एसआईआर में हैदराबाद के करीब 19.4 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए चिह्नित, 40.7% मुस्लिम
‘सबर इंस्टीट्यूट और कॉन्स्टिट्यूशनल गार्जियंस फोरम’ के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, हैदराबाद की 15 विधानसभा सीटों में करीब 19.4 लाख मतदाताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाने के लिए चिह्नित किया गया है. इनमें 7,89,571 यानी 40.7% मतदाता मुस्लिम हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, 4,094 मतदान केंद्रों के 19,41,444 मतदाताओं के नाम एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लीकेट श्रेणियों में शामिल हैं. यह जनवरी 2023 की मतदाता सूची के मुकाबले करीब 46.1% है. हालांकि, बाद में मतदाता सूची में वृद्धि हुई थी, इसलिए वास्तविक अनुपात इससे कम हो सकता है.
15 विधानसभा क्षेत्रों में चिह्नित मतदाताओं की संख्या 2023 के चुनाव में जीत के अंतर से अधिक है. मालकपेट में 1,47,799 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए चिह्नित हैं, जबकि 2023 में कुल 1,32,024 वोट पड़े थे. याकूतपुरा में 1,54,982 नाम चिह्नित किए गए, जबकि वहां 1,40,434 वोट पड़े थे. रिपोर्ट के अनुसार, सभी सीटों पर यह संख्या 2023 में पड़े कुल वोटों के 89% के बराबर है.
रिपोर्ट में 13,45,333 यानी 69.3% मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है. वहीं 3,40,455 यानी 17.5% को "पता नहीं चलने/अनुपस्थित" और 99,264 को दूसरी जगह पहले से पंजीकृत बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, ये श्रेणियां अधिक जांच की मांग करती हैं क्योंकि इनमें दस्तावेजी आधार अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है.
मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 7,89,571 बताई गई है, लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि चुनावी आंकड़ों में धर्म के आधार पर मतदाताओं का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है. इसलिए मुस्लिम मतदाताओं की पहचान नामों के आधार पर की गई है और इस आंकड़े को अनुमान माना जाना चाहिए. रिपोर्ट यह भी कहती है कि आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि मुस्लिम मतदाताओं को जानबूझकर निशाना बनाया गया.
मुस्लिम मतदाताओं में 19.8% को "पता नहीं चलने/अनुपस्थित" और 7.6% को दूसरी जगह पहले से पंजीकृत बताया गया है, जबकि गैर-मुस्लिम मतदाताओं में ये आंकड़े क्रमशः 16% और 3.4% हैं. पुराने हैदराबाद के इलाकों में यह अंतर अधिक दिखाई देता है. चारमीनार में 94,174 हटाए जाने वाले नामों में 36,086 यानी 38.3% मतदाताओं को "पता नहीं चलने/अनुपस्थित" श्रेणी में रखा गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की कुल हटाए जाने वाली सूची में हिस्सेदारी 47.8% है. मुस्लिम मतदाताओं में यह हिस्सेदारी 49.5% और गैर-मुस्लिम मतदाताओं में 46.7% है. इसके अलावा 165 ट्रांसजेंडर मतदाताओं के नाम भी हटाने के लिए चिह्नित किए गए हैं.
रिपोर्ट ने प्रवासी मजदूरों, शादी के बाद स्थान बदलने वाली महिलाओं, छात्रों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और तीसरे लिंग के मतदाताओं को दस्तावेज आधारित सत्यापन में अधिक कठिनाई झेलने वाले समूहों में शामिल किया है. ऐसे लोगों के लिए अपील की प्रक्रिया में दस्तावेज जुटाना, सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना और मजदूरी का नुकसान बड़ी बाधा बन सकता है.
सबर इंस्टीट्यूट ने कहा है कि मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, आसान अपील प्रक्रिया, कानूनी सहायता और गलत तरीके से नाम हटाए जाने से सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए. रिपोर्ट ने मतदान केंद्र स्तर पर नाम हटाने की जांच, अपील और बहाली के आंकड़ों की समीक्षा तथा एसआईआर में इस्तेमाल होने वाले स्वचालित उपकरणों और एल्गोरिदम की स्वतंत्र जांच की मांग की है.

