देवता नाराज़ हैं, ऐसा सोचता रहा पूरा गांव. फिर एक-एक कर जुड़ने लगीं आठ मौतों की कड़ियां 

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बलौदाबाज़ार ज़िले के छोटे से गांव खरवे में पिछले पाँच महीनों के दौरान हुई आठ रहस्यमयी मौतों ने पूरे इलाके को दहला दिया. शुरुआत में ग्रामीणों ने इसे भगवान का प्रकोप, अशुभ संकेत और प्राकृतिक मौतें मान लिया. गांव में पूजा-पाठ कराए गए, बैगा और गुनिया से सलाह ली गई, लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि इन मौतों के पीछे गांव का ही एक किराना दुकानदार सिलसिलेवार हत्याओं को अंजाम दे रहा था.

22 जून को पुलिस ने 46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार किया. पुलिस का आरोप है कि उसने फरवरी से मई के बीच अपने आठ परिचितों को चूहे मारने वाले ज़हर "सुहागा" को देसी शराब में मिलाकर पिलाया, जिससे शराब पीने के कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई.

एक-एक कर होती रहीं मौतें

पहली मौत 7 फरवरी को 58 वर्षीय बद्री पटेल की हुई. वह रामसहाय के साथ शराब पीकर घर लौटे थे और कुछ घंटे बाद अपने आंगन में मृत पाए गए. डॉक्टरों ने इसे हार्ट अटैक मान लिया.

इसके बाद 20 फरवरी को बुथालू साहू, 2 मार्च को पूर्व सरपंच छतूराम साहू और 12 मार्च को बुधराम जायसवाल की भी इसी तरह मौत हो गई. सभी ने मौत से पहले रामसहाय के साथ शराब पी थी, लेकिन किसी ने इन घटनाओं को आपस में जोड़कर नहीं देखा.

31 मार्च को 38 वर्षीय विनोद साहू की मौत ने ग्रामीणों को पहली बार सोचने पर मजबूर किया. विनोद अपेक्षाकृत युवा और स्वस्थ थे. वह सुबह नहाने के बाद रामसहाय के साथ शराब पीकर घर लौटे और करीब 15 मिनट बाद उनकी मौत हो गई. इसके बावजूद गांव वालों ने इसे किसी बीमारी या दुर्भाग्य का परिणाम माना.

देवताओं के प्रकोप की आशंका

लगातार हो रही मौतों से गांव में भय का माहौल बन गया. ग्रामीणों को लगा कि गांव पर कोई दैवी संकट आ गया है. अप्रैल में गांव में दो बार विशेष पूजा कराई गई. बैगा और गुनिया से भी सलाह ली गई ताकि कथित अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सके.

इसी दौरान 28 अप्रैल को गजानन मांझी और 30 अप्रैल को चैतूराम साहू की भी मौत हो गई. इसके बावजूद किसी ने यह नहीं सोचा कि सभी घटनाओं के पीछे कोई एक व्यक्ति हो सकता है.

सातवीं मौत के बाद खुला राज

14 मई को 40 वर्षीय महेतरू साहू की मौत निर्णायक मोड़ साबित हुई. वह पूरी तरह स्वस्थ थे और नहाने के लिए नदी गए थे. प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें रामसहाय के साथ बातचीत करते और शराब पीते देखा था. कुछ ही देर बाद वह नदी किनारे गिर पड़े और उनकी मौत हो गई.

इसके बाद गांव में चर्चा शुरू हुई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. 23 वर्षीय कार्तिक कुम्हार ने बताया कि कुछ दिन पहले उसने रामसहाय द्वारा दी गई शराब पी थी, जिसके मात्र 20 सेकंड बाद उसे उल्टियां हुईं और वह कई घंटों तक बेहोश रहा. उसकी जान बच गई, लेकिन इसी घटना ने ग्रामीणों को सभी मौतों के बीच समानता समझने में मदद की.

6 जून को गांव वालों ने सामूहिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आठ अलग-अलग एफआईआर दर्ज हुईं और जांच शुरू हुई.

पुलिस जांच में क्या सामने आया

पुलिस के अनुसार रामसहाय अपने परिचितों को स्थानीय देसी शराब "गोवा" पिलाता था और उसमें पहले से चूहे मारने वाला ज़हर मिला देता था. कई बार वह शराब मुफ्त में भी देता था.

जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के निशाने पर अधिकतर उसके नियमित शराब साथी थे. हत्या के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें ज़मीन का विवाद, पुराने झगड़े, ताने, कर्ज़ और तांत्रिक गतिविधियों को लेकर संदेह जैसी बातें शामिल हैं. पुलिस का दावा है कि आरोपी को लगता था कि उसने गांव के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन उसे कभी वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था.

जांच के दौरान सात शवों को कब्र से निकालकर उनका पोस्टमार्टम कराया गया है. फोरेंसिक विशेषज्ञों ने नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनमें "सुहागा" ज़हर के अवशेष मौजूद हैं या नहीं.

गांव का सबसे भरोसेमंद आदमी ही निकला आरोपी

रामसहाय गांव के पुराने और सम्मानित परिवार से आता है. वह गांव की पहली किराना दुकान चलाता था और धार्मिक प्रवृत्ति का माना जाता था. ग्रामीण बताते हैं कि उसने वर्षों पहले गांव में दो छोटे मंदिर भी बनवाए थे. लोगों के साथ उसका उठना-बैठना सामान्य था और वह अक्सर शाम को दोस्तों के साथ बैठकर शराब पीता दिखाई देता था.

हालांकि कुछ ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी से उसका विवाद हो जाता था तो वह उससे हमेशा के लिए संबंध तोड़ लेता था.

अब भी सदमे में है गांव

रामसहाय की गिरफ्तारी के बाद उसका परिवार गांव छोड़ चुका है. उसकी दुकान और घर पर ताला लगा हुआ है. गांव की ज़िंदगी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन पीपल के उसी पेड़ के नीचे बैठने वाले ग्रामीण आज भी इन मौतों को याद कर सिहर उठते हैं.

जो गांव कभी इन मौतों को भगवान का प्रकोप मान रहा था, अब उसे एहसास हुआ है कि उसके बीच रहने वाला एक परिचित चेहरा ही कथित तौर पर सिलसिलेवार हत्याओं का जिम्मेदार था. पुलिस अब फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले को अदालत में साबित करने की तैयारी कर रही है.

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