निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल
आज की सुर्खियां देश की एक जटिल तस्वीर पेश करती हैं, जहां एक पिता अपने बेटे को 'पाकिस्तानी' कहे जाने पर जवाब में संविधान थमाकर देश के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है, तो वहीं मध्य प्रदेश में ऑनर किलिंग जैसी घटना सामाजिक दरारों को उजागर करती है। राजनीतिक और व्यवस्थागत मोर्चों पर भी गंभीर चुनौतियां हैं: आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना ज़मीन पर दम तोड़ रही है, जिससे मरीज़ और अस्पताल दोनों बेहाल हैं, और बिहार की वोटर लिस्ट में बड़े फ़र्ज़ीवाड़े ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री की डिग्री को निजी जानकारी बताया है, अडानी समूह का बढ़ता कर्ज़ सरकारी बैंकों के लिए जोखिम बढ़ा रहा है, और कमलनाथ-दिग्विजय की पुरानी बहस से लेकर डीके शिवकुमार के संघ गीत गाने तक की घटनाएं राजनीतिक अनिश्चितता को दर्शाती हैं, जो वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के इस दावे को बल देती हैं कि सरकार का असली मकसद विपक्ष को खत्म करना है।
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