एसआइआर से सीआरपीएफ तक: वे पाँच कारक जिन्होंने बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित की
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का संकेत देता है. जिस राज्य में लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा, वहां भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार दो-तिहाई बहुमत के साथ जीत दर्ज की. यह जीत अचानक नहीं आई, बल्कि कई रणनीतिक, सामाजिक और संस्थागत कारकों के संयोजन का परिणाम है. इन कारकों को समझे बिना इस जनादेश का सही विश्लेषण संभव नहीं है.
जिस मगरमच्छ के लिए ममता ने नहर खोदी थी, उसी ने अंततः उन्हें निगल लिया; बंगाल जनादेश के निहितार्थ
जैसा कि ममता बनर्जी निस्संदेह महसूस करेंगी जब हार का अहसास गहराने लगेगा—किस्मत एक चंचल प्रेमिका की तरह होती है. वह हमेशा की तरह खुद को छोड़कर बाकी सभी को दोष देंगी, लेकिन बंगाल 2026 के फैसले का बड़ा निहितार्थ स्पष्ट है: उन्होंने उस उम्मीद और विश्वास को गंवा दिया है जो राज्य ने डेढ़ दशक तक चुनाव दर चुनाव उन पर जताया था.

