‘पापा, प्लीज मुझे बचा लो’: लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों की परिवारों को आखिरी कॉल, छात्रों समेत 15 मरे
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के शवगृह (मर्च्युरी) के बाहर, माता-पिता और रिश्तेदारों ने लखनऊ के अलीगंज में एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग में मारे गए अपने प्रियजनों के साथ हुई आखिरी फोन कॉल को याद किया, जिसमें वे खुद को बचाने की भीख मांग रहे थे. मनीष साहू के अनुसार, यह आग सोमवार (22 जून 2026) दोपहर तीन मंजिला व्यावसायिक (कमर्शियल) इमारत में लगी. इसमें छात्रों समेत कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. जैसा कि आमतौर पर होता है, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में मौलश्री सेठ और भूपेंद्र पांडे की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों में से एक सुखमनी सिंह (23) थे, जो एक गेम डिजाइनर थे और इमारत की दूसरी मंजिल पर एक ग्राफिक्स एनिमेशन सेंटर में पढ़ा रहे थे. उनके पिता प्रभजोत सिंह ने बताया कि उनके बेटे ने दोपहर करीब 2 बजे फोन किया और मदद की गुहार लगाई. "वह रोते हुए बोल रहा था, 'पापा मुझे बचा लो'. उसने हमें बताया कि बाहर निकलने की कोई जगह नहीं बची है," यह बताते-बताते प्रभजोत रो पड़े.
एक अन्य पीड़ित जॉयनील चक्रवर्ती (27) भी इसी सेंटर में काम करते थे. उनके रिश्तेदार विश्वनाथ सरकार ने बताया कि जॉयनील ने दोपहर करीब 2 बजे लखनऊ में रहने वाली अपनी चाची को फोन किया, जिसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा, "जॉयनील ने दोपहर करीब 2 बजे घबराहट की स्थिति में अपनी चाची को फोन किया और कहा—'चाची, हम फंस गए हैं, किसी तरह बचाओ'."
रिश्तेदारों ने बताया कि वे दोपहर करीब 3 बजे मौके पर पहुंचे और उनका मानना है कि अगर दीवार तोड़ने का फैसला पहले ले लिया गया होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं. विश्वजीत ने कहा, "उन्होंने हमारे सामने दीवार तोड़ी. उस समय हम फोन पर जॉयनील से बात ही कर रहे थे."
तीसरे पीड़ित की पहचान सूरज सिंह के रूप में हुई है, जो उसी सेंटर में काम करते थे और जॉयनील के साथ रहते थे. विश्वजीत ने बताया कि सूरज के माता-पिता से संपर्क नहीं हो सका क्योंकि उनके फोन बंद थे.
अब तक चौदह पीड़ितों की पहचान हो चुकी है: जॉयनील, शाहजान, मोहम्मद अब्दुल, संयम, सागर, नीलेश, आदित्य, अनामिका, मोहम्मद अम्मार, सूरज शाह, भविष्य, सुखमनी, ज्योति, सोमालिका और अनन्या.
केजीएमयू की कुलपति (वाइस चांसलर) सोनिया नित्यानंद ने बताया कि अस्पताल में 24 लोगों को लाया गया था, जिनमें से 15 को मृत घोषित कर दिया गया. उन्होंने कहा, "शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे... उन सभी की मौत दम घुटने के कारण हुई. पोस्टमार्टम किया जा रहा है."

