मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का पूरा कुनबा जमीनें खरीदने में लगा है, पहले 168 एकड़ जमीन खरीदी, और फिर वहाँ उनकी सरकार ने सड़कें बनवाईं
वर्तमान में मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक व धार्मिक शहर उज्जैन एक अभूतपूर्व शहरी नवीनीकरण (अर्बन रिन्यूअल) के दौर से गुजर रहा है. इसका एक बड़ा कारण वर्ष 2028 में उज्जैन सिंहस्थ है. नए राजमार्गों, बाईपास सड़कों के निर्माण और व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन ने इस शहर को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते 'हॉट प्रॉपर्टी मार्केट्स' में से एक बना दिया है. इस बुनियादी ढांचे के विकास के साथ ही, शहर की भूमि उपयोग (लैंड यूज) नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर कृषि भूमि अब आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो रही है. इस तीव्र विकास और जमीन की कीमतों में आए उछाल के बीच, शुरुआती बड़े निवेशकों के रूप में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का परिवार, उनके सगे भाई-बहन और चचेरे भाई (विस्तारित परिवार) सामने आए हैं.
मुख्यमंत्री बनने के बाद जमीन खरीद में 'ओवरड्राइव'
'द इंडियन एक्सप्रेस' में जय मजूमदार की पड़ताल बताती है कि सरकारी भूमि रिकॉर्ड्स और खतौनी (स्वामित्व दस्तावेजों) की गहन जांच से पता चलता है कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से उनके परिवार की रियल एस्टेट गतिविधियों में असाधारण तेजी आई है.
अधिग्रहण का पैमाना: दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के अंत तक की दो साल की अवधि में, यादव परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे.
क्षेत्रफल और वित्तीय लागत: इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ है, जिसकी अनुमानित रजिस्ट्री और घोषित कीमत 45 करोड़ रुपये है.
जमीन खरीदने वाले सदस्य: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ये संपत्तियां मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव, तथा चचेरे भाई गोविंद और नीलेश यादव द्वारा खरीदी गईं. ये खरीदारियां या तो सीधे तौर पर की गईं या परिवार द्वारा संचालित चार रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से की गईं.
यह पूरी रिपोर्ट मुख्य रूप से दो प्रमुख नीतिगत और नैतिक चिंताओं को रेखांकित करती है, जो सत्ता के अनुचित प्रभाव और हितों के टकराव की ओर इशारा करती हैं:
1) नई सड़क परियोजनाओं से सीधी निकटता
परिवार द्वारा खरीदी गई 168 एकड़ जमीन में से 111 एकड़ जमीन सीधे तौर पर उन सड़क विकास परियोजनाओं, नए निर्माणों या लेन विस्तार मार्गों के ठीक बगल में स्थित है, जिनकी घोषणा मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार द्वारा की गई थी.
यद्यपि 'उज्जैन मास्टर प्लान 2035' को मई 2023 में (यादव के मुख्यमंत्री बनने से कुछ महीने पहले) जारी किया गया था, लेकिन वह पिछले दो दशकों से उज्जैन के नीति-निर्माण ढांचे से गहराई से जुड़े रहे हैं. वह उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) के अध्यक्ष (2004-2010), मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) के प्रमुख (2011-2013) और 2013 से लगातार उज्जैन (दक्षिण) से विधायक रहे हैं.
स्थानीय रीयलटर्स का मानना है कि जनवरी 2024 के बाद घोषित नए रोड लिंक्स के कारण इन जमीनों की कीमत भविष्य में कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे इस शुरुआती निवेश पर भारी मुनाफा होना तय है.
2) मौजूदा लैंड बैंक का आक्रामक विस्तार
यादव परिवार का रियल एस्टेट साम्राज्य मुख्यमंत्री पद मिलने से पहले भी काफी बड़ा था. वर्ष 2021 से 2023 के बीच, जब मोहन यादव राज्य के शिक्षा मंत्री थे, तब उनके परिवार (जिसमें उनका बेटा वैभव और बहन कलावती भी शामिल हैं) के पास उज्जैन के आसपास 179 एकड़ के 108 प्लॉट पहले से मौजूद थे. परंतु, उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद इस खरीद की गति अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई, जो नीतिगत निर्णयों के पूर्व-ज्ञान या प्रशासनिक प्रभाव की आशंका पैदा करती है.
