भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर देश में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. हरकारा डीप डाइव के खास बातचीत में वरिष्ठ संपादक और बिजनेस पत्रकार राजेश रपरिया ने इस डील के आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है. बजट के दौरान साइन हुई इस डील को सरकार जहां उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं कई विशेषज्ञ इसे भारत की संप्रभुता, व्यापार संतुलन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए चुनौती मान रहे हैं.
इस चर्चा में विशेष रूप से किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव को केंद्र में रखा गया है. कपास, सोयाबीन, सेब, बादाम, डेयरी और पोल्ट्री जैसे क्षेत्रों पर अमेरिकी आयात का संभावित असर क्या होगा? क्या भारतीय कृषि बाजार सस्ते आयात के दबाव में आ जाएगा? महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों की स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इन सवालों पर गंभीर विश्लेषण किया गया है.
इसके अलावा डिजिटल टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर पर मंडराते खतरे पर भी विस्तार से चर्चा हुई है. यदि डिजिटल टैक्स हटाने और अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने का दबाव बढ़ता है, तो भारत के IT सेक्टर, रोजगार और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर इसका क्या असर होगा? H1B वीज़ा नीति, AI का दबाव और संभावित रोजगार संकट को भी इस संवाद में समझाया गया है.
500 बिलियन डॉलर की संभावित खरीद, व्यापार संतुलन में बदलाव, टैरिफ संरचना और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों पर इस डील का क्या असर होगा, यह भी इस वीडियो में विश्लेषित किया गया है. साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि अन्य देश जहां अमेरिका के दबाव का मुकाबला कर रहे हैं, वहां भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए.
यदि आप समझना चाहते हैं कि यह ट्रेड डील केवल कूटनीतिक समझौता है या भारत की आर्थिक दिशा बदलने वाला बड़ा मोड़, तो यह बातचीत अवश्य देखें.
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