दलबदल का ‘संवैधानिक पाप’: सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के चुनाव चिह्न पर शिंदे गुट के दावे पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस बात पर सवाल उठाया कि क्या शिवसेना का 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न उन विधायकों के पास रहना चाहिए जो दलबदल के कारण अयोग्यता की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं. अदालत यह सवाल एकनाथ शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग) के फैसले की समीक्षा के दौरान कर रही थी.
‘पीटीआई’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने पूछा, "क्या चुनाव चिह्न से जुड़ा जनभाव उन लोगों के पक्ष में काम करेगा जिन्होंने संवैधानिक पाप किया है, या फिर यह उन लोगों के पक्ष में रहेगा जिन्होंने इस संवैधानिक पाप की शिकायत की है?"
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ—जिसमें न्यायमूर्ति वी. मोहना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं—शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना मानने और उसे 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न आवंटित करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
शिंदे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने निर्वाचन आयोग द्वारा यह तय करने के लिए 'विधायी बहुमत परीक्षण' पर भरोसा करने के फैसले का बचाव किया कि कौन सा गुट राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करता है.
न्यायमूर्ति बागची ने यह सवाल भी उठाया कि क्या संगठनात्मक सदस्यों की गिनती से अनिवार्य रूप से जमीनी स्तर पर वास्तविक समर्थन सिद्ध होगा, खासकर तब जब पार्टी का अपना संविधान स्पष्ट रूप से लोकतांत्रिक संगठनात्मक ढांचा प्रदान न करता हो.
अदालत ने उन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही के प्रभावों की भी जांच की, जिनकी संख्या का उपयोग विधायी बहुमत साबित करने के लिए किया गया था.
पीठ ने इससे पहले पूछा था कि क्या निर्वाचन आयोग दोनों ही गुटों को आरक्षित 'धनुष-बाण' चिह्न देने से इनकार कर सकता था और उनसे अलग-अलग चुनाव चिह्नों पर चुनाव लड़ने की अपेक्षा कर सकता था.
यह विवाद 2022 में शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुटों के बीच शिवसेना में हुए विभाजन से जुड़ा है. उद्धव ठाकरे गुट ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें शिंदे समूह को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी और उसे 'धनुष-बाण' चिह्न दिया गया था.
ठाकरे गुट के सुनील प्रभु द्वारा दायर एक अलग याचिका में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के 10 जनवरी 2024 के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने दसवीं अनुसूची के तहत शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया था. मामले की सुनवाई अनिर्णीत रही और बुधवार 7 अक्टूबर को भी जारी रहेगी.

