क्या जाँच की भी जाँच होनी चाहिए? राम मंदिर चढ़ावा चोरी की चार्जशीट पर उठते गंभीर सवाल, चंपत पर चुप्पी

अयोध्या में राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और धन गबन के मामले में एक विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत 59-पेज की चार्जशीट की सारांश रिपोर्ट यह खुलासा करती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस जहाँ एक सुनियोजित 'साजिश' का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है, वहीं वह यह समझाने में विफल रही है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न केवल नकद, बल्कि सिक्के और आभूषणों सहित चढ़ावे की इतनी बड़ी चोरी से पूरी तरह बेखबर कैसे रहे.

‘द वायर’ के लिए आकांक्षा कुमार की रिपोर्ट बताती है कि चार्जशीट का सारांश, ट्रस्ट के विवादित पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका पर मौन है. इसमें कहा गया है कि चंपत राय को "4 जून, 2026 को एक व्हाट्सएप वीडियो संदेश मिला था जिसमें गणना कक्ष (काउंटिंग चैंबर) से लगे शौचालय के अंदर ₹2,25,000 की नकद गड्डियाँ मिली थीं." इस चोरी का वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद चंपत राय ने कोई शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई, यह एक ऐसा सवाल है जो चार्जशीट में पूछा ही नहीं गया है.

इस मामले में एकमात्र प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) 25 जून, 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट के एक सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी. यह चंपत राय के व्हाट्सएप नंबर पर आपत्तिजनक वीडियो भेजे जाने के 21 दिन बाद किया गया था.

अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एकमात्र एफआईआर दर्ज होने के लगभग तीन महीने बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने 23 सितंबर, 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अदालत (एंटी करप्शन कोर्ट) के समक्ष 74,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की.  अयोध्या की अदालत ने एसआईटी द्वारा प्रस्तुत इस चार्जशीट पर संज्ञान भी ले लिया है.

संलग्नकों के साथ चार्जशीट का आकार लगभग 170 गवाहों के बयानों सहित 74,000 पन्नों का है. संलग्नकों के अलावा पुलिस केस डायरी के कितने पन्ने इस 74,000 पन्नों की चार्जशीट का हिस्सा हैं, यह स्पष्ट नहीं है.

जाँच पर अपनी समापन टिप्पणियों के एक हिस्से के रूप में, चार्जशीट सारांश में मंदिर के गणना कर्मचारियों में शामिल सभी आठों आरोपियों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि "इन सभी व्यक्तियों ने, एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत, आपराधिक विश्वासघात और दान के पैसे का गबन किया है. चूंकि आरोपियों को दान की राशि की गिनती और छंटाई का काम सौंपा गया था, इसलिए उनके पास उक्त राशि का वैध कब्ज़ा/नियंत्रण था, जिसका आरोपियों द्वारा धोखाधड़ी से दुरुपयोग किया गया और वे उस पैसे को चुराकर व्यक्तिगत लाभ के लिए कहीं और स्थानांतरित करने में शामिल थे."

चार्जशीट सारांश के अध्ययन से पता चलता है कि चढ़ावा राशि की गणना कर्मचारियों को सौंपे जाने के बाद ट्रस्ट द्वारा किए जाने वाले अपेक्षित कार्य (यानी नोटों की गड्डियाँ बनाना, जिन्हें फिर सुरक्षा के लिए भारतीय स्टेट बैंक को सौंपा जाता था) को इसमें निर्दिष्ट नहीं किया गया है. यह आसानी से ट्रस्ट के वरिष्ठ कर्मचारियों के साथ-साथ दैनिक रोस्टर ड्यूटी पर मौजूद बैंक कर्मचारियों की निगरानी की प्रमुख भूमिका और जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर देता है.

आकांक्षा ने इस मामले के विभिन्न हितधारकों से बात की, जिनमें सभी आठों आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले बचाव पक्ष के वकील, राम जन्मभूमि आंदोलन और बाबरी मस्जिद ढहाने से जुड़े पूर्व कारसेवक (जो इस मामले में व्हिसलब्लोअर बनकर उभरे हैं) और अयोध्या बार एसोसिएशन के सदस्य शामिल हैं, जो मांग कर रहे हैं कि चंपत राय और ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम एफआईआर में जोड़े जाएं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई. गणना कर्मचारी के बयान से — जो चार्जशीट सारांश में दर्ज है — यह पुष्टि होती है कि ट्रस्ट के कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक कर्मचारियों को भी 3 जून, 2026 से ही हो रही चोरी के बारे में जानकारी थी, फिर भी इस मामले में एफआईआर 25 जून, 2026 को दर्ज की गई.

सीसीटीवी फुटेज के संबंध में समय (टाइमस्टैम्प) का कोई उल्लेख नहीं है. यद्यपि चार्जशीट सारांश में चोरी की कुल 304 घटनाओं का उल्लेख किया गया है, लेकिन कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है कि मंदिर के अंदर ये चोरियाँ ठीक कब या कितने समय तक होती रहीं. चार्जशीट सारांश में आरोपियों के बैंक खातों से कई मौद्रिक लेनदेन सूचीबद्ध किए गए हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि चोरी का कोई विशिष्ट मामला ट्रस्ट में गणना कर्मचारी के रूप में शामिल होने के बाद खरीदी गई संपत्तियों से सीधे कैसे जुड़ा था.

चार्जशीट सारांश में चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर चुप्पी साध ली गई है और उनसे केवल गवाह के रूप में की गई पूछताछ दर्ज है. राय और मिश्रा—जो क्रमशः विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े दिग्गज हैं—श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारियों में शामिल थे. मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों पर बढ़ते आक्रोश के बीच उन्होंने जून 2026 में ही इस्तीफा दे दिया था.

यूपी पुलिस द्वारा पूछताछ किए गए 133 गवाहों की सूची में उनके नाम वास्तव में शामिल हैं. जहाँ अनिल मिश्रा को गवाह नंबर 17 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, वहीं चार्जशीट में चंपत राय और पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव दोनों के नाम क्रमशः क्रम संख्या 18 और 19 पर दर्ज हैं.

"अपने बयान में, चंपत राय ने कहा कि 4 जून, 2026 को, जब वह दिल्ली से अयोध्या लौटते समय एक ट्रेन में थे, तब रात को लगभग पौने दस बजे, आनंद कुमार चौधरी की ओर से व्हाट्सएप पर एक वीडियो संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें एक बाथरुम के अंदर नकदी की गड्डियाँ देखी जा सकती थीं. साथ ही टेक्स्ट संदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि आज गणना कक्ष से जुड़े बाथरुम से ₹2,25,000 की यह सारी नकदी बरामद की गई है. कुछ लोग पिछले कुछ दिनों से पैसे चुरा रहे हैं, वे संख्या में 67 हैं (चोरी में शामिल व्यक्ति)".

आनंद कुमार चौधरी गिनती करने वाले कर्मचारियों (काउंटिंग स्टाफ) में से एक हैं. राम मंदिर के भीतर हुई चोरी से संबंधित इस जानकारी के साथ— जिसके बारे में उनके पास न केवल जानकारी थी बल्कि वीडियो साक्ष्य भी था—चंपत राय ने क्या किया? क्या उन्होंने पुलिस को सूचना दी? नहीं. इसके बजाय राय ने अयोध्या के कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास पर ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के साथ एक औपचारिक बैठक करना उचित समझा.

(यह हिंदी में अनूदित सारांश है. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं.)

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