‘मोदी का छोटा भाई’: क्या यूपी चुनावों में बिगड़ेगा भाजपा का समीकरण?

भगवान राम और भगवान कृष्ण पर बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) की टिप्पणियों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश भर में कथावाचक धीरेंद्र के कार्यक्रमों को रद्द करने और उनके सामाजिक बहिष्कार की मांग की है. अखिलेश ने आरोप लगाया कि "सनातनी-विरोधी तत्व" अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ रहे हैं.

आनंद मोहन जे की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद मध्यप्रदेश के शिवपुरी में आयोजित एक राम कथा के दौरान शुरू हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.  वीडियो में शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण के हाव-भाव की तुलना करते हुए कहा कि जहाँ राम सीधे खड़े रहते थे, वहीं कृष्ण तीन जगहों से 'टेढ़े' थे और गर्दन झुकाकर बाँसुरी बजाते थे. इसके बाद राम पर भी उनकी टिप्पणियों का दूसरा वीडियो सामने आया.

हालांकि विवाद बढ़ता देख शास्त्री ने सफाई दी कि उनकी टिप्पणियां एक भक्ति पद की व्याख्या थीं और उन्हें संदर्भ से बाहर ले जाया गया. लेकिन तब तक विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी हथियार बना चुके थे.  अखिलेश यादव ने इसे अक्षम्य पाप और ईशनिंदा करार देते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि "ये नफरत फैलाने वाले लोग पहले इंसानों को बांटते थे, अब भगवानों को बांट रहे हैं." मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी शास्त्री पर तीखा हमला बोला.

भाजपा के सामने धर्म और जाति का दोहरा संकट

पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने पूछा कि चुनाव आते ही अखिलेश और तेजस्वी को भगवान कृष्ण की याद क्यों आ गई? उन्होंने सपा से सवाल किया कि क्या वे मथुरा में 'कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन' का समर्थन करते हैं या नहीं?

भाजपा की यह तीखी प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों से जुड़ी है. यूपी में भगवान कृष्ण का मुद्दा सीधे तौर पर यादव समुदाय से जुड़ता है, जो अपनी वंशावली यदुवंश से जोड़ता है. यूपी में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुल आबादी में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 19.4% है. मुलायम सिंह यादव के समय से ही सपा की राजनीति का मुख्य आधार 'मुस्लिम-यादव' (एम-वाई) समीकरण रहा है.

भाजपा लंबे समय से सपा के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. इसके लिए उसने गैर-यादव ओबीसी गोलबंदी के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को प्रमुखता से पेश किया और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा उठाया. 2017 में भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों (सपा का 32.76% वोट शेयर) और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि यादव समुदाय पर सपा की पकड़ अब भी मजबूत है. ऐसे में कृष्ण पर विवादित टिप्पणी भाजपा की रणनीति पर पानी फेर सकती है.

धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव अपने चरम पर है. मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में रोजाना लाखों श्रद्धालु आते हैं. 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 'बागेश्वर धाम मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट' की आधारशिला रखी थी और शास्त्री को "छोटा भाई" कहा था.

शुरुआत में शास्त्री के प्रवचन केवल हनुमान भक्ति और व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान तक सीमित थे. लेकिन पिछले दो वर्षों में उन्होंने खुद को "हिंदू राष्ट्र योद्धा" के रूप में स्थापित किया है. उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने, धर्मांतरण रोकने और दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाने वालों को 'पाखंडी' कहने जैसे कई आक्रामक बयान दिए हैं.

बुंदेलखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में उनके विशाल जनसमर्थन को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही उन्हें साधने का प्रयास करते रहे हैं. हालांकि, चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तर प्रदेश में भगवान राम और कृष्ण पर उनकी टिप्पणियों ने भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है, जहाँ सपा इसे सांस्कृतिक पहचान पर हमले के रूप में भुनाने में जुटी है.

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