महाराष्ट्र के 74% हिस्से में सूखे जैसी स्थिति घोषित

‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को मानसून में कम बारिश के कारण राज्य के लगभग 74% तालुकों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की. सरकार ने 358 में से 265 तालुकों में फसल नुकसान का आकलन करने और किसानों के लिए राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं.

सरकारी आदेश के तहत प्रभावित क्षेत्रों में 12 तरह की राहत उपलब्ध कराई जा सकेगी. इनमें भूमि राजस्व की वसूली से छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत और पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर उपलब्ध कराना शामिल है.

यह आदेश राज्य के 34 में से 32 जिलों के तालुकों पर लागू होगा. इनमें अहिल्यानगर, अमरावती, बीड, भंडारा, गढ़चिरौली, जलगांव, लातूर, नागपुर, नांदेड़, नंदुरबार, परभणी, पुणे, रत्नागिरी, सांगली, सिंधुदुर्ग, सोलापुर, वर्धा और यवतमाल शामिल हैं.

2026 की सूखा प्रबंधन संहिता के अनुसार, मानसून के दौरान लगातार कम से कम 21 दिनों तक बारिश न होना ‘ट्रिगर-1’ की स्थिति मानी जाती है. सरकार ने जिन 265 तालुकों को राहत आदेश में शामिल किया है, वहां यह मानदंड पूरा हुआ है.

कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश

1 जून से 22 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में औसतन 787.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 953.2 मिलीमीटर है. सोलापुर जिले में सामान्य से 57% कम बारिश हुई. अहिल्यानगर में बारिश की कमी 42%, नंदुरबार में 34% और सांगली में 24% दर्ज की गई.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, महाराष्ट्र से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 5 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है. राज्य में कुल बारिश सामान्य से 17% कम है, जबकि देशभर में यह कमी 15% है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो परिस्थितियां बनी हुई हैं. इस दौरान मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक रहता है. अल नीनो को भारत में कमजोर मानसूनी बारिश से जोड़ा गया है. मौसम विभाग ने अगस्त के अंत में इन परिस्थितियों के आने वाले महीनों में और मजबूत होने की संभावना जताई थी.

सरकार के आदेश से प्रभावित तालुकों में फसल नुकसान का आकलन और राहत उपायों की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी.

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