25/08/2025: हमारी पाकिस्तान पॉलिसी पर आकार पटेल | रुसी तेल के मुख्य लाभार्थी मुकेश या भारत? |बिहार में इंडिया वोटचोरी पर, एनडीए सीट बंटवारे पर | हमारे 2500 साल पुराने चेहरे | चेतेश्वर का जाना
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निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल
आज की सुर्खियां
बिहार एनडीए में सीट बंटवारे पर पेंच, 'इंडिया' गठबंधन का चुनाव आयोग पर हमला जारी.
तेजस्वी ने चुनाव आयोग को 'मोदी आयोग' और 'भाजपा का सेल' बताया.
पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर तेजस्वी यादव के खिलाफ़ महाराष्ट्र में FIR दर्ज.
आकार पटेल का सवाल: आखिर भारत की सरकारी पाकिस्तान पॉलिसी है क्या?
क्या मोदी सरकार सिर्फ नेरेटिव संभालेगी या काम भी करेगी? संजय झा का विश्लेषण.
विवादास्पद बिल की JPC से आम आदमी पार्टी भी बाहर, बताया विपक्ष को खत्म करने की साजिश.
जमात से जुड़े स्कूलों के अधिग्रहण पर जम्मू-कश्मीर सरकार और उपराज्यपाल में टकराव.
पंजाब में 'आप' का हिंदुओं पर ध्यान, मंदिर एक्ट से जाति आधारित बोर्ड तक की पहल.
सबरीमाला कार्यक्रम पर भाजपा की चेतावनी, पिनाराई-स्टालिन हिंदुओं से माफी मांगें.
सोनम वांगचुक की संस्था की ज़मीन रद्द, कहा- राज्य के दर्जे की मांग दबाने की साजिश.
असम में बेदखल किए गए लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे
श्रीकृष्ण को ‘माखन चोर’ कहना पसंद नहीं, मध्यप्रदेश सरकार बदलेगी छवि.
अमेरिकी टैरिफ पर मोंटेक की सलाह, जवाबी कार्रवाई के बजाय सुधार का अवसर देखें.
रिपोर्ट: रूसी तेल से सबसे ज़्यादा कमाई मुकेश अंबानी की रिलायंस को हुई.
आदिवासी विरोध के बीच झारखंड के पूर्व सीएम चंपई सोरेन नज़रबंद.
ओडिशा: वीडियो बनाते समय डुडुमा झरने की तेज़ धार में बहा 22 वर्षीय यूट्यूबर.
स्वतंत्रता दिवस पर जेलेंस्की का संकल्प- अपना भविष्य हम खुद तय करेंगे.
'मिस्टर रिलायबल' चेतेश्वर पुजारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया.
तमिलनाडु में मिली 2,500 साल पुरानी खोपड़ियों से वैज्ञानिकों ने बनाए चेहरे.
एनडीए में सीट बंटवारे की बात, भाजपा-जदयू सौ के आसपास, चिराग को 20 देने की बात, इंडिया का चुनाव आयोग पर हमला जारी
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नज़दीक आ रही हैं, राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं. एक ओर जहां सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर, 'इंडिया' गठबंधन के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव और राहुल गांधी 'वोटर अधिकार यात्रा' के माध्यम से जनता के बीच जाकर सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तेजस्वी यादव की एक टिप्पणी को लेकर महाराष्ट्र में FIR दर्ज होने से सियासी माहौल और भी गरमा गया है. यह सब मिलकर आगामी चुनाव के बेहद कांटेदार और तनावपूर्ण होने के संकेत दे रहा है.
भाजपा-जदयू में बराबरी पर सहमति, चिराग की मांगों पर फंसा पेंच
बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए NDA के भीतर सीट-बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो गया है. इंडियन एक्सप्रेस में दीप्तिमान तिवारी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रमुख सहयोगी दल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड), 100 से 105 सीटों पर बराबर-बराबर चुनाव लड़ सकते हैं. असली पेंच चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को लेकर फंसा है, जो 40 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन उसे लगभग 20 सीटें मिलने की संभावना है. बाकी बची सीटें जीतन राम मांझी के 'हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर)' और उपेंद्र कुशवाहा के 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' के खाते में जाएंगी.
2020 के विधानसभा चुनाव में, जदयू ने 115 और भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था. हालांकि, भाजपा 74 सीटें जीतकर बड़े भाई की भूमिका में आ गई थी, जबकि जदयू को केवल 43 सीटों से संतोष करना पड़ा था. इसके बावजूद, जदयू इस बार 100 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है. एक वरिष्ठ NDA नेता के अनुसार, "पिछली बार जदयू के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण लोजपा द्वारा उसके खिलाफ उम्मीदवार उतारना था. पार्टी के पास अभी भी अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) का लगभग 10% वोट है और चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है, इसलिए सीटों पर कोई बड़ा समझौता नहीं होगा." वहीं, लोजपा (आरवी) 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने शानदार प्रदर्शन का हवाला दे रही है, जिसमें उसने लड़ी गई सभी पांच सीटें जीतीं और अपने संसदीय क्षेत्रों के 30 में से 29 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की. हालांकि, जदयू का तर्क है कि लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर लड़ा गया था, जबकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और ज़मीनी ताकत ज़्यादा मायने रखती है.
तेजस्वी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, बताया 'मोदी आयोग'
'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है. उन्होंने चुनाव आयोग को "मोदी आयोग" और "भाजपा का सेल" करार देते हुए कहा कि यह संस्था अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण "लोकतंत्र पर सीधा हमला" है और चुनाव आयोग के अधिकारी "भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार" कर रहे हैं. उन्होंने पीएम मोदी के गया में दिए 'घुसपैठियों' वाले बयान को भी झूठ बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने खुद सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में एक भी अवैध अप्रवासी का ज़िक्र नहीं किया था, फिर भी भाजपा वोट चुराने के लिए यह मुद्दा उठाती है.
इस यात्रा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन जल्द ही बिहार चुनाव के लिए एक साझा घोषणापत्र जारी करेगा. भाजपा ने इन आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस करीब 90 चुनाव हार चुकी है और अब उन्हें बिहार में एक और हार का डर सता रहा है." वहीं, भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, "जब राहुल गांधी महाराष्ट्र और यूपी में जीतते हैं तो चुनाव आयोग सही होता है, और जब हारते हैं तो गलत. बिहार की जनता उनका असली चेहरा देख रही है."
मोदी को 'झूठ की दुकान' कहने पर तेजस्वी यादव के खिलाफ़ एफआईआर
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर "अपमानजनक, मानहानिकारक और सामाजिक रूप से विभाजनकारी" टिप्पणी करने के आरोप में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एफआईआर दर्ज की गई है. यह शिकायत भाजपा के स्थानीय विधायक मिलिंद रामजी नरोटे ने दर्ज कराई है. मामला तेजस्वी के शुक्रवार के उन 'एक्स' पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के गया दौरे को निशाना बनाते हुए लिखा था, "आज गया में झूठ और जुमलों की दुकान लगेगी." इसके साथ एक कार्टून भी पोस्ट किया गया था जिसमें पीएम मोदी को "जुमलों की दुकान" पर बैठा दिखाया गया था, जिसके बोर्ड पर लिखा था "हर वादे के जुमला बनने की 100% गारंटी".
