भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ तकरार और आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है.
कपूर ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई जहाँ अरुणाचल में कई स्थानों पर सैनिकों का आमना-सामना हुआ और यह स्थिति अभी भी जारी है."
विजेयता सिंह के मुताबिक, इस साल जुलाई के बाद से पूर्वोत्तर सीमा पर बढ़ते तनाव के पैमाने की यह पहली आधिकारिक पुष्टि है.
आईटीबीपी कर्मियों के लिए आयोजित एक वार्षिक सम्मान समारोह में कपूर ने कहा कि अरुणाचल सीमा पर जारी इस तकरार में आईटीबीपी कमांडो सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
राजस्थान के अलवर स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कपूर ने कहा, "हमारे नव-गठित 'शौर्य कमांडो' ने इसमें अनुकरणीय भूमिका निभाई. आईटीबीपी का गठन एक पर्वतीय गुरिल्ला बल के रूप में किया गया था और 2004 में हमें चीन सीमा की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था. हमें अपने मूल कार्य को छोड़ने की आवश्यकता नहीं है; सेना से अलग, एक विशेष उच्च-ऊंचाई पर्वतीय युद्ध बल (हाई-ऑल्टीट्यूड माउंटेन फाइटिंग फोर्स) तैयार किया जा रहा है. जल्द ही हमारे पास शौर्य कमांडो की एक पूरी बटालियन होगी; अत्यधिक ऊंचाई पर तैनाती ही हमारी ताकत है."
चीनी सैनिक डटे हुए हैं
सरकारी सूत्रों ने बताया कि जुलाई के अंत से भारत और चीन अरुणाचल प्रदेश में ताकसिंग के पास असाफिला में आमने-सामने की स्थिति में हैं. चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग सर्कल में माजा कंपनी ऑपरेटिंग बेस के पास, भारत द्वारा मानी जाने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 6 से 7 किलोमीटर के दायरे में ऊंचाई पर अपने तंबू लगा लिए हैं.
जुलाई में नियमित गश्त के दौरान, भारतीय और चीनी सैनिक माजा के पास आमने-सामने आ गए थे. संक्षिप्त तकरार के बाद दोनों पक्ष पीछे हट गए, लेकिन चीनी पीएलए कुछ दिनों बाद बड़ी संख्या में वापस आई और भारत के एलएसी दावे के लगभग 6-7 किमी अंदर तंबू गाड़ दिए.
जवाब में भारत ने भी सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ा दी है.
यह स्थिति तब भी बनी हुई है जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 11 से 13 सितंबर तक भारत द्वारा आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया था और दोनों देशों के बीच जुलाई से अब तक तीन उच्च स्तरीय सीमा वार्ताएं हो चुकी हैं.
भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक 6 अगस्त को आयोजित की गई थी. इसके बाद 26 अगस्त को बीजिंग में सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच 25वें दौर की वार्ता हुई, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने किया. 6 सितंबर को, अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर पूर्वी क्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित की गई.
इस बीच विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कपूर के बयान का जवाब देते हुए कहा, "जैसा कि हमने अतीत में भी देखा है, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब प्रभावित होती है जब चीनी बल स्थापित गश्ती तौर-तरीकों से भटकते हैं." दोनों पक्ष बकाया मुद्दों को सुलझाने और "वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलतफहमी और गलत आकलन से बचने" के लिए "मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र" का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं.
इससे पहले कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, "एक तरफ जहां स्वघोषित 'विश्वगुरु' द्वारा चीन को योजनाबद्ध तरीके से रियायतें दी जाना जारी है, वहीं आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ हाल ही में हुए आमने-सामने के मुकाबलों में अपने जवानों के प्रदर्शन की सराहना की है—और यह बिल्कुल सही भी है, जिस पर प्रधानमंत्री और उनके तंत्र की ओर से पूरी तरह से चुप्पी छाई हुई है." रमेश ने कहा, “भारत आज भी 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की उस कुख्यात क्लीन चिट की कीमत चुका रहा है. हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था: “ना कोई वहाँ हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्ज़े में है.”

