नेपाल की राजनीति में इस बार एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है. लंबे समय से सत्ता में रही पुरानी पार्टियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा अब चुनावी नतीजों में दिखने लगा है. जेन ज़ी की नई राजनीति ने नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी है.
हरकारा डीप डाइव में निधीश त्यागी के साथ नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे ने विस्तार से बताया कि नेपाल के हालिया चुनाव क्यों इतने महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. पिछले दो दशकों से नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी और माओवादी जैसे पुराने दल बारी-बारी से सत्ता में आते रहे. लेकिन भ्रष्टाचार, नेपोटिज़्म और राजनीतिक ठहराव से परेशान युवा मतदाताओं ने इस बार नई दिशा की ओर रुख किया है.
इस बदलाव के सबसे बड़े प्रतीक बनकर उभरे हैं बालेन शाह. इंजीनियरिंग पढ़े, फिर रैपर बने, काठमांडू के मेयर बने और अब राष्ट्रीय राजनीति में तेज़ी से उभरते हुए दिखाई दे रहे हैं. उनकी लोकप्रियता खासतौर पर युवा मतदाताओं और सोशल मीडिया के जरिए बनी है. नेपाल की संसद में बड़ी संख्या में युवा सांसद पहुंचने की संभावना भी इसी बदलाव का संकेत है.
हालांकि नई राजनीति के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं. सरकार चलाने का अनुभव, पार्टी के अंदर नेतृत्व का संतुलन और अंतरराष्ट्रीय दबाव, ये सभी सवाल अब सामने खड़े हैं. नेपाल की रणनीतिक स्थिति के कारण भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों की नजर भी इन राजनीतिक बदलावों पर टिकी हुई है.
इस चर्चा में यह भी समझने की कोशिश की गई कि क्या यह बदलाव सिर्फ एक राजनीतिक प्रयोग है या नेपाल की राजनीति में सचमुच नई पीढ़ी का स्थायी प्रवेश. और क्या यह बदलाव दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए भी कोई संकेत देता है.
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