FIR में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें सामाजिक सद्भाव के खिलाफ नफरत फैलाना और सार्वजनिक शरारत के इरादे से बयान देना शामिल है. इस कार्रवाई पर तेजस्वी यादव ने कटिहार में राहुल गांधी के साथ यात्रा के दौरान तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "FIR से कौन डरता है? अब तो 'जुमला' शब्द कहना भी अपराध हो गया है. ये लोग सच से डरते हैं. हम किसी FIR से नहीं डरते और हम सच बोलते रहेंगे." यह FIR ऐसे समय में हुई है जब तेजस्वी और राहुल की 'वोटर अधिकार यात्रा' में भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसे लेकर सत्ताधारी NDA खेमे में चिंता देखी जा रही है.
बिहार में 98.2 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त
रविवार को चुनाव आयोग ने कहा कि 98.2 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि लोगों के लिए बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए अभी आठ दिन और शेष हैं. पीटीआई के अनुसार, 24 जून से 24 अगस्त तक यानी 60 दिनों में 98.2 प्रतिशत लोगों ने अपने दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं. “अब 1 सितंबर तक आठ दिन और शेष हैं और केवल 1.8 प्रतिशत मतदाताओं के दस्तावेज प्रस्तुत होना बाकी हैं," आयोग ने कहा.
विश्लेषण
आकार पटेल : आखिर भारत की सरकारी पाकिस्तान पॉलिसी है क्या?
दो पक्षों के बीच समस्याओं को केवल तीन तरीकों में से किसी एक से हल किया जा सकता है. पहला है इन दो पक्षों के बीच बातचीत के जरिए. दूसरा है किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से. तीसरा है बल के जरिए: एक पक्ष दूसरे को मजबूर करता है कि वो वही करे जो वो चाहता है. चाहे ये दो पक्ष व्यक्ति हों, समूह हों, मुकदमेबाज हों, कंपनियां हों या देश हों, समस्या को हल करने के ये ही तीन तरीके हैं.
भारतीय बच्चे एक चौथा तरीका इस्तेमाल करते हैं, जिसे कट्टी कहते हैं. इसमें दिखावा किया जाता है कि दूसरा पक्ष है ही नहीं. इससे समस्या का हल नहीं होता, लेकिन बच्चे को एक तरह की संतुष्टि मिलती है.
21 अगस्त को हमारे मीडिया में ये हेडलाइन आई: 'पाकिस्तान के साथ कोई द्विपक्षीय इवेंट नहीं लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम एशिया कप में खेलने के लिए स्वतंत्र: खेल मंत्रालय.'
यहां एक सवाल है: इनमें से कौन सा बयान मोदी सरकार की आधिकारिक पाकिस्तान नीति का हिस्सा था? 1) भारत पाकिस्तान से बात करेगा. 2) भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा. 3) भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा जब तक वो LoC पर फायरिंग करता रहेगा. 4) भारत पाकिस्तान से बात तभी करेगा जब वो आतंक का निर्यात बंद कर देगा. 5) भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा अगर वो कश्मीरियों से बात करता है. 6) भारत पाकिस्तान से सिर्फ आतंकवाद के बारे में बात करेगा. 7) भारत पाकिस्तान से कश्मीर के बारे में बात करेगा. 8) भारत पाकिस्तान से सिर्फ PoK के बारे में बात करेगा, कश्मीर के बारे में नहीं. 9) भारत पाकिस्तान से सिर्फ आतंक के बारे में बात करेगा, कश्मीर के बारे में नहीं. 10) भारत पाकिस्तान से बात करेगा क्योंकि उसने पहले ही आतंक पर लेक्चर दे दिया था. 11) भारत स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करेगा. 12) भारत स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं करेगा. 13) भारत गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करेगा. 14) भारत गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं करेगा. 15) भारत दिवाली पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करेगा. 16) भारत दिवाली पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं करेगा. 17) भारत ईद पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करेगा. 18) भारत ईद पर पाकिस्तान के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं करेगा. 19) भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट कूटनीति करेगा. 20) भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट कूटनीति नहीं करेगा. 21) भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा लेकिन LoC पर हर गोली का जवाब बम से देगा. 22) भारत पाकिस्तान से बात करेगा क्योंकि युद्ध कोई विकल्प नहीं था. 23) भारत एक हफ्ते में पाकिस्तान को हरा सकता है. 24) भारत एलओसी फायरिंग के दबाव में नहीं आएगा. 25) भारत एलओसी सीजफायर पर राजी होगा क्योंकि उल्लंघन बढ़ गए हैं. 26) भारत पाकिस्तान के साथ व्यापार करेगा. 27) भारत पाकिस्तान के साथ व्यापार नहीं करेगा.
सही जवाब बेशक ये है कि इनमें से हरेक बिंदू मोदी सरकार की आधिकारिक नीति थी. ऊपर दिए गए बयानों से मेल खाने वाली न्यूज हेडलाइनें ये हैं.
'नरेंद्र मोदी ने लाहौर में नवाज शरीफ के साथ अचानक बातचीत की', 25 दिसंबर 2015. 2) 'पाकिस्तान को बातचीत का कोई संदेश नहीं भेजा, MEA का कहना', 15 अक्टूबर 2020.
'सुषमा स्वराज ने भारत के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत बिगाड़ने के लिए पूरी तरह पाकिस्तान को दोष दिया', 26 सितंबर 2016. 4) 'भारत पाकिस्तान से बात कर सकता है लेकिन "टेररिस्तान" से नहीं: S जयशंकर', 25 सितंबर 2019. 5) 'पाकिस्तान अगर हुर्रियत से मिलता है तो कोई बातचीत नहीं: सुषमा', 22 अगस्त 2015. 6) 'भारत पाकिस्तान से सिर्फ सीमा पार आतंकवाद पर बात करेगा, कश्मीर पर नहीं', 18 अगस्त 2016. 7) 'द्विपक्षीय ढांचे के भीतर J&K पर पाकिस्तान से बात करने को तैयार: भारत', 28 अगस्त 2014. 8) 'पाकिस्तान के साथ भविष्य की कोई भी बातचीत PoK पर होगी, J&K पर नहीं: राजनाथ सिंह', 22 सितंबर 2019.
'आतंक पर बात करने को तैयार लेकिन कश्मीर पर नहीं: भारत से पाकिस्तान को', 17 अगस्त 2016. 10) 'आतंक पर सख्त बातचीत के बाद, भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर शुरू करने को तैयार', 28 मई 2014. 11) 'स्वतंत्रता दिवस: सीमा पर भारत-पाक सुरक्षा बलों ने मिठाइयों का आदान-प्रदान किया', 15 अगस्त 2018. 12) '73वां स्वतंत्रता दिवस: अटारी-वाघा बॉर्डर पोस्ट पर मिठाइयों का कोई आदान-प्रदान नहीं', 15 अगस्त 2019. 13) 'गणतंत्र दिवस पर, भारतीय, पाकिस्तानी सैनिकों ने LoC पर मिठाइयों का आदान-प्रदान किया', 26 जनवरी 2017. 14) 'BSF, पाक रेंजर्स गणतंत्र दिवस पर मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं करेंगे', 25 जनवरी 2020, हिंदुस्तान टाइम्स.
'दिवाली पर, भारत, पाकिस्तान के सैनिकों ने वाघा बॉर्डर पर मिठाइयों का आदान-प्रदान किया', 7 नवंबर 2018. 16) 'इस दिवाली अटारी बॉर्डर पर मिठाइयों का कोई आदान-प्रदान नहीं', 30 अक्टूबर 2016. 17) 'ईद-उल-फित्र के मौके पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं ने मिठाइयों का आदान-प्रदान किया', 5 जून 2019. 18) 'ईद पर वाघा बॉर्डर पर BSF, पाकिस्तान रेंजर्स के बीच मिठाइयों का कोई आदान-प्रदान नहीं', 25 मार्च 2020. 19) 'मोदी की क्रिकेट कूटनीति: पाकिस्तान के साथ राजनीतिक संपर्क नवीनीकरण', 13 फरवरी 2015.
