जंतर-मंतर पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने के आरोप में ‘कॉकरोच पार्टी’ के दो नेता तिहाड़ भेजे गए, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
‘द गार्डियन’ की ही रिपोर्ट है कि मध्य दिल्ली के एक प्रदर्शन स्थल पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने के आरोप में भारत के युवाओं के नेतृत्व वाले ‘कॉकरोच आंदोलन’ के दो नेताओं को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.
एक अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के नेताओं, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स लांघने, नारेबाजी करने और भारतीय राष्ट्रध्वज फहराने के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में पांच दिन बिताने का आदेश दिया.
सीजेपी के नेताओं ने कहा कि यह कदम सप्ताहांत (वीकेंड) पर दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों पर की गई बर्बर कार्रवाई और दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर—जो मध्य दिल्ली में एक वेधशाला के आसपास की सड़क का हिस्सा है और 30 से अधिक वर्षों से राजधानी का निर्धारित प्रदर्शन स्थल रहा है—को विरोध स्थल के रूप में बंद करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उठाया गया था.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “आप प्रतिरोध/विरोध के अधिकार को रद्द नहीं कर सकते."
जेल भेजे गए सीजेपी नेताओं को विपक्षी नेता राहुल गांधी का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है. इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण कार्य है."
इस बीच देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों पर मोदी सरकार की प्रतिक्रिया की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त और एम्नेस्टी जैसे मानवाधिकार समूहों ने आलोचना की है.
हालांकि, भारत सरकार ने प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र के बयान का कड़ा जवाब देते हुए इसे "देश के आंतरिक मामलों में एक अस्वीकार्य हस्तक्षेप" करार दिया. इस कार्रवाई पर दिल्ली के दौरे पर आए ब्रिटेन के एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल ने भी चिंता जताई, जिसका नेतृत्व व्यापार मंत्री जॉनी रेनॉल्ड्स कर रहे थे, जिन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने भारतीय सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है.

