हत्याओं के लिए ‘माफ़ी’ के बावजूद मणिपुर में नागा-कुकी तनाव अभी भी चरम पर क्यों है?
पिछले महीने नागा समुदाय के छह ग्रामीणों की हत्या के लिए कुकी ज़ो काउंसिल (केज़ेडसी) द्वारा 25 जून को मांगी गई "माफ़ी" को हिंसाग्रस्त मणिपुर में नागाओं और कुकियों के बीच जारी तनाव को कम करने के एक प्रयास के रूप में देखा गया था.
लेकिन दोनों समुदायों के बीच तनाव अभी भी बहुत अधिक है. नागा-बहुल सेनापति जिले के कम से कम चार प्रभावशाली नागा संगठनों ने सोमवार को फैसला किया है कि जब तक कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले में छह नागाओं के अपहरण और हत्या के मामले में न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे अपने आंदोलन को और "मजबूत" करेंगे.
सुमीर कर्माकर की रिपोर्ट के अनुसार, एक संयुक्त बैठक में, नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (एनपीओ), ट्राइब्स होहोस, सेनापति जिला महिला संघ और सेनापति जिला छात्र संघ ने आंदोलन की "सख्ती से" निगरानी करने का निर्णय लिया ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के माध्यम से कांगपोकपी के लिए होने वाली अंतर-जिला वस्तुओं की आपूर्ति को रोका जा सके. यह "आर्थिक नाकेबंदी" नागाओं की एक प्रभावशाली शीर्ष संस्था, यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) द्वारा 17 जून को लागू की गई थी—उन छह लोगों के अपहरण और उसके बाद हुई हत्या के तीन दिन बाद.
मणिपुर के एक नागा नेता ने बताया, "माफ़ करना ईसाई धर्म का एक अभिन्न अंग है, लेकिन केज़ेडसी द्वारा मांगी गई माफ़ी कुकी संगठनों द्वारा दिखाए गए क्रूर और अमानवीय रवैये के कारण पूरी तरह से अस्वीकार्य है. चर्च निकायों और सरकार की अपीलों के आधार पर, हमने मानवीय आधार पर अगवा किए गए 14 कुकियों को रिहा कर दिया था. लेकिन उन्होंने बदले में ऐसा कुछ नहीं किया और अगले दिन हमारे छह ग्रामीणों के शव मिले. उन्होंने न केवल हमारे छह लोगों की जान ली, बल्कि बर्बरतापूर्वक उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए. इसलिए, इस हत्याकांड में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार करके और इसमें संलिप्त हथियारबंद समूह केएनएफ-पी के खिलाफ कार्रवाई करके न्याय दिया जाना चाहिए."
नागा और कुकी दोनों ही ईसाई हैं, और चर्च निकायों ने दोनों समुदायों से मानवीय आधार पर बंधकों को रिहा करने की अपील की थी.
यूएनसी सरकार की कथित निष्क्रियता से भी नाराज है. उसकी मांगें हैं: केएनएफ (पी) को एक आतंकवादी समूह घोषित किया जाए, कुकी सशस्त्र समूहों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (कदमों को रोकने/संघर्ष विराम) समझौते को रद्द किया जाए, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन (जो कुकी समुदाय से हैं) का इस्तीफा लिया जाए.
नागा संगठनों ने किपगेन के पति के नेतृत्व वाले एक सशस्त्र समूह केएनएफ (पी) की संलिप्तता का आरोप लगाया है. हालांकि, किपगेन ने इस समूह की संलिप्तता से इनकार किया है.
यूएनसी के एक नेता ने को बताया कि जब तक केंद्र और मणिपुर सरकार द्वारा उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक "आर्थिक नाकेबंदी" नहीं हटाई जाएगी. उन्होंने कहा, "कुकी समूहों को हमारी नाकेबंदी पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि मैतेई समुदाय के साथ संघर्ष के दौरान उन्होंने भी इसी तरह राजमार्गों को जाम किया था. उनके द्वारा लगाई गई नाकेबंदी के कारण नागाओं को भी नुकसान उठाना पड़ा था."
इस बीच, कांगपोकपी में कुकी संगठनों के एक मंच 'कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी' ने नाकेबंदी को हटाने के लिए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की. समिति का कहना है कि इस नाकेबंदी ने कांगपोकपी में आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसकी सीमाएं एक तरफ मैतेई-बहुल इंफाल घाटी और दूसरी तरफ नागा-बहुल सेनापति जिले से लगती हैं. कांगपोकपी में पहले से ही आवश्यक सामानों की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है.

