इस साल अगस्त में, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) के उपाध्यक्ष और पूर्व नौकरशाह कालिंग जेरांग के नेतृत्व में चार सदस्यीय एक तथ्य-अन्वेषण (फैक्ट-फाइंडिंग) समिति ने अपर सुबानसिरी जिले के ताकसिंग का दौरा किया. इस समिति का उद्देश्य चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा भारतीय सीमा में कथित अतिक्रमण की ज़मीनी हकीकत का पता लगाना था.
जेरांग के अनुसार, सियांग नदी पर प्रस्तावित बांध को लेकर राज्य सरकार की नीति और ताकसिंग क्षेत्र में चीनी घुसपैठ की खबरों पर उसकी प्रतिक्रिया के बीच भारी विरोधाभास देखने के बाद इस समिति का गठन किया गया था. जेरांग ने आगे कहा, "हम सात दिनों तक ताकसिंग में रहे और माजा जैसे स्थानों का दौरा किया, जो एक संवेदनशील सीमा चौकी है. स्थानीय निवासियों से मिले फीडबैक से यह स्पष्ट है कि चीनी घुसपैठ हालिया घटना नहीं है. यह पिछले कुछ समय से हो रहा है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक का हालिया बयान दिखाता है कि बातें आगे निकल चुकी हैं. आखिर सच को कब तक छुपाया जा सकता है?"
‘द वायर’ में दीप मुखर्जी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन के प्रभाव का मुकाबला करने का हवाला देते हुए स्थानीय विरोध के बावजूद सियांग नदी पर बांध बनाने की भारी जल्दबाजी में है. दूसरी ओर, जब ताकसिंग में स्वदेशी नाह समुदाय ने चीनी घुसपैठ की चेतावनी दी, तो सरकार लगातार इससे इनकार करती रही. ताकसिंग दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने समिति को बताया कि कड़ाके की ठंड में याकों की चराई और नमक खिलाने के लिए वे जिन इलाकों में दो-तीन साल पहले तक जाते थे, अब भारत और चीन दोनों देशों की सेनाएं उन्हें वहां जाने से रोकती हैं.
सात दिनों तक ताकसिंग और माजा जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में रहने के बाद समिति इस निष्कर्ष पर पहुँची कि चीनी घुसपैठ कोई हालिया घटना नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से हो रही है. 22 अक्टूबर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने भी यह स्वीकार किया था कि अरुणाचल सीमा पर कई स्थानों पर भारत और चीनी सेनाएं आमने-सामने हैं.
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दियों में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण भारतीय सेना की गश्त बंद हो जाती है, जबकि स्थानीय संपर्कों की मदद से लॉजिस्टिक्स जुटाने वाली पीएलए की गतिविधियां पूरे साल सक्रिय बनी रहती हैं. स्थानीय लोगों ने नाचो-ताकसिंग सड़क निर्माण को युद्ध स्तर पर पूरा करने, सीपी 2 में हेलीपैड बनाने, सीपी 4 व 6 पर स्थायी सैन्य शिविर स्थापित करने और बेहतर बिजली व टेलीफोन नेटवर्क की मांग की है.
पीपीए वर्तमान में अरुणाचल विधानसभा में दो विधायकों वाला एक क्षेत्रीय दल है, जो कभी 2016 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनईडीए का हिस्सा था. बाद में उठापटक के बाद भाजपा ने 2017 में पीपीए से नाता तोड़ लिया था.
इस बीच, चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू के बयानों में बार-बार बदलाव देखा गया है. अगस्त में जहाँ उन्होंने किसी भी चीनी अतिक्रमण से इनकार किया था, वहीं आईटीबीपी प्रमुख के बयान के एक हफ्ते बाद (29 अक्टूबर को) उन्होंने यू-टर्न लेते हुए स्वीकार किया कि चूंकि सीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है, इसलिए मैकमोहन रेखा के पास 'पारगमन' और घुसपैठ होती रहती है. इस पर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री के पुराने दावों और सीएम खांडू के विरोधाभासी बयानों को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है.
आदि जनजाति से ताल्लुक रखने वाले पीपीए नेता जेरांग का मानना है कि सियांग बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार दिल्ली के दबाव में चीनी घुसपैठ की खबरों को लगातार दबाने का प्रयास कर रही है.