'अमित शाह ने भारत-पाक "द्विपक्षीय" क्रिकेट सीरीज को खारिज किया; BJP ने उनका समर्थन किया', 18 जून 2017. 21) 'पाकिस्तान की गोलियों का जवाब बमों से देंगे: अमित शाह', 29 मार्च 2019.
'पाकिस्तान के साथ युद्ध कोई विकल्प नहीं, भारत बातचीत जारी रखेगा: स्वराज', 16 दिसंबर 2015. 23) 'भारत अब पाकिस्तान को "7-10 दिनों में" हरा सकता है, नरेंद्र मोदी का कहना', 29 जनवरी 2020. 24) 'जल्द सब ठीक हो जाएगा: LoC फायरिंग पर नरेंद्र मोदी', 9 अक्टूबर 2014. 25) 'भारत-पाकिस्तान का अचानक सीजफायर कॉल और इसका क्या मतलब है, समझाया गया', 26 फरवरी 2021. 26) 'मोदी ने पाकिस्तान के साथ पूर्ण व्यापार सामान्यीकरण की मांग की', 24 नवंबर 2017. 27) 'भारत ने पाकिस्तान के साथ LoC के पार व्यापार स्थगित किया', 18 अप्रैल 2018.
और ये सब इस सरकार के सिर्फ पहले पांच साल की बात है.
डिक्शनरी में नीति शब्द की परिभाषा है 'विकल्पों में से चुना गया कार्य का एक निश्चित तरीका या पद्धति और दी गई परिस्थितियों के आलोक में वर्तमान और भविष्य के फैसलों को दिशा देने और निर्धारित करने के लिए'; और यह भी कि 'एक उच्च स्तरीय समग्र योजना जो सामान्य लक्ष्यों और स्वीकार्य प्रक्रियाओं को अपनाती है, विशेषकर किसी सरकारी संस्था की'.
अब आप समझ ही सकते हैं कि डिक्शनरी भारत की पाकिस्तान नीति को कैसे बयान करेगी.
राजनीति, भ्रष्टाचार और छल-कपट
संजय के. झा | मोदी सरकार नेरेटिव ही संभालती रहेगी या कुछ काम कर के भी दिखाएगी?
मोदी सरकार ने घरेलू और विदेशी नीति की चिंताओं पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश करने के बजाय आलोचकों को चुप कराने के लिए छोटे-मोटे हथकंडों का इस्तेमाल किया है. द वायर में संजय के. झा ने एक लंबा विश्लेषण लिखा है. उसके कुछ चुनींदा अंश.
प्रोपेगेंडा में ध्यान भटकाने के लगातार तमाशे शामिल होते हैं. जब विपक्ष के 'वोट चोरी' अभियान ने लोगों का ध्यान खींचा, तो मोदी सरकार को बेहद जरूरी तौर पर एक शक्तिशाली विकर्षण की जरूरत थी.
गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत एक संविधान संशोधन विधेयक के साथ आए जो यह सुनिश्चित करता कि कोई भी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना होगा अगर उन्हें 30 दिन या अधिक के लिए जेल में डाल दिया जाता है और उन पर ऐसे अपराधों का आरोप है जिनकी सजा पांच साल या अधिक है.
सरकार जानती थी कि उनके पास विधेयक पारित करने के लिए संख्या नहीं है, लेकिन वे सिर्फ एक बात करने का मुद्दा चाहते थे ताकि विपक्षी पार्टियों की गलत कामों की झूठी बराबरी बनाई जा सके. आखिरकार, उन्हें एक ऐसे आरोप के प्रभाव को कम करना था जो लोकतंत्र में सबसे बुरी चीज़ माना जाता है – चुनाव चुराना!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस गिमिक की उपयोगिता को साबित किया जब उन्होंने भ्रष्टाचार पर विपक्ष पर जमकर हमला किया. "अब भ्रष्टाचारी जेल भी जाएगा और उसकी कुर्सी भी जाएगी," मोदी ने बिहार की एक रैली में गरजते हुए कहा, विपक्षी पार्टियों पर कीचड़ उछालते हुए, शायद भ्रष्टाचारियों का बचाव करने के लिए.
यह एक झूठी बराबरी थी जो कुशलता से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को गड्ढे में खींचने के लिए डिजाइन की गई थी, अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को बताते हुए कि राजनीति में कोई भी साफ नहीं है. सरकार ने अपनी स्लेट साफ करने के बजाय दूसरे की कॉपी बुक पर दाग लगाने का विकल्प चुना.
भ्रष्टाचार से लड़ने के अडिग संकल्प का ढिंढोरा पीटकर भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाना मोदी का पसंदीदा खेल है. 2014 में प्रधानमंत्री बनने से ठीक पहले, वे गर्व से घोषणा करते थे, "हमें संसद को अपराधियों से मुक्त करना होगा... अगर मैं सत्ता में चुना गया तो मैं उन्हें छोड़ूंगा नहीं."
लगातार इंटरव्यू और सार्वजनिक रैलियों में, उन्होंने दोहराया, "कोई भी [आपराधिक गतिविधि का] आरोपी चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं करेगा. कौन कहता है कि यह सफाई नहीं हो सकती? मैं राजनीति को साफ करने आया हूं."
गुजरात के मुख्यमंत्री, जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में सांप्रदायिक दंगों के भयानक परिणाम के बाद "राजधर्म" का पालन करने की याद दिलाई थी, राजनीति को साफ करने के ऊंचे वादे के साथ आए थे और देश ने भोलेपन से उनका विश्वास किया. मोदी ने वास्तव में चुनाव जीतने के बाद देश को सफाई के काम में लगा दिया, स्वच्छ भारत अभियान को अंजाम देने के लिए लोगों के हाथ में झाड़ू थमाते हुए जबकि अपराधी सत्ता के गलियारों में दुबके हुए थे.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने पाया कि 2014 में, 186 सांसदों (35%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से 112 के खिलाफ हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर मामले थे. BJP ने सबसे अधिक योगदान दिया, 98 सांसदों के पास आपराधिक पृष्ठभूमि थी.
2019 में, आपराधिक मामलों का सामना करने वाले सांसदों की संख्या बढ़कर 233 हो गई. 2024 में, 251 (46%) सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले थे, जो संसद को कलंकित तत्वों से साफ करने के मोदी के वादे की खोखलाहट को उजागर करता है.
इस दौरान, भाजपा नेताओं से जुड़े कई भयानक अपराधों ने कथित तौर पर देश को हिला दिया लेकिन मोदी चुप रहे. उनका यह दावा कि नया विधेयक अपराधीकरण और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए है, छलपूर्ण लगता है क्योंकि उनकी सरकार ने चुनिंदा तौर पर विपक्षी नेताओं को भ्रष्टाचार के मामलों में फंसाया है.
एक विपक्षी मुख्यमंत्री को एक छोटे जमीन के सौदे के अस्पष्ट और निराधार आरोप पर जेल भेजा जाता है, लेकिन एक BJP मुख्यमंत्री जिस पर दर्जनों गंभीर आरोप थे, उसे किसी जांच का सामना नहीं करना पड़ा.