क्षेत्रवार संपत्तियों का भौगोलिक विवरण
उज्जैन के जिला कलेक्टर रौशन सिंह द्वारा चिह्नित किए गए विकास क्षेत्रों और यादव परिवार द्वारा खरीदे गए भूखंडों का भौगोलिक रुझान निम्नलिखित क्षेत्रों में सबसे स्पष्ट दिखाई देता है:
गंगेड़ी: यह क्षेत्र उज्जैन-बदनावर और उज्जैन-इंदौर राजमार्गों के मुख्य चौराहे (जंक्शन) के पास होने के कारण बेहद रणनीतिक है. यहाँ परिवार ने अप्रैल 2024 से कई अलग-अलग सौदों के माध्यम से 38 प्लॉटों में कुल 51 एकड़ जमीन खरीदी.
करड़िया-नवाखेड़ा: इस व्यस्त राजमार्ग क्रॉसिंग के दूसरी तरफ अक्टूबर 2024 में लगभग 9 एकड़ जमीन खरीदी गई.
करौंदिया: विकसित किए जा रहे पंचकोशी परिक्रमा मार्ग (नगझिरी से उंडासा) के समीप जुलाई 2025 में लगभग 8 एकड़ जमीन ली गई.
जयवंतपुरा: उज्जैन-मक्सी मार्ग के दक्षिणी हिस्से में, जिसे फोर-लेन किया जा रहा है, 2024-25 के दौरान 12 प्लॉटों में 6 एकड़ जमीन खरीदी गई.
चंदेसरा और उन्हेल: चंदेसरा में फरवरी 2025 में 9 एकड़ और नए उज्जैन-नागदा राजमार्ग के दोनों ओर स्थित उन्हेल में मई 2025 में 16 प्लॉटों के माध्यम से 29 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया.
मास्टर प्लान और भूमि उपयोग परिवर्तन का विवाद
'उज्जैन मास्टर प्लान 2035' के तहत कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक क्षेत्रों में बदलने की नीति का यादव परिवार को सीधा लाभ मिला है. मास्टर प्लान जारी होने से ठीक पहले (मार्च-अप्रैल 2023) परिवार ने सावरखेड़ी में 30 एकड़ जमीन खरीदी थी. उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद, परिवार ने परिवर्तित भूमि उपयोग वाले क्षेत्रों में 37 एकड़ और जमीन जोड़ी, जिसमें मध्य उज्जैन के पंड्याखेड़ी में खरीदी गई 18 एकड़ व्यावसायिक जमीन भी शामिल है.
राजनीतिक आरोप: कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया था कि मोहन यादव ने जानबूझकर उन क्षेत्रों के भूमि उपयोग को बदलवाया, जहां उनके परिवार के पास पहले से ही बड़ी जमीनें थीं. यद्यपि भारी जन-विरोध के बाद जुलाई 2023 में सरकार ने सावरखेड़ी की 367 एकड़ जमीन को वापस गैर-आवासीय घोषित कर दिया था, लेकिन मास्टर प्लान के अन्य हिस्सों में यह नीति प्रभावी रही.
कुंभ (सिंहस्थ) भूमि अधिग्रहण और किसानों का विरोध
वर्ष 2025 में एक तरफ जहां मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन में स्थायी कुंभ बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए स्थानीय किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि को 'पूल' (इकट्ठा) करने के प्रस्ताव पर भारी जन-विरोध और किसानों के तीखे आंदोलन का सामना कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ इसी अवधि के दौरान मुख्यमंत्री के परिवार और उनकी कंपनियों ने अपनी खरीद जारी रखते हुए 92 एकड़ में फैले 62 नए प्लॉट अपने नाम कर लिए.
