भारत के पेट्रोल कार मालिक ई20 मिश्रण कार्यक्रम के लिए तैयार नहीं

'लोकलसर्कल्स' द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2023 से पहले निर्मित पेट्रोल वाहनों के मालिक देश भर में ई20 पेट्रोल के लागू होने के बाद ईंधन दक्षता (माइलेज) में गिरावट और रखरखाव (मेंटेनेंस) संबंधी बढ़ती समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं. पिछले एक महीने में 10% से अधिक माइलेज घटने और वाहनों में टूट-फूट बढ़ने की बात कहने वाले उत्तरदाताओं का अनुपात तेजी से बढ़ा है.

सर्वेक्षण के अनुसार, 2023 से पहले के पेट्रोल वाहनों के 66% मालिकों ने कहा कि 2025 की शुरुआत से उनके वाहनों की ईंधन दक्षता में 10% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि मई 2026 में किए गए इसी तरह के एक सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 45% था. इसी अवधि के दौरान असामान्य टूट-फूट या मरम्मत की बढ़ती आवश्यकताओं की शिकायत करने वाले उत्तरदाताओं की हिस्सेदारी भी 29% से बढ़कर 55% हो गई.

‘द वायर’ के अनुसार, यह निष्कर्ष भारत द्वारा अप्रैल 2025 में देश भर में ई20 पेट्रोल के रोलआउट को पूरा करने के ठीक एक साल बाद आए हैं, जिसके तहत भारत ने अपने मूल 2030 के लक्ष्य से छह साल पहले ही 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था. यह सर्वेक्षण केंद्र सरकार द्वारा उच्च इथेनॉल मिश्रणों की दिशा में लगातार दिए जा रहे जोर और हाल ही में ई22 से ई30 पेट्रोल को कवर करने वाले ईंधन मानकों की अधिसूचना के समय के साथ मेल खाता है.

लोकलसर्कल्स के इस सर्वेक्षण को 305 जिलों में 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के मालिकों से 44,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं. माइलेज के सवालों का जवाब देने वाले 22,100 उत्तरदाताओं में से 23% ने 20% से अधिक की गिरावट दर्ज की, अन्य 23% ने 15%-20% की गिरावट और 20% ने 10%-15% की गिरावट की बात कही. कुल मिलाकर, 66% ने कहा कि उनके माइलेज में 10% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि मई में यह संख्या 45% थी.

टूट-फूट से जुड़े सवालों के जवाब 22,668 उत्तरदाताओं ने दिए. इनमें से 24% ने मरम्मत में बड़े पैमाने पर वृद्धि, 21% ने मध्यम वृद्धि और 10% ने मामूली वृद्धि की रिपोर्ट दी. कुल मिलाकर, 55% ने 2025 की शुरुआत से टूट-फूट या मरम्मत की आवश्यकताएं बढ़ने की बात कही, जो पिछले महीने के सर्वेक्षण में दर्ज 29% से लगभग दोगुनी है.

रिपोर्ट में माइलेज में आई इस गिरावट का मुख्य कारण पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल के कम ऊर्जा घनत्व को बताया गया है. इसमें तर्क दिया गया है कि कई पुराने वाहनों को ई5 या ई10 ईंधन के लिए डिज़ाइन किया गया था और उनमें ई20 ईंधन के साथ दहन को अनुकूलित करने के लिए आवश्यक इंजन प्रबंधन प्रणाली की कमी है, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की खपत बढ़ सकती है.

टूट-फूट के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि इथेनॉल नमी को सोख सकता है, जिससे यह ईंधन प्रणालियों के धातु और रबर के पुर्जों को प्रभावित कर सकता है जो मूल रूप से उच्च इथेनॉल मिश्रणों के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे. सर्वेक्षण के अनुसार, इससे पुराने वाहनों में समय के साथ जंग, सील और होज़ (पाइप) का खराब होना और रखरखाव की आवश्यकताएं बढ़ सकती हैं.

यह सर्वेक्षण पुराने वाहनों पर इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के प्रभाव को लेकर चल रही बहस के बीच आया है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि ई20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाते हैं या यह कीड़ों को आकर्षित करता है. मंत्रालय ने ऐसी सामग्री को भ्रामक और साक्ष्य-रहित बताया है. मंत्रालय का रुख है कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने की कोई शिकायत सामने नहीं आई है.

लोकलसर्कल्स ने कहा कि उसके निष्कर्ष वाहन मालिकों के वास्तविक अनुभवों पर आधारित हैं और इन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले भ्रामक वीडियो समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए. संगठन ने स्पष्ट किया कि यह सर्वेक्षण असत्यापित ऑनलाइन दावों के बजाय विशेष रूप से मापने योग्य मापदंडों जैसे कि माइलेज और रखरखाव पर केंद्रित था.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हालांकि सरकार ने अप्रैल 2026 से ई20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 होना अनिवार्य कर दिया है और ऑटोमोबाइल निर्माता पुराने वाहनों के लिए 'रेट्रोफिट किट' (बदलाव करने वाले उपकरण) तैयार कर रहे हैं, फिर भी उपभोक्ताओं की चिंताएं बनी हुई हैं.

सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर, लोकलसर्कल्स ने नीति-निर्माताओं से आग्रह किया है कि वे 2023 से पहले के पेट्रोल वाहनों के मालिकों को ई5 या ई10 जैसे कम इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन खरीदने का विकल्प देने पर विचार करें, जब तक कि ई20 के दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता.

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