एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में मतदाता सूचियों का ‘एसआईआर’ शामिल, चुनाव आयोग की तारीफ
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अपनी संशोधित कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को शामिल किया है. पुस्तक में इसे एक ऐसे तंत्र के रूप में वर्णित किया गया है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न छूटे और कोई भी अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल न हो. पाठ्यपुस्तक में फर्जी खबरों, गलत सूचनाओं और डराने-धमकाने जैसी चुनौतियों के बावजूद निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की सराहना भी की गई है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, इसे पुस्तक में शामिल किए जाने का फैसला, राज्य विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में एसआईआर अभियान शुरू होने के एक साल बाद आया है. यह अभियान अब तक 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है, जिसके तहत मतदाता सूचियों से लगभग छह करोड़ नाम हटाए गए हैं. इसने एक राजनीतिक विवाद को भी जन्म दिया है, जहाँ विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है.
पाठ्यपुस्तक के "सोसाइटी को समझना: भारत और उससे परे" (Understanding Society: India and Beyond) नामक खंड में लिखा है:
"चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भी आयोजित करता है, जिसमें मतदाता सूचियों को अपडेट करना, सत्यापित करना और सुधारना शामिल है. एसआईआर के माध्यम से, यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो. यह अभियान सभी मतदाताओं, विशेष रूप से उन युवा मतदाताओं को जोड़ने को सुनिश्चित करता है जो अभी-अभी 18 वर्ष के हुए हैं और जागरूकता की कमी या किसी अन्य कारण से छूट सकते हैं."
पाठ्यपुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया मृत्यु, निवास स्थान में परिवर्तन, दोहरी प्रविष्टि (डुप्लीकेट नाम होने) या स्थायी रूप से लापता होने के कारण मतदाताओं के नाम भी हटाती है. पुस्तक के अनुसार, "चुनाव आयोग संशोधित मतदाता सूची के खिलाफ दावे या आपत्तियां उठाने का समय देता है और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने से पहले इन दावों और आपत्तियों का निपटारा करता है."
विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल 24 जून को बिहार में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एसआईआर अभियान शुरू हुआ था. इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची छोटी हो गई और लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए. इस दौरान विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग दस्तावेजों के मुद्दों पर मतदाताओं को बाहर करके भाजपा के इशारे पर काम कर रहा था.
नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफ) के अनुरूप तैयार की गई इस संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया के पैमाने और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में निर्वाचन आयोग की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है.
कक्षा 9 की पुरानी पाठ्यपुस्तक में चुनावी राजनीति के अध्याय में केवल यह उल्लेख था कि "हर पांच साल में सूची का पूर्ण संशोधन होता है और ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि यह अपडेट रहे." जबकि, संशोधित अध्याय में कहा गया है:
"विविध क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में फैले 96.8 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के साथ भारत का चुनावी अभियान दुनिया के अन्य हिस्सों से अद्वितीय और अलग है."
इसमें आगे कहा गया है कि चुनाव आयोग इस विशाल अभियान को स्वायत्त (आजाद) रूप से संभालता है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि देश भर में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आयोजित हों. पुस्तक के अनुसार, "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में कई चुनौतियों के बावजूद, चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि चुनाव कई स्तरों पर निष्पक्ष रूप से संपन्न हों."
"स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए चुनौतियाँ" शीर्षक वाले एक समर्पित खंड में जोड़ा गया है, "भारत में, विविध क्षेत्रों और सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं में फैले हजारों मतदान केंद्रों और सैकड़ों राजनीतिक दलों के साथ 96.8 करोड़ मतदाताओं के लिए चुनाव कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है."

