अस्पताल ले जाते समय ऑटो में महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया; चारों की मौत, एम्बुलेंस समय पर नहीं मिली
मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में अस्पताल ले जाते समय एक महिला ने ऑटो रिक्शा के अंदर चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद चारों बच्चों की मौत हो गई.
‘पीटीआई’ के अनुसार, परिवार का आरोप है कि मंगलवार को महिला को ले जाने के लिए एम्बुलेंस न मिलने के कारण नवजातों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर डिलीवरी) और अधूरे विकास के कारण बच्चों की मौत हुई. महिला के पति का दावा है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी.
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी. जे. मोहंती ने बताया कि नैनपुर (या नैगांव) की रहने वाली रजनी सिंगराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में प्रसव पीड़ा होने पर एक निजी वाहन से घुटस के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था. अधिकारी ने बताया कि महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एक ऑटो रिक्शा से बिछिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया.
मोहंती ने कहा कि लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही उसने निजी वाहन में चार बच्चों को जन्म दे दिया. उन्होंने आगे जोड़ा, "चारों बच्चे — तीन लड़कियां और एक लड़का — मर गए क्योंकि वे समय से पहले पैदा हुए थे और उनमें से प्रत्येक का वजन लगभग 1.5 किलोग्राम था." अधिकारी ने यह भी बताया कि महिला को बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है और वह खतरे से बाहर है.
हालांकि, महिला के परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उन्होंने आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा को फोन किया था, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो वे उसे ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले गए.
महिला के पति गणेश सिंगराम ने दावा किया कि अगर समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाती, तो उनके बच्चों को बचाया जा सकता था.
इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर मंडला के जिलाधिकारी (डीएम) राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

