बिहार | एसआईआर के बाद एक साल में मतदाता सूची में 14 लाख नाम जुड़े

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में रुचिर कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद एक साल में मतदाता सूची में करीब 14 लाख नाम जोड़े गए हैं. एक अक्टूबर 2026 को अद्यतन की गई वर्तमान मतदाता सूची में 7.55 करोड़ मतदाता हैं, जबकि सितंबर 2025 में एसआईआर के बाद प्रकाशित सूची में 7.41 करोड़ मतदाता दर्ज थे.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में लगभग 18.7 लाख लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भरा. इनमें से करीब 14 लाख आवेदन स्वीकार किए गए. नए मतदाताओं, पहली बार मतदान के लिए पंजीकरण कराने वाले युवाओं और दोबारा सूची में शामिल होने की मांग करने वाले लोगों के नाम इसमें शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि चुनावी वर्ष में मतदाताओं की संख्या बढ़ने की प्रवृत्ति सामान्य है. लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनावों से पहले मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के आवेदनों में तेजी आती है. आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में बिहार में 41.9 लाख और 2024-25 में 41.4 लाख मतदाता बढ़े थे. इसके मुकाबले 2022-23 में 13 लाख और 2025-26 में 24.5 लाख मतदाताओं की वृद्धि हुई.

एसआईआर में हटे थे लाखों नाम

बिहार में 25 जून से 30 सितंबर 2025 के बीच तीन महीने तक एसआईआर अभियान चलाया गया था. देश में मौजूदा चरण का यह पहला ऐसा अभियान था. प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य की मतदाता सूची में करीब 7.89 करोड़ मतदाता दर्ज थे. पुनरीक्षण के शुरुआती चरण में 65.6 लाख नाम हटाए गए. इनमें 22.3 लाख मृत मतदाता, 36.4 लाख स्थानांतरित हो चुके मतदाता और 6.8 लाख ऐसे मतदाता शामिल थे, जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए.

इसके बाद एक महीने की जांच और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान 21.5 लाख मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े गए, जबकि 3.6 लाख नाम और हटाए गए. इसके बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.41 करोड़ रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर के बाद बिहार में मतदाता सूची का कोई संक्षिप्त पुनरीक्षण नहीं हुआ है.

नए मतदाताओं के पंजीकरण पर जोर

भारत निर्वाचन आयोग ने हाल ही में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 के साथ अलग से वह घोषणा-पत्र देने की जरूरत नहीं है, जिसमें पिछले एसआईआर से माता-पिता के संबंध का विवरण मांगा जाता था.

एक अक्टूबर को निर्वाचन अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को पहली बार मतदान करने वाले और सूची से छूट गए पात्र मतदाताओं की पहचान कर उनका पंजीकरण कराने के लिए अभियान चलाने को कहा गया. अधिकारियों के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ बैठकें पूरी हो चुकी हैं और कर्मचारियों का प्रशिक्षण जारी है.

पटना के राजा बाजार क्षेत्र की बूथ स्तरीय अधिकारी कुमुद कुमारी ने बताया कि एसआईआर के बाद नाम जुड़वाने वाले अधिकतर लोगों ने निर्वाचन आयोग के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया है. किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर पंचायत में एक बूथ स्तरीय अधिकारी को एक साल में करीब 3,600 आवेदन मिले, जिनमें सत्यापन के बाद लगभग 636 नाम जोड़ने की सिफारिश की गई. सात आवेदनों की संभावित दोहरी प्रविष्टि के तौर पर जांच की जा रही है.

इस तरह एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नामों की संख्या फिर बढ़ी है. हालांकि, नए नामों को शामिल करने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में जगह मिले और दोहरी या गलत प्रविष्टियों की पहचान निष्पक्ष सत्यापन के जरिए हो.

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