मोदी द्वारा भ्रष्ट करार दिए गए विपक्षी नेता बरी कर दिए जाते हैं और जब वे भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें महत्वपूर्ण पद दिए जाते हैं. मुख्य पदों पर नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं. सूचना के अधिकार कानून को कमजोर किया गया है. लोकपाल अभी भी पूरी तरह सुसज्जित होने का इंतजार कर रहा है. लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी कथा को लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए बार-बार पुनर्जीवित किया जाता है.
बिहार के लिए प्रलोभन
विकसित बिहार, अखबारों में पूरे पन्ने के विज्ञापन चीखते हुए, जैसे प्रधानमंत्री ने खुद घोषणा की कि राज्य का तेज गति से विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है. बिहार, जो नौकरियों की तलाश में युवाओं के बड़े पैमाने पर पलायन के लिए कुख्यात है, प्रति व्यक्ति आय के मामले में राष्ट्रीय चार्ट में सबसे नीचे है.
बिहार की प्रति व्यक्ति आय स्थिर कीमतों पर 36,333 रुपये और वर्तमान कीमतों पर 66,828 रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत से आधे से भी कम है. तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति आय 3 लाख रुपये को पार कर गई है, जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरल में यह 2 लाख रुपये से ऊपर है.
मोदी के विशेष ध्यान से स्पष्ट रूप से बिहार को इसकी दयनीय गरीबी से बाहर निकलने में मदद नहीं मिली है. कांग्रेस का बिहार में अंतिम मुख्यमंत्री 1990 में था और लालू प्रसाद की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का 2005 में. नीतीश कुमार ने पिछले 20 साल में ज्यादातर समय भाजपा के साथ गठबंधन में बिहार पर शासन किया है, सिवाय एक छोटी अवधि के जब वे आरजेडी में चले गए थे.
दो दशक एक उपजाऊ और मेहनती राज्य को उस खाई से बाहर निकालने के लिए काफी लंबी अवधि है जिसमें वह सड़ रहा है.
नीतीश अब बुढ़ापे और बीमारियों से लाचार हैं, और मोदी ने अब तक कोई नया नेतृत्व प्रस्तुत नहीं किया है. यह कल्पना करना कठिन है कि बिहार के लोग एक ऐसे मुख्यमंत्री के साथ बने रहने का विकल्प चुनेंगे जिसके व्यवहार ने चिंता जताई है.
भाजपा के लिए संकट को और बढ़ा देने वाली बात बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बारे में शोर है, जिसे कांग्रेस-आरजेडी ने चुनाव चुराने की साजिश के रूप में सफलतापूर्वक पेश किया है. अगर इन परिस्थितियों में भाजपा बिहार जीतती है, तो चुनावों की निष्पक्षता पर संदेह गहरा हो सकता है.
बीमारी और बहस
जब दुनिया मनमौजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से निपटने की तैयारी कर रही थी, जिन्होंने एक टैरिफ युद्ध शुरू किया था जो वैश्विक संबंधों और अर्थशास्त्र को फिर से परिभाषित करने की धमकी दे रहा था, भारत में प्रमुख चर्चा क्या थी? प्रधानमंत्री का छोटे देशों में पुरस्कार जीतना, वक्फ बिल, ऑपरेशन सिंदूर, अमेरिका में अडानी मामला, कुंभ-कांवरिया, आरएसएस- भाजपा तनाव, विशेष गहन पुनरीक्षण, वोट चोरी, आदि.
चीन के साथ हमारे रिश्ते गंभीर तनाव में हैं, और हमारे अन्य तत्काल पड़ोसियों के साथ रिश्तों ने बेहतर दिन देखे हैं.
क्या मोदी सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय चुनौती को प्राथमिकता देने के लिए कोई केंद्रित इरादा दिखाया? या उसने बड़ी चिंताओं पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश करने के बजाय आलोचकों को चुप कराने के लिए छोटे-मोटे हथकंडों का उपयोग करना जारी रखा?
भारत ने दुख की बात यह है कि अभी भी अपनी बुनियादी चिंताओं का समाधान नहीं किया है. विश्वगुरु बनने के लिए लॉन्चपैड तैयार नहीं किया गया है. जबकि सामाजिक और राजनीतिक असामंजस्य राष्ट्रीय कल्पना को अपंग बनाना जारी रखे हुए है, विभिन्न क्षेत्रों से गंभीर संकेतक हैं, जो अलार्म बजाने के लिए काफी निराशाजनक हैं.
मोदी सरकार ने इस महीने संसद में एक सवाल के जवाब में खुलासा किया कि 2024-25 में अकेले 39,446 एमएसएमई बंद हो गए हैं. क्या आप नौकरी के नुकसान और अर्थव्यवस्था को नुकसान की सीमा की कल्पना कर सकते हैं?
यहां तक कि सरल चीजों के लिए भी, हम चीनी आयात पर निर्भर हैं जबकि हमारे अपने उद्योग ध्वस्त हो रहे हैं. हम उर्वरक और प्लास्टिक के लिए भी चीन की ओर देखते हैं!
सरकार ने सोलर एनर्जी सेक्टर में विकास को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है लेकिन 2024-25 में अकेले 350 लाख से अधिक सोलर पीवी मॉड्यूल चीन से आयात किए गए हैं.
परेशान करने वाले संकेतों को उस मीडिया द्वारा नजरअंदाज किया जाता है जो सार्वजनिक बहस को आकार देता है. सरकार ने एक अन्य सवाल के जवाब में खुलासा किया कि देश के 22 एम्स में, डॉक्टरों के 4,976 स्वीकृत पद हैं और 2,970 रिक्तियां हैं. क्या यह स्वीकार्य है – प्रमुख चिकित्सा संस्थान में डॉक्टरों के 59% पद खाली? और हमारी सरकारें – केंद्र और राज्य दोनों – अप्रासंगिक और बनावटी विवादों पर समय बर्बाद कर रही हैं?
मोदी ने 2014 में देश से विभाजनकारी राजनीति पर दस साल की रोकथाम की अपील की थी. उनकी अपील बहरे कानों पर पड़ी; उन्होंने खुद इसे बिना पछतावे के तोड़ दिया. फिर भी, क्या हम प्रधानमंत्री से दूसरी अपील करने का अनुरोध कर सकते हैं: बकवास पर दस साल की रोकथाम? यदि नहीं, तो भारत के दिमाग पर बकवास का भारी बोझ देश की कल्पना को अपंग बना देगा.
जेपीसी से आम आदमी पार्टी भी बाहर, संजय सिंह ने कहा- 'बिल का मकसद विपक्ष को खत्म करना'
आम आदमी पार्टी (AAP) ने उन विवादास्पद विधेयकों की समीक्षा के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का बहिष्कार करने की घोषणा की है, जिनमें 30 दिनों तक जेल में बंद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने का प्रस्ताव है. तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद JPC का बहिष्कार करने वाली AAP तीसरी प्रमुख विपक्षी पार्टी बन गई है. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इन विधेयकों को "असंवैधानिक" बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य भ्रष्टाचार खत्म करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना, सरकारें गिराना और "देश में लोकतंत्र को समाप्त करना" है. उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा, "भ्रष्टाचार और भाजपा का रिश्ता लैला-मजनूं, रोमियो-जूलियट जैसा है. प्रधानमंत्री मोदी भ्रष्टाचारियों से प्यार करते हैं." उन्होंने अजित पवार, नारायण राणे और हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं का नाम लेते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया. वहीं, तृणमूल नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने इस JPC को "मूल्यहीन" करार देते हुए कहा कि समिति का अध्यक्ष भाजपा सांसद ही होगा, जिससे निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती.
