तमिलनाडु का 'नया सूर्य': जोसेफ विजय के 'थलपति' से 'जननायक' बनने की कहानी
दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय ने अब राजनीति के मंच पर भी जबरदस्त एंट्री दर्ज कराई है. उनकी पार्टी टीवीके ने 107 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल कर तमिलनाडु की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है, और अब विजय को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है. उनकी रैलियों में उमड़ती भारी भीड़ उनकी मजबूत जनस्वीकृति और जमीनी पकड़ का स्पष्ट संकेत देती है. लेकिन सवाल ये है कि पर्दे पर अपनी दमदार मौजूदगी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाला ये सुपरस्टार आखिर है कौन?
बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
थलपति विजय का पूरा नाम जोसेफ़ विजय चंद्रशेखर है. उनका जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में एक फिल्मी परिवार में हुआ. उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक रहे हैं, जबकि उनकी माँ शोभा एक जानी-मानी गायिका हैं. ऐसे माहौल में पले-बढ़े विजय का रुझान बचपन से ही अभिनय की ओर हो गया था.
बहुत कम उम्र में ही उन्होंने कैमरे के सामने कदम रख दिया था. उनके पिता ने उन्हें ‘वेट्री’ फिल्म में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट मौका दिया, जिसने उनके अभिनय सफर की शुरुआती नींव रखी. धीरे-धीरे विजय ने तय कर लिया कि उनका भविष्य सिनेमा में ही है.
उन्होंने कॉलेज में विज़ुअल मीडिया की पढ़ाई शुरू की, लेकिन एक्टिंग के जुनून के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद उनकी माँ शोभा ने एक स्क्रिप्ट लिखी, जिस पर उनके पिता ने फिल्म बनाई. इसी फिल्म ‘नालैया थीरपू’ (1992) से विजय ने बतौर लीड एक्टर अपने करियर की शुरुआत की. भले ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रही, लेकिन इसने विजय के करियर की मजबूत नींव जरूर रख दी.
संघर्ष से 'थलपति' बनने की दास्तां
जब विजय ने नायक के रूप में कदम रखने का फैसला किया, तो उन्होंने विजुअल कम्युनिकेशन की अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. साल 1992 में फिल्म 'नालैया थीरपू' आई. फिल्म की कहानी उनकी माँ शोभा ने लिखी थी और निर्देशन पिता ने किया था. फिल्म तो नहीं चली, लेकिन एक नया चेहरा चर्चा में आ गया.
शुरुआती दौर में आलोचकों ने उनके लुक और अभिनय पर सवाल उठाए, पर विजय ने हार नहीं मानी. 1996 में आई 'पूवे उनक्कागा' ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. इसके बाद 'गिल्ली' ने उन्हें एक 'मास हीरो' बना दिया. बच्चे उनके डांस स्टेप्स की नकल करने लगे और युवा उनके स्टाइल के दीवाने हो गए. धीरे-धीरे उन्हें 'थलपति' (सेनापति) का खिताब मिला. 'मर्सल' और 'सरकार' जैसी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई की, बल्कि उनमें विजय ने पहली बार राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से बोलना शुरू किया.
निजी ज़िंदगी: एक प्रशंसक बनी हमसफर
विजय की प्रेम कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है. लंदन में रहने वाली संगीता सोरलिंगम विजय की एक कट्टर प्रशंसक थीं. वह सिर्फ उनसे मिलने के लिए भारत आईं. मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ, दोस्ती हुई और 25 अगस्त 1999 को दोनों ने शादी कर ली. संगीता न केवल उनकी पत्नी बनीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी सलाहकार भी. दिलचस्प बात यह है कि विजय आज भी वही कपड़े पहनते हैं जिन्हें संगीता उनके लिए चुनती हैं.
जब पिता से भिड़ गए विजय
विजय का राजनीति में कदम रखना बिल्कुल आसान नहीं था. साल 2020-21 में उनके परिवार के भीतर ही एक बड़ा विवाद सामने आया, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं. उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर ने विजय के नाम पर ‘ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम’ नाम की एक राजनीतिक पार्टी रजिस्टर करा दी.
