एपस्टीन फाइल्स को लेकर दुनिया भर में हलचल मची हुई है. अमेरिका और यूरोप में इस्तीफे हो चुके हैं, बड़े नाम सामने आ रहे हैं और लाखों दस्तावेज़ों के और खुलासे होने की बात कही जा रही है. लेकिन भारत में सन्नाटा क्यों है? हरकारा डीप डाइव पर वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की गई.
चर्चा में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम सामने आने, ईमेल संपर्कों के आरोप, संसद में उठे सवाल और जवाबदेही के अभाव पर बात हुई.
बातचीत में अमेरिका के राष्ट्रपति के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के राजनीतिक करियर को प्रभावित करने की क्षमता की बात कही. इसके साथ ही इजराइल यात्रा, निखिल गुप्ता केस, खालिस्तानी साजिश के आरोप और अमेरिकी राजदूत के भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों के दौरे जैसे घटनाक्रमों को जोड़कर देखा गया. इन घटनाओं का देश की संप्रभुता और स्वाभिमान पर क्या असर पड़ता है, यह भी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा.
श्रवण गर्ग ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना ज़रूरी है. यदि संसद में बहस नहीं हो रही, यदि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा और यदि सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे रही, तो नागरिकों के मन में संदेह स्वाभाविक है.
पूरी बातचीत देखें और समझें कि एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है, और आने वाले समय में इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं.
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