जम्मू-कश्मीर
215 जमात से जुड़े' स्कूलों के अधिग्रहण पर उमर सरकार और उपराज्यपाल में ठनी
जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से जुड़े फलाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) द्वारा संचालित 215 स्कूलों को जिलाधिकारियों (DCs) द्वारा "अधिग्रहण" करने के एक आदेश ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार और उपराज्यपाल (L-G) मनोज सिन्हा के बीच एक नया टकराव पैदा कर दिया है. राज्य की शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके विभाग ने स्कूलों के "अधिग्रहण" का आदेश नहीं दिया था और अंतिम आदेश "उनकी जानकारी के बिना संशोधित किया गया". मंत्री के अनुसार, उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि इन स्कूलों की देखरेख पास के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल करेंगे, लेकिन उपराज्यपाल को रिपोर्ट करने वाले एक आईएएस अधिकारी, शिक्षा सचिव राम निवास शर्मा द्वारा जारी अंतिम आदेश में इसे "अधिग्रहण" में बदल दिया गया. यह विवाद 1990 के उस प्रतिबंध आदेश से जुड़ा है, जिसके आधार पर इन स्कूलों पर कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, जब 2019 में केंद्र ने UAPA के तहत जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया, तो उसने FAT पर प्रतिबंध नहीं लगाया था. ये स्कूल जम्मू-कश्मीर बोर्ड द्वारा निर्धारित NCERT पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं और साथ में इस्लामी अध्ययन और अरबी भाषा की कक्षाएं भी संचालित करते हैं. इस आदेश ने हज़ारों छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है.
पंजाब में ‘आप’ का हिंदुओं पर ध्यान, मंदिर एक्ट से जाति आधारित बोर्ड तक
भाजपा द्वारा पंजाब में लगातार वोट शेयर बढ़ाने के साथ ही सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भी राज्य में हिंदुओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है.
“आप” ने हिंदुओं के बीच अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश में, हिंदू मंदिर अधिनियम लागू करने का वादा किया है और सनातन सेवा समिति की स्थापना की है, जिसका नेतृत्व हिंदू नेता दीपक बाली कर रहे हैं. पार्टी ने अन्य धर्म-आधारित पहलें भी शुरू की हैं और राज्य इकाई की कमान एक हिंदू चेहरे, अमन अरोड़ा को सौंपी है. अरोड़ा को पिछले वर्ष नवंबर में राज्य इकाई का प्रमुख चुना गया था, जो पंजाब में सामान्यतः एक सिख नेता को शीर्ष पद पर नियुक्त करने की पार्टी की परंपरा से अलग कदम था. इसके अलावा भगवंत मान सरकार ने हाल ही में 14 जाति-आधारित बोर्डों की स्थापना की है, जिनमें से अधिकांश हिंदू समुदायों से जुड़े हैं. इनमें ब्राह्मण कल्याण बोर्ड, दलित विकास बोर्ड, राजपूत कल्याण बोर्ड, कनौजिया वेलफेयर बोर्ड, विमुक्त जाति वेलफेयर बोर्ड, प्रजापति समाज कल्याण बोर्ड, अग्रवाल वेलफेयर बोर्ड और स्वर्णकार वेलफेयर बोर्ड शामिल हैं.
कुछ अन्य बोर्ड गैर-हिंदू समुदायों को ध्यान में रखते हुए गठित किए गए हैं, जिनमें गुर्जर वेलफेयर बोर्ड (जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं), सैनी समाज वेलफेयर बोर्ड (जिसमें हिंदू और सिख शामिल हैं) और रामगढ़िया वेलफेयर बोर्ड (जिसमें हिंदू और सिख शामिल हैं), पंजाब राज्य मुस्लिम विकास बोर्ड और मसीह वेलफेयर बोर्ड शामिल हैं.
“द इंडियन एक्सप्रेस” में कंचन वासुदेव की रिपोर्ट है कि ये कदम उस समय उठाए गए, जब पिछले साल के लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर घटकर 26.2% रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनावों में उसे 42% वोट मिले थे. इसके विपरीत, भाजपा का वोट प्रतिशत 2022 में 6.6% से बढ़कर लोकसभा चुनावों में 18% हो गया.
“आप” के एक नेता ने कहा, “तब से आप हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उसे भरोसा है कि ग्रामीण वोटर उसके साथ बने रहेंगे.” ये कोशिशें 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले की सोची-समझी रणनीति हैं. इनका मकसद भाजपा की हिंदुओं में बढ़त को कम करना है और साथ ही सत्ता-विरोधी लहर से निपटना है. भाजपा के अच्छे प्रदर्शन ने हिंदू वोटों को इकट्ठा करने की होड़ को और बढ़ा दिया है.” 2011 की जनगणना के मुताबिक, पंजाब की जनसंख्या में 57.69% सिख हैं, जबकि हिंदू 38.49%, मुसलमान 1.93% और ईसाई 1.26% हैं.
असम में बेदखल किए गए लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे
असम के मुख्यमंत्री हिमंतबिस्वा सरमाने रविवार को कहा कि अतिक्रमण वाली भूमि से बेदखल किए गए लोगों के नाम उस स्थान की मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, जहां वे अवैध रूप से रह रहे थे.उन्होंने कहा, "यदि किसी को किसी स्थान से बेदखल किया जाता है, तो उस स्थान की मतदाता सूची में उसका नाम नहीं रह सकता. बेदखली के साथ ही, नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे. "
सबरीमाला कार्यक्रम पर भाजपा की चेतावनी, कहा- 'पिनाराई और स्टालिन हिंदुओं से माफी मांगें, वरना विरोध करेंगे'
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि दोनों मुख्यमंत्री 10 सितंबर को सबरीमाला के पंपा में होने वाले "वैश्विक अयप्पा संगम" में शामिल होने से पहले हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें. रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर ने दोनों मुख्यमंत्रियों पर हिंदू आस्था का "अपमान" करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "पिनाराई विजयन ने कई अयप्पा भक्तों को जेल में डाला, उन पर पुलिसिया हिंसा की और सबरीमाला की पवित्र परंपराओं का उल्लंघन किया. स्टालिन और उनके बेटे ने हिंदू धर्म को वायरस बताकर हिंदुओं का अपमान किया है." उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोनों मुख्यमंत्री बिना माफी मांगे कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश करते हैं, तो भाजपा का हर कार्यकर्ता उनका पुरजोर विरोध करेगा. उन्होंने 2018 के 'सेव सबरीमाला' आंदोलन का भी ज़िक्र किया, जब भाजपा ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की केरल सरकार की कोशिश का विरोध किया था.
लद्दाख सरकार ने एचआईएएल की ज़मीन रद्द की, सोनम वांगचुक बोले- राज्य के दर्जे की मांग को दबाने की साजिश
लेह प्रशासन ने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (एचआईएएल) को दी गई ज़मीन आवंटन मंज़ूरी रद्द कर दी है. इस फैसले से संस्था के संस्थापक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कड़ी आपत्ति जताई है. वांगचुक ने इसे "डायन का शिकार" करार देते हुए कहा कि यह लोगों की राज्य का दर्जा और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में संविधान की छठी अनुसूची लागू किए जाने की मांग को दबाने की साज़िश है. उन्होंने घोषणा की कि वे न्याय के लिए अदालत जाएंगे.
