एसआईआर के तीसरे चरण में अब तक 1.5 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए
श्रीपर्णा चक्रवर्ती की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में अब तक मौजूदा मतदाता सूचियों से 1.5 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं.
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का तीसरा चरण चलाया जा रहा है, वे हैं: दिल्ली, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, त्रिपुरा, और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव. जिन 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 'एसआईआर 3.0' आयोजित किया जा रहा है, उनमें से 12 के लिए प्रारूप सूची (ड्राफ्ट लिस्ट) प्रकाशित की जा चुकी है.
दिल्ली, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में गणना या घर-घर जाकर सत्यापन करने के चरण की अवधि बढ़ा दी गई है, इसलिए उनकी प्रारूप सूची के साथ-साथ त्रिपुरा और नागालैंड की सूची भी अभी प्रकाशित होना बाकी है.
चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, जिन 12 राज्यों में प्रारूप सूची प्रकाशित की गई है, वहां कुल मतदाता 13,77,27,807 थे, जिनमें से अनुपस्थित/स्थानांतरित/मृत मतदाताओं के कारण 1,58,59,834 (11.51%) नाम हटा दिए गए हैं. अंतिम मतदाता सूची में संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि चुनाव आयोग लोगों को प्रारूप से नाम जोड़ने और हटाने के साथ-साथ नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए दावे और आपत्तियां जमा करने का अवसर प्रदान करता है.
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में नाम हटाए जाने का प्रतिशत सबसे अधिक 29.64% रहा, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश (19.09%), हरियाणा (16.38%) और चंडीगढ़ (12.8%) का स्थान है. मिजोरम में नाम हटाए जाने का प्रतिशत सबसे कम 5.2% रहा.
वास्तविक संख्या (समान संख्यात्मक आंकड़ों) के मामले में, आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 44.89 लाख नाम हटाए गए हैं, इसके बाद हरियाणा (33.83 लाख) और ओडिशा (20.12 लाख) का स्थान है. सिक्किम में सबसे कम 37,724 (8%) नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद मिजोरम (46,162) का नंबर आता है.
ओडिशा में 6.02%, मणिपुर में 7.5%, उत्तराखंड में 10.39%, चंडीगढ़ में 12.8%, मेघालय में 7.67% और झारखंड में 16.48% नाम हटाए गए हैं.
आंध्र प्रदेश में, जहां वास्तविक संख्या के हिसाब से सबसे अधिक कटौती हुई है, 44.89 लाख (10.78%) नाम हटा दिए गए हैं, जिससे प्रारूप सूची अब 4.16 करोड़ से घटकर 3.71 करोड़ मतदाताओं की रह गई है. हटाए गए नामों में से, 22.30 लाख पते से स्थानांतरित होने या अनुपस्थित रहने के कारण थे, जबकि 15.22 लाख मृत घोषित किए गए थे और 7.37 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर नामांकित थे.
एसआईआर प्रक्रिया पहले ही बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में आयोजित की जा चुकी है. असम में, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की कानूनी जटिलताओं के कारण, एक "विशेष पुनरीक्षण" आयोजित किया गया था.
इस प्रक्रिया के कारण विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच कड़वाहट पैदा हो गई है, और इसे अदालतों में भी चुनौती दी गई है. मार्च में, सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर करने के चुनाव आयोग के कदम की संवैधानिक वैधता को सर्वसम्मति से बरकरार रखा था.

