धीरेंद्र शास्त्री की परवाह नहीं ; दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश से हिल्सा मछली पर प्रतिबंध हटाने का आग्रह

कथा वाचक धीरेंद्र शास्त्री भले ही दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार करने वालों को पाखंडी कहें या मांसाहारी भोजन न परोसने की सलाह दें, लेकिन दुर्गा पूजा से ठीक पहले भारतीय मत्स्य आयातकों ने शुक्रवार को बांग्लादेश से मछलियों की रानी मानी जाने वाली 'इलिश' (हिल्सा) के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आग्रह किया है. इस संबंध में कोलकाता स्थित एक आयातक संघ ने बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री को पत्र लिखकर इलिश का निर्यात फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है.  'फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन'  के अनुरोध पर बांग्लादेश सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है.

पत्र में कहा गया, "दुर्भाग्य से, जुलाई 2012 में बांग्लादेश सरकार ने इलिश मछली के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. तब से हम लगातार इस प्रतिबंध को हटाने के लिए बांग्लादेश सरकार को पत्र लिखते रहे हैं, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ."

आयातकों के अनुसार, बांग्लादेश ने बाद में सितंबर 2019 से दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान सीमित मात्रा में इलिश के निर्यात की अनुमति देनी शुरू की, लेकिन कम समय सीमा के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुई.

‘एएनआई’ द्वारा प्राप्त पत्र की प्रति के अनुसार, आयातकों ने बंगाल के दोनों छोरों (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश) के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक, भाषाई और खान-पान के संबंधों तथा पूर्वी भारत में इलिश की लोकप्रियता को रेखांकित किया.

एसोसिएशन ने कहा, "'इस पार का बांग्ला' और 'उस पार के बांग्ला' के बीच एक बहुत ही खास रिश्ता है, क्योंकि हमारी भाषा, भोजन और संस्कृति लगभग एक जैसी है. पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के मछली प्रेमी पद्मा नदी की इलिश (पद्दार इलिश) के स्वाद के लिए उत्सुक रहते हैं."

आयातकों ने लिखा, "हम कठिन परिस्थिति में हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया इलिश के निर्यात से प्रतिबंध हटा दें, जिसके लिए भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के लोग आपके आभारी रहेंगे."

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