एचआईएएल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीतांजलि अंग्मो ने कहा कि यह एक वैकल्पिक विश्वविद्यालय है और इसके लिए यूजीसी का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है. फिर भी हमने 16 मार्च 2022 को आवेदन देकर 15 लाख रुपए जमा किए थे. 15 मार्च 2023 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से हमारी मुलाकात हुई थी और उन्होंने गर्व से ट्वीट भी किया था. मगर, 5 नवंबर 2024 को जब उन्होंने मंत्री से दोबारा मुलाकात की, तो पता चला कि वांगचुक द्वारा लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग से जुड़े आंदोलन में शामिल होने के कारण तीन वर्षों से उनकी फ़ाइल रोकी पड़ी है.
"यह भूमि लेह ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (एलएएचडीसी) द्वारा आवंटित की गई थी, लेकिन जब आवंटन रद्द हुआ तो यह निर्णय डिप्टी कमिश्नर ने लिया, जबकि हिल काउंसिल को विश्वास में भी नहीं लिया गया. यह उनके अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है," वांगचुक ने कहा.
श्रीकृष्ण को ‘माखन चोर’ कहना पसंद नहीं, मप्र सरकार नए ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारी में
एक मोटा‑सा शरारती बालक, जिसे ताज़ा मथे हुए मक्खन से असीम प्रेम था—किंवदंतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपनी चतुराई से उसे चुराकर खाते और इस कारण अपनी मां और पड़ोसियों को परेशान कर देते थे. कृष्ण की नटखट नंदलाल या माखन चोर की छवि भक्तों को अत्यंत प्रिय है. इसकी स्थायी लोकप्रियता ने इसे सदियों से चित्रकला में दर्शाया है, विशेषकर 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच राजपूत और पहाड़ी शैली में; आधुनिक समय के कैलेंडरों में; तथा साहित्य, संगीत और जन्माष्टमी पर होने वाले दही‑हांडी आयोजनों में भी. लेकिन, मध्यप्रदेश में भगवान कृष्ण की इस पारंपरिक छवि में बदलाव किए जाने की तैयारी है, जहां संस्कृति विभाग इस रूप को नए ढंग से प्रस्तुत करने का उपक्रम कर रहा है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, भगवान कृष्ण द्वारा माखन से भरी मटकी फोड़ना वास्तव में अत्याचारी राजा कंस के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक था. लेकिन, समय के साथ यह कथा विकृत हो गई.
उन्होंने कहा, “कृष्ण ने अपने साथी ग्वालबालों से कहा था— अपना माखन खुद खाओ, मटकी तोड़ दो, लेकिन इसे हमारे शत्रु तक मत पहुंचने दो. यह चोरी नहीं थी, बल्कि अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का संदेश था. कृष्ण की कथा प्रेम और अन्याय के विरुद्ध विद्रोह की गाथा है, न कि चोरी की कहानी.” मुख्यमंत्री ने यह बातें 16 अगस्त को जन्माष्टमी समारोह में कहीं.
मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेते हुए, उनके सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी ने एक बड़े जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा बनानी शुरू कर दी है. अपने कार्यालय में तिवारी "वैदिक घड़ी" देखकर समय देखते हैं और अपने कर्मचारियों से गीता की नई प्रतियां मंगवाने के लिए कहते हैं. वह “इंडियन एक्सप्रेस” से कहते हैं, “हम कोई कानून नहीं लाएंगे, लेकिन निश्चित रूप से स्कूल के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव करेंगे और बच्चों को कृष्ण का सही ज्ञान देंगे.”
तिवारी के अनुसार, संस्कृति विभाग धार्मिक नेताओं, विद्वानों, उपदेशकों और कथाकारों को यह भी बताएगा कि कृष्ण का माखन चोरी का कार्य वास्तव में कंस की नीतियों के खिलाफ उनके विद्रोह का प्रतीक था, और ‘माखन-चोरी’ की लोकप्रिय कथा को बढ़ावा देने की प्रथा पर रोक लगाने की कोशिश होगी.
मोंटेक सिंह अहलूवालिया : संकट को भारत को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए
अमेरिका द्वारा भारतीय आयातों पर 50% तक टैरिफ लगाने की बढ़ती आशंकाओं के बीच, योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भारत को जवाबी कार्रवाई से बचने और धैर्य के साथ कूटनीतिक रास्ते अपनाने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि इस संकट को भारत को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए ताकि वह अपनी व्यापार नीति में बड़े सुधार कर सके और दुनिया के अन्य देशों के साथ आर्थिक एकीकरण को तेज कर सके.
करन थापर को दिये गये एक विस्तृत साक्षात्कार में, अहलूवालिया ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसी व्यवस्था बना दी है, जहां टैरिफ का इस्तेमाल व्यापारिक मुद्दों के अलावा भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए भी किया जा रहा है. उन्होंने चेताया कि अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाना भारत के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि चीन की तरह भारत के पास ऐसा कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं है, जिसकी अमेरिका को सख्त जरूरत हो. उनका मानना है कि भारत को बंद दरवाजों के पीछे की कूटनीति पर भरोसा करना चाहिए.
अहलूवालिया ने आगाह किया कि 50% अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा. इससे विशेष रूप से कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट्स, झींगा, हीरे और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान निर्यातक क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होंगे. इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का खतरा है, जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या और बढ़ सकती है. उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. रंगराजन के उस अनुमान से सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि इन टैरिफ के कारण भारत की जीडीपी वृद्धि दर में 0.6% तक की गिरावट आ सकती है.
अहलूवालिया का मानना है कि भारत को अपनी व्यापार रणनीति में एक बड़ा बदलाव लाने की तत्काल आवश्यकता है. उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का विस्तार: भारत को यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहिए. इसके अलावा, अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौतों की संख्या बढ़ानी चाहिए.
RCEP और CPTPP में शामिल हों: भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) पर अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत को ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए व्यापक और प्रगतिशील समझौते (CPTPP) में शामिल होने का प्रयास करना चाहिए.
चीन से पहले CPTPP में प्रवेश: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को चीन से पहले CPTPP में शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए. ऐसा करने से भारत को अपनी प्रवेश शर्तों पर बेहतर सौदेबाजी करने का मौका मिलेगा और चीन का कोई वीटो भी नहीं होगा.
अहलूवालिया ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों का जवाब संरक्षणवाद से देना भारत के लिए विनाशकारी होगा. इसके बजाय, भारत को इस अवसर का उपयोग अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक खुला बनाने, आंतरिक सुधारों को लागू करने और दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए करना चाहिए.
मुकेश अंबानी की रिलायंस को रूसी तेल से सबसे ज्यादा कमाई : रिपोर्ट
27 अगस्त से लागू होने वाले अमेरिका के नए टैरिफ़ को देखते हुए, भारत के तेल रिफाइनिंग अधिकारी इस समय सीमा के बाद भी रूस से रियायती मूल्य पर तेल लेने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. हालांकि, बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से रूस से तेल खरीद में हुए लाभ ने दो निजी कंपनियों को सरकारी कंपनियों की तुलना में ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने में मदद की है. ये दो निजी कंपनियां हैं- रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली) और नयारा एनर्जी (रूस की रोसनेफ़्ट द्वारा संचालित). दोनों मिलकर भारत द्वारा रूस से लिए जाने वाले औसतन 15 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति का 40% से अधिक संभालते हैं.
“द वायर” के अनुसार, 23 अगस्त की रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी कंपनियां, जो नई दिल्ली द्वारा तय ईंधन मूल्य व्यवस्था से बंधी हैं, उन्हें निजी रिफाइनरीज की तुलना में कम लाभ हुआ है. रिपोर्ट ने कहा कि तेल आयात का बंटवारा समान रूप से नहीं हुआ है, और निजी क्षेत्र की रिफाइनरी ही सबसे बड़े लाभार्थी बनी हैं.
