महाराष्ट्र एसआईआर: अधिक मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर 30% मतदाताओं के नाम हटे 

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक,  के मुताबिक, महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 38 विधानसभा सीटों पर लगभग 30% मतदाताओं के नाम प्रारंभिक मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं. इन सीटों पर मुस्लिम आबादी 20% से अधिक है.

इन 38 विधानसभा क्षेत्रों में 37 लाख से अधिक मतदाताओं के गणना प्रपत्र “एकत्र नहीं किए जा सके” की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं. यह पिछले मतदाता आधार का 29.7% है. पूरे महाराष्ट्र में प्रारंभिक मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं का औसत 21.1% है, जो दो करोड़ से अधिक लोगों के बराबर है.

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 29 विधानसभा क्षेत्रों में नाम हटाए जाने की औसत दर 19.6% रही, जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 25 सीटों पर यह दर 13.2% थी. बाहर किए गए मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, अनुपस्थित, दोहरी प्रविष्टि या “अन्य” श्रेणी में रखा गया है. “अन्य” में वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने गणना प्रपत्र भरने से इनकार किया या जिनके प्रपत्र एकत्र नहीं हो सके.

घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सबसे अधिक नाम हटे

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पुणे जिले में सबसे अधिक 28.6 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए. इसके बाद ठाणे में 28.5 लाख और मुंबई उपनगर में 26.5 लाख नाम हटाए गए.

मुंबई महानगर क्षेत्र की भिवंडी पूर्व सीट पर 49.1% मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया. भिवंडी पश्चिम में यह दर 44.7% और कलवा-मुंब्रा में 42.9% रही. चांदीवली में, जहां मुस्लिम आबादी 27.6% है, 41.4% मतदाताओं को “एकत्र नहीं किए जा सके” की श्रेणी में रखा गया. सायन-कोलीवाड़ा और पुणे कैंटोनमेंट में भी यह दर 40% से अधिक रही.

हालांकि, ये आंकड़े यह साबित नहीं करते कि मुस्लिम मतदाताओं को अनुपात से अधिक संख्या में हटाया गया है. इसके लिए हटाए गए मतदाताओं की धार्मिक पहचान से जुड़े विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होगी.

मालेगांव मध्य में मुस्लिम आबादी 78.4% है और यहां 23.4% मतदाताओं के नाम हटाए गए. मानखुर्द शिवाजी नगर में मुस्लिम आबादी 53% है, जबकि नाम हटाए जाने की दर 42.3% रही. भिवंडी पूर्व में मुस्लिम आबादी 51% और नाम हटाए जाने की दर 49.1% रही.

इसके विपरीत, मुस्लिम आबादी 20.4% वाली मलकापुर सीट पर केवल 7.6% नाम हटाए गए. रावेर, लातूर शहर और बालापुर में यह दर लगभग 10% से 11.7% के बीच रही.

एसआईआर पर उठ रहे सवाल

महाराष्ट्र एसआईआर के तीसरे चरण में शामिल 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से एक है. इसका पहला चरण 2025 में बिहार में हुआ था. बाद में इसे 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया.

आलोचकों को आशंका है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हट सकते हैं और इससे चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं. मई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की कानूनी वैधता बरकरार रखी थी, लेकिन स्पष्ट किया था कि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया के आधार पर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं कर सकता.

अब सवाल यह है कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले कितने नाम वापस जोड़े जाते हैं और कितने लोगों को अपने नाम दर्ज कराने या आपत्ति दाखिल करने का अवसर मिलता है.

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