अयोध्या राम मंदिर फंड में ‘गबन’ के आरोपों पर भाजपा नेता ने केंद्रीय जांच की मांग की

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के करोड़ों रुपये कथित रूप से गायब होने और गबन (हेराफेरी) के आरोपों को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. ‘पीटीआई’ के अनुसार, इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने की खबरों के बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसकी स्वतंत्र केंद्रीय जांच (सीबीआई या ईडी द्वारा) कराने की मांग की है. उनका कहना है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में यदि आरोप सच हैं, तो यह गंभीर अपराध है और इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

इससे पहले, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दान के पैसे गायब होने का आरोप लगाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी और सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए थे. इन आरोपों के जवाब में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में आंतरिक ऑडिट (खातों की जांच) चल रहा है और अब तक हेराफेरी का कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और ट्रस्ट मिलकर समय-समय पर यह रूटीन जांच करते हैं. हालांकि, अखिलेश यादव ने इस स्पष्टीकरण को अस्पष्ट बताते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है.

विवाद बढ़ता देख राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अपने तय कार्यक्रम से पहले ही अचानक अयोध्या पहुंचे और ट्रस्ट के सदस्यों के साथ चार घंटे तक बंद कमरे में समीक्षा बैठक की. फिलहाल ट्रस्ट ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और इसके सदस्य मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं. मंदिर परिसर और दर्शन मार्ग पर रखी करीब चार दर्जन दान पेटियों से रोज नकदी जमा की जाती है, जिसकी गिनती के लिए एसबीआई ने एक निजी एजेंसी को अधिकृत किया है.

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