समुद्री खुफिया एजेंसी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ़ दो भारतीय निजी रिफाइनरियों ने 2025 में अब तक रूस से डिस्काउंट पर किए गए कुल आयात (18 लाख बैरल प्रतिदिन) में से 8.81 लाख बैरल प्रतिदिन का हिस्सा अकेले उठाया. कुल मिलाकर, भारत में सात कंपनियां रूस से कच्चा तेल आयात करती हैं.
2022 में यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद कई प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस ने भारत के कच्चे तेल आयात बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी 2021 के मात्र 2% से बढ़ाकर पिछले 42 महीनों में औसतन 32% तक कर ली. यह आयात मुख्य रूप से अमेरिका, सऊदी अरब और नाइजीरिया जैसे देशों के हिस्से में कटौती करके सुनिश्चित किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में भारत के बाज़ार में रूस के तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 45% तक पहुंच गई, यानी हर दूसरे बैरल तेल की आपूर्ति रूस से हुई. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है, भले ही उसके मुनाफ़े की सही जानकारी सार्वजनिक न हो.
चूंकि ओएनजीसी जैसी सार्वजनिक कंपनियां घरेलू बाज़ार के लिए नियंत्रित कीमतों पर ईंधन उपलब्ध कराती हैं, वहीं निजी कंपनियां (रिलायंस और नयारा) अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा यूरोप और एशिया को ऊंचे दाम पर निर्यात कर पाती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस और नयारा मिलकर 2025 में भारत के कुल ईंधन निर्यात का 81% वहन कर रहे थे, ख़ासकर डीज़ल और जेट ईंधन (मिडिल डिस्टिलेट्स) में. केवल रिलायंस ने ही 9.14 लाख बैरल प्रतिदिन का निर्यात किया, जो भारत के पूरे निर्यात का 71% है. रिपोर्ट ने यह भी बताया कि रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने अपने उत्पादन का लगभग 67% निर्यात किया, और जून 2025 में रूस से 7.46 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात करके, अपनी 1.36 मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता का लगभग आधा हिस्सा रूसी तेल से पूरा किया.
आदिवासी विरोध प्रदर्शन के बीच झारखंड के पूर्व सीएम चंपई सोरेन नज़रबंद
Former Jharkhand chief minister Champai Soren during a visit at his native village, in Seraikela Kharsawan district, Wednesday, Aug. 21, 2024.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन को रविवार को नज़रबंद कर दिया गया. पुलिस के अनुसार, करोड़ों की लागत वाले एक सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए क़ानून और व्यवस्था की समस्याओं से बचने के लिए यह क़दम उठाया गया. उनके बेटे बाबूलाल सोरेन को भी समर्थकों के साथ रांची जाते समय एक पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया है. रांची शहर के पुलिस उपाधीक्षक के.वी. रमन ने पीटीआई को बताया, "आदिवासी संगठनों के विरोध के मद्देनज़र क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर चंपई सोरेन को नज़रबंद किया गया है." रविवार को विरोध प्रदर्शन के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और रणनीतिक स्थानों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं. हालांकि, सोरेन ने इस क़दम को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि उन्हें आदिवासियों और उनके विरोध का समर्थन करने के लिए नज़रबंद किया गया है.
ओडिशा में वीडियो बनाते समय डुडुमा झरने में बहा 22 वर्षीय यूट्यूबर
कोरापुट ज़िले में मचकुंड पुलिस सीमा के तहत डुडुमा झरने की तेज़ धाराओं में शनिवार को बेरहामपुर का एक 22 वर्षीय यूट्यूबर बह गया. लापता युवक की पहचान बेरहामपुर के नीलाद्रि नगर निवासी सागर कुंडू के रूप में हुई है. सूत्रों के अनुसार, सागर अपने साथी यूट्यूबर, कटक के जोबरा इलाक़े के अभिजीत बेहरा के साथ चार दिन पहले वीडियो शूटिंग के लिए कोरापुट आया था. शनिवार दोपहर को, दोनों कुछ अन्य युवकों के साथ डुडुमा झरना देखने गए. कथित तौर पर यूट्यूबर्स ने ड्रोन का उपयोग करके झरने के पास अलग-अलग जगहों पर वीडियो शूट किए. बाद में, सागर ने चट्टानों पर कूदकर धारा के बीच में जाकर एक लाइव वीडियो फ़िल्माने का प्रयास किया. अभिजीत और अन्य लोग पास में खड़े होकर उसे बढ़ते जल स्तर के बारे में चेतावनी दे रहे थे. बार-बार चेतावनी के बावजूद, सागर ने चेतावनियों को हल्के में लिया और धारा में खड़ा रहा. कुछ युवकों ने उसे वापस खींचने की कोशिश में एक रस्सी भी फेंकी, लेकिन असफल रहे. कुछ ही मिनटों में, बांध की तरफ़ से पानी का स्तर अचानक बढ़ गया और इससे पहले कि कोई उसे बचा पाता, सागर बह गया. अभिजीत ने कहा, "मैंने उसे सारे उपकरण फेंकने और किसी तरह किनारे पर लौटने के लिए कहा. उसने कैमरा फेंक दिया, लेकिन थोड़ी देर वहीं खड़ा रहा. उसके वापस आने से पहले, पानी ने अचानक उस इलाक़े को डुबो दिया और उसे बहा ले गया." मचकुंड आईआईसी मधुसूदन भोई ने कहा कि खोज अभियान रात में रोक दिया गया था और रविवार को ओडीआरएएफ़ कर्मियों के साथ फिर से शुरू होगा.
https://youtube.com/shorts/AgcKBEcugJk?si=1Yzw53v6-EoNJJMu
यूक्रेन स्वतंत्रता दिवस पर जेलेंस्की : हमारा भविष्य हम तय करेंगे

राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम एक दृढ़ संबोधन में कहा कि यूक्रेन अपनी आज़ादी के लिए तब तक लड़ता रहेगा "जब तक शांति के लिए उसकी पुकार नहीं सुनी जाती". उन्होंने कहा, "हमें एक न्यायपूर्ण शांति की ज़रूरत है, एक ऐसी शांति जहां हमारा भविष्य सिर्फ़ हम तय करेंगे," और कहा कि यूक्रेन "एक पीड़ित नहीं, बल्कि एक लड़ाका है." ज़ेलेंस्की की यह टिप्पणी मॉस्को के उस बयान के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन ने रात भर रूस की बिजली और ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया था, और ड्रोन हमलों को उसके पश्चिमी कुर्स्क क्षेत्र में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में आग लगने के लिए दोषी ठहराया था. संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि युद्ध में हर परमाणु सुविधा की हर समय रक्षा की जानी चाहिए.
रविवार को ही, रूस और यूक्रेन दोनों ने पुष्टि की कि कैदियों की अदला-बदली हुई है, जिसमें प्रत्येक पक्ष के 146 सैनिकों का आदान-प्रदान किया गया. ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस द्वारा लौटाए गए लोगों में सैनिक, सीमा रक्षक और नागरिक शामिल हैं. कीव में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने समारोह में भाग लिया और ज़ेलेंस्की के साथ खड़े होकर कहा, "कनाडा हमेशा यूक्रेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा." उन्होंने कहा कि 2 बिलियन कनाडाई डॉलर के सैन्य पैकेज का हिस्सा ड्रोन, गोला-बारूद और बख्तरबंद गाड़ियां सितंबर की शुरुआत में यूक्रेन को दी जाएंगी. इस समारोह में अमेरिकी दूत कीथ केलॉग भी मौजूद थे.
