने आग्रह को भी दोहराया और जन्म दर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही “जबरन” धर्म परिवर्तन को हतोत्साहित करने की बात कही. वृंदावन में एक आश्रम का उद्घाटन करने के बाद, भागवत ने अवैध प्रवासन के मुद्दे पर प्रकाश डाला और कहा, “विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए लोगों को कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें यहाँ रोजगार न मिले.” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए.
पारिवारिक स्वास्थ्य और जनसंख्या पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख ने कहा कि डॉक्टर एक स्वस्थ पारिवारिक स्वास्थ्य के लिए तीन बच्चों की सिफारिश करते हैं, क्योंकि बचपन की आपसी बातचीत व्यक्तियों को सामाजिक कौशल विकसित करने और समूह के भीतर तालमेल बिठाने की क्षमता विकसित करने में मदद करती है.
उन्होंने कहा कि जनसंख्या अध्ययन चेतावनी देते हैं कि तीन से कम प्रजनन दर दीर्घकालिक जोखिम पैदा करती है. उन्होंने कहा, जिन देशों में जन्म दर कम है, उन्होंने सक्रिय रूप से अपनी जनसंख्या को तीन से ऊपर बढ़ाने का प्रयास किया है.
भागवत ने जबरन धर्म परिवर्तन को समाप्त करने का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा, ‘सरकार कानून बना सकती है, लेकिन समाज को इसे स्वयं रोकना होगा. अन्य धर्मों में परिवर्तित होने वाले बहुत से लोग हिंदुओं के वंशज हैं और वे वापस लौटना चाह सकते हैं. जो लोग इच्छुक हैं, उनका वापस स्वागत किया जाना चाहिए.
अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद, दो साथियों को 30 साल की सजा
मकतूब मीडिया के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की चीफ आशिया अंद्राबी को गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जबकि उनकी दो सहयोगियों सोफी फहीमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा दी गई.
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने कहा कि आसिया अंद्राबी और दो अन्य लोगों ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी.
अंद्राबी ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ नामक महिला संगठन की प्रमुख थीं, जबकि फहीमीदा इसकी प्रेस सचिव और नसरीन महासचिव थीं. यह संगठन 2002 से प्रतिबंधित है, पहले आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा) और यूएपीए के तहत.
अदालत ने कहा कि “राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जमा किए गए वीडियो में साफ तौर पर दिखाया गया है कि उन्होंने बार-बार दावा किया कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और भारत के जबरन कब्जे में है. इसमें कहा गया कि कश्मीर को भारतीय कब्जे से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि यह पाकिस्तान का हिस्सा बन सके.”
हिंदू, सिख, बौद्ध से बाहर धर्म परिवर्तन पर नहीं मिलेगा SC का दर्जा: सुप्रीम कोर्ट
द टेलीग्राफ के अनुसार, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाने वाले ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं. ईसाई आदि किसी अन्य धर्म में कन्वर्ट होने पर वह अपना अनुसूचित जाति यानी एससी का दर्जा खो देगा.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारी की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. कन्वर्जन पर फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि, “धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा. कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता.” अदालत ने साफ किया कि ईसाई बने व्यक्ति को एससी/एसटी एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा.
कोर्ट ने कहा, “कोई भी व्यक्ति जो धारा 3 के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता, उसे संविधान या संसद अथवा राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत कोई भी वैधानिक लाभ, संरक्षण, आरक्षण या अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता और न ही उसे दिया जा सकता है. यह प्रतिबंध पूर्ण है और इसमें कोई अपवाद नहीं है. कोई व्यक्ति एक साथ धारा 3 में निर्दिष्ट धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन और प्रचार करते हुए अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता.”
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने करीब 10 साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी के रूप में कार्य कर रहा था. उसने कुछ लोगों पर हमले का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया और इस कानून के तहत संरक्षण की मांग की. हालांकि, आरोपियों ने इस दावे को चुनौती दी, यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता धर्म परिवर्तन कर चुका है और सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, इसलिए वह इस अधिनियम के तहत संरक्षण का हकदार नहीं है.
लोकतंत्र पर रोक? मोदी और सरकार पर तंज़ करने वाले ‘एक्स’ हैंडल भारत में ब्लॉक
ऑल्ट न्यूज़ के अनुसार, 18 मार्च को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कई ऐसे अकाउंट्स भारत में ब्लॉक कर दिए गए, जो व्यंग्य और पैरोडी के जरिए बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते थे.
इनमें @Nehr_who, @DrNimoYadav, @indian_armada और @DuckKiBaat जैसे लोकप्रिय पैरोडी अकाउंट्स शामिल हैं. इसके अलावा स्वतंत्र पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स जैसे संदीप सिंह (@ActivistSandeep), मनीष RJ (@mrjethwani_) और डॉ. रंजन (@Doc_RGM) के अकाउंट भी इस कार्रवाई शिकार हो गए.
इन प्रोफाइल्स को खोलने पर अब “withheld in India in response to a legal demand” का संदेश दिखाई देता है. हालांकि, इन अकाउंट्स को ब्लॉक करने के पीछे के स्पष्ट कारण सामने नहीं आए हैं
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका,इज़राइल और ईरान संघर्ष को लेकर वैश्विक चर्चा जारी है और भारत पर इसके संभावित असर, जैसे एलपीजी आपूर्ति, को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. प्रभावित अकाउंट्स इन मुद्दों पर सरकार की नीतियों और सांप्रदायिक हालात को लेकर लगातार टिप्पणी कर रहे थे.
एक अन्य पैरोडी अकाउंट @RoflGandhi_ ने दावा किया कि उसे ‘एक्स’ की ओर से नोटिस मिला, जिसमें बताया गया कि राजस्थान पुलिस ने उसकी एक पोस्ट को भारतीय कानून का उल्लंघन बताया है. पोस्ट में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की एआई-जनरेटेड तस्वीर दिखाई गई थी.
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने इस कार्रवाई पर चिंता जताते हुए कहा कि ‘’सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की आलोचना और व्यंग्य से जुड़े कंटेंट को बिना स्पष्ट कारण के ब्लॉक किया जा रहा है.”
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा. वहीं, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ और पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने इसे “सरकार की घबराहट” का संकेत बताया.
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