वामपंथ के गढ़ में फातिमा ताहिलिया की कहानी: मुस्लिम लीग की पहली महिला विधायक

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की पहली महिला विधायक फातिमा ताहिलिया ने वामपंथ के मजबूत गढ़ में एलडीएफ संयोजक को हराकर बड़ी जीत हासिल की है. कालीकट विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर और 34 वर्षीय अधिवक्ता फातिमा ताहिलिया ने हाई-प्रोफाइल पेराम्बरा विधानसभा क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता टी. पी. रामकृष्णन को शिकस्त दी.

इस कड़े मुकाबले में ताहिलिया को 81,429 वोट मिले और उन्होंने 5,087 मतों के अंतर से जीत दर्ज की.

 ‘मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, कोझिकोड के पेरुवायल में जन्मी ताहिलिया ने चुनावी राजनीति में आने से पहले छात्र राजनीति के माध्यम से अपनी पहचान बनाई. उन्होंने 'मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन' में एक नेता के रूप में कार्य किया और बाद में कोझिकोड निगम में पार्षद के रूप में सेवा दी. उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, कोझिकोड से बी.ए. एलएलबी और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, त्रिशूर से एलएलएम की पढ़ाई पूरी की. वर्तमान में वह कालीकट जिला न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रही हैं. वह मुस्लिम यूथ लीग की राज्य सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं, जो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के भीतर उनके निरंतर बढ़ते कद को दर्शाता है.

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का प्रतिनिधित्व करते हुए, ताहिलिया पार्टी द्वारा मैदान में उतारी गई दो महिला उम्मीदवारों में से एक थीं. लंबे समय से वामपंथियों का गढ़ माने जाने वाले निर्वाचन क्षेत्र में उनका चुनाव लड़ना विशेष रूप से महत्वपूर्ण था. उनकी उम्मीदवारी ने पूरे केरल का ध्यान आकर्षित किया, न केवल चुनावी मुकाबले के कारण, बल्कि अभियान के दौरान हुए विवादों की वजह से भी.

पेराम्बरा से उम्मीदवारी की घोषणा के तुरंत बाद फातिमा ताहिलिया को भारी साइबर हमलों और ऑनलाइन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.  उनके सोशल मीडिया पेजों पर अपमानजनक, व्यक्तिगत और अश्लील टिप्पणियों की बाढ़ आ गई.

दुर्व्यवहार में हिजाब पहनने वाली एक युवा मुस्लिम महिला के रूप में उनकी पहचान को निशाना बनाया गया और चुनाव लड़ने की उनकी क्षमता पर सवाल उठाए गए. ताहिलिया ने कहा कि ऐसे हमले उनके लिए नए नहीं हैं और उन्होंने कोझिकोड के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान भी इसी तरह के उत्पीड़न का सामना किया था.

एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब आरोप लगे कि एलडीएफ से जुड़े प्रचार वाहनों ने फातिमा ताहिलिया को "कौम का उम्मीदवार" बताते हुए घोषणाएं कीं. यूडीएफ ने आरोप लगाया कि उनकी धार्मिक पहचान के माध्यम से चुनाव को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की गई, जिसके कारण राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुईं और चुनाव आयोग में शिकायतें दर्ज कराई गईं. इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, फातिमा ताहिलिया एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरीं और पेराम्बरा विधानसभा क्षेत्र में जीत हासिल की. उनकी यह जीत पारंपरिक रूप से एलडीएफ के दबदबे वाली सीट पर एक बड़े राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है.

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