केंद्र-लद्दाख वार्ता में गतिरोध: नागरिक समूहों ने खारिज किया नया मसौदा

पीरज़ादा आशिक के अनुसार, आज शुक्रवार (16 अक्टूबर, 2026) को केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों के बीच चल रही वार्ता में उस वक्त गहरा गतिरोध पैदा हो गया, जब प्रमुख नागरिक समाज समूहों—लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए)—ने गृह मंत्रालय  के नए 15-पेजी मसौदा प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. दोनों समूहों ने इसे पिछली बैठकों में मिली प्रतिबद्धताओं और आश्वासनों से "बड़ा भटकाव" करार दिया है. नागरिक समूहों का कहना है कि यह नया मसौदा लद्दाखवासियों की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है:

विधानसभा व अनुच्छेद 371 का अभाव: नए प्रस्ताव में पूर्ण राज्य के दर्जे, विधानसभा और अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख-विशिष्ट संवैधानिक सुरक्षा उपायों की स्पष्ट अनदेखी की गई है.

अधिकारों का केंद्रीकरण: यह व्यवस्था 'पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी' (एनईएफए) या 'प्रादेशिक परिषद' मॉडल जैसी है, जिसमें वास्तविक विधायी शक्ति देने के बजाय उप-राज्यपाल के हाथ में प्रशासनिक शक्तियाँ केंद्रित कर दी गई हैं.

सहमति से पीछे हटना: मई और जुलाई 2026 की बैठकों में 'अनूठे मॉडल' और निर्वाचित निकाय को विधायी व वित्तीय शक्तियाँ देने पर सहमति बनी थी, जिसे नए मसौदे में कमजोर कर दिया गया है.

एलएबी और केडीए ने सरकार से मांग की है कि वह उनके द्वारा दिए गए मसौदा सहमति पत्र (एमओयू) को उसकी मूल भावना के साथ स्वीकार करे. 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं.

दोनों निकाय 18 अक्टूबर को अपनी विस्तृत आपत्तियाँ गृह मंत्रालय को भेजेंगे. इस गतिरोध के बीच अगले दौर की वार्ता 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने की संभावना है.

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