‘वीबी-जी राम जी’ कानून का श्रमिकों ने किया विरोध, नई रोजगार योजना को वापस लेने की मांग

‘द टेलीग्राफ’ में खबर है कि कृषि और ग्रामीण श्रमिकों ने शुक्रवार को देश भर में कई स्थानों पर 'वीबी-जी राम जी' अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. यह कानून राज्यों के लिए रोजगार योजना के तहत होने वाले खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करना अनिवार्य बनाता है.

'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' ('वीबी-जी राम जी') कानून मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा. मौजूदा मनरेगा के तहत राज्यों को खर्च का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा उठाना पड़ता है, जबकि 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है.

'जॉइंट प्लेटफॉर्म ऑफ एग्रीकल्चरल एंड रूरल वर्कर्स यूनियंस' और 'नरेगा संघर्ष मोर्चा' के बैनर तले श्रमिकों ने बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के गांवों में रैलियां निकालीं और जनसभाएं कीं.

'ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन' ने एक बयान में कहा कि यह विरोध प्रदर्शन 2014 से भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे वर्षों के कुप्रबंधन के कारण मनरेगा श्रमिकों के बीच जमा हो रहे गुस्से का नतीजा था.

बयान में कहा गया, “वर्षों तक मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई और वह स्थिर रही. हर आगामी वर्ष के साथ सृजित किए जाने वाले कुल मानव-दिवसों की संख्या कम होती जा रही है. जब से भाजपा सत्ता में आई है, मनरेगा के लिए आवंटित किया गया बजट बेहद कम रहा है, जो कि बकाए भुगतानों के बढ़ते ढेर को चुकाने में भी नाकामी साबित हुआ है.”

इसने “बाहर करने वाली तकनीक” की शुरुआत की भी आलोचना की, जैसे कि आधार-आधारित भुगतान प्रणाली, चेहरा पहचानने की तकनीक, जियो-टैगिंग और ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली. बयान में कहा गया कि इन तकनीकों के कारण महज कुछ ही वर्षों में करोड़ों श्रमिकों के नाम (सूची से) हटा दिए गए.

बयान में आगे कहा गया, “राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ के कारण, 'वीबी-जी राम जी' कानून राज्यों में ठीक से लागू नहीं हो पाएगा.” यूनियन इस कानून को वापस लेने और एक अधिक मजबूत मनरेगा को फिर से बहाल करने की मांग कर रही थी.

1 जुलाई से 'वीबी-जी राम जी' अधिनियम लागू होने के साथ ही मनरेगा का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह बदलाव पूरी तरह सुगम होगा और इससे श्रमिकों को कोई परेशानी नहीं होगी. एक सरकारी अधिसूचना में कहा गया, “30 जून तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्यों को सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें बिना किसी बाधा के नए ढांचे में स्थानांतरित (कैरी ओवर) कर दिया जाएगा.” 

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