चीनी सीमा पर बांध को लेकर प्रदर्शन तेज़ होने के बाद भारत ने अतिरिक्त बल तैनात किए

‘रॉयटर्स’ में तोरा अगरवाला की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर के सुदूर इलाके में भारत ने सैकड़ों अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है. यह कदम पिछले सप्ताह एक विशाल बांध निर्माण योजना के विरोध में युवाओं और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद उठाया गया है. भारत यह बांध चीन की ऊपरी धारा (अपस्ट्रीम) में बन रही जलविद्युत परियोजना का मुकाबला करने के लिए बना रहा है.

तिब्बत की सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में पिछले हफ्ते विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया था. प्रदर्शनकारी युवाओं ने पथराव किया था और एक पुलिस स्टेशन तथा राज्य के स्वामित्व वाले नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) के कार्यालय में आग लगा दी थी.

अरुणाचल प्रदेश के पुलिस प्रमुख एस. डी. सिंह जामवाल ने ‘रॉयटर्स’ को बताया, "जहाँ भी आवश्यकता है, उन स्थानों पर बल बढ़ाए जा रहे हैं. हम कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं चाहते.

प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की ‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’ के स्थल सियांग घाटी में पिछले दो वर्षों में रुक-रुक कर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं. इस परियोजना का विकास सरकारी कंपनी ‘नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन’ द्वारा किया जाएगा. परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों को डर है कि यह बांध आदि जनजाति के पैतृक गांवों को जलमग्न कर देगा.

‘सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम’ के गेगोंग जीजोंग ने बताया, "जब तक वे इसे रद्द नहीं कर देते, हम इस बांध का विरोध करते रहेंगे. यदि इसका निर्माण होता है, तो हमारे 27 पैतृक गांव पूरी तरह डूब जाएंगे. कम से कम 40 से 50 और गांव प्रभावित होंगे."

सियांग नदी तिब्बत से अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, जहाँ इसे 'यारलुंग त्सांगपो' के नाम से जाना जाता है. चीन ने दिसंबर 2024 में ऊपरी धारा पर दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाने की योजना की घोषणा की थी, जिससे नई दिल्ली में यह आशंका पैदा हो गई कि उसका पुराना रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी नदी पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल हथियार के रूप में कर सकता है.

चीन अरुणाचल प्रदेश को 'ज़ैंगनान' कहते हुए दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है. वहीं भारत का कहना है कि यह राज्य उसका अभिन्न और अविभाज्य अंग है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी के सदस्य और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने चीनी परियोजना को एक अस्तित्वगत खतरा बताया है और कहा है कि सरकार सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगी.

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