‘क्या शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?’: भाजपा सांसद के इथेनॉल पर बिगड़े बोल
पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर चल रहे विवाद के बीच, भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने रविवार को केंद्र सरकार की नीति का बचाव करते हुए इसका विरोध करने वालों से सवाल किया: "क्या शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?"
‘पीटीआई’ के अनुसार, रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए नई उड़ानों के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का केवल 20 प्रतिशत ही उत्पादन करता है, जबकि 80 प्रतिशत विदेशों से आयात करना पड़ता है.
मिश्रा ने कहा, "ऐसी स्थिति में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की बात करते हैं, तो कुछ लोग विरोध करने लगते हैं. यह दावा करते हुए एक आंदोलन चलाया जा रहा है कि इथेनॉल काम नहीं करेगा, केवल शुद्ध पेट्रोल ही चलेगा. क्या शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? जब देश में शुद्ध पेट्रोल नहीं है, तो वह कहां से आएगा?"
मिश्रा ने यह भी कहा कि भारत में वाहन इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर चल सकते हैं, लेकिन कुछ लोग इसके खिलाफ जनता को गुमराह कर रहे हैं. "अगर इथेनॉल का उत्पादन नहीं होगा, तो पेट्रोल कहां से आएगा, डीजल कहां से आएगा?"
उन्होंने आगे दावा किया कि ब्राजील में वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलते हैं, और वह भी बिना किसी समस्या के.उन्होंने कहा कि ब्राजील दुनिया में सबसे अधिक इथेनॉल का उत्पादन करता है, इसलिए वहां के वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलते हैं.
अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले मिश्रा ने कहा कि भारत के विशेषज्ञों का भी मानना है कि इथेनॉल से वाहनों के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता है, फिर भी इसका "अनावश्यक" विरोध किया जा रहा है.
मिश्रा ने यह दावा भी किया कि अगर आज दुनिया में कोई ऐसी जगह है जहां रोजगार सबसे ज्यादा और महंगाई सबसे कम है, तो वह भारत है.
इथेनॉल-मिश्रण विवाद क्या है? मात्र तीन वर्षों में पेट्रोल में इथेनॉल के उपयोग को 10% से बढ़ाकर 20% करने के तीव्र फैसले पर केंद्र सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, सरकार ने कहा है कि वर्तमान 20% से अधिक मिश्रण स्तर बढ़ाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. उसने स्पष्ट किया है कि उस दिशा में कोई भी निर्णय विस्तृत अध्ययन और हितधारकों के परामर्श के बाद ही लिया जाएगा. साथ ही, ईंधन स्टेशनों (पेट्रोल पंपों) पर कम इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण या शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने की भी कोई योजना नहीं है.
अधिक इथेनॉल मिश्रण से जुड़ी क्या समस्याएं हैं? ई10 प्रमाणित वाहनों वाले या पुराने वाहनों के मालिकों के लिए, ई20 में यह बदलाव केवल तीन वर्षों में ही आ गया, जिससे उन्हें इसकी खामियों की कम ही चेतावनी मिल सकी. इस अनुभव ने वाहन चालकों, विशेष रूप से पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों के मालिकों को ठगा हुआ महसूस कराया. जो इंजन इन मिश्रणों के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं, उनमें अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के उपयोग से कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं:
इंजन को नुकसान: इथेनॉल में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो संक्षारक (जंग लगाने वाली) होती है. इसलिए, ई20 या उससे अधिक इथेनॉल मिश्रण आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) के पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
माइलेज में कमी: कई ग्राहकों ने ई10 से ई20 पर जाने के बाद माइलेज में गिरावट की शिकायत की है. कार के निर्माण वर्ष के आधार पर माइलेज में यह गिरावट 5 से 12 प्रतिशत के बीच हो सकती है.
स्टार्ट होने में समस्या (इग्निशन इश्यू): उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाली सामान्य आईसीई (आईसीई) कारों को सर्दियों की सुबह स्टार्ट करना कठिन होता है क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अधिक तापमान पर जलता है.
प्रदर्शन में भारी गिरावट: हालांकि 10% इथेनॉल (ई10) वाला ईंधन कार के प्रदर्शन पर ज्यादा प्रभाव नहीं डालता है, लेकिन इससे अधिक का स्तर उन इंजनों में समस्याएं पैदा करता है जो विशेष रूप से इसके लिए नहीं बने हैं. जैसे-जैसे मिश्रण का स्तर बढ़ता है, यह प्रदर्शन और भी तेजी से खराब होता जाता है.
यहां बता दें कि एक साक्षात्कार में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि क्योंकि इथेनॉल का कैलोरी मान पेट्रोल से कम होता है, इसलिए ईंधन में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से औसत माइलेज में "मामूली" गिरावट आ सकती है. हालांकि, उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर वाहनों के नुकसान की जो घटनाएं फैलाई जा रही हैं, वे "अतिरंजित" (बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई) हैं और एक ठोस "झूठे आख्यान" का हिस्सा हैं.

