निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ने से अप्रैल में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $28.38 बिलियन हुआ
रुपया गिरता जा रहा है और साथ में भारत का व्यापारिक घाटा भी बढ़ रहा है. शिवांगी आचार्य ने शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि अप्रैल में भारत का व्यापारिक घाटा बढ़कर 28.38 बिलियन डॉलर हो गया. मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण शिपमेंट में बाधाएं आ रही हैं और ऊर्जा आयात बाधित होने के साथ-साथ महंगा भी हो गया है.
महीनों से चल रहे ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका है, जिससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है, मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और भारत के भुगतान संतुलन पर बुरा असर पड़ सकता है. इन चिंताओं के बीच नीति निर्माताओं को कई हस्तक्षेप करने पड़े हैं, क्योंकि रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया है, जिससे यह इस साल एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है. ‘रॉयटर्स’ के एक पोल के अनुसार, अर्थशास्त्रियों ने व्यापार घाटे के 26.5 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया था, जबकि मार्च में यह 20.67 बिलियन डॉलर था.
आंकड़ों से पता चला है कि भारत का व्यापारिक निर्यात मार्च के 38.92 बिलियन डॉलर से बढ़कर 43.56 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात 59.59 बिलियन डॉलर से बढ़कर 71.94 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में सेवाओं का निर्यात 37.24 बिलियन डॉलर और आयात 16.66 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. बैंकों द्वारा खरीद बंद करने के बाद अप्रैल में भारत का सोना आयात कम रहने की संभावना है—शिपमेंट के लगभग 30 साल के निचले स्तर तक गिरने के आसार हैं. इससे कुल व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिली होगी, हालांकि विस्तृत आंकड़ों का अभी इंतजार है.

