भावनगर: पुलिस इंस्पेक्टर ने लिव-इन पार्टनर के संदिग्ध हत्यारे फैसल को 10 मिनट में 107 बार पीटा, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना

3 सितंबर को भावनगर के एसटी बस स्टैंड पर फैसल नाम के व्यक्ति ने कथित तौर पर उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही एक महिला की हत्या कर दी. सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने फैसल को गिरफ्तार कर लिया और आज (5 सितंबर) उसे अपराध स्थल पर ले आई. इस दौरान नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई (पुलिस निरीक्षक) डी.पी. उंडडकट ने कथित तौर पर उसे रस्सी से बांधा और डंडे से 107 बार पीटा; आरोपी को आज अदालत में पेश किया जाना था. इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

‘भास्कर इंग्लिश’ के अनुसार, नीलमबाग पुलिस स्टेशन के पीआई डी.पी. उंडडकट द्वारा आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाने और उसकी बर्बरतापूर्वक पिटाई करने के बाद सवाल खड़े हो गए हैं, मानो गुजरात के डीजीपी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश उन पर लागू ही नहीं होते हों. उल्लेखनीय है कि गुजरात के पूर्व प्रभारी डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव ने सख्त लिखित आदेश जारी कर कहा था कि किसी भी आरोपी का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालने (परेड कराने) या आरोपियों के साथ अपमानजनक व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

पीआई उंडडकट से फोन पर हुई बातचीत में कहा: "उसे सार्वजनिक रूप से इसलिए सजा दी गई ताकि किसी अन्य महिला के साथ ऐसा न हो."

लिव-इन पार्टनर की हत्या

भावनगर के कुंभारवाड़ा की रहने वाली 70 वर्षीय भगूबेन बारैया की 40 वर्षीय बेटी काजलबेन पिछले आठ वर्षों से एसटी बस स्टैंड के पास फुटपाथ पर रहने वाले 20 वर्षीय फैसल उर्फ खटकी रफीकभाई लखानी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी.

3 सितंबर की दोपहर काजलबेन बस स्टैंड के पास अपने परिचित रवि उर्फ बाड़ो गोहिल से बात कर रही थी, तभी हाल ही में जेल से छूटकर आया फैसल वहां पहुंचा और रिश्ते को लेकर उनसे बहस करने लगा.  गुस्से में आकर फैसल ने रवि और काजल को लात मारी, जिससे वे टाइल्स पर गिर पड़े. इसके बाद उसने काजलबेन को बालों से पकड़ा और उसका सिर, गर्दन और चेहरा बार-बार टाइल्स पर दे मारा. काजल के बेहोश होने के बाद, फैसल उसे एम्बुलेंस से सर टी. अस्पताल ले गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन

'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' (डी.के. बसु गाइडलाइन्स) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, हिरासत में या सार्वजनिक स्थान पर किसी को भी शारीरिक या मानसिक यातना देना एक गंभीर कानूनी अपराध है. गुजरात हाईकोर्ट ने भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने अधीनस्थों पर नज़र रखने का आदेश दिया है ताकि शक्ति के दुरुपयोग को रोका जा सके.   

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