ईरान का शांति प्रस्ताव: हर्जाना, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और प्रतिबंध हटाने की माँग
ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है जिसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम, ईरान के नज़दीकी क्षेत्रों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, अमेरिकी-इज़रायली युद्ध से हुई तबाही का हर्जाना, प्रतिबंधों को हटाना, जमे हुए धन की वापसी और समुद्री नाकाबंदी समाप्त करने की माँग शामिल है. यह जानकारी ईरानी राज्य मीडिया ने दी, जिसमें उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी के हवाले से यह विवरण आई आरएनए के ज़रिए सामने आया.
हालाँकि ‘रॉयटर्स’ के अनुसार ये शर्तें ईरान के पिछले प्रस्ताव से बहुत अलग नहीं हैं, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह "बकवास" कहकर ठुकरा दिया था. इसके बावजूद ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ईरान पर हमले की योजना को स्थगित कर दिया है और डील की "बहुत अच्छी संभावना" है. उन्होंने कहा, "अगर बमबारी किए बिना समझौता हो सके तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी."
क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने ट्रंप से हमला न करने का अनुरोध किया है, यह सोशल मीडिया पर ख़ुद ट्रंप ने बताया. पाकिस्तान ने पिछले महीने शांति वार्ता की मेज़बानी की थी और एक पाकिस्तानी सूत्र ने पुष्टि की कि इस्लामाबाद ने ईरान का नया प्रस्ताव वाशिंगटन तक पहुँचाया. उसी सूत्र ने चिंता जताते हुए कहा, "दोनों पक्ष बार-बार अपनी शर्तें बदलते रहते हैं. हमारे पास अधिक समय नहीं है."
बातचीत में कुछ लचीलेपन के संकेत भी हैं. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका विदेशी बैंकों में जमे ईरान के अरबों डॉलर का एक चौथाई हिस्सा जारी करने पर सहमत हो गया है और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में ईरान को कुछ शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियाँ जारी रखने देने पर भी नरमी दिखाई है. हालाँकि अमेरिका ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
फ़रवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिकी-इज़रायली बमबारी अभियान में ईरान में हज़ारों लोग मारे गए. इज़रायल ने लेबनान में हज़ारों और लोग मारे और लाखों को बेघर किया. ईरान के हमलों में इज़रायल और खाड़ी देशों में दर्जनों लोगों की जानें गई हैं. अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम के बाद से संघर्ष मोटे तौर पर रुका हुआ है, हालाँकि इराक़ से खाड़ी देशों की ओर ड्रोन हमले जारी हैं. होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित है.

