इस्लामिक नाटो? पाकिस्तान की बाहरी जीत, अंदरूनी क्षरण और भारत के लिए सबक | सुशांत सिंह | #harkara

मक्का साझा रक्षा समझौते ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब को एक साझा रक्षा ढाँचे में बाँध दिया है — एक नाटो सदस्य, एक खाड़ी बादशाहत और इकलौता मुस्लिम परमाणु देश. अख़बारों ने इसे "इस्लामिक नाटो" कहा. पाकिस्तानी सेना के लिए यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता का पल है. पर इस कूटनीतिक चमक के पीछे एक गहरी कहानी है — बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में बढ़ता संकट, सूबों को तोड़ने की सियासत, गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ता दमन. सवाल यह है: एक देश बाहर सफल कैसे दिख सकता है और अंदर वैधता कैसे खोता जाता है? और इसमें भारत के लिए क्या चेतावनी छिपी है? द कारवाँ के कंसल्टिंग एडिटर सुशांत सिंह के साथ हरकारा डीपडाइव में, नीधीश त्यागी के साथ. शोर कम, रोशनी ज़्यादा. harkaraonline.com

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