राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी “आलोचना और मानहानि के बीच बहुत पतली रेखा”
आम आदमी पार्टी (AAP) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के राजनीतिक फैसले के बाद सोशल मीडिया पर हो रही तीखी आलोचनाओं के खिलाफ राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचे. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने राघव चड्ढा की 'व्यक्तित्व अधिकार संरक्षण' याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि राजनीतिक आलोचना और मानहानि में अंतर होता है. पढ़ें पूरी कानूनी रिपोर्ट.
‘मर्ज़ लाइलाज है, पूरा भारतीय समाज राघव चड्ढा है’
2011 में अन्ना हज़ारे ने जंतर मंतर पर अनशन शुरु किया. देश को लगा भ्रष्टाचार अब जल्द ख़त्म हो जाएगा. हज़ारों की भीड़ जमा हो गई. क्रांति को नाम मिला ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’. नामी गिरामी एक्टिविस्ट, वकील, बाबा, पत्रकार, एक्टर, कॉमेडियन, आर्टिस्ट और न जाने कौन कौन उसमें शामिल हो गए. मेरी एक मुंहबोली बहन भी उनमें थीं. मैं ख़ुद तो वहाँ कभी नहीं गया.

