‘खीरे की खेती’ के लिए भाजपा के मंत्री ने अपने ही मंत्रालय से ली 99 लाख रुपये की सब्सिडी
‘इंडियन एक्सप्रेस’ में हरिकिशन शर्मा की रिपोर्ट है कि, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके राजस्थान स्थित खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए 99.03 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली है. यह सब्सिडी उसी मंत्रालय के अधीन संचालित योजना के तहत दी गई, जिसमें वह पदेन (एक्स-ऑफिसियो) उपाध्यक्ष भी हैं.
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित चौधरी के फार्म पर लगे बोर्ड में साफ लिखा है कि परियोजना को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की ओर से 99.60 लाख रुपये की सहायता मिली है. बोर्ड पर यह भी दर्ज है कि परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है, जिसमें 1.49 करोड़ रुपये का एचडीएफसी बैंक से ऋण लिया गया और शेष राशि स्वयं निवेश की गई.
चौधरी ने 15 अप्रैल 2025 को इस परियोजना के लिए आवेदन किया था और महज 14 दिन बाद 29 अप्रैल को इसे प्रारंभिक मंजूरी मिल गई. मार्च 2026 में परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद 30 मार्च को 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक ऋण खाते में जमा कर दी गई.
यह योजना क्या है?
"बागवानी फसलों के उत्पादन एवं कटाई के बाद प्रबंधन के माध्यम से व्यावसायिक बागवानी का विकास" राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना का हिस्सा है.
इस योजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना है. इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और आठ प्रकार के फूलों की खेती पर परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत या एक परिवार को अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है.
सब्सिडी पाने की प्रमुख शर्तें क्या हैं?
आवेदक के पास कम से कम 4,000 वर्गमीटर भूमि का स्वामित्व या 10 वर्ष की पंजीकृत लीज होनी चाहिए. परियोजना के लिए टर्म लोन लेना अनिवार्य है और परियोजना को पहली ऋण किस्त मिलने के 18 महीने के भीतर पूरा करना होता है.
परियोजना पूरी होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी सीधे ऋण खाते में जमा की जाती है. साथ ही, लिया गया ऋण प्रस्तावित सब्सिडी से अधिक होना चाहिए.
सब्सिडी कैसे मिलती है?
पहले चरण में आवेदक एनएचबी पोर्टल पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, भूमि रिकॉर्ड और बैंक से स्वीकृत ऋण दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करता है.
इसके बाद एनएचबी, बैंक, राज्य बागवानी विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम परियोजना स्थल का निरीक्षण करती है.
तीसरे चरण में एनएचबी की परियोजना अनुमोदन समिति अंतिम मंजूरी देती है. इस समिति में कृषि मंत्री या कृषि राज्य मंत्री शामिल नहीं होते.
अंतिम चरण में परियोजना पूरी होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे आवेदक के ऋण खाते में भेज दी जाती है.
मंत्री की भूमिका और विवाद
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की वेबसाइट के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष और कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं. हालांकि परियोजना अनुमोदन समिति में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती, लेकिन बोर्ड की शीर्ष संरचना में शामिल होने के कारण इस मामले को लेकर हितों के टकराव के सवाल उठे हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में भागीरथ चौधरी से सवाल पूछे कि क्या अपने ही मंत्रालय की योजना से सब्सिडी लेना हितों के टकराव का मामला है. मंत्री की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया. उनके कार्यालय ने केवल यह कहा कि परियोजना से जुड़ी जानकारी सरकार को उपलब्ध करा दी जाएगी.
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 467 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत 144 करोड़ रुपये थी. इनमें 60 परियोजनाओं को 50 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली.