इस बीच, ज़ेलेंस्की ने किंग चार्ल्स का एक पत्र साझा किया, जिसमें यूक्रेन के लोगों को उनकी "सबसे गर्मजोशी भरी और सच्ची शुभकामनाएं" भेजी गई थीं. ब्रिटेन सरकार ने भी कहा कि इस सालगिरह के सम्मान में डाउनिंग स्ट्रीट के ऊपर यूक्रेनी झंडे दिखाई देंगे. नॉर्वे ने रविवार को घोषणा की कि वह यूक्रेन को लगभग 7 बिलियन क्रोनर की वायु रक्षा प्रणाली का योगदान देगा. वहीं, यूक्रेन और स्वीडन ने संयुक्त रक्षा उत्पादन पर सहमति व्यक्त की है. फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया गया था. इस महीने युद्ध को लेकर गहन कूटनीति हुई है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अगस्त को अलास्का में अपने रूसी समकक्ष राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की. ट्रम्प ने तब से रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की कमी पर सार्वजनिक रूप से निराशा दिखाई है.
भारत के 'मिस्टर रिलायबल' चेतेश्वर पुजारा ने लिया संन्यास
भारतीय टेस्ट क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है, जिसके बाद उनके दृढ़ता और भरोसे के लिए जाने जाने वाले करियर के लिए श्रद्धांजलि दी जा रही है। 37 वर्षीय बल्लेबाज ने 103 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 7,195 रन बनाए। उन्होंने संन्यास लेने के अपने फैसले के पीछे घरेलू क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर पैदा करने का कारण बताया।
अपनी दृढ़ रक्षा और विपक्षी गेंदबाजों को थकाने की क्षमता के लिए जाने जाने वाले पुजारा, भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में, सहायक थे। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को चेतेश्वर पुजारा को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें "भारत का मिस्टर रिलायबल" बताया और कहा कि यह बल्लेबाज़ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद एक सम्मानजनक विदाई का हक़दार था. पुजारा, जिन्होंने 103 टेस्ट में 7,195 रन बनाए, अपनी रक्षात्मक तकनीक और सभी परिस्थितियों में पारी को संभालने की क्षमता के लिए जाने जाते थे. यहाँ उनके करियर के पांच ऐसे पल हैं जो थरूर की बात को सही साबित करते हैं.
जोहान्सबर्ग में ड्रॉ टेस्ट 2013: दक्षिण अफ़्रीका में भारत का प्रदर्शन हमेशा अच्छा नहीं रहा है. दूसरी पारी में पुजारा ने 270 गेंदों पर 153 रन बनाए और लगभग छह घंटे तक बल्लेबाज़ी की. उन्होंने भारत के लिए मैच ड्रॉ कराने के लिए पर्याप्त समय निकाला.
ऑस्ट्रेलिया को थकाने वाली सीरीज़ 2020-21: यह सीरीज़ गाबा में ऐतिहासिक जीत के लिए प्रसिद्ध है. कोहली की अनुपस्थिति में भारत को किसी के आगे आने की ज़रूरत थी. पुजारा ने पूरी सीरीज़ में अनगिनत शारीरिक चोटें सहीं. उन्होंने उस सीरीज़ में 928 गेंदें खेलीं और मिचेल स्टार्क, जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस जैसे ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ों में थकान पैदा कर दी.
ऑस्ट्रेलिया में तीन शतक 2018-19: जब कोहली ने ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी उठाने वाले पहले भारतीय कप्तान के रूप में इतिहास रचा, तो लोग भूल गए कि पूरी सीरीज़ में पुजारा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. एडिलेड में 123 और 71, मेलबर्न में 106 और सिडनी में 193 रन बनाकर उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को थकाकर चूर कर दिया था.
पुजारा बनाम इंग्लैंड, साउथेम्प्टन 2018: 2018 में साउथेम्प्टन में बादल छाए हुए थे और गेंद स्विंग कर रही थी. जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड अपनी गेंदबाज़ी के चरम पर थे. पुजारा ने 257 गेंदों पर 132 रन बनाकर नाबाद रहते हुए भारत को 273 के स्कोर तक पहुंचाया.
क्रीज़ पर 11 घंटे, रांची 2017: मार्च 2017 में भारत ने रांची में ऑस्ट्रेलिया का सामना किया. ऑस्ट्रेलिया ने 451 रन बनाए. पुजारा का जवाब था - 525 गेंदों का सामना, 202 रन, और क्रीज़ पर 672 मिनट. पुजारा ने 11 घंटे से ज़्यादा बल्लेबाज़ी की. मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पुजारा की मौजूदगी का आनंद नहीं लिया.
चलते चलते
2,500 साल पुरानी खोपड़ियों से बनाए गये चेहरे
दक्षिणी भारतीय राज्य तमिलनाडु की एक यूनिवर्सिटी लैब में, शोधकर्ता 2,500 साल पुराने दांत से इनेमल खुरचने के लिए एक छोटी ड्रिल का उपयोग कर रहे हैं. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह दांत उन दो मानव खोपड़ियों में से एक का है, जिनका उपयोग उन्होंने यह समझने के लिए डिजिटल रूप से चेहरों को फिर से बनाने के लिए मॉडल के रूप में किया है कि इस क्षेत्र के शुरुआती निवासी कैसे दिखते होंगे. ये खोपड़ियां तमिलनाडु के कीलाडी के पास एक प्राचीन दफ़न स्थल कोंडगई से खुदाई में मिली थीं. कीलाडी एक पुरातात्विक स्थल है जो भारत में एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. राज्य के पुरातत्वविदों का कहना है कि कीलाडी के निष्कर्ष पहली बार संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत में भी एक प्राचीन स्वतंत्र सभ्यता मौजूद थी, जो अब तक उत्तर भारत तक सीमित शहरीकरण की कहानियों को चुनौती देती है. बीबीसी पर चेरलिन मोलन ने इस पर लंबी रिपोर्ट लिखी है.
मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के शोधकर्ता अब इन खोपड़ियों और अन्य सामानों से डीएनए निकाल रहे हैं ताकि यह बेहतर ढंग से समझा जा सके कि कीलाडी के निवासी कौन थे. चेहरे के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया मदुरै के शोधकर्ताओं द्वारा खोपड़ियों के 3डी स्कैन बनाने के साथ शुरू हुई. इन डिजिटल स्कैन को फिर ब्रिटेन में लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी की फेस लैब में भेजा गया. लैब के विशेषज्ञों ने खोपड़ियों के स्कैन में मांसपेशियों, मांस और त्वचा को जोड़ने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया. चेहरे के पुनर्निर्माण से पता चला है कि उनमें मुख्य रूप से प्राचीन पैतृक दक्षिण भारतीयों (Ancient Ancestral South Indians) की विशेषताएं हैं, साथ ही मध्य-पूर्व यूरेशियन और ऑस्ट्रो-एशियाटिक वंश के निशान भी हैं, जो वैश्विक प्रवासन और प्राचीन जनसंख्या समूहों के मिश्रण का संकेत देते हैं. विश्वविद्यालय में जेनेटिक्स विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जी. कुमारसन कहते हैं, "हम जो संदेश घर ले जा सकते हैं, वह यह है कि हम जितना महसूस करते हैं, उससे कहीं ज़्यादा विविध हैं, और इसका सबूत हमारे डीएनए में है."
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