इस कदम से विजय बेहद नाराज़ हो गए. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम का राजनीतिक इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है. मामला इतना बढ़ गया कि विजय ने अपने ही माता-पिता सहित 11 लोगों के खिलाफ अदालत का रुख कर लिया.
उन्होंने एक सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा,
"मेरा और मेरे पिता की पार्टी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है. प्रशंसकों को इससे भ्रमित नहीं होना चाहिए."
यह फैसला भले ही कड़ा था, लेकिन इसने साफ कर दिया कि विजय राजनीति में किसी विरासत या दबाव के तहत नहीं, बल्कि अपनी शर्तों और अपनी सोच के साथ उतरना चाहते हैं.
टीवीके का उदय और 'सिनेमा' को अलविदा
फरवरी 2024 में वह ऐतिहासिक पल आया जब विजय ने आधिकारिक रूप से 'तमिलगा वेट्री कड़गम' की स्थापना की. विजय का यह फैसला चौंकाने वाला था क्योंकि वह अपने करियर के चरम पर थे. उनकी एक फिल्म के लिए करोड़ों की भीड़ जुटती थी, लेकिन उन्होंने ऐलान किया: "मैं सिनेमा छोड़ रहा हूँ."
अक्टूबर 2024 में विक्रवंडी की पहली रैली ने दिखा दिया कि विजय की ताकत क्या ह. उन्होंने वहां दहाड़ते हुए कहा कि वह 'द्रविड़ मॉडल' के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और परिवारवाद की राजनीति को खत्म करने आए हैं. उन्होंने घोषणा की कि 'थलपति 69' उनकी आखिरी फिल्म होगी, क्योंकि अब उनका पूरा जीवन जनता की सेवा के लिए समर्पित है.
विचारधारा: पेरियार का रास्ता और धर्मनिरपेक्षता
अपनी पहली ही रैली में विजय ने टीवीके की विचारधारा को साफ और विस्तार से रखा. उन्होंने कहा,
“हम द्रविड़ राष्ट्रवाद और तमिल राष्ट्रवाद को अलग नहीं करेंगे. ये दोनों इस मिट्टी की दो आँखें हैं. हमें खुद को किसी एक पहचान तक सीमित नहीं करना चाहिए.”
विजय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर चलेगी. उन्होंने पेरियार के विचारों का ज़िक्र करते हुए कहा था कि टीवीके महिला सशक्तीकरण और सामाजिक बराबरी के रास्ते पर आगे बढ़ेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि पेरियार की नास्तिकता वाली सोच से वे सहमत नहीं हैं.
भाषा के मुद्दे पर विजय ने दो-भाषा नीति का समर्थन जताया. उनका कहना था कि सरकारी कामकाज तमिल और अंग्रेज़ी दोनों में होना चाहिए, ताकि संतुलन बना रहे और लोगों को सुविधा मिले. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी जातिगत जनगणना के पक्ष में है, ताकि सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें.
2026 का चुनाव: एक नए युग का उदय
2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने तमिलनाडु की राजनीति के पुराने दिग्गजों को स्तब्ध कर दिया है. विजय की पार्टी टीवीके ने न केवल सीटें जीती हैं, बल्कि डीएमके और एआईडीएमके जैसे स्थापित दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है.
यह जीत विजय की लोकप्रियता, उनकी साफ-सुथरी छवि और लोगों के बदलाव की चाहत का नतीजा माना जा रहा. समर्थकों के लिए वह अब केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि उनके भविष्य के सारथी बन चुके हैं.
जोसेफ विजय से 'थलपति' विजय और अब एक जननायक बनने तक का यह सफर त्याग और संकल्प की कहानी है. एक ऐसा इंसान जिसने अपनी करोड़ों की कमाई और फिल्मी चकाचौंध को इसलिए ठोकर मार दी क्योंकि उसे अपने राज्य की गलियों में बदलाव लाना था. आज तमिलनाडु की राजनीति में एक नए सूर्य का उदय हुआ है, जिसका नाम है, विजय.