यदि व्यक्तिगत स्वामित्व की बात करें, तो खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2023 के अपने चुनावी हलफनामे में 17 एकड़ सीधे तौर पर अपने नाम घोषित की थी. उनकी पत्नी सीमा यादव के पास 10.6 एकड़ जमीन सीधे तौर पर है. इसके अलावा, दोनों की एक पारिवारिक कंपनी 'सिद्धि विनायक डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड' (73% हिस्सेदारी) के पास 39.5 एकड़ जमीन थी, जिसमें से 12 एकड़ सितंबर 2024 में चचेरे भाई नीलेश को ट्रांसफर की गई.
बिल्डरों के साथ व्यावसायिक गठजोड़ और 'सांवरिया' ब्रांड
यादव परिवार केवल जमीन खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उसे बड़े पैमाने पर विकसित भी कर रहा है:
शांति महालोक बिल्डर्स के साथ समझौता: चचेरे भाई गोविंद यादव ने गंगेड़ी में खरीदी गई 41 एकड़ जमीन को विकास के लिए इंदौर के 'शांति महालोक बिल्डर्स' को सौंपा. इस समझौते के तहत बिल्डर अपने खर्च पर 24 महीने में प्रोजेक्ट विकसित करेगा और विकसित संपत्ति का 67.8 प्रतिशत या 60 प्रतिशत हिस्सा वापस भू-स्वामी (गोविंद यादव और पार्टनर्स) को सौंपेगा.
नीलेश यादव का 'सांवरिया' ब्रांड: दूसरे चचेरे भाई नीलेश यादव 'श्री अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन' के माध्यम से खुद को एक बड़े डेवलपर के रूप में स्थापित कर चुके हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश रेरा (आरईआरए-रियल एस्टेट RERA) के तहत चार बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड कराए हैं: 'श्री सांवरिया धाम' (करड़िया - 7.5 एकड़), 'सांवरिया ड्रीम्स' (चंदेसरा - 5 एकड़), 'सांवरिया ग्रीन' (ढेढिया - 12.13 एकड़), और 'श्री सांवरिया रेजीडेंसी' (नानाखेड़ा - 3.7 एकड़).
सरकार और यादव परिवार का आधिकारिक पक्ष
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया, लेकिन सरकार और परिवार के सूत्रों ने इस प्रकार अपना पक्ष रखा:
प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क: नाम न छापने की शर्त पर वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के विस्तारित परिवार के व्यवसाय को मुख्यमंत्री के राजनीतिक उत्थान से जोड़ना अनुचित है. उनका तर्क है कि तकनीकी रूप से मुख्यमंत्री के तात्कालिक परिवार में केवल उनकी पत्नी, बेटा और बहू आते हैं, जिनके नाम पर कोई बड़ी विसंगति नहीं है.
पारिवारिक सदस्यों का बचाव: गोविंद यादव के बेटे अनंत यादव ने तर्क दिया कि उनका परिवार 2010 से ही रियल एस्टेट व्यवसाय में है. एक निजी नागरिक के रूप में उन्हें किसी भी जमीन को खरीदने या बेचने का पूरा संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगेड़ी के सौदे वास्तव में 2020 के हैं जब मोहन यादव मंत्री भी नहीं थे, और राजमार्ग का काम 2019 में ही स्वीकृत हो चुका था, इसलिए इसे वर्तमान राजनीतिक स्थिति से जोड़ना गलत है.
कुलमिलाकर, यह पूरी रिपोर्ट उज्जैन में चल रहे बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचे के विकास और उसमें एक रसूखदार राजनीतिक परिवार की गहरी व्यावसायिक संलिप्तता के अंतर्संबंधों को उजागर करती है. हालांकि परिवार इसे एक स्वतंत्र और पुराना व्यापार बताता है, लेकिन नीतिगत घोषणाओं के समय और जमीनों की रणनीतिक लोकेशंस के कारण यह मामला प्रशासनिक औचित्य के सिद्धांतों के तहत जांच के दायरे